इंडो-इस्लामिक स्थापत्य: सल्तनत और मुगल शैली
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इंडो-इस्लामिक स्थापत्य के पूरे नोट्स, आर्क्युएट शैली, दिल्ली सल्तनत तथा प्रांतीय शैलियाँ, मुगल स्मारक और उनके निर्माता।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

इंडो-इस्लामिक स्थापत्य वह भवन शैली है जो बारहवीं शताब्दी के अंत में तुर्क आक्रमणों के बाद भारत में विकसित हुई। पश्चिम एशिया से आए मेहराब, गुंबद और मीनार को भारतीय कारीगरों ने भारतीय पत्थर से गढ़ा और एक नई मिली-जुली शैली बनी। परीक्षाओं में यह भाग हर वर्ष आता है, क्योंकि हर स्मारक के साथ तीन तथ्य जुड़े रहते हैं, निर्माता कौन, स्थान कौन सा और नया क्या था।
नई शैली में नया क्या था
पुरानी भारतीय भवन कला ट्रैबिएट यानी स्तंभ और शहतीर पर आधारित थी, जिसमें छत पत्थरों को एक के ऊपर एक बढ़ाकर बनाई जाती थी। नई शैली आर्क्युएट थी, जिसमें सच्चा मेहराब भार को किनारों पर डालता है और उसी पर सच्चा गुंबद टिकता है। जोड़ने के लिए चूने का गारा प्रयोग होने लगा। धार्मिक भवनों में जीव-जंतु के चित्र से बचा जाता था, इसलिए सजावट अरबी लिपि की सुलेखन कला, अरबेस्क यानी बेल-बूटे, ज्यामितीय आकृतियों और जाली पर टिक गई। आरंभिक मस्जिदें तोड़े गए मंदिरों की सामग्री से बनीं, इसीलिए दिल्ली की कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अजमेर की अढ़ाई दिन का झोंपड़ा में भारतीय नक्काशी और इस्लामी रूप साथ-साथ दिखते हैं।
दिल्ली सल्तनत की शाही शैली
गुलाम वंश ने शुरुआत की। कुतुब-उद-दीन ऐबक ने कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बनवाई और लगभग 73 मीटर ऊँची कुतुब मीनार की नींव रखी, जिसे इल्तुतमिश ने आगे बढ़ाया और फिरोज शाह तुगलक ने मरम्मत कराई। इल्तुतमिश का मकबरा दिल्ली का पहला सल्तनतकालीन मकबरा है। खिलजी काल में सच्चा मेहराब और सच्चा गुंबद एक साथ अलाई दरवाजा में आए, जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 में लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर की जड़ाई से बनवाया। तुगलक शैली सबसे सादी है, भूरे बलुआ पत्थर की मोटी ढलवाँ दीवारें, कम सजावट और किले जैसा रूप, जो तुगलकाबाद और फिरोज शाह कोटला में दिखता है। लोदी वंश ने भारत को दोहरा गुंबद दिया, बाहर ऊँचाई के लिए एक खोल और भीतर उपयोगी छत के लिए दूसरा, तथा लोदी गार्डन के अष्टकोणीय और वर्गाकार मकबरे दिए।
प्रांतीय शैलियाँ
सल्तनत के कमजोर पड़ते ही प्रांतों ने अपनी शैली गढ़ी।
| शैली | स्थान | विशेषता |
|---|---|---|
| जौनपुर (शर्की) | जौनपुर, उत्तर प्रदेश | अटाला मस्जिद, विशाल प्रवेश पर्दा, मीनार रहित |
| गुजरात | अहमदाबाद | सीदी सैयद मस्जिद की वृक्ष जाली, अहमदाबाद की जामा मस्जिद |
| बंगाल | पांडुआ और गौड़ | अदीना मस्जिद, ईंट का काम, बंगला मुड़ी छत |
| मालवा | मांडू | जहाज महल, हिंडोला महल, रानी रूपमती मंडप, होशंग शाह का मकबरा |
| बीजापुर (आदिल शाही) | बीजापुर, कर्नाटक | गोल गुंबज, मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा, फुसफुसाती दीर्घा |
| गोलकुंडा (कुतुब शाही) | हैदराबाद | चारमीनार और गोलकुंडा किला |
मुगल स्थापत्य
बाबर ने बहुत कम बनवाया और यह कमी शेरशाह सूरी ने दिल्ली के पुराना किला तथा सासाराम में अपने झील-घिरे मकबरे से पूरी की। असली मुगल शैली हुमायूँ के मकबरे से शुरू होती है, जिसे उनकी बेगम हमीदा बानो ने बनवाया और मीरक मिर्जा गियास ने रूप दिया। यह भारत का पहला उद्यान मकबरा है, जिसमें जल-नालियों से बँटा चारबाग है, और यही ताजमहल तक जाने वाली कड़ी है।
अकबर ने लाल बलुआ पत्थर में निर्माण किया। उनकी राजधानी फतेहपुर सीकरी में दीवान-ए-खास का केंद्रीय स्तंभ, पंच महल, जोधाबाई महल और 1575 में गुजरात विजय की स्मृति में बना बुलंद दरवाजा है, जो संसार के सबसे ऊँचे प्रवेशद्वारों में गिना जाता है। उन्होंने आगरा, लाहौर और इलाहाबाद के किले भी बनवाए। जहाँगीर को बाग पसंद थे, श्रीनगर का शालीमार बाग उन्हीं का है, और उनके काल में नूरजहाँ ने आगरा में अपने पिता का एतमाद-उद-दौला मकबरा बनवाया, जो पूरी तरह सफेद संगमरमर से मढ़ा पहला मुगल भवन है और जिसमें पहली बार पित्रा ड्यूरा यानी रंगीन पत्थर की जड़ाई हुई।
शाहजहाँ का काल संगमरमर का काल है, आगरा में मुमताज महल के लिए ताजमहल, जिसके वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी माने जाते हैं, दिल्ली का लाल किला और जामा मस्जिद, आगरा किले की मोती मस्जिद तथा शाहजहाँनाबाद नगर। औरंगजेब ने कम बनवाया, औरंगाबाद का बीबी का मकबरा, जो ताज की छोटी प्रति है, और लाहौर की बादशाही मस्जिद। उसके बाद शैली क्षीण होकर दिल्ली के सफदरजंग मकबरे जैसी रह जाती है।
अंक दिलाने वाले शब्द
- चारबाग: चार हिस्सों में बँटा बाग, जिसे रास्ते या नालियाँ बाँटती हैं।
- पित्रा ड्यूरा: संगमरमर में रंगीन पत्थर काटकर जड़ने की कला।
- जाली: छिद्रित पत्थर का पर्दा, जो हवा और प्रकाश आने देता है।
- ईवान: एक ओर से खुला गहरा मेहराबदार कक्ष, प्रायः प्रवेश भाग।
- छतरी: स्तंभों पर टिकी गुंबदनुमा मंडपिका, जो राजपूत शैली से ली गई।
परीक्षा की दृष्टि से
इस भाग से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, स्मारक और निर्माता का मेल, जैसे कुव्वत-उल-इस्लाम तथा कुतुब मीनार के साथ ऐबक, अलाई दरवाजा के साथ अलाउद्दीन खिलजी, दिल्ली की जामा मस्जिद और ताजमहल के साथ शाहजहाँ, शालीमार बाग के साथ जहाँगीर। दूसरा, पहला कौन सा था, जैसे पहला सच्चा मेहराब और गुंबद, पहला उद्यान मकबरा, पहला संगमरमरी भवन, पहला दोहरा गुंबद। तीसरा, स्मारक और स्थान का मेल, जैसे कर्नाटक के बीजापुर में गोल गुंबज, अहमदाबाद में सीदी सैयद मस्जिद, जौनपुर में अटाला मस्जिद, मांडू में जहाज महल। चौथा, पारिभाषिक शब्द, जैसे चारबाग, पित्रा ड्यूरा, जाली, ईवान, छतरी। भ्रम अकबर को जामा मस्जिद से जोड़ने, ताज को पहला संगमरमरी भवन मानने और गोल गुंबज को तेलंगाना में रखने से होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कुतुब मीनार की ऊँचाई | लगभग 72.5 मीटर, उत्तर कुंजियों में 73 मीटर |
|---|---|
| पहला सच्चा मेहराब और गुंबद | अलाई दरवाजा, अलाउद्दीन खिलजी, 1311 |
| पहला उद्यान मकबरा | हुमायूँ का मकबरा, दिल्ली, 1565 से 1572, हमीदा बानो बेगम द्वारा |
| हुमायूँ मकबरे का वास्तुकार | मीरक मिर्जा गियास |
| बुलंद दरवाजा | फतेहपुर सीकरी, अकबर द्वारा 1575 में गुजरात विजय पर |
| पहला पूर्ण संगमरमरी मुगल भवन | एतमाद-उद-दौला का मकबरा, आगरा, नूरजहाँ द्वारा |
| ताजमहल का वास्तुकार | उस्ताद अहमद लाहौरी, शाहजहाँ के लिए |
| गोल गुंबज | बीजापुर, कर्नाटक, मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा, फुसफुसाती दीर्घा |
| वृक्ष जाली | सीदी सैयद मस्जिद, अहमदाबाद, गुजरात |
| बीबी का मकबरा | औरंगाबाद, औरंगजेब के काल में, ताज की छोटी प्रति |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
आदिल शाह का मकबरा गोल गुंबज किस राज्य में स्थित है?
- A.कर्नाटक
- B.तमिलनाडु
- C.केरल
- D.तेलंगाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कर्नाटक
व्याख्या
सही उत्तर A, कर्नाटक है। गोल गुंबज कर्नाटक के बीजापुर में है, जिसे अब विजयपुरा कहा जाता है। यह बीजापुर के आदिल शाही वंश के मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा है और सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में पूरा हुआ। इसका गुंबद संसार के सबसे बड़े चिनाई वाले गुंबदों में गिना जाता है और भीतर किसी स्तंभ के बिना एक-दूसरे में फँसी मेहराबों पर टिका है, जिससे भीतर एक ही विशाल कक्ष बनता है। गुंबद के आधार पर घूमती दीर्घा फुसफुसाती दीर्घा के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ धीमी आवाज भी कई बार गूँजती है।
विकल्प B, तमिलनाडु द्रविड़ मंदिर शैली का क्षेत्र है, दक्कन की सल्तनतों का नहीं। विकल्प C, केरल की अपनी लकड़ी और ढलवाँ छत की परंपरा है। विकल्प D, तेलंगाना में कुतुब शाही निर्माण जैसे चारमीनार और गोलकुंडा किला अवश्य हैं, पर आदिल शाही राजधानी कर्नाटक का बीजापुर थी, इसलिए D यहाँ भ्रम में डालने वाला विकल्प है।
दिल्ली की जामा मस्जिद किसने बनवाई थी?
- A.अकबर
- B.हुमायूँ
- C.बाबर
- D.शाहजहाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. शाहजहाँ
व्याख्या
सही उत्तर D, शाहजहाँ है। दिल्ली की जामा मस्जिद, जिसका औपचारिक नाम मस्जिद-ए-जहाँनुमा है, शाहजहाँ ने 1650 से 1656 के बीच अपनी नई राजधानी शाहजहाँनाबाद की प्रमुख मस्जिद के रूप में बनवाई। यह लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी है, ऊँचे चबूतरे पर खड़ी है जिस तक चौड़ी सीढ़ियाँ जाती हैं, तथा इसमें दो ऊँची मीनारें और तीन गुंबद हैं। यह भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में गिनी जाती है।
विकल्प A, अकबर ने फतेहपुर सीकरी और आगरा में लाल बलुआ पत्थर से निर्माण कराया, पर दिल्ली की जामा मस्जिद उनके पौत्र की है। विकल्प B, हुमायूँ ने अल्पकालिक दीनपनाह बनवाया और उनकी स्मृति उनके मकबरे से जुड़ी है। विकल्प C, बाबर ने 1526 से 1530 तक ही शासन किया और भारत में बहुत कम निर्माण छोड़ा। जामा मस्जिद निश्चित रूप से शाहजहाँ के काल की है, जिन्होंने ताजमहल और लाल किला भी बनवाया।
दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार की अनुमानित ऊँचाई (मीटर में) कितनी है?
- A.75
- B.77
- C.73
- D.71
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 73
व्याख्या
सही उत्तर C, 73 है। दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब मीनार लगभग 72.5 मीटर ऊँची है, जिसे उत्तर कुंजियों में 73 मीटर माना जाता है। यह अपने प्रकार की सबसे ऊँची ईंट की मीनार है, जिसका आधार व्यास लगभग 14.3 मीटर और शिखर व्यास लगभग 2.7 मीटर है, तथा भीतर लगभग 379 सीढ़ियों की गोलाकार सीढ़ी है। इसे कुतुब-उद-दीन ऐबक ने आरंभ किया, इल्तुतमिश ने मंजिलें जोड़ीं और फिरोज शाह तुगलक ने बिजली गिरने से हुई क्षति के बाद ऊपरी भाग की मरम्मत कराई, इसीलिए नीचे लाल बलुआ पत्थर और ऊपर संगमरमर मिलता है।
विकल्प A, B और D क्रमशः 75, 77 और 71 मीटर बताते हैं। ये तीनों निकट के अंक हैं, जो यह परखने के लिए रखे जाते हैं कि आँकड़ा याद है या अनुमान से भरा गया। इसी परिसर में लौह स्तंभ, कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद और अलाई दरवाजा भी हैं।
सम्राट अकबर ने बुलंद दरवाजा किस वर्ष बनवाया था?
- A.1502
- B.1526
- C.1534
- D.1575
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1575
व्याख्या
सही उत्तर D, 1575 है। फतेहपुर सीकरी की जामा मस्जिद के दक्षिण में बना विशाल प्रवेशद्वार बुलंद दरवाजा अकबर ने 1575 में गुजरात विजय की स्मृति में बनवाया था। यह लाल बलुआ पत्थर से बना है, जिसमें सफेद और काले संगमरमर की जड़ाई है, यह भूमि से लगभग 54 मीटर ऊँचा है और वहाँ तक लंबी सीढ़ियाँ जाती हैं, इसी कारण इसे संसार के सबसे ऊँचे प्रवेशद्वारों में गिना जाता है। इस पर यह उक्ति अंकित है कि संसार एक पुल है, इसे पार करना चाहिए, इस पर घर नहीं बनाना चाहिए।
विकल्प A, 1502 उस समय का है जब मुगल भारत पहुँचे ही नहीं थे। विकल्प B, 1526 पानीपत के प्रथम युद्ध का वर्ष है, जब बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया, अतः वह साम्राज्य की स्थापना से जुड़ा है। विकल्प C, 1534 हुमायूँ के शासनकाल में आता है। अकबर और गुजरात अभियान से केवल 1575 मेल खाता है।
श्रीनगर का प्रसिद्ध शालीमार बाग किसके शासनकाल में बनाया गया था?
- A.आजम शाह
- B.अकबर
- C.हुमायूँ
- D.जहाँगीर
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. जहाँगीर
व्याख्या
सही उत्तर D, जहाँगीर है। श्रीनगर में डल झील के किनारे बना शालीमार बाग जहाँगीर ने 1619 में अपनी बेगम नूरजहाँ के लिए बनवाया था। यह चारबाग योजना पर बना मुगल उद्यान है, जो चढ़ती हुई सीढ़ीनुमा छतों पर बना है और बीच की जलधारा से सींचा जाता है, जिसमें मंडप और जलप्रपात हैं। यह दिखाता है कि मुगलों ने उद्यान को स्वर्ग की छवि मानने वाले फारसी विचार को कितनी दूर तक पहुँचाया। जहाँगीर को कश्मीर प्रिय था और पास का निशात बाग भी इसी काल का है।
विकल्प A, आजम शाह औरंगजेब के पुत्र थे और उनका संबंध औरंगाबाद के बीबी का मकबरा से है, कश्मीर से नहीं। विकल्प B, अकबर ने 1586 में कश्मीर जीता और वहाँ हरि पर्वत की दीवार बनवाई, पर यह बाग नहीं। विकल्प C, हुमायूँ का जीवन युद्ध और निर्वासन में बीता। शालीमार बाग जहाँगीर का है।
भारत में सच्चे मेहराब और सच्चे गुंबद का प्रयोग करने वाला पहला भवन अलाई दरवाजा किसने बनवाया था?
- A.इल्तुतमिश
- B.अलाउद्दीन खिलजी
- C.फिरोज शाह तुगलक
- D.सिकंदर लोदी
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सही उत्तर: B. अलाउद्दीन खिलजी
व्याख्या
सही उत्तर B, अलाउद्दीन खिलजी है। अलाई दरवाजा 1311 में दिल्ली के कुतुब परिसर में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिणी प्रवेशद्वार के रूप में जोड़ा गया। यह भारत का पहला बचा हुआ भवन है जिसमें मेहराब और गुंबद सच्चे हैं, अर्थात वे फन्नीनुमा कटे पत्थरों से बने हैं जो भार को किनारों पर डालते हैं, न कि चपटे पत्थरों को एक के ऊपर एक बढ़ाकर बनाए गए हैं। इसकी लाल बलुआ पत्थर की दीवारों में सफेद संगमरमर जड़ा है और मेहराबों पर कमल-कली की झालर है।
विकल्प A, इल्तुतमिश पहले के गुलाम वंश के थे और उनका निर्माण अब भी पुरानी पद्धति में था। विकल्प C, फिरोज शाह तुगलक बहुत बाद में आए और फिरोजाबाद, हौज खास तथा कुतुब मीनार की मरम्मत के लिए जाने जाते हैं। विकल्प D, सिकंदर लोदी का संबंध दोहरे गुंबद और आगरा से है। तिथि और द्वार से केवल अलाउद्दीन खिलजी मेल खाते हैं।
भारत में चारबाग योजना पर बना पहला उद्यान मकबरा किसे माना जाता है?
- A.सासाराम में शेरशाह सूरी का मकबरा
- B.दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा
- C.सिकंदरा में अकबर का मकबरा
- D.औरंगाबाद में बीबी का मकबरा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा
व्याख्या
सही उत्तर B, दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा है। इसे 1565 से 1572 के बीच उनकी बेगम हमीदा बानो ने बनवाया और फारसी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियास ने इसका रूप गढ़ा। यह भारत का पहला ऐसा मकबरा है जो चारबाग के बीच बना है, अर्थात वर्गाकार बाग जिसे रास्ते और जल-नालियाँ चार हिस्सों में बाँटती हैं। इसी ने ऊँचा मेहराबदार प्रवेश, दोहरा गुंबद तथा संगमरमर जड़े लाल बलुआ पत्थर की परंपरा दी, जिसे बाद के मुगलों ने दोहराया। इसे 1993 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में रखा गया।
विकल्प A, शेरशाह सूरी का मकबरा भव्य अष्टकोणीय मकबरा है, पर वह झील के बीच चबूतरे पर है, चारबाग में नहीं। विकल्प C, सिकंदरा में अकबर का मकबरा बाद का है और हुमायूँ के मकबरे का अनुसरण करता है। विकल्प D, बीबी का मकबरा औरंगजेब के काल का है।
पूरी तरह सफेद संगमरमर से मढ़ा और पित्रा ड्यूरा जड़ाई वाला पहला मुगल स्मारक कौन सा है?
- A.ताजमहल
- B.मोती मस्जिद, आगरा किला
- C.एतमाद-उद-दौला का मकबरा
- D.बुलंद दरवाजा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एतमाद-उद-दौला का मकबरा
व्याख्या
सही उत्तर C, एतमाद-उद-दौला का मकबरा है। नूरजहाँ ने इसे आगरा में 1622 से 1628 के बीच अपने पिता मिर्जा गियास बेग के लिए बनवाया, जिन्हें एतमाद-उद-दौला की उपाधि मिली थी। यह पहला मुगल भवन है जो पूरी तरह सफेद संगमरमर से मढ़ा है और जिसमें बड़े पैमाने पर पित्रा ड्यूरा यानी संगमरमर में कटे रंगीन पत्थरों की जड़ाई हुई है। इसके छोटे आकार और नाजुक काम के कारण इसे बेबी ताज कहा जाता है, क्योंकि यह अकबर के लाल बलुआ पत्थर से शाहजहाँ के संगमरमर तक के बदलाव का चिह्न है।
विकल्प A, ताजमहल में जड़ाई अपने शिखर पर पहुँचती है, पर वह 1632 के बाद का है। विकल्प B, आगरा किले की मोती मस्जिद भी संगमरमर की है, पर शाहजहाँ के काल की। विकल्प D, बुलंद दरवाजा लाल बलुआ पत्थर का है और 1575 का है।
वृक्ष की जाली के लिए प्रसिद्ध सीदी सैयद मस्जिद कहाँ स्थित है?
- A.अहमदाबाद
- B.जौनपुर
- C.मांडू
- D.बीदर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अहमदाबाद
व्याख्या
सही उत्तर A, अहमदाबाद है। गुजरात के अहमदाबाद में सीदी सैयद मस्जिद 1573 में गुजरात सल्तनत के अंतिम वर्षों में बनी। इसकी अर्धवृत्ताकार खिड़कियों में एक ही पत्थर की पटिया से काटी गई जालियाँ लगी हैं, और उनमें सबसे सुंदर जाली में ताड़ का पेड़ तथा उससे लिपटी बेल दिखाई देती है, जिसे सर्वत्र वृक्ष जाली कहा जाता है। यह आकृति नगर का और गुजरात शैली का प्रतीक बन चुकी है, जिसकी पहचान स्थानीय मंदिर कारीगरों से ली गई बारीक पत्थर नक्काशी है।
विकल्प B, जौनपुर शर्की शैली का केंद्र है, जो अटाला मस्जिद और उसके विशाल प्रवेश पर्दे के लिए जाना जाता है। विकल्प C, मांडू मालवा शैली की राजधानी है, जहाँ जहाज महल और होशंग शाह का संगमरमरी मकबरा है। विकल्प D, बीदर बहमनी सुल्तानों और महमूद गवाँ के मदरसे से जुड़ा है।
मोटी ढलवाँ दीवारें, भूरा पत्थर और अत्यंत सादी सतह दिल्ली सल्तनत के किस वंश की पहचान है?
- A.गुलाम वंश
- B.खिलजी वंश
- C.तुगलक वंश
- D.लोदी वंश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तुगलक वंश
व्याख्या
सही उत्तर C, तुगलक वंश है। तुगलक निर्माण सल्तनत शैली का सबसे सादा चरण है। इसमें स्थानीय भूरा बलुआ पत्थर या रोड़ा लगता है, सजावट न्यूनतम रहती है और दीवारों को स्पष्ट ढलान दी जाती है, अर्थात ऊपर जाते हुए वे भीतर की ओर झुकती हैं, जिससे मकबरा भी किले जैसा दिखता है। गयासुद्दीन तुगलक का बनवाया तुगलकाबाद, पुल से किले से जुड़ा उनका मकबरा, फिरोज शाह कोटला और हौज खास परिसर सब यही रूप दिखाते हैं।
विकल्प A, गुलाम वंश ने लाल बलुआ पत्थर में मंदिर सामग्री से ली गई समृद्ध नक्काशी के साथ निर्माण किया। विकल्प B, खिलजी वंश सच्चे मेहराब और अलाई दरवाजा की संगमरमर जड़ाई के लिए जाना जाता है, जो सादगी नहीं सजावट है। विकल्प D, लोदी वंश दोहरे गुंबद और उद्यान मकबरों के लिए जाना जाता है।
दिल्ली सल्तनत की सबसे पुरानी बची हुई मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम किसने बनवाई थी?
- A.कुतुब-उद-दीन ऐबक
- B.बलबन
- C.मुहम्मद बिन तुगलक
- D.इब्राहिम लोदी
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कुतुब-उद-दीन ऐबक
व्याख्या
सही उत्तर A, कुतुब-उद-दीन ऐबक है। उन्होंने तराइन के दूसरे युद्ध के बाद 1192 में दिल्ली में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद बनवानी शुरू की और उसी स्थल पर खड़े मंदिरों के तराशे स्तंभ तथा पत्थर काम में लिए, इसीलिए इसके आँगन के स्तंभों पर भारतीय घंटियाँ, जंजीरें और बेल-बूटे दिखते हैं। नमाज कक्ष के सामने मेहराबदार पर्दा पुरानी पद्धति में जोड़ा गया, क्योंकि सच्चा मेहराब तब तक नहीं आया था। ऐबक ने इसी के पास कुतुब मीनार भी आरंभ की।
विकल्प B, बलबन इसी गुलाम वंश में बाद में आए और उनका महरौली स्थित मकबरा सच्चे मेहराब के आरंभिक प्रयोग के लिए जाना जाता है। विकल्प C, मुहम्मद बिन तुगलक चौदहवीं शताब्दी के हैं। विकल्प D, इब्राहिम लोदी दिल्ली के अंतिम सुल्तान थे, जो 1526 में पानीपत में हारे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ट्रैबिएट और आर्क्युएट निर्माण में क्या अंतर है?
ट्रैबिएट निर्माण में भार स्तंभों और क्षैतिज शहतीरों पर टिकता है तथा गुंबद चपटे पत्थरों को एक के ऊपर एक बढ़ाकर बनाया जाता है। आर्क्युएट निर्माण में फन्नीनुमा पत्थरों का सच्चा मेहराब होता है, जो भार को किनारों पर डालता है, और उसी पर सच्चा गुंबद खड़ा होता है। भारतीय मंदिर ट्रैबिएट हैं और अलाई दरवाजा के बाद के इंडो-इस्लामिक भवन आर्क्युएट हैं।
भारत में सच्चे मेहराब और गुंबद वाला पहला भवन कौन सा है?
दिल्ली के कुतुब परिसर का अलाई दरवाजा, जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने 1311 में कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिणी द्वार के रूप में जोड़ा था।
चारबाग क्या है?
चारबाग वह वर्गाकार उद्यान है जिसे रास्ते या जल-नालियाँ चार बराबर हिस्सों में बाँटती हैं। यह स्वर्ग की फारसी कल्पना है, जिसे मुगल भारत लाए। हुमायूँ का मकबरा ऐसे बाग में बना भारत का पहला मकबरा है और ताजमहल भी यही योजना अपनाता है।
पित्रा ड्यूरा क्या है और भारत में इसका पहला प्रयोग कहाँ हुआ?
पित्रा ड्यूरा में जैस्पर, कार्नेलियन और लाजवर्द जैसे रंगीन पत्थर काटकर सफेद संगमरमर में जड़े जाते हैं, जिससे फूल और आकृतियाँ बनती हैं। भारत में इसका बड़े पैमाने पर पहला प्रयोग आगरा के एतमाद-उद-दौला मकबरे में हुआ, जिसे नूरजहाँ ने 1622 से 1628 के बीच बनवाया, और यह कला ताजमहल में शिखर पर पहुँची।
गोल गुंबज क्यों प्रसिद्ध है?
कर्नाटक के बीजापुर में गोल गुंबज मुहम्मद आदिल शाह का मकबरा है। इसका गुंबद संसार के सबसे बड़े चिनाई वाले गुंबदों में है और भीतर बिना स्तंभ के एक-दूसरे में फँसी मेहराबों पर टिका है, तथा इसके आधार की दीर्घा फुसफुसाहट को भी कई बार दोहराती है, इसीलिए इसे फुसफुसाती दीर्घा कहते हैं।
स्रोत
- भारतीय कला का परिचय, भाग 2 (कक्षा 12), इंडो-इस्लामिक स्थापत्य से संबंधित अध्याय — एनसीईआरटी
- विश्व धरोहर सूची: कुतुब मीनार परिसर, हुमायूँ का मकबरा, ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, लाल किला परिसर — यूनेस्को
- भारत के केंद्रीय संरक्षित स्मारक — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





