महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी: नोट्स
महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी पर नोट्स: वेगनर का सिद्धांत और प्रमाण, पैंजिया, सागर नितल प्रसरण, सात प्रमुख प्लेटें, प्लेट किनारे तथा भारतीय प्लेट।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

विश्व का नक्शा सदा ऐसा नहीं था जैसा आज है। महाद्वीप खिसके हैं और आज भी प्रति वर्ष कुछ सेंटीमीटर खिसक रहे हैं। इसकी व्याख्या तीन चरणों में बनी: 1912 में अल्फ्रेड वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत, 1961 में हैरी हेस का सागर नितल प्रसरण, और 1967 में प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत, जो आज मान्य है। परीक्षा में नाम, वर्ष, प्रमाण और सबसे अधिक प्लेटें तथा उनके किनारे पूछे जाते हैं, इसलिए यह नोट इन चारों को साथ रखता है।
वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
जर्मन मौसम विज्ञानी अल्फ्रेड वेगनर ने 1912 में विस्थापन सिद्धांत दिया और उसे अपनी पुस्तक महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति में विस्तार से रखा। उनके अनुसार सभी महाद्वीप पहले एक ही विशाल भूखंड पैंजिया के रूप में थे, जिसके चारों ओर एक ही महासागर पैंथालासा था। लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व पैंजिया टूटने लगा: उत्तरी भाग लॉरेशिया या अंगारालैंड दक्षिणी भाग गोंडवानालैंड से अलग हुआ और दोनों के बीच संकरा टेथिस सागर रह गया। भारत, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका गोंडवानालैंड के भाग थे। वेगनर ने विस्थापन के लिए दो बल बताए: पृथ्वी के घूर्णन तथा विषुवत रेखा के उभार से उत्पन्न ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल, और चंद्रमा तथा सूर्य के आकर्षण से उत्पन्न ज्वारीय बल। दोनों महाद्वीपों को खिसकाने के लिए अत्यंत दुर्बल सिद्ध हुए और यही इस सिद्धांत की मुख्य आलोचना है।
विस्थापन के प्रमाण
- जिग-सॉ फिट: दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के तट एक ही फटी चादर के टुकड़ों की तरह आमने-सामने बैठते हैं।
- समान आयु की चट्टानें: ब्राजील के तट पर लगभग दो अरब वर्ष पुरानी चट्टानों की पट्टी पश्चिमी अफ्रीका में फिर दिखाई देती है।
- टिलाइट: हिमानी निक्षेपों से बनी यह अवसादी चट्टान भारत के गोंडवाना क्रम में तथा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में एक जैसी मिलती है।
- प्लेसर निक्षेप: घाना के तट पर सोने के समृद्ध प्लेसर, जिनकी मूल चट्टान ब्राजील में है।
- जीवाश्म: गोंडवाना कोयला परतों का पादप ग्लोसोप्टेरिस तथा सरीसृपों के जीवाश्म उन महाद्वीपों में फैले हैं जो आज चौड़े महासागरों से अलग हैं।
संवहन धाराएं और सागर नितल प्रसरण
आर्थर होम्स ने 1930 के दशक में सुझाया कि रेडियोसक्रिय क्षय की ऊष्मा से चलने वाली मैंटल की तापीय संवहन धाराएं भूपटल को खींच सकती हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सागर नितल के मानचित्रण ने मध्य महासागरीय कटक, गहरी गर्त और पतले अवसाद दिखाए, और 1961 में हैरी हेस ने सागर नितल प्रसरण का विचार रखा। पिघला पदार्थ मध्य महासागरीय कटक के सहारे ऊपर आता है, पुराने नितल को दोनों ओर धकेलता है और नए भूपटल के रूप में जम जाता है; जहां नितल महाद्वीप से मिलता है, वहां वह गर्त में झुककर नष्ट हो जाता है। प्रमाण स्पष्ट हैं: कटक पर चट्टानें सबसे नई हैं और दूर जाने पर पुरानी होती जाती हैं, सागर नितल का कोई भाग लगभग बीस करोड़ वर्ष से अधिक पुराना नहीं है, कटक पर अवसाद बहुत पतले हैं, और कटक के दोनों ओर सामान्य तथा विपरीत चुंबकीय ध्रुवता की पट्टियां एक-दूसरे का दर्पण प्रतिबिंब हैं। भूकंप तथा ज्वालामुखी भी कटकों और गर्तों के सहारे ही केंद्रित हैं।
प्लेट विवर्तनिकी और प्लेटें
प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत 1967 में दिया गया। इसके अनुसार स्थलमंडल, यानी भूपटल तथा ऊपरी मैंटल का कठोर भाग, प्लेटों में टूटा है, जो प्लास्टिक दुर्बलमंडल पर तैरती हैं और कठोर इकाई के रूप में चलती हैं; महाद्वीप प्लेटों पर सवार रहते हैं और वेगनर की कल्पना की तरह सागर नितल को चीरते नहीं। महाद्वीपीय भूपटल की औसत मोटाई लगभग तीस किलोमीटर और महासागरीय भूपटल की केवल लगभग पांच किलोमीटर होती है, इसी से दोनों के मिलने पर व्यवहार भिन्न होता है। स्थलमंडल सात प्रमुख तथा अनेक गौण प्लेटों में बंटा है।
| प्रमुख प्लेटें | महत्वपूर्ण गौण प्लेटें |
|---|---|
| प्रशांत प्लेट, सबसे बड़ी और पूर्णतः महासागरीय | नाज्का, दक्षिण अमेरिका और प्रशांत के बीच |
| उत्तर अमेरिकी प्लेट | कोकोस, मध्य अमेरिका और प्रशांत के बीच |
| दक्षिण अमेरिकी प्लेट | अरेबियन प्लेट |
| यूरेशियाई प्लेट | फिलीपीन प्लेट |
| अफ्रीकी प्लेट | जुआन डी फ्यूका, उत्तर अमेरिका के पश्चिमी तट पर |
| भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट | कैरिबियन और स्कोशिया प्लेट |
| अंटार्कटिक प्लेट | कैरोलिन और फ्यूजी प्लेट |
प्लेट किनारों के तीन प्रकार
अपसारी या रचनात्मक किनारे पर दो प्लेटें अलग हटती हैं और नया भूपटल बनता है; आइसलैंड से होकर जाने वाला मध्य अटलांटिक कटक इसका आदर्श उदाहरण है और पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश घाटी वही प्रक्रिया थल पर दिखाती है। अभिसारी या विनाशकारी किनारे पर एक प्लेट दूसरी के नीचे क्षेपण क्षेत्र में चली जाती है। तीन स्थितियां पूछी जाती हैं: महासागर और महाद्वीप का मिलना, जो एंडीज जैसे वलित पर्वत उठाता है; महासागर और महासागर का मिलना, जो जापान तथा एल्यूशियन जैसे द्वीप चाप बनाता है; और महाद्वीप तथा महाद्वीप का मिलना, जो बीच के अवसादों को मोड़कर सर्वोच्च पर्वत बनाता है, जैसे भारतीय प्लेट ने यूरेशियाई प्लेट से टकराकर हिमालय उठाया। रूपांतर या संरक्षी किनारे पर प्लेटें एक-दूसरे के समीप से खिसकती हैं, भूपटल न बनता है न नष्ट होता है, पर भूकंप अधिक आते हैं; कैलिफोर्निया का सैन एंड्रियास भ्रंश इसका उदाहरण है। गति की दर बहुत भिन्न है: आर्कटिक कटक प्रति वर्ष ढाई सेंटीमीटर से कम खुलता है, जबकि ईस्टर द्वीप के पास पूर्वी प्रशांत उभार प्रति वर्ष पंद्रह सेंटीमीटर से अधिक।
भारतीय प्लेट का विस्थापन
भारत गोंडवानालैंड का भाग था, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका से जुड़ा हुआ, और विषुवत रेखा से बहुत दक्षिण में स्थित था। गोंडवानालैंड के टूटने पर भारतीय प्लेट लगभग पांच हजार किलोमीटर उत्तर की ओर खिसकी, जो प्लेटों की ज्ञात सबसे लंबी तेज यात्रा है। इस गति के दौरान विशाल दरारी उद्भेदनों ने लगभग छह करोड़ वर्ष पूर्व प्रायद्वीपीय भारत के दक्कन ट्रैप बेसाल्ट बिछाए। भारत और एशिया के बीच का टेथिस सागर बंद हुआ, उसके अवसाद दबकर ऊपर मुड़े और हिमालय उठा; प्लेट रुकी नहीं है, इसलिए पर्वत आज भी ऊंचे हो रहे हैं और कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक की पट्टी देश का सर्वाधिक भूकंप प्रवण भाग बनी हुई है। ट्रांस हिमालय की जास्कर तथा काराकोरम श्रेणियां, सिंधु और ब्रह्मपुत्र के सीवन क्षेत्र तथा उत्तर-पूर्व के बार-बार आने वाले भूकंप उसी अपूर्ण टक्कर के अंग हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
सामान्य प्रश्न हैं: विस्थापन सिद्धांत का नाम तथा वर्ष, पैंजिया, पैंथालासा, लॉरेशिया, गोंडवानालैंड और टेथिस के नाम, वेगनर के दो बल, सागर नितल प्रसरण के वैज्ञानिक, प्रमुख प्लेटों की संख्या, तथा प्रत्येक उदाहरण किस किनारे का है। दूसरा समूह भारत पर आता है: दक्कन ट्रैप, हिमालय उठाने वाली टक्कर और उसके भूकंपीय क्षेत्र। जाल: विस्थापन 1912 का है और प्लेट विवर्तनिकी 1967 की, दोनों वर्ष मिलाएं नहीं; वेगनर महाद्वीपों को सागर नितल में से चलाते थे, प्लेट विवर्तनिकी पूरी प्लेट चलाती है; प्रशांत प्लेट सबसे बड़ी और पूर्णतः महासागरीय है; नाज्का तथा कोकोस गौण प्लेटें हैं, प्रमुख नहीं; और सैन एंड्रियास भ्रंश रूपांतर किनारा है, क्षेपण क्षेत्र नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत | अल्फ्रेड वेगनर, 1912; पुस्तक महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति |
|---|---|
| महाखंड और महासागर | पैंजिया और पैंथालासा |
| विखंडन | लगभग 20 करोड़ वर्ष पूर्व लॉरेशिया तथा गोंडवानालैंड में, बीच में टेथिस सागर |
| वेगनर के बल | ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल और ज्वारीय बल |
| संवहन धारा सिद्धांत | आर्थर होम्स, 1930 का दशक |
| सागर नितल प्रसरण | हैरी हेस, 1961 |
| प्लेट विवर्तनिकी | 1967 में प्रतिपादित; दुर्बलमंडल पर स्थलमंडलीय प्लेटें |
| प्लेटों की संख्या | सात प्रमुख प्लेटें और कई गौण प्लेटें |
| सबसे बड़ी प्लेट | प्रशांत प्लेट, पूर्णतः महासागरीय |
| भूपटल की मोटाई | महाद्वीपीय भूपटल लगभग 30 किमी, महासागरीय भूपटल लगभग 5 किमी |
| किनारों के उदाहरण | मध्य अटलांटिक कटक (अपसारी), हिमालय और एंडीज (अभिसारी), सैन एंड्रियास भ्रंश (रूपांतर) |
| प्रसरण की दर | आर्कटिक कटक प्रति वर्ष 2.5 सेंटीमीटर से कम; पूर्वी प्रशांत उभार 15 सेंटीमीटर से अधिक |
| भारतीय प्लेट | लगभग 5,000 किमी उत्तर खिसकी; दक्कन ट्रैप लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व; टक्कर से हिमालय |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
- A.अल्फ्रेड वेगनर
- B.हैरी हेस
- C.आर्थर होम्स
- D.चार्ल्स लायल
उत्तर देखें
जर्मन मौसम तथा जलवायु विज्ञानी वेगनर ने 1912 में महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत रखा और उसे अपनी पुस्तक महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति में विकसित किया; उनका मत था कि सभी महाद्वीप पहले एक ही भूखंड पैंजिया थे, जो लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व टूटने लगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वेगनर के सिद्धांत में महाखंड पैंजिया को घेरने वाले एकमात्र विशाल महासागर का नाम क्या था?
- A.टेथिस
- B.पैंथालासा
- C.लॉरेशिया
- D.गोंडवाना
उत्तर देखें
वेगनर के अनुसार लगभग पच्चीस करोड़ वर्ष पूर्व पृथ्वी की सारी भूमि एक ही पिंड पैंजिया के रूप में थी और उसके चारों ओर एक ही विशाल महासागर पैंथालासा फैला था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वेगनर ने महाद्वीपीय विस्थापन का कारण किन बलों को बताया था?
- A.कटक धक्का और प्लेट खिंचाव
- B.ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल और ज्वारीय बल
- C.समस्थिति और गुरुत्व
- D.संवहन धाराएं और रेडियोसक्रियता
उत्तर देखें
वेगनर ने महाद्वीपों की क्षैतिज गति का कारण ध्रुवीय प्रतिकर्षण बल बताया, जो पृथ्वी के घूर्णन तथा विषुवत रेखा के उभार से उत्पन्न होता है, और ज्वारीय बल, जो चंद्रमा तथा सूर्य के आकर्षण से उत्पन्न होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पैंजिया के विभाजन के बाद टेथिस सागर किन दो भूखंडों को अलग करता था?
- A.लॉरेशिया और गोंडवानालैंड
- B.अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका
- C.भारत और ऑस्ट्रेलिया
- D.अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें
लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व जब पैंजिया टूटने लगा, वह उत्तर में लॉरेशिया या अंगारालैंड तथा दक्षिण में गोंडवानालैंड में बंट गया, और दोनों के बीच लंबा संकरा टेथिस सागर फैला रहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सागर नितल प्रसरण की संकल्पना किसने दी?
- A.अल्फ्रेड वेगनर
- B.हैरी हेस
- C.अल्फ्रेड लोथार नाज्का
- D.एडवर्ड स्वेस
उत्तर देखें
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान और उसके बाद सागर नितल के विस्तृत मानचित्रण से मध्य महासागरीय कटक, गहरी गर्त तथा आश्चर्यजनक रूप से पतली अवसाद परत सामने आई, और हेस ने 1961 में प्रस्तावित किया कि पिघला पदार्थ कटक के सहारे ऊपर आता है, नया सागर नितल बनाता है और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →हिमालय का निर्माण किस प्रकार के प्लेट किनारे से हुआ?
- A.अपसारी किनारा
- B.रूपांतर किनारा
- C.महाद्वीप और महाद्वीप का अभिसारी किनारा
- D.महासागर और महासागर का अभिसारी किनारा
उत्तर देखें
भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशियाई प्लेट से मिली। दोनों पर हल्का महाद्वीपीय भूपटल है, इसलिए कोई भी मैंटल में गहरे नहीं धंस सकी; उनके बीच पड़े टेथिस सागर के अवसाद दब गए, मुड़े और ऊपर उठकर हिमालय बने, और टक्कर आज भी जारी है, इसीलिए श्रेणी अब भी…
पूरी व्याख्या पढ़ें →कैलिफोर्निया का सैन एंड्रियास भ्रंश किस प्रकार के प्लेट किनारे का उदाहरण है?
- A.रचनात्मक या अपसारी
- B.विनाशकारी या अभिसारी
- C.संरक्षी या रूपांतर
- D.क्षेपण क्षेत्र
उत्तर देखें
सैन एंड्रियास भ्रंश के सहारे प्रशांत प्लेट और उत्तर अमेरिकी प्लेट क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के समीप से खिसकती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन एक गौण विवर्तनिक प्लेट है?
- A.नाज्का प्लेट
- B.भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्लेट
- C.अंटार्कटिक प्लेट
- D.अफ्रीकी प्लेट
उत्तर देखें
यह दक्षिण अमेरिका और प्रशांत प्लेट के बीच स्थित है तथा कोकोस, अरेबियन, फिलीपीन, कैरिबियन, जुआन डी फ्यूका, स्कोशिया, कैरोलिन और फ्यूजी के साथ प्रसिद्ध गौण प्लेटों में आती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस कटक पर सागर नितल प्रसरण की दर सर्वाधिक है?
- A.आर्कटिक कटक
- B.मध्य अटलांटिक कटक
- C.पूर्वी प्रशांत उभार
- D.कार्ल्सबर्ग कटक
उत्तर देखें
दक्षिण प्रशांत में ईस्टर द्वीप के पास यह उभार प्रति वर्ष पंद्रह सेंटीमीटर से अधिक की दर से फैलता है, जो मापी गई सर्वाधिक दर है, जबकि विकल्प A का आर्कटिक कटक प्रति वर्ष ढाई सेंटीमीटर से कम की सबसे धीमी दर रखता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी का स्थलमंडल ______ प्रमुख तथा कुछ गौण प्लेटों में विभाजित है।
- A.7
- B.6
- C.12
- D.16
उत्तर देखें
1967 में प्रतिपादित प्लेट विवर्तनिकी के अनुसार स्थलमंडल सात प्रमुख तथा कई गौण प्लेटों में टूटा है, जो प्लास्टिक दुर्बलमंडल पर चलती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पृथ्वी के महाद्वीपीय भूपटल की औसत मोटाई कितनी है?
- A.300 किमी
- B.5 किमी
- C.30 किमी
- D.2.5 किमी
उत्तर देखें
भूपटल पृथ्वी की सबसे बाहरी और सबसे पतली परत है तथा दो प्रकार की होती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत किसने और कब दिया?
जर्मन मौसम विज्ञानी अल्फ्रेड वेगनर ने 1912 में यह सिद्धांत दिया और अपनी पुस्तक महाद्वीपों और महासागरों की उत्पत्ति में इसकी व्याख्या की। उनके अनुसार सभी महाद्वीप पहले एक भूखंड पैंजिया थे, जो लगभग बीस करोड़ वर्ष पूर्व टूटने लगा।
महाद्वीपीय विस्थापन और प्लेट विवर्तनिकी में क्या अंतर है?
वेगनर महाद्वीपों को सागर नितल में से चलाते थे और पर्याप्त बल नहीं बता सके। 1967 की प्लेट विवर्तनिकी पूरी स्थलमंडलीय प्लेट को, महाद्वीप तथा सागर नितल सहित, दुर्बलमंडल पर चलाती है, जिसे मैंटल संवहन, कटक धक्का और प्लेट खिंचाव संचालित करते हैं।
प्रमुख विवर्तनिक प्लेटें कितनी हैं?
सात प्रमुख प्लेटें हैं: प्रशांत, उत्तर अमेरिकी, दक्षिण अमेरिकी, यूरेशियाई, अफ्रीकी, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई और अंटार्कटिक प्लेट। इनके अतिरिक्त नाज्का, कोकोस, अरेबियन, फिलीपीन, कैरिबियन, जुआन डी फ्यूका तथा स्कोशिया जैसी अनेक गौण प्लेटें हैं।
हिमालय किस प्रकार के प्लेट किनारे से बना?
महाद्वीप और महाद्वीप के अभिसारी किनारे से। भारतीय प्लेट उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशियाई प्लेट से टकराई; दोनों हल्के महाद्वीपीय भूपटल वाली हैं, इसलिए कोई गहरे नहीं धंसी और बीच के टेथिस सागर के अवसाद मुड़कर हिमालय बन गए।
सागर नितल प्रसरण के प्रमाण क्या हैं?
सागर नितल मध्य महासागरीय कटक पर सबसे नया और दूर जाने पर पुराना होता है, उसका कोई भाग लगभग बीस करोड़ वर्ष से अधिक पुराना नहीं है, कटक पर अवसाद की परत बहुत पतली है, और कटक के दोनों ओर सामान्य तथा विपरीत चुंबकीय ध्रुवता की पट्टियां दर्पण प्रतिबिंब की तरह हैं।
सैन एंड्रियास भ्रंश किसका उदाहरण है?
रूपांतर या संरक्षी प्लेट किनारे का, जहां प्रशांत और उत्तर अमेरिकी प्लेट क्षैतिज रूप से एक-दूसरे के समीप से खिसकती हैं। नया भूपटल न बनता है न पुराना नष्ट होता है, परंतु भ्रंश के अटकने और अचानक सरकने से कैलिफोर्निया विश्व के सर्वाधिक भूकंप प्रवण क्षेत्रों में है।
स्रोत
- भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा ग्यारह), अध्याय 4: महासागरों और महाद्वीपों का वितरण — एनसीईआरटी
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा ग्यारह), अध्याय 2: संरचना तथा भू-आकृति विज्ञान — एनसीईआरटी





