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GK24
भूगोलमध्यम

कैडेस्ट्रल अर्थात भू-अभिलेख मानचित्र मुख्यतः किस प्रयोजन से बनाए जाते हैं?

  1. A.भूखंडों की सीमा और स्वामित्व का अभिलेख रखने के लिए
  2. B.किसी देश में वर्षा का वितरण दिखाने के लिए
  3. C.महाद्वीपों के बीच वायुमार्ग दिखाने के लिए
  4. D.किसी पर्वत श्रेणी का उच्चावच छोटे मापक पर दिखाने के लिए

सही उत्तर

A. भूखंडों की सीमा और स्वामित्व का अभिलेख रखने के लिए

व्याख्या

सही उत्तर A है। कैडेस्ट्रल मानचित्र गाँव या नगर का बहुत बड़े मापक का मानचित्र है, जो भूखंडों, खेतों, उनकी सीमाओं तथा स्वामियों को दर्ज करने के लिए बनता है और भू-राजस्व अभिलेख तथा संपत्ति के पंजीकरण का आधार होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि वर्षा का मानचित्र विषयक या वितरण मानचित्र है, जो छोटे मापक पर समवर्षा रेखाओं से बनता है। विकल्प C गलत है क्योंकि वायुमार्ग छोटे मापक के मार्ग अथवा एटलस मानचित्रों पर दिखाए जाते हैं, जहाँ धरातल का विवरण जानबूझकर छोड़ा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि उच्चावच स्थलाकृतिक मानचित्रों पर समोच्च रेखाओं से दिखाया जाता है, और छोटा मापक शब्द इसे दुगुना गलत बनाता है, क्योंकि कैडेस्ट्रल मानचित्र नियमित प्रयोग के सबसे बड़े मापक वाले मानचित्र हैं। कैडेस्ट्रल शब्द का अर्थ ही संपत्ति का पंजिका अभिलेख है, और यही इसे याद रखने का सरल सूत्र है।

पूरा लेख पढ़ें: मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेप और सुदूर संवेदन: नोट्स

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Q1.भूगोलआसान

किसी मानचित्र का प्रदर्शक भिन्न 1:50,000 लिखा है। इसका अर्थ क्या है?

  1. A.मानचित्र की एक इकाई धरातल पर उसी इकाई के 50,000 के बराबर है
  2. B.मानचित्र का एक सेंटीमीटर धरातल पर 50,000 किलोमीटर दर्शाता है
  3. C.मानचित्र 50,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र दिखाता है
  4. D.मानचित्र को वायु फोटोचित्र से 50,000 गुना छोटा किया गया है
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मानचित्र की एक इकाई धरातल पर उसी इकाई के 50,000 के बराबर है

व्याख्या

सही उत्तर A है। प्रदर्शक भिन्न इकाई रहित शुद्ध अनुपात है, इसलिए मानचित्र पर लंबाई की एक इकाई धरातल पर उसी इकाई के पचास हजार के बराबर होती है; इसे सेंटीमीटर, इंच अथवा किसी भी इकाई में पढ़ा जा सकता है, इसीलिए यह सर्वत्र समझा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें इकाइयां मिला दी गई हैं: ऐसी शीट पर एक सेंटीमीटर पचास हजार सेंटीमीटर अर्थात आधा किलोमीटर दर्शाता है, पचास हजार किलोमीटर नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रदर्शक भिन्न यह नहीं बताता कि शीट कितना क्षेत्र आवरित करती है; वह कागज के आकार पर निर्भर है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह भिन्न मानचित्र की तुलना धरातल से करती है, फोटोचित्र से नहीं, और मानचित्र भू-सर्वेक्षण से भी बन सकता है। इसी कारण प्रदर्शक भिन्न को अंतरराष्ट्रीय मापक भी कहा जाता है, क्योंकि कोई भी देश उसे अपनी मापन पद्धति में पढ़ सकता है और मानचित्र का अर्थ वही रहता है।

Q2.भूगोलपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPSSSC JE Civil 2015 Paper 2कठिन

1:10,000 मापक वाले मानचित्र के लिए उपयुक्त समोच्च अंतराल कितना होता है?

  1. A.2 मीटर
  2. B.5 मीटर
  3. C.10 मीटर
  4. D.20 मीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 2 मीटर

व्याख्या

सही उत्तर A, 2 मीटर है। किसी शीट के लिए चुना गया समोच्च अंतराल मुख्यतः उसके मापक तथा धरातल के उच्चावच पर निर्भर करता है: बड़े मापक का मानचित्र रेखाओं को एक-दूसरे में मिलने दिए बिना निकट-निकट समोच्च रेखाएं दिखा सकता है, इसलिए छोटा अंतराल संभव और वांछनीय होता है। एक बटे दस हजार का मापक विस्तृत सर्वेक्षण तथा अभियांत्रिकी कार्य में प्रयुक्त बड़ा मापक है, जिसके लिए दो मीटर का अंतराल सामान्य चुनाव है। विकल्प B, C और D गलत हैं क्योंकि पाँच, दस और बीस मीटर के अंतराल क्रमशः छोटे मापकों के लिए उपयुक्त होते हैं; एक बटे दस हजार की शीट पर इतना बड़ा अंतराल ढालों को लगभग खाली छोड़ देगा और मापक से मिलने वाली शुद्धता व्यर्थ हो जाएगी। स्मरणीय नियम यह है कि मापक जितना छोटा और धरातल जितना विषम, समोच्च अंतराल उतना बड़ा।

Q3.भूगोलमध्यम

1569 का मर्केटर प्रक्षेप किस वर्ग का है और कौन सा गुण सुरक्षित रखता है?

  1. A.शंक्वाकार, और क्षेत्रफल सुरक्षित रखता है
  2. B.बेलनाकार, और आकार सुरक्षित रखता है
  3. C.खमध्य, और दूरी सुरक्षित रखता है
  4. D.शंक्वाकार, और दिशा केवल ध्रुवों पर सुरक्षित रखता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बेलनाकार, और आकार सुरक्षित रखता है

व्याख्या

सही उत्तर B, बेलनाकार, और आकार सुरक्षित रखता है है। मर्केटर बेलनाकार प्रक्षेप है, जिस पर अक्षांश और देशांतर दोनों सरल रेखाएं हैं और समकोण पर मिलती हैं; यह ऑर्थोमॉर्फिक अर्थात शुद्ध आकृति वाला है, जिससे स्थानीय आकार सही रहते हैं और स्थिर दिक्मान की रंब रेखा सरल रेखा बनती है। विकल्प A दोनों दृष्टि से गलत है: प्रक्षेप शंक्वाकार नहीं है और उच्च अक्षांशों में क्षेत्रफल बहुत बढ़ा दिखाता है, जो उस पर सबसे बड़ी आपत्ति है। विकल्प C गलत है क्योंकि खमध्य या दिगंशीय प्रक्षेप ग्लोब को स्पर्श करने वाले समतल पर बनते हैं और मुख्यतः ध्रुवीय प्रदेशों के लिए प्रयुक्त होते हैं, तथा मर्केटर दूरियां शुद्ध नहीं रखता। विकल्प D गलत है क्योंकि इसमें गलत वर्ग और ऐसा गुण जोड़ा गया है जिसका यह प्रक्षेप दावा नहीं करता।

Q4.भूगोलआसान

मानचित्र पर समवर्षा रेखा किन स्थानों को जोड़ती है?

  1. A.समान तापमान वाले
  2. B.समान वर्षा वाले
  3. C.समान वायुदाब वाले
  4. D.समान सूर्यप्रकाश अवधि वाले
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समान वर्षा वाले

व्याख्या

सही उत्तर B, समान वर्षा वाले है। समवर्षा रेखा उन स्थानों को जोड़ती है जहाँ निर्धारित अवधि में समान मात्रा में वर्षा होती है, और भारत के वर्षा मानचित्र इसी रेखा से आर्द्र तथा शुष्क पेटियां दिखाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि समान तापमान वाली रेखा समताप रेखा कहलाती है, जो तापमान और जलवायु मानचित्रों में प्रयुक्त होती है। विकल्प C गलत है क्योंकि समान वायुदाब वाली रेखा समदाब रेखा है, जिस पर मौसम मानचित्र आधारित होते हैं और जिससे दाब प्रवणता तथा पवन पढ़ी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि समान सूर्यप्रकाश अवधि वाली रेखा समधूप रेखा है, और परीक्षा में यही जोड़ा समवर्षा रेखा से सबसे अधिक भ्रमित करता है। दो अन्य स्मरणीय रेखाएं हैं मेघाच्छादन की सममेघ रेखा और जल गहराई की समगहराई रेखा।

Q5.भूगोलआसान

स्थलाकृतिक शीट पर निकट-निकट खिंची समोच्च रेखाएं किसका संकेत देती हैं?

  1. A.मंद ढाल
  2. B.तीव्र ढाल
  3. C.मैदान
  4. D.पठार का शीर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीव्र ढाल

व्याख्या

सही उत्तर B, तीव्र ढाल है। चूंकि एक शीट पर समोच्च अंतराल स्थिर रहता है, दो रेखाओं के बीच की क्षैतिज दूरी यह बताती है कि उस निश्चित ऊँचाई तक चढ़ने के लिए कितनी दूर चलना होगा; कम दूरी का अर्थ है तेज चढ़ाई अर्थात तीव्र ढाल। विकल्प A गलत है क्योंकि मंद ढाल पर रेखाएं दूर-दूर फैली रहती हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि मैदान में समोच्च रेखाएं बहुत कम और बहुत दूर-दूर होती हैं, क्योंकि ऊँचाई में अंतर कम है। विकल्प D गलत है क्योंकि पठार का समतल शीर्ष दूर-दूर अथवा अनुपस्थित रेखाओं से दिखता है, और निकट रेखाएं केवल उसके तीव्र किनारों या कगार पर आती हैं। जो रेखाएं वस्तुतः मिल जाती हैं वे कगार या लंबवत ढाल बताती हैं, और ऊपरी दिशा में इंगित वी आकार घाटी बताता है।