भारत के अपवाह प्रतिरूप और नदी बेसिन: परीक्षा नोट्स
भारतीय अपवाह तंत्र पर नोट्स: वृक्षाकार, अरीय और अभिकेंद्री प्रतिरूप, पूर्ववर्ती तथा अध्यारोपित अपवाह, जल विभाजक और प्रमुख नदी बेसिन का विस्तार।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

अपवाह का अर्थ है उन जलमार्गों का जाल जिनसे किसी क्षेत्र का जल बाहर निकलता है। एक नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित समूचा क्षेत्र उसका अपवाह बेसिन है, एक छोटी धारा द्वारा अपवाहित छोटा क्षेत्र जलसंभर है, और दो बेसिनों को अलग करने वाला ऊँचा भाग जल विभाजक है। नक्शे पर धाराएँ जो आकार बनाती हैं वह अपवाह प्रतिरूप है, और वह भूमि के ढाल, शैलों की कठोरता तथा उनमें मौजूद दुर्बल रेखाओं पर निर्भर करता है। परीक्षाओं में प्रतिरूप और उसका उदाहरण, बेसिनों का क्रम तथा विस्तार, और उन नदियों की विशेषताएँ पूछी जाती हैं जो शेष से भिन्न व्यवहार करती हैं।
अपवाह प्रतिरूप
| प्रतिरूप | आकार | कहाँ मिलता है |
|---|---|---|
| वृक्षाकार | पेड़ की शाखाओं जैसा | उत्तरी मैदान की नदियाँ, जैसे गंगा की सहायक नदियाँ |
| जालीनुमा | सहायक नदियाँ मुख्य धारा से लगभग समकोण पर मिलती हैं | वलित पेटियाँ जहाँ कठोर और मृदु शैल बारी बारी हों |
| आयताकार | धारा तथा सहायक नदी दोनों के तीव्र समकोण मोड़ | अत्यधिक संधियुक्त शैल क्षेत्र, जैसे विंध्य प्रदेश |
| अरीय | गुंबद या शिखर से पहिए की तीलियों की भाँति बाहर की ओर | अमरकंटक पठार से नर्मदा, सोन और महानदी |
| अभिकेंद्री | धाराएँ झील या गर्त की ओर भीतर | मणिपुर घाटी की धाराएँ लोकटक झील में |
| समांतर | तीव्र एकसमान ढाल पर साथ साथ बहती छोटी धाराएँ | पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढाल की छोटी नदियाँ |
दो और पद बहुत पूछे जाते हैं। पूर्ववर्ती अपवाह का अर्थ है कि नदी उस पर्वत से पुरानी है जिसे वह काटती है; सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र हिमालय के वर्तमान ऊँचाई तक उठने से पहले बह रहे थे, और उन्होंने श्रेणी को काटकर गहरे महाखड्ड बनाते हुए अपना मार्ग बनाए रखा। अध्यारोपित अपवाह का अर्थ है कि प्रतिरूप किसी ऊपरी शैल आवरण पर बना, जो बाद में हट गया और धाराएँ नीचे की भिन्न संरचना पर बहती रह गईं; दामोदर, स्वर्णरेखा और चंबल पुराने छोटानागपुर तथा विंध्य धरातल पर यही दिखाते हैं।
बेसिन, जलसंभर और जल विभाजक
केंद्रीय जल आयोग बीस हजार वर्ग किलोमीटर से बड़े जलग्रहण को प्रमुख बेसिन मानता है, और भारत में ऐसे बेसिन एक दर्जन से कुछ अधिक हैं। जल विभाजक सामान्यतः कोई कटक या पठार का किनारा होता है: दिल्ली की कटक तथा अंबाला के पास का मैदान सिंधु तंत्र को गंगा तंत्र से अलग करते हैं, पश्चिमी घाट अरब सागर की छोटी नदियों को बंगाल की खाड़ी की लंबी नदियों से अलग करता है, और अमरकंटक पठार एक ही साथ तीन दिशाओं में जल भेजता है। जहाँ किसी बेसिन का जल कभी समुद्र तक नहीं पहुँचता, वहाँ अपवाह को अंतःस्थलीय कहा जाता है, जैसे राजस्थान का सांभर झील जलग्रहण तथा घग्घर का निचला भाग, जो रेगिस्तान में समाप्त हो जाता है।
हिमालयी और प्रायद्वीपीय अपवाह की तुलना
हिमालयी नदियाँ सदावाहिनी हैं, जिन्हें मानसून तथा हिम का पिघलना दोनों पोसते हैं, और वे युवा तथा ऊर्जावान हैं: पर्वतों में वे महाखड्ड और अंग्रेजी अक्षर वी जैसी घाटियाँ काटती हैं, फिर मैदानों में अत्यधिक विसर्प बनाती हैं, अपना तल बदलती हैं और विशाल डेल्टा बनाती हैं। प्रायद्वीपीय नदियाँ मौसमी तथा वर्षा पोषित हैं, वे छिछली, चौड़ी और लगभग ढाल पा चुकी घाटियों में बहती हैं, उनके मार्ग कठोर शैल से बँधे हैं और उनके जलग्रहण तुलना में छोटे हैं। पूर्व की ओर बहने वाली महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और पेन्नार बंगाल की खाड़ी में पहुँचकर डेल्टा बनाती हैं; पश्चिम की ओर बहने वाली नर्मदा और तापी सतपुड़ा तथा विंध्य के बीच के भ्रंश घाटियों में बहकर खंभात की खाड़ी में ज्वारनदमुख से मिलती हैं और कोई डेल्टा नहीं बनातीं।
प्रमुख नदी बेसिन
| बेसिन | भारत में लगभग क्षेत्र | विशेष |
|---|---|---|
| गंगा | लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर | भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन, देश का लगभग एक चौथाई |
| सिंधु, भारतीय भाग | लगभग 3.2 लाख वर्ग किलोमीटर | सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम |
| गोदावरी | लगभग 3.1 लाख वर्ग किलोमीटर | सबसे बड़ा प्रायद्वीपीय बेसिन, दक्षिण गंगा |
| कृष्णा | लगभग 2.6 लाख वर्ग किलोमीटर | दूसरा सबसे बड़ा प्रायद्वीपीय बेसिन |
| ब्रह्मपुत्र, भारतीय भाग | लगभग 1.9 लाख वर्ग किलोमीटर | गुंफित जलमार्ग, माजुली नदी द्वीप |
| महानदी | लगभग 1.4 लाख वर्ग किलोमीटर | हीराकुंड बाँध, छत्तीसगढ़ और ओडिशा |
| नर्मदा | लगभग एक लाख वर्ग किलोमीटर | भ्रंश घाटी, ज्वारनदमुख, डेल्टा नहीं |
| कावेरी | लगभग 0.8 लाख वर्ग किलोमीटर | शिवसमुद्रम प्रपात, कर्नाटक और तमिलनाडु |
नियम तोड़ने वाली नदियाँ
कुछ नदियाँ इसी कारण पूछी जाती हैं कि वे अपनी पड़ोसी नदियों जैसी नहीं हैं। नर्मदा मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलती है, भ्रंश से पश्चिम बहती है, जबलपुर में धुआँधार प्रपात तथा संगमरमर का महाखड्ड बनाती है और ज्वारनदमुख में समाप्त होती है। तापी बैतूल जिले के मुलताई से निकलती है, वह भी पश्चिम बहती है और नर्मदा के समांतर एकमात्र बड़ी नदी है। चंबल उत्तर की ओर बहकर यमुना में मिलती है और अपने अवनालिकाओं के लिए प्रसिद्ध है। लूनी थार की एकमात्र बड़ी नदी है और खुले समुद्र के बदले कच्छ के रण में समाप्त होती है। ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश में दिहांग नाम से प्रवेश करती है, किसी भी भारतीय नदी से अधिक गाद ढोती है और इतनी गुंफित है कि उसमें विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीपों में गिना जाने वाला माजुली बना है। कर्नाटक की शरावती, एक छोटी पश्चिम वाहिनी धारा, जोग प्रपात के रूप में गिरती है।
प्रतिरूप क्यों महत्वपूर्ण है
अपवाह उस सब का आधार है जो भूगोल का प्रश्नपत्र आगे पूछता है। उत्तरी मैदान की मिट्टी वही जलोढ़ है जो हिमालयी नदियाँ लाईं, डेल्टा पूर्वी तट की सर्वाधिक उपजाऊ कृषि भूमि हैं, भ्रंश घाटियों की पश्चिम वाहिनी नदियों के पास डेल्टा भूमि कम है पर बाँध के अच्छे स्थल हैं, और बेसिनों का आपस में गुँथा होना अंतरराज्यीय जल विवादों तथा नदी जोड़ प्रस्तावों का कारण है। जो विद्यार्थी जल विभाजक खींच सके और बेसिन गिना सके, वह भारत के अधिकांश नक्शा प्रश्न एक एक रटे बिना हल कर लेता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, प्रतिरूप और उदाहरण: उत्तरी मैदान के लिए वृक्षाकार, अमरकंटक के लिए अरीय, लोकटक झील के लिए अभिकेंद्री, संधियुक्त शैल के लिए आयताकार, वलित पेटियों के लिए जालीनुमा। दूसरा, पूर्ववर्ती तथा अध्यारोपित अपवाह की जोड़ी, जिसमें सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र मानक पूर्ववर्ती उदाहरण हैं। तीसरा, बेसिन तथ्य: भारत का सबसे बड़ा बेसिन गंगा, प्रायद्वीप का सबसे बड़ा तथा दक्षिण गंगा गोदावरी, दूसरा कृष्णा, और अमरकंटक से नर्मदा तथा मुलताई से तापी के उद्गम। कथन आधारित प्रश्न अक्सर नियम तोड़ने वाली नदियों पर टिकते हैं, मुख्यतः इस पर कि नर्मदा और तापी डेल्टा के बदले ज्वारनदमुख बनाती हैं और लूनी कच्छ के रण में समाप्त होती है। सामान्य जाल हैं: गोदावरी को भारत का सबसे बड़ा बेसिन कहना, अरीय और अभिकेंद्री को आपस में बदल देना, नर्मदा को डेल्टा दे देना, तथा सिंधु और गंगा तंत्रों का जल विभाजक अंबाला के पास के मैदान के बदले पहाड़ों में खोजना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| अपवाह बेसिन | नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित समूचा क्षेत्र |
|---|---|
| जल विभाजक | दो बेसिनों को अलग करने वाला ऊँचा भाग; अंबाला के पास का मैदान सिंधु और गंगा तंत्र को बाँटता है |
| वृक्षाकार प्रतिरूप | पेड़ जैसा, उत्तरी मैदान की नदियों में |
| अरीय प्रतिरूप | अमरकंटक पठार से नर्मदा, सोन और महानदी |
| अभिकेंद्री प्रतिरूप | मणिपुर घाटी की धाराएँ लोकटक झील में |
| पूर्ववर्ती अपवाह | सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र, वर्तमान हिमालय से पुराने |
| भारत का सबसे बड़ा बेसिन | गंगा, भारत में लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर |
| सबसे बड़ा प्रायद्वीपीय बेसिन | गोदावरी, लगभग 3.1 लाख वर्ग किलोमीटर, दक्षिण गंगा |
| डेल्टा न बनाने वाली नदियाँ | नर्मदा और तापी, जो ज्वारनदमुख बनाती हैं |
| नर्मदा का उद्गम | अमरकंटक पठार, मध्य प्रदेश |
| तापी का उद्गम | मुलताई, बैतूल जिला, मध्य प्रदेश |
| अंतःस्थलीय अपवाह | राजस्थान का सांभर जलग्रहण तथा निचली घग्घर |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वह अपवाह प्रतिरूप जिसमें नदी की सहायक नदियाँ पेड़ की शाखाओं जैसी दिखती हैं, क्या कहलाता है?
- A.अरीय
- B.वृक्षाकार
- C.अभिकेंद्री
- D.जालीनुमा
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यह शब्द पेड़ के लिए प्रयुक्त यूनानी शब्द से आया है, और यह प्रतिरूप वहाँ बनता है जहाँ नीचे की शैल एक जैसी कठोरता की हो तथा ढाल मंद हो, जिससे धाराएँ दुर्बल रेखाओं से बँधे बिना स्वतंत्र रूप से शाखाएँ बनाती हैं; उत्तरी मैदान में गंगा की सहायक नदियाँ…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अमरकंटक पठार से नर्मदा, सोन और महानदी का भिन्न दिशाओं में निकलना किस अपवाह प्रतिरूप का उदाहरण है?
- A.अरीय
- B.आयताकार
- C.समांतर
- D.अव्यवस्थित
उत्तर देखें
अरीय प्रतिरूप में धाराएँ किसी गुंबद, ज्वालामुखी शंकु या ऊँचे पठार से आरंभ होकर पहिए की तीलियों की भाँति सब दिशाओं में बाहर बहती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्षेत्रफल के अनुसार भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन कौन सा है?
- A.गोदावरी बेसिन
- B.सिंधु बेसिन
- C.गंगा बेसिन
- D.ब्रह्मपुत्र बेसिन
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सही उत्तर है C, गंगा बेसिन, जो भारत के भीतर लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर, अर्थात देश के लगभग एक चौथाई भाग को घेरता है और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान तथा दिल्ली के भाग इसमें आते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रायद्वीपीय भारत की किस नदी को दक्षिण गंगा कहा जाता है और उसका बेसिन प्रायद्वीप में सबसे बड़ा है?
- A.कृष्णा
- B.गोदावरी
- C.महानदी
- D.कावेरी
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यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्रिंबकेश्वर से निकलकर लगभग चौदह सौ किलोमीटर महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश पार करके बंगाल की खाड़ी में मिलती है और लगभग 3.1 लाख वर्ग किलोमीटर अपवाहित करती है, जो प्रायद्वीप का सबसे बड़ा जलग्रहण है; इसी से इसे दक्षिण की गंगा कहा जाता…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अभिकेंद्री अपवाह, जिसमें धाराएँ चारों ओर से भीतर की ओर बहती हैं, भारत में सर्वोत्तम रूप से किस झील में दिखता है?
- A.चिल्का झील
- B.वुलर झील
- C.लोकटक झील
- D.सांभर झील
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लोकटक मणिपुर घाटी के तल में है, जो पहाड़ियों से घिरी है, इसलिए घाटी की धाराएँ उसमें हर ओर से भीतर की ओर आती हैं, जो अभिकेंद्री प्रतिरूप का उत्कृष्ट रूप है; यह झील अपने तैरते फुमदी तथा एकमात्र तैरते राष्ट्रीय उद्यान केइबुल लामजाओ के लिए भी जानी जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र हिमालय को काटकर गहरे महाखड्ड बनाते हैं क्योंकि वे वर्तमान पर्वतों से पुराने हैं। ऐसा अपवाह क्या कहलाता है?
- A.पूर्ववर्ती अपवाह
- B.अध्यारोपित अपवाह
- C.अंतःस्थलीय अपवाह
- D.अव्यवस्थित अपवाह
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ये नदियाँ तब बह रही थीं जब हिमालय उठ ही रहा था, और मुड़ने के बदले वे भूमि के उठने जितनी तेजी से नीचे काटती गईं, जिससे गिलगित के पास सिंधु, शिपकी पर सतलुज और दिहांग के महान मोड़ पर ब्रह्मपुत्र के महाखड्ड बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सी भारतीय नदी अपने मुहाने पर डेल्टा नहीं बनाती?
- A.महानदी
- B.गोदावरी
- C.नर्मदा
- D.कृष्णा
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यह विंध्य और सतपुड़ा श्रेणियों के बीच की संकरी भ्रंश घाटी से पश्चिम बहकर खंभात की खाड़ी में खुलती है, जहाँ प्रबल ज्वार गाद बहा ले जाते हैं, इसलिए नदी डेल्टा के बदले कीप जैसे ज्वारनदमुख में समाप्त होती है; तापी, जो भी भ्रंश में पश्चिम बहती है, वैसा ही…
पूरी व्याख्या पढ़ें →नर्मदा नदी निम्नलिखित में से किस स्थान से निकलती है?
- A.मध्य प्रदेश का अमरकंटक पठार
- B.महाराष्ट्र का त्रिंबकेश्वर
- C.महाराष्ट्र का महाबलेश्वर
- D.कर्नाटक की ब्रह्मगिरि श्रेणी
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सही उत्तर है A, मध्य प्रदेश का अमरकंटक पठार, जहाँ लगभग एक हजार मीटर की ऊँचाई पर नर्मदा निकलती है और मध्य प्रदेश तथा गुजरात से होकर लगभग तेरह सौ किलोमीटर पश्चिम बहकर खंभात की खाड़ी तक जाती है; रास्ते में वह जबलपुर में धुआँधार प्रपात तथा संगमरमर का महाखड्ड…
पूरी व्याख्या पढ़ें →तापी नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के किस स्थान के पास है?
- A.बैतूल जिले का मुलताई
- B.अनूपपुर जिले का अमरकंटक
- C.इंदौर जिले का जानापाव
- D.धमतरी जिले का सिहावा
उत्तर देखें
यह दो बड़ी पश्चिम वाहिनी प्रायद्वीपीय नदियों में दूसरी है और नर्मदा के लगभग समांतर बहती है, दोनों के बीच सतपुड़ा श्रेणी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंधु और गंगा नदी तंत्रों के जल विभाजक पर कौन सा नगर स्थित है?
- A.अंबाला
- B.देहरादून
- C.हरिद्वार
- D.आगरा
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उत्तर के इन दो बड़े तंत्रों का विभाजक यहाँ किसी पर्वत पर नहीं, बल्कि हरियाणा के लगभग समतल मैदान पर चलता है, और अंबाला उसी पर बसा है, इसलिए उससे कुछ पश्चिम गिरा जल घग्घर तथा सिंधु की ओर जाता है और पूर्व गिरा जल यमुना तथा गंगा की ओर।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अपवाह बेसिन और जलसंभर में क्या अंतर है?
अपवाह बेसिन वह समूचा क्षेत्र है जिसका जल एक नदी और उसकी सहायक नदियाँ बाहर ले जाती हैं, जैसे गंगा बेसिन। जलसंभर उससे बहुत छोटी इकाई है, अर्थात किसी एक छोटी धारा या नाले द्वारा अपवाहित क्षेत्र। दोनों अपने पड़ोसी से जल विभाजक द्वारा अलग होते हैं।
भारत का सबसे बड़ा नदी बेसिन कौन सा है?
गंगा बेसिन, जो भारत के भीतर लगभग 8.6 लाख वर्ग किलोमीटर, अर्थात देश का लगभग एक चौथाई भाग घेरता है और उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान तथा दिल्ली तक फैला है।
नर्मदा और तापी डेल्टा क्यों नहीं बनातीं?
क्योंकि दोनों तीव्र ढाल वाली संकरी भ्रंश घाटियों से पश्चिम बहती हैं और अपना भार तेजी से खंभात की खाड़ी के गहरे, ज्वार से बहते मुहाने तक ले जाती हैं। ज्वार गाद बहा ले जाते हैं और नदी डेल्टा बनाने के बदले कीप जैसे ज्वारनदमुख में समाप्त होती है।
पूर्ववर्ती अपवाह क्या है?
वह अपवाह जिसमें नदी उस उच्चावच से पुरानी होती है जिसे वह काटती है। सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र हिमालय के वर्तमान ऊँचाई पाने से पहले बह रहे थे, और पर्वत उठते गए तो नदियों ने गहरे महाखड्ड काटकर अपने मार्ग बनाए रखे।
भारत में अभिकेंद्री अपवाह का मानक उदाहरण कौन सी झील है?
मणिपुर की लोकटक झील, जिसमें मणिपुर घाटी की धाराएँ चारों ओर से भीतर की ओर बहकर आती हैं। इसका उलटा अरीय अपवाह है, जिसमें धाराएँ अमरकंटक पठार जैसे किसी ऊँचे स्थान से बाहर की ओर बहती हैं।
किस नदी को दक्षिण गंगा कहा जाता है और क्यों?
गोदावरी को। यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और इसका बेसिन प्रायद्वीप में सबसे बड़ा है; यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्रिंबकेश्वर से निकलकर महाराष्ट्र, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश पार करके बंगाल की खाड़ी में मिलती है, इसी से इसे दक्षिण की गंगा कहा जाता है।
स्रोत
- समकालीन भारत एक (कक्षा 9), अध्याय 3: अपवाह — एनसीईआरटी
- भारत भौतिक पर्यावरण (कक्षा 11), अध्याय 3: अपवाह तंत्र — एनसीईआरटी
- भारत के नदी बेसिन एटलस तथा बेसिन रिपोर्ट — केंद्रीय जल आयोग, जल शक्ति मंत्रालय
- भारत जल संसाधन सूचना प्रणाली, बेसिन विवरण — जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार





