भारत के लोक नृत्य: राज्यवार सूची, पर्व और तथ्य
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत के लोक नृत्यों के सम्पूर्ण नोट्स: राज्यवार नृत्य, उनके पर्व, वाद्य यंत्र, समुदाय तथा यूनेस्को सूची में शामिल लोक परम्पराएँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

लोक नृत्य फसल, मेले और पर्व की रात का नृत्य है। यह किसी लिखित शास्त्र से नहीं, बल्कि बड़ों को देखकर सीखा जाता है और किसी एकल कलाकार का नहीं, पूरे समुदाय का होता है। परीक्षार्थी के लिए कला एवं संस्कृति खंड का यह सबसे अधिक अंक दिलाने वाला भाग है, क्योंकि प्रश्न प्रायः एक ही रूप में आता है: नृत्य का नाम देकर राज्य पूछा जाता है, या राज्य देकर नृत्य। ये नोट्स उन्हीं जोड़ियों को पक्का करते हैं, हर नृत्य के साथ उसका पर्व और वाद्य जोड़ते हैं, और लोक नृत्य को उस शास्त्रीय नृत्य से अलग करते हैं जिसे प्रश्न बनाने वाले विकल्पों में मिला देते हैं।
लोक नृत्य, जनजातीय नृत्य और शास्त्रीय नृत्य
शास्त्रीय नृत्य लिखित व्याकरण का पालन करता है, मुख्यतः भरत मुनि के नाट्यशास्त्र का, और गुरु से निश्चित प्रस्तुति क्रम में सीखा जाता है। संगीत नाटक अकादमी आठ शास्त्रीय शैलियों को मान्यता देती है: भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी, मोहिनीअट्टम और सत्रीया। लोक नृत्य का ऐसा कोई लिखित शास्त्र नहीं होता। वह ऋतु, फसल या देवता से जुड़ा होता है, समूह में किया जाता है और इसलिए जीवित रहता है क्योंकि गाँव उसे नाचता रहता है। जनजातीय नृत्य किसी एक जनजाति का लोक नृत्य होता है, जैसे बस्तर के मारिया समुदाय का गौर नृत्य। परीक्षा का सबसे आम जाल यह है कि किसी लोक नाट्य रूप को शास्त्रीय नृत्य बताकर विकल्प में रखा जाता है: कर्नाटक का यक्षगान, गुजरात और राजस्थान का भवाई, उत्तर प्रदेश की नौटंकी, बिहार का बिदेसिया और महाराष्ट्र का तमाशा — ये सब लोक नाट्य हैं, शास्त्रीय नृत्य नहीं। छऊ इन दोनों के बीच का रूप है और प्रायः अर्ध शास्त्रीय कहा जाता है।
राज्यवार लोक नृत्य जो याद रखने चाहिए
| राज्य | लोक नृत्य | अवसर या विशेषता |
|---|---|---|
| पंजाब | भांगड़ा, गिद्दा, झूमर, सम्मी | भांगड़ा बैसाखी पर पुरुषों का फसल नृत्य है, ढोल पर; गिद्दा स्त्रियों का |
| राजस्थान | घूमर, कालबेलिया, तेरह ताली, कच्छी घोड़ी, गैर | घूमर घाघरे में गोल घूमकर किया जाता है; तेरह ताली बैठकर, शरीर पर मंजीरे बाँधकर |
| गुजरात | गरबा, डांडिया रास, टिप्पणी | नवरात्रि में मिट्टी के दीप पात्र के चारों ओर गरबा; डांडिया रास में जोड़ी छड़ें |
| महाराष्ट्र | लावणी, कोली, धनगरी गजा | लावणी ढोलकी पर होती है और तमाशा मंच से जुड़ी है; कोली मछुआरों का नृत्य |
| उत्तर प्रदेश | चरकुला, रासलीला, नौटंकी, ख्याल | चरकुला में ब्रज की स्त्री सिर पर दीपों का बड़ा चक्र सँभालती है |
| बिहार | जट-जटिन, झिझिया, पाइका, बिदेसिया | झिझिया दशहरे के दिनों में छिद्रित घड़ों और दीपों के साथ |
| झारखंड | सरायकेला छऊ, पाइका, झूमर | सरायकेला छऊ मुखौटा नृत्य है, जो वहाँ के राजपरिवार के संरक्षण में निखरा |
| पश्चिम बंगाल | पुरुलिया छऊ, गंभीरा, झूमुर, बाउल | पुरुलिया छऊ में बड़े चित्रित मुखौटे और महिषासुर मर्दिनी के प्रसंग |
| ओडिशा | मयूरभंज छऊ, घुमुरा, दालखाई | मयूरभंज छऊ वह शैली है जो बिना मुखौटे के की जाती है |
| छत्तीसगढ़ | पंथी, राउत नाचा, गौर मारिया, गेंड़ी | पंथी सतनामी समुदाय का है; पंडवानी नृत्य नहीं, कथा गायन है |
| मध्य प्रदेश | मटकी, तेरह ताली, बधाई, ग्रिदा | मालवा की स्त्रियाँ सिर पर मटकी रखकर मटकी नृत्य करती हैं |
| हरियाणा | खोरिया, धमाल, लूर, फाग | धमाल चाँदनी रातों में इसी नाम के बड़े ढोल पर |
| हिमाचल प्रदेश | नाटी, नामजेन, किन्नौरी नाटी | नाटी कुल्लू और पहाड़ों की लंबी शृंखला में की जाती है |
| उत्तराखंड | छोलिया, लंगवीर नृत्य, झोड़ा, रम्माण | छोलिया कुमाऊँ की बारातों का तलवार नृत्य है |
| जम्मू और कश्मीर | रउफ, दमहाल, हिकत, भांड पाथर | रउफ स्त्रियाँ पंक्तियों में करती हैं; दमहाल वट्टल समुदाय के पुरुष ऊँची टोपी पहनकर |
| कर्नाटक | डोल्लू कुनिता, वीरगासे, यक्षगान | डोल्लू कुनिता कुरुबा गड़रिया समुदाय का ढोल नृत्य है |
| तमिलनाडु | करगाट्टम, कोलाट्टम, कुम्मी, ओयिलाट्टम | करगाट्टम में सजा हुआ घड़ा सिर पर रखकर वर्षा देवी को अर्पित किया जाता है |
| केरल | थेय्यम, पडयनी, मुडियेट्टु, तिरुवातिराकली | थेय्यम अनुष्ठान है जिसमें कलाकार को ही देवता मानकर पूजा जाता है |
| आंध्र प्रदेश | ढिमसा, वीरनाट्यम, बुट्टा बोम्मालु | ढिमसा अराकू की पहाड़ियों का जनजातीय नृत्य है |
| गोवा | फुगड़ी, देखनी, ढालो | फुगड़ी स्त्रियाँ घेरे में करती हैं, लय बढ़ती जाती है |
पूर्वोत्तर और हिमालय की पट्टी
पूर्वोत्तर राज्यों से अपने अलग प्रश्न बनते हैं और वे बार-बार दोहराए जाते हैं। बिहू असम का नृत्य है, जो अप्रैल में रंगाली बिहू पर ढोल, भैंस के सींग से बनी पेपा और गोगोना के साथ किया जाता है। मिजोरम का चेराव बाँस नृत्य है, जिसमें कलाकार ताल पर टकराती लंबी बाँस की छड़ों के बीच पैर रखते हैं। त्रिपुरा का होजागिरी रियांग समुदाय की स्त्रियाँ मिट्टी के घड़े पर संतुलन बनाकर, सिर पर बोतल और दीप रखकर करती हैं। सिक्किम का सिंघी छाम कंचनजंघा का हिम सिंह नृत्य है। बर्दो छाम अरुणाचल प्रदेश के शेरडुकपेन का है और चांग लो, जिसे सुआ लुआ भी कहते हैं, नागालैंड के चांग समुदाय का। मेघालय में खासी लोग स्मित में का शाद नोंगक्रेम धन्यवाद नृत्य करते हैं, जबकि गारो फसल के अंत में वांगला मनाते हैं, जिसे सौ ढोलों का उत्सव कहा जाता है। मणिपुर में युद्ध कला से जुड़ा थांग-ता और ढोल नृत्य पुंग चोलोम मिलते हैं, और लाइ हरओबा उसका प्राचीन अनुष्ठान पर्व है।
यूनेस्को सूची में शामिल लोक परम्पराएँ
भारत की कई लोक परम्पराएँ यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में हैं और उनका वर्ष पूछा जाता है। उत्तराखंड के चमोली का रम्माण 2009 में शामिल हुआ। वर्ष 2010 में तीन नाम जुड़े: झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा का मुखौटा नृत्य छऊ; राजस्थान के कालबेलिया समुदाय के गीत और नृत्य; तथा केरल का अनुष्ठान नाट्य मुडियेट्टु। मणिपुर का संकीर्तन 2013 में और गुजरात का गरबा 2023 में सूची में आया।
पर्व, वाद्य और समुदाय
- फसल और नववर्ष के नृत्य: बैसाखी पर भांगड़ा, रंगाली बिहू पर बिहू, गारो फसल के बाद वांगला।
- नवरात्रि के नृत्य: गुजरात के गरबा और डांडिया रास, दीप पात्र के चारों ओर।
- संतुलन के नृत्य: ब्रज का चरकुला, मालवा की मटकी, तमिलनाडु का करगाट्टम, राजस्थान का भवाई और चरी।
- युद्ध कला से जुड़े नृत्य: उत्तराखंड का छोलिया, मणिपुर का थांग-ता, ओडिशा और झारखंड का पाइका।
- ऐसे अनुष्ठान जिनमें कलाकार ही देवता बन जाता है: केरल के थेय्यम और मुडियेट्टु।
- समुदाय से जुड़े नृत्य: सपेरों का कालबेलिया, कुरुबा का डोल्लू कुनिता, सतनामी का पंथी, रियांग का होजागिरी।
परीक्षा की दृष्टि से
परीक्षा में यह विषय जोड़ी मिलाने के रूप में आता है: नृत्य से राज्य, या राज्य से नृत्य। तीन जाल बार-बार दोहराए जाते हैं। पहला, घूमर को गुजरात और गरबा को राजस्थान के साथ जोड़ दिया जाता है; याद रखें घूमर राजस्थान का और गरबा गुजरात का है। दूसरा, यक्षगान या भवाई जैसे लोक नाट्य को शास्त्रीय नृत्य बताकर विकल्प में रखा जाता है, जबकि शास्त्रीय केवल संगीत नाटक अकादमी की आठ शैलियाँ हैं। तीसरा, छऊ की पुरुलिया, सरायकेला और मयूरभंज शैलियों के राज्य आपस में बदल दिए जाते हैं। यूनेस्को के वर्ष और हर नृत्य से जुड़ा समुदाय भी याद रखें, क्योंकि प्रश्न प्रायः राज्य के बजाय समुदाय का नाम देता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| असम | बिहू, अप्रैल में रंगाली बिहू पर ढोल, पेपा और गोगोना के साथ |
|---|---|
| मिजोरम | चेराव, बाँस नृत्य |
| त्रिपुरा | होजागिरी, रियांग स्त्रियाँ मिट्टी के घड़े पर |
| मेघालय | खासी का का शाद नोंगक्रेम और गारो का वांगला |
| छऊ की शैलियाँ | पुरुलिया (पश्चिम बंगाल), सरायकेला (झारखंड), मयूरभंज (ओडिशा, बिना मुखौटा) |
| यूनेस्को 2010 | छऊ, कालबेलिया और मुडियेट्टु एक ही वर्ष में |
| यूनेस्को 2009 | उत्तराखंड के चमोली का रम्माण |
| यूनेस्को 2023 | गुजरात का गरबा |
| पंजाब | पुरुषों का भांगड़ा और स्त्रियों का गिद्दा, दोनों बैसाखी पर |
| कर्नाटक | डोल्लू कुनिता, कुरुबा समुदाय का ढोल नृत्य |
| केरल के अनुष्ठान नृत्य | थेय्यम, पडयनी और मुडियेट्टु |
| लोक नाट्य, शास्त्रीय नहीं | यक्षगान, भवाई, नौटंकी, बिदेसिया, तमाशा |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बिहू किस भारतीय राज्य का प्रसिद्ध लोक नृत्य है?
- A.असम
- B.मणिपुर
- C.त्रिपुरा
- D.नागालैंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. असम
व्याख्या
सही उत्तर A, असम है। बिहू मुख्यतः रंगाली या बोहाग बिहू पर किया जाता है, जो अप्रैल में पड़ने वाला असमिया नववर्ष का पर्व है और बुवाई का मौसम खोलता है। युवक-युवतियाँ पंक्तियों में ढोल, भैंस के सींग से बनी पेपा, गोगोना और ताल के साथ तेज कमर संचालन और छोटे कदमों से नृत्य करते हैं।
विकल्प B, मणिपुर का प्राचीन अनुष्ठान पर्व लाइ हरओबा है और वहाँ ढोल नृत्य पुंग चोलोम मिलता है, जबकि उसकी रास परम्परा आठ शास्त्रीय शैलियों में गिनी जाती है। विकल्प C, त्रिपुरा होजागिरी का घर है, जिसे रियांग स्त्रियाँ मिट्टी के घड़े पर संतुलन बनाकर करती हैं, और गरिया नृत्य का भी। विकल्प D, नागालैंड में चांग समुदाय का चांग लो तथा जेलियांग नृत्य होते हैं, जो हॉर्नबिल उत्सव में दिखाए जाते हैं। चारों पूर्वोत्तर राज्य हैं, इसीलिए प्रश्न बनाने वाला इन्हें साथ रखता है, पर बिहू केवल असम का है।
घूमर किस राज्य का पारंपरिक लोक नृत्य है?
- A.गुजरात
- B.राजस्थान
- C.हरियाणा
- D.मध्य प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर B, राजस्थान है। घूमर में स्त्रियाँ चौड़े घाघरे में घेरा बनाकर चलती हैं और अपनी जगह पर घूमती हैं; घाघरे के इसी घुमाव से नृत्य का नाम पड़ा। यह भील समुदाय से विकसित हुआ और राजस्थान के राजपूत घरानों ने इसे अपनाया, जहाँ यह विवाह तथा तीज और गणगौर जैसे पर्वों पर किया जाता है।
विकल्प A, गुजरात गरबा और डांडिया रास का घर है, जो नवरात्रि में होते हैं, और यही सबसे आम भ्रम है क्योंकि दोनों घेरे में चौड़े घाघरे पहनकर किए जाने वाले स्त्री नृत्य हैं। विकल्प C, हरियाणा में खोरिया, धमाल, लूर और फाग होते हैं, और वहाँ भी घूमर नाम का एक रूप है, पर परीक्षा में पूछा जाने वाला घूमर राजस्थानी ही है। विकल्प D, मध्य प्रदेश में मटकी, तेरह ताली, बधाई और ग्रिदा मिलते हैं। जोड़ी इस तरह पक्की करें: घूमर राजस्थान, गरबा गुजरात।
ढोलकी की ताल पर की जाने वाली लावणी किस राज्य से जुड़ी है?
- A.गोवा
- B.कर्नाटक
- C.महाराष्ट्र
- D.छत्तीसगढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. महाराष्ट्र
व्याख्या
सही उत्तर C, महाराष्ट्र है। लावणी में गीत और नृत्य साथ चलते हैं और इसे मुख्यतः स्त्रियाँ नौ गज की साड़ी में ढोलकी की तीखी ताल पर प्रस्तुत करती हैं। यह महाराष्ट्र के लोक नाट्य तमाशा के साथ विकसित हुई और इसके पद भक्ति से लेकर तीखे व्यंग्य तक फैले हैं।
विकल्प A, गोवा में फुगड़ी, देखनी और ढालो होते हैं तथा गीत रूप मांडो, जो सब लावणी से धीमे और कोमल हैं। विकल्प B, कर्नाटक डोल्लू कुनिता, वीरगासे और लोक नाट्य यक्षगान का घर है; यक्षगान यहाँ बार-बार भ्रमित करने वाला विकल्प बनता है क्योंकि वह भी मंच रूप है। विकल्प D, छत्तीसगढ़ में सतनामी समुदाय का पंथी, राउत नाचा, बस्तर के गौर मारिया और गेंड़ी तथा कथा गायन पंडवानी मिलते हैं। ढोलकी और तमाशा मिलकर लावणी को महाराष्ट्र का सिद्ध कर देते हैं।
छऊ नृत्य की तीन शैलियों में से सरायकेला शैली किस राज्य की है?
- A.ओडिशा
- B.पश्चिम बंगाल
- C.झारखंड
- D.बिहार
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. झारखंड
व्याख्या
सही उत्तर C, झारखंड है। छऊ पूर्वी भारत का युद्ध शैली का मुखौटा नृत्य है जिसकी तीन मान्य शैलियाँ हैं, और सरायकेला छऊ का नाम झारखंड की पूर्व रियासत सरायकेला से पड़ा, जहाँ राजपरिवार ने इसे सिखाया और निखारा। इसके मुखौटे छोटे और चिकने होते हैं तथा नृत्य कच्चे युद्ध कौशल के बजाय शैलीबद्ध भाव पर टिकता है।
विकल्प A, ओडिशा मयूरभंज छऊ का घर है, वही एक शैली जो बिना मुखौटे के होती है, इसलिए भाव चेहरा स्वयं दिखाता है। विकल्प B, पश्चिम बंगाल पुरुलिया छऊ का घर है, जिसमें बड़े चटक रंगों वाले मुखौटे होते हैं और महिषासुर मर्दिनी जैसे युद्ध प्रसंग दिखाए जाते हैं। विकल्प D, बिहार में जट-जटिन, झिझिया, पाइका और लोक नाट्य बिदेसिया मिलते हैं, छऊ की कोई शैली नहीं। तीनों शैलियों को साथ मिलाकर यूनेस्को ने 2010 में सूची में लिया।
बाँस नृत्य के नाम से प्रसिद्ध चेराव किस राज्य का लोक नृत्य है?
- A.मिजोरम
- B.मेघालय
- C.सिक्किम
- D.अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मिजोरम
व्याख्या
सही उत्तर A, मिजोरम है। चेराव में पुरुष आमने-सामने बैठकर लंबी बाँस की छड़ें आड़ी पकड़ते हैं और एक निश्चित ताल पर उन्हें टकराते हैं, जबकि मिज़ो पुआन पहने स्त्रियाँ बंद होती छड़ों के बीच से पैर निकालती और रखती जाती हैं, बिना पैर फँसाए। यह मिजोरम का सबसे प्रसिद्ध नृत्य है और चपचार कुट पर्व पर दिखाया जाता है।
विकल्प B, मेघालय में खासी का का शाद नोंगक्रेम स्मित में और गारो का वांगला होता है, जिसे सौ ढोलों का उत्सव कहा जाता है। विकल्प C, सिक्किम में कंचनजंघा को समर्पित हिम सिंह नृत्य सिंघी छाम और मारुनी मिलते हैं। विकल्प D, अरुणाचल प्रदेश में शेरडुकपेन का बर्दो छाम और आदि समुदाय का पोनुंग होता है। प्रश्न में बाँस की छड़ों का उल्लेख हर बार चेराव और इसलिए मिजोरम की ओर ले जाता है।
मिट्टी के घड़े पर संतुलन बनाकर स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला होजागिरी किस राज्य का है?
- A.नागालैंड
- B.त्रिपुरा
- C.मणिपुर
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. त्रिपुरा
व्याख्या
सही उत्तर B, त्रिपुरा है। होजागिरी त्रिपुरा के रियांग समुदाय की स्त्रियाँ करती हैं, जो मिट्टी के घड़े पर संतुलन बनाए रखती हैं और सिर पर जलते दीप वाली बोतल रखकर केवल ऊपरी शरीर को मोड़ती हैं, पैर स्थिर रहते हैं। यह दुर्गा पूजा के बाद आने वाले होजागिरी या लक्ष्मी पूजा के पर्व पर किया जाता है।
विकल्प A, नागालैंड में चांग समुदाय का चांग लो तथा हॉर्नबिल उत्सव में दिखाए जाने वाले युद्ध नृत्य होते हैं, जिनमें संतुलन का ऐसा कौशल नहीं होता। विकल्प C, मणिपुर में युद्ध कला थांग-ता, ढोल नृत्य पुंग चोलोम और अनुष्ठान पर्व लाइ हरओबा मिलते हैं। विकल्प D, असम में बिहू और चाय बागान समुदायों का झूमुर होता है। घड़ा, बोतल और दीप मिलकर होजागिरी की पहचान हैं, और इसके साथ जो समुदाय पूछा जाता है वह रियांग है।
कुरुबा समुदाय का ओजपूर्ण ढोल नृत्य डोल्लू कुनिता किस राज्य का लोक नृत्य है?
- A.तेलंगाना
- B.तमिलनाडु
- C.कर्नाटक
- D.केरल
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. कर्नाटक
व्याख्या
सही उत्तर C, कर्नाटक है। डोल्लू कुनिता में कलाकार गले में डोल्लू नाम का बड़ा ढोल लटकाकर उसे बजाते हुए तेज रचनाओं में घूमते हैं, और यह नृत्य कुरुबा गड़रिया समुदाय का है, जो इसे अपने देवता बीरेश्वर की सेवा में करता है। कुनिता शब्द का अर्थ ही देवता को अर्पित अनुष्ठान नृत्य है, और कर्नाटक में वीरभद्र के उपासकों का वीरगासे तथा लोक नाट्य यक्षगान भी मिलते हैं।
विकल्प A, तेलंगाना में पेरिनी शिवतांडवम, स्त्रियों का बतुकम्मा और बंजारा समुदाय का लंबाड़ी नृत्य होते हैं। विकल्प B, तमिलनाडु में सिर पर सजा घड़ा रखकर किया जाने वाला करगाट्टम, छड़ों वाला कोलाट्टम, कुम्मी और ओयिलाट्टम मिलते हैं। विकल्प D, केरल में अनुष्ठान रूप थेय्यम, पडयनी और मुडियेट्टु तथा ओणम पर स्त्रियों का तिरुवातिराकली होते हैं। चारों दक्षिण भारत के राज्य हैं, इसीलिए इन्हें विकल्पों में साथ रखा जाता है, पर डोल्लू नाम का ढोल और कुरुबा गड़रिया समुदाय मिलकर केवल कर्नाटक की ओर संकेत करते हैं।
यूनेस्को द्वारा 2010 में सूचीबद्ध कालबेलिया नृत्य किस राज्य का है?
- A.राजस्थान
- B.गुजरात
- C.पंजाब
- D.हरियाणा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. राजस्थान
व्याख्या
सही उत्तर A, राजस्थान है। कालबेलिया राजस्थान के कालबेलिया समुदाय की गीत और नृत्य परम्परा है, जो परंपरागत रूप से सपेरे रहे हैं, और काले लहराते घाघरे में नर्तकी बीन तथा खंजरी की ध्वनि पर सर्प की गति का अनुकरण करती है। यूनेस्को ने कालबेलिया के गीत और नृत्य को 2010 में मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया, उसी वर्ष जिसमें छऊ और मुडियेट्टु शामिल हुए।
विकल्प B, गुजरात का गरबा बहुत बाद में, 2023 में सूची में आया। विकल्प C, पंजाब के भांगड़ा और गिद्दा इस सूची में नहीं हैं, यद्यपि पंजाब के जंडियाला गुरु के ठठेरों का शिल्प 2014 में शामिल हुआ था। विकल्प D, हरियाणा के खोरिया, धमाल और लूर की कोई यूनेस्को प्रविष्टि नहीं है। 2010 का वर्ष छऊ, कालबेलिया और मुडियेट्टु तीनों के लिए एक साथ याद रखें।
बैसाखी के फसल पर्व पर ढोल की ताल पर किया जाने वाला भांगड़ा किस राज्य का लोक नृत्य है?
- A.हिमाचल प्रदेश
- B.जम्मू और कश्मीर
- C.पंजाब
- D.उत्तराखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पंजाब
व्याख्या
सही उत्तर C, पंजाब है। भांगड़ा पंजाब की फसल का पुरुष नृत्य है, जो अप्रैल में बैसाखी पर ढोल की ताल पर छलांगों, कंधों की गति और उठी हुई भुजाओं के साथ किया जाता है। इसका स्त्री रूप गिद्दा है, जिसमें कदमों के बीच बोलियाँ गाई और तालियों पर कही जाती हैं।
विकल्प A, हिमाचल प्रदेश में कुल्लू और पहाड़ी जिलों की लंबी शृंखला वाली नाटी तथा नामजेन होते हैं। विकल्प B, जम्मू और कश्मीर में आमने-सामने पंक्तियों में स्त्रियों का रउफ, ऊँची टोपी पहने वट्टल पुरुषों का दमहाल, हिकत और लोक नाट्य भांड पाथर मिलते हैं। विकल्प D, उत्तराखंड में कुमाऊँ की बारातों का तलवार नृत्य छोलिया, झोड़ा, लंगवीर नृत्य तथा चमोली का रम्माण पर्व है, जिसे यूनेस्को ने 2009 में सूची में लिया। ढोल और बैसाखी मिलकर भांगड़ा को पंजाब से बाँध देते हैं।
खासी लोगों का धन्यवाद नृत्य का शाद नोंगक्रेम किस राज्य में किया जाता है?
- A.मेघालय
- B.मिजोरम
- C.असम
- D.सिक्किम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेघालय
व्याख्या
सही उत्तर A, मेघालय है। नोंगक्रेम खासी लोगों का फसल के लिए धन्यवाद नृत्य है, जो शिलांग के पास ख्यरिम प्रमुखता के केंद्र स्मित में कई दिनों तक चलता है, जहाँ अविवाहित युवतियाँ भारी चाँदी और सोने के आभूषणों में बीच में नृत्य करती हैं और पुरुष उनके चारों ओर तलवार और चँवर लेकर घूमते हैं। इसी राज्य के गारो अपनी फसल के अंत में वांगला, सौ ढोलों का उत्सव, मनाते हैं।
विकल्प B, मिजोरम में चेराव यानी बाँस नृत्य और खुआल्लम होते हैं। विकल्प C, असम में असमिया नववर्ष पर बिहू और चाय बागान समुदायों का झूमुर मिलता है। विकल्प D, सिक्किम में हिम सिंह नृत्य सिंघी छाम और मारुनी होते हैं। खासी समुदाय और स्मित गाँव का उल्लेख मेघालय की पहचान है, और प्रश्न प्रायः राज्य के बजाय जनजाति का नाम देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कौन सा लोक नृत्य राजस्थान का है और कौन सा गुजरात का?
घूमर, कालबेलिया, तेरह ताली, गैर और कच्छी घोड़ी राजस्थान के हैं। गरबा, डांडिया रास और टिप्पणी गुजरात के हैं। भ्रम इसलिए होता है कि दोनों में स्त्रियाँ चौड़े घाघरे में घेरा बनाकर नाचती हैं, परंतु गरबा नवरात्रि से जुड़ा है और दीप पात्र के चारों ओर होता है, जबकि घूमर राजस्थान का समुदाय और दरबार दोनों में प्रचलित नृत्य है जो भील समुदाय से विकसित हुआ।
भारत के कौन से लोक नृत्य यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में हैं?
उत्तराखंड का रम्माण 2009 में, छऊ, कालबेलिया और मुडियेट्टु 2010 में, मणिपुर का संकीर्तन 2013 में और गुजरात का गरबा 2023 में सूची में शामिल हुए। कुटियाट्टम और रामलीला, जो 2008 में शामिल हुए, नाट्य परम्पराएँ हैं, लोक नृत्य नहीं।
पुरुलिया, सरायकेला और मयूरभंज छऊ में क्या अंतर है?
तीनों एक ही पद संचालन पर टिके युद्ध शैली के नृत्य हैं, पर पश्चिम बंगाल का पुरुलिया छऊ बड़े चित्रित मुखौटों के साथ युद्ध प्रसंग दिखाता है, झारखंड का सरायकेला छऊ छोटे और सौम्य मुखौटे प्रयोग करता है और वहाँ के राजपरिवार के संरक्षण में निखरा, तथा ओडिशा का मयूरभंज छऊ बिना किसी मुखौटे के किया जाता है।
क्या यक्षगान शास्त्रीय नृत्य है?
नहीं। तटीय कर्नाटक का यक्षगान लोक नाट्य रूप है, जिसमें नृत्य, गायन, संवाद और भव्य वेशभूषा मिलते हैं। संगीत नाटक अकादमी केवल भरतनाट्यम, कथक, कथकली, कुचिपुड़ी, ओडिसी, मणिपुरी, मोहिनीअट्टम और सत्रीया को शास्त्रीय मानती है।
बाँस की छड़ों के साथ कौन सा लोक नृत्य किया जाता है?
मिजोरम का चेराव, जिसे सामान्यतः बाँस नृत्य कहा जाता है। पुरुष लंबी बाँस की छड़ें आड़ी पकड़कर ताल पर टकराते हैं और स्त्रियाँ बिना पैर फँसाए उनके बीच से निकलती हुई नृत्य करती हैं।
स्रोत
- भारतीय कला का परिचय, भाग एक (कक्षा ग्यारह, ललित कला) — एनसीईआरटी
- मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत: भारत के लिए अंकित तत्व — यूनेस्को
- संगीत नाटक अकादमी, संगीत, नृत्य और नाट्य की राष्ट्रीय अकादमी — संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार
