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GK नोट्सभूगोलभूकंप और ज्वालामुखी

भूकंप और ज्वालामुखी: तरंगें, पेटियाँ और प्रकार

भूकंप और ज्वालामुखी के परीक्षोपयोगी नोट्स: भूकंप मूल और अधिकेंद्र, भूकंपीय तरंगें, छाया क्षेत्र, पैमाने, विश्व की पेटियाँ तथा ज्वालामुखी के प्रकार।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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भूकंप और ज्वालामुखी: तरंगें, पेटियाँ और प्रकार — GK24 title card
भूकंप और ज्वालामुखी: तरंगें, पेटियाँ और प्रकार — GK24 title card

भूकंप और ज्वालामुखी वे दो तीव्र रास्ते हैं जिनसे पृथ्वी का आंतरिक भाग उसकी सतह तक पहुँचता है। दोनों प्लेट संचलन की देन हैं, दोनों एक ही सँकरी पेटियों में केंद्रित हैं, और दोनों से हर सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में सीधे तथ्यात्मक प्रश्न आते हैं: कौन सी तरंग द्रव से नहीं गुजरती, कौन सा पैमाना परिमाण मापता है, भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कहाँ है। यह नोट भौतिकी को संक्षेप में रखकर परीक्षा के तथ्य सामने रखता है।

भूकंप कैसे आता है

भ्रंश के सहारे दबाव में आई चट्टानें प्रत्यास्थ ऊर्जा संचित करती हैं। जब दबाव चट्टान की सामर्थ्य से अधिक हो जाता है तो चट्टान टूटती है, दोनों खंड एक दूसरे के सहारे खिसकते हैं और संचित ऊर्जा तरंगों के रूप में निकलती है। पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ यह टूटन आरंभ होती है, भूकंप मूल या उद्गम केंद्र कहलाता है। ठीक उसके ऊपर सतह पर स्थित बिंदु अधिकेंद्र कहलाता है और वहीं झटका सबसे पहले तथा प्रायः सबसे तीव्र अनुभव होता है। अधिकांश भूकंप विवर्तनिक होते हैं; शेष ज्वालामुखीय होते हैं, या खदानों की छत गिरने, विस्फोट अथवा बड़े नए जलाशय के जल भार से आते हैं।

भूकंपीय तरंगें और उनका प्रमाण

तरंगप्रकृतिकिससे गुजरती हैगति
P तरंग, प्राथमिकअनुदैर्ध्य, दबाव और खिंचावठोस, द्रव और गैससबसे तेज, सबसे पहले दर्ज
S तरंग, द्वितीयकअनुप्रस्थ, ऊपर-नीचेकेवल ठोसP से धीमी
L तरंग, धरातलीय, लव और रेलेसतह के सहारे चलती हैंभूपर्पटीसबसे धीमी, सबसे विनाशकारी

चूँकि S तरंगें अनुप्रस्थ हैं, वे किसी द्रव से नहीं गुजर सकतीं, और अधिकेंद्र से लगभग 103 अंश से आगे कहीं दर्ज नहीं होतीं। यही एक प्रेक्षण इस बात का प्रमाण है कि बाह्य क्रोड द्रव अवस्था में है। P तरंगें क्रोड में प्रवेश करते समय तीव्रता से मुड़ जाती हैं, इसलिए लगभग 103 से 142 अंश के बीच की पेटी में न सीधी P तरंगें पहुँचती हैं और न S तरंगें; इसे छाया क्षेत्र कहते हैं। धरातलीय तरंगें सबसे बाद में पहुँचती हैं पर सबसे अधिक विनाश करती हैं, क्योंकि उनकी लंबी लहरदार गति से भवन डोलने लगते हैं।

भूकंप का मापन

तरंगों को सिस्मोग्राफ अर्थात भूकंपलेखी दर्ज करता है और उसका अभिलेख सिस्मोग्राम कहलाता है। मापी दो अलग बातें जाती हैं। परिमाण उद्गम पर निकली ऊर्जा है, जिसे 1935 में चार्ल्स एफ. रिक्टर द्वारा दिए गए रिक्टर पैमाने से और बड़े भूकंपों के लिए आजकल आघूर्ण परिमाण पैमाने से बताया जाता है। रिक्टर पैमाना लघुगणकीय और ऊपर से खुला है: हर पूर्ण संख्या तरंग आयाम में दस गुना और ऊर्जा में लगभग बत्तीस गुना वृद्धि दिखाती है। तीव्रता किसी स्थान पर अनुभव किया गया कंपन और हुई क्षति है, जिसे ज्युसेप्पे मरकली के काम पर आधारित संशोधित मरकली पैमाना बारह श्रेणियों में रोमन अंकों से बताता है, I अर्थात अनुभव न होना से XII अर्थात पूर्ण विनाश तक। एक भूकंप का परिमाण एक ही होता है, जबकि तीव्रता अधिकेंद्र से दूर जाते हुए घटती जाती है।

भूकंप और ज्वालामुखी कहाँ आते हैं

लगभग सभी तीन पेटियों में मिलते हैं। परिप्रशांत पेटी अर्थात अग्नि वलय प्रशांत महासागर को घेरती है, एंडीज से अल्यूशियन होते हुए जापान, फिलीपींस, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड तक, और इसमें विश्व के भूकंपों तथा सक्रिय ज्वालामुखियों का सबसे बड़ा भाग है। मध्य अटलांटिक पेटी मध्य महासागरीय कटक के सहारे चलती है, जहाँ प्लेटें अलग हटती हैं और आइसलैंड जैसी शांत बेसाल्टी उद्गार तथा उथले भूकंप मिलते हैं। अल्पाइन हिमालयी या भूमध्यसागरीय पेटी एटलस और आल्प्स से तुर्की तथा ईरान होते हुए हिमालय और म्यांमार तक जाती है, और उत्तर की ओर बढ़ती भारतीय प्लेट यहीं हिमालयी भूकंप उत्पन्न करती है। भारत में भारतीय मानक ब्यूरो देश को दो से पाँच तक चार भूकंपीय क्षेत्रों में बाँटता है, जिनमें संख्या बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ता है। सर्वाधिक जोखिम वाला क्षेत्र V पूर्वोत्तर राज्यों, गुजरात के कच्छ, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के भागों, उत्तर बिहार तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह को घेरता है। उथला समुद्री भूकंप जल स्तंभ को विस्थापित कर सुनामी उठा सकता है, जैसा 26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में हुआ।

ज्वालामुखी: भाग और प्रकार

सतह के नीचे पिघली चट्टान मैग्मा है; बाहर निकलने पर वही लावा कहलाती है। यह एक नली से ऊपर उठती है जिसे निकास या वेंट कहते हैं और जिस मुख से बाहर आती है उसे क्रेटर कहते हैं; जब शंकु का शीर्ष खाली हो चुके मैग्मा कक्ष में धँस जाता है तो बचा चौड़ा गर्त काल्डेरा कहलाता है। सक्रियता के आधार पर ज्वालामुखी सक्रिय है यदि वह फूटता हो या ऐतिहासिक काल में फूटा हो, प्रसुप्त है यदि लंबे समय से शांत हो पर फूट सकता हो, और शांत या मृत है यदि उद्गार का कोई अभिलेख न हो। अंडमान सागर का बैरन द्वीप भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है और पास का नारकोंडम प्रसुप्त माना जाता है।

आकृति लावा पर निर्भर करती है। क्षारीय अर्थात बेसिक लावा पतला होता है और दूर तक बहता है, इसलिए मंद ढाल वाला चौड़ा शील्ड ज्वालामुखी बनाता है, जैसे हवाई का मौनालोआ। अम्लीय लावा गाढ़ा होता है और गैस को रोक लेता है, इसलिए विस्फोटक उद्गार होता है और राख तथा लावा की बारी-बारी परतों से खड़ी ढाल वाला मिश्रित या संयुक्त ज्वालामुखी बनता है, जैसे जापान का फ्यूजीयामा और इटली का विसुवियस। केवल ढीले टुकड़ों से सिंडर शंकु बनता है। दरारी उद्गार बेसाल्ट की चादरें बिछाकर लावा पठार बनाते हैं, और प्रायद्वीपीय भारत का दक्कन ट्रैप इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके अपक्षय से काली रेगुर मिट्टी बनती है। भूपर्पटी के भीतर ठंडा हुआ मैग्मा अंतर्वेधी रूप बनाता है: विशाल बैथोलिथ, गुंबदाकार लैकोलिथ, तश्तरीनुमा लोपोलिथ, संस्तर के समानांतर फैला सिल और उसे काटकर खड़ा डाइक। गर्म जलस्रोत तथा गीजर, जैसे येलोस्टोन का ओल्ड फेथफुल और भारत में मणिकरण तथा तत्तापानी, ज्वालामुखी क्रिया की अंतिम अवस्था के चिह्न हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न एक पंक्ति के तथ्य और सुमेलित जोड़ों के रूप में आते हैं। सबसे प्रिय बिंदु हैं S तरंगें और द्रव बाह्य क्रोड, भूकंप मूल बनाम अधिकेंद्र, रिक्टर बनाम मरकली, भूकंपलेखी नामक यंत्र, अग्नि वलय, भारत के एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी के रूप में बैरन द्वीप, तथा विसुवियस, एटना, स्ट्रोंबोली और फ्यूजीयामा अपने देशों के साथ। सामान्य जाल ये हैं: अधिकेंद्र को उद्गम बिंदु मान लेना, रिक्टर पैमाने को क्षति का माप समझना, सिल और डाइक को आपस में बदल देना, और बैरन द्वीप की जगह नारकोंडम चुन लेना। यह भी याद रखें कि काल्डेरा साधारण उद्गार से नहीं, शीर्ष के धँसने से बनता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

भूकंप मूलपृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ टूटन आरंभ होती है, उद्गम केंद्र भी कहलाता है
अधिकेंद्रभूकंप मूल के ठीक ऊपर सतह पर स्थित बिंदु
सबसे तेज तरंगP तरंग, अनुदैर्ध्य, सिस्मोग्राम पर सबसे पहले दर्ज
द्रव से रुकने वाली तरंगS तरंग, अनुप्रस्थ, लगभग 103 अंश से आगे अनुपस्थित
छाया क्षेत्रअधिकेंद्र से लगभग 103 से 142 अंश के बीच की पेटी
परिमाण का पैमानारिक्टर पैमाना, 1935 में चार्ल्स एफ. रिक्टर द्वारा, लघुगणकीय
तीव्रता का पैमानासंशोधित मरकली पैमाना, I से XII तक बारह श्रेणियाँ
अभिलेखन यंत्रसिस्मोग्राफ अर्थात भूकंपलेखी; उसका अभिलेख सिस्मोग्राम
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखीबैरन द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
भूमध्यसागर का प्रकाश स्तंभस्ट्रोंबोली, इटली के लिपारी द्वीपों में
पोम्पेई को नष्ट करने वाला ज्वालामुखीमाउंट विसुवियस, इटली, 79 ईस्वी में
भारत के भूकंपीय क्षेत्रदो से पाँच तक चार क्षेत्र, जिनमें क्षेत्र V सर्वाधिक संवेदनशील

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.भूगोलआसान

निम्नलिखित में से कौन सी भूकंपीय तरंग द्रव से होकर नहीं गुजर सकती?

  1. A.P तरंगें
  2. B.S तरंगें
  3. C.लव तरंगें
  4. D.रेले तरंगें
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. S तरंगें

व्याख्या

सही उत्तर B, S तरंगें हैं। द्वितीयक अर्थात S तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं, इसलिए माध्यम के कण गति की दिशा के समकोण पर हिलते हैं। अनुप्रस्थ तरंग को ऐसा माध्यम चाहिए जो आकार परिवर्तन का प्रतिरोध करे, और द्रव ऐसा नहीं करता, इसलिए S तरंगें द्रव बाह्य क्रोड पर रुक जाती हैं और अधिकेंद्र से लगभग 103 अंश से आगे दर्ज नहीं होतीं।

विकल्प A, P तरंगें, संपीडन और विरलन वाली अनुदैर्ध्य तरंगें हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों से समान रूप से गुजरती हैं, इसीलिए वे सदा सबसे पहले दर्ज होती हैं। विकल्प C और D, लव तथा रेले तरंगें, धरातलीय तरंगें हैं; वे केवल भूपर्पटी के सहारे चलती हैं और सबसे धीमी तथा सबसे विनाशकारी होती हैं, पर प्रश्न पृथ्वी के भीतर द्रव से गुजरने का है, जो वे करती ही नहीं। छाया क्षेत्र में S तरंगों का अभाव ही बाह्य क्रोड के द्रव होने का मानक प्रमाण है।

Q2.भूगोलआसान

पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ से भूकंप की उत्पत्ति होती है, क्या कहलाता है?

  1. A.अधिकेंद्र
  2. B.भ्रंश रेखा
  3. C.भूकंप मूल
  4. D.छाया क्षेत्र
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भूकंप मूल

व्याख्या

सही उत्तर C, भूकंप मूल है। भूकंप मूल अर्थात उद्गम केंद्र सतह के नीचे वह बिंदु है जहाँ दबाव में आई चट्टान टूटती है और संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा को भूकंपीय तरंगों के रूप में मुक्त करती है। उसकी गहराई तय करती है कि झटका कितनी दूर तक अनुभव होगा: समान परिमाण होने पर उथले मूल वाले भूकंप उद्गम के पास अधिक विनाशकारी होते हैं।

विकल्प A, अधिकेंद्र, भूकंप मूल के ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु है, इसलिए वह सतही बिंदु है, उद्गम स्थल नहीं। विकल्प B, भ्रंश रेखा, भूपर्पटी की वह दरार है जिसके सहारे खंड खिसकते हैं; भूकंप मूल भ्रंश पर ही होता है, पर भ्रंश स्वयं रेखा या तल है, बिंदु नहीं। विकल्प D, छाया क्षेत्र, पृथ्वी के दूसरी ओर लगभग 103 से 142 अंश के बीच की वह पेटी है जहाँ सीधी P या S तरंगें नहीं पहुँचतीं। भूकंप मूल और अधिकेंद्र का यह अंतर इस अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।

Q3.भूगोलआसान

रिक्टर पैमाने का प्रयोग निम्नलिखित में से किसे मापने के लिए किया जाता है?

  1. A.भूकंप से हुई क्षति की तीव्रता
  2. B.भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण
  3. C.भूकंप मूल की गहराई
  4. D.सुनामी लहरों की ऊँचाई
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण

व्याख्या

सही उत्तर B, भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण है। 1935 में चार्ल्स एफ. रिक्टर द्वारा दिया गया रिक्टर पैमाना झटके के उद्गम पर मुक्त हुई ऊर्जा को व्यक्त करता है। यह लघुगणकीय और ऊपर से खुला पैमाना है, इसलिए हर पूर्ण संख्या नीचे वाली संख्या की तुलना में लगभग दस गुना तरंग आयाम और लगभग बत्तीस गुना ऊर्जा दर्शाती है, और एक भूकंप का केवल एक ही परिमाण मान होता है।

विकल्प A संशोधित मरकली पैमाने का वर्णन है, जो किसी स्थान पर अनुभव किए गए कंपन और क्षति को I से XII तक बारह श्रेणियों में बताता है और एक ही भूकंप के लिए कई मान देता है। विकल्प C, भूकंप मूल की गहराई, कई केंद्रों पर P और S तरंगों के पहुँचने के समय से निकाली जाती है और किसी नामित पैमाने से नहीं बताई जाती। विकल्प D, सुनामी लहरों की ऊँचाई, ज्वार मापी और महासागरीय प्लवों से सीधे मापी जाती है। जोड़ा याद रखें: परिमाण के लिए रिक्टर, तीव्रता के लिए मरकली।

Q4.भूगोलमध्यम

भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप कहाँ स्थित है?

  1. A.लक्षद्वीप
  2. B.कच्छ की खाड़ी
  3. C.अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
  4. D.सुंदरवन डेल्टा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

व्याख्या

सही उत्तर C, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह है। बैरन द्वीप अंडमान सागर में मुख्य अंडमान समूह के पूर्व में स्थित है और भारत तथा दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह उसी पेटी पर है जहाँ भारतीय प्लेट बर्मा प्लेट के नीचे धँस रही है, और इसी क्षेपण क्षेत्र से दिसंबर 2004 का विशाल समुद्री भूकंप उत्पन्न हुआ था।

विकल्प A, लक्षद्वीप, भूवैज्ञानिक अतीत के डूबे ज्वालामुखी आधारों पर बनी प्रवाल द्वीपों की शृंखला है, जहाँ आज कोई सक्रिय निकास नहीं है। विकल्प B, कच्छ की खाड़ी, गुजरात के अत्यधिक भूकंप प्रवण क्षेत्र में है और भूकंपीय क्षेत्र V में आती है, पर वहाँ ज्वालामुखी नहीं है। विकल्प D, सुंदरवन, गंगा और ब्रह्मपुत्र से बना डेल्टाई तथा मैंग्रोव क्षेत्र है और पूर्णतः अवसादी है। यह भी ध्यान रखें कि बैरन द्वीप के पास स्थित नारकोंडम प्रसुप्त माना जाता है और इसी प्रश्न का सामान्य भ्रामक विकल्प है।

Q5.भूगोलआसान

भूकंप से उत्पन्न तरंगों को अभिलेखित करने वाला यंत्र क्या कहलाता है?

  1. A.सिस्मोग्राफ
  2. B.बैरोग्राफ
  3. C.आर्द्रतामापी
  4. D.अल्टीमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सिस्मोग्राफ

व्याख्या

सही उत्तर A, सिस्मोग्राफ है। सिस्मोग्राफ अर्थात भूकंपलेखी में एक भार लगा होता है जो लगभग स्थिर रहता है जबकि भूमि और ढाँचा उसके नीचे हिलते हैं, और इस सापेक्ष गति को लहरदार रेखा के रूप में अंकित कर लिया जाता है। यह अभिलेख सिस्मोग्राम कहलाता है, और उस पर P तथा S तरंगों के पहुँचने के बीच का अंतराल यह निकालने में काम आता है कि केंद्र वहाँ से कितनी दूर है। तीन या अधिक केंद्रों के पाठ से अधिकेंद्र तय होता है।

विकल्प B, बैरोग्राफ, स्वतः अभिलेखी निर्द्रव बैरोमीटर है जो वायुदाब का सतत आलेख बनाता है। विकल्प C, आर्द्रतामापी, वायु की आर्द्रता मापता है, जिसमें शुष्क और आर्द्र बल्ब वाला प्रकार सामान्य है। विकल्प D, अल्टीमीटर, समुद्र तल से ऊँचाई दिखाने के लिए अंशांकित निर्द्रव बैरोमीटर है और वायुयानों तथा पर्वतारोहियों द्वारा प्रयोग होता है। यंत्र और उपयोग के प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं, इसलिए चारों को एक साथ याद करें।

Q6.भूगोलआसान

पोम्पेई नगर को दफना देने वाला ज्वालामुखी माउंट विसुवियस किस देश में स्थित है?

  1. A.यूनान
  2. B.इटली
  3. C.तुर्की
  4. D.स्पेन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. इटली

व्याख्या

सही उत्तर B, इटली है। माउंट विसुवियस दक्षिणी इटली में नेपल्स की खाड़ी के पास खड़ा है और 79 ईस्वी के उसके उद्गार ने रोमन नगरों पोम्पेई तथा हरकुलेनियम को राख के नीचे दबा दिया, जिससे वे इतने सुरक्षित रह गए कि रोमन दैनिक जीवन का पुरातात्विक अभिलेख बन गए। यह राख और लावा की बारी-बारी परतों से बना मिश्रित या संयुक्त ज्वालामुखी है।

विकल्प A, यूनान, में ईजियन सागर का सैंटोरिनी जैसा ज्वालामुखी द्वीप है, जिसके प्राचीन उद्गार को मिनोअन सभ्यता के अंत से जोड़ा जाता है, पर विसुवियस वहाँ नहीं है। विकल्प C, तुर्की, अल्पाइन भूकंप पेटी पर है और वहाँ माउंट अरारात जैसी शांत ज्वालामुखी चोटियाँ हैं, विसुवियस नहीं। विकल्प D, स्पेन, में ज्वालामुखी क्रिया केवल अफ्रीका के पास कैनरी द्वीपों में मिलती है। इटली को समूह के रूप में याद रखें: नेपल्स के पास विसुवियस, सिसली में एटना और लिपारी द्वीपों में स्ट्रोंबोली।

Q7.भूगोलमध्यम

किस ज्वालामुखी को भूमध्यसागर का प्रकाश स्तंभ कहा जाता है?

  1. A.माउंट एटना
  2. B.क्राकाटोआ
  3. C.स्ट्रोंबोली
  4. D.माउंट फ्यूजी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. स्ट्रोंबोली

व्याख्या

सही उत्तर C, स्ट्रोंबोली है। स्ट्रोंबोली सिसली के उत्तर में लिपारी या एओलियन द्वीप समूह का छोटा द्वीपीय ज्वालामुखी है और सदियों से लगभग निरंतर मंद उद्गार की अवस्था में है। उसके बार-बार होने वाले विस्फोटों से निकलने वाले दहकते पदार्थ की चमक रात में समुद्र में दूर तक दिखाई देती है, इसी से उसे भूमध्यसागर का प्रकाश स्तंभ नाम मिला।

विकल्प A, माउंट एटना, भी इटली में सिसली द्वीप पर है और यूरोप का सबसे ऊँचा सक्रिय ज्वालामुखी है तथा बार-बार फूटता है, पर यह उपनाम स्ट्रोंबोली का है। विकल्प B, क्राकाटोआ, इंडोनेशिया में जावा और सुमात्रा के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में है, भूमध्यसागर से बहुत दूर, और 1883 के भीषण उद्गार के लिए जाना जाता है। विकल्प D, माउंट फ्यूजी अर्थात फ्यूजीयामा, जापान का मिश्रित शंकु है और उस प्रकार का मानक उदाहरण है। यह उपनाम एक पंक्ति के प्रश्न के रूप में प्रिय है, इसलिए इसे केवल स्ट्रोंबोली से जोड़ें।

Q8.भूगोलमध्यम

भूकंपलेखी पर सबसे पहले कौन सी भूकंपीय तरंग दर्ज होती है?

  1. A.द्वितीयक तरंगें
  2. B.प्राथमिक तरंगें
  3. C.धरातलीय तरंगें
  4. D.लव तरंगें
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्राथमिक तरंगें

व्याख्या

सही उत्तर B, प्राथमिक तरंगें हैं। P तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं और संपीडन तथा विरलन के द्वारा माध्यम के कणों को गति की दिशा में ही आगे-पीछे हिलाती हैं। ये सभी भूकंपीय तरंगों में सबसे तेज हैं, इसलिए किसी भी केंद्र पर सबसे पहले पहुँचती हैं और सिस्मोग्राम पर सबसे पहले अंकित होती हैं; इसी कारण इन्हें प्राथमिक कहा जाता है।

विकल्प A, द्वितीयक अर्थात S तरंगें, अनुप्रस्थ हैं और धीमी चलती हैं, इसलिए P तरंगों के बाद पहुँचती हैं; दोनों के पहुँचने का अंतर अधिकेंद्र की दूरी निकालने में काम आता है। विकल्प C और D, धरातलीय तरंगें, जिनमें लव और रेले तरंगें आती हैं, तब बनती हैं जब पिंड तरंगें सतह तक पहुँचती हैं; ये सबसे धीमी हैं और सबसे बाद में आती हैं, फिर भी भूमि पर अपनी लंबी लहरदार गति के कारण सबसे अधिक क्षति करती हैं। पहुँचने का क्रम याद रखें: पहले P, फिर S, फिर धरातलीय तरंगें।

Q9.भूगोलआसान

विश्व के सक्रिय ज्वालामुखियों का सबसे बड़ा जमाव जिस अग्नि वलय में है, वह किस महासागर को घेरता है?

  1. A.अटलांटिक महासागर
  2. B.हिंद महासागर
  3. C.प्रशांत महासागर
  4. D.आर्कटिक महासागर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. प्रशांत महासागर

व्याख्या

सही उत्तर C, प्रशांत महासागर है। परिप्रशांत पेटी, जिसे लोकप्रिय रूप से अग्नि वलय कहा जाता है, दक्षिण अमेरिका के एंडीज से मेक्सिको, उत्तरी अमेरिका के पश्चिमी तट और अल्यूशियन होते हुए कमचटका, जापान, फिलीपींस और इंडोनेशिया से न्यूजीलैंड तक जाती है। यह उन क्षेपण क्षेत्रों का अनुसरण करती है जहाँ प्रशांत प्लेट आसपास की प्लेटों के नीचे धँसती है, इसलिए विश्व के सक्रिय ज्वालामुखियों और भूकंपों का सबसे बड़ा भाग यहीं है।

विकल्प A, अटलांटिक महासागर, में मध्य अटलांटिक कटक है, जहाँ प्लेटें अलग हटती हैं और आइसलैंड जैसे शांत बेसाल्टी उद्गार होते हैं, पर विस्फोटक ज्वालामुखी बहुत कम हैं। विकल्प B, हिंद महासागर, में सुंडा चाप तथा बैरन द्वीप और रीयूनियन जैसे स्थानों पर ज्वालामुखी क्रिया है, पर ऐसा कोई वलय नहीं। विकल्प D, आर्कटिक महासागर, चारों में सबसे कम सक्रिय है। अग्नि वलय को प्रशांत तट के क्षेपण से जोड़कर याद रखें।

Q10.भूगोलमध्यम

पतले बेसिक लावा से बने चौड़े आधार और मंद ढाल वाले ज्वालामुखी क्या कहलाते हैं?

  1. A.मिश्रित ज्वालामुखी
  2. B.सिंडर शंकु
  3. C.काल्डेरा ज्वालामुखी
  4. D.शील्ड ज्वालामुखी
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. शील्ड ज्वालामुखी

व्याख्या

सही उत्तर D, शील्ड ज्वालामुखी है। बेसिक लावा में सिलिका कम होती है और वह बहुत गर्म तथा पतला होता है, इसलिए जमने से पहले निकास से दूर तक बह जाता है। ऐसे प्रवाहों की परत दर परत जमावट से कुछ ही अंश ढाल वाला चौड़ा गुंबद बनता है, जो भूमि पर रखी योद्धा की ढाल जैसा दिखता है; हवाई का मौनालोआ इसका पाठ्यपुस्तकीय उदाहरण है। इस प्रकार के उद्गार प्रायः शांत होते हैं, विस्फोटक नहीं।

विकल्प A, मिश्रित या संयुक्त ज्वालामुखी, जैसे फ्यूजीयामा और विसुवियस, राख तथा गाढ़े अम्लीय लावा की बारी-बारी परतों से बनते हैं और इसलिए खड़े शंकु के रूप में उठते हैं। विकल्प B, सिंडर शंकु, केवल ढीले टुकड़ों से बनी छोटी और खड़ी पहाड़ी है। विकल्प C, काल्डेरा ज्वालामुखी, सबसे विस्फोटक प्रकार है और उस चौड़े गर्त के नाम पर है जो शीर्ष के खाली मैग्मा कक्ष में धँसने से बनता है। परीक्षा के लिए मूल बात यही है कि पतला लावा मंद ढाल और गाढ़ा लावा खड़ी ढाल बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूकंप मूल और अधिकेंद्र में क्या अंतर है?

भूकंप मूल अर्थात उद्गम केंद्र पृथ्वी के भीतर वह बिंदु है जहाँ चट्टान वास्तव में टूटती है और ऊर्जा मुक्त होती है। अधिकेंद्र ठीक उसके ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु है। तरंगें अधिकेंद्र पर सबसे पहले पहुँचती हैं, इसलिए क्षति प्रायः वहीं सबसे अधिक होती है। परीक्षा में उद्गम स्थल का वर्णन देकर भूकंप मूल और सतही बिंदु का वर्णन देकर अधिकेंद्र पूछा जाता है।

भूकंपीय तरंगें बाह्य क्रोड के द्रव होने का प्रमाण कैसे देती हैं?

S तरंगें अनुप्रस्थ हैं और अनुप्रस्थ तरंग को ऐसा माध्यम चाहिए जो आकार परिवर्तन का प्रतिरोध कर सके, जो द्रव नहीं कर सकता। भूकंपलेखी अधिकेंद्र से लगभग 103 अंश से आगे कोई सीधी S तरंग दर्ज नहीं करते, अर्थात उन्हें कोई द्रव जैसा व्यवहार करने वाली परत रोक रही है। P तरंगें गुजरती तो हैं पर तीव्रता से मुड़ जाती हैं, जिससे लगभग 103 से 142 अंश के बीच छाया क्षेत्र बनता है। दोनों प्रेक्षण मिलकर ठोस आंतरिक क्रोड के चारों ओर द्रव बाह्य क्रोड सिद्ध करते हैं।

रिक्टर पैमाने और मरकली पैमाने में क्या अंतर है?

रिक्टर पैमाना परिमाण अर्थात उद्गम पर मुक्त ऊर्जा को लघुगणकीय और ऊपर से खुले पैमाने पर मापता है, इसलिए एक भूकंप का एक ही रिक्टर मान होता है। संशोधित मरकली पैमाना तीव्रता अर्थात किसी स्थान पर वास्तव में अनुभव किया गया कंपन और क्षति बारह श्रेणियों में रोमन अंकों से बताता है। इसलिए एक ही भूकंप का परिमाण एक होता है पर तीव्रताएँ कई, जो अधिकेंद्र के पास सर्वाधिक और दूर जाते हुए कम होती जाती हैं।

भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी कौन सा है?

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह का भाग, अंडमान सागर में स्थित बैरन द्वीप भारत का तथा दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। पास का नारकोंडम द्वीप प्रसुप्त श्रेणी में रखा जाता है। प्रायद्वीपीय भारत का दक्कन ट्रैप भूवैज्ञानिक अतीत के विशाल दरारी उद्गारों का अवशेष है और आज वहाँ कोई सक्रियता नहीं है, इसलिए वह इस प्रश्न का उत्तर नहीं होता।

शील्ड ज्वालामुखी की ढाल मंद और मिश्रित ज्वालामुखी की खड़ी क्यों होती है?

शील्ड ज्वालामुखी बेसिक लावा से बनते हैं, जिसमें सिलिका कम होती है और जो बहुत गर्म तथा पतला होने के कारण ठंडा होने से पहले दूर तक बहकर मंद ढाल वाला चौड़ा गुंबद बना देता है, जैसे हवाई का मौनालोआ। मिश्रित ज्वालामुखी अम्लीय लावा से बनते हैं, जो सिलिका से भरपूर, चिपचिपा और गैसयुक्त होता है, इसलिए वह निकास के पास ही जमता है और विस्फोटक उद्गार से राख तथा लावा की परतों वाला खड़ा शंकु बनाता है, जैसे फ्यूजीयामा।

स्रोत

  • भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा XI), पृथ्वी की आंतरिक संरचना वाला अध्याय — एनसीईआरटी
  • भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा XI), भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास वाला अध्याय — एनसीईआरटी
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