भारत के वस्त्र और साड़ियां: राज्य, बुनाई और शिल्प
भारत के वस्त्रों और साड़ियों पर परीक्षा नोट्स: राज्यवार प्रसिद्ध हथकरघा साड़ियां, चार प्रकार के रेशम, रंगाई और छपाई के शिल्प तथा राज्यों की कढ़ाई शैलियां।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत में जितने प्रकार के वस्त्र बुने जाते हैं, उतने संसार के किसी और देश में नहीं बुने जाते। परीक्षा में इस विषय से प्रश्न लगभग एक ही ढंग से आते हैं: किसी साड़ी या शिल्प का नाम देकर उसका राज्य पूछा जाता है, या किसी तकनीक का नाम देकर उसका नगर पूछा जाता है। नाम हर प्रश्नपत्र में दोहराए जाते हैं, इसलिए इस विषय को जोड़ों के रूप में याद करना सबसे सुरक्षित तरीका है। इन नोट्स में पहले राज्यवार हथकरघा साड़ियां दी गई हैं, फिर चार प्रकार के रेशम, बुनाई, रंगाई और छपाई की तकनीकें, राज्यों की कढ़ाई शैलियां, और अंत में खादी, हथकरघा तथा भौगोलिक संकेतक की रक्षा।
प्रसिद्ध साड़ियां और उनके राज्य
| साड़ी या वस्त्र | राज्य | केंद्र और पहचान |
|---|---|---|
| बनारसी | उत्तर प्रदेश | वाराणसी; सोने चांदी की जरी वाला भारी रेशमी ब्रोकेड |
| कांजीवरम या कांचीपुरम | तमिलनाडु | कांचीपुरम; मोटा शहतूती रेशम, शरीर और किनारा अलग बुनकर जोड़ा जाता है |
| पटोला | गुजरात | पाटन; दोहरी इकत, आगे और पीछे एक ही नमूना |
| बंधनी | गुजरात और राजस्थान | कच्छ, जामनगर, जोधपुर; बांधकर रंगाई से बने बिंदु |
| पैठणी | महाराष्ट्र | पैठण और येवला; पल्लू पर मोर और कमल के नमूने |
| बालूचरी | पश्चिम बंगाल | बिष्णुपुर; पल्लू में बुने गए महाकाव्यों के दृश्य |
| जामदानी | पश्चिम बंगाल | महीन मलमल, करघे पर हाथ से जोड़े गए बूटे |
| संबलपुरी | ओडिशा | बंधा या इकत; शंख, चक्र और फूल के नमूने |
| पोचमपल्ली इकत | तेलंगाना | भूदान पोचमपल्ली; ज्यामितीय इकत, रेशम नगरी की बुनाई |
| मूगा और मेखला चादर | असम | सुआलकुची; प्राकृतिक सुनहरा रेशम, जो अन्यत्र नहीं मिलता |
| कसावु | केरल | बलरामपुरम और चेंदमंगलम; सुनहरे किनारे वाला श्वेताभ सूती वस्त्र |
| चंदेरी और माहेश्वरी | मध्य प्रदेश | चंदेरी और महेश्वर; हल्का, चमकीला और लगभग पारदर्शी सूती रेशमी वस्त्र |
| कोटा डोरिया | राजस्थान | कोटा के निकट कैथून; सूत और रेशम की वर्गाकार जाली, अत्यंत हल्की |
| मैसूर सिल्क और इल्कल | कर्नाटक | मैसूरु और इल्कल; जरी वाला क्रेप रेशम तथा इल्कल का लाल पल्लू |
| पश्मीना | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर; लद्दाख की चांगथांगी बकरी का ऊन, कानी शाल के रूप में बुना जाता है |
भारत के चार प्रकार के रेशम
भारत संसार का एकमात्र देश है जो चारों व्यावसायिक प्रकार के रेशम का उत्पादन करता है, और चीन के बाद यह रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। शहतूती रेशम सबसे महीन है और कुल उत्पादन का बड़ा भाग है, यह बॉम्बिक्स मोरी कीट से मिलता है तथा मुख्य रूप से कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में पाला जाता है। तसर रेशम कुछ मोटा और तांबई रंग का वन्य रेशम है, जो झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में होता है। एरी रेशम असम का गरम रेशम है, जिसे अहिंसा रेशम कहा जाता है क्योंकि कीट कोया छोड़ देने के बाद ही उसका धागा निकाला जाता है। मूगा रेशम सुनहरा और चमकीला होता है, यह असम रेशम कीट से मिलता है और केवल ब्रह्मपुत्र घाटी में बनता है। केंद्रीय रेशम बोर्ड की स्थापना 1949 में हुई, यह वस्त्र मंत्रालय के अधीन है और इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है।
बुनाई, रंगाई और छपाई की तकनीकें
- इकत या बंधा: बुनाई से पहले धागे को बांधकर रंगा जाता है, इसलिए नमूने के किनारे धुंधले रहते हैं। पाटन का पटोला दोहरी इकत है; पोचमपल्ली और संबलपुरी अन्य प्रमुख इकत बुनाई हैं।
- ब्रोकेड या जरी का काम: कपड़े में सोने चांदी के तार बुने जाते हैं, जो बनारस की तथा बालूचरी और पैठणी के पल्लू की पहचान है।
- बंधनी: कपड़े को हजारों छोटी गांठों में बांधकर रंगा जाता है, जिससे गांठ वाले स्थान बिंदु के रूप में बिना रंगे रह जाते हैं; यह गुजरात और राजस्थान का शिल्प है।
- कलमकारी: आंध्र प्रदेश के श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम में कलम से चित्रित या ठप्पे से छपा वस्त्र, जिसमें वानस्पतिक रंग प्रयोग होते हैं।
- ठप्पा छपाई: राजस्थान के सांगानेर और बगरू, मध्य प्रदेश का बाघ तथा कच्छ का अजरख, प्रत्येक के अपने मजीठ, नील और लौह काले रंग।
- बटिक: मोम से रोककर की जाने वाली रंगाई, जो मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होती है।
राज्यों की कढ़ाई शैलियां
| कढ़ाई | राज्य | पहचान |
|---|---|---|
| फुलकारी | पंजाब | खद्दर पर चमकीले रेशमी धागे से फूलों का डारन टांका |
| चिकनकारी | उत्तर प्रदेश | लखनऊ की महीन मलमल पर सफेद छाया कढ़ाई |
| जरदोजी | उत्तर प्रदेश | लखनऊ और भोपाल की धातु के तार, सितारों और नगों वाली कढ़ाई |
| कांथा | पश्चिम बंगाल | पुराने कपड़ों पर दौड़ते टांके की रजाई कढ़ाई, लोक नमूनों के साथ |
| कसूती | कर्नाटक | गिने हुए धागों का काम, जिसमें पीछे कोई गांठ नहीं रहती |
| सुजनी | बिहार | मुजफ्फरपुर के भुसरा की कथा कहने वाली रजाई कढ़ाई |
| कशीदा | जम्मू और कश्मीर | शालों पर चिनार और बादाम के नमूनों वाली जंजीर और साटन टांका कढ़ाई |
| टोडा | तमिलनाडु | नीलगिरि की टोडा जाति का लाल और काला ज्यामितीय काम |
खादी, हथकरघा और भौगोलिक संकेतक
हाथ से काते और हाथ से बुने वस्त्र खादी स्वतंत्रता आंदोलन का वस्त्र बन गया। खादी और ग्रामोद्योग आयोग की स्थापना संसद के 1956 के अधिनियम से हुई, इसने 1957 में कार्य आरंभ किया और इसका मुख्य कार्यालय मुंबई में है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 7 अगस्त को मनाया जाता है, क्योंकि इसी तिथि को 1905 में कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा हुई थी, और पहला आयोजन 2015 में चेन्नई में हुआ। हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों की रक्षा भौगोलिक संकेतक के रूप में वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक अधिनियम, 1999 के अंतर्गत होती है। पोचमपल्ली इकत आरंभिक पंजीकृत वस्त्रों में था, तथा बनारसी ब्रोकेड, कांचीपुरम रेशम, पाटन पटोला, चंदेरी, कोटा डोरिया, संबलपुरी बंधा और असम का मूगा रेशम सभी इस संकेतक के धारक हैं। यह संकेतक क्रेता को बताता है कि वस्त्र कहां बना है, और एक बार में दस वर्ष के लिए दिया जाता है, जिसका नवीकरण होता रहता है।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षाओं में यह विषय मिलान के जोड़ों के रूप में आता है। पहला प्रकार साड़ी का नाम देकर राज्य पूछता है: पटोला के साथ गुजरात, पैठणी के साथ महाराष्ट्र, बालूचरी और जामदानी के साथ पश्चिम बंगाल, पोचमपल्ली के साथ तेलंगाना, चंदेरी के साथ मध्य प्रदेश। दूसरा प्रकार कढ़ाई का नाम देकर उसका राज्य पूछता है, जिसमें फुलकारी, चिकनकारी, कांथा, कसूती और सुजनी सबसे अधिक पूछी जाती हैं। तीसरा प्रकार तकनीक या स्थान पूछता है: कौन सी साड़ी दोहरी इकत है, कलमकारी कहां बनती है, कौन रेशम सुनहरा है, मूगा कहां बुना जाता है। सामान्य भ्रम ये हैं कि कांचीपुरम को केरल में रख देना, चंदेरी को चिकनकारी समझ लेना, बंधनी को बुनाई मान लेना तथा तेलंगाना की पोचमपल्ली और ओडिशा की संबलपुरी को आपस में बदल देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| दोहरी इकत साड़ी | गुजरात के पाटन की पटोला |
|---|---|
| पल्लू में महाकाव्य के दृश्य | बालूचरी, बिष्णुपुर, पश्चिम बंगाल |
| सुनहरा रेशम | मूगा, असम; सुआलकुची में बुना जाता है |
| अहिंसा रेशम | एरी, असम, कीट के कोया छोड़ने के बाद धागा निकाला जाता है |
| केंद्रीय रेशम बोर्ड | स्थापना 1949, मुख्यालय बेंगलुरु, वस्त्र मंत्रालय |
| कलमकारी केंद्र | श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश |
| कोटा डोरिया | कोटा के निकट कैथून, राजस्थान |
| राष्ट्रीय हथकरघा दिवस | 7 अगस्त, 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में |
| खादी और ग्रामोद्योग आयोग | 1956 के अधिनियम से स्थापित, 1957 में आरंभ, कार्यालय मुंबई |
| भौगोलिक संकेतक कानून | वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक अधिनियम, 1999 |
| पश्मीना | लद्दाख की चांगथांगी बकरी का ऊन, श्रीनगर में बुना जाता है |
| मध्य प्रदेश की हल्की साड़ियां | चंदेरी और माहेश्वरी |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
दोहरी इकत तकनीक से बुनी जाने वाली पटोला साड़ी किस राज्य से है?
- A.गुजरात
- B.ओडिशा
- C.तेलंगाना
- D.महाराष्ट्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. गुजरात
व्याख्या
सही उत्तर A, गुजरात है। पटोला साड़ी गुजरात के पाटन में बुनी जाती है, जहां बुनाई से पहले ताना और बाना दोनों के धागों को बांधकर रंगा जाता है। चूंकि दोनों प्रकार के धागे नमूना धारण करते हैं, इसलिए तैयार कपड़े के आगे और पीछे एक ही नमूना दिखता है, और इसी कारण इसे दोहरी इकत कहा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि ओडिशा में संबलपुरी बंधा साड़ी बुनी जाती है, जिसमें सामान्यतः धागों का एक ही समूह बांधकर रंगा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि तेलंगाना पोचमपल्ली इकत का घर है, जो अपने ज्यामितीय नमूनों के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि महाराष्ट्र में पैठणी बुनी जाती है, जो पल्लू पर मोर और कमल के नमूनों वाला ब्रोकेड है और उसमें इकत का काम नहीं होता। पाटन के साथ पटोला और दोहरी शब्द को स्मरण रखें।
जिसके पल्लू में महाकाव्यों के दृश्य बुने जाते हैं, वह बालूचरी साड़ी किस स्थान की देन है?
- A.तमिलनाडु का कांचीपुरम
- B.पश्चिम बंगाल का बिष्णुपुर
- C.मध्य प्रदेश का चंदेरी
- D.महाराष्ट्र का पैठण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पश्चिम बंगाल का बिष्णुपुर
व्याख्या
सही उत्तर B, पश्चिम बंगाल का बिष्णुपुर है। बालूचरी बुनाई का नाम मुर्शिदाबाद के बालूचर गांव से पड़ा और यह आगे बांकुड़ा जिले के बिष्णुपुर में बसी, जो आज इसका केंद्र है। इसकी पहचान पल्लू है, जिसमें रामायण और महाभारत के प्रसंग तथा दरबारी दृश्य रेशम में बुने जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कांचीपुरम में मोटे शहतूती रेशम की साड़ियां विपरीत रंग के किनारों के साथ बुनी जाती हैं, उनमें कथा वाले पल्लू नहीं होते। विकल्प C गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश का चंदेरी हल्की, चमकीली और लगभग पारदर्शी सूती रेशमी साड़ियों के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि महाराष्ट्र का पैठण पैठणी का घर है, जिसके पल्लू पर कथा के स्थान पर मोर और कमल के नमूने होते हैं। बिष्णुपुर के साथ बालूचरी का जोड़ा याद रखें।
प्राकृतिक सुनहरा रेशम मूगा भारत के किस राज्य में उत्पन्न होता है?
- A.कर्नाटक
- B.झारखंड
- C.असम
- D.पश्चिम बंगाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. असम
व्याख्या
सही उत्तर C, असम है। मूगा रेशम ब्रह्मपुत्र घाटी में असम रेशम कीट से तैयार किया जाता है और यह संसार का एकमात्र प्राकृतिक सुनहरा रेशम है, जिससे मेखला चादर तथा साड़ियां गुवाहाटी के निकट सुआलकुची में बुनी जाती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कर्नाटक शहतूती रेशम का अग्रणी उत्पादक है, जो सफेद और महीन प्रकार है तथा भारतीय रेशम का बड़ा भाग बनाता है, और मैसूरु अपनी क्रेप रेशमी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प B गलत है क्योंकि झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के साथ तसर रेशम देता है, जो मोटा और तांबई रंग का वन्य रेशम है। विकल्प D गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल शहतूती रेशम पालता है और बालूचरी तथा जामदानी बुनता है, मूगा नहीं। असम से ही एरी रेशम भी मिलता है।
कांजीवरम या कांचीपुरम रेशमी साड़ी किस राज्य की है?
- A.केरल
- B.तमिलनाडु
- C.आंध्र प्रदेश
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तमिलनाडु
व्याख्या
सही उत्तर B, तमिलनाडु है। यह साड़ी तमिलनाडु के मंदिर नगर कांचीपुरम के नाम पर है, जहां यह मोटे शहतूती रेशम से बुनी जाती है। इसका मध्य भाग और विपरीत रंग का किनारा अक्सर अलग बुनकर इतनी मजबूती से जोड़े जाते हैं कि साड़ी फटने पर भी जोड़ टिका रहता है, और इसमें जरी की चौड़ी पट्टियां प्रयोग होती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि केरल में कसावु बुनी जाती है, जो बलरामपुरम और चेंदमंगलम की श्वेताभ सूती साड़ी है और उसका किनारा सादा सुनहरा होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश वेंकटगिरि तथा उप्पाडा साड़ियों और कलमकारी चित्रित वस्त्र के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कर्नाटक मैसूर क्रेप रेशम और इल्कल साड़ी देता है। कांचीपुरम को तमिलनाडु से हटाकर न रखें।
गुजरात और राजस्थान का शिल्प बंधनी किस तकनीक का उदाहरण है?
- A.बांधकर रंगाई
- B.मोम से रोककर छपाई
- C.धातु के तार की कढ़ाई
- D.कलम से हाथ की चित्रकारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बांधकर रंगाई
व्याख्या
सही उत्तर A, बांधकर रंगाई है। बंधनी में कपड़े को चुटकी से उठाकर धागे से हजारों छोटी गांठों में बांधा जाता है और फिर रंग में डुबोया जाता है, जिससे बंधे स्थान रंग नहीं पकड़ते और वर्ग, लहर तथा फूल के नमूनों में सफेद या हल्के बिंदु बन जाते हैं। कच्छ, जामनगर, जोधपुर और सीकर इसके प्रसिद्ध केंद्र हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि मोम से रोककर की जाने वाली रंगाई बटिक है, जो मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में होती है और जिसमें धागे के स्थान पर पिघला मोम रंग को रोकता है। विकल्प C गलत है क्योंकि धातु के तार की कढ़ाई जरदोजी है, जो लखनऊ और भोपाल का सूई शिल्प है। विकल्प D गलत है क्योंकि कलम से चित्रकारी आंध्र प्रदेश की कलमकारी है। बंधनी रंगाई है, बुनाई या सिलाई नहीं।
महीन मलमल पर की जाने वाली सफेद छाया कढ़ाई चिकनकारी किस नगर से जुड़ी है?
- A.जयपुर
- B.लखनऊ
- C.भागलपुर
- D.श्रीनगर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लखनऊ
व्याख्या
सही उत्तर B, लखनऊ है। चिकनकारी उत्तर प्रदेश के लखनऊ की हाथ की कढ़ाई है, जो हल्के वस्त्र पर सफेद बिना बटे धागे से की जाती है और जिसके टांके नमूने को कपड़े के आर पार छाया के रूप में दिखाते हैं। यही नगर जरदोजी का भी घर है, जो धातु के तार का भारी काम है। विकल्प A गलत है क्योंकि जयपुर तथा उसके निकट सांगानेर और बगरू ठप्पे से छपे सूती वस्त्र के लिए जाने जाते हैं, छाया कढ़ाई के लिए नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि बिहार का भागलपुर रेशम नगरी है, जो तसर बुनाई के लिए प्रसिद्ध है, कढ़ाई के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि जम्मू कश्मीर का श्रीनगर शालों पर कशीदा कढ़ाई और पश्मीना बुनाई के लिए जाना जाता है। लखनऊ के साथ चिकनकारी का जोड़ा स्मरण रखें।
ज्यामितीय इकत बुनाई के लिए प्रसिद्ध पोचमपल्ली किस राज्य में है?
- A.तेलंगाना
- B.ओडिशा
- C.तमिलनाडु
- D.गुजरात
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. तेलंगाना
व्याख्या
सही उत्तर A, तेलंगाना है। तेलंगाना के यदाद्री भुवनगिरि जिले का भूदान पोचमपल्ली वह स्थान है जहां पोचमपल्ली नाम की इकत साड़ी बुनी जाती है, जिसमें धागे को बांधकर रंगकर हीरे और वर्ग के ज्यामितीय नमूने बनाए जाते हैं और उनके किनारे हल्के धुंधले रहते हैं। यह भौगोलिक संकेतक पाने वाले आरंभिक भारतीय वस्त्रों में था। विकल्प B गलत है क्योंकि ओडिशा की इकत संबलपुरी बंधा है, जिसमें शंख, चक्र और फूल के नमूने प्रयोग होते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि तमिलनाडु कांचीपुरम और कोंराड मंदिर साड़ियों का घर है, जो ब्रोकेड बुनाई हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि गुजरात की इकत पाटन की दोहरी इकत पटोला है। पोचमपल्ली को तेलंगाना की रेशम नगरी भी कहा जाता है। परीक्षा में इकत को तीन राज्यों से जोड़कर याद रखें: पटोला के लिए गुजरात, संबलपुरी के लिए ओडिशा और पोचमपल्ली के लिए तेलंगाना।
श्रीकालहस्ती और मछलीपट्टनम किस वस्त्र शिल्प के दो केंद्र हैं?
- A.फुलकारी
- B.कलमकारी
- C.कांथा
- D.बंधनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कलमकारी
व्याख्या
सही उत्तर B, कलमकारी है। कलमकारी वह वस्त्र है जिसे वानस्पतिक रंगों से सजाया जाता है, और इसकी दो शैलियां हैं, दोनों आंध्र प्रदेश में। श्रीकालहस्ती में काम कलम से मुक्त हस्त चित्रण के रूप में होता है और विषय मंदिर की पौराणिक कथाओं से लिए जाते हैं, जबकि मछलीपट्टनम में नमूने लकड़ी के खुदे ठप्पों से छापे जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि फुलकारी पंजाब की चमकीली डारन टांका फूल कढ़ाई है, जो खद्दर पर की जाती है। विकल्प C गलत है क्योंकि कांथा पश्चिम बंगाल की दौड़ते टांके वाली रजाई कढ़ाई है, जो पुराने कपड़ों की तहों से बनती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बंधनी गुजरात और राजस्थान का बांधकर रंगाई का शिल्प है। कलमकारी के साथ आंध्र प्रदेश और उसके दोनों नगर याद रखें।
फुलकारी कढ़ाई किस राज्य का परंपरागत शिल्प है?
- A.पंजाब
- B.बिहार
- C.कर्नाटक
- D.मणिपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पंजाब
व्याख्या
सही उत्तर A, पंजाब है। फुलकारी का अर्थ फूलों का काम है और यह पंजाब की कढ़ाई है, जिसमें चमकीले बिना बटे रेशमी धागे से मोटे हाथ के काते खद्दर कपड़े की उलटी ओर से डारन टांका लगाया जाता है, जिससे सतह फूलों से भर जाती है। जिस प्रकार में कढ़ाई पूरी सतह को ढक लेती है उसे बाग कहा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि बिहार की कथा कहने वाली रजाई कढ़ाई सुजनी है, जो मुजफ्फरपुर के भुसरा से है, और मधुबनी उसकी चित्रकला परंपरा है। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक की गिने हुए धागों वाली कढ़ाई कसूती है, जिसमें पीछे गांठ नहीं रहती। विकल्प D गलत है क्योंकि मणिपुर अपनी हथकरघा बुनाई के लिए जाना जाता है, इस प्रकार की किसी नामित कढ़ाई के लिए नहीं।
सूत और रेशम की वर्गाकार जाली में बुनी जाने वाली अत्यंत हल्की कोटा डोरिया साड़ी किस राज्य की है?
- A.मध्य प्रदेश
- B.राजस्थान
- C.उत्तर प्रदेश
- D.हरियाणा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर B, राजस्थान है। कोटा डोरिया राजस्थान में कोटा के निकट कैथून तथा आसपास के गांवों में बुनी जाती है, जहां सूत और रेशम के धागे बारी बारी रखकर खाट नाम के छोटे वर्ग बनाए जाते हैं, जिससे कपड़ा इतना हल्का और खुला बनता है कि वह मरुस्थल की गर्मी के लिए उपयुक्त होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश की हल्की साड़ियां चंदेरी और माहेश्वरी हैं, जो चमकीली और सादी होती हैं, उनमें वर्गों की दिखाई देने वाली जाली नहीं होती। विकल्प C गलत है क्योंकि उत्तर प्रदेश बनारसी ब्रोकेड और चिकनकारी कढ़ाई के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि हरियाणा में इस नाम की कोई हथकरघा साड़ी नहीं है, यद्यपि वह उत्तर पश्चिम की फुलकारी परंपरा में सहभागी है। कोटा के साथ डोरिया का जोड़ा याद रखें।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रत्येक वर्ष किस तिथि को मनाया जाता है?
- A.7 अगस्त
- B.15 जुलाई
- C.2 अक्टूबर
- D.26 नवंबर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 7 अगस्त
व्याख्या
सही उत्तर A, 7 अगस्त है। यह तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा हुई थी, जिसमें भारतीयों से अपने देश में बने वस्त्र अपनाने का आह्वान किया गया था, और पहला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस बुनकरों के सम्मान में 2015 में चेन्नई में मनाया गया। विकल्प B गलत है क्योंकि 15 जुलाई को विश्व युवा कौशल दिवस मनाया जाता है, जिसका हथकरघा से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2 अक्टूबर गांधी जयंती है, और यद्यपि गांधी ने खादी को स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक बनाया, हथकरघा दिवस उनके जन्मदिन पर नहीं मनाया जाता। विकल्प D गलत है क्योंकि 26 नवंबर संविधान दिवस है। इस दिवस को 1905 के स्वदेशी आह्वान से जोड़कर याद रखें।
पल्लू पर मोर और कमल के नमूनों से पहचानी जाने वाली पैठणी साड़ी किस राज्य में बुनी जाती है?
- A.महाराष्ट्र
- B.केरल
- C.पश्चिम बंगाल
- D.कर्नाटक
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महाराष्ट्र
व्याख्या
सही उत्तर A, महाराष्ट्र है। पैठणी का नाम गोदावरी तट पर बसे पैठण से पड़ा है और यह नासिक जिले के येवला में भी बुनी जाती है। यह रेशमी ब्रोकेड है, जिसमें किनारा और पल्लू तापिस्री तकनीक से बनाए जाते हैं और उन पर सोने के तार से मोर, कमल और बेल के नमूने उभरते हैं, जो दोनों ओर दिखते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि केरल की हथकरघा साड़ी कसावु है, जो सुनहरे किनारे वाली सादी श्वेताभ सूती साड़ी है। विकल्प C गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल बालूचरी, जामदानी और तांत साड़ियां देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि कर्नाटक में मैसूर क्रेप रेशम और लाल पल्लू वाली इल्कल साड़ी बुनी जाती है। पैठण के साथ पैठणी और मोर के नमूने को स्मरण रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दोहरी इकत किस साड़ी को कहा जाता है और वह कहां बुनी जाती है?
गुजरात के पाटन की पटोला साड़ी को। इसमें ताना और बाना दोनों के धागे बुनाई से पहले बांधकर रंगे जाते हैं, इसलिए तैयार नमूना कपड़े के आगे और पीछे एक समान दिखता है, जो किसी एकल इकत में संभव नहीं है।
मूगा रेशम का उत्पादन किस राज्य में होता है?
असम में। मूगा ब्रह्मपुत्र घाटी का प्राकृतिक सुनहरा रेशम है, जो संसार में कहीं और नहीं पाला जाता, और गुवाहाटी के निकट सुआलकुची इसे मेखला चादर तथा साड़ियों में बुनने के लिए प्रसिद्ध है।
बंधनी और बटिक में क्या अंतर है?
दोनों में रंग को रोका जाता है, परंतु ढंग अलग है। बंधनी में कपड़े को हजारों छोटी गांठों में बांधा जाता है जिससे वे स्थान बिंदु के रूप में सफेद रह जाते हैं, जबकि बटिक में कपड़े के कुछ भाग पर मोम लगाया जाता है जिससे वहां रंग नहीं चढ़ता।
लखनऊ की कढ़ाई कौन सी है?
चिकनकारी, जो मलमल और अन्य हल्के वस्त्रों पर की जाने वाली महीन सफेद छाया कढ़ाई है। लखनऊ जरदोजी का भी घर है, जो सितारों और नगों के साथ धातु के तार से की जाने वाली भारी कढ़ाई है और विवाह के वस्त्रों पर प्रयोग होती है।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
7 अगस्त को। 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की घोषणा हुई थी, जिसमें भारतीय वस्त्र अपनाने का आह्वान किया गया था, और बुनकरों के सम्मान में यह दिवस पहली बार 2015 में चेन्नई में मनाया गया।
स्रोत
- भारत के हथकरघा और हस्तशिल्प — वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार
- भारत में रेशम उद्योग और रेशम के चार प्रकार — केंद्रीय रेशम बोर्ड
- भारत के पंजीकृत भौगोलिक संकेतक — भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री, भारत सरकार





