बौद्ध और जैन कला एवं तीर्थ स्थल: परीक्षा नोट्स
परीक्षा के लिए बौद्ध और जैन कला के पूर्ण नोट्स: स्तूप, चैत्य, विहार, गांधार, मथुरा और अमरावती शैली, सांची, अजंता, दिलवाड़ा तथा श्रवणबेलगोला।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

बौद्ध और जैन धर्म ने भारत को पत्थर की इमारतों की पहली बड़ी परंपरा दी। दोनों धर्मों को ऐसे स्थान चाहिए थे जहां समुदाय एकत्र हो सके, और दोनों व्यापार मार्गों पर व्यापारियों तथा श्रेणियों के सहयोग से बढ़े, इसलिए देश के सबसे पुराने बचे हुए स्तूप, शैलकृत सभागार और मंदिर समूह इन्हीं के हैं। परीक्षा के लिए यह अध्याय जोड़ियों का समूह है: स्थल और उसका राज्य, स्थल और उसे बनवाने वाला राजवंश, तथा मूर्तिकला की शैली और उसमें प्रयुक्त पत्थर। यह नोट उन जोड़ियों के साथ इमारतों की शब्दावली भी देता है।
बौद्ध स्थापत्य की शब्दावली
स्तूप किसी अवशेष पर उठाया गया ठोस अर्धगोलाकार टीला है। इसका गुंबद अंड कहलाता है, ऊपर की चौकोर वेदिका हर्मिका है, उसके ऊपर का दंड और छत्र यष्टि तथा छत्र बनाते हैं, नीचे का चबूतरा मेधि है और चारों ओर का पत्थर का घेरा वेदिका है, जो परिक्रमा के लिए प्रदक्षिणा पथ घेरती है। घेरे में बना अलंकृत प्रवेश द्वार तोरण कहलाता है। चैत्य प्रार्थना गृह है, जिसका तल अर्धवृत्ताकार होता है, दूर के छोर पर स्तूप होता है और प्रवेश के ऊपर घोड़े की नाल जैसा गवाक्ष होता है; विहार वह मठ है जहां भिक्षु रहते थे, अर्थात कोठरियों से घिरा आंगन। भारत की सबसे पुरानी शैलकृत गुफाएं बिहार की बराबर गुफाएं हैं, जो मौर्यकाल की हैं और जिनमें लोमश ऋषि गुफा सबसे प्रसिद्ध है।
प्रमुख बौद्ध स्थल
| स्थल | राज्य या देश | महत्व |
|---|---|---|
| लुंबिनी | नेपाल | बुद्ध का जन्म |
| बोधगया | बिहार | ज्ञान प्राप्ति; महाबोधि मंदिर, विश्व धरोहर स्थल |
| सारनाथ | उत्तर प्रदेश | प्रथम उपदेश; धमेख स्तूप और अशोक का सिंह शीर्ष |
| कुशीनगर | उत्तर प्रदेश | महापरिनिर्वाण, अर्थात बुद्ध का देहावसान |
| सांची | मध्य प्रदेश | अशोक के समय आरंभ महास्तूप; विश्व धरोहर स्थल |
| भरहुत | मध्य प्रदेश | शुंगकालीन वेदिकाएं, अब भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में |
| अमरावती | आंध्र प्रदेश | चूना पत्थर पर अमरावती मूर्तिकला शैली |
| अजंता | महाराष्ट्र | उनतीस शैलकृत गुफाएं और चित्रकारी; विश्व धरोहर स्थल |
| नालंदा | बिहार | महाविहार और विश्वविद्यालय; विश्व धरोहर स्थल |
| धौली | ओडिशा | कलिंग युद्ध के बाद अशोक का शिलालेख |
सांची का महास्तूप, जिसे स्तूप संख्या एक भी कहा जाता है, अशोक के शासन में आरंभ हुआ, शुंगों के समय बड़ा किया गया और उसके चार उत्कीर्ण तोरण सातवाहन काल में जोड़े गए। इसकी मूर्तिकला अमूर्त है: बुद्ध को मानव रूप में नहीं, बल्कि रिक्त सिंहासन, चरणचिह्न, धर्मचक्र और बोधि वृक्ष जैसे प्रतीकों से दिखाया गया है। अजंता में गुफाएं दो समूहों में हैं, सातवाहन काल की पहले की हीनयान गुफाएं और वाकाटक काल की बाद की महायान गुफाएं, और पद्मपाणि तथा वज्रपाणि के चित्र एवं जातक दृश्य बाद के समूह के हैं। महाराष्ट्र के कार्ले का चैत्य देश का सबसे बड़ा ऐसा सभागार है, और भाजा, बेडसा, कन्हेरी तथा नासिक के पास पांडवलेनी इसी परिवार के हैं। ओडिशा में रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि मिलकर बौद्ध अवशेषों का हीरक त्रिभुज बनाते हैं।
मूर्तिकला की तीन शैलियां
| शैली | क्षेत्र | पत्थर और विशेषता |
|---|---|---|
| गांधार | उत्तर पश्चिम, तक्षशिला और पेशावर के आसपास | स्लेटी शिस्ट; यूनानी रोमन प्रभाव, लहरदार केश, यथार्थ वस्त्र |
| मथुरा | मथुरा, उत्तर प्रदेश | सीकरी का चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; देशी और बलिष्ठ आकृतियां |
| अमरावती | कृष्णा घाटी, आंध्र प्रदेश | सफेद चूना पत्थर; गति से भरे घने कथा फलक |
गांधार और मथुरा दोनों शैलियां कुषाण काल में फलीं, और बुद्ध की मानव रूप में पहली प्रतिमाएं इन्हीं को श्रेय दी जाती हैं। मथुरा में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवताओं की भी मूर्तियां बनीं, इसलिए इसकी कार्यशालाओं का महत्व बौद्ध धर्म से आगे तक है।
प्रमुख जैन स्थल
जैन स्थापत्य अपनी अत्यंत बारीक संगमरमर की नक्काशी और तीर्थंकरों की विशाल स्वतंत्र प्रतिमाओं के लिए जाना जाता है।
- दिलवाड़ा मंदिर, माउंट आबू, राजस्थान: सोलंकी काल के पांच संगमरमर मंदिर, आदिनाथ को समर्पित विमल वसही और नेमिनाथ को समर्पित लूण वसही, जिनकी छतें जाली जैसी पतली नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
- श्रवणबेलगोला, कर्नाटक: बाहुबली की एकाश्म प्रतिमा, जिसे गोम्मटेश्वर कहा जाता है, लगभग सत्तावन फुट ऊंची, पश्चिमी गंग शासकों के मंत्री चामुंडराय द्वारा स्थापित; महामस्तकाभिषेक बारह वर्ष में एक बार होता है।
- रणकपुर, राजस्थान: आदिनाथ का चौमुखा मंदिर, जो अपने नक्काशीदार स्तंभों के वन के लिए प्रसिद्ध है।
- शत्रुंजय पहाड़ियों पर पालीताना, गुजरात: भारत में जैन मंदिरों का सबसे बड़ा समूह; जूनागढ़ के पास गिरनार गुजरात का दूसरा तीर्थ है।
- उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं, ओडिशा: चेदि राजा खारवेल की जैन गुफाएं, जहां उसका हाथीगुंफा अभिलेख उत्कीर्ण है।
- एलोरा की गुफा 30 से 34, महाराष्ट्र: जैन समूह, जिसमें गुफा 32 अर्थात इंद्र सभा सर्वश्रेष्ठ है; गुफा 1 से 12 बौद्ध और 13 से 29 हिंदू हैं।
- पारसनाथ पहाड़ी पर सम्मेद शिखरजी, झारखंड: सबसे पवित्र जैन तीर्थ, जहां चौबीस तीर्थंकरों में से बीस को मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता है।
- सित्तनवासल, तमिलनाडु: आरंभिक चित्रों वाली जैन गुफा; मध्य प्रदेश के खजुराहो के पूर्वी समूह में जैन पार्श्वनाथ और आदिनाथ मंदिर हैं।
बिहार के दो जैन स्थल कला के इतिहास से अधिक महावीर के जीवन से जुड़े हैं: वैशाली के पास कुंडग्राम, जिसे उनका जन्मस्थान माना जाता है, और पावापुरी, जहां उन्हें निर्वाण प्राप्त हुआ। मध्य प्रदेश के ग्वालियर किले में शैलकृत जैन विशाल प्रतिमाओं की पंक्तियां हैं, और कर्नाटक के कारकल तथा वेणूर में श्रवणबेलगोला जैसी ही बाहुबली प्रतिमाएं हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
सबसे आम प्रश्न स्थल और राज्य की जोड़ी होता है, इसलिए सांची को मध्य प्रदेश, अमरावती को आंध्र प्रदेश, दिलवाड़ा को राजस्थान, श्रवणबेलगोला को कर्नाटक, खंडगिरि तथा उदयगिरि को ओडिशा और सित्तनवासल को तमिलनाडु के साथ याद करें। दूसरा प्रकार राजवंश पूछता है: सांची के मूल भाग के लिए अशोक, भरहुत की वेदिकाओं के लिए शुंग, सांची के तोरणों और अजंता की पहली गुफाओं के लिए सातवाहन, अजंता के चित्रों के लिए वाकाटक, एलोरा के लिए राष्ट्रकूट और बाहुबली प्रतिमा के लिए पश्चिमी गंग। तीसरा प्रकार शब्दावली पूछता है, सामान्यतः स्तूप के अंड, हर्मिका, मेधि, वेदिका और तोरण, या चैत्य और विहार का अंतर। जाल हैं एलोरा की गुफा संख्याएं, यह कहना कि सांची में बुद्ध मानव रूप में हैं, और गांधार के शिस्ट को मथुरा के लाल बलुआ पत्थर से बदल देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बुद्ध का प्रथम उपदेश | सारनाथ, उत्तर प्रदेश, धर्मचक्र प्रवर्तन |
|---|---|
| महाबोधि मंदिर | बोधगया, बिहार; विश्व धरोहर स्थल |
| सांची का महास्तूप | स्तूप संख्या एक, अशोक के समय आरंभ, मध्य प्रदेश |
| अशोक का सिंह शीर्ष | सारनाथ में मिला; भारत का राजचिह्न |
| सबसे पुरानी शैलकृत गुफाएं | बराबर गुफाएं, बिहार, मौर्यकाल; लोमश ऋषि गुफा |
| सबसे बड़ा चैत्य गृह | कार्ले, महाराष्ट्र |
| अजंता गुफाएं | उनतीस गुफाएं, महाराष्ट्र; सातवाहन और वाकाटक संरक्षण |
| एलोरा के गुफा समूह | 1 से 12 बौद्ध, 13 से 29 हिंदू, 30 से 34 जैन |
| गांधार शैली का पत्थर | स्लेटी शिस्ट, यूनानी रोमन प्रभाव, कुषाण काल |
| मथुरा शैली का पत्थर | सीकरी का चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर |
| अमरावती शैली का पत्थर | सफेद चूना पत्थर, कृष्णा घाटी, आंध्र प्रदेश |
| गोम्मटेश्वर प्रतिमा | श्रवणबेलगोला, कर्नाटक में बाहुबली, चामुंडराय द्वारा |
| दिलवाड़ा मंदिर | माउंट आबू, राजस्थान; विमल वसही और लूण वसही |
| हाथीगुंफा अभिलेख | उदयगिरि गुफाएं, ओडिशा, चेदि राजा खारवेल का |
| सबसे पवित्र जैन तीर्थ | सम्मेद शिखरजी, पारसनाथ पहाड़ी, झारखंड |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बुद्ध ने अपना पहला उपदेश, अर्थात धर्मचक्र प्रवर्तन, किस स्थान पर दिया था?
- A.बोधगया
- B.सारनाथ
- C.कुशीनगर
- D.वैशाली
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सारनाथ है। ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास सारनाथ के मृगदाव पहुंचे और अपने पहले पांच शिष्यों को उपदेश दिया; इस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। सारनाथ में धमेख स्तूप और चौखंडी स्तूप भी हैं, और अशोक का वह सिंह शीर्ष भी वहीं मिला जो भारत का राजचिह्न बना। विकल्प A, बिहार का बोधगया, वह स्थान है जहां उन्हें बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ और जहां महाबोधि मंदिर है। विकल्प C, उत्तर प्रदेश का कुशीनगर, वह स्थान है जहां उनका देहावसान हुआ, जिसे महापरिनिर्वाण कहा जाता है। विकल्प D, बिहार की वैशाली, वह स्थान है जहां उन्होंने अंतिम उपदेश दिया और जहां द्वितीय बौद्ध संगीति हुई, परंतु पहला उपदेश वहां नहीं हुआ। इस प्रकार चारों विकल्प बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थान हैं, और यही इस प्रश्न का जाल है।
सांची का महास्तूप मूल रूप से किस शासक के काल में बनवाया गया था?
- A.चंद्रगुप्त मौर्य
- B.अशोक
- C.कनिष्क
- D.हर्षवर्धन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अशोक है। मध्य प्रदेश में सांची के महास्तूप का मूल भाग, जिसे स्तूप संख्या एक भी कहा जाता है, ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में मौर्य सम्राट अशोक के शासन में बना; बाद में शुंगों ने गुंबद को बड़ा किया और वेदिका जोड़ी, तथा चार उत्कीर्ण तोरण सातवाहन काल में जोड़े गए। विकल्प A, चंद्रगुप्त मौर्य, अशोक के दादा थे और सांची की कोई रचना उनसे नहीं जोड़ी जाती। विकल्प C, कनिष्क, वह कुषाण शासक था जिसके समय गांधार और मथुरा शैलियां फलीं तथा चतुर्थ बौद्ध संगीति हुई, जो सांची से बहुत दूर है। विकल्प D, हर्षवर्धन, ने सातवीं शताब्दी में शासन किया, अर्थात लगभग एक हजार वर्ष बाद। याद रखें कि सांची में बुद्ध केवल प्रतीकों से दिखाए गए हैं, मानव रूप में कभी नहीं।
गांधार शैली की मूर्तियां मुख्य रूप से किस पत्थर में तराशी गई थीं?
- A.स्लेटी शिस्ट
- B.लाल बलुआ पत्थर
- C.सफेद संगमरमर
- D.काला बेसाल्ट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, स्लेटी शिस्ट है। गांधार शैली उत्तर पश्चिम में तक्षशिला और पेशावर के आसपास विकसित हुई और वहां के नीलाभ स्लेटी शिस्ट का प्रयोग करती थी; इसकी आकृतियों में लहरदार केश, वस्त्रों की भारी तहें और पेशीयुक्त यथार्थ गढ़न यूनानी रोमन प्रभाव दिखाती हैं। विकल्प B, लाल बलुआ पत्थर, मथुरा शैली की सामग्री थी, जो मथुरा के पास सीकरी का चित्तीदार लाल पत्थर निकालती थी और बुद्ध, जैन तीर्थंकरों तथा हिंदू देवताओं की बलिष्ठ देशी मूर्तियां बनाती थी। विकल्प C, सफेद संगमरमर, बाद की सामग्री है जो दिलवाड़ा जैसे जैन मंदिरों से जुड़ी है, जबकि कृष्णा घाटी की अमरावती शैली सफेद चूना पत्थर का प्रयोग करती थी। विकल्प D, काला बेसाल्ट, मुख्यतः बंगाल और बिहार की पाल मूर्तिकला का पत्थर है। गांधार और मथुरा दोनों कुषाण काल में फलीं और बुद्ध की मानव रूप में पहली प्रतिमाओं का श्रेय इन्हीं को है।
बौद्ध चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध अजंता गुफाएं किस राज्य में स्थित हैं?
- A.मध्य प्रदेश
- B.महाराष्ट्र
- C.कर्नाटक
- D.ओडिशा
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व्याख्या
सही उत्तर B, महाराष्ट्र है। अजंता की उनतीस गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में वाघोरा नदी के ऊपर घोड़े की नाल जैसी चट्टान में काटी गई हैं और यह विश्व धरोहर स्थल है। पहले की गुफाएं सातवाहन काल की हीनयान चैत्य और विहार हैं, तथा वाकाटक काल की बाद की महायान गुफाओं में पद्मपाणि और वज्रपाणि के चित्र एवं जातक कथाओं के दृश्य हैं। विकल्प A, मध्य प्रदेश, में सांची, भरहुत और चित्रों वाली बाग गुफाएं हैं, जिन्हें अक्सर अजंता से भ्रमित किया जाता है। विकल्प C, कर्नाटक, में जैन केंद्र श्रवणबेलगोला और बादामी गुफाएं हैं। विकल्प D, ओडिशा, में उदयगिरि तथा खंडगिरि की जैन गुफाएं और रत्नागिरि, उदयगिरि एवं ललितगिरि का बौद्ध हीरक त्रिभुज है। बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाओं वाला एलोरा भी महाराष्ट्र में ही है।
श्रवणबेलगोला में बाहुबली की एकाश्म गोम्मटेश्वर प्रतिमा किस संरक्षक ने स्थापित कराई थी?
- A.चामुंडराय
- B.विमल शाह
- C.तेजपाल
- D.खारवेल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, चामुंडराय है। कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में जैन संत बाहुबली की गोम्मटेश्वर प्रतिमा, जो लगभग सत्तावन फुट ऊंची है और विंध्यगिरि पहाड़ी पर ग्रेनाइट की एक ही चट्टान से तराशी गई है, पश्चिमी गंग राज्य के मंत्री तथा सेनापति चामुंडराय ने स्थापित कराई थी। वहां प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक बारह वर्ष में एक बार होता है। विकल्प B, विमल शाह, ने माउंट आबू के दिलवाड़ा में आदिनाथ का विमल वसही मंदिर बनवाया। विकल्प C, तेजपाल, ने अपने भाई वस्तुपाल के साथ उसी स्थान पर नेमिनाथ का लूण वसही मंदिर बनवाया। विकल्प D, खारवेल, कलिंग का चेदि राजा था जिसने ओडिशा में उदयगिरि की जैन गुफाएं कटवाईं और हाथीगुंफा अभिलेख छोड़ा। चारों ही जैन संरक्षक हैं, इसीलिए विकल्प एक साथ रखे जाते हैं और उत्तर केवल सही जोड़ी याद रखने से ही निकलता है।
संगमरमर की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध दिलवाड़ा जैन मंदिर किस स्थान पर स्थित हैं?
- A.रणकपुर
- B.माउंट आबू
- C.पालीताना
- D.गिरनार
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, माउंट आबू है। पांच संगमरमर मंदिरों का दिलवाड़ा समूह राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली श्रेणी के माउंट आबू पर स्थित है और सोलंकी काल का है; विमल वसही आदिनाथ को और लूण वसही नेमिनाथ को समर्पित है, तथा दोनों की छतें और स्तंभ जाली जैसी बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं। विकल्प A, रणकपुर, भी राजस्थान में है और वहां आदिनाथ का चौमुखा मंदिर है जिसमें नक्काशीदार स्तंभों का वन है, परंतु वह अलग स्थल है। विकल्प C, गुजरात की शत्रुंजय पहाड़ियों पर पालीताना, भारत में जैन मंदिरों का सबसे बड़ा समूह रखता है। विकल्प D, गुजरात में जूनागढ़ के पास गिरनार, एक और प्रमुख जैन तीर्थ है। दिलवाड़ा और रणकपुर को राजस्थान के साथ तथा पालीताना और गिरनार को गुजरात के साथ याद कर लेने से इस प्रकार के अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।
चेदि राजा खारवेल का हाथीगुंफा अभिलेख किन गुफाओं में मिलता है?
- A.बराबर गुफाएं, बिहार
- B.उदयगिरि गुफाएं, ओडिशा
- C.एलोरा गुफाएं, महाराष्ट्र
- D.सित्तनवासल गुफा, तमिलनाडु
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, उदयगिरि गुफाएं, ओडिशा है। भुवनेश्वर के पास उदयगिरि की हाथीगुंफा में कलिंग के चेदि अथवा महामेघवाहन राजा खारवेल का लंबा प्राकृत अभिलेख उत्कीर्ण है, जो उसके अभियानों और जैन धर्म के प्रति उसके संरक्षण का विवरण देता है; उदयगिरि और पड़ोस की खंडगिरि मिलकर जैन गुफा समूह बनाती हैं। विकल्प A, बिहार की बराबर गुफाएं, भारत की सबसे पुरानी शैलकृत गुफाएं हैं, जो मौर्यकाल की हैं और जिनमें अशोक तथा दशरथ के अभिलेख हैं, खारवेल के नहीं। विकल्प C, महाराष्ट्र की एलोरा गुफाएं, बौद्ध, हिंदू और जैन समूह रखती हैं, जिनमें जैन गुफाएं 30 से 34 हैं। विकल्प D, तमिलनाडु का सित्तनवासल, आरंभिक चित्रों के लिए प्रसिद्ध जैन गुफा है। हाथीगुंफा को खारवेल और कलिंग के साथ याद रखें, जैसे जूनागढ़ की चट्टान पर अशोक और रुद्रदामन दोनों के अभिलेख हैं।
एलोरा में गुफाओं का कौन सा समूह जैन धर्म से संबंधित है?
- A.गुफा 1 से 12
- B.गुफा 13 से 29
- C.गुफा 30 से 34
- D.गुफा 20 से 25
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, गुफा 30 से 34 है। महाराष्ट्र में एलोरा की चौंतीस गुफाएं धर्म के अनुसार बांटी गई हैं: गुफा 1 से 12 बौद्ध, गुफा 13 से 29 हिंदू और गुफा 30 से 34 जैन हैं, और जैन समूह में सर्वश्रेष्ठ गुफा 32 अर्थात इंद्र सभा है, जिसमें नक्काशीदार मंडप और महावीर की प्रतिमा है। विकल्प A बौद्ध समूह बताता है, जिसमें गुफा 10 अर्थात विश्वकर्मा चैत्य है, जो एलोरा का एकमात्र चैत्य गृह है। विकल्प B हिंदू समूह बताता है, जिसमें गुफा 16 अर्थात राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम के समय तराशा गया शैलकृत कैलास मंदिर है। विकल्प D कोई समूह ही नहीं है; वे संख्याएं हिंदू समूह की सीमा में आती हैं। यह स्थल विश्व धरोहर है और इसका मूल्य ठीक इसी बात में है कि एक ही चट्टान में तीन धर्मों की रचनाएं साथ साथ तराशी गईं।
सबसे पवित्र जैन तीर्थ सम्मेद शिखरजी किस पहाड़ी पर स्थित है?
- A.पारसनाथ पहाड़ी, झारखंड
- B.शत्रुंजय पहाड़ी, गुजरात
- C.विंध्यगिरि पहाड़ी, कर्नाटक
- D.चंद्रगिरि पहाड़ी, मध्य प्रदेश
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, पारसनाथ पहाड़ी, झारखंड है। सम्मेद शिखरजी झारखंड के गिरिडीह जिले की पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित है, जो राज्य की सबसे ऊंची पहाड़ी है, और मान्यता है कि चौबीस तीर्थंकरों में से बीस को वहीं मोक्ष प्राप्त हुआ, इसी कारण यह सभी जैन तीर्थों में सर्वाधिक पवित्र है। विकल्प B, गुजरात की शत्रुंजय पहाड़ी, पालीताना मंदिर समूह रखती है, जो देश में जैन मंदिरों का सबसे बड़ा समूह है, परंतु वह तीर्थंकरों के मोक्ष का स्थान नहीं है। विकल्प C, कर्नाटक के श्रवणबेलगोला की विंध्यगिरि पहाड़ी, बाहुबली की गोम्मटेश्वर प्रतिमा रखती है। विकल्प D भ्रम उत्पन्न करने वाला है; जैन धर्म से जुड़ी चंद्रगिरि पहाड़ी भी श्रवणबेलगोला में ही है, मध्य प्रदेश में नहीं। बिहार का पावापुरी, जहां महावीर को निर्वाण मिला, अलग स्थल है।
स्तूप की रचना में अवशेष के ऊपर बना अर्धगोलाकार गुंबद क्या कहलाता है?
- A.हर्मिका
- B.अंड
- C.मेधि
- D.वेदिका
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, अंड है। अंड, जिसका अर्थ अंडा है, स्तूप का ठोस अर्धगोलाकार गुंबद है, जो अवशेष कक्ष के ऊपर उठाया जाता है, और यही भाग स्तूप को उसका आकार देता है। विकल्प A, हर्मिका, गुंबद के ऊपर रखी छोटी चौकोर वेदिका या छज्जा है, जिससे दंड ऊपर उठता है। विकल्प C, मेधि, वह चबूतरा या गोल आधार है जिस पर गुंबद टिकता है और जिस पर अक्सर उठा हुआ परिक्रमा पथ होता है। विकल्प D, वेदिका, स्तूप के चारों ओर का पत्थर का घेरा है जो परिक्रमा के लिए प्रदक्षिणा पथ घेरता है, और उसमें बने अलंकृत द्वार तोरण कहलाते हैं; हर्मिका के ऊपर यष्टि अर्थात दंड और छत्र आते हैं। सांची का महास्तूप इन सभी भागों को स्पष्ट रूप से दिखाता है, इसी कारण परीक्षक उसे मानक उदाहरण के रूप में लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बुद्ध ने अपना पहला उपदेश कहां दिया था?
उत्तर प्रदेश में वाराणसी के पास सारनाथ के मृगदाव में, जिस घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है। अशोक का सिंह शीर्ष, जो अब भारत का राजचिह्न है, इसी स्थल से मिला था।
सांची का महास्तूप किसने बनवाया था?
इसका आरंभ ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में अशोक के शासनकाल में हुआ, शुंग शासकों ने इसे बड़ा किया, और इसके चार उत्कीर्ण तोरण सातवाहन काल में जोड़े गए। यह मध्य प्रदेश में विश्व धरोहर स्थल है।
एलोरा की कौन सी गुफाएं जैन हैं?
गुफा 30 से 34 जैन समूह बनाती हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध गुफा 32 अर्थात इंद्र सभा है। गुफा 1 से 12 बौद्ध और 13 से 29 हिंदू हैं, जिनमें राष्ट्रकूट काल का शैलकृत कैलास मंदिर भी है।
चैत्य और विहार में क्या अंतर है?
चैत्य प्रार्थना गृह है, जिसका तल अर्धवृत्ताकार होता है, दूर के छोर पर स्तूप होता है और द्वार के ऊपर घोड़े की नाल जैसा गवाक्ष होता है। विहार वह मठ है जहां भिक्षु रहते थे, जो आंगन या सभागार के रूप में बनता था और उसमें छोटी कोठरियां खुलती थीं।
बाहुबली की गोम्मटेश्वर प्रतिमा कहां है?
कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में, जो ग्रेनाइट की एक ही चट्टान से लगभग सत्तावन फुट ऊंची तराशी गई है और जिसे पश्चिमी गंग शासकों के मंत्री चामुंडराय ने स्थापित किया। वहां महामस्तकाभिषेक बारह वर्ष में एक बार होता है।
स्रोत
- भारतीय कला का परिचय, भाग एक (कक्षा ग्यारह), बौद्ध, जैन और हिंदू कला के अध्याय — एनसीईआरटी
- विश्व धरोहर सूची, भारत: सांची, अजंता, एलोरा, महाबोधि मंदिर परिसर और नालंदा महाविहार — यूनेस्को
- स्मारक और स्थल: सांची, सारनाथ, अमरावती और एलोरा की गुफाएं — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





