पर्वत, पठार और मैदान: प्रकार, उदाहरण और परीक्षा नोट्स
परीक्षा के लिए तीन प्रमुख उच्चावच के नोट्स: वलित, ब्लॉक, ज्वालामुखी और अवशिष्ट पर्वत, पठारों तथा मैदानों के प्रकार, और उत्तरी मैदान की पेटियाँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

पर्वत, पठार और मैदान पृथ्वी के तीन प्रमुख उच्चावच अर्थात् प्रथम श्रेणी के स्थलरूप हैं। सामान्य ज्ञान के लगभग प्रत्येक पर्चे में इनसे प्रश्न आते हैं, और अधिकतर प्रकार तथा उदाहरण के मिलान के रूप में: हिमालय के साथ वलित पर्वत, वॉस्जेस के साथ ब्लॉक पर्वत, तिब्बत के साथ अंतरापर्वतीय पठार, और खादर के साथ नवीन जलोढ़। इन नोट्स में प्रत्येक स्थलरूप की उत्पत्ति, प्रत्येक प्रकार के साथ पूछे जाने वाले नाम, तथा भारत के उत्तरी मैदान के विभाजन दिए गए हैं।
पर्वत और उनके चार प्रकार
पर्वत पृथ्वी की सतह का वह प्राकृतिक उठान है जो अपने आसपास से काफी ऊँचा उठता है, जिसका शिखर-क्षेत्र सीमित होता है और ढाल तीव्र होते हैं; भारतीय पाठ्यपुस्तकों में लगभग छह सौ मीटर से अधिक ऊँचाई को पर्वत और उससे कम को पहाड़ी माना जाता है। पर्वतों का वर्गीकरण उनकी उत्पत्ति के आधार पर किया जाता है।
| प्रकार | उत्पत्ति | उदाहरण |
|---|---|---|
| वलित पर्वत | भूसन्नति में जमे मोटे अवसादों का संपीडन, जिससे वे मुड़कर ऊपर उठते हैं | नवीन: हिमालय, आल्प्स, एंडीज, रॉकी, एटलस। प्राचीन: अरावली, एपलेशियन, यूराल |
| ब्लॉक पर्वत | भ्रंशन; ऊपर उठा भाग होर्स्ट और दो भ्रंशों के बीच धँसा भाग ग्रैबेन या रिफ्ट घाटी कहलाता है | राइन रिफ्ट घाटी के दोनों ओर वॉस्जेस और ब्लैक फॉरेस्ट, सियरा नेवादा, सतपुड़ा और विंध्य |
| ज्वालामुखी पर्वत | ज्वालामुखी छिद्र के चारों ओर लावा और राख का संचय, इसलिए इन्हें संचयन पर्वत भी कहते हैं | किलिमंजारो, फ्यूजीयामा, मेयन, कोटोपैक्सी, माउना लोआ |
| अवशिष्ट पर्वत | किसी प्राचीन पठार या पुराने पर्वत का दीर्घकालिक अपरदन, जिससे कठोर चट्टानें शेष रह जाती हैं | नीलगिरि, पारसनाथ, गिरनार, राजमहल पहाड़ियाँ |
वलित पर्वत सबसे नवीन और सबसे ऊँचे होते हैं और विश्व की सर्वोच्च चोटियाँ इन्हीं में हैं: हिमालय का माउंट एवरेस्ट, जिसकी ऊँचाई नेपाल और चीन ने दिसंबर 2020 में संयुक्त रूप से 8,848.86 मीटर घोषित की, तथा कंचनजंगा, 8,586 मीटर, जो भारत की सीमा के भीतर सबसे ऊँची चोटी है। दक्षिण अमेरिका की एंडीज स्थल पर सबसे लंबी पर्वत श्रेणी है, जिसकी लंबाई लगभग सात हजार किलोमीटर है, जबकि पृथ्वी की सबसे लंबी श्रेणियाँ मध्य-महासागरीय कटक हैं, जो जलमग्न पर्वत हैं। स्थिति के आधार पर पर्वत तटीय, जैसे पश्चिमी घाट, आंतरिक, जैसे अरावली और यूराल, तथा महासागरीय भी कहे जाते हैं। प्रायद्वीपीय श्रेणियों में पचमढ़ी पहाड़ियों का धूपगढ़ सतपुड़ा की, कलसुबाई सह्याद्रि की और दोडाबेट्टा नीलगिरि की सर्वोच्च चोटी है।
पठार और उनके प्रकार
पठार वह ऊँचा मेजनुमा भूभाग है जिसका ऊपरी तल समतल या मंद तरंगित होता है और जो आसपास की भूमि से एकदम ऊपर उठा रहता है। यह सामान्यतः अपनी ऊँचाई से अधिक विस्तृत होता है। पठारों के नाम भी उनकी उत्पत्ति पर आधारित हैं।
- अंतरापर्वतीय पठार पर्वत श्रेणियों से घिरे रहते हैं और सबसे ऊँचे तथा सबसे विस्तृत होते हैं। तिब्बत का पठार, जिसे संसार की छत कहा जाता है, सबसे ऊँचा और सबसे विस्तृत है; बोलीविया तथा अनातोलिया के पठार भी इसी वर्ग में आते हैं।
- गिरिपद पठार पर्वतों के पाद में स्थित होते हैं और उनके दूसरी ओर समुद्र या मैदान होता है, जैसे पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका का पीडमॉण्ट पठार और अर्जेंटीना का पैटागोनिया पठार।
- महाद्वीपीय या मेजनुमा पठार तटीय मैदान या समुद्र से एकदम ऊपर उठते हैं, जैसे प्रायद्वीपीय भारत, अफ्रीका, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका के पठार।
- ज्वालामुखी या लावा पठार तरल बेसाल्ट लावा की चादरों से बनते हैं। महाराष्ट्र का दक्कन ट्रैप, अमेरिका का कोलंबिया-स्नेक पठार, उत्तरी आयरलैंड का एंट्रिम पठार और इथियोपिया का पठार इसके मानक उदाहरण हैं, और दक्कन की काली रेगुर मिट्टी इसी बेसाल्ट से बनी है।
- विच्छेदित पठार नदियों द्वारा काट दिए गए पठार हैं, जैसे छोटानागपुर पठार, और लोएस पठार, जैसे चीन का लोएस पठार, पवन द्वारा जमाए गए सिल्ट से बने हैं।
भारत का प्रायद्वीपीय पठार देश का सबसे प्राचीन भूभाग है और प्राचीन गोंडवाना भूमि का अंग है। इसकी प्रमुख इकाइयाँ हैं: पश्चिमी और पूर्वी घाट के बीच का दक्कन पठार, उत्तर में मालवा पठार तथा बुंदेलखंड और बघेलखंड की उच्च भूमि, पूर्व में छोटानागपुर पठार, दक्षिण में तेलंगाना और कर्नाटक पठार, तथा मेघालय या शिलांग पठार, जो गारो-राजमहल अंतराल से मुख्य भाग से अलग हो गया है। केरल का अनाईमुडी, लगभग 2,695 मीटर, पश्चिमी घाट तथा समूचे प्रायद्वीपीय पठार की सर्वोच्च चोटी है। पठार अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनमें खनिज सतह के निकट मिलते हैं, इसी कारण छोटानागपुर पठार को खनिजों का भंडार कहा जाता है, और क्योंकि नदियाँ इनके किनारों से गिरकर जलप्रपात तथा जल विद्युत देती हैं, जैसे शरावती नदी जोग जलप्रपात पर।
मैदान और उनके प्रकार
मैदान नीची और लगभग समतल भूमि का विस्तार है, जो सामान्यतः समुद्र तल से दो सौ मीटर से कम ऊँचा होता है और जिसका ढाल बहुत मंद होता है। मैदानों का वर्गीकरण उन्हें बनाने वाली प्रक्रिया पर आधारित है।
- संरचनात्मक मैदान समुद्र तल के किसी भाग के उत्थान या भूमि के अवतलन से बनते हैं, जैसे भारत के तटीय मैदान और रूसी प्लेटफॉर्म।
- निक्षेपात्मक मैदान नदी, हिमनद, पवन या लहरों द्वारा जमाए जाते हैं। जलोढ़ मैदान जैसे सिंधु-गंगा का मैदान, ह्वांग हो का मैदान तथा मिसिसिपी का मैदान, बाढ़ के मैदान, डेल्टाई मैदान जैसे सुंदरवन, गिरिपद जलोढ़ मैदान, झील निर्मित मैदान जैसे कश्मीर घाटी के करेवा, हिमनद निक्षेप के मैदान, लोएस मैदान तथा तटीय मैदान इसी वर्ग में आते हैं।
- अपरदनात्मक मैदान जमाव से नहीं, घिसाव से बनते हैं। समप्राय मैदान नदी अपरदन से बना लगभग समतल धरातल है, पेडीप्लेन मरुस्थल में परत प्रवाह से बना वैसा ही धरातल है, और कार्स्ट मैदान चूना-पत्थर क्षेत्र में घुलन से बनता है।
भारत का उत्तरी मैदान निक्षेपात्मक मैदान का श्रेष्ठ उदाहरण है, जो हिमालय और प्रायद्वीपीय भाग के बीच के गर्त में सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों के जलोढ़ से बना है। यह पश्चिम से पूर्व लगभग दो हजार चार सौ किलोमीटर लंबा है और पहाड़ियों से दक्षिण की ओर चार पेटियों में बाँटा जाता है।
| पेटी | परीक्षा में पूछी जाने वाली विशेषता |
|---|---|
| भाबर | शिवालिक के सहारे मोटे कंकड़-पत्थर की सँकरी पेटी, जो इतनी पारगम्य है कि नदियाँ इसमें लुप्त हो जाती हैं |
| तराई | भाबर के दक्षिण की दलदली, नम और पहले घने जंगलों वाली पेटी, जहाँ वे नदियाँ फिर प्रकट होती हैं |
| बांगर | ऊपरी वेदिकाओं का पुराना जलोढ़, जो बाढ़ के स्तर से ऊपर रहता है और जिसमें चूने की गाँठें अर्थात् कंकड़ मिलती हैं |
| खादर | बाढ़ के मैदानों का नवीन जलोढ़, जो लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ से नया हो जाता है और सर्वाधिक उपजाऊ है |
उत्तरी मैदान स्वयं पंजाब के मैदान, जिसमें सिंधु की सहायक नदियों के बीच दोआब हैं, गंगा के मैदान तथा असम के ब्रह्मपुत्र मैदान में बाँटा जाता है, जिसमें माजुली स्थित है, जो विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप है। मैदानों में जनसंख्या का घनत्व सर्वाधिक और कृषि भूमि सर्वोत्तम होती है, इसी कारण भारत के उत्तरी मैदान पठारों की तुलना में जनसंख्या का बहुत बड़ा भाग सँभालते हैं।
परीक्षक तीनों को कैसे मिलाते हैं
एक ही प्रश्न में तीनों स्थलरूप आ जाते हैं: सतपुड़ा ब्लॉक पर्वत है और पठार की सीमा भी बनाता है, पश्चिमी घाट तटीय श्रेणी है और दक्कन मेजभूमि का पश्चिमी किनारा भी है, तथा कश्मीर का करेवा पर्वतीय घाटी के भीतर स्थित झील निर्मित मैदान है। प्रत्येक प्रकार के लिए एक उदाहरण याद रखें और मिलान वाले प्रश्न आसान अंक बन जाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
सबसे आम प्रश्न प्रकार और उदाहरण के मिलान का होता है, इसलिए प्रत्येक वर्ग के लिए एक उदाहरण तैयार रखें: नवीन वलित के लिए हिमालय, प्राचीन वलित के लिए अरावली, ब्लॉक के लिए वॉस्जेस और सतपुड़ा, ज्वालामुखी के लिए किलिमंजारो तथा फ्यूजीयामा, अवशिष्ट के लिए नीलगिरि और पारसनाथ, अंतरापर्वतीय के लिए तिब्बत, गिरिपद के लिए पैटागोनिया, लावा के लिए दक्कन ट्रैप और विच्छेदित के लिए छोटानागपुर। दूसरा पसंदीदा प्रश्न उत्तरी मैदान की पेटियों का क्रम और प्रत्येक की एक-पंक्ति विशेषता है: भाबर में कंकड़-पत्थर तथा लुप्त होती नदियाँ, तराई में दलदल, बांगर में कंकड़, खादर में प्रतिवर्ष बाढ़। जाल ये हैं: सतपुड़ा को वलित पर्वत कहना, दक्कन को अंतरापर्वतीय पठार कहना, समप्राय मैदान और पेडीप्लेन को मिला देना, तथा कश्मीर के करेवा को उत्तरी मैदान का भाग मान लेना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पर्वतों के चार प्रकार | वलित, ब्लॉक, ज्वालामुखी और अवशिष्ट |
|---|---|
| भारत का प्राचीनतम वलित पर्वत | अरावली; सर्वोच्च बिंदु माउंट आबू का गुरु शिखर |
| ब्लॉक पर्वत युग्म | राइन रिफ्ट घाटी के दोनों ओर वॉस्जेस और ब्लैक फॉरेस्ट; नर्मदा के दोनों ओर सतपुड़ा और विंध्य |
| अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी | किलिमंजारो, 5,895 मीटर, एक ज्वालामुखी पर्वत |
| विश्व की सर्वोच्च चोटी | माउंट एवरेस्ट, 8,848.86 मीटर, जैसा नेपाल और चीन ने दिसंबर 2020 में संयुक्त रूप से घोषित किया |
| भारत की सीमा के भीतर सर्वोच्च चोटी | कंचनजंगा, 8,586 मीटर |
| स्थल की सबसे लंबी श्रेणी | एंडीज, लगभग 7,000 किलोमीटर |
| प्रायद्वीपीय भारत की सर्वोच्च चोटी | अनाईमुडी, लगभग 2,695 मीटर, केरल की अनाईमलाई पहाड़ियों में |
| सतपुड़ा की सर्वोच्च चोटी | धूपगढ़, लगभग 1,350 मीटर, मध्य प्रदेश की पचमढ़ी पहाड़ियों में |
| सबसे ऊँचा और विस्तृत पठार | तिब्बत का पठार, संसार की छत |
| लावा पठार | दक्कन ट्रैप, कोलंबिया-स्नेक, एंट्रिम, इथियोपिया |
| खनिजों का भंडार | छोटानागपुर पठार, एक विच्छेदित पठार |
| उत्तरी मैदान की पेटियाँ | पहाड़ियों से दक्षिण की ओर भाबर, तराई, बांगर और खादर |
| पुराना और नवीन जलोढ़ | बांगर, जिसमें कंकड़ की गाँठें; खादर, जो बाढ़ से नया होता है |
| सबसे बड़ा नदी द्वीप | माजुली, असम के ब्रह्मपुत्र मैदान में |
| अपरदनात्मक मैदान | नदियों से समप्राय मैदान, परत प्रवाह से पेडीप्लेन, घुलन से कार्स्ट मैदान |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से भारत की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रेणी कौन-सी है?
- A.हिमालय
- B.अरावली
- C.सतपुड़ा
- D.नीलगिरि
उत्तर देखें
राजस्थान और हरियाणा की अरावली श्रेणी प्राचीन या अवशिष्ट वलित पर्वत है, जिसका वलन पूर्व-कैम्ब्रियन काल में हुआ और अपरदन से यह नीची गोल पहाड़ियों में बदल गई; माउंट आबू पर स्थित गुरु शिखर इसका सर्वोच्च बिंदु है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राइन रिफ्ट घाटी के दोनों ओर स्थित वॉस्जेस और ब्लैक फॉरेस्ट किस प्रकार के पर्वतों के उदाहरण हैं?
- A.वलित पर्वत
- B.ज्वालामुखी पर्वत
- C.ब्लॉक पर्वत
- D.अवशिष्ट पर्वत
उत्तर देखें
ब्लॉक पर्वत तनाव बलों से बनते हैं, जो भूपर्पटी को भ्रंशों के सहारे तोड़ देते हैं; भ्रंशों के बीच या किनारे ऊपर बचा भाग होर्स्ट और धँसा गर्त ग्रैबेन या रिफ्ट घाटी कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अफ्रीका की सर्वोच्च चोटी माउंट किलिमंजारो किस प्रकार के पर्वत का उदाहरण है?
- A.ज्वालामुखी पर्वत
- B.वलित पर्वत
- C.ब्लॉक पर्वत
- D.अवशिष्ट पर्वत
उत्तर देखें
तंजानिया का किलिमंजारो एक प्रसुप्त ज्वालामुखी है, जो अपने छिद्रों के चारों ओर लावा और राख के बार-बार उद्गार से बना है, और 5,895 मीटर ऊँचाई के साथ यह अफ्रीका का सर्वोच्च बिंदु है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे विस्तृत पठार कौन-सा है, जिसे संसार की छत कहा जाता है?
- A.तिब्बत का पठार
- B.दक्कन पठार
- C.पैटागोनिया पठार
- D.लोएस पठार
उत्तर देखें
दक्षिण में हिमालय और उत्तर में कुनलुन के बीच स्थित यह अंतरापर्वतीय पठार है, जो विश्व में सबसे ऊँचा और सबसे विस्तृत है और जिसकी औसत ऊँचाई लगभग साढ़े चार हजार मीटर है, इसी कारण इसे संसार की छत कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →महाराष्ट्र का दक्कन ट्रैप, जिससे काली रेगुर मिट्टी बनी है, किस प्रकार के पठार का उदाहरण है?
- A.अंतरापर्वतीय पठार
- B.लावा पठार
- C.गिरिपद पठार
- D.लोएस पठार
उत्तर देखें
दक्कन ट्रैप क्रिटेशियस काल के अंत में अत्यंत तरल बेसाल्ट लावा के दरारी उद्गारों से बना, जो पश्चिमी और मध्य भारत के विशाल क्षेत्र पर चादर के ऊपर चादर के रूप में फैल गया; उसी बेसाल्ट के अपक्षय से काली कपास मिट्टी बनती है, जिसे रेगुर भी कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के उत्तरी मैदान में कौन-सी पेटी मोटे कंकड़-पत्थर से बनी है और इतनी पारगम्य है कि पहाड़ों से उतरती नदियाँ उसमें लुप्त हो जाती हैं?
- A.तराई
- B.बांगर
- C.भाबर
- D.खादर
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भाबर शिवालिक के पाद में आठ से सोलह किलोमीटर चौड़ी सँकरी पेटी है, जिसमें नदियों द्वारा लाए कंकड़ और बजरी जमा हैं; यह इतनी पारगम्य है कि छोटी नदियाँ इसमें धँसकर लुप्त हो जाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उत्तरी मैदान के बाढ़ के मैदानों का वह नवीन जलोढ़, जो लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ से नया हो जाता है, क्या कहलाता है?
- A.बांगर
- B.खादर
- C.भाबर
- D.करेवा
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खादर नीची भूमि का नवीन जलोढ़ है, जिसे नदियाँ लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ से नया कर देती हैं, इसलिए उसमें चूने की गाँठें नहीं होतीं, महीन सिल्ट भरपूर होती है और वह मैदान की सर्वाधिक उत्पादक भूमि है; पंजाब में नदी के सहारे की खादर पट्टी को बेट कहा जाता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →नदियों के दीर्घकालिक अपरदन कार्य से आधार तल के निकट बना लगभग समतल धरातल क्या कहलाता है?
- A.पेडीप्लेन
- B.समप्राय मैदान
- C.संरचनात्मक मैदान
- D.डेल्टाई मैदान
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समप्राय मैदान, जिसका अर्थ लगभग मैदान है, आर्द्र प्रदेश में नदी अपरदन चक्र की अंतिम अवस्था है, जब घाटियाँ चौड़ी हो जाती हैं और जल विभाजक घिसकर नीचे आ जाते हैं तथा भूमि आधार तल के निकट पहुँच जाती है, जिसके ऊपर कुछ कठोर अवशिष्ट पहाड़ियाँ खड़ी रह जाती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अर्जेंटीना का पैटागोनिया पठार और पूर्वी संयुक्त राज्य अमेरिका का पीडमॉण्ट पठार किस प्रकार के पठारों के उदाहरण हैं?
- A.गिरिपद पठार
- B.अंतरापर्वतीय पठार
- C.लावा पठार
- D.विच्छेदित पठार
उत्तर देखें
गिरिपद पठार पर्वत श्रेणी के पाद में होता है और उसके दूसरी ओर मैदान या समुद्र रहता है, तथा यह सामान्यतः अंतरापर्वतीय पठार से नीचा होता है; पैटागोनिया एंडीज और अटलांटिक के बीच है और अमेरिका का पीडमॉण्ट पठार एपलेशियन तथा अटलांटिक तटीय मैदान के बीच।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नीलगिरि पहाड़ियाँ और पारसनाथ पहाड़ी सामान्यतः किस प्रकार के पर्वतों के उदाहरण के रूप में दी जाती हैं?
- A.वलित पर्वत
- B.ब्लॉक पर्वत
- C.अवशिष्ट पर्वत
- D.ज्वालामुखी पर्वत
उत्तर देखें
अवशिष्ट पर्वत वे हैं जो किसी पठार या प्राचीन पर्वत समूह के बहुत लंबे समय तक घिसने के बाद शेष रह जाते हैं और जिनमें केवल कठोरतम चट्टानें उभरी रहती हैं; पश्चिमी घाट की नीलगिरि, झारखंड की पारसनाथ, गुजरात की गिरनार तथा राजमहल पहाड़ियाँ इसके भारतीय उदाहरण हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सतपुड़ा श्रेणी की सर्वोच्च चोटी का नाम बताइए।
- A.धूपगढ़
- B.कलसुबाई
- C.दोडाबेट्टा
- D.अनाईमुडी
उत्तर देखें
लगभग 1,350 मीटर ऊँचा धूपगढ़ मध्य प्रदेश की पचमढ़ी पहाड़ियों में स्थित है और सतपुड़ा श्रेणी की सर्वोच्च चोटी है; सतपुड़ा नर्मदा तथा ताप्ती के सहारे भ्रंशों से घिरा ब्लॉक पर्वत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उस राज्य की पहचान कीजिए जिसमें दक्कन पठार की सर्वोच्च चोटी अनाईमुडी स्थित है।
- A.कर्नाटक
- B.तमिलनाडु
- C.केरल
- D.आंध्र प्रदेश
उत्तर देखें
लगभग 2,695 मीटर ऊँचा अनाईमुडी केरल के इडुक्की जिले की अनाईमलाई पहाड़ियों में उठता है और पश्चिमी घाट तथा हिमालय के दक्षिण के समूचे प्रायद्वीपीय पठार की सर्वोच्च चोटी है; इसके चारों ओर का इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान नीलगिरि तहर का आश्रय है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्वत और पहाड़ी में क्या अंतर है?
दोनों आसपास की भूमि से ऊँचे उठान हैं, परंतु पर्वत अधिक ऊँचा होता है, उसका शिखर-क्षेत्र छोटा और ढाल तीव्र होते हैं, जबकि पहाड़ी नीची होती है, उसके ढाल मंद और शीर्ष चौड़ा होता है। भारतीय पाठ्यपुस्तकों में सामान्यतः लगभग छह सौ मीटर से अधिक ऊँचाई को पर्वत और उससे कम को पहाड़ी माना जाता है, यद्यपि यह सीमा परंपरा का विषय है।
हिमालय किस प्रकार का पर्वत है और वह आज भी क्यों ऊपर उठ रहा है?
हिमालय नवीन वलित पर्वत है, जो भारतीय प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने पर टेथिस सागर के अवसादों के संपीडन से उठा। भारतीय प्लेट आज भी उत्तर की ओर दबाव डाल रही है, इसलिए वलन जारी है और श्रेणी ऊपर उठ रही है, जिससे यह क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से भी सक्रिय है।
समप्राय मैदान और पेडीप्लेन में क्या अंतर है?
समप्राय मैदान आर्द्र प्रदेश में बना वह लगभग समतल धरातल है जो नदियों के दीर्घकालिक अपरदन से भूमि को आधार तल के निकट ले आने पर शेष रहता है। पेडीप्लेन शुष्क या अर्ध-शुष्क प्रदेश का वैसा ही धरातल है, जो मुख्यतः परत प्रवाह और पहाड़ी ढालों के पश्चगामी अपरदन से बनता है, नदी घाटियों से नहीं।
खादर बांगर से अधिक उपजाऊ क्यों है?
खादर बाढ़ के मैदानों का नवीन जलोढ़ है, जहाँ नदियाँ लगभग प्रत्येक वर्ष बाढ़ लाती हैं, इसलिए उसे महीन सिल्ट की नई परत मिलती रहती है और उसमें कंकड़ नामक चूने की गाँठें नहीं होतीं। बांगर ऊँची वेदिकाओं पर है, जहाँ अब बाढ़ नहीं पहुँचती, इसलिए उसकी मिट्टी पुरानी, कहीं-कहीं मोटी और कम उत्पादक होती है।
विश्व का सबसे ऊँचा पठार कौन-सा है?
तिब्बत का पठार, जो हिमालय और कुनलुन श्रेणी के बीच स्थित अंतरापर्वतीय पठार है और जिसकी औसत ऊँचाई लगभग साढ़े चार हजार मीटर है। यह पृथ्वी का सबसे ऊँचा और सबसे विस्तृत पठार है, इसी कारण इसे संसार की छत कहा जाता है।
स्रोत
- भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा 11), स्थलरूप और उनका विकास अध्याय — एनसीईआरटी
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), उच्चावच अध्याय — एनसीईआरटी
- समकालीन भारत एक (कक्षा 9), भारत का भौतिक स्वरूप अध्याय — एनसीईआरटी





