भारत के उद्योग: अवस्थिति, इस्पात, वस्त्र और प्रदेश
परीक्षाओं के लिए भारत के उद्योगों के नोट्स: वर्गीकरण, अवस्थिति के कारक, लोहा इस्पात संयंत्र, सूती और जूट मिलें, औद्योगिक प्रदेश तथा नगरों के उपनाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

निर्माण उद्योग कच्चे माल को अधिक मूल्यवान उत्पाद में बदलना है, और भूगोल उसके बारे में दो प्रश्न पूछता है: यह किस प्रकार का उद्योग है, और यह यहीं क्यों है, कहीं और क्यों नहीं। जूट मिल हुगली पर है क्योंकि रेशा डेल्टा में उगता है और बंदरगाह पास है; एल्यूमिनियम प्रगालक कोरबा के निकट है क्योंकि उसे सबसे अधिक सस्ती बिजली चाहिए; और सॉफ्टवेयर कंपनी कहीं भी बैठ सकती है क्योंकि उसका कच्चा माल तार से चलता है। ये कारण स्पष्ट हो जाएं तो संयंत्रों, प्रदेशों और उपनामों की वे सूचियां अपने आप क्रम में आ जाती हैं जो प्रश्नपत्रों में पूछी जाती हैं।
उद्योगों का वर्गीकरण
- कच्चे माल के स्रोत से: कृषि आधारित, जैसे सूती वस्त्र, जूट, चीनी, वनस्पति तेल और चाय; खनिज आधारित, जैसे लोहा इस्पात, सीमेंट और एल्यूमिनियम; वन आधारित, जैसे कागज, लाख और फर्नीचर; तथा समुद्र आधारित, जैसे मछली प्रसंस्करण।
- भूमिका से: आधारभूत या कुंजी उद्योग, जिनका उत्पाद दूसरे उद्योगों का कच्चा माल बनता है, जैसे लोहा इस्पात और मशीन औजार; तथा उपभोक्ता उद्योग, जिनका माल सीधे क्रेता तक जाता है, जैसे चीनी, साबुन और कागज।
- पूंजी निवेश से: बृहत उद्योग, लघु उद्योग तथा कुटीर या घरेलू उद्योग।
- स्वामित्व से: सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्र तथा सहकारी क्षेत्र, जिसका मानक उदाहरण महाराष्ट्र की चीनी मिलें हैं।
- माल के भार से: भारी उद्योग, जो स्थूल कच्चा माल संभालते हैं, तथा हल्के उद्योग, जो हल्का माल लेकर हल्का माल बनाते हैं।
कारखाना जहां है, वहां क्यों है
औद्योगिक अवस्थिति लागतों का संतुलन है। भार ह्रासमान कच्चा माल, जैसे लौह अयस्क, संयंत्र को खदान की ओर खींचता है; शीघ्र नष्ट होने वाला माल, जैसे गन्ना, मिल को खेत के पास ले जाता है; अधिक बिजली मांगने वाली प्रक्रिया, जैसे एल्यूमिनियम का प्रगलन, सस्ती बिजली के पास जाती है; और बाजार उन्मुख उद्योग, जैसे रोटी या बर्फ, क्रेता के पास बैठता है। श्रम, परिवहन, बैंक, जल और सरकारी नीति इस सूची को पूरा करते हैं, और बंदरगाह आयातित माल तथा निर्यात बाजार का लाभ जोड़ देता है। जब अनेक उद्योग एक स्थान पर एकत्र होते हैं तो उनमें से प्रत्येक को उन सड़कों, बिजली लाइनों, बैंकों, कुशल श्रमिकों और मरम्मत की दुकानों का लाभ मिलता है जो दूसरों ने खड़ी की हैं; इस बचत को संकुलन अर्थव्यवस्था कहते हैं, और यही बताती है कि उद्योग समान रूप से फैलने के बजाय गुच्छों में क्यों बसते हैं। जो उद्योग इन खिंचावों से मुक्त हैं, क्योंकि उनका माल हल्का और मूल्यवान है, उन्हें स्वच्छंद उद्योग कहा जाता है।
लोहा और इस्पात
भारत का पहला आधुनिक लोहा इस्पात कारखाना 1907 में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने छोटा नागपुर पठार के साकची, अब जमशेदपुर, में लगाया, जहां कोयला, लौह अयस्क, मैंगनीज, चूना पत्थर और जल सभी निकट थे। इसके बाद बर्नपुर में इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी और कर्नाटक के भद्रावती में विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स आया, जो जल विद्युत का उपयोग करता है। स्वतंत्रता के बाद सार्वजनिक क्षेत्र ने एकीकृत संयंत्र बनाए।
| संयंत्र | राज्य | सहयोग |
|---|---|---|
| राउरकेला | ओडिशा | जर्मनी |
| भिलाई | छत्तीसगढ़ | तत्कालीन सोवियत संघ |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल | ब्रिटेन |
| बोकारो | झारखंड | तत्कालीन सोवियत संघ |
| विशाखापत्तनम | आंध्र प्रदेश | तटीय संयंत्र, आयातित कोकिंग कोल पर आधारित |
| सेलम | तमिलनाडु | विशेष इस्पात संयंत्र |
| विजयनगर | कर्नाटक | स्वदेशी प्रौद्योगिकी |
सार्वजनिक क्षेत्र के संयंत्रों के प्रबंधन के लिए 1973 में भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड बना। इस प्रवृत्ति पर ध्यान दें: पुराने संयंत्र छोटा नागपुर पठार और उसके किनारों पर हैं, अयस्क तथा कोयले के पास, जबकि विशाखापत्तनम तट पर है क्योंकि आयातित कोकिंग कोल को बंदरगाह पर उतारना भीतर ले जाने से सस्ता पड़ता है।
सूती, जूट और अन्य कृषि आधारित उद्योग
भारत में पहली सफल सूती वस्त्र मिल 1854 में बंबई में चली, और उद्योग मुंबई तथा अहमदाबाद में ही टिका रहा क्योंकि इस क्षेत्र की काली मिट्टी कपास उगाती है, बंदरगाह से मशीनें आईं, और पूंजी तथा श्रम उपलब्ध थे; मुंबई का पुराना उपनाम कॉटनपोलिस था और अहमदाबाद भारत का मैनचेस्टर कहलाने लगा। आज सबसे बड़े उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु हैं, और अकेले कोयंबटूर में इतनी मिलें हैं कि उसे दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है। जूट की कहानी भिन्न है। पहली जूट मिल 1855 में कलकत्ता के निकट रिशरा में लगी, और उद्योग आज भी हुगली के साथ एक संकरी पट्टी में केंद्रित है, क्योंकि रेशा डेल्टा में उगता है, नदी सस्ता जल परिवहन तथा प्रसंस्करण के लिए मृदु जल देती है, कोलकाता बंदरगाह और बैंक देता है, और सस्ता श्रम पड़ोसी राज्यों से आया। चीनी मिलें गन्ने का पीछा करती हैं, क्योंकि कटने के बाद गन्ने की शर्करा घटने लगती है, इसलिए उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र आगे हैं; ऊनी मिलें कानपुर, लुधियाना और धारीवाल में हैं और रेशम का केंद्र कर्नाटक है।
खनिज तथा ज्ञान आधारित उद्योग
एल्यूमिनियम प्रगलन वहीं जाता है जहां बिजली सस्ती है, अर्थात कोरबा, रेणुकूट, अंगुल, हीराकुंड और अलुपुरम। सीमेंट को स्थूल चूना पत्थर, कोयला और जिप्सम चाहिए, और यह उद्योग 1904 में चेन्नई में शुरू होकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा आंध्र प्रदेश में फैला। पहला बड़ा उर्वरक संयंत्र 1951 में सिंदरी में लगा। पेट्रोलियम शोधन असम के डिगबोई से शुरू हुआ, जो देश की सबसे पुरानी रिफाइनरी है। मोटरगाड़ी संयंत्र चेन्नई, पुणे, गुरुग्राम, जमशेदपुर और कोलकाता के आसपास हैं, तथा सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ा, जिसे खनिजों ने नहीं बल्कि कुशल श्रमिकों ने खींचा।
प्रमुख औद्योगिक प्रदेश और उपनाम
भूगोलवेत्ता आठ प्रमुख औद्योगिक प्रदेश गिनते हैं: मुंबई और पुणे, हुगली पट्टी, बेंगलुरु और तमिलनाडु, गुजरात, छोटा नागपुर, विशाखापत्तनम और गुंटूर, गुरुग्राम, दिल्ली तथा मेरठ, और कोल्लम तथा तिरुवनंतपुरम।
| उपनाम | स्थान |
|---|---|
| भारत का मैनचेस्टर | अहमदाबाद |
| दक्षिण भारत का मैनचेस्टर | कोयंबटूर |
| भारत का इस्पात नगर | जमशेदपुर |
| भारत का डेट्रॉयट | चेन्नई |
| भारत की सिलिकॉन वैली | बेंगलुरु |
| भारत का चीनी का कटोरा | उत्तर प्रदेश |
दो विचार इस अध्याय को बांधते हैं। पहला, उद्योग संकुलन अर्थव्यवस्था के कारण केंद्रित होता है, और औद्योगिक रूप से विकसित नगरीय केंद्रों के चारों ओर कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश होता है जो अन्न, कच्चा माल और श्रमिक देता है। दूसरा, अवस्थिति का कारण बदल सकता है: कोयले ने एक समय उद्योग को कोयला क्षेत्रों से बांध रखा था, पर बिजली, तेल पाइपलाइनों और कंटेनर बंदरगाहों ने वह पकड़ ढीली कर दी, इसीलिए नए संयंत्र तट पर और नए उद्योग विश्वविद्यालयों वाले नगरों में मिलते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन तरह के प्रश्न आते हैं। पहला वर्गीकरण का है: इनमें कृषि आधारित उद्योग कौन है, आधारभूत उद्योग कौन है, स्वच्छंद उद्योग कौन है। दूसरा अवस्थिति का है, जो सीधे भी पूछा जाता है, जैसे एल्यूमिनियम प्रगालक बिजलीघरों के पास क्यों हैं या जूट मिलें हुगली के किनारे क्यों हैं, और अध्याय की शब्दावली से भी, जहां संकुलन अर्थव्यवस्था तथा औद्योगिक केंद्र का कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश दो बार बार आने वाले पद हैं। तीसरा तथ्यों की सूची है: टिस्को के लिए 1907 और जमशेदपुर, पहली सूती मिल के लिए 1854 और बंबई, पहली जूट मिल के लिए 1855 और रिशरा, सीमेंट के लिए 1904 और चेन्नई, उर्वरक के लिए 1951 और सिंदरी, तथा प्रत्येक सार्वजनिक इस्पात संयंत्र के पीछे का विदेशी सहयोग, जिनमें राउरकेला के साथ जर्मनी और भिलाई के साथ सोवियत संघ सबसे अधिक पूछे जाते हैं। अहमदाबाद के लिए भारत का मैनचेस्टर जैसे उपनाम सरल अंक हैं, और कथन आधारित प्रश्न अक्सर संयंत्र को गलत राज्य से जोड़ देते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहला आधुनिक इस्पात संयंत्र | टिस्को, साकची, अब जमशेदपुर, 1907 |
|---|---|
| राउरकेला | ओडिशा, जर्मनी के सहयोग से |
| भिलाई और बोकारो | छत्तीसगढ़ तथा झारखंड, तत्कालीन सोवियत संघ के सहयोग से |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल, ब्रिटेन के सहयोग से |
| तटीय इस्पात संयंत्र | विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश, आयातित कोकिंग कोल पर आधारित |
| विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स | भद्रावती, कर्नाटक, जल विद्युत का उपयोग |
| भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड | सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों के लिए 1973 में स्थापित |
| पहली सफल सूती मिल | बंबई, 1854 |
| पहली जूट मिल | रिशरा, कलकत्ता के निकट, 1855 |
| सीमेंट उद्योग | 1904 में चेन्नई से शुरू; चूना पत्थर, कोयला और जिप्सम आवश्यक |
| पहला बड़ा उर्वरक संयंत्र | सिंदरी, 1951 |
| सबसे पुरानी रिफाइनरी | डिगबोई, असम |
| एल्यूमिनियम प्रगालक | कोरबा, रेणुकूट, अंगुल, हीराकुंड और अलुपुरम, सस्ती बिजली के पास |
| प्रमुख औद्योगिक प्रदेश | आठ: मुंबई-पुणे, हुगली, बेंगलुरु-तमिलनाडु, गुजरात, छोटा नागपुर, विशाखापत्तनम-गुंटूर, गुरुग्राम-दिल्ली-मेरठ, कोल्लम-तिरुवनंतपुरम |
| भारत का मैनचेस्टर | अहमदाबाद; कोयंबटूर दक्षिण भारत का मैनचेस्टर |
| भारत का डेट्रॉयट | चेन्नई, मोटरगाड़ी उद्योग के कारण |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
नीचे दो कथन दिए गए हैं, एक अभिकथन (A) और दूसरा कारण (R):
अभिकथन (A): अहमदाबाद भारत में सूती वस्त्र उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है।
कारण (R): अहमदाबाद भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र में स्थित है, इसलिए वहां कच्चे माल की कोई समस्या नहीं है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
कारण (R): अहमदाबाद भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्र में स्थित है, इसलिए वहां कच्चे माल की कोई समस्या नहीं है।
- A.(A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
- B.(A) और (R) दोनों सत्य हैं किंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
- C.(A) सत्य है किंतु (R) असत्य है
- D.(A) असत्य है किंतु (R) सत्य है
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. (A) असत्य है किंतु (R) सत्य है
व्याख्या
सही उत्तर D, अभिकथन असत्य है किंतु कारण सत्य है। अहमदाबाद सूती वस्त्र का बहुत बड़ा केंद्र है और उसे भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है, पर वह देश का सबसे बड़ा केंद्र नहीं है; वह स्थान मुंबई का है, जो पुराना कॉटनपोलिस है और अपने बंदरगाह, मिलों तथा पूंजी के कारण पहले विकसित हुआ, और इस उद्योग में महाराष्ट्र गुजरात से आगे रहता है। कारण स्वयं में सही कथन है: अहमदाबाद गुजरात की उस काली मिट्टी की पट्टी में है जहां पर्याप्त कपास होती है, इसलिए वहां कच्चा माल कभी बाधा नहीं रहा। विकल्प A और B दोनों अभिकथन को सत्य मानते हैं, जो वह नहीं है। विकल्प C स्थिति उलट देता है और कारण को असत्य कहता है, जबकि गुजरात वास्तव में अग्रणी कपास उत्पादक राज्य है।
नगरीय केंद्रों से मिलने वाले लाभों का उपयोग करने के लिए एक साथ आ जाने वाले उद्योगों के समूह को क्या कहा जाता है?
- A.ग्रामीण अर्थव्यवस्था
- B.समामेलन अर्थव्यवस्था
- C.नगरीय अर्थव्यवस्था
- D.संकुलन अर्थव्यवस्था
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. संकुलन अर्थव्यवस्था
व्याख्या
सही उत्तर D, संकुलन अर्थव्यवस्था है। जब उद्योग किसी एक नगरीय केंद्र पर एकत्र होते हैं तो उनमें से प्रत्येक उन सड़कों, रेल मार्गों, बिजली लाइनों, जल आपूर्ति, बैंकों, बीमा कार्यालयों, कुशल श्रमिकों, कलपुर्जे बनाने वालों और मरम्मत की दुकानों का उपयोग कर सकता है जो दूसरों ने खड़ी की हैं, और इस साझेदारी से होने वाली लागत बचत को संकुलन अर्थव्यवस्था कहते हैं। यही मुख्य कारण है कि उद्योग गुच्छों में बसते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था औद्योगिक संकुलन का पद ही नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि समामेलन का अर्थ दो कंपनियों का मिलकर एक होना है, जो स्वामित्व का विषय है, अवस्थिति का नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि नगरीय अर्थव्यवस्था नगरों के आर्थिक जीवन का सामान्य वर्णन है, जो इस प्रश्न की विशिष्ट बचत से बहुत व्यापक विचार है।
औद्योगिक रूप से विकसित नगरीय केंद्रों के चारों ओर सामान्यतः क्या होता है?
- A.कृषि प्रधान नगरीय पृष्ठ प्रदेश
- B.कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश
- C.तटीय पृष्ठ प्रदेश
- D.पत्तन पृष्ठ प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर B, कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश है। औद्योगिक नगर अकेला नहीं खड़ा रहता: उसके चारों ओर का क्षेत्र उसके श्रमिकों के लिए अन्न, उसकी मिलों के लिए कपास, गन्ना, तिलहन और जूट जैसा कृषि कच्चा माल तथा गांवों से श्रम देता है, और नगर बदले में उस ग्रामीण क्षेत्र को निर्मित वस्तुएं तथा सेवाएं बेचता है। नगर के चारों ओर की भूमि परिभाषा से ग्रामीण होती है और भारत में मुख्यतः कृषि प्रधान, इसलिए यह पद कृषि प्रधान ग्रामीण पृष्ठ प्रदेश है। विकल्प A स्वयं का खंडन करता है, क्योंकि पृष्ठ प्रदेश नगरीय और नगर के चारों ओर का ग्रामीण क्षेत्र, दोनों नहीं हो सकता। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि तटीय या पत्तन पृष्ठ प्रदेश उस भीतरी क्षेत्र का वर्णन करता है जिसे कोई बंदरगाह सेवा देता है, और यह केवल तटीय नगरों पर लागू होता है, सामान्यतः सभी औद्योगिक केंद्रों पर नहीं।
भिलाई इस्पात संयंत्र किसके सहयोग से स्थापित किया गया था?
- A.जर्मनी
- B.ब्रिटेन
- C.तत्कालीन सोवियत संघ
- D.जापान
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तत्कालीन सोवियत संघ
व्याख्या
सही उत्तर C, तत्कालीन सोवियत संघ है। द्वितीय पंचवर्षीय योजना में लिए गए तीन एकीकृत संयंत्रों में से वर्तमान छत्तीसगढ़ का भिलाई सोवियत सहयोग से बना, और बाद में झारखंड का बोकारो भी सोवियत सहयोग से आया, इसलिए दोनों सोवियत संयंत्र भिलाई और बोकारो हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि जर्मनी के सहयोग से ओडिशा का राउरकेला बना, जो इस प्रश्न में भिलाई के साथ सबसे अधिक भ्रमित किया जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ब्रिटेन के सहयोग से पश्चिम बंगाल का दुर्गापुर बना। विकल्प D गलत है क्योंकि उस काल का कोई सार्वजनिक एकीकृत इस्पात संयंत्र जापानी सहयोग से नहीं बना; भारतीय उद्योग में जापान की भूमिका बाद में और मुख्यतः मोटरगाड़ी क्षेत्र में आई। इस तीनी को इस प्रकार याद रखें: राउरकेला जर्मनी, दुर्गापुर ब्रिटेन और भिलाई सोवियत संघ।
राउरकेला इस्पात संयंत्र किस राज्य में स्थित है?
- A.झारखंड
- B.ओडिशा
- C.छत्तीसगढ़
- D.पश्चिम बंगाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर B, ओडिशा है। राउरकेला ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में ब्राह्मणी नदी पर है और द्वितीय पंचवर्षीय योजना में जर्मन सहयोग से बना; उसे लौह अयस्क ओडिशा के निक्षेपों से, कोयला झरिया पट्टी से और चूना पत्थर पूर्णापानी से मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि झारखंड में जमशेदपुर है, जो 1907 का निजी संयंत्र है, और बोकारो है, जो सोवियत सहयोग से बना सार्वजनिक संयंत्र है। विकल्प C गलत है क्योंकि छत्तीसगढ़ में भिलाई है, जो भी सोवियत सहयोग से बना और परीक्षाओं में राउरकेला से सबसे अधिक बदला जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल में ब्रिटिश सहयोग से बना दुर्गापुर तथा इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी का पुराना बर्नपुर कारखाना है। ये चारों राज्य उसी खनिज पट्टी में या उसके किनारे हैं, इसीलिए यह प्रश्न पूछने योग्य बनता है।
भारत का पहला आधुनिक लोहा इस्पात संयंत्र 1907 में कहां स्थापित हुआ?
- A.भद्रावती
- B.बर्नपुर
- C.साकची, अब जमशेदपुर
- D.दुर्गापुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. साकची, अब जमशेदपुर
व्याख्या
सही उत्तर C, साकची, अब जमशेदपुर है। टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने 1907 में वहां अपना कारखाना लगाया और यह स्थान इसलिए चुना कि छोटा नागपुर क्षेत्र में लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज तथा चूना पत्थर सब थोड़ी दूरी पर थे, स्वर्णरेखा और खरकई नदियों से जल उपलब्ध था, और रेल मार्ग कोलकाता बंदरगाह तक जाता था। विकल्प A गलत है क्योंकि कर्नाटक के भद्रावती का विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स बाद में आया और कोकिंग कोल के बजाय जल विद्युत के उपयोग के लिए जाना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी का संयंत्र भी बाद के चरण का है। विकल्प D गलत है क्योंकि दुर्गापुर स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश सहयोग से बना द्वितीय पंचवर्षीय योजना का सार्वजनिक संयंत्र है।
भारत में पहली सफल सूती वस्त्र मिल 1854 में कहां शुरू हुई?
- A.अहमदाबाद
- B.बंबई
- C.कोयंबटूर
- D.कानपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बंबई
व्याख्या
सही उत्तर B, बंबई है। पहली सफल सूती वस्त्र मिल वहां 1854 में चली, और नगर में उद्योग की हर आवश्यकता थी: दक्कन की काली मिट्टी से कपास, मशीनें उतारने के लिए बंदरगाह, व्यापारियों से पूंजी, कताई के अनुकूल आर्द्र जलवायु, और आसपास के जिलों से श्रमिक। विकल्प A गलत है क्योंकि अहमदाबाद की मिलें कुछ बाद आईं, हालांकि वह नगर आगे ऐसा केंद्र बना कि उसे भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कोयंबटूर का उत्कर्ष बीसवीं सदी का है, जब पश्चिमी घाट की जल विद्युत ने उसे दक्षिण भारत का मैनचेस्टर बना दिया। विकल्प D गलत है क्योंकि कानपुर उत्तर भारत के सूती, ऊनी तथा चर्म उद्योग के केंद्र के रूप में विकसित हुआ, पर पहली मिल का स्थान वह नहीं था।
भारत की पहली जूट मिल 1855 में रिशरा में लगी, जो वर्तमान में किस राज्य में है?
- A.बिहार
- B.ओडिशा
- C.पश्चिम बंगाल
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पश्चिम बंगाल
व्याख्या
सही उत्तर C, पश्चिम बंगाल है। रिशरा कोलकाता के निकट हुगली पर है, और 1855 में वहां लगी मिल ने उस उद्योग की शुरुआत की जो आज भी उसी नदी के साथ एक संकरी पट्टी में सिमटा है। इसके कारण भौगोलिक हैं: कच्चा जूट डेल्टा में उगता है, नदी सस्ता जल परिवहन तथा प्रसंस्करण के लिए आवश्यक मृदु जल देती है, कोयला रानीगंज और झरिया से आता है, और कोलकाता बंदरगाह, बैंक तथा बीमा कार्यालय देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि बिहार ने इन मिलों को श्रम दिया पर पहली मिल नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि ओडिशा में जूट निर्माण का ऐसा संकेंद्रण नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि असम में जूट पर्याप्त उगता है, फिर भी निर्माण नीचे की ओर बंगाल में ही रहा, और उगाने के क्षेत्र तथा औद्योगिक पट्टी का यही अंतर परीक्षक परखते हैं।
किस नगर को 'दक्षिण भारत का मैनचेस्टर' कहा जाता है?
- A.चेन्नई
- B.कोयंबटूर
- C.मदुरै
- D.बेंगलुरु
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कोयंबटूर
व्याख्या
सही उत्तर B, कोयंबटूर है। इस नगर में सूती वस्त्र मिलों तथा होजरी इकाइयों की संख्या बहुत अधिक है, जिसमें निकट उगने वाली कपास, पश्चिमी घाट की जल विद्युत और वस्त्र मशीनें बनाने वाली अभियांत्रिकी कार्यशालाओं की पुरानी परंपरा सहायक रही, इसलिए उसे दक्षिण भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है, जैसे अहमदाबाद भारत का मैनचेस्टर है। विकल्प A गलत है क्योंकि चेन्नई को उसके मोटरगाड़ी उद्योग के कारण भारत का डेट्रॉयट कहा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि मदुरै मंदिर नगर और हथकरघा बुनाई के लिए जाना जाता है, इस स्तर के मिल उद्योग के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि बेंगलुरु भारत की सिलिकॉन वैली है, जो नाम सूचना प्रौद्योगिकी से मिला, और वहां सार्वजनिक क्षेत्र की वायुयान, मशीन औजार तथा इलेक्ट्रॉनिकी इकाइयां भी हैं।
जिन उद्योगों का कच्चा माल हल्का और मूल्यवान होता है, जिससे वे किसी विशेष स्थान से बंधे नहीं होते, उन्हें कहा जाता है:
- A.आधारभूत उद्योग
- B.स्वच्छंद उद्योग
- C.कुटीर उद्योग
- D.भारी उद्योग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्वच्छंद उद्योग
व्याख्या
सही उत्तर B, स्वच्छंद उद्योग है। चूंकि उनका कच्चा माल हल्का, मूल्यवान और सरलता से ढोया जाने वाला होता है और उनमें बिजली तथा जल कम लगता है, ऐसी इकाइयां अयस्क, कोयले और स्थूल माल के सामान्य खिंचावों से मुक्त रहती हैं; इलेक्ट्रॉनिकी, कंप्यूटर संयोजन, हीरा तराशी और सॉफ्टवेयर इसके मानक उदाहरण हैं, और वे मुख्यतः कुशल श्रम तथा अच्छे संचार पर निर्भर हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि लोहा इस्पात जैसे आधारभूत या कुंजी उद्योग दूसरे उद्योगों को कच्चा माल देते हैं और खनिजों से गहरे बंधे होते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि कुटीर उद्योग की पहचान उसका आकार और घरेलू संगठन है, अवस्थिति की स्वतंत्रता नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारी उद्योग स्थूल माल संभालते हैं और स्वच्छंद के ठीक विपरीत हैं, क्योंकि वे खदान, कोयला क्षेत्र या बंदरगाह की ओर खिंचते हैं।
निम्नलिखित में से कौन कृषि आधारित उद्योग है?
- A.सीमेंट
- B.एल्यूमिनियम प्रगलन
- C.चीनी
- D.पेट्रोरसायन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चीनी
व्याख्या
सही उत्तर C, चीनी है। कृषि आधारित उद्योग अपने कच्चे माल के रूप में खेत की उपज लेता है, और चीनी गन्ने से बनती है, इसीलिए मिलें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु की गन्ना पट्टियों में हैं; सूती वस्त्र, जूट, वनस्पति तेल, चाय तथा खोई से बनने वाला कागज इसी वर्ग में आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि सीमेंट खनिज आधारित है और चूना पत्थर, कोयले तथा जिप्सम पर टिका है। विकल्प B गलत है क्योंकि एल्यूमिनियम प्रगलन भी खनिज आधारित है, जो बॉक्साइट पर चलता है और इसके अतिरिक्त सस्ती बिजली से बंधा है। विकल्प D गलत है क्योंकि पेट्रोरसायन खनिज तेल तथा प्राकृतिक गैस पर आधारित हैं और रिफाइनरियों के पास विकसित होते हैं। अच्छी आदत यह है कि पहले पूछें कि कच्चा माल कहां से आता है, खेत, खदान, वन या समुद्र से।
कोकिंग कोल के बजाय जल विद्युत का उपयोग करने वाला विश्वेश्वरैया आयरन एंड स्टील वर्क्स कहां स्थित है?
- A.कर्नाटक के भद्रावती में
- B.तमिलनाडु के सेलम में
- C.कर्नाटक के विजयनगर में
- D.आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कर्नाटक के भद्रावती में
व्याख्या
सही उत्तर A, कर्नाटक के भद्रावती में है। मैसूर राज्य के समय शुरू हुआ और आगे सर एम विश्वेश्वरैया के नाम पर रखा गया यह कारखाना भद्रा नदी पर है और भूगोल में उस संयंत्र के रूप में याद किया जाता है जो जल से बनी बिजली तथा निकट के वनों से मिले काष्ठ कोयले का उपयोग करता है, क्योंकि उस क्षेत्र में अपना कोकिंग कोल नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि तमिलनाडु का सेलम बाद के काल का विशेष तथा स्टेनलेस इस्पात संयंत्र है। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक का विजयनगर स्वदेशी प्रौद्योगिकी से बना आधुनिक संयंत्र है, और उसी राज्य में होने पर भी वह भिन्न स्थान है। विकल्प D गलत है क्योंकि विशाखापत्तनम वह तटीय संयंत्र है जो अपने ही बंदरगाह पर उतारे गए आयातित कोकिंग कोल पर चलता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकुलन अर्थव्यवस्था क्या है?
वह बचत जो किसी कारखाने को इस कारण होती है कि दूसरे कारखाने पहले से वहां हैं। किसी औद्योगिक नगर में आने वाली नई इकाई को सड़कें, बिजली लाइनें, जल आपूर्ति, बैंक, बीमा, कुशल श्रमिक, कलपुर्जे बनाने वाले और मरम्मत की दुकानें पहले से मिल जाती हैं, इसलिए उसकी लागत किसी एकांत स्थान से कम रहती है। इसी कारण उद्योग देश भर में समान रूप से फैलने के बजाय गुच्छों में बसते हैं।
जूट मिलें हुगली के किनारे क्यों केंद्रित हैं?
क्योंकि वहां हर आवश्यकता एक साथ है: कच्चा जूट गंगा ब्रह्मपुत्र डेल्टा में उगता है, नदी सस्ता जल परिवहन और प्रसंस्करण के लिए मृदु जल देती है, कोयला निकट के रानीगंज तथा झरिया क्षेत्रों से आता है, कोलकाता निर्यात के लिए बंदरगाह तथा बैंक और बीमा देता है, और सस्ता श्रम पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा तथा उत्तर प्रदेश से आया।
विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र तट पर क्यों है?
क्योंकि वह बड़े अंश में आयातित कोकिंग कोल पर चलता है, जिसे बंदरगाह पर उतारना भीतर ढोने से सस्ता है, और तैयार इस्पात उसी बंदरगाह से भेजा जा सकता है। इसके विपरीत जमशेदपुर, भिलाई और बोकारो जैसे पुराने संयंत्र भीतर रखे गए, छोटा नागपुर पठार तथा उसके पड़ोस के लौह अयस्क और कोयले के पास।
किन उद्योगों को स्वच्छंद उद्योग कहा जाता है?
उन उद्योगों को जो किसी विशेष स्थान से बंधे नहीं हैं, क्योंकि उनका कच्चा माल हल्का, मूल्यवान और सरलता से ढोया जाने वाला होता है और उनमें बिजली तथा जल कम लगता है। इलेक्ट्रॉनिकी, कंप्यूटर संयोजन, हीरा तराशी और सॉफ्टवेयर इसके सामान्य उदाहरण हैं; ऐसी इकाइयां मुख्यतः कुशल श्रमिकों और अच्छे संचार पर निर्भर रहती हैं, इसलिए लगभग किसी भी नगर में लग सकती हैं।
चीनी मिलें गन्ने के खेतों के पास क्यों होती हैं?
गन्ना स्थूल होता है और कटने के एक दो दिन में ही उसकी शर्करा घटने लगती है, इसलिए पेराई शीघ्र होनी चाहिए और गन्ना दूर नहीं ले जाया जा सकता। इससे चीनी भार ह्रासमान, शीघ्र नष्ट होने वाले कच्चे माल पर आधारित उद्योग बन जाती है, और इसी से स्पष्ट होता है कि मिलें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु की गन्ना पट्टियों में क्यों बिखरी हैं।
भारत का पहला आधुनिक लोहा इस्पात संयंत्र कौन था?
टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी का संयंत्र, जो 1907 में छोटा नागपुर क्षेत्र के साकची, अब जमशेदपुर, में लगा। वहां लौह अयस्क, कोयला, मैंगनीज और चूना पत्थर थोड़ी दूरी पर थे, स्वर्णरेखा तथा खरकई नदियों से जल मिला, और कोलकाता बंदरगाह तक रेल मार्ग उपलब्ध था।
स्रोत
- समकालीन भारत दो (कक्षा 10), अध्याय 6: निर्माण उद्योग — एनसीईआरटी
- भारत: लोग और अर्थव्यवस्था (कक्षा 12), अध्याय: निर्माण उद्योग — एनसीईआरटी
- सार्वजनिक क्षेत्र के एकीकृत इस्पात संयंत्र — इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार





