भूकंपलेखी पर सबसे पहले कौन सी भूकंपीय तरंग दर्ज होती है?
- A.द्वितीयक तरंगें
- B.प्राथमिक तरंगें
- C.धरातलीय तरंगें
- D.लव तरंगें
सही उत्तर
B. प्राथमिक तरंगें
व्याख्या
सही उत्तर B, प्राथमिक तरंगें हैं। P तरंगें अनुदैर्ध्य होती हैं और संपीडन तथा विरलन के द्वारा माध्यम के कणों को गति की दिशा में ही आगे-पीछे हिलाती हैं। ये सभी भूकंपीय तरंगों में सबसे तेज हैं, इसलिए किसी भी केंद्र पर सबसे पहले पहुँचती हैं और सिस्मोग्राम पर सबसे पहले अंकित होती हैं; इसी कारण इन्हें प्राथमिक कहा जाता है।
विकल्प A, द्वितीयक अर्थात S तरंगें, अनुप्रस्थ हैं और धीमी चलती हैं, इसलिए P तरंगों के बाद पहुँचती हैं; दोनों के पहुँचने का अंतर अधिकेंद्र की दूरी निकालने में काम आता है। विकल्प C और D, धरातलीय तरंगें, जिनमें लव और रेले तरंगें आती हैं, तब बनती हैं जब पिंड तरंगें सतह तक पहुँचती हैं; ये सबसे धीमी हैं और सबसे बाद में आती हैं, फिर भी भूमि पर अपनी लंबी लहरदार गति के कारण सबसे अधिक क्षति करती हैं। पहुँचने का क्रम याद रखें: पहले P, फिर S, फिर धरातलीय तरंगें।
पूरा लेख पढ़ें: भूकंप और ज्वालामुखी: तरंगें, पेटियाँ और प्रकार
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन सी भूकंपीय तरंग द्रव से होकर नहीं गुजर सकती?
- A.P तरंगें
- B.S तरंगें
- C.लव तरंगें
- D.रेले तरंगें
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. S तरंगें
व्याख्या
सही उत्तर B, S तरंगें हैं। द्वितीयक अर्थात S तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं, इसलिए माध्यम के कण गति की दिशा के समकोण पर हिलते हैं। अनुप्रस्थ तरंग को ऐसा माध्यम चाहिए जो आकार परिवर्तन का प्रतिरोध करे, और द्रव ऐसा नहीं करता, इसलिए S तरंगें द्रव बाह्य क्रोड पर रुक जाती हैं और अधिकेंद्र से लगभग 103 अंश से आगे दर्ज नहीं होतीं।
विकल्प A, P तरंगें, संपीडन और विरलन वाली अनुदैर्ध्य तरंगें हैं और ठोस, द्रव तथा गैस तीनों से समान रूप से गुजरती हैं, इसीलिए वे सदा सबसे पहले दर्ज होती हैं। विकल्प C और D, लव तथा रेले तरंगें, धरातलीय तरंगें हैं; वे केवल भूपर्पटी के सहारे चलती हैं और सबसे धीमी तथा सबसे विनाशकारी होती हैं, पर प्रश्न पृथ्वी के भीतर द्रव से गुजरने का है, जो वे करती ही नहीं। छाया क्षेत्र में S तरंगों का अभाव ही बाह्य क्रोड के द्रव होने का मानक प्रमाण है।
पृथ्वी के भीतर वह बिंदु जहाँ से भूकंप की उत्पत्ति होती है, क्या कहलाता है?
- A.अधिकेंद्र
- B.भ्रंश रेखा
- C.भूकंप मूल
- D.छाया क्षेत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. भूकंप मूल
व्याख्या
सही उत्तर C, भूकंप मूल है। भूकंप मूल अर्थात उद्गम केंद्र सतह के नीचे वह बिंदु है जहाँ दबाव में आई चट्टान टूटती है और संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा को भूकंपीय तरंगों के रूप में मुक्त करती है। उसकी गहराई तय करती है कि झटका कितनी दूर तक अनुभव होगा: समान परिमाण होने पर उथले मूल वाले भूकंप उद्गम के पास अधिक विनाशकारी होते हैं।
विकल्प A, अधिकेंद्र, भूकंप मूल के ठीक ऊपर धरातल पर स्थित बिंदु है, इसलिए वह सतही बिंदु है, उद्गम स्थल नहीं। विकल्प B, भ्रंश रेखा, भूपर्पटी की वह दरार है जिसके सहारे खंड खिसकते हैं; भूकंप मूल भ्रंश पर ही होता है, पर भ्रंश स्वयं रेखा या तल है, बिंदु नहीं। विकल्प D, छाया क्षेत्र, पृथ्वी के दूसरी ओर लगभग 103 से 142 अंश के बीच की वह पेटी है जहाँ सीधी P या S तरंगें नहीं पहुँचतीं। भूकंप मूल और अधिकेंद्र का यह अंतर इस अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न है।
रिक्टर पैमाने का प्रयोग निम्नलिखित में से किसे मापने के लिए किया जाता है?
- A.भूकंप से हुई क्षति की तीव्रता
- B.भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण
- C.भूकंप मूल की गहराई
- D.सुनामी लहरों की ऊँचाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण
व्याख्या
सही उत्तर B, भूकंप में मुक्त ऊर्जा का परिमाण है। 1935 में चार्ल्स एफ. रिक्टर द्वारा दिया गया रिक्टर पैमाना झटके के उद्गम पर मुक्त हुई ऊर्जा को व्यक्त करता है। यह लघुगणकीय और ऊपर से खुला पैमाना है, इसलिए हर पूर्ण संख्या नीचे वाली संख्या की तुलना में लगभग दस गुना तरंग आयाम और लगभग बत्तीस गुना ऊर्जा दर्शाती है, और एक भूकंप का केवल एक ही परिमाण मान होता है।
विकल्प A संशोधित मरकली पैमाने का वर्णन है, जो किसी स्थान पर अनुभव किए गए कंपन और क्षति को I से XII तक बारह श्रेणियों में बताता है और एक ही भूकंप के लिए कई मान देता है। विकल्प C, भूकंप मूल की गहराई, कई केंद्रों पर P और S तरंगों के पहुँचने के समय से निकाली जाती है और किसी नामित पैमाने से नहीं बताई जाती। विकल्प D, सुनामी लहरों की ऊँचाई, ज्वार मापी और महासागरीय प्लवों से सीधे मापी जाती है। जोड़ा याद रखें: परिमाण के लिए रिक्टर, तीव्रता के लिए मरकली।
भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन द्वीप कहाँ स्थित है?
- A.लक्षद्वीप
- B.कच्छ की खाड़ी
- C.अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
- D.सुंदरवन डेल्टा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
व्याख्या
सही उत्तर C, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह है। बैरन द्वीप अंडमान सागर में मुख्य अंडमान समूह के पूर्व में स्थित है और भारत तथा दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। यह उसी पेटी पर है जहाँ भारतीय प्लेट बर्मा प्लेट के नीचे धँस रही है, और इसी क्षेपण क्षेत्र से दिसंबर 2004 का विशाल समुद्री भूकंप उत्पन्न हुआ था।
विकल्प A, लक्षद्वीप, भूवैज्ञानिक अतीत के डूबे ज्वालामुखी आधारों पर बनी प्रवाल द्वीपों की शृंखला है, जहाँ आज कोई सक्रिय निकास नहीं है। विकल्प B, कच्छ की खाड़ी, गुजरात के अत्यधिक भूकंप प्रवण क्षेत्र में है और भूकंपीय क्षेत्र V में आती है, पर वहाँ ज्वालामुखी नहीं है। विकल्प D, सुंदरवन, गंगा और ब्रह्मपुत्र से बना डेल्टाई तथा मैंग्रोव क्षेत्र है और पूर्णतः अवसादी है। यह भी ध्यान रखें कि बैरन द्वीप के पास स्थित नारकोंडम प्रसुप्त माना जाता है और इसी प्रश्न का सामान्य भ्रामक विकल्प है।
भूकंप से उत्पन्न तरंगों को अभिलेखित करने वाला यंत्र क्या कहलाता है?
- A.सिस्मोग्राफ
- B.बैरोग्राफ
- C.आर्द्रतामापी
- D.अल्टीमीटर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सिस्मोग्राफ
व्याख्या
सही उत्तर A, सिस्मोग्राफ है। सिस्मोग्राफ अर्थात भूकंपलेखी में एक भार लगा होता है जो लगभग स्थिर रहता है जबकि भूमि और ढाँचा उसके नीचे हिलते हैं, और इस सापेक्ष गति को लहरदार रेखा के रूप में अंकित कर लिया जाता है। यह अभिलेख सिस्मोग्राम कहलाता है, और उस पर P तथा S तरंगों के पहुँचने के बीच का अंतराल यह निकालने में काम आता है कि केंद्र वहाँ से कितनी दूर है। तीन या अधिक केंद्रों के पाठ से अधिकेंद्र तय होता है।
विकल्प B, बैरोग्राफ, स्वतः अभिलेखी निर्द्रव बैरोमीटर है जो वायुदाब का सतत आलेख बनाता है। विकल्प C, आर्द्रतामापी, वायु की आर्द्रता मापता है, जिसमें शुष्क और आर्द्र बल्ब वाला प्रकार सामान्य है। विकल्प D, अल्टीमीटर, समुद्र तल से ऊँचाई दिखाने के लिए अंशांकित निर्द्रव बैरोमीटर है और वायुयानों तथा पर्वतारोहियों द्वारा प्रयोग होता है। यंत्र और उपयोग के प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं, इसलिए चारों को एक साथ याद करें।