भारत के धर्म और दर्शन: षड्दर्शन और परीक्षा प्रश्न
भारत के धर्म और दर्शन पर परीक्षा नोट्स, छह आस्तिक दर्शन और उनके प्रवर्तक, वेदांत की शाखाएं, तथा बौद्ध, जैन, सिख, भक्ति और सूफी परंपराओं के तथ्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारतीय दर्शन परीक्षा में लगभग पूरी तरह युग्मों के रूप में पूछा जाता है। किसी संप्रदाय के साथ उसे व्यवस्थित करने वाले ऋषि का युग्म, वेदांत की किसी शाखा के साथ उसके प्रवर्तक का युग्म, किसी धर्म के साथ उसके संस्थापक और ग्रंथों का युग्म, और किसी संगीति के साथ उसे बुलाने वाले राजा का युग्म। प्रश्न एकल युग्म के रूप में आते हैं या सूची मिलान के रूप में, और दोनों ही रूपों में जिस अभ्यर्थी को युग्म कंठस्थ हैं वह कुछ सेकंड में उत्तर दे देता है। यह अध्याय पहले वही युग्म देता है और उसके बाद प्रत्येक संप्रदाय की पहचान बनने वाली अवधारणाएं, क्योंकि प्रश्नपत्र यह भी पूछते हैं कि कोई सिद्धांत किस संप्रदाय का है।
आस्तिक और नास्तिक संप्रदाय
यह वर्गीकरण एक ही कसौटी पर टिका है, कि कोई संप्रदाय वेदों के प्रामाण्य को स्वीकार करता है या नहीं। जो स्वीकार करते हैं उन्हें आस्तिक कहा जाता है और वे छह हैं, जिन्हें सम्मिलित रूप से षड्दर्शन कहते हैं। जो स्वीकार नहीं करते वे नास्तिक हैं, और सामान्यतः तीन नाम लिए जाते हैं, बौद्ध, जैन तथा चार्वाक अर्थात लोकायत भौतिकवाद, जिनमें मक्खलि गोसाल का आजीवक संप्रदाय भी कभी जोड़ा जाता है। ध्यान रहे कि यहां आस्तिक का अर्थ ईश्वर में विश्वास नहीं है, सांख्य और मीमांसा वेदों को स्वीकार करते हैं परंतु सृष्टिकर्ता पर निर्भर नहीं हैं, जबकि वेदों को नकारने वाला चार्वाक बृहस्पति से जुड़ा शुद्ध भौतिकवाद है।
| संप्रदाय | प्रवर्तक | पहचान |
|---|---|---|
| सांख्य | कपिल | पुरुष और प्रकृति का द्वैत, छह में सबसे प्राचीन |
| योग | पतंजलि | योगसूत्र और अष्टांग योग |
| न्याय | गौतम, जिन्हें अक्षपाद भी कहते हैं | तर्कशास्त्र और चार प्रमाण |
| वैशेषिक | कणाद | परमाणुवाद और सात पदार्थ |
| मीमांसा या पूर्व मीमांसा | जैमिनि | वेदों का प्रामाण्य और यज्ञ कर्म |
| वेदांत या उत्तर मीमांसा | बादरायण | ब्रह्मसूत्र और उपनिषदों का ज्ञान |
दो संप्रदाय सदा अपनी पारिभाषिक शब्दावली से पूछे जाते हैं। न्याय चार प्रमाण मानता है, प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान और शब्द। योग आठ अंग एक निश्चित क्रम में बताता है, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। मीमांसा वेदों के कर्मकांड का संप्रदाय है, और उसके दो महान भाष्यकार कुमारिल भट्ट तथा प्रभाकर प्रश्नपत्रों में जैमिनि से कम नहीं पूछे जाते।
वेदांत और उसकी शाखाएं
वेदांत कई शाखाओं में विकसित हुआ जो एक ही प्रश्न पर भिन्न हैं, जीव का ब्रह्म से संबंध क्या है। नीचे दी सारणी इस अध्याय की सर्वाधिक पूछी जाने वाली सारणी है।
| आचार्य | शाखा | संक्षिप्त मत |
|---|---|---|
| शंकराचार्य | अद्वैत | केवल ब्रह्म सत्य है, जगत माया है |
| रामानुज | विशिष्टाद्वैत | जीव और जगत ब्रह्म के सत्य विशेषण हैं |
| मध्वाचार्य | द्वैत | ईश्वर और जीव नित्य भिन्न हैं |
| निंबार्क | द्वैताद्वैत | भेद और अभेद दोनों सत्य हैं |
| वल्लभाचार्य | शुद्धाद्वैत | ब्रह्म सत्य है और माया से अछूता है |
| चैतन्य महाप्रभु | अचिंत्य भेदाभेद | भेद और अभेद अचिंत्य रूप से साथ |
बौद्ध और जैन धर्म
सिद्धार्थ गौतम का जन्म लुंबिनी में हुआ, बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, सारनाथ के मृगदाव में उन्होंने पहला उपदेश दिया जिसे धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है, और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। उनका उपदेश चार आर्य सत्य और अष्टांगिक मार्ग पर टिका है, और उनका ग्रंथ पालि में त्रिपिटक है, जो विनय, सुत्त और अभिधम्म पिटकों से बना है। चार संगीतियां अपने स्थान और राजकीय संरक्षक के साथ पूछी जाती हैं, पहली राजगृह में अजातशत्रु के संरक्षण में, दूसरी वैशाली में कालाशोक के, तीसरी पाटलिपुत्र में अशोक के, और चौथी कश्मीर में कनिष्क के संरक्षण में, जिसमें हीनयान और महायान अलग हुए।
वर्धमान महावीर जैन परंपरा के चौबीसवें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ और निर्वाण पावापुरी में। पहले तीर्थंकर ऋषभनाथ और तेईसवें पार्श्वनाथ थे। जैन धर्म सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के त्रिरत्न की शिक्षा देता है, और पांच व्रतों में महावीर ने अहिंसा, सत्य, अस्तेय तथा अपरिग्रह के साथ ब्रह्मचर्य जोड़ा। इसके विशिष्ट सिद्धांत अनेकांतवाद तथा स्याद्वाद हैं। दिगंबर और श्वेतांबर का विभाजन पाटलिपुत्र की पहली संगीति के बाद दृढ़ हुआ, और आगम ग्रंथ वल्लभी की दूसरी संगीति में लिखे गए।
सिख, भक्ति और सूफी परंपरा
गुरु नानक का जन्म तलवंडी में हुआ, जो अब नानकाना साहिब है, और उन्होंने दस गुरुओं की परंपरा आरंभ की। गुरु अर्जुन देव ने 1604 में आदि ग्रंथ का संकलन किया, गुरु गोविंद सिंह ने 1699 में आनंदपुर साहिब में खालसा की स्थापना की, और 1708 में गुरु ग्रंथ साहिब सदा के लिए गुरु बने। भक्ति आंदोलन तमिल प्रदेश में विष्णु भक्त आलवारों और शिव भक्त नयनारों से आरंभ हुआ और उत्तर में निर्गुण संतों जैसे कबीर, रैदास तथा गुरु नानक के माध्यम से फैला, जो निराकार ईश्वर की उपासना करते थे, तथा सगुण संतों जैसे मीराबाई, तुलसीदास, सूरदास, तुकाराम और चैतन्य के माध्यम से। सूफी मत भारत में सिलसिलों के रूप में आया, जिनमें अजमेर के मोइनुद्दीन चिश्ती का चिश्ती सिलसिला तथा सुहरावर्दी, कादरी और नक्शबंदी सिलसिले परीक्षा में आते हैं, और खानकाह, पीर मुरीद, समा तथा वहदत उल वुजूद इसकी शब्दावली है। भारत में पारसी, यहूदी और ईसाई समुदाय भी प्राचीन हैं, केरल में ईसाई परंपरा संत थामस के आगमन से जोड़ी जाती है, और अहमदिया आंदोलन की स्थापना 1889 में पंजाब के कादियान में हुई।
प्रश्नपत्र कहां जाल लगाते हैं
सर्वाधिक बदले जाने वाले युग्म रामानुज और मध्वाचार्य के हैं, तथा निंबार्क और वल्लभाचार्य के, इसलिए इन चारों को साथ याद कीजिए। कणाद वैशेषिक के हैं और कपिल सांख्य के, उलटा नहीं। पूर्व मीमांसा कर्मकांड है और उत्तर मीमांसा वेदांत, इसलिए कुमारिल भट्ट का नाम लेने वाला प्रश्न पूर्व मीमांसा पूछ रहा है। और बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग पतंजलि के अष्टांग योग से भिन्न है, चाहे विकल्पों में दोनों को अष्टांग कहा गया हो।
परीक्षा की दृष्टि से
तीन रूप अपेक्षित हैं। पहला सीधा युग्म, वैशेषिक संप्रदाय का प्रवर्तक कौन, कौन सा ग्रंथ पतंजलि का है, चौबीसवें तीर्थंकर कौन थे। दूसरा सूची मिलान, जिसमें दार्शनिकों को उनकी शाखाओं से या संप्रदायों को मोक्ष के मार्ग से जोड़ना होता है, ऐसे प्रश्न में जिन दो युग्मों पर निश्चय है उन्हें पकड़कर विरोधी विकल्प हटा दें। तीसरा सिद्धांत का प्रश्न, कौन सा संप्रदाय मानता है कि पदार्थ परमाणुओं से बना है, कौन चार प्रमाण मानता है, कुमारिल भट्ट किस संप्रदाय के हैं। जाल स्थिर हैं और अभ्यास योग्य हैं, रामानुज बनाम मध्वाचार्य, निंबार्क बनाम वल्लभाचार्य, कपिल बनाम कणाद, तथा पूर्व मीमांसा बनाम उत्तर मीमांसा। यह भी पढ़ें कि प्रश्न बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग पूछ रहा है या पतंजलि के अष्टांग योग के आठ अंग, क्योंकि दोनों अष्टांग कहे जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| छह आस्तिक दर्शन | सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत, सम्मिलित रूप से षड्दर्शन |
|---|---|
| छह में सबसे प्राचीन | सांख्य, प्रवर्तक कपिल |
| योगसूत्र | पतंजलि, जिसमें योग के आठ अंग बताए गए हैं |
| न्यायसूत्र | गौतम, जिन्हें अक्षपाद भी कहा जाता है |
| वैशेषिक | कणाद, परमाणुवाद का सिद्धांत |
| ब्रह्मसूत्र | बादरायण, वेदांत का मूल ग्रंथ |
| अद्वैत वेदांत | शंकराचार्य, केवल ब्रह्म सत्य है |
| विशिष्टाद्वैत | रामानुज, विशिष्ट अद्वैत का मत |
| द्वैत | मध्वाचार्य, ईश्वर और जीव का नित्य भेद |
| चार्वाक या लोकायत | बृहस्पति से जुड़ा भौतिकवादी संप्रदाय, वेदों को नकारता है |
| बौद्ध ग्रंथ | पालि में त्रिपिटक, विनय, सुत्त और अभिधम्म |
| चौथी बौद्ध संगीति | कश्मीर, कनिष्क के संरक्षण में, हीनयान और महायान का विभाजन |
| जैन त्रिरत्न | सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र |
| खालसा की स्थापना | 1699, आनंदपुर साहिब, गुरु गोविंद सिंह द्वारा |
| चिश्ती सिलसिला | भारत में मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा, दरगाह अजमेर में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
सूची एक को सूची दो से मिलाइए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए। सूची एक, दार्शनिक: A. रामानुज, B. मध्वाचार्य, C. निंबार्क, D. वल्लभाचार्य। सूची दो, दर्शन: 1. शुद्धाद्वैत, 2. द्वैताद्वैत, 3. द्वैत, 4. विशिष्टाद्वैत
- A.A - 2, B - 4, C - 1, D - 3
- B.A - 3, B - 1, C - 4, D - 2
- C.A - 1, B - 2, C - 3, D - 4
- D.A - 4, B - 3, C - 2, D - 1
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. A - 4, B - 3, C - 2, D - 1
व्याख्या
सही उत्तर D, A - 4, B - 3, C - 2, D - 1 है। रामानुज ने विशिष्टाद्वैत का उपदेश दिया, जिसमें जीव और जगत सत्य हैं परंतु ब्रह्म के विशेषण के रूप में। मध्वाचार्य ने द्वैत का उपदेश दिया, जो पूर्ण द्वैतवाद है और जिसमें ईश्वर तथा जीव नित्य भिन्न रहते हैं। निंबार्क ने द्वैताद्वैत अर्थात भेदाभेद का उपदेश दिया, जिसके अनुसार भेद और अभेद दोनों सत्य हैं। वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत का उपदेश दिया, जिसमें ब्रह्म सत्य है और माया से अछूता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वह रामानुज को द्वैताद्वैत देता है, जो निंबार्क का है। विकल्प B गलत है क्योंकि वह रामानुज को द्वैत और मध्वाचार्य को शुद्धाद्वैत देकर उन दो मतों को उलट देता है जो सबसे अधिक भ्रमित किए जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि वह चारों आचार्यों को उसी क्रम में जोड़ देता है जिस क्रम में सूचियां छपी हैं, और यही इस प्रकार के हर सूची मिलान प्रश्न का जाल है।
कुमारिल भट्ट और प्रभाकर निम्नलिखित में से किस दर्शन संप्रदाय के थे?
- A.लोकायत
- B.माध्यमिक
- C.पूर्व मीमांसा
- D.उत्तर मीमांसा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पूर्व मीमांसा
व्याख्या
सही उत्तर C, पूर्व मीमांसा है। पूर्व मीमांसा जैमिनि द्वारा प्रवर्तित संप्रदाय है, जो वेदों के कर्मकांड को प्रमाण मानता है और कहता है कि वैदिक कर्म के यथाविधि अनुष्ठान से मोक्ष मिलता है। कुमारिल भट्ट और प्रभाकर इसके दो महान भाष्यकार हैं, और उनके बाद यह संप्रदाय भाट्ट तथा प्राभाकर परंपराओं में बंट जाता है। विकल्प A, लोकायत, भौतिकवादी चार्वाक संप्रदाय है, जो वेदों को पूर्णतः नकारता है और इसलिए इन दोनों विचारकों का दावा नहीं कर सकता। विकल्प B, माध्यमिक, महायान बौद्ध संप्रदाय है जो नागार्जुन और उनके शून्यता सिद्धांत से जुड़ा है, यह पूर्णतः भिन्न परंपरा है। विकल्प D, उत्तर मीमांसा, वेदांत का दूसरा नाम है, जो ज्ञानकांड और उपनिषदों का संप्रदाय है और जिसके भाष्यकार शंकराचार्य, रामानुज तथा मध्वाचार्य हैं, नाम साझा होने के कारण यही सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है।
निम्नलिखित में से किसने अष्टांगिक मार्ग के दर्शन का प्रतिपादन किया?
- A.शंकराचार्य
- B.महावीर स्वामी
- C.रामानुज
- D.गौतम बुद्ध
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. गौतम बुद्ध
व्याख्या
सही उत्तर D, गौतम बुद्ध है। अष्टांगिक मार्ग बुद्ध द्वारा सारनाथ में दिए पहले उपदेश के चार आर्य सत्यों में चौथा है, और यह भोग तथा कठोर तप के बीच का मध्यम मार्ग बताता है, सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्म, सम्यक आजीविका, सम्यक प्रयत्न, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि। विकल्प A, शंकराचार्य, ने अद्वैत वेदांत का उपदेश दिया, जिसमें मोक्ष इस ज्ञान से मिलता है कि केवल ब्रह्म सत्य है, उन्होंने कोई अष्टांगिक मार्ग नहीं बताया। विकल्प B, महावीर स्वामी, ने सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र के त्रिरत्न तथा पांच महाव्रत बताए, इसलिए उनकी योजना त्रिविध और पंचविध है, अष्टविध नहीं। विकल्प C, रामानुज, ने विशिष्टाद्वैत तथा भक्ति अर्थात प्रपत्ति का मार्ग बताया। अभ्यर्थी इस मार्ग को पतंजलि के अष्टांग योग से भी भ्रमित करते हैं, जो यम से समाधि तक है और भिन्न परंपरा का है।
सूची एक को सूची दो से मिलाइए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए। सूची एक, दर्शन: A. न्याय दर्शन, B. मीमांसा दर्शन, C. सांख्य दर्शन, D. वेदांत दर्शन। सूची दो, मोक्ष का साधन: 1. यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति, 2. आत्मज्ञान, 3. वैदिक कर्मकांड, 4. तार्किक चिंतन
- A.A-2, B-4, C-1, D-3
- B.A-4, B-3, C-1, D-2
- C.A-1, B-4, C-2, D-3
- D.A-3, B-4, C-1, D-2
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. A-4, B-3, C-1, D-2
व्याख्या
सही उत्तर B, A-4, B-3, C-1, D-2 है। न्याय तर्कशास्त्र का संप्रदाय है और मानता है कि सम्यक तर्क से मोक्ष होता है, अतः उसका युग्म तार्किक चिंतन से बनता है। मीमांसा वेदों के कर्मकांड को बंधनकारी मानती है और कहती है कि वैदिक कर्मकांड के अनुष्ठान से मोक्ष मिलता है। सांख्य कहता है कि यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति से बंधन समाप्त होता है, अर्थात पुरुष और प्रकृति का विवेक। वेदांत उपनिषदों पर टिका है और मानता है कि आत्मा को ब्रह्म के रूप में जानने अर्थात आत्मज्ञान से मोक्ष होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वह न्याय को आत्मज्ञान और मीमांसा को तार्किक चिंतन देकर दोनों उलट देता है। विकल्प C गलत है क्योंकि वह न्याय को यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति देता है, जो सांख्य का है। विकल्प D गलत है क्योंकि वह न्याय को वैदिक कर्मकांड का संप्रदाय बना देता है, जो केवल मीमांसा का युग्म है।
पदार्थ के परमाणु सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध वैशेषिक दर्शन का प्रवर्तन किसने किया?
- A.कपिल
- B.कणाद
- C.जैमिनि
- D.पतंजलि
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कणाद
व्याख्या
सही उत्तर B, कणाद है। कणाद, जिन्हें उलूक भी कहा जाता है, ने वैशेषिक सूत्र की रचना की और बताया कि भौतिक जगत अविभाज्य परमाणुओं से बना है, जो मिलकर अनुभव की वस्तुएं बनाते हैं, यह संप्रदाय सत्ता को पदार्थों अर्थात श्रेणियों में भी बांटता है और तर्क तथा भौतिकी में न्याय का सहचर माना जाता है। विकल्प A, कपिल, ने सांख्य का प्रवर्तन किया, जो छह में सबसे प्राचीन है और जगत की व्याख्या चेतन पुरुष तथा भौतिक प्रकृति के द्वैत से करता है। विकल्प C, जैमिनि, ने पूर्व मीमांसा का प्रवर्तन किया, जो वैदिक कर्मकांड का संप्रदाय है और जिसके भाष्यकार कुमारिल भट्ट तथा प्रभाकर थे। विकल्प D, पतंजलि, ने योगसूत्र का संकलन किया और यम से समाधि तक योग के आठ अंग बताए। प्रश्नपत्र कपिल और कणाद को सर्वाधिक बदलते हैं क्योंकि नाम मिलते जुलते हैं, इसलिए परमाणु के साथ कणाद का युग्म पक्का कर लें।
अहमदिया इस्लाम का एक संप्रदाय है जिसका उद्भव भारत में हुआ। इसकी स्थापना 1889 में ______ ने की।
- A.मीर निसार अली
- B.हाजी शरीयतुल्लाह
- C.शाह वलीउल्लाह
- D.मिर्जा गुलाम अहमद
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. मिर्जा गुलाम अहमद
व्याख्या
सही उत्तर D, मिर्जा गुलाम अहमद है। अहमदिया आंदोलन की स्थापना 1889 में पंजाब के कादियान में मिर्जा गुलाम अहमद ने की, और यह आधुनिक भारत के उन धार्मिक आंदोलनों में से है जो उन्नीसवीं शताब्दी की सुधारवादी बहसों से निकले तथा जिन पर इस्लामी परंपरा और उस युग के उदार विचारों दोनों का प्रभाव था। विकल्प A, मीर निसार अली, जिन्हें तीतू मीर कहा जाता है, बंगाल में तरीका ए मुहम्मदिया परंपरा के किसान आंदोलन के नेता थे और 1831 में मारे गए। विकल्प B, हाजी शरीयतुल्लाह, ने उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में पूर्वी बंगाल में फरायजी आंदोलन चलाया और मुसलमानों से उन प्रथाओं को छोड़ने को कहा जिन्हें वे गैर इस्लामी मानते थे। विकल्प C, शाह वलीउल्लाह, दिल्ली के अठारहवीं शताब्दी के विद्वान थे जिनके लेखन ने बाद के सुधार को दिशा दी, और वे प्रश्न में दी तिथि से एक शताब्दी पहले के हैं, इसी आधार पर उन्हें सबसे सरलता से हटाया जा सकता है।
जैन परंपरा के चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर कौन थे?
- A.ऋषभनाथ
- B.पार्श्वनाथ
- C.वर्धमान महावीर
- D.नेमिनाथ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. वर्धमान महावीर
व्याख्या
सही उत्तर C, वर्धमान महावीर है। महावीर चौबीसवें और अंतिम तीर्थंकर थे, जिनका जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ, जिन्होंने तीस वर्ष की आयु में गृह त्याग किया, बारह वर्ष की तपस्या के बाद कैवल्य प्राप्त किया और बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया। उन्होंने पहले से चले आ रहे चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़कर जैन धर्म के पांच महाव्रत पूरे किए, और अनेकांतवाद तथा स्याद्वाद के सिद्धांत उनसे जुड़े हैं। विकल्प A, ऋषभनाथ, जिन्हें आदिनाथ भी कहते हैं, पहले तीर्थंकर थे और उनका उल्लेख ऋग्वेद तथा भागवत परंपरा में मिलता है। विकल्प B, पार्श्वनाथ, तेईसवें तीर्थंकर थे और महावीर के तत्काल पूर्ववर्ती हैं, इसी कारण यह सबसे प्रचलित गलत उत्तर है। विकल्प D, नेमिनाथ, बाईसवें तीर्थंकर थे। इन तीनों को क्रम से याद रखें, ऋषभनाथ पहले, पार्श्वनाथ तेईसवें, महावीर चौबीसवें।
केवल ब्रह्म सत्य है और जगत माया है, यह अद्वैत वेदांत का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया?
- A.शंकराचार्य
- B.रामानुज
- C.मध्वाचार्य
- D.निंबार्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. शंकराचार्य
व्याख्या
सही उत्तर A, शंकराचार्य है। शंकराचार्य ने अद्वैत का प्रतिपादन किया, जिसमें केवल ब्रह्म सत्य है, दृश्य जगत माया है और जीव ब्रह्म से भिन्न नहीं है, उन्होंने ब्रह्मसूत्र, प्रमुख उपनिषदों तथा भगवद्गीता पर भाष्य लिखे और देश की चारों दिशाओं में मठों की स्थापना का श्रेय उन्हें दिया जाता है। विकल्प B, रामानुज, ने विशिष्टाद्वैत का उपदेश दिया, जिसमें जीव और जगत ब्रह्म के विशेषण के रूप में सत्य हैं और जिसमें भक्ति केंद्र में है। विकल्प C, मध्वाचार्य, ने द्वैत का उपदेश दिया, जो स्पष्ट द्वैतवाद है और जिसमें ईश्वर तथा जीव नित्य पृथक हैं, यह अद्वैत से सबसे दूर का मत है। विकल्प D, निंबार्क, ने द्वैताद्वैत का उपदेश दिया, जिसमें भेद और अभेद दोनों सत्य हैं। ये चारों वेदांत के हर प्रश्न का सामान्य विकल्प समूह हैं, इसलिए चारों युग्म साथ याद करने चाहिए।
चौथी बौद्ध संगीति, जिसके बाद बौद्ध धर्म हीनयान और महायान में बंट गया, किस शासक के संरक्षण में हुई थी?
- A.अजातशत्रु
- B.अशोक
- C.कालाशोक
- D.कनिष्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कनिष्क
व्याख्या
सही उत्तर D, कनिष्क है। चौथी बौद्ध संगीति कश्मीर में कुषाण शासक कनिष्क के संरक्षण में हुई, और वह इसलिए स्मरणीय है कि उसमें सभा हीनयान तथा महायान संप्रदायों में बंट गई, इसकी कार्यवाही संस्कृत में हुई, अध्यक्षता वसुमित्र ने की और अश्वघोष इससे जुड़े माने जाते हैं। विकल्प A, अजातशत्रु, ने बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तुरंत बाद राजगृह में पहली संगीति का संरक्षण किया, जहां विनय और सुत्त का संकलन तय हुआ। विकल्प B, अशोक, ने पाटलिपुत्र की तीसरी संगीति का संरक्षण किया, जिसने अभिधम्म के साथ ग्रंथ पूरा किया और श्रीलंका तक धर्म प्रचारक भेजे, और वे सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प हैं क्योंकि बौद्ध धर्म से सर्वाधिक जुड़ा नाम उनका है। विकल्प C, कालाशोक, ने वैशाली की दूसरी संगीति का संरक्षण किया, जहां संघ पहली बार स्थविरवादी और महासंघिक में बंटा।
निम्नलिखित में से कौन भारतीय दर्शन के छह आस्तिक संप्रदायों में नहीं है?
- A.न्याय
- B.चार्वाक
- C.सांख्य
- D.मीमांसा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चार्वाक
व्याख्या
सही उत्तर B, चार्वाक है। चार्वाक, जिसे लोकायत भी कहा जाता है और जो बृहस्पति से जोड़ा जाता है, वेदों के प्रामाण्य को नकारता है, पुनर्जन्म तथा मृत्यु के बाद बची रहने वाली आत्मा को अस्वीकार करता है और केवल प्रत्यक्ष को प्रमाण मानता है, इसलिए वह बौद्ध तथा जैन के साथ नास्तिक श्रेणी में आता है। छह आस्तिक संप्रदाय, जिन्हें सम्मिलित रूप से षड्दर्शन कहा जाता है, सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा और वेदांत हैं। विकल्प A, न्याय, गौतम द्वारा प्रवर्तित तर्क तथा चार प्रमाणों का आस्तिक संप्रदाय है। विकल्प C, सांख्य, कपिल द्वारा प्रवर्तित, छह में सबसे प्राचीन है और जगत की व्याख्या पुरुष तथा प्रकृति से करता है। विकल्प D, मीमांसा, जैमिनि द्वारा प्रवर्तित, वेदों के कर्मकांड को प्रमाण मानती है। याद रखिए कि आस्तिक और नास्तिक का निर्णय केवल वेदों के प्रति दृष्टिकोण से होता है, ईश्वर में विश्वास से नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोई दर्शन आस्तिक या नास्तिक किस आधार पर कहा जाता है?
केवल वेदों के प्रति उसके दृष्टिकोण से। जो वेदों का प्रामाण्य मानता है वह आस्तिक है और ऐसे छह दर्शन हैं। जो नहीं मानता वह नास्तिक है, और तीन नाम लिए जाते हैं, बौद्ध, जैन और चार्वाक। ईश्वर में विश्वास कसौटी नहीं है, मीमांसा और सांख्य सृष्टिकर्ता पर निर्भर न होकर भी आस्तिक हैं।
कुमारिल भट्ट और प्रभाकर किस संप्रदाय के हैं?
पूर्व मीमांसा के, जिसका प्रवर्तन जैमिनि ने किया और जो मानता है कि वेदों का कर्मकांड मोक्ष का मार्ग है। ये दोनों उसके प्रमुख भाष्यकार हैं, और इनका नाम लेने वाला प्रश्न मीमांसा पूछ रहा होता है, वेदांत नहीं।
वेदांत की कौन शाखा किस आचार्य की है, यह कैसे याद रखें?
इन्हें भेद की मात्रा के क्रम में चार युग्मों के रूप में याद कीजिए। शंकराचार्य कोई भेद नहीं मानते, अतः अद्वैत, रामानुज विशिष्ट भेद मानते हैं, अतः विशिष्टाद्वैत, निंबार्क भेद और अभेद दोनों मानते हैं, अतः द्वैताद्वैत, और मध्वाचार्य पूर्ण भेद मानते हैं, अतः द्वैत। वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत का उपदेश दिया।
अष्टांगिक मार्ग और अष्टांग योग में क्या अंतर है?
अष्टांगिक मार्ग बुद्ध का दुख से मुक्ति का व्यावहारिक मार्ग है, जो सम्यक दृष्टि से सम्यक समाधि तक चलता है। अष्टांग योग पतंजलि का है, जो यम से समाधि तक आठ अंगों में है। दोनों में आठ शब्द आता है, इसीलिए विकल्पों में ये मिला दिए जाते हैं।
किस बौद्ध संगीति के बाद हीनयान और महायान का विभाजन हुआ?
चौथी संगीति के बाद, जो कश्मीर में कनिष्क के संरक्षण में हुई और जिसमें सभा हीनयान तथा महायान में बंट गई। इससे पहले अशोक के संरक्षण में पाटलिपुत्र की तीसरी संगीति ने ग्रंथ व्यवस्थित किए और धर्म प्रचारक भेजे थे।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग एक, विचारक विश्वास और इमारतें — एनसीईआरटी
- हमारे अतीत एक, कक्षा छह, नए प्रश्न और विचार — एनसीईआरटी
- भारतीय कला और संस्कृति का परिचय — एनसीईआरटी





