भारत की मिट्टियां: प्रकार, वितरण, अपरदन और प्रश्न
भारतीय मिट्टियों के परीक्षोपयोगी नोट्स: जलोढ़, काली, लाल, लैटेराइट, शुष्क, लवणीय और पीटमय मिट्टी, उनके क्षेत्र और फसलें, तथा मृदा अपरदन एवं संरक्षण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

मिट्टी पृथ्वी की सतह पर पड़ी ढीले पदार्थ की वह पतली ऊपरी परत है जिसमें पौधे उगते हैं। यह लंबे समय में मूल चट्टान के अपक्षय तथा सड़ी-गली वनस्पति और जीव-अवशेषों के मिलने से बनती है, और इसका स्वरूप उस क्षेत्र की भू-आकृति, जलवायु, वनस्पति तथा निर्माण के लिए मिले समय पर निर्भर करता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद भारत की मिट्टियों को आठ प्रमुख वर्गों में बांटती है, और लगभग हर सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र में प्रकार, क्षेत्र और फसल की इसी तालिका से प्रश्न आते हैं।
मिट्टी का निर्माण और मृदा परिच्छेदिका
भूमि को खड़ी काटकर देखने पर मृदा परिच्छेदिका दिखाई देती है, जिसमें ह्यूमस से भरपूर ऊपरी परत अ संस्तर, नीचे जमा चिकनी मिट्टी और खनिजों वाली परत ब संस्तर तथा अपक्षयित मूल चट्टान स संस्तर कहलाती है। उर्वरता खनिजों और जैविक पदार्थ के उचित मेल पर, मिट्टी की जल तथा वायु धारण क्षमता पर और उसकी अभिक्रिया पर निर्भर करती है। जिस मिट्टी में हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता अधिक हो वह अम्लीय होती है और जिसमें सोडियम जैसे क्षार अधिक हों वह क्षारीय; पहली को सुधारने के लिए चूना और दूसरी के लिए जिप्सम डाला जाता है। देश में मृदा सर्वेक्षण और मानचित्रण का काम नागपुर स्थित राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो करता है, जो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का संस्थान है।
प्रमुख मृदा प्रकार
| मिट्टी | क्षेत्र | मुख्य फसलें |
|---|---|---|
| जलोढ़ | उत्तरी मैदान, ब्रह्मपुत्र घाटी तथा महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टा | गेहूं, चावल, गन्ना, दलहन |
| काली या रेगुर | महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ का दक्कन ट्रैप क्षेत्र | कपास, ज्वार, मूंगफली |
| लाल और पीली | पूर्वी तथा दक्षिणी प्रायद्वीप, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के क्रिस्टलीय चट्टानी क्षेत्र | मोटे अनाज, दलहन, मूंगफली |
| लैटेराइट | कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा और असम की पहाड़ियां | चाय, कॉफी, काजू |
| शुष्क | पश्चिमी राजस्थान और उससे लगे शुष्क भाग | जौ, सिंचाई के साथ बाजरा |
| लवणीय और क्षारीय | पश्चिमी गुजरात, पूर्वी तट के डेल्टा, पंजाब-हरियाणा के नहरी क्षेत्र | बहुत कम; जिप्सम से सुधार |
| पीटमय और दलदली | केरल का कुट्टनाड, तटीय ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तरी बिहार के भाग | चावल |
| वन और पर्वतीय | हिमालय की ढालें और घाटियां, प्रायद्वीप की पहाड़ियां | चाय, बागवानी, मसाले |
जलोढ़ मिट्टी
जलोढ़ भारत की सबसे विस्तृत और सबसे उपजाऊ मिट्टी है, जिसे सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा प्रायद्वीपीय नदियों ने अपने डेल्टाओं में जमा किया है। इसमें पोटाश, फॉस्फोरिक अम्ल और चूना पर्याप्त होता है, पर नाइट्रोजन तथा ह्यूमस की कमी रहती है। आयु के आधार पर इसके दो भाग हैं: बांगर, अर्थात पुरानी जलोढ़, जो ऊंचे चबूतरों पर मिलती है और जिसमें कंकर नामक चूने की गांठें होती हैं, तथा खादर, अर्थात नई जलोढ़, जो बाढ़ के मैदान में हर वर्ष नई मिट्टी पाकर अधिक महीन और अधिक उपजाऊ बनी रहती है।
काली मिट्टी
काली मिट्टी, जिसे रेगुर या काली कपास मिट्टी कहा जाता है, दक्कन के लावा के अपक्षय से बनी है। यह गहरी और चिकनी होती है, लंबे समय तक नमी रोके रखती है तथा इसमें कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना भरपूर होते हैं, जबकि फॉस्फोरिक अम्ल, नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ की कमी रहती है। गर्मी में यह सिकुड़कर चौड़ी दरारें बना लेती है, जिनसे नीचे तक हवा पहुंच जाती है, इसीलिए इसे स्वतः जुताई वाली मिट्टी भी कहा जाता है। यही देश की स्वाभाविक कपास मिट्टी है।
लाल, लैटेराइट और शुष्क मिट्टी
लाल मिट्टी कम वर्षा वाले क्षेत्रों में क्रिस्टलीय आग्नेय और कायांतरित चट्टानों पर बनती है। इसका रंग चट्टान में लोहे के प्रसार से आता है और जल-योजित रूप में लोहा होने पर यह पीली दिखती है; इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और ह्यूमस की कमी रहती है। लैटेराइट मिट्टी अधिक तापमान और भारी वर्षा की देन है, जहां तीव्र निक्षालन चूना और सिलिका बहा ले जाता है तथा जीवाणु ह्यूमस को नष्ट कर देते हैं; शेष मिट्टी में लौह ऑक्साइड और पोटाश अधिक पर जैविक पदार्थ, नाइट्रोजन तथा कैल्शियम कम रहते हैं। हवा लगने पर यह कठोर हो जाती है, इसलिए इसकी ईंटें काटकर भवन बनाए जाते हैं। शुष्क मिट्टी बलुई और लवणीय, रंग में लाल से भूरी तथा ह्यूमस में कम होती है और प्रायः उसके नीचे कंकर की परत जल के प्रवाह को रोक देती है।
मृदा अपरदन और संरक्षण
जल या पवन द्वारा ऊपरी मिट्टी का हटना मृदा अपरदन कहलाता है। परतदार अपरदन में पानी चौड़ी ढाल पर फैलकर मिट्टी की पतली और एक समान परत बहा ले जाता है, इसलिए वह दिखाई नहीं देता और यही उसे सबसे खतरनाक बनाता है। अवनालिका अपरदन गहरी नालियां काटता है और जब ये दूर तक फैल जाती हैं तो भूमि कृषि योग्य नहीं रहती, जिसे उत्खात भूमि कहते हैं; चंबल घाटी के बीहड़ इसका मानक उदाहरण हैं। शुष्क पश्चिमी भाग में पवन अपरदन प्रमुख है। संरक्षण के उपाय हैं समोच्च जुताई, ढालों पर सीढ़ीदार खेती, पट्टीदार खेती, पवन की दिशा में वृक्षों की रक्षक मेखला, पलवार तथा समोच्च बांध और चेक डैम। इसके विपरीत अपक्षय चट्टान के टूटने की वह प्राकृतिक प्रक्रिया है जिससे मिट्टी बनती है, वह संरक्षण की विधि कभी नहीं है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन तरह के प्रश्न बनते हैं। पहला, मिट्टी और उसका क्षेत्र या फसल, जिसमें काली मिट्टी के साथ कपास और दक्कन ट्रैप, लैटेराइट के साथ चाय-कॉफी तथा महानदी और गोदावरी के डेल्टा के साथ जलोढ़ सबसे अधिक पूछे जाते हैं। दूसरा, कथन आधारित प्रश्न में मिट्टी का संघटन, जहां सामान्य भ्रम यह फैलाया जाता है कि काली मिट्टी फॉस्फोरस या नाइट्रोजन से भरपूर है, जबकि इन दोनों की उसमें कमी होती है। तीसरा, अपरदन और संरक्षण, जिसमें परतदार अपरदन का सबसे कम दिखाई देना और अपक्षय का संरक्षण विधि न होना बार-बार पूछा जाता है। खादर बनाम बांगर तथा लवणीय भूमि पर जिप्सम का प्रयोग अन्य प्रिय एक पंक्ति वाले तथ्य हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रमुख मृदा प्रकार | आठ, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वर्गीकरण के अनुसार |
|---|---|
| सबसे विस्तृत मिट्टी | जलोढ़ मिट्टी |
| पुरानी और नई जलोढ़ | बांगर, जिसमें कंकर होते हैं; खादर, अधिक महीन और उपजाऊ |
| काली मिट्टी | रेगुर, दक्कन लावा से बनी, कपास के लिए आदर्श |
| काली मिट्टी में कमी | फॉस्फोरिक अम्ल, नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ |
| लैटेराइट की फसलें | चाय, कॉफी और काजू |
| लवणीय भूमि का सुधार | जिप्सम और बेहतर जल निकास |
| सबसे कम दिखने वाला अपरदन | परतदार अपरदन |
| उत्खात भूमि का उदाहरण | चंबल घाटी के बीहड़ |
| मृदा सर्वेक्षण संस्थान | राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
महानदी और गोदावरी के डेल्टा ______ मिट्टी से समृद्ध हैं।
- A.काली
- B.शुष्क
- C.वन
- D.जलोढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. जलोढ़
व्याख्या
सही उत्तर D, जलोढ़ है। डेल्टा उसी गाद से बनता है जिसे नदी बहाकर लाती है और समुद्र से मिलने के स्थान पर जमा कर देती है, इसलिए डेल्टा की भूमि परिभाषा से ही जलोढ़ होती है; महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के पूर्वी तटीय डेल्टा देश के सबसे उपजाऊ चावल क्षेत्रों में गिने जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि काली मिट्टी दक्कन के लावा के अपक्षय से उसी स्थान पर बनी अवशिष्ट मिट्टी है और पठार पर मिलती है, डेल्टा में नहीं, यद्यपि ये नदियां ऊपर उसी पर बहती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि शुष्क मिट्टी पश्चिमी राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले भागों की है, जहां मिट्टी बलुई और लवणीय होती है। विकल्प C गलत है क्योंकि वन मिट्टी वृक्षों से ढकी पहाड़ी ढालों और घाटियों में बनती है, तटीय मैदान में नहीं।
काली मिट्टी के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
- A.यह दक्कन ट्रैप के साथ पाई जाती है।
- B.इसमें फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है।
- C.इसकी नमी धारण क्षमता अच्छी होती है।
- D.गर्म मौसम में इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इसमें फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है।
व्याख्या
सही उत्तर B है, क्योंकि काली मिट्टी में फॉस्फोरिक अम्ल, नाइट्रोजन और जैविक पदार्थ की कमी होती है, अधिकता नहीं। इसमें जो अधिक होता है वह है कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना, और इसी छोटी सूची को याद रखना इस मिट्टी पर बने हर कथन प्रश्न का सबसे सुरक्षित रास्ता है। विकल्प A सही कथन है, क्योंकि यह मिट्टी दक्कन ट्रैप के लावा के अपक्षय से बनी है और इसका मुख्य विस्तार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा छत्तीसगढ़ में है। विकल्प C सही कथन है, क्योंकि महीन चिकनी बनावट के कारण यह सूखे महीनों तक नमी रोके रखती है, इसीलिए इस पर बिना सिंचाई कपास होती है। विकल्प D सही कथन है, क्योंकि गर्मी में सिकुड़कर बनी चौड़ी दरारों से नीचे तक हवा पहुंचती है और इसे स्वतः जुताई वाली मिट्टी कहा जाता है।
निम्नलिखित में से भू-अपरदन का सबसे कम दिखाई देने वाला रूप कौन-सा है?
- A.अवनालिका अपरदन
- B.भूस्खलन
- C.परतदार अपरदन
- D.बीहड़ का बनना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. परतदार अपरदन
व्याख्या
सही उत्तर C, परतदार अपरदन है। इसमें पानी चौड़ी ढाल पर फैलकर ऊपरी मिट्टी की पतली और एक समान परत बहा ले जाता है, इसलिए खेत में देखने को कुछ बचता ही नहीं और हानि वर्षों बाद घटती उपज से पता चलती है। यही अदृश्यता इसे किसान के लिए सबसे खतरनाक बनाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि अवनालिका अपरदन ढाल पर साफ दिखने वाली नालियां काटता है, जो हल रोकने जितनी गहरी होती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि भूस्खलन पहाड़ी ढाल पर चट्टान और मिट्टी का अचानक और अत्यंत स्पष्ट खिसकाव है। विकल्प D गलत है क्योंकि बीहड़ उन्हीं नालियों के चौड़े और गहरे होकर दूर तक फैलने से बनते हैं, जैसे चंबल घाटी में, और वे आकाश से भी दिखाई देते हैं।
निम्नलिखित में से कौन मृदा संरक्षण की विधि नहीं है?
- A.अंतरफसल खेती
- B.पलवार
- C.समोच्च जुताई
- D.अपक्षय
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अपक्षय
व्याख्या
सही उत्तर D, अपक्षय है। अपक्षय तापमान, जल, पवन और जीवों द्वारा चट्टान के प्राकृतिक रूप से टूटने की प्रक्रिया है और यही आरंभ में मिट्टी बनाती है; यह किसान द्वारा अपनाई जाने वाली कोई संरक्षण तकनीक नहीं है, इसलिए यही उत्तर है। विकल्प A उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि अंतरफसल खेती में दो फसलें बारी-बारी पंक्तियों में उगाई जाती हैं, जिससे पूरे मौसम भूमि ढकी रहती है और वर्षा की मार घटती है। विकल्प B उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि पलवार में पौधों के बीच की खुली भूमि को पुआल या फसल अवशेष से ढका जाता है, जिससे वाष्पन घटता है और ऊपरी मिट्टी बहने या उड़ने से बचती है। विकल्प C उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि समोच्च जुताई में कूंड ढाल के आर-पार बनाए जाते हैं और हर कूंड बहते पानी के लिए छोटा अवरोध बन जाता है।
मिट्टी को उपजाऊ क्या बनाता है?
- A.मिट्टी में अम्लीय पदार्थों की अधिकता
- B.खनिजों और अकार्बनिक पदार्थ का उचित मेल
- C.खनिजों और जैविक पदार्थ का उचित मेल
- D.मिट्टी में लवण की अधिक मात्रा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. खनिजों और जैविक पदार्थ का उचित मेल
व्याख्या
सही उत्तर C, खनिजों और जैविक पदार्थ का उचित मेल है। उर्वरता के लिए अपक्षयित चट्टान से मिलने वाले नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे खनिज पोषक चाहिए और साथ ही जैविक पदार्थ यानी सड़े-गले पौधों तथा जीवों से बना ह्यूमस, जो जल रोकता है, मृदा जीवों को भोजन देता है और पोषक तत्व धीरे-धीरे छोड़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अम्ल की अधिकता से पोषक तत्वों की उपलब्धता घटती है और जड़ों की वृद्धि रुकती है, इसीलिए अधिक अम्लीय खेतों में चूना डाला जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें जैविक पदार्थ छूट जाता है; केवल खनिज कणों वाली मिट्टी, जैसे मरुस्थल की रेत, चाहे खनिज से भरपूर हो, उपजाऊ नहीं होती। विकल्प D गलत है क्योंकि लवण की अधिकता ऊसर भूमि की पहचान है, जो देश की सबसे कम उपजाऊ भूमि है और जिसे जिप्सम तथा जल निकास से सुधारना पड़ता है।
भारत में कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी कौन-सी है?
- A.लैटेराइट मिट्टी
- B.काली मिट्टी
- C.शुष्क मिट्टी
- D.पीटमय मिट्टी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. काली मिट्टी
व्याख्या
सही उत्तर B, काली मिट्टी है। रेगुर कही जाने वाली काली मिट्टी दक्कन ट्रैप के लावा से बनी है और इस एक फसल से इतनी जुड़ी है कि इसे लोकप्रिय भाषा में काली कपास मिट्टी ही कहा जाता है। इसकी महीन चिकनी बनावट गहराई तक नमी रोकती है, इसलिए दो वर्षा के बीच लंबे सूखे में भी फसल बिना सिंचाई टिक जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि लैटेराइट मिट्टी से चूना और सिलिका बह चुके होते हैं और उसमें जैविक पदार्थ तथा नाइट्रोजन कम रहता है; वह पहाड़ी ढालों पर चाय, कॉफी और काजू जैसी रोपण फसलें देती है। विकल्प C गलत है क्योंकि शुष्क मिट्टी बलुई, लवणीय और ह्यूमस में कम होती है तथा बाजरे और जौ के लिए भी सिंचाई मांगती है। विकल्प D गलत है क्योंकि पीटमय मिट्टी जलमग्न और अत्यधिक जैविक होती है, जो केरल के कुट्टनाड और तटीय ओडिशा में मुख्यतः चावल के लिए प्रयुक्त होती है।
ऊंचे चबूतरों पर मिलने वाली, चूने की गांठों से युक्त पुरानी जलोढ़ मिट्टी को क्या कहते हैं?
- A.खादर
- B.रेगुर
- C.बांगर
- D.ऊसर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बांगर
व्याख्या
सही उत्तर C, बांगर है। बांगर उत्तरी मैदान की पुरानी जलोढ़ है, जो बाढ़ की सतह से ऊपर कुछ ऊंचे चबूतरों पर मिलती है, अपेक्षाकृत मोटी बनावट की होती है और जिसमें कंकर नाम की कैल्शियम कार्बोनेट की गांठें पाई जाती हैं, जो उर्वरता घटाती हैं और जल के प्रवाह में बाधा डालती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि खादर इसका ठीक उल्टा है, यानी सक्रिय बाढ़ मैदान की नई जलोढ़, जो महीन है, हर बाढ़ में नई गाद पाती है और इसलिए अधिक उपजाऊ रहती है। विकल्प B गलत है क्योंकि रेगुर दक्कन लावा क्षेत्र की काली मिट्टी का दूसरा नाम है और वह जलोढ़ निक्षेप है ही नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि ऊसर लवणीय और क्षारीय भूमि का प्रचलित नाम है, जिसमें सोडियम तथा अन्य लवण अधिक होते हैं और जिसे खेती से पहले जिप्सम से सुधारना पड़ता है।
भारत में लैटेराइट मिट्टी किस फसल समूह के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?
- A.गेहूं और गन्ना
- B.चाय, कॉफी और काजू
- C.कपास और ज्वार
- D.चावल और जूट
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चाय, कॉफी और काजू
व्याख्या
सही उत्तर B, चाय, कॉफी और काजू है। लैटेराइट मिट्टी कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और असम की पहाड़ी ढालों पर भारी वर्षा तथा उच्च तापमान में बनती है और खाद देने के बाद इन्हीं रोपण फसलों को अच्छी तरह संभालती है; केरल और कर्नाटक के तटीय लैटेराइट पर काजू विशेष रूप से होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि गेहूं और गन्ना उत्तरी मैदान की गहरी जलोढ़ मिट्टी की फसलें हैं, जहां सिंचाई भी सुनिश्चित रहती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कपास और ज्वार दक्कन ट्रैप की काली मिट्टी से जुड़े हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि चावल और जूट को खड़ा पानी रोकने वाली और भरपूर गाद पाने वाली भूमि चाहिए, जो गंगा तथा ब्रह्मपुत्र मैदान की जलोढ़ और डेल्टाई भूमि है, न कि वह निक्षालित ढाल जहां लैटेराइट बनती है।
लवणीय और क्षारीय मिट्टी के सुधार के लिए सामान्यतः क्या मिलाया जाता है?
- A.जिप्सम
- B.यूरिया
- C.साधारण नमक
- D.चूना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जिप्सम
व्याख्या
सही उत्तर A, जिप्सम है। जिप्सम यानी कैल्शियम सल्फेट वह कैल्शियम देता है जो मिट्टी के कणों पर चिपके सोडियम का स्थान ले लेता है, और मुक्त हुआ सोडियम सिंचाई तथा जल निकास से खेत से बाहर बह जाता है, जिससे कठोर और अपारगम्य हो चुकी भूमि की संरचना लौट आती है। विकल्प B गलत है क्योंकि यूरिया नाइट्रोजन उर्वरक है जो फसल को पोषण देता है पर अतिरिक्त सोडियम पर कोई असर नहीं डालता, बल्कि अधिक प्रयोग से मिट्टी की अभिक्रिया और बिगड़ सकती है। विकल्प C गलत है क्योंकि साधारण नमक स्वयं समस्या की जड़ है, चूंकि लवणीय भूमि में पहले ही सोडियम क्लोराइड तथा अन्य लवण अधिक होते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि चूना इसके उल्टे काम आता है, यानी अधिक अम्लीय मिट्टी को सुधारने में, जैसे अधिक वर्षा वाली पट्टी की निक्षालित लैटेराइट और पहाड़ी मिट्टी में।
चंबल घाटी के बीहड़ किसका मानक भारतीय उदाहरण हैं?
- A.पवन अपरदन
- B.परतदार अपरदन
- C.उत्खात भूमि
- D.जल भराव
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उत्खात भूमि
व्याख्या
सही उत्तर C, उत्खात भूमि है। बहता पानी चंबल बेसिन की मुलायम जलोढ़ में नालियां काटता है और जहां ये नालियां गहरी होकर बड़े क्षेत्र में फैल जाती हैं वहां भूमि तीखी नालियों और कगारों का जाल बन जाती है, जो खेती योग्य नहीं रहती; भूगोल में इसे उत्खात भूमि और स्थानीय भाषा में बीहड़ कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पवन अपरदन ढीली रेत को उठाकर और लुढ़काकर काम करता है और वह इस नदी घाटी के बजाय पश्चिमी राजस्थान के शुष्क भाग में प्रमुख है। विकल्प B गलत है क्योंकि परतदार अपरदन मिट्टी की पतली एक समान परत हटाता है और कोई दृश्य नाली नहीं छोड़ता, जो चंबल के दृश्य से ठीक उल्टा है। विकल्प D गलत है क्योंकि जल भराव नहरी सिंचाई वाली समतल भूमि में भूजल स्तर उठने से होता है और वह पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश की समस्या है।
भारत में मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन का राष्ट्रीय ब्यूरो कहां स्थित है?
- A.नागपुर
- B.देहरादून
- C.हैदराबाद
- D.करनाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नागपुर
व्याख्या
सही उत्तर A, नागपुर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का संस्थान राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो नागपुर से काम करता है और वही मृदा मानचित्र तथा भूमि क्षमता सर्वेक्षण तैयार करता है, जिन पर जिला स्तर का नियोजन टिका होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि देहरादून में वन अनुसंधान संस्थान और भारतीय सर्वेक्षण विभाग हैं, जो क्रमशः वन और स्थलाकृतिक मानचित्रण से जुड़े हैं, मृदा सर्वेक्षण से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि हैदराबाद में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान तथा भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान हैं, वह मृदा सर्वेक्षण ब्यूरो नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि करनाल केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के लिए जाना जाता है; लवणता अनुसंधान राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण से संकरा क्षेत्र है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
काली मिट्टी को काली कपास मिट्टी क्यों कहते हैं?
यह दक्कन के लावा के अपक्षय से बनी है, लंबे समय तक नमी रोके रखती है और इसमें चूना, पोटाश तथा मैग्नीशियम भरपूर होते हैं, इसलिए बिना सिंचाई के भी कपास की फसल सूखे महीने पार कर जाती है। महाराष्ट्र और गुजरात की कपास पट्टी इसी मिट्टी पर है।
खादर और बांगर में क्या अंतर है?
दोनों जलोढ़ हैं। खादर बाढ़ के मैदान की नई जलोढ़ है, जो अधिक महीन होती है, हर बाढ़ में नई मिट्टी पाती है और अधिक उपजाऊ रहती है। बांगर ऊंचे चबूतरों की पुरानी जलोढ़ है, जो अपेक्षाकृत मोटी होती है और जिसमें चूने की गांठें यानी कंकर मिलते हैं, जिससे उर्वरता घटती है।
लैटेराइट मिट्टी कैसे बनती है?
अधिक तापमान और भारी मौसमी वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी चूना और सिलिका बहा ले जाता है तथा जीवाणु ह्यूमस नष्ट कर देते हैं। शेष मिट्टी में लौह ऑक्साइड और पोटाश अधिक रहते हैं पर नाइट्रोजन, कैल्शियम और जैविक पदार्थ कम। हवा लगने पर यह कठोर हो जाती है, इसलिए इसकी ईंटें काटी जाती हैं।
भारत में सबसे अधिक विस्तार किस मिट्टी का है?
जलोढ़ मिट्टी का, जिसे सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र ने उत्तरी मैदानों में, ब्रह्मपुत्र घाटी की नदियों ने असम में तथा प्रायद्वीपीय नदियों ने महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी के डेल्टाओं में जमा किया है।
मृदा संरक्षण की मुख्य विधियां कौन-सी हैं?
ढाल के आर-पार समोच्च जुताई, पहाड़ी ढालों पर सीढ़ीदार खेती, घास की पट्टियों के बीच पट्टीदार खेती, पवन रोकने के लिए वृक्षों की रक्षक मेखला, खुली मिट्टी ढकने के लिए पलवार, तथा बहते पानी को धीमा करने के लिए समोच्च बांध और चेक डैम।
स्रोत
- समकालीन भारत दो (कक्षा दस), अध्याय एक: संसाधन और विकास — एनसीईआरटी
- भारत: भौतिक पर्यावरण (कक्षा ग्यारह), मृदा अध्याय — एनसीईआरटी





