भारत में अक्टूबर-नवंबर के दौरान सूर्य के दक्षिण की ओर आभासी गमन के साथ उत्तरी मैदानों पर ______ कमजोर पड़ जाती है।
- A.ऊपरी स्तर की द्रोणी
- B.मानसून द्रोणी
- C.प्रतिपवन द्रोणी
- D.उलटी द्रोणी
सही उत्तर
B. मानसून द्रोणी
व्याख्या
सही उत्तर B, मानसून द्रोणी है। मानसून द्रोणी वर्षा ऋतु में उत्तरी मैदानों पर फैली निम्न दाब की पेटी है, जो वर्षा लाने वाले अवदाबों का मार्ग तय करती है। सितंबर विषुव के बाद जब सूर्य भूमध्य रेखा के दक्षिण जाता दिखता है, स्थल ठंडा होने लगता है, निम्न दाब कमजोर पड़ता है और द्रोणी की जगह उच्च दाब ले लेता है। द्रोणी का यही हटना मानसून का निवर्तन कहलाता है, जो सितंबर के आरंभ में उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होता है।
विकल्प A ऊपरी स्तर की द्रोणी ऊपरी वायु संचरण से संबंधित है, यहाँ वर्णित विशेषता नहीं। विकल्प C प्रतिपवन द्रोणी पर्वत के पवनविमुख ढाल पर बनने वाली स्थानीय रचना है। विकल्प D उलटी द्रोणी मानसून द्रोणी के बंगाल की खाड़ी में फैले एक विशेष आकार का नाम है, मैदानों की वह विशेषता नहीं जो अक्टूबर में कमजोर पड़ती है।
पूरा लेख पढ़ें: भारत की जलवायु और वर्षा: मानसून, ऋतुएँ और विगत प्रश्न
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंशीत ऋतु के आरंभ में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा किस कारण होती है?
- A.उत्तर-पूर्वी मानसून
- B.स्थानीय वायु संचरण
- C.शीतोष्ण चक्रवात
- D.दक्षिण-पश्चिम मानसून
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्तर-पूर्वी मानसून
व्याख्या
सही उत्तर A, उत्तर-पूर्वी मानसून है। अक्टूबर और नवंबर में मानसून के लौटने पर हवा की दिशा उलट जाती है और वायु स्थल से समुद्र की ओर बहने लगती है। बंगाल की खाड़ी पार करते समय यह नमी ग्रहण कर लेती है और कोरोमंडल तट से टकराकर तमिलनाडु तथा तटीय आंध्र प्रदेश को उनकी मुख्य वर्षा ऋतु देती है। इसी कारण तमिलनाडु भारत का वह बड़ा भाग है जिसका कृषि पंचांग ग्रीष्म के बजाय शीत ऋतु की वर्षा पर निर्भर करता है।
विकल्प B स्थानीय वायु संचरण से केवल स्थल और समुद्र समीर बनते हैं, जो पूरी ऋतु की वर्षा नहीं दे सकते। विकल्प C शीतोष्ण चक्रवात अर्थात पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा देते हैं, सुदूर दक्षिण में नहीं। विकल्प D दक्षिण-पश्चिम मानसून के महीनों में तमिलनाडु पश्चिमी घाट की वृष्टिछाया में रहने के कारण सूखा रहता है।
भारत के किस राज्य में तड़ित झंझा से होने वाली वर्षा को चेरी ब्लॉसम कहा जाता है?
- A.गुजरात
- B.मेघालय
- C.उत्तराखंड
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कर्नाटक
व्याख्या
सही उत्तर D, कर्नाटक है। कर्नाटक में मानसून से पहले होने वाली गरज-चमक वाली बौछारों को चेरी ब्लॉसम या पुष्प वर्षा कहा जाता है, क्योंकि इनसे कोडगु, चिकमगलूर और हासन पट्टी के कॉफी के पौधों में फूल आते हैं। इसी परिवार की बौछारों को केरल तथा तटीय कर्नाटक में आम्र वर्षा कहते हैं, क्योंकि उनसे आम पकने में सहायता मिलती है, और परीक्षा में ये दोनों नाम प्रायः साथ पूछे जाते हैं।
विकल्प A गुजरात में इस प्रकार की कोई स्थानीय बौछार मानक सूची में नहीं है। विकल्प B मेघालय मौसिनराम और चेरापूंजी की सर्वाधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध है, पर वह वर्षा बंगाल की खाड़ी शाखा से आती है। विकल्प C उत्तराखंड में शीत ऋतु में पश्चिमी विक्षोभ से और ग्रीष्म में मानसून से वर्षा होती है, इनमें से कोई पुष्प वर्षा नहीं कहलाती।
समान वर्षा वाले क्षेत्रों को जोड़ने वाली रेखा क्या कहलाती है?
- A.समदाब रेखा
- B.समवर्षा रेखा
- C.समताप रेखा
- D.समलवण रेखा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. समवर्षा रेखा
व्याख्या
सही उत्तर B, समवर्षा रेखा है। समवर्षा रेखा यानी आइसोहाइट मानचित्र पर उन सभी स्थानों से होकर खींची जाती है जहाँ किसी निश्चित अवधि में समान मात्रा में वर्षा होती है। भारत के वर्षा मानचित्र इन्हीं रेखाओं से बनाए जाते हैं, और पश्चिमी घाट के सहारे इनका पास-पास आ जाना दिखाता है कि पवनमुखी तट से पठार की वृष्टिछाया तक वर्षा कितनी तेजी से घटती है।
विकल्प A समदाब रेखा समान वायुदाब वाले स्थानों को जोड़ती है और मौसम चार्ट पर अवदाब तथा प्रतिचक्रवात दिखाने के काम आती है। विकल्प C समताप रेखा समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती है। विकल्प D समलवण रेखा समुद्र में समान लवणता वाले स्थानों को जोड़ती है। चारों में यूनानी उपसर्ग आइसो है, जिसका अर्थ समान है, और परीक्षक इसी भ्रम पर प्रश्न बनाते हैं।
जलवायु प्रकार और क्षेत्र का निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही नहीं है? I. अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु - पंजाब। II. शुष्क ग्रीष्म वाली मानसूनी जलवायु - तमिलनाडु का कोरोमंडल तट।
- A.केवल I
- B.न I और न ही II
- C.केवल II
- D.I और II दोनों
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. न I और न ही II
व्याख्या
सही उत्तर B, न I और न ही II है, अर्थात दिए गए दोनों युग्म सही हैं और कोई भी गलत नहीं है। भारत पर लागू कोपेन वर्गीकरण में अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु, जिसे BShw लिखा जाता है, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा प्रायद्वीप के शुष्क भीतरी भागों में मिलती है, जहाँ वर्षा कम तो है पर सच्चे मरुस्थल जितनी कम नहीं। शुष्क ग्रीष्म वाली मानसूनी जलवायु, जिसे As लिखा जाता है, तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर मिलती है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून के महीनों में सूखा रहता है और शीत ऋतु में निवर्तनी मानसून से वर्षा पाता है।
विकल्प A और C में से प्रत्येक एक सही युग्म को गलत ठहराता है और विकल्प D दोनों को। जाल यह मान लेने में है कि ऐसे प्रश्न में कोई न कोई कथन गलत अवश्य होगा।
दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः केरल तट पर किस तिथि के आसपास पहुँचता है?
- A.1 अप्रैल
- B.1 मई
- C.1 जून
- D.1 जुलाई
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1 जून
व्याख्या
सही उत्तर C, 1 जून है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः एक जून के आसपास केरल तट पर आता है, और उसके आगमन के साथ होने वाली अचानक भारी वर्षा को मानसून प्रस्फोट कहा जाता है। केरल से यह दो शाखाओं में आगे बढ़ता है, एक अरब सागर पर और दूसरी बंगाल की खाड़ी पर, लगभग दस जून तक मुंबई और मध्य जुलाई तक पूरे देश को ढक लेता है।
विकल्प A एक अप्रैल ग्रीष्म ऋतु में पड़ता है जब स्थल तपना आरंभ ही करता है। विकल्प B एक मई तक आम्र वर्षा और काल बैसाखी जैसी मानसून पूर्व बौछारों का समय रहता है। विकल्प D एक जुलाई बहुत देर का समय है, क्योंकि तब तक मानसून देश के अधिकांश भाग को ढक चुका होता है और मैदानों में पूरी वर्षा चल रही होती है।