भारत के प्रसिद्ध नर्तक: नृत्य शैली, गुरु और संस्थाएँ
परीक्षा के लिए भारत के प्रसिद्ध नर्तकों के नोट्स: आठ शास्त्रीय शैलियाँ, उनके प्रमुख कलाकार, उनकी स्थापित संस्थाएँ और बार-बार पूछे जाने वाले नाम।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत में आठ शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ मान्यता प्राप्त हैं, और हर शैली के गुरुओं तथा कलाकारों की ऐसी परंपरा है जिनके नाम परीक्षाओं में हर वर्ष पूछे जाते हैं। प्रश्न प्रायः एक ही रूप में आते हैं: किसी नर्तक का नाम देकर शैली पूछी जाती है, या किसी संस्था का नाम देकर उसके संस्थापक। यह नोट नामों को शैली-दर-शैली क्रम में रखता है, बड़ी प्रशिक्षण संस्थाओं और उनके संस्थापकों को जोड़ता है, और अंत में वे उपाधियाँ तथा पहले तथ्य देता है जिन तक परीक्षक पहुँचते हैं।
आठ शास्त्रीय शैलियाँ और उनके राज्य
| शैली | राज्य | प्रमुख कलाकार |
|---|---|---|
| भरतनाट्यम | तमिलनाडु | रुक्मिणी देवी अरुंडेल, बालसरस्वती, यामिनी कृष्णमूर्ति, पद्मा सुब्रह्मण्यम, अलार्मेल वल्ली |
| कथक | उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत | बिरजू महाराज, सितारा देवी, शंभू महाराज, लच्छू महाराज, गोपी कृष्ण, कुमुदिनी लाखिया |
| कथकली | केरल | गुरु कुंचु कुरुप, कलामंडलम रामनकुट्टी नायर, कलामंडलम गोपी |
| कुचिपुड़ी | आंध्र प्रदेश | वेम्पति चिन्ना सत्यम, राजा और राधा रेड्डी, यामिनी कृष्णमूर्ति |
| ओडिसी | ओडिशा | केलुचरण महापात्र, पंकज चरण दास, संजुक्ता पाणिग्रही, सोनल मानसिंह, प्रतिमा गौरी |
| मणिपुरी | मणिपुर | गुरु बिपिन सिंह, झावेरी बहनें, निर्मला मेहता |
| मोहिनीअट्टम | केरल | कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा, भारती शिवाजी, सुनंदा नायर |
| सत्रीया | असम | प्रवर्तक श्रीमंत शंकरदेव; आधुनिक गुरुओं में जतिन गोस्वामी |
भरतनाट्यम और कथक
तमिलनाडु का मंदिर नृत्य भरतनाट्यम आधुनिक मंच तक मुख्यतः दो बहुत अलग व्यक्तित्वों के माध्यम से पहुँचा। रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने उसकी प्रस्तुति को नया रूप दिया और 1936 में मद्रास में कलाक्षेत्र की स्थापना की, जिस संस्था ने आगे की अधिकांश पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया; वंशानुगत कलाकार परिवार से आईं बालसरस्वती ने पुरानी शैली बनाए रखी और विशेष रूप से अभिनय अर्थात नृत्य के भावपक्ष के लिए प्रसिद्ध रहीं। इसके बाद यामिनी कृष्णमूर्ति और पद्मा सुब्रह्मण्यम आईं, तथा भरतनाट्यम और कथकली दोनों में प्रशिक्षित मृणालिनी साराभाई ने अहमदाबाद में दर्पण अकादमी की स्थापना की।
उत्तर भारत की एकमात्र शास्त्रीय शैली कथक घरानों में विकसित हुई, अर्थात किसी स्थान और परिवार से जुड़े स्कूलों में: लखनऊ, जयपुर, बनारस और रायगढ़। लखनऊ घराने तथा कालका-बिंदादीन परिवार के बिरजू महाराज सबसे अधिक पूछा जाने वाला नाम हैं, और उनसे पहले शंभू महाराज तथा लच्छू महाराज आते हैं। सितारा देवी, जिन्हें रवींद्रनाथ टैगोर ने नृत्य साम्राज्ञी कहा बताया जाता है, और कुमुदिनी लाखिया, जिन्होंने अहमदाबाद में कदंब संस्था खोली, दो और नाम हैं जो याद रखने चाहिए।
केरल, ओडिशा, आंध्र, मणिपुर और असम के नृत्य
- कथकली, केरल का वह कथा-नाट्य जिसमें विस्तृत रूपसज्जा और वेशभूषा होती है, बीसवीं शताब्दी में केरल कलामंडलम में पुनर्जीवित हुआ, जिस संस्था की स्थापना कवि वल्लत्तोल नारायण मेनन ने की थी। इसके गुरु संस्था का नाम अपने साथ रखते हैं, जैसे कलामंडलम रामनकुट्टी नायर और कलामंडलम गोपी।
- मोहिनीअट्टम, केरल का लास्य प्रधान वह कोमल नृत्य जो महिलाएँ करती हैं, अपने आधुनिक रूप के लिए मुख्यतः कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा का ऋणी है, जिन्हें प्रायः मोहिनीअट्टम की जननी कहा जाता है।
- ओडिसी को मंदिर की मूर्तिकला तथा महरियों की परंपरा से केलुचरण महापात्र और पंकज चरण दास जैसे गुरुओं ने फिर से गढ़ा। संजुक्ता पाणिग्रही इसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक ले गईं, और प्रतिमा गौरी, जिन्हें प्रतिमा बेदी भी कहा जाता है, ने बेंगलुरु के पास नृत्य ग्राम नृत्यग्राम की स्थापना की।
- कुचिपुड़ी, जो आंध्र प्रदेश के इसी नाम के गाँव से आती है, परंपरा से संत-कवि सिद्धेंद्र योगी से जोड़ी जाती है। आधुनिक काल में वेम्पति चिन्ना सत्यम ने इसकी प्रस्तुति-सामग्री गढ़ी, और राजा तथा राधा रेड्डी की जोड़ी ने इसे व्यापक पहचान दी।
- मणिपुरी, जिसमें रासलीला के विषय और कोमल गोलाकार गति होती है, राज्य के बाहर गुरु बिपिन सिंह तथा झावेरी बहनों के माध्यम से पहुँची।
- सत्रीया, आठों में शास्त्रीय मान्यता पाने वाली सबसे नई शैली, असम के सत्रों अर्थात मठों से आती है और वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव से जोड़ी जाती है।
संस्थाएँ, उपाधियाँ और अन्य नाम
- कलाक्षेत्र, चेन्नई, संस्थापक रुक्मिणी देवी अरुंडेल; केरल कलामंडलम, संस्थापक वल्लत्तोल नारायण मेनन; दर्पण अकादमी, अहमदाबाद, संस्थापक मृणालिनी साराभाई; नृत्यग्राम, बेंगलुरु के पास, संस्थापक प्रतिमा गौरी; कदंब, अहमदाबाद, संस्थापक कुमुदिनी लाखिया।
- उदय शंकर को शास्त्रीय नर्तक के रूप में नहीं, बल्कि भारत में आधुनिक या सृजनात्मक नृत्य के अग्रदूत के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय गति को पश्चिमी मंचशिल्प से जोड़ा और अपने आरंभिक दिनों में अन्ना पावलोवा के साथ प्रस्तुति दी।
- संगीत, नृत्य और नाटक की राष्ट्रीय अकादमी संगीत नाटक अकादमी वे पुरस्कार तथा अकादमी रत्न नामक फेलोशिप देती है, जिनसे नर्तकों को औपचारिक रूप से सम्मानित किया जाता है।
- इन सभी शैलियों का शास्त्रीय आधार भरत मुनि का नाट्यशास्त्र है, जिसमें नृत्त अर्थात शुद्ध गति, नृत्य अर्थात भाव सहित गति और नाट्य अर्थात नाटक का विवेचन है; नंदिकेश्वर का अभिनय दर्पण दूसरा मानक ग्रंथ है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला किसी नर्तक का नाम देकर नृत्य पूछता है, इसलिए हर नाम अपनी शैली के नीचे दर्ज होना चाहिए: कथक में बिरजू महाराज और सितारा देवी, ओडिसी में केलुचरण महापात्र, कुचिपुड़ी में वेम्पति चिन्ना सत्यम, मणिपुरी में बिपिन सिंह। दूसरा किसी संस्था का नाम देकर संस्थापक पूछता है, जिसमें कलाक्षेत्र, केरल कलामंडलम, दर्पण, नृत्यग्राम और कदंब सबसे अधिक पूछी जाती हैं। तीसरा कोई उपाधि या उद्गम पूछता है: मोहिनीअट्टम की जननी, सत्रीया या कुचिपुड़ी के पीछे का संत, आधुनिक नृत्य का अग्रदूत। सामान्य जाल हैं केरल के किसी नाम को तमिलनाडु में रख देना, और कुचिपुड़ी के सिद्धेंद्र योगी को सत्रीया के शंकरदेव से मिला देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कलाक्षेत्र, चेन्नई | संस्थापक रुक्मिणी देवी अरुंडेल, 1936 |
|---|---|
| केरल कलामंडलम | संस्थापक वल्लत्तोल नारायण मेनन |
| दर्पण अकादमी, अहमदाबाद | संस्थापक मृणालिनी साराभाई |
| नृत्यग्राम, बेंगलुरु के पास | संस्थापक प्रतिमा गौरी, जिन्हें प्रतिमा बेदी भी कहते हैं |
| कथक के घराने | लखनऊ, जयपुर, बनारस और रायगढ़ |
| ओडिसी के गुरु | केलुचरण महापात्र, पंकज चरण दास; कलाकार संजुक्ता पाणिग्रही |
| कुचिपुड़ी | परंपरा में सिद्धेंद्र योगी; आधुनिक काल में वेम्पति चिन्ना सत्यम |
| मणिपुरी | गुरु बिपिन सिंह और झावेरी बहनें |
| मोहिनीअट्टम की जननी | कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा |
| सत्रीया | असम के सत्रों से, श्रीमंत शंकरदेव से संबद्ध |
| आधुनिक नृत्य के अग्रदूत | उदय शंकर |
| शास्त्रीय ग्रंथ | भरत मुनि का नाट्यशास्त्र; नंदिकेश्वर का अभिनय दर्पण |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
चेन्नई की प्रसिद्ध नृत्य संस्था कलाक्षेत्र की स्थापना किसने की थी?
- A.बालसरस्वती
- B.रुक्मिणी देवी अरुंडेल
- C.मृणालिनी साराभाई
- D.यामिनी कृष्णमूर्ति
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रुक्मिणी देवी अरुंडेल
व्याख्या
सही उत्तर है B, रुक्मिणी देवी अरुंडेल। रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने 1936 में मद्रास में कलाक्षेत्र की स्थापना की, और इस संस्था ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति को नया रूप दिया तथा आगे की अधिकांश पीढ़ियों को इसी शैली में प्रशिक्षित किया। विकल्प A गलत है क्योंकि बालसरस्वती वंशानुगत कलाकार परिवार से आई थीं और उन्होंने नृत्य की पुरानी शैली बनाए रखी, जिसमें वे अभिनय के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध रहीं, पर उन्होंने इस प्रकार की कोई संस्था नहीं बनाई। विकल्प C गलत है क्योंकि मृणालिनी साराभाई ने अहमदाबाद में दर्पण अकादमी की स्थापना की, जो अलग संस्था है, और वे भरतनाट्यम तथा कथकली दोनों में प्रशिक्षित थीं। विकल्प D गलत है क्योंकि यामिनी कृष्णमूर्ति बाद की पीढ़ी की भरतनाट्यम और कुचिपुड़ी कलाकार थीं। याद रखने योग्य जोड़ियाँ हैं कलाक्षेत्र के साथ रुक्मिणी देवी और दर्पण के साथ मृणालिनी साराभाई।
पंडित बिरजू महाराज किस शास्त्रीय नृत्य शैली के प्रसिद्ध कलाकार थे?
- A.ओडिसी
- B.कथक
- C.कुचिपुड़ी
- D.मणिपुरी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कथक
व्याख्या
सही उत्तर है B, कथक। बिरजू महाराज कथक के लखनऊ घराने तथा नर्तकों के कालका-बिंदादीन परिवार से थे, और इस शैली की जाँच होने पर सबसे अधिक यही नाम पूछा जाता है; उनसे पहले इसी परिवार के शंभू महाराज और लच्छू महाराज आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ओडिशा का नृत्य ओडिसी केलुचरण महापात्र, पंकज चरण दास और संजुक्ता पाणिग्रही से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश की कुचिपुड़ी वेम्पति चिन्ना सत्यम तथा राजा और राधा रेड्डी से जुड़ी है। विकल्प D गलत है क्योंकि मणिपुरी गुरु बिपिन सिंह और झावेरी बहनों से जुड़ी है। कथक उत्तर भारत की एकमात्र शास्त्रीय शैली भी है, और यह लखनऊ, जयपुर, बनारस तथा रायगढ़ के नाम वाले घरानों में विकसित हुई। इस प्रकार के प्रश्नों में सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि हर नाम पहली बार पढ़ते समय ही अपनी शैली के नीचे दर्ज कर लिया जाए, क्योंकि विकल्प सदा चार अलग-अलग शैलियों से लिए जाते हैं।
नृत्य साम्राज्ञी कहलाने वाली सितारा देवी किस शैली से जुड़ी थीं?
- A.भरतनाट्यम
- B.कथक
- C.मोहिनीअट्टम
- D.सत्रीया
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सही उत्तर: B. कथक
व्याख्या
सही उत्तर है B, कथक। सितारा देवी बीसवीं शताब्दी की महान कथक नर्तकियों में थीं, और कहा जाता है कि उनकी प्रस्तुति देखकर रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें नृत्य साम्राज्ञी कहा था। विकल्प A गलत है क्योंकि तमिलनाडु का नृत्य भरतनाट्यम रुक्मिणी देवी अरुंडेल, बालसरस्वती और पद्मा सुब्रह्मण्यम से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि केरल का कोमल नृत्य मोहिनीअट्टम सबसे अधिक कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा से जुड़ा है, जिन्हें प्रायः इसकी जननी कहा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सत्रीया असम के मठों से आती है और वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव से जोड़ी जाती है। यहाँ उपयोगी जोड़ी सितारा देवी और बिरजू महाराज की है, जो दोनों कथक के हैं और प्रायः एक ही विकल्प समूह में रखे जाते हैं। कथक की पहचान उसकी तेज पदचाप, चक्करों और तबले के साथ संवाद से होती है, और यही उसे दक्षिण की शैलियों से तुरंत अलग कर देता है।
गुरु केलुचरण महापात्र किस शास्त्रीय नृत्य शैली के अग्रणी व्यक्तित्व थे?
- A.ओडिसी
- B.कथकली
- C.कुचिपुड़ी
- D.भरतनाट्यम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओडिसी
व्याख्या
सही उत्तर है A, ओडिसी। केलुचरण महापात्र वे गुरु थे जिन्होंने पंकज चरण दास तथा अन्य के साथ मिलकर बीसवीं शताब्दी में मंदिर की मूर्तिकला और ओडिशा की बची हुई परंपराओं से ओडिसी को फिर से गढ़ा, और उन्होंने संजुक्ता पाणिग्रही सहित नर्तकों की एक पूरी पीढ़ी को प्रशिक्षित किया। विकल्प B गलत है क्योंकि केरल का कथा-नाट्य कथकली गुरु कुंचु कुरुप तथा केरल कलामंडलम के गुरुओं से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि कुचिपुड़ी परंपरा में सिद्धेंद्र योगी से और आधुनिक काल में वेम्पति चिन्ना सत्यम से जुड़ी है। विकल्प D गलत है क्योंकि भरतनाट्यम तमिलनाडु का है तथा रुक्मिणी देवी अरुंडेल और बालसरस्वती से जुड़ा है। ओडिसी और ओडिशा का पहला अक्षर एक ही है, और यही इस जोड़ी को याद रखने का सरलतम तरीका है।
बेंगलुरु के पास बसे नृत्य ग्राम नृत्यग्राम की स्थापना किसने की थी?
- A.सोनल मानसिंह
- B.प्रतिमा गौरी
- C.कुमुदिनी लाखिया
- D.संजुक्ता पाणिग्रही
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रतिमा गौरी
व्याख्या
सही उत्तर है B, प्रतिमा गौरी। प्रतिमा गौरी ने, जिन्हें प्रतिमा बेदी भी कहा जाता है, बेंगलुरु के पास नृत्यग्राम की स्थापना एक आवासीय ग्राम के रूप में की, जहाँ नर्तक पुरानी गुरुकुल पद्धति की तरह रहते और अभ्यास करते हैं, और वे स्वयं ओडिसी की नर्तकी थीं। विकल्प A गलत है क्योंकि सोनल मानसिंह ओडिसी और भरतनाट्यम की प्रतिष्ठित नर्तकी हैं, पर नृत्यग्राम की संस्थापक नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि कुमुदिनी लाखिया ने अहमदाबाद में कदंब की स्थापना की और वे कथक से जुड़ी हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि ओडिसी को अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक ले जाने वाली संजुक्ता पाणिग्रही ने ऐसी कोई संस्था नहीं बनाई। संस्थाओं और संस्थापकों को एक छोटी सूची के रूप में याद रखना अच्छा है, क्योंकि प्रश्न प्रायः एक देकर दूसरा पूछता है।
कथकली को पुनर्जीवित करने वाली संस्था केरल कलामंडलम की स्थापना किसने की थी?
- A.वल्लत्तोल नारायण मेनन
- B.कुमारन आशान
- C.कलामंडलम गोपी
- D.तकषी शिवशंकर पिल्लै
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. वल्लत्तोल नारायण मेनन
व्याख्या
सही उत्तर है A, वल्लत्तोल नारायण मेनन। कवि वल्लत्तोल नारायण मेनन ने बीसवीं शताब्दी में कथकली तथा केरल की अन्य प्रदर्शनकारी कलाओं के पुनरुद्धार के लिए केरल कलामंडलम की स्थापना की, और वहाँ प्रशिक्षित गुरु अपने नाम से पहले संस्था का नाम लगाते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि कुमारन आशान, यद्यपि वल्लत्तोल और उल्लूर के साथ आधुनिक मलयालम के तीन महान कवियों में थे, ऐसी कोई संस्था नहीं बना सके। विकल्प C गलत है क्योंकि कलामंडलम गोपी उसी संस्था में प्रशिक्षित प्रसिद्ध कथकली कलाकार हैं, संस्थापक नहीं, और उनका नाम स्वयं यह संबंध दिखा देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि तकषी शिवशंकर पिल्लै उपन्यासकार थे, चेम्मीन के लेखक, और इस नृत्य के पुनरुद्धार में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। किसी कलाकार के अपने नाम से पहले संस्था का नाम लगाने की यह परंपरा स्वयं एक संकेत है, जिस पर प्रश्नपत्र प्रायः टिका रहता है।
वेम्पति चिन्ना सत्यम किस शास्त्रीय नृत्य शैली से जुड़े थे?
- A.मणिपुरी
- B.मोहिनीअट्टम
- C.कुचिपुड़ी
- D.सत्रीया
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कुचिपुड़ी
व्याख्या
सही उत्तर है C, कुचिपुड़ी। वेम्पति चिन्ना सत्यम वे गुरु थे जिन्होंने कुचिपुड़ी की आधुनिक प्रस्तुति-सामग्री गढ़ी; यह नृत्य आंध्र प्रदेश के इसी नाम के गाँव से अपना नाम पाता है और परंपरा से संत-कवि सिद्धेंद्र योगी से जोड़ा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मणिपुरी गुरु बिपिन सिंह और झावेरी बहनों से जुड़ी है। विकल्प B गलत है क्योंकि मोहिनीअट्टम कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा और भारती शिवाजी से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि सत्रीया असम के सत्रों से आती है और श्रीमंत शंकरदेव से जोड़ी जाती है। कुचिपुड़ी के साथ याद रखने योग्य एक और जोड़ी राजा और राधा रेड्डी की है, जिस दंपति ने इस शैली को देश-विदेश के दर्शकों तक पहुँचाया। कुचिपुड़ी की एक और विशेषता यह है कि उसका नाम किसी क्षेत्र या राज्य पर नहीं, बल्कि एक गाँव पर पड़ा है, और यह बात कभी-कभी स्वयं प्रश्न बन जाती है।
गुरु बिपिन सिंह किस नृत्य शैली के मर्मज्ञ के रूप में याद किए जाते हैं?
- A.मणिपुरी
- B.ओडिसी
- C.कथक
- D.कथकली
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मणिपुरी
व्याख्या
सही उत्तर है A, मणिपुरी। गुरु बिपिन सिंह वे शिक्षक थे जिन्होंने मणिपुरी नृत्य को व्यवस्थित रूप दिया और अपनी प्रमुख शिष्याओं झावेरी बहनों के साथ उसे मणिपुर से निकालकर पूरे भारत के मंचों तक पहुँचाया। विकल्प B गलत है क्योंकि ओडिसी केलुचरण महापात्र और पंकज चरण दास से जुड़ी है। विकल्प C गलत है क्योंकि कथक बिरजू महाराज और सितारा देवी से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि कथकली गुरु कुंचु कुरुप तथा केरल कलामंडलम के गुरुओं से जुड़ा है। मणिपुरी की पहचान कृष्ण के जीवन से ली गई रासलीला की विषयवस्तु और उसकी कोमल गोलाकार गति से होती है, जो उसे कथक की तीखी पदचाप तथा भरतनाट्यम की दृढ़ रेखाओं से अलग करती है। मणिपुरी और असम की सत्रीया, ये दोनों ही आठ शास्त्रीय शैलियों में पूर्वोत्तर से आने वाली शैलियाँ हैं, इसलिए इन्हें प्रायः एक साथ पूछा जाता है।
असम की सत्रीया नृत्य शैली किस संत से जोड़ी जाती है?
- A.चैतन्य महाप्रभु
- B.श्रीमंत शंकरदेव
- C.सिद्धेंद्र योगी
- D.माधवदेव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. श्रीमंत शंकरदेव
व्याख्या
सही उत्तर है B, श्रीमंत शंकरदेव। सत्रीया असम के वैष्णव मठों अर्थात सत्रों में विकसित हुई और संत एवं समाजसुधारक श्रीमंत शंकरदेव से जोड़ी जाती है, जिन्होंने अपनी शिक्षा सामान्य लोगों तक पहुँचाने के लिए नृत्य और नाटक का सहारा लिया; आठों शैलियों में शास्त्रीय मान्यता पाने वाली यह सबसे नई है। विकल्प A गलत है क्योंकि चैतन्य महाप्रभु ने बंगाल और ओडिशा में वैष्णव आंदोलन का नेतृत्व किया और वे इस शैली के पीछे का नाम नहीं हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि सिद्धेंद्र योगी वे संत-कवि हैं जो आंध्र प्रदेश की कुचिपुड़ी से परंपरागत रूप से जुड़े हैं, और यही यहाँ सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है। विकल्प D गलत है क्योंकि माधवदेव शंकरदेव के प्रमुख शिष्य थे, जिन्होंने परंपरा आगे बढ़ाई, आरंभ नहीं की।
उदय शंकर को भारत में किसका अग्रदूत माना जाता है?
- A.आधुनिक या सृजनात्मक नृत्य
- B.भरतनाट्यम के पुनरुद्धार
- C.कथकली के पुनरुद्धार
- D.ओडिसी के पुनर्निर्माण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आधुनिक या सृजनात्मक नृत्य
व्याख्या
सही उत्तर है A, आधुनिक या सृजनात्मक नृत्य। उदय शंकर कड़े अर्थों में शास्त्रीय नर्तक नहीं थे; उन्होंने भारतीय गति को पश्चिमी मंचशिल्प से जोड़कर एक नई शैली रची, और उन्हें भारत में आधुनिक या सृजनात्मक नृत्य का अग्रदूत माना जाता है, जिन्होंने अपने आरंभिक दिनों में बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा के साथ प्रस्तुति दी थी। विकल्प B गलत है क्योंकि आधुनिक मंच पर भरतनाट्यम का पुनरुद्धार रुक्मिणी देवी अरुंडेल और बालसरस्वती से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि कथकली का पुनरुद्धार केरल कलामंडलम से जुड़ा है, जिसकी स्थापना वल्लत्तोल नारायण मेनन ने की थी। विकल्प D गलत है क्योंकि ओडिसी का पुनर्निर्माण केलुचरण महापात्र और पंकज चरण दास से जुड़ा है। उनका नाम शास्त्रीय पुनरुद्धार के उनके समकालीनों के सामने रखा जाता है, इसलिए विकल्प में आधुनिक या सृजनात्मक शब्द ही वह संकेत है जिसे खोजना चाहिए।
अपनी शैली की जननी कहलाने वाली कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा किस नृत्य से जुड़ी हैं?
- A.कथकली
- B.मोहिनीअट्टम
- C.भरतनाट्यम
- D.ओडिसी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मोहिनीअट्टम
व्याख्या
सही उत्तर है B, मोहिनीअट्टम। कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा को प्रायः मोहिनीअट्टम की जननी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने केरल के इस कोमल नृत्य की गतियों और प्रस्तुति-सामग्री को एकत्र कर व्यवस्थित रूप दिया; यह नृत्य महिलाएँ करती हैं और यह लास्य अर्थात कोमल शैली में आता है। विकल्प A गलत है क्योंकि केरल की दूसरी बड़ी शैली कथकली विस्तृत रूपसज्जा वाला ओजस्वी कथा-नाट्य है, जिसके गुरु कुंचु कुरुप, रामनकुट्टी नायर और कलामंडलम गोपी हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि भरतनाट्यम तमिलनाडु का है। विकल्प D गलत है क्योंकि ओडिसी ओडिशा की है। याद रखने की बात यह है कि आठ शास्त्रीय शैलियों में से दो केरल की हैं, कथकली और मोहिनीअट्टम, और प्रश्न प्रायः इन्हीं दोनों में अंतर पर टिकते हैं। कथकली मुख्यतः पुरुष भारी वेशभूषा में करते हैं जबकि मोहिनीअट्टम महिलाएँ सादे सफेद और सुनहरे परिधान में, और यही अंतर इस जोड़ी के अधिकांश प्रश्न हल कर देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बिरजू महाराज किस नृत्य शैली से जुड़े थे?
कथक से। वे लखनऊ घराने तथा नर्तकों के कालका-बिंदादीन परिवार से थे, और इस शैली के लिए सबसे अधिक उन्हीं का नाम पूछा जाता है, साथ में सितारा देवी, शंभू महाराज और लच्छू महाराज के नाम आते हैं।
कलाक्षेत्र की स्थापना किसने की और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने 1936 में मद्रास में कलाक्षेत्र की स्थापना की। इस संस्था ने मंच पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति का स्वरूप बदला और इस शैली में आगे की अधिकांश पीढ़ियों को प्रशिक्षित किया।
केरल से कौन-सी दो शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ आती हैं?
कथकली और मोहिनीअट्टम। कथकली विस्तृत रूपसज्जा और वेशभूषा वाला ओजस्वी कथा-नाट्य है, जिसका पुनरुद्धार केरल कलामंडलम में हुआ; मोहिनीअट्टम महिलाओं द्वारा किया जाने वाला कोमल लास्य नृत्य है, जिसका आधुनिक रूप मुख्यतः कलामंडलम कल्याणिकुट्टी अम्मा का दिया हुआ है।
भारत में आधुनिक नृत्य का अग्रदूत किसे माना जाता है?
उदय शंकर को। वे शास्त्रीय नर्तक नहीं थे; उन्होंने भारतीय गति को पश्चिमी मंचशिल्प से जोड़कर एक नई शैली रची और अपने आरंभिक दिनों में बैले नर्तकी अन्ना पावलोवा के साथ प्रस्तुति दी।
भारतीय नृत्य का शास्त्रीय प्रमाण-ग्रंथ कौन-सा है?
भरत मुनि का नाट्यशास्त्र, जिसमें नृत्त अर्थात शुद्ध गति, नृत्य अर्थात भाव सहित गति और नाट्य अर्थात नाटक का विवेचन है। इस विषय का दूसरा मानक ग्रंथ नंदिकेश्वर का अभिनय दर्पण है।
स्रोत
- भारत की शास्त्रीय नृत्य शैलियाँ — संगीत नाटक अकादमी
- प्रदर्शनकारी कलाएँ: नृत्य — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
- भारतीय शास्त्रीय नृत्य — प्रकाशन विभाग, भारत सरकार





