वायुमंडल और पवनें: परतें, दाब पेटियाँ और जेट धाराएँ
परीक्षा के लिए वायुमंडल और पवनों के नोट्स: गैसें और परतें, दाब पेटियाँ, व्यापारिक पवनें, मानसून, स्थानीय पवनें, कोरिऑलिस प्रभाव और जेट धाराएँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

वायुमंडल गैसों का वह आवरण है जिसे पृथ्वी ने अपने गुरुत्व से बाँध रखा है। यही हमें साँस लेने के लिए ऑक्सीजन और पौधों को कार्बन डाइऑक्साइड देता है, पराबैंगनी विकिरण को छानता है, हरितगृह प्रभाव से धरातल को गर्म रखता है और वह नमी तथा ऊष्मा ढोता है जिससे मौसम बनता है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पवनों, दाब पेटियों और जेट धाराओं से जुड़े लगभग सभी प्रश्न इसी संरचना और परतों के तथ्यों से बनते हैं, इसलिए दोनों को साथ पढ़ना ठीक रहता है।
वायुमंडल की संरचना
धरातल के पास शुष्क वायु में आयतन के हिसाब से लगभग 78 प्रतिशत नाइट्रोजन और लगभग 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है, और यही दोनों मिलकर उसका लगभग पूरा भाग बनाती हैं। आर्गन एक प्रतिशत से कुछ कम है और कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.04 प्रतिशत, जिसका अंश जीवाश्म ईंधन जलाने से बढ़ता जा रहा है। जलवाष्प शुष्क वायु में नहीं गिनी जाती पर यही सबसे परिवर्तनशील गैस है, जो मरुस्थल के ऊपर लगभग शून्य और गर्म महासागर के ऊपर लगभग चार प्रतिशत तक हो सकती है; सारी वर्षा इसी से होती है और यह पृथ्वी से लौटने वाली ऊष्मा भी सोखती है। ओजोन मात्रा में बहुत कम है पर पराबैंगनी विकिरण सोखने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। धूल और नमक के कण संघनन के नाभिक बनते हैं, इसीलिए नगर की वायु खुले समुद्र की वायु से अधिक धुँधली रहती है।
| गैस | शुष्क वायु में आयतन के अनुसार अंश |
|---|---|
| नाइट्रोजन | लगभग 78 प्रतिशत |
| ऑक्सीजन | लगभग 21 प्रतिशत |
| आर्गन | एक प्रतिशत से कुछ कम |
| कार्बन डाइऑक्साइड | लगभग 0.04 प्रतिशत |
वायुमंडल की परतें
ऊँचाई के साथ तापमान किस प्रकार बदलता है, इसी आधार पर वायुमंडल को परतों में बाँटा जाता है। सबसे नीचे का क्षोभमंडल भूमध्य रेखा पर लगभग 18 किलोमीटर और ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर तक जाता है, क्योंकि भूमध्य रेखा की गर्म वायु फैलकर ऊपर उठती है। इसमें तापमान सामान्य ह्रास दर से घटता है, जो लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर है, और सभी बादल, वर्षा तथा तूफान यहीं बनते हैं; इसकी ऊपरी सीमा क्षोभसीमा कहलाती है। इसके ऊपर समतापमंडल में ओजोन परत है, इसलिए यहाँ ऊँचाई के साथ तापमान घटने के बजाय बढ़ता है; वायु स्थिर और बादलरहित रहती है, इसीलिए जेट विमान इसके निचले भाग में उड़ना पसंद करते हैं। मध्यमंडल में तापमान फिर घटता है और मध्यसीमा पर पूरे वायुमंडल का न्यूनतम तापमान मिलता है; उल्काएँ इसी परत में जलकर नष्ट होती हैं। उसके ऊपर तापमंडल है, जिसमें आयनित परतें रेडियो तरंगों को पृथ्वी की ओर लौटाती हैं और जहाँ तापमान तेजी से बढ़ता है, और उससे आगे बाह्यमंडल अंतरिक्ष में विलीन हो जाता है।
दाब पेटियाँ और ग्रहीय पवनें
असमान तापन से प्रत्येक गोलार्ध में चार दाब पेटियाँ बनती हैं। भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी, जिसे शांत पेटी या डोलड्रम कहते हैं, उठती हुई वायु और शांति की पेटी है; लगभग तीस अंश पर उपोष्ण उच्च दाब पेटी, जिसे अश्व अक्षांश कहते हैं, उतरती हुई वायु की पेटी है जहाँ बड़े मरुस्थल मिलते हैं; लगभग साठ अंश पर उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी अभिसरण और तूफानों की पेटी है; और ध्रुवीय उच्च दाब पेटी ठंडी भारी वायु की पेटी है। पवनें उच्च दाब से निम्न दाब की ओर चलती हैं, पर कभी सीधी रेखा में नहीं, क्योंकि पृथ्वी का घूर्णन उन्हें उत्तरी गोलार्ध में दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है। यही कोरिऑलिस प्रभाव है, जिसे फेरल का नियम कहा जाता है। बाइज बैलेट का नियम इसी बात को दूसरे ढंग से कहता है कि उत्तरी गोलार्ध में पवन की ओर पीठ करके खड़े होने पर निम्न दाब बाईं ओर होता है।
इन्हीं पेटियों से स्थायी या ग्रहीय पवनें निकलती हैं। व्यापारिक पवनें उपोष्ण उच्च दाब से भूमध्यरेखीय निम्न दाब की ओर चलती हैं, उत्तरी गोलार्ध में उत्तर पूर्वी और दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिण पूर्वी रूप में। पछुआ पवनें उपोष्ण उच्च दाब से उपध्रुवीय निम्न दाब की ओर चलती हैं और दक्षिणी महासागर पर इतनी प्रबल हो जाती हैं कि उन्हें गरजती चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखता साठा कहा जाता है। ध्रुवीय पूर्वी पवनें ध्रुवीय उच्च दाब से बाहर की ओर चलती हैं।
मौसमी और स्थानीय पवनें
मौसमी या सामयिक पवनें ऋतु या दिन के साथ दिशा बदल लेती हैं। मानसून इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो ग्रीष्म और शीत के बीच पलट जाता है क्योंकि स्थल जल की तुलना में तेजी से गर्म और ठंडा होता है। यही अंतर छोटे पैमाने पर दिन में समुद्री समीर और रात में स्थल समीर देता है, तथा पर्वतों में दिन में घाटी समीर ऊपर की ओर और रात में पर्वत समीर नीचे की ओर चलता है। स्थानीय पवनें हर पाठ्यक्रम में पूछी जाती हैं और इन्हें तालिका के रूप में याद रखना सबसे अच्छा है।
| पवन | क्षेत्र | प्रकृति |
|---|---|---|
| लू | उत्तर भारत के मैदान | मई और जून में गर्म और शुष्क |
| चिनूक | रॉकी की पूर्वी ढाल | गर्म और शुष्क, हिम भक्षी |
| फ्यॉन | आल्प्स की उत्तरी ढाल | गर्म और शुष्क |
| मिस्ट्रल | फ्रांस की रोन घाटी | ठंडी और शुष्क |
| सिरोक्को | सहारा से भूमध्य सागर | गर्म और धूल भरी |
| हरमट्टन | पश्चिमी अफ्रीका | शुष्क, जिसे डॉक्टर कहा जाता है |
जेट धाराएँ
जेट धाराएँ ऊपरी क्षोभमंडल में अत्यंत तीव्र पवनों की सँकरी पट्टियाँ हैं। उपोष्ण पछुआ जेट और ध्रुवीय वाताग्र जेट पश्चिम से पूर्व की ओर चलती हैं और मध्य अक्षांशों की मौसम प्रणालियों को दिशा देती हैं। भारत में शीत ऋतु में पछुआ जेट हिमालय के दक्षिण रहती है और पश्चिमी विक्षोभ लाती है। ग्रीष्म में यह तिब्बत के पठार के उत्तर खिसक जाती है और प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर पूर्वी जेट बनती है, जिसका संबंध दक्षिण पश्चिम मानसून के प्रस्फोट से जोड़ा जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के निश्चित जोड़े पूछे जाते हैं: परत और उसका गुण, दाब पेटी और उसका दूसरा नाम, तथा स्थानीय पवन के साथ उसका क्षेत्र और प्रकृति अर्थात गर्म या ठंडी। सबसे आम भ्रम चिनूक और फ्यॉन में होता है, जो अलग अलग पर्वतों पर एक ही प्रकार की गर्म शुष्क पवनें हैं, फिर मिस्ट्रल और सिरोक्को में, जिनका तापमान अलग है, और डोलड्रम तथा अश्व अक्षांश में, जो दोनों शांत पेटियाँ हैं पर अलग अक्षांश और दाब की। संख्यात्मक प्रश्न ताप ह्रास दर और नाइट्रोजन के अंश पर आते हैं, तथा कठिन प्रश्न पूछते हैं कि किस ऋतु में भारत के ऊपर कौन सी जेट धारा रहती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सर्वाधिक मात्रा वाली गैस | नाइट्रोजन, शुष्क वायु का लगभग 78 प्रतिशत |
|---|---|
| सामान्य ताप ह्रास दर | क्षोभमंडल में लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर |
| क्षोभमंडल की ऊँचाई | भूमध्य रेखा पर लगभग 18 किलोमीटर, ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर |
| ओजोन परत | समतापमंडल में, जहाँ यह पराबैंगनी विकिरण सोखती है |
| सबसे ठंडी परत | मध्यमंडल, इसकी ऊपरी सीमा मध्यसीमा पर |
| रेडियो तरंगें लौटाने वाली परत | तापमंडल का आयनित भाग, आयनमंडल |
| भूमध्य रेखा की शांत पेटी | डोलड्रम अर्थात भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी |
| अश्व अक्षांश | लगभग तीस अंश पर उपोष्ण उच्च दाब पेटी |
| विक्षेपण का नियम | फेरल का नियम, जो पृथ्वी के घूर्णन के कोरिऑलिस प्रभाव से बनता है |
| हिम भक्षी पवन | रॉकी पर्वत की पूर्वी ढाल की चिनूक |
| डॉक्टर कहलाने वाली पवन | पश्चिमी अफ्रीका की हरमट्टन |
| गरजती चालीसा | दक्षिणी महासागर में चालीस अंश दक्षिण के पास की प्रबल पछुआ पवनें |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पराबैंगनी विकिरण सोखने वाली ओजोन परत वायुमंडल की किस परत में पाई जाती है?
- A.क्षोभमंडल
- B.समतापमंडल
- C.मध्यमंडल
- D.तापमंडल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समतापमंडल
व्याख्या
सही उत्तर B, समतापमंडल है। ओजोन मुख्यतः समतापमंडल के निचले और मध्य भाग में केंद्रित है, और पराबैंगनी विकिरण सोखने के कारण इस परत का तापमान ऊँचाई के साथ घटने के बजाय बढ़ता है। यही अवशोषण धरातल के जीवन को हानिकारक विकिरण से बचाता है, और परत के स्थिर होने से यहाँ बादल तथा अशांति नहीं रहती, इसीलिए विमान इसके निचले भाग में उड़ते हैं।
विकल्प A क्षोभमंडल मौसम की परत है, जहाँ तापमान ऊँचाई के साथ घटता है और सभी बादल तथा वर्षा बनते हैं। विकल्प C मध्यमंडल समतापमंडल के ऊपर है; वहाँ गैस बहुत कम है, तापमान सबसे नीचा रहता है और उल्काएँ जलती हैं। विकल्प D तापमंडल और भी ऊपर है और अपनी आयनित परतों के लिए जाना जाता है, जो रेडियो तरंगों को लौटाती हैं, ओजोन के लिए नहीं।
क्षोभमंडल में तापमान की सामान्य ह्रास दर लगभग कितनी होती है?
- A.6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर
- B.1 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर
- C.10 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर
- D.0.65 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर
व्याख्या
सही उत्तर A, लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर है। क्षोभमंडल में ऊपर उठने पर वायु का तापमान औसतन इसी दर से घटता है, और इसी से समझ आता है कि पर्वतीय स्थल मैदानों से ठंडे क्यों रहते हैं और उष्ण कटिबंध में भी ऊँची चोटियों पर हिम क्यों टिकी रहती है।
विकल्प B बहुत कम है और उससे क्षोभमंडल का ऊपरी भाग वास्तविकता से कहीं अधिक गर्म रह जाता। विकल्प C शुष्क रुद्धोष्म दर के निकट है, जिस दर से ऊपर उठता हुआ वायु का कोई खंड फैलकर ठंडा होता है; यह स्थिर वायुमंडल की ह्रास दर से अलग विचार है और यही सबसे बड़ा भ्रम है। विकल्प D सही आँकड़े में दशमलव खिसकाकर बनाया गया विकल्प है। ध्यान रहे कि यह दर औसत है और ठंडी साफ रात में व्युत्क्रमण से धरातल के पास तापमान ऊँचाई के साथ बढ़ भी सकता है।
पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने वाली उल्काएँ मुख्यतः किस परत में जलकर नष्ट होती हैं?
- A.समतापमंडल
- B.मध्यमंडल
- C.तापमंडल
- D.बाह्यमंडल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मध्यमंडल
व्याख्या
सही उत्तर B, मध्यमंडल है। यहाँ वायु विरल होने पर भी इतनी सघन है कि ब्रह्मांडीय वेग से आती वस्तु को घर्षण से गर्म कर दे, इसलिए अधिकांश उल्काएँ इसी परत में चमककर नष्ट हो जाती हैं और धरातल से टूटते तारे के रूप में दिखती हैं। इसी परत की ऊपरी सीमा मध्यसीमा पर वायुमंडल का न्यूनतम तापमान मिलता है।
विकल्प A समतापमंडल मध्यमंडल के नीचे है; वहाँ तक पहुँचते पहुँचते उल्का प्रायः जल चुकी होती है। विकल्प C तापमंडल ऊपर है और इतना विरल है कि अणु भले ही बहुत ऊर्जावान हों, आती हुई वस्तु को नष्ट करने के लिए पर्याप्त वायु नहीं होती। विकल्प D बाह्यमंडल सबसे बाहरी सीमांत है, जहाँ वायुमंडल अंतरिक्ष में मिल जाता है और उपग्रह लगभग बिना अवरोध के परिक्रमा करते हैं।
शुष्क वायु में आयतन के अनुसार सबसे बड़ा भाग किस गैस का होता है?
- A.ऑक्सीजन
- B.नाइट्रोजन
- C.आर्गन
- D.कार्बन डाइऑक्साइड
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नाइट्रोजन
व्याख्या
सही उत्तर B, नाइट्रोजन है, जो शुष्क वायु का आयतन के अनुसार लगभग 78 प्रतिशत भाग बनाती है। यह तुलनात्मक रूप से निष्क्रिय है, इसलिए ऑक्सीजन को तनु करके दहन को धीमा रखती है, और जीवों तक मुख्यतः नाइट्रोजन चक्र के माध्यम से पहुँचती है, जिसमें जीवाणु इसे उपयोगी रूप में स्थिर करते हैं।
विकल्प A ऑक्सीजन लगभग 21 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है; यह श्वसन और दहन के लिए आवश्यक है, पर जो छात्र मात्रा के बजाय महत्व देखकर उत्तर देता है वह चूक जाता है। विकल्प C आर्गन वायु की निष्क्रिय गैसों में सबसे अधिक है, फिर भी एक प्रतिशत से कम। विकल्प D कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 0.04 प्रतिशत ही है, फिर भी मात्रा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लौटती ऊष्मा सोखकर हरितगृह प्रभाव चलाती है और इसका अंश बढ़ रहा है।
हिम भक्षी कहलाने वाली गर्म और शुष्क स्थानीय पवन किस क्षेत्र में चलती है?
- A.उत्तरी अमेरिका में रॉकी की पूर्वी ढाल
- B.यूरोप में आल्प्स की उत्तरी ढाल
- C.अर्जेंटीना में एंडीज की पूर्वी ढाल
- D.सहारा का उत्तरी किनारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्तरी अमेरिका में रॉकी की पूर्वी ढाल
व्याख्या
सही उत्तर A, रॉकी पर्वत की पूर्वी ढाल है। यह पवन चिनूक कहलाती है। यह प्रतिपवन ढाल पर नीचे उतरती है, उतरते समय दब कर गर्म हो जाती है और कुछ ही घंटों में तापमान बहुत बढ़ा देती है; इससे हिम पिघल या वाष्पित हो जाती है, इसीलिए पशुपालक इसे हिम भक्षी कहते हैं क्योंकि इससे मवेशियों के लिए घास उघड़ जाती है।
विकल्प B फ्यॉन का क्षेत्र है, जो ठीक इसी प्रकार और इसी कारण बनने वाली पवन है, पर यहाँ नाम चिनूक पूछा गया है और दोनों को मिला देना सबसे आम गलती है। विकल्प C में एंडीज से उतरने वाली जोंडा पवन चलती है। विकल्प D सिरोक्को का उद्गम क्षेत्र है, जो सहारा से भूमध्य सागर पार करती गर्म और धूल भरी पवन है, पर्वत से उतरने वाली इस प्रकार की पवन नहीं।
मई और जून में उत्तर भारत के मैदानों पर चलने वाली गर्म और शुष्क पवन क्या कहलाती है?
- A.लू
- B.फ्यॉन
- C.मिस्ट्रल
- D.बोरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लू
व्याख्या
सही उत्तर A, लू है। यह ग्रीष्म की चरम अवस्था में उत्तर भारत और पाकिस्तान के मैदानों पर दिन में चलने वाली प्रबल, गर्म और शुष्क पवन है, जो तापमान तेजी से बढ़ा देती है और लू लगने का कारण बनती है, तथा सूर्यास्त के बाद शांत पड़ जाती है। यह ग्रीष्म ऋतु की स्थानीय पवन है और मानसून के आते ही समाप्त हो जाती है।
विकल्प B फ्यॉन आल्प्स की गर्म शुष्क पवन है, जो पर्वत से नीचे उतरती वायु से बनती है। विकल्प C मिस्ट्रल फ्रांस की रोन घाटी से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली ठंडी और शुष्क पवन है। विकल्प D बोरा भी ठंडी पवन है, जो एड्रियाटिक तट पर उत्तर पूर्व से चलती है। अंतिम दोनों ठंडी स्थानीय पवनों के उदाहरण हैं और इसीलिए भ्रम के लिए रखे जाते हैं।
पवनों का उत्तरी गोलार्ध में दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाना किस नियम से बताया जाता है?
- A.फेरल का नियम
- B.बाइज बैलेट का नियम
- C.हेडली का नियम
- D.चार्ल्स का नियम
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सही उत्तर: A. फेरल का नियम
व्याख्या
सही उत्तर A, फेरल का नियम है। यह पृथ्वी के घूर्णन से उत्पन्न विक्षेपण अर्थात कोरिऑलिस प्रभाव को बताता है, जिससे प्रत्येक स्वतंत्र गतिशील वस्तु उत्तरी गोलार्ध में अपने मार्ग के दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती है। यह विक्षेपण भूमध्य रेखा पर शून्य होता है और ध्रुवों की ओर बढ़ता जाता है, इसीलिए भूमध्य रेखा के बिल्कुल पास चक्रवात नहीं बनते।
विकल्प B बाइज बैलेट का नियम इससे जुड़ा पर अलग है: उत्तरी गोलार्ध में पवन की ओर पीठ करके खड़े होने पर निम्न दाब बाईं ओर और उच्च दाब दाहिनी ओर होता है। विकल्प C इस प्रकार का कोई नियम नहीं है; हेडली का नाम उष्ण कटिबंधीय परिसंचरण की हेडली कोशिका से जुड़ा है। विकल्प D चार्ल्स का नियम भौतिकी का है और स्थिर दाब पर गैस के आयतन तथा तापमान का संबंध बताता है।
फ्रांस की रोन घाटी से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली ठंडी स्थानीय पवन कौन सी है?
- A.मिस्ट्रल
- B.सिरोक्को
- C.हरमट्टन
- D.खमसिन
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सही उत्तर: A. मिस्ट्रल
व्याख्या
सही उत्तर A, मिस्ट्रल है। यह ठंडी, शुष्क और प्रायः प्रचंड पवन है जो दक्षिणी फ्रांस में उत्तर से रोन घाटी होते हुए लायन की खाड़ी की ओर चलती है, तट को ठंडा कर देती है और फसलों को हानि पहुँचाती है, इसीलिए वहाँ बागों को पेड़ों की कतारों और दीवारों से बचाया जाता है।
विकल्प B सिरोक्को गर्म और धूल भरी पवन है, जो सहारा से उत्तर की ओर भूमध्य सागर पार करती है और इटली तक उमस तथा धूल लेकर पहुँचती है। विकल्प C हरमट्टन सहारा से पश्चिमी अफ्रीका की ओर चलने वाली शुष्क पवन है, जिसे वहाँ डॉक्टर कहा जाता है क्योंकि वह उमस भरी गर्मी से राहत देती है। विकल्प D खमसिन मिस्र की गर्म दक्षिणी पवन है। इस सूची में केवल मिस्ट्रल ठंडी पवन है और प्रश्न में दिया गया क्षेत्र उत्तर तय कर देता है।
भूमध्य रेखा के सहारे फैली निम्न दाब और शांत वायु की पेटी किस नाम से जानी जाती है?
- A.अश्व अक्षांश
- B.डोलड्रम
- C.गरजती चालीसा
- D.ध्रुवीय उच्च दाब
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डोलड्रम
व्याख्या
सही उत्तर B, डोलड्रम है। भूमध्य रेखा पर तीव्र तापन से वायु फैलकर ऊपर उठती है, इसलिए धरातलीय दाब कम रहता है और क्षैतिज पवनें दुर्बल होती हैं; पालवाले जहाज यहाँ प्रायः रुक जाते थे। ऊपर उठती वायु ठंडी होकर संघनित होती है और भूमध्यरेखीय पेटी की भारी संवहनीय वर्षा देती है, तथा जहाँ दोनों गोलार्धों की व्यापारिक पवनें मिलती हैं वह अंतरउष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र कहलाता है।
विकल्प A अश्व अक्षांश भी शांत पेटी है, पर वह लगभग तीस अंश पर उपोष्ण उच्च दाब पेटी में है, जहाँ वायु नीचे उतरती है और मौसम शुष्क रहता है। विकल्प C गरजती चालीसा दक्षिणी महासागर की प्रबल पछुआ पवनें हैं, जो शांति के ठीक विपरीत हैं। विकल्प D ध्रुवीय उच्च दाब ध्रुवों पर ठंडी भारी वायु की पेटी है, जहाँ से ध्रुवीय पूर्वी पवनें बाहर निकलती हैं।
दक्षिण पश्चिम मानसून की ऋतु में भारतीय प्रायद्वीप के ऊपर कौन सी जेट धारा विकसित होती है?
- A.ध्रुवीय वाताग्र जेट
- B.उपोष्ण पछुआ जेट
- C.उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट
- D.ध्रुवीय रात्रि जेट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट
व्याख्या
सही उत्तर C, उष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट है। ग्रीष्म में जब उपोष्ण पछुआ जेट तिब्बत के पठार के उत्तर हट जाती है, तब प्रायद्वीपीय भारत के ऊपरी वायुमंडल में पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली पूर्वी जेट धारा बनती है। इसका प्रकट होना दक्षिण पश्चिम मानसून के प्रस्फोट से जुड़ा है और मौसम वैज्ञानिक इसकी प्रबलता को मानसून के प्रदर्शन से जोड़ते हैं।
विकल्प A ध्रुवीय वाताग्र जेट मध्य अक्षांशों में ध्रुवीय और उष्ण वायु के मिलन के ऊपर चलती है और भारतीय प्रायद्वीप की विशेषता नहीं है। विकल्प B उपोष्ण पछुआ जेट शीत ऋतु में हिमालय के दक्षिण रहती है और पश्चिमी विक्षोभ लाती है; वह भारत के ऊपर तो रहती है, पर शीत ऋतु में, मानसून में नहीं। विकल्प D ध्रुवीय रात्रि जेट शीतकाल में ध्रुवीय क्षेत्रों के समतापमंडल में बनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वायुमंडल की किस परत में सारा मौसम बनता है?
सबसे नीचे की परत क्षोभमंडल में, जो भूमध्य रेखा पर लगभग 18 किलोमीटर और ध्रुवों पर लगभग 8 किलोमीटर तक जाती है। वायुमंडल की लगभग सारी जलवाष्प और धूल इसी में है, इसलिए बादल, वर्षा, कोहरा और तूफान इसी तक सीमित रहते हैं और तापमान लगभग 6.5 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर की दर से घटता है।
समतापमंडल में ऊँचाई के साथ तापमान क्यों बढ़ता है?
क्योंकि समतापमंडल में ओजोन परत होती है। ओजोन सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरण को सोखती है और यही ऊर्जा आसपास की वायु को गर्म करती है, इसलिए ऊपरी समतापमंडल निचले भाग से अधिक गर्म रहता है। यह परत स्थिर, बादलरहित और अशांति से मुक्त रहती है, इसीलिए विमान इसके निचले भाग में उड़ते हैं।
डोलड्रम और अश्व अक्षांश में क्या अंतर है?
दोनों शांत पेटियाँ हैं, पर डोलड्रम भूमध्य रेखा पर है और भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी का भाग है, जहाँ गर्म वायु ऊपर उठती है और भारी संवहनीय वर्षा होती है। अश्व अक्षांश लगभग तीस अंश पर उपोष्ण उच्च दाब पेटी में हैं, जहाँ वायु नीचे उतरती है, शुष्क रहती है और विश्व के गर्म मरुस्थल बनते हैं।
चिनूक और फ्यॉन क्या हैं?
दोनों गर्म और शुष्क पवनें हैं जो पर्वत की प्रतिपवन ढाल पर नीचे उतरती हैं और उतरते समय दबाव से और अधिक गर्म हो जाती हैं। चिनूक उत्तरी अमेरिका में रॉकी पर्वत की पूर्वी ढाल पर चलती है और हिम को पिघला देने के कारण हिम भक्षी कहलाती है, जबकि फ्यॉन यूरोप में आल्प्स की उत्तरी ढाल पर यही काम करती है।
कोरिऑलिस प्रभाव क्या है?
यह पृथ्वी के घूर्णन के कारण गतिशील वस्तु में दिखाई देने वाला विक्षेपण है। पवनें उत्तरी गोलार्ध में अपने मार्ग से दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती हैं, इसीलिए भूमध्य रेखा के उत्तर में व्यापारिक पवनें उत्तर पूर्वी कहलाती हैं। यह प्रभाव भूमध्य रेखा पर शून्य और ध्रुवों पर सबसे अधिक होता है।
शीत ऋतु में भारत के ऊपर कौन सी जेट धारा रहती है?
उपोष्ण पछुआ जेट, जो शीत ऋतु में हिमालय के दक्षिण उत्तरी मैदानों के ऊपर रहती है। यही पश्चिमी विक्षोभ लाती है, जिनसे उत्तर पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा होती है। ग्रीष्म में यह तिब्बत के पठार के उत्तर चली जाती है और प्रायद्वीप के ऊपर पूर्वी जेट बन जाती है।
स्रोत
- भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा 11), वायुमंडल की संरचना और वायुमंडलीय परिसंचरण अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), जलवायु अध्याय — एनसीईआरटी



