भारत के मार्शल आर्ट और पारंपरिक खेल: पूरे नोट्स
कला और संस्कृति नोट्स: कलरीपयट्टू, सिलंबम, थांग ता, गतका, थोड़ा, मल्लखंब, कबड्डी तथा त्योहारों से जुड़े पारंपरिक भारतीय खेल, उनके राज्य और हथियार।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

हर सामान्य ज्ञान के प्रश्नपत्र में एक प्रश्न किसी मार्शल आर्ट या गाँव के खेल को उसके राज्य से जोड़ने का आता है। तथ्य सरल हैं पर भीड़ भरे हैं, और अभ्यर्थी एक ही क्षेत्र के दो नाम मिला देने से अंक खो देते हैं, सबसे अधिक मणिपुर की तीन युद्ध परंपराओं में। यह नोट प्रत्येक कला को उसके राज्य और उस एक पहचान चिह्न से बाँधता है, चाहे वह हथियार हो, अखाड़ा हो या नियम, और फिर वही काम उन पारंपरिक खेलों के लिए करता है जो आज त्योहारों की प्रतियोगिताओं के रूप में बचे हैं।
भारत की युद्ध परंपराएँ क्या हैं
भारतीय अर्थ में मार्शल आर्ट युद्ध की एक प्रशिक्षित प्रणाली है, जिसमें पाठों का निश्चित क्रम, अपना अखाड़ा और अपने हथियार होते हैं और जो गुरु से शिष्य तक पहुँचती है। इनमें से अधिकांश प्रणालियाँ किसी क्षेत्र की लड़ाई की आवश्यकता से बनीं: राजपूत और मराठा घुड़सवारों की तलवार और ढाल, तमिल प्रदेश की लाठी, मलाबार तट की लचीली तलवार। ये आज बची हुई हैं क्योंकि वे कर्मकांड और प्रस्तुति में प्रवेश कर गईं। पारी खंडा की गतियाँ पूर्वी भारत के छऊ नृत्य में गईं, कलरीपयट्टू की गति कथकली के कलाकारों को प्रशिक्षित करती है, और गतका होला मोहल्ला जैसे सिख त्योहारों पर दिखाया जाता है। इसी कारण यह विषय खेल के नीचे नहीं, कला और संस्कृति के नीचे आता है।
मार्शल आर्ट और उनके राज्य
| मार्शल आर्ट | राज्य या क्षेत्र | पहचान चिह्न |
|---|---|---|
| कलरीपयट्टू | केरल | कलरी नामक अखाड़े में अभ्यास; उरुमी इसकी लचीली तलवार |
| सिलंबम | तमिलनाडु | लंबी बाँस की लाठी से लड़ा जाता है |
| कुत्तु वरिसै | तमिलनाडु | बिना हथियार वाली शाखा |
| थांग ता, जिसे हुयेन लांगलोन भी कहते हैं | मणिपुर | थांग अर्थात तलवार और ता अर्थात भाला |
| सरित सराक | मणिपुर | हुयेन लांगलोन का निरायुध पक्ष |
| चेइबी गद गा | मणिपुर | चमड़े से ढकी लाठी और ढाल |
| मर्दानी खेल | महाराष्ट्र | मराठा कला, पट्टा नामक दस्ताना तलवार और विटा |
| मल्लखंब | महाराष्ट्र | लकड़ी के खंभे या रस्सी पर कुश्ती और व्यायाम |
| गतका | पंजाब | सोटी अर्थात लकड़ी की छड़ी, फर्री अर्थात ढाल |
| थोड़ा | हिमाचल प्रदेश | दो दलों पाशी और साथी के बीच तीरंदाजी की प्रतियोगिता |
| पारी खंडा | बिहार | खंडा तलवार, पारी ढाल; छऊ नृत्य को आधार देता है |
| मुष्टि युद्ध | वाराणसी, उत्तर प्रदेश | खाली मुक्कों से लड़ाई |
| इनबुआन कुश्ती | मिजोरम | पेटी कुश्ती; घुटना मोड़ना और लात मारना वर्जित |
| वज्र मुष्टि | कर्नाटक | नुकीले छल्ले के साथ कुश्ती, मैसूर दशहरा में प्रदर्शन |
इनमें चार पर विशेष ध्यान दें। कलरीपयट्टू चार चरणों में सिखाया जाता है, शरीर साधना से लकड़ी के हथियार, फिर धातु के हथियार और अंत में खाली हाथ, और यह क्रम भी पूछा जाता है। मल्लखंब को 2013 में मध्य प्रदेश ने अपना राज्य खेल घोषित किया, जबकि उसका घर महाराष्ट्र है, और यही विभाजन सबसे पसंदीदा जाल है। थोड़ा को उसके दो दलों और घुटने के नीचे मारे जाने वाले भोथरे लकड़ी के तीर से पहचानें। इनबुआन को घुटना न मोड़ने के नियम से पहचानें।
पारंपरिक और ग्रामीण खेल
| खेल | क्षेत्र | याद रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| कबड्डी | पूरे भारत में | शैलियाँ संजीवनी, गैमिनी, अमर और गोलाकार या पंजाबी |
| खो खो | पूरे भारत में | पीछा करने का खेल, एक पक्ष के नौ खिलाड़ी मैदान में |
| सगोल कांगजेई | मणिपुर | आधुनिक पोलो का पूर्वज माना जाता है |
| युबी लाकपी | मणिपुर | चिकना नारियल गोल तक ले जाना, रग्बी जैसा |
| हियांग तन्नाबा | मणिपुर | इंफाल घाटी की पारंपरिक नौका दौड़ |
| धोपखेल | असम | वसंत ऋतु का गेंद खेल |
| इन्सुकनावर | मिजोरम | छड़ धकेलना, शुद्ध शक्ति की परीक्षा |
| वल्लम काली | केरल | चुंदन वल्लम में सर्प नौका दौड़ |
| अत्या पत्या, लंगड़ी, लगोरी | महाराष्ट्र और दक्कन | गाँव के दल खेल, अब राज्य स्तर पर आयोजित |
| गिल्ली डंडा और पिट्ठू | उत्तर भारत | डंडा और गेंद, तथा सात पत्थरों का खेल |
त्योहार और पशु से जुड़े खेल
कुछ पारंपरिक प्रतियोगिताएँ किसी त्योहार और स्थान से बँधी हैं, और यही जोड़ी पूछी जाती है। तमिलनाडु का साँड़ पकड़ने का खेल जल्लीकट्टू पोंगल के समय होता है और मदुरै के निकट अलंगनल्लूर में सबसे प्रसिद्ध है। कंबाला कर्नाटक के तटीय जिलों में कीचड़ भरे धान के खेतों में दौड़ाई जाने वाली भैंसों की दौड़ है। केरल की सर्प नौका दौड़ों में सबसे प्रसिद्ध नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ 1952 से आलप्पुझा की पुन्नमदा झील पर होती है। पंजाब में लुधियाना के पास किला रायपुर खेल महोत्सव, जिसे ग्रामीण ओलंपिक कहा जाता है, 1933 से आयोजित हो रहा है। कबड्डी 1990 में बीजिंग के एशियाई खेलों में शामिल हुई, जहाँ भारत ने स्वर्ण पदक जीता।
खेलो इंडिया में पारंपरिक खेल
खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से देशज खेल राष्ट्रीय खेल कैलेंडर में आए। खेलो इंडिया यूथ गेम्स के 2021 संस्करण से पाँच देशज विधाएँ जोड़ी गईं: गतका, कलरीपयट्टू, थांग ता, मल्लखंब और योगासन। इन पाँचों को एक समूह के रूप में याद करें, क्योंकि प्रश्न सामान्यतः इस रूप में आता है कि इनमें से कौन शामिल नहीं था।
अंक तय करने वाले अंतर
मणिपुर को मन में अलग रखें, क्योंकि थांग ता, सरित सराक, चेइबी गद गा, सगोल कांगजेई और युबी लाकपी सभी उसी एक राज्य से हैं। तमिलनाडु को भी साफ रखें: सिलंबम लाठी से और कुत्तु वरिसै बिना हथियार। महाराष्ट्र के मर्दानी खेल को पंजाब के गतका से न मिलाएँ, क्योंकि अभ्यास में दोनों में छड़ी चलती है; मराठा कला की पहचान पट्टा है। अंत में याद रखें कि कलरीपयट्टू को सामान्यतः विश्व की सबसे प्राचीन जीवित युद्ध कलाओं में गिना जाता है, और यह कथन विकल्पों में उसी रूप में आता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से तीन प्रकार के प्रश्न बनते हैं। पहला और सबसे आम कला को राज्य से मिलाने का है, इसलिए जोड़ियाँ याद करें और सबसे पहले मणिपुर के समूह थांग ता, सरित सराक, चेइबी गद गा, सगोल कांगजेई और युबी लाकपी को एक साथ रखें। दूसरा हथियार या अखाड़ा पूछता है: कलरीपयट्टू के लिए उरुमी और कलरी, सिलंबम के लिए लाठी, गतका के लिए सोटी और फर्री, मर्दानी खेल के लिए पट्टा तथा मल्लखंब के लिए खंभा। तीसरा त्योहार या स्थान पूछता है: जल्लीकट्टू के साथ पोंगल और अलंगनल्लूर, कंबाला के साथ तटीय कर्नाटक, नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ के साथ 1952 से पुन्नमदा झील और ग्रामीण ओलंपिक के साथ 1933 से पंजाब का किला रायपुर। दो जाल बार बार आते हैं। मल्लखंब महाराष्ट्र से आता है पर मध्य प्रदेश का राज्य खेल है, और 2021 से खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जोड़े गए पाँच देशज खेल नकारात्मक रूप में पूछे जाते हैं, इसलिए गतका, कलरीपयट्टू, थांग ता, मल्लखंब और योगासन का समूह पक्का कर लें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कलरीपयट्टू | केरल; अखाड़ा कलरी; हथियार उरुमी |
|---|---|
| सिलंबम | तमिलनाडु; लंबी बाँस की लाठी |
| कुत्तु वरिसै | तमिलनाडु; बिना हथियार लड़ाई |
| थांग ता | मणिपुर; थांग तलवार, ता भाला |
| सरित सराक | मणिपुर; हुयेन लांगलोन की निरायुध शाखा |
| चेइबी गद गा | मणिपुर; चमड़े से ढकी लाठी और ढाल |
| मर्दानी खेल | महाराष्ट्र; पट्टा और विटा |
| मल्लखंब | महाराष्ट्र; 2013 से मध्य प्रदेश का राज्य खेल |
| गतका | पंजाब; सोटी और फर्री |
| थोड़ा | हिमाचल प्रदेश; दल पाशी और साथी |
| पारी खंडा | बिहार; तलवार और ढाल, छऊ नृत्य का आधार |
| मुष्टि युद्ध | वाराणसी, उत्तर प्रदेश; खाली मुक्कों से |
| इनबुआन कुश्ती | मिजोरम; घुटना मोड़ना वर्जित |
| वज्र मुष्टि | कर्नाटक; मैसूर दशहरा में नुकीले छल्ले से कुश्ती |
| सगोल कांगजेई | मणिपुर; पोलो का पूर्वज |
| नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ | पुन्नमदा झील, आलप्पुझा, केरल, 1952 से |
| ग्रामीण ओलंपिक | किला रायपुर, लुधियाना, पंजाब, 1933 से |
| एशियाई खेलों में कबड्डी | 1990 में बीजिंग में शामिल; भारत ने स्वर्ण जीता |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
विश्व की सबसे प्राचीन युद्ध कलाओं में गिना जाने वाला कलरीपयट्टू किस भारतीय राज्य से संबंधित है?
- A.तमिलनाडु
- B.केरल
- C.कर्नाटक
- D.मणिपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केरल
व्याख्या
सही उत्तर B, केरल है। कलरीपयट्टू केरल का है, इसका नाम कलरी से बना है जो उस अखाड़े को कहते हैं जहाँ यह सिखाया जाता है, और इसे सामान्यतः विश्व की सबसे प्राचीन जीवित युद्ध कलाओं में गिना जाता है। इसका विशिष्ट हथियार उरुमी नामक लंबी लचीली तलवार है और इसका प्रशिक्षण शरीर साधना से लकड़ी के हथियार, धातु के हथियार और खाली हाथ तक चलता है। विकल्प A गलत है क्योंकि तमिलनाडु से सिलंबम आता है, जो बाँस की लाठी से लड़ा जाता है, और कुत्तु वरिसै, जो निरायुध कला है। विकल्प C गलत है; कर्नाटक वज्र मुष्टि से जुड़ा है, जो मैसूर दशहरा में नुकीले छल्ले के साथ की जाने वाली कुश्ती है। विकल्प D गलत है क्योंकि मणिपुर से थांग ता, सरित सराक और चेइबी गद गा आते हैं। कला दक्षिण भारत की होने के कारण कुछ अभ्यर्थी तमिलनाडु चुन लेते हैं, इसलिए कलरीपयट्टू को केरल और कलरी शब्द से बाँध लें।
तमिलनाडु की मार्शल आर्ट सिलंबम मुख्य रूप से किस वस्तु से लड़ी जाती है?
- A.लचीली तलवार
- B.लंबी बाँस की लाठी
- C.भाला और ढाल
- D.नुकीला छल्ला
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लंबी बाँस की लाठी
व्याख्या
सही उत्तर B, लंबी बाँस की लाठी है। सिलंबम तमिलनाडु की लाठी कला है, और बाँस का वह टुकड़ा, जो सामान्यतः अभ्यासकर्ता की ऊँचाई के बराबर होता है, हथियारों की किसी भी सूची में इसकी पहचान है। विकल्प A गलत है क्योंकि लचीली तलवार उरुमी है और वह केरल के कलरीपयट्टू की है, जिसे प्रश्नों में सबसे अधिक सिलंबम के सामने रखा जाता है। विकल्प C गलत है; भाला मणिपुर के थांग ता का ता है और ढाल पंजाब के गतका में फर्री तथा बिहार के पारी खंडा में पारी के रूप में आती है। विकल्प D गलत है क्योंकि नुकीला छल्ला कर्नाटक के वज्र मुष्टि का है, जो मैसूर दशहरा में दिखाई जाने वाली कुश्ती है। चूँकि प्रश्नपत्र अक्सर केवल हथियार पूछते हैं, तकनीक के वर्णन की जगह कला और हथियार की जोड़ियाँ याद करें।
थांग ता, जिसे हुयेन लांगलोन भी कहा जाता है, किस राज्य की पारंपरिक युद्ध कला है?
- A.मिजोरम
- B.नागालैंड
- C.मणिपुर
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मणिपुर
व्याख्या
सही उत्तर C, मणिपुर है। थांग ता मणिपुर की युद्ध प्रणाली हुयेन लांगलोन का सशस्त्र भाग है, जिसमें थांग का अर्थ तलवार और ता का अर्थ भाला है, जबकि निरायुध भाग को सरित सराक कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मिजोरम इनबुआन कुश्ती से जुड़ा है, जो पेटी पकड़ कर की जाने वाली कुश्ती है जिसमें लात मारना वर्जित है और घुटना मोड़ा नहीं जा सकता, तथा इन्सुकनावर या छड़ धकेलने से भी। विकल्प B गलत है; परीक्षा की मानक सूची में कोई शास्त्रीय युद्ध कला नागालैंड से नहीं बाँधी गई है। विकल्प D गलत है क्योंकि असम से वसंत ऋतु में खेला जाने वाला पारंपरिक गेंद खेल धोपखेल आता है, थांग ता नहीं। इस अध्याय में मणिपुर सबसे घना राज्य है, क्योंकि चेइबी गद गा, सगोल कांगजेई, युबी लाकपी और हियांग तन्नाबा भी उसी के हैं।
सिख त्योहारों पर प्रदर्शित की जाने वाली मार्शल आर्ट गतका किस राज्य की है?
- A.हरियाणा
- B.पंजाब
- C.राजस्थान
- D.जम्मू और कश्मीर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पंजाब
व्याख्या
सही उत्तर B, पंजाब है। गतका पंजाब की युद्ध कला है, जो सोटी नामक लकड़ी की छड़ी और फर्री नामक ढाल से लड़ी जाती है, और होला मोहल्ला जैसे सिख त्योहारों पर इसका प्रदर्शन होता है। यह उन देशज विधाओं में भी था जिन्हें खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 2021 संस्करण से जोड़ा गया। विकल्प A गलत है; हरियाणा खेल में कुश्ती और मुक्केबाजी की अकादमियों के लिए जाना जाता है, पर इस सूची में उसकी कोई अलग पारंपरिक युद्ध कला नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि राजस्थान राजपूत तलवार परंपरा और खंडा जैसे हथियार से जुड़ा है, पर गतका राजस्थानी कला नहीं है। विकल्प D गलत है; परीक्षा की मानक सूची में जम्मू और कश्मीर को कोई युद्ध कला नहीं दी गई है। गतका की छड़ी को महाराष्ट्र के मर्दानी खेल के अभ्यास की छड़ी से न मिलाएँ, जिसकी पहचान पट्टा है।
तीरंदाजी पर आधारित और पाशी तथा साथी नामक दलों के बीच खेला जाने वाला पारंपरिक खेल थोड़ा किस राज्य में होता है?
- A.उत्तराखंड
- B.सिक्किम
- C.हिमाचल प्रदेश
- D.अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हिमाचल प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर C, हिमाचल प्रदेश है। थोड़ा हिमाचल प्रदेश की तीरंदाजी आधारित प्रतियोगिता है, जो बैसाखी के आसपास होती है और जिसमें पाशी तथा साथी नामक दो दल भोथरे लकड़ी के तीर विपक्षी खिलाड़ियों के घुटने के नीचे मारते हैं, और साथ में नृत्य तथा ढोल चलते रहते हैं। विकल्प A गलत है; उत्तराखंड पश्चिमी हिमालय की संस्कृति साझा करता है पर थोड़ा हर मानक सूची में हिमाचल प्रदेश से बाँधा गया है। विकल्प B गलत है क्योंकि सिक्किम में बौद्ध समुदायों के बीच तीरंदाजी लोकप्रिय खेल है, पर थोड़ा नाम की परंपरा सिक्किमी नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश और सामान्यतः पूर्वोत्तर की तीरंदाजी थोड़ा के रूप में संगठित नहीं है। दलों के नाम पाशी और साथी इस प्रश्न को पहचानने का सबसे पक्का तरीका हैं।
पट्टा और विटा से पहचानी जाने वाली मार्शल आर्ट मर्दानी खेल किस राज्य में विकसित हुई?
- A.महाराष्ट्र
- B.गुजरात
- C.मध्य प्रदेश
- D.गोवा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. महाराष्ट्र
व्याख्या
सही उत्तर A, महाराष्ट्र है। मर्दानी खेल महाराष्ट्र की मराठा सशस्त्र युद्ध कला है और इसकी पहचान पट्टा से होती है, जो एक सीधी तलवार है और दस्ताने के साथ जुड़ी रहती है तथा अग्रबाहु को ढकती है, और विटा से, जो रस्सी बँधा भाला है। यह दक्कन के पहाड़ी किलों की युद्ध पद्धतियों से निकली। विकल्प B गलत है; गुजरात में लाठी नृत्य और लोक प्रतियोगिताएँ हैं पर मर्दानी खेल वहाँ नहीं रखा जाता। विकल्प C गलत है और यही उपयोगी भ्रम है, क्योंकि इस अध्याय में मध्य प्रदेश केवल उस राज्य के रूप में आता है जिसने 2013 में मल्लखंब को अपना राज्य खेल घोषित किया। विकल्प D गलत है क्योंकि परीक्षा की सूची में गोवा की इस नाम की कोई अलग कला नहीं है। पट्टा और महाराष्ट्र की जोड़ी पक्की कर लें।
इनबुआन, जिसमें लात मारना वर्जित है और घुटना मोड़ा नहीं जा सकता, किस राज्य की पारंपरिक कुश्ती है?
- A.मेघालय
- B.मिजोरम
- C.त्रिपुरा
- D.मणिपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मिजोरम
व्याख्या
सही उत्तर B, मिजोरम है। इनबुआन मिजोरम की पेटी कुश्ती है, जिसमें पहलवान विपक्षी की कमर पर बँधी पेटी पकड़ कर उसे जमीन से उठाना होता है; लात मारना वर्जित है, घुटना मोड़ा नहीं जा सकता और घेरे से बाहर पैर रखने पर मुकाबला हार जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि मेघालय तीरंदाजी प्रतियोगिताओं के लिए जाना जाता है, इनबुआन के लिए नहीं। विकल्प C गलत है; त्रिपुरा के अपने लोक खेल हैं पर इनबुआन उनमें नहीं है। विकल्प D गलत है और यही सबसे तेज भ्रम है, क्योंकि मणिपुर की अपनी लंबी कुश्ती परंपरा मुकना है, और जो अभ्यर्थी केवल इतना याद रखते हैं कि मामला पूर्वोत्तर का है वे मणिपुर चुन लेते हैं। मिजोरम से इन्सुकनावर यानी छड़ धकेलने की प्रतियोगिता भी आती है, इसलिए दोनों मिजो प्रविष्टियाँ साथ रखें।
खंभे पर की जाने वाली कुश्ती और व्यायाम की विधा मल्लखंब को 2013 में किस राज्य ने अपना राज्य खेल घोषित किया?
- A.महाराष्ट्र
- B.छत्तीसगढ़
- C.मध्य प्रदेश
- D.राजस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. मध्य प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर C, मध्य प्रदेश है। मध्य प्रदेश ने 2013 में मल्लखंब को अपना राज्य खेल घोषित किया, और यह प्रश्न बार बार आता है क्योंकि यह कला महाराष्ट्र से जुड़ी है, जहाँ उन्नीसवीं शताब्दी में पहलवानों के प्रशिक्षण के रूप में इसका पुनरुद्धार हुआ। इसलिए विकल्प A ही जाल है: महाराष्ट्र कला का घर है पर उसने इसे राज्य खेल घोषित नहीं किया। विकल्प B गलत है; मानक सूचियों में छत्तीसगढ़ की ऐसी कोई घोषणा दर्ज नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्थान मल्लखंब से जुड़ा ही नहीं है। ऐसे प्रश्नों में कथन ध्यान से पढ़ें, क्योंकि प्रश्न बनाने वाला यह भी पूछ सकता है कि कला कहाँ से आई और यह भी कि किस राज्य ने उसे अपनाया, और दोनों उत्तर अलग हैं। मल्लखंब 2021 से खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जोड़े गए देशज खेलों में भी था।
मणिपुर का पारंपरिक खेल सगोल कांगजेई किस आधुनिक खेल का पूर्वज माना जाता है?
- A.हॉकी
- B.पोलो
- C.रग्बी
- D.तीरंदाजी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पोलो
व्याख्या
सही उत्तर B, पोलो है। सगोल कांगजेई मणिपुर का वह खेल है जो टट्टुओं पर छड़ी और गेंद से खेला जाता है और इसे व्यापक रूप से आधुनिक पोलो का पूर्वज माना जाता है, जिसे उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश अधिकारियों ने मणिपुर और कछार में अपनाया और वहाँ से यह विश्व में फैला; इंफाल का मापाल कांगजेइबुंग मैदान विश्व के सबसे पुराने पोलो मैदानों में है। विकल्प A गलत है क्योंकि मैदानी हॉकी का विकास अलग हुआ और उसका ऐसा मणिपुरी संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है, हालाँकि यह उचित अनुमान लगता है, क्योंकि रग्बी जैसा मणिपुरी खेल युबी लाकपी है, जिसमें खिलाड़ी चिकना नारियल गोल तक ले जाते हैं। विकल्प D गलत है; पहाड़ों की तीरंदाजी परंपरा हिमाचल प्रदेश का थोड़ा है। मणिपुरी में सगोल का अर्थ टट्टू है, जो उत्तर याद रखने की उपयोगी कुंजी है।
केरल की सर्प नौका दौड़ों में सबसे प्रसिद्ध नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ किस झील पर होती है?
- A.कुमारकोम में वेम्बनाड झील
- B.कोल्लम में अष्टमुडी झील
- C.आलप्पुझा में पुन्नमदा झील
- D.शास्तमकोट्टा झील
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. आलप्पुझा में पुन्नमदा झील
व्याख्या
सही उत्तर C, आलप्पुझा में पुन्नमदा झील है। नेहरू ट्रॉफी नौका दौड़ 1952 से आलप्पुझा की पुन्नमदा झील पर होती है, जब जवाहरलाल नेहरू ने वहाँ एक दौड़ देखने के बाद इसकी शुरुआत हुई, और इसमें चुंदन वल्लम कहलाने वाली लंबी सर्प नौकाएँ चलती हैं। विकल्प A दिए गए रूप में गलत है, क्योंकि पुन्नमदा वेम्बनाड के विस्तृत जल तंत्र का हिस्सा होते हुए भी यह दौड़ कुमारकोम में नहीं होती और प्रश्नपत्र पुन्नमदा नाम की अपेक्षा करता है। विकल्प B गलत है; कोल्लम की अष्टमुडी झील पर अपनी नौका दौड़ें होती हैं पर नेहरू ट्रॉफी नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि शास्तमकोट्टा मीठे पानी की झील और रामसर स्थल है, इस दौड़ का स्थल नहीं। केरल की नौका दौड़ का सामान्य नाम वल्लम काली है और नेहरू ट्रॉफी उसी परंपरा का एक आयोजन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत की सबसे प्राचीन मार्शल आर्ट कौन सी है और वह कहाँ की है?
केरल का कलरीपयट्टू सामान्यतः विश्व की सबसे प्राचीन जीवित युद्ध कलाओं में गिना जाता है। इसका अभ्यास कलरी नामक अखाड़े में होता है, इसे शरीर साधना से लकड़ी के हथियार, धातु के हथियार और खाली हाथ तक चरणों में सिखाया जाता है, और इसका सबसे प्रसिद्ध हथियार उरुमी नामक लचीली तलवार है।
मणिपुर से कौन कौन सी मार्शल आर्ट आती हैं?
थांग ता, जिसे हुयेन लांगलोन भी कहा जाता है और जिसमें थांग तलवार तथा ता भाला है; सरित सराक, उसकी निरायुध शाखा; और चेइबी गद गा, जो चमड़े से ढकी लाठी और ढाल से लड़ा जाता है। मणिपुर से पारंपरिक खेल सगोल कांगजेई, युबी लाकपी और नौका दौड़ हियांग तन्नाबा भी आते हैं।
मल्लखंब किस राज्य का राज्य खेल है?
मध्य प्रदेश ने 2013 में मल्लखंब को अपना राज्य खेल घोषित किया, जबकि यह कला महाराष्ट्र से जुड़ी है। कला के मूल राज्य और उसे अपनाने वाले राज्य के बीच यही अंतर परीक्षा का मानक जाल है।
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कौन से पारंपरिक खेल जोड़े गए?
वर्ष 2021 के संस्करण से पाँच देशज विधाएँ जोड़ी गईं: गतका, कलरीपयट्टू, थांग ता, मल्लखंब और योगासन। प्रश्न सामान्यतः नकारात्मक रूप में आता है, अर्थात इनमें से कौन शामिल नहीं था।
सिलंबम और कुत्तु वरिसै में क्या अंतर है?
दोनों तमिलनाडु के हैं। सिलंबम लंबी बाँस की लाठी से लड़ा जाता है और यह हथियार आधारित कला है, जबकि कुत्तु वरिसै खाली हाथ की प्रणाली है, जिसमें बिना किसी हथियार के प्रहार, पकड़ और जकड़ का प्रयोग होता है।
जल्लीकट्टू और कंबाला कहाँ होते हैं?
जल्लीकट्टू तमिलनाडु का साँड़ पकड़ने का खेल है, जो पोंगल के समय होता है और मदुरै के निकट अलंगनल्लूर में सबसे प्रसिद्ध है। कंबाला कर्नाटक के तटीय जिलों की भैंस दौड़ है, जो कीचड़ भरे धान के खेतों में दौड़ाई जाती है।
स्रोत
- भारतीय युद्ध कलाएँ और पारंपरिक प्रदर्शन परंपराएँ — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
- खेलो इंडिया यूथ गेम्स, देशज खेल — युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, भारत सरकार
- राज्यों की लोक और पारंपरिक प्रदर्शन विधाएँ — संगीत नाटक अकादमी





