सूर्यातप, ऊष्मा बजट और तापमान: परीक्षा नोट्स
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सूर्यातप और पृथ्वी के ऊष्मा बजट के नोट्स: एल्बिडो, 35-14-51 इकाइयां, ह्रास दर, समताप रेखाएं तथा तापमान प्रतिलोमन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

सूर्यातप वह आगत सौर विकिरण है जो पृथ्वी तक पहुंचता है। सूर्य प्रत्येक दिशा में ऊर्जा बिखेरता है और पृथ्वी, बड़ी दूरी पर एक छोटा लक्ष्य, उसका केवल लगभग दो अरबवां भाग रोकती है, फिर भी वही अंश ग्रह की प्रत्येक पवन, प्रत्येक धारा और प्रत्येक जलवायु को चलाता है। यह अध्याय बताता है कि यह ऊर्जा कैसे आती है, उसका कितना भाग लौटा दिया जाता है, वायुमंडल ऊपर से नहीं बल्कि नीचे से कैसे गर्म होता है, और किसी स्थान का तापमान भूमध्य रेखा से उसकी दूरी के अतिरिक्त किन बातों पर निर्भर करता है। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं, क्योंकि इसके तथ्य संख्यात्मक और निश्चित हैं: ऊष्मा बजट की इकाइयां, सामान्य ह्रास दर, उपसौर और अपसौर की तिथियां, तथा ऊष्मा स्थानांतरण की चार प्रक्रियाओं के नाम।
सूर्यातप और उसे नियंत्रित करने वाले कारक
पृथ्वी को मिलने वाली ऊर्जा लघु तरंगदैर्ध्य विकिरण है, जो मुख्यतः दृश्य और निकट अवरक्त भाग में होती है। किसी स्थान पर प्राप्त मात्रा पांच बातों से नियंत्रित होती है: अपनी कक्षा के तल से लगभग छियासठ और आधा अंश झुकी धुरी पर पृथ्वी का घूर्णन, सूर्य की किरणों के धरातल पर पड़ने का कोण, दिन की अवधि, वायुमंडल की पारदर्शिता, तथा स्थल की बनावट। जहां किरणें लंबवत पड़ती हैं, वही पुंज कम क्षेत्र पर फैलता है और कम वायुमंडल से गुजरता है, इसलिए तापन अधिक होता है; जहां वे तिरछी पड़ती हैं, वही पुंज अधिक क्षेत्र पर फैलता है और मार्ग में अधिक ऊर्जा खोता है। इसलिए सूर्यातप भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर घटता है। परंतु धरातल पर अधिकतम मात्रा भूमध्य रेखा पर नहीं, उपोष्ण मरुस्थलों में प्राप्त होती है, क्योंकि भूमध्यरेखीय पेटी वर्ष के बड़े भाग में मेघाच्छादित रहती है जबकि मरुस्थल का आकाश स्वच्छ रहता है। पृथ्वी सूर्य के निकटतम, उपसौर स्थिति में, लगभग तीन जनवरी को और दूरतम, अपसौर स्थिति में, लगभग चार जुलाई को होती है; यह लगभग पचास लाख किलोमीटर का अंतर हमारी ऋतुओं के लिए धुरी के झुकाव से बहुत कम महत्व रखता है।
वायुमंडल कैसे गर्म होता है
- विकिरण: सूर्य पृथ्वी को लघु तरंग विकिरण से गर्म करता है, और पृथ्वी बदले में दीर्घ तरंग अवरक्त ऊर्जा विकीर्ण करती है, जिसे पार्थिव विकिरण कहते हैं।
- चालन: गर्म धरातल के संपर्क में रहने वाली वायु की परत उससे स्पर्श द्वारा ऊष्मा लेती है, इसी कारण वायुमंडल की निचली परतें सबसे गर्म होती हैं।
- संवहन: गर्म वायु फैलती है, हल्की होकर स्तंभ के रूप में ऊपर उठती है और ऊष्मा को लंबवत ऊपर ले जाती है; यह मुख्यतः क्षोभमंडल तक सीमित है।
- अभिवहन: वायु का क्षैतिज संचलन ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाता है, और मध्य अक्षांशों में दैनिक तापमान परिवर्तन का बड़ा भाग अभिवहन से आता है, जैसे उत्तर भारत की ग्रीष्मकालीन लू।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि वायुमंडल आगत लघु तरंगों के लिए बहुत कुछ पारदर्शी है, परंतु कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मेथेन और अन्य हरितगृह गैसों के माध्यम से निर्गत दीर्घ तरंगों को सोख लेता है। इसलिए वायु नीचे से, पृथ्वी से गर्म होती है, सीधे सूर्य से नहीं।
पृथ्वी का ऊष्मा बजट
पृथ्वी दीर्घकाल में न गर्म होती है न ठंडी, अर्थात उसे अंतरिक्ष में उतनी ही ऊर्जा लौटानी पड़ती है जितनी वह प्राप्त करती है। वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर सूर्यातप को सौ इकाई मानें, तो लगभग पैंतीस इकाई धरातल तक पहुंचने से पहले लौटा दी जाती हैं, सत्ताईस मेघों के शिखर से, दो हिम और बर्फ से ढके धरातल से, और शेष वायुमंडल द्वारा प्रकीर्णित। यही परावर्तित भाग पृथ्वी का एल्बिडो कहलाता है। शेष पैंसठ इकाइयों में से चौदह वायुमंडल के भीतर सोखी जाती हैं और इक्यावन स्थल तथा महासागरों द्वारा। धरातल सभी इक्यावन इकाइयां लौटाता है: सत्रह पार्थिव विकिरण के रूप में सीधे अंतरिक्ष में जाती हैं, और चौंतीस वायुमंडल को मिलती हैं, जिनमें छह दीर्घ तरंगों के सीधे अवशोषण से, नौ चालन और संवहन से, तथा उन्नीस संघनन की गुप्त ऊष्मा के रूप में, जो जलवाष्प के मेघ बनने पर मुक्त होती है। वायुमंडल, अपनी चौदह और धरातल से मिली चौंतीस इकाइयों के साथ, अड़तालीस इकाइयां अंतरिक्ष में विकीर्ण करता है। सत्रह और अड़तालीस मिलकर पैंसठ होते हैं, ठीक उतने ही जितने सोखे गए थे, और बजट संतुलित हो जाता है।
| मद | 100 में से इकाइयां |
|---|---|
| परावर्तित, पृथ्वी का एल्बिडो | 35 |
| वायुमंडल द्वारा अवशोषित | 14 |
| पृथ्वी के धरातल पर अवशोषित | 51 |
| सीधे अंतरिक्ष में पार्थिव विकिरण | 17 |
| धरातल से वायुमंडल को प्राप्त | 34 |
| वायुमंडल द्वारा अंतरिक्ष में विकीर्ण | 48 |
बजट संपूर्ण पृथ्वी के लिए संतुलित है, प्रत्येक अक्षांश के लिए नहीं। लगभग चालीस अंश उत्तर और चालीस अंश दक्षिण के बीच ऊष्मा का आधिक्य है, और उन अक्षांशों से आगे न्यूनता। पवनें और महासागरीय धाराएं इस आधिक्य को ध्रुवों की ओर ले जाती हैं, और यही स्थानांतरण वायुमंडल के सामान्य संचरण का इंजन है।
किसी स्थान का तापमान क्या नियंत्रित करता है
- अक्षांश: सूर्य की किरणों का कोण भूमध्य रेखा से दूर घटता है, इसलिए औसत तापमान अक्षांश के साथ गिरता है।
- ऊंचाई: क्षोभमंडल में तापमान ऊंचाई के साथ प्रति हजार मीटर लगभग साढ़े छह अंश सेल्सियस की सामान्य ह्रास दर से गिरता है, इसी कारण मैदानों के समान अक्षांश पर पर्वतीय स्थल ठंडे रहते हैं।
- समुद्र से दूरी: जल स्थल की तुलना में धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है, इसलिए तटों पर तापांतर कम और आंतरिक भागों में अधिक रहता है, जिसे महाद्वीपीयता कहते हैं।
- वायुराशि और महासागरीय धाराएं: गर्म धारा या उष्ण वायुराशि जिस तट को छूती है उसका तापमान बढ़ाती है, और ठंडी धारा घटाती है।
- स्थानीय कारक: ढाल की दिशा, वनस्पति का आवरण, मिट्टी का स्वरूप और नगर की उपस्थिति, सभी तापमापी के अंक को बदलते हैं।
समताप रेखा, तापांतर और प्रतिलोमन
नक्शे पर समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाएं समताप रेखाएं कहलाती हैं, और वे लगभग पूर्व से पश्चिम चलती हैं तथा जहां महाद्वीप महासागर से मिलता है वहां मुड़ जाती हैं। दिन के उच्चतम और निम्नतम तापमान का अंतर दैनिक तापांतर है, और सबसे गर्म तथा सबसे ठंडे महीने का अंतर वार्षिक तापांतर; भीतरी भाग की ओर बढ़ने पर दोनों बढ़ते हैं। सामान्यतः तापमान ऊंचाई के साथ घटता है, परंतु लंबी, स्वच्छ और शांत शीत रात्रि में धरातल शीघ्र ऊष्मा खो देता है, उसके ठीक ऊपर की वायु ऊपर की वायु से अधिक ठंडी हो जाती है, और ह्रास दर उलट जाती है। इसे तापमान का प्रतिलोमन कहते हैं। यह पर्वतीय घाटियों में सामान्य है, जहां रात में ठंडी भारी वायु ढालों से नीचे सरककर तल पर जमा हो जाती है, जिससे घाटी का तल उसके ऊपर की ढाल से अधिक ठंडा रहता है; इसलिए ऐसी घाटियों में बाग और बस्तियां तल पर नहीं, ढाल पर बसाई जाती हैं। प्रतिलोमन धुएं और धूल को धरातल के पास रोक लेता है और उत्तर भारत के नगरों में शीत प्रभातों के धुंधले रहने का एक कारण यही है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्नपत्र सूर्यातप और एल्बिडो का अर्थ, ऊष्मा बजट के अंक, सामान्य तथा शुष्क रुद्धोष्म ह्रास दर, ऊष्मा स्थानांतरण की चार विधियां जिनमें अभिवहन क्षैतिज है, उपसौर और अपसौर की तिथियां, तथा तापमान प्रतिलोमन उत्पन्न करने वाली दशाएं पूछते हैं। सुमेलन प्रश्न समताप, समदाब, समवर्षा और समलवण रेखाओं की जोड़ी बनाते हैं। सबसे आम जाल हैं भूमध्य रेखा को धरातलीय सर्वाधिक सूर्यातप की पेटी कहना, एल्बिडो की 35 इकाइयों को धरातल पर अवशोषित 51 इकाइयों से बदल देना, और सामान्य ह्रास दर को रुद्धोष्म दर से भ्रमित करना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सूर्यातप | पृथ्वी तक पहुंचने वाला आगत लघु तरंग सौर विकिरण |
|---|---|
| पृथ्वी का एल्बिडो | 100 में से लगभग 35 इकाई: 27 मेघ शिखर से, 2 हिम और बर्फ से, शेष प्रकीर्णित |
| वायुमंडल द्वारा अवशोषित | 100 में से 14 इकाई |
| धरातल पर अवशोषित | 100 में से 51 इकाई |
| धरातल द्वारा लौटाई गई | 17 इकाई सीधे अंतरिक्ष में, 34 इकाई वायुमंडल को |
| वायुमंडल द्वारा अंतरिक्ष में विकीर्ण | 48 इकाई |
| सामान्य ह्रास दर | प्रति 1,000 मीटर लगभग 6.5 अंश सेल्सियस |
| उपसौर और अपसौर | लगभग 3 जनवरी और लगभग 4 जुलाई |
| ऊष्मा आधिक्य की पेटी | लगभग 40 अंश उत्तर और 40 अंश दक्षिण के बीच |
| समताप रेखा | समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पृथ्वी के धरातल तक पहुंचने वाला आगत सौर विकिरण क्या कहलाता है?
- A.एल्बिडो
- B.सूर्यातप
- C.पार्थिव विकिरण
- D.समताप रेखा
उत्तर देखें
यह शब्द आगत सौर विकिरण का संक्षिप्त रूप है और इसका अर्थ सूर्य से आने वाली वह लघु तरंग ऊर्जा है जो पृथ्वी तक पहुंचती है, जिसे भारत में भारत मौसम विज्ञान विभाग प्रति इकाई क्षेत्र प्रति इकाई समय ऊर्जा की इकाइयों में मापता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर प्राप्त सूर्यातप की 100 इकाइयों में से कितनी इकाइयां अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाती हैं, जिस भाग को पृथ्वी का एल्बिडो कहा जाता है?
- A.14 इकाई
- B.17 इकाई
- C.35 इकाई
- D.51 इकाई
उत्तर देखें
वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर आने वाली सूर्यातप की प्रत्येक सौ इकाइयों में से लगभग पैंतीस धरातल को गर्म करने से पहले ही लौटा दी जाती हैं, सत्ताईस मेघों के शिखर से, दो हिम तथा बर्फ से ढके धरातल से और शेष वायुमंडल द्वारा प्रकीर्णित; यही परावर्तित भाग पृथ्वी का…
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्षोभमंडल में तापमान की सामान्य ह्रास दर लगभग कितनी होती है?
- A.प्रति 1,000 मीटर 1 °C
- B.प्रति 1,000 मीटर 6.5 °C
- C.प्रति 1,000 मीटर 9.8 °C
- D.प्रति 1,000 मीटर 16 °C
उत्तर देखें
यह सामान्य ह्रास दर है, अर्थात क्षोभमंडल में ऊंचाई के साथ तापमान की औसत गिरावट, और इसी कारण पर्वतीय स्थल ठंडा रहता है जबकि उसी अक्षांश का मैदान गर्म।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पृथ्वी सूर्य के निकटतम, जिस स्थिति को उपसौर कहा जाता है, लगभग किस तिथि को होती है?
- A.3 जनवरी
- B.21 मार्च
- C.21 जून
- D.4 जुलाई
उत्तर देखें
पृथ्वी की कक्षा दीर्घवृत्त है, इसलिए सूर्य से दूरी वर्ष भर बदलती है; पृथ्वी उपसौर स्थिति में लगभग तीन जनवरी को निकटतम और अपसौर स्थिति में लगभग चार जुलाई को दूरतम होती है, जो विकल्प D है और इस प्रश्न का सामान्य भ्रमकारी विकल्प।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वायु का वह क्षैतिज संचलन, जो ऊष्मा को एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचाता है, क्या कहलाता है?
- A.चालन
- B.संवहन
- C.अभिवहन
- D.विकिरण
उत्तर देखें
अभिवहन चलती वायु द्वारा ऊष्मा का क्षैतिज स्थानांतरण है, और मध्य अक्षांशों में तापमान का दैनिक परिवर्तन मुख्यतः इसी से आता है; ग्रीष्म में उत्तर भारत पर चलने वाली गर्म लू और शीत में उत्तर पश्चिमी पवन के पीछे आने वाली शीत लहर, दोनों इसके उदाहरण हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →धरातल के पास तापमान प्रतिलोमन बनने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी दशा सर्वाधिक अनुकूल है?
- A.लंबी, स्वच्छ और शांत शीत रात्रि
- B.मेघाच्छादित और तेज पवन वाली ग्रीष्म दोपहर
- C.तेज पवन वाली आर्द्र रात्रि
- D.मरुस्थल पर गर्म दोपहर
उत्तर देखें
प्रतिलोमन के लिए आवश्यक है कि धरातल शीघ्र ऊष्मा खोए और ऊपर की वायु अविचलित रहे: लंबी रात पार्थिव विकिरण को निकलने का समय देती है, स्वच्छ आकाश उसे निकलने देता है, शुष्क वायु उसे कम सोखती है, और शांत दशा ठंडी वायु को वहीं पड़ा रहने देती है, जिससे…
पूरी व्याख्या पढ़ें →पृथ्वी के धरातल पर वर्ष भर में सर्वाधिक सूर्यातप कहां प्राप्त होता है?
- A.भूमध्यरेखीय पेटी
- B.उपोष्ण मरुस्थल
- C.शीतोष्ण घास के मैदान
- D.ध्रुवीय प्रदेश
उत्तर देखें
वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर मापा गया सूर्यातप भूमध्य रेखा पर सर्वाधिक होता है, परंतु धरातल तक जो पहुंचता है वह किरणों के कोण के साथ मेघ पर भी निर्भर करता है, और उपोष्ण मरुस्थल हैडली संचरण की अवरोही शाखा के नीचे पड़ते हैं, जहां आकाश वर्ष के बड़े भाग…
पूरी व्याख्या पढ़ें →नक्शे पर समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाएं क्या कहलाती हैं?
- A.समदाब रेखाएं
- B.समवर्षा रेखाएं
- C.समताप रेखाएं
- D.समलवण रेखाएं
उत्तर देखें
समताप रेखा समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती है, और विश्व के नक्शे पर समताप रेखाएं लगभग पूर्व से पश्चिम, अक्षांशों के समानांतर चलती हैं तथा जहां महाद्वीप महासागर से मिलता है वहां तीव्रता से मुड़ जाती हैं, क्योंकि स्थल और जल भिन्न दर से गर्म होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी पदार्थ के पिंड के एक स्थान से दूसरे स्थान तक संचलन द्वारा ऊष्मा ऊर्जा के स्थानांतरण को ______ कहा जाता है।
- A.चालन
- B.संवहन
- C.संघनन
- D.विकिरण
उत्तर देखें
संवहन में गर्म पदार्थ स्वयं चलता है और अपनी ऊर्जा साथ ले जाता है: गर्म धरातल के पास की वायु फैलती है, हल्की होती है, धारा के रूप में ऊपर उठती है और उसके स्थान पर ठंडी वायु नीचे आ जाती है, और यही उबलते जल के पात्र में होता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. ऊंचे मेघ मुख्यतः सौर विकिरण को परावर्तित करते हैं और पृथ्वी के धरातल को ठंडा करते हैं। 2. नीचे के मेघ पृथ्वी के धरातल से निकलने वाले अवरक्त विकिरण का उच्च अवशोषण करते हैं और इस प्रकार तापन प्रभाव उत्पन्न करते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 2
- C.1 और 2 दोनों
- D.न 1, न 2
उत्तर देखें
पक्षाभ जैसे ऊंचे मेघ पतले होते हैं और हिम कणों से बने होते हैं; वे सूर्यप्रकाश का बड़ा भाग निकलने देते हैं परंतु धरातल से निर्गत अवरक्त विकिरण को सोख लेते हैं, इसलिए उनका शुद्ध प्रभाव तापन है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किस कारक में कमी होने पर वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है?
- A.परिवेश का तापमान
- B.संबंधित द्रव की मुक्त सतह का क्षेत्रफल
- C.द्रव की सतह के ऊपर पवन की गति
- D.आर्द्रता
उत्तर देखें
वाष्पीकरण द्रव की सतह से अणुओं का वायु में निकलना है, और जैसे ही ऊपर की वायु वाष्प से भरती है यह धीमा पड़ जाता है; आर्द्रता घटने पर वायु अधिक वाष्प धारण कर सकती है, इसलिए वाष्पीकरण की दर बढ़ जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वायुमंडल नीचे से क्यों गर्म होता है, सीधे सूर्य से क्यों नहीं?
वायुमंडल सूर्य से आने वाले लघु तरंग विकिरण के लिए बहुत कुछ पारदर्शी है, इसलिए उसका बड़ा भाग धरातल तक पहुंच जाता है। गर्म धरातल दीर्घ तरंग अवरक्त ऊर्जा विकीर्ण करता है, जिसे कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प और अन्य हरितगृह गैसें सोख लेती हैं, इसलिए निचली परतें सबसे गर्म होती हैं।
पृथ्वी का एल्बिडो क्या है?
यह आगत सौर विकिरण का वह भाग है जो धरातल को गर्म करने से पहले अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है, सौ में से लगभग पैंतीस इकाई: सत्ताईस मेघों के शिखर से, दो हिम तथा बर्फ से ढके धरातल से और शेष वायुमंडल द्वारा प्रकीर्णित।
उपोष्ण मरुस्थलों को धरातल पर भूमध्य रेखा से अधिक सूर्यातप क्यों मिलता है?
भूमध्यरेखीय पेटी को वायुमंडल की ऊपरी सीमा पर सर्वाधिक विकिरण मिलता है, परंतु वह वर्ष के बड़े भाग में मेघाच्छादित रहती है और मेघ उसका बड़ा भाग परावर्तित कर देते हैं। उपोष्ण मरुस्थल अवरोही वायु के नीचे स्वच्छ आकाश में पड़ते हैं, इसलिए वहां अधिक विकिरण धरातल तक पहुंचता है।
तापमान प्रतिलोमन क्या है और कहां सामान्य है?
यह ऊंचाई के साथ तापमान की सामान्य गिरावट का उलट जाना है, जिससे धरातल के पास की वायु ऊपर की वायु से अधिक ठंडी हो जाती है। यह लंबी, स्वच्छ, शांत और शुष्क शीत रातों में बनता है और पर्वतीय घाटियों में सबसे आम है, जहां ठंडी भारी वायु ढालों से नीचे बहकर घाटी के तल पर जमा हो जाती है।
ऊष्मा बजट संपूर्ण पृथ्वी के लिए संतुलित है, प्रत्येक अक्षांश के लिए क्यों नहीं?
संपूर्ण ग्रह उतनी ही ऊर्जा लौटाता है जितनी सोखता है, परंतु उष्ण कटिबंध विकिरण से अधिक सोखता है और उच्च अक्षांश सोखने से अधिक विकीर्ण करते हैं। पवनें और महासागरीय धाराएं भूमध्य रेखा के लगभग चालीस अंश भीतर की पेटी से इस आधिक्य को ध्रुवों की ओर ले जाती हैं।
स्रोत
- Fundamentals of Physical Geography (Class XI), Chapter 9: Solar Radiation, Heat Balance and Temperature — NCERT
- Radiation and surface energy balance observations — India Meteorological Department, Ministry of Earth Sciences





