भारत का आधुनिक स्थापत्य और प्रमुख वास्तुकार: नोट्स
परीक्षोपयोगी नोट्स: औपनिवेशिक और इंडो-सारासेनिक शैलियां, लुटियंस दिल्ली, चंडीगढ़ में ले कॉर्बूजिए तथा भारत के प्रमुख आधुनिक वास्तुकार और उनके कार्य।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

आधुनिक स्थापत्य कला एवं संस्कृति का वह भाग है, जो विद्यार्थी के प्रतिदिन देखे जाने वाले भवनों को उन नामों से जोड़ता है जिन्हें परीक्षक पूछते हैं। यह कहानी उन्नीसवीं शताब्दी की औपनिवेशिक शैलियों से आरंभ होकर नई दिल्ली तथा चंडीगढ़ के नगर नियोजन से होती हुई उन भारतीय वास्तुकारों तक पहुंचती है, जिन्होंने गणराज्य के संस्थान, आवास और संग्रहालय बनाए। प्रश्न प्रायः वास्तुकार और भवन के मिलान के रूप में आते हैं, इसलिए इस अध्याय को भवन दर भवन पढ़ना सबसे सुरक्षित तरीका है।
स्वतंत्रता से पहले की औपनिवेशिक शैलियां
उन्नीसवीं शताब्दी में भारत में ब्रिटिश निर्माण मुख्यतः दो दिशाओं में चला। गॉथिक रिवाइवल शैली ने बंबई को विक्टोरिया टर्मिनस दिया, जो अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस है, जिसे फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस ने बनाया और जो 1888 में पूरा हुआ तथा यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में अंकित है। इंडो-सारासेनिक शैली ने जानबूझकर गुंबद, छतरी और जाली जैसे मुगल तथा राजपूत तत्वों को यूरोपीय योजना और अभियांत्रिकी से जोड़ा। मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, जो एक राजकीय यात्रा की स्मृति में बना और 1924 में पूरा हुआ, तथा वह संग्रहालय जो अब छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय कहलाता है, दोनों इसी शैली में जॉर्ज विटेट ने बनाए, जबकि हेनरी इरविन ने मैसूर पैलेस बनाया, जो 1912 में पूरा हुआ। कोलकाता में विलियम इमर्सन ने विक्टोरिया मेमोरियल बनाया, जो 1921 में पूरा हुआ।
लुटियंस की दिल्ली
राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली ले जाने की घोषणा 12 दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में हुई, और नए नगर की योजना ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियंस तथा हर्बर्ट बेकर ने बनाई, जिसका उद्घाटन 1931 में हुआ। लुटियंस ने रायसीना पहाड़ी पर वायसराय हाउस बनाया, जो आज राष्ट्रपति भवन है, तथा वह स्मारक मेहराब भी बनाई जिसे अब इंडिया गेट कहते हैं। बेकर ने वृत्ताकार संसद भवन बनाया, जो 1927 में पूरा हुआ, तथा सचिवालय के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनाए, जो रायसीना पहाड़ी के मार्ग के दोनों ओर खड़े हैं। इस योजना की पहचान चौड़ी वृक्षावलियों वाली सड़कें, षट्कोणीय मार्ग विन्यास और लंबी दृश्य रेखाएं हैं।
चंडीगढ़ और ले कॉर्बूजिए
विभाजन के बाद पंजाब को नई राजधानी चाहिए थी। पहली योजना अमेरिकी नियोजक अल्बर्ट मेयर ने मैथ्यू नोविकी के साथ बनाई और नोविकी की मृत्यु के बाद कार्य स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ले कॉर्बूजिए को मिला, जिन्होंने पियरे जेनरे, मैक्सवेल फ्राई और जेन ड्रू के साथ काम किया। चंडीगढ़ आयताकार सेक्टरों में बसाया गया, जिनमें प्रत्येक को आत्मनिर्भर माना गया और सड़कों का श्रेणीबद्ध विन्यास रखा गया। ले कॉर्बूजिए ने स्वयं कैपिटल कॉम्प्लेक्स बनाया, जिसमें सचिवालय, उच्च न्यायालय और विधानसभा के साथ नगर का प्रतीक ओपन हैंड स्मारक है। कैपिटल कॉम्प्लेक्स 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में उस अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति के भाग के रूप में अंकित हुआ, जिसे ले कॉर्बूजिए का स्थापत्य कार्य कहा जाता है।
भारतीय वास्तुकार
| वास्तुकार | प्रमुख कार्य |
|---|---|
| बालकृष्ण विट्ठलदास दोशी | अहमदाबाद में सीईपीटी विश्वविद्यालय और संगाथ, आईआईएम बेंगलुरु, इंदौर की अरण्य आवास योजना; 2018 में प्रित्जकर पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय |
| चार्ल्स कोरिया | मुंबई के कंचनजंगा अपार्टमेंट, जयपुर का जवाहर कला केंद्र, भोपाल का भारत भवन, साबरमती का गांधी स्मारक संग्रहालय |
| लॉरी बेकर | केरल में कम लागत और जलवायु के अनुकूल ईंट निर्माण; जाली दीवार और फिलर स्लैब के लिए प्रसिद्ध |
| अच्युत कानविंदे | आधुनिकतावादी परिसर और संस्थागत भवन, जिनमें आईआईटी कानपुर का कार्य शामिल है |
| राज रेवल | प्रगति मैदान का हॉल ऑफ नेशंस और दिल्ली का एशियाई खेल गांव |
| जोसेफ एलन स्टीन | दिल्ली का इंडिया इंटरनेशनल सेंटर और लोधी एस्टेट के भवन |
| गणेश भीकाजी देवलालीकर | नई दिल्ली का उच्चतम न्यायालय भवन, जो 1958 में पूरा हुआ |
स्वतंत्र भारत के प्रतीक भवन
अमेरिकी वास्तुकार लुई कान ने अहमदाबाद के भारतीय प्रबंध संस्थान का परिसर बनाया, जो अपनी ईंट की मेहराबों और खुले प्रांगणों के लिए प्रसिद्ध है। बेंगलुरु का विधान सौध, जो 1956 में पूरा हुआ, सरकारी भवनों में नव-द्रविड़ शैली का सर्वोत्तम उदाहरण है। नई दिल्ली का कमल मंदिर, जो अर्धविकसित कमल के आकार में संगमरमर की सत्ताईस पंखुड़ियों से बना बहाई उपासना गृह है, ईरानी मूल के कनाडाई वास्तुकार फरीबर्ज साहबा ने बनाया और वह 1986 में पूरा हुआ। गुजरात के केवड़िया में सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, जिसे मूर्तिकार राम वी. सुतार ने गढ़ा, 31 अक्टूबर 2018 को राष्ट्र को समर्पित हुई। नया संसद भवन, जिसे अहमदाबाद के वास्तुकार बिमल पटेल ने त्रिकोणीय योजना पर बनाया, 28 मई 2023 को उद्घाटित हुआ।
शैलियों की पहचान
आधुनिक काल में तीन विचार लगातार दिखाई देते हैं। पहला, आयातित शास्त्रीय रूपों से हटकर ऐसे भवन बनाना जो भारत की गर्मी, प्रकाश और वर्षा के अनुकूल हों, जिनमें गहरे बरामदे, प्रांगण और जालीदार परदे दिखते हैं। दूसरा, प्लास्टर और अलंकरण के स्थान पर खुली सामग्री, विशेषकर ईंट और कंक्रीट का प्रयोग। तीसरा, स्थापत्य को राष्ट्रीय आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति बनाना, 1950 के दशक के चंडीगढ़ से लेकर उसके बाद बने संग्रहालयों, विधानसभाओं और स्मारकों तक। सम्मान भी यही कहानी कहते हैं: चार्ल्स कोरिया को 1984 में और दोशी को 2022 में रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स का रॉयल गोल्ड मेडल मिला, और दोशी को उससे चार वर्ष पहले प्रित्जकर पुरस्कार मिल चुका था।
परीक्षा की दृष्टि से
यह अध्याय लगभग पूरी तरह जोड़ियों से पूछा जाता है। पहली जोड़ी वास्तुकार और भवन की है: लुटियंस के साथ राष्ट्रपति भवन, बेकर के साथ संसद भवन, ले कॉर्बूजिए के साथ चंडीगढ़, लुई कान के साथ आईआईएम अहमदाबाद, कोरिया के साथ जवाहर कला केंद्र और साहबा के साथ कमल मंदिर। दूसरी जोड़ी शैली और उदाहरण की है: गॉथिक रिवाइवल के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, इंडो-सारासेनिक के साथ गेटवे ऑफ इंडिया तथा मैसूर पैलेस, नव-द्रविड़ के साथ विधान सौध। तीसरी जोड़ी वर्ष और घटना की है: 1911 राजधानी स्थानांतरण की घोषणा, 1931 उद्घाटन, 1927 संसद भवन, 2016 कैपिटल कॉम्प्लेक्स की यूनेस्को सूची और 2018 दोशी का प्रित्जकर पुरस्कार। सबसे बड़ी भूल है पूरी नई दिल्ली का श्रेय केवल लुटियंस को देना और हर औपनिवेशिक भवन को इंडो-सारासेनिक कह देना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| चंडीगढ़ के नियोजक | ले कॉर्बूजिए, अल्बर्ट मेयर और मैथ्यू नोविकी के बाद |
|---|---|
| कैपिटल कॉम्प्लेक्स, चंडीगढ़ | 2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में |
| नई दिल्ली के नियोजक | एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर; उद्घाटन 1931 |
| राष्ट्रपति भवन | एडविन लुटियंस की रचना, रायसीना पहाड़ी पर |
| पुराना संसद भवन | हर्बर्ट बेकर की रचना, 1927 में पूर्ण |
| प्रित्जकर पाने वाले पहले भारतीय | बालकृष्ण विट्ठलदास दोशी, 2018 |
| आईआईएम अहमदाबाद परिसर | लुई कान की रचना |
| कमल मंदिर | फरीबर्ज साहबा; 1986 में पूर्ण |
| उच्चतम न्यायालय भवन | गणेश भीकाजी देवलालीकर; 1958 में पूर्ण |
| गेटवे ऑफ इंडिया | जॉर्ज विटेट; 1924 में पूर्ण |
| विधान सौध, बेंगलुरु | 1956 में पूर्ण, नव-द्रविड़ शैली |
| नया संसद भवन | बिमल पटेल की रचना; उद्घाटन 28 मई 2023 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
चंडीगढ़ नगर की योजना किस वास्तुकार ने बनाई थी?
- A.एडविन लुटियंस
- B.ले कॉर्बूजिए
- C.लुई कान
- D.चार्ल्स कोरिया
उत्तर देखें
इस स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ने चंडीगढ़ को आत्मनिर्भर सेक्टरों का विन्यास दिया और सचिवालय, उच्च न्यायालय, विधानसभा तथा ओपन हैंड स्मारक वाला कैपिटल कॉम्प्लेक्स बनाया; पहली रूपरेखा अल्बर्ट मेयर ने मैथ्यू नोविकी के साथ बनाई थी, जिसके बाद कार्य उन्हें मिला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रित्जकर स्थापत्य पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वास्तुकार कौन थे?
- A.चार्ल्स कोरिया
- B.राज रेवल
- C.बालकृष्ण विट्ठलदास दोशी
- D.अच्युत कानविंदे
उत्तर देखें
दोशी को 2018 में प्रित्जकर स्थापत्य पुरस्कार मिला और वे यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय बने; उनका कार्य ले कॉर्बूजिए के सहायक के रूप में आरंभ हुआ और उन्होंने अहमदाबाद में सीईपीटी विश्वविद्यालय तथा संगाथ, आईआईएम बेंगलुरु का परिसर और इंदौर की अरण्य आवास योजना बनाई; 2022 में उन्हें…
पूरी व्याख्या पढ़ें →नई दिल्ली का राष्ट्रपति भवन, जो मूलतः वायसराय हाउस के रूप में बना था, किसने बनाया?
- A.हर्बर्ट बेकर
- B.एडविन लुटियंस
- C.जॉर्ज विटेट
- D.विलियम इमर्सन
उत्तर देखें
लुटियंस ने रायसीना पहाड़ी पर वायसराय हाउस बनाया, जो स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रपति भवन कहलाया, और उन्होंने वह स्मारक मेहराब भी बनाई जिसे आज इंडिया गेट कहते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का पुराना संसद भवन, जो 1927 में पूरा हुआ वृत्ताकार भवन है, किसने बनाया?
- A.हर्बर्ट बेकर
- B.बिमल पटेल
- C.गणेश भीकाजी देवलालीकर
- D.जोसेफ एलन स्टीन
उत्तर देखें
बेकर ने वृत्ताकार काउंसिल हाउस बनाया, जो आगे चलकर संसद भवन कहलाया, जो 1927 में पूरा हुआ और जिसमें लगभग एक शताब्दी तक संसद बैठी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नई दिल्ली का कमल मंदिर, जो अर्धविकसित कमल के आकार का बहाई उपासना गृह है, किसने बनाया?
- A.फरीबर्ज साहबा
- B.चार्ल्स कोरिया
- C.लॉरी बेकर
- D.राज रेवल
उत्तर देखें
ईरानी मूल के कनाडाई वास्तुकार ने इस मंदिर को संगमरमर की सत्ताईस पंखुड़ियों से, तीन-तीन के समूहों में, नौ जलकुंडों से घिरे कमल के रूप में बनाया और यह 1986 में पूरा हुआ तथा आज देश के सर्वाधिक देखे जाने वाले भवनों में है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जयपुर का जवाहर कला केंद्र और मुंबई के कंचनजंगा अपार्टमेंट किस वास्तुकार की रचना हैं?
- A.बी. वी. दोशी
- B.चार्ल्स कोरिया
- C.हबीब रहमान
- D.ले कॉर्बूजिए
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कोरिया ने जयपुर का जवाहर कला केंद्र पारंपरिक मंडल के नौ वर्गों की योजना पर बनाया और मुंबई के कंचनजंगा अपार्टमेंट को परस्पर गुंथे फ्लैटों तथा छाया देने वाली गहरी छतों के रूप में गढ़ा; उन्होंने भोपाल का भारत भवन और साबरमती का गांधी स्मारक संग्रहालय भी बनाया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कम लागत और जलवायु के अनुकूल ईंट वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध वास्तुकार लॉरी बेकर ने मुख्यतः किस राज्य में काम किया?
- A.गुजरात
- B.केरल
- C.राजस्थान
- D.पश्चिम बंगाल
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ब्रिटेन में जन्मे और बाद में भारतीय नागरिक बने बेकर केरल में बस गए और वहां उन्होंने स्थानीय खुली ईंट, फिलर स्लैब तथा जालीदार दीवारों से घर, अस्पताल और संस्थान बनाए, जिनसे लागत घटी और भीतर का तापमान बिना मशीन के नियंत्रित रहा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, जो 1924 में पूरा हुआ, किसने बनाया?
- A.फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस
- B.जॉर्ज विटेट
- C.हेनरी इरविन
- D.एडविन लुटियंस
उत्तर देखें
विटेट ने गेटवे ऑफ इंडिया को इंडो-सारासेनिक शैली में, विशाल मेहराब और गुजराती अलंकरण के साथ बनाया, और उन्होंने मुंबई का वह संग्रहालय भी बनाया जो अब छत्रपति शिवाजी महाराज वस्तु संग्रहालय कहलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स किस वर्ष यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में अंकित हुआ?
- A.2004
- B.2010
- C.2016
- D.2021
उत्तर देखें
उसी वर्ष चंडीगढ़ का कैपिटल कॉम्प्लेक्स उस अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति के एक स्थल के रूप में अंकित हुआ, जिसे ले कॉर्बूजिए का स्थापत्य कार्य कहा जाता है और जो कई देशों में फैली है तथा आधुनिक आंदोलन में उनके योगदान को मान्यता देती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ईंट की मेहराबों और खुले प्रांगणों के लिए प्रसिद्ध भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद का परिसर किसने बनाया?
- A.लुई कान
- B.ले कॉर्बूजिए
- C.पियरे जेनरे
- D.जोसेफ एलन स्टीन
उत्तर देखें
इस अमेरिकी वास्तुकार ने अहमदाबाद का परिसर विशाल खुली ईंट की दीवारों, वृत्ताकार द्वारों और छायादार प्रांगणों के साथ बनाया, जो गुजरात की जलवायु के अनुकूल हैं, और इस परियोजना में बी. वी. दोशी ने उनके साथ निकटता से काम किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चंडीगढ़ नगर की योजना किसने बनाई?
स्विस-फ्रांसीसी वास्तुकार ले कॉर्बूजिए ने चंडीगढ़ को उसका अंतिम स्वरूप दिया और कैपिटल कॉम्प्लेक्स बनाया। पहली रूपरेखा अमेरिकी नियोजक अल्बर्ट मेयर ने मैथ्यू नोविकी के साथ तैयार की थी, और परियोजना संभालने के बाद ले कॉर्बूजिए ने पियरे जेनरे, मैक्सवेल फ्राई तथा जेन ड्रू के साथ काम किया।
राष्ट्रपति भवन और पुराना संसद भवन किसने बनाया?
रायसीना पहाड़ी पर वायसराय हाउस के रूप में बना राष्ट्रपति भवन एडविन लुटियंस की रचना है। वृत्ताकार संसद भवन, जो 1927 में पूरा हुआ, हर्बर्ट बेकर ने बनाया, जिन्होंने सचिवालय के नॉर्थ और साउथ ब्लॉक भी बनाए। दोनों ने नई दिल्ली की योजना पर काम किया, जिसका उद्घाटन 1931 में हुआ।
किस भारतीय वास्तुकार को प्रित्जकर पुरस्कार मिला?
बालकृष्ण विट्ठलदास दोशी, जिन्हें बी. वी. दोशी लिखा जाता है, 2018 में प्रित्जकर स्थापत्य पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने ले कॉर्बूजिए और लुई कान के साथ काम किया था, और उनकी अपनी रचनाओं में अहमदाबाद का सीईपीटी विश्वविद्यालय तथा संगाथ, आईआईएम बेंगलुरु का परिसर और इंदौर की अरण्य आवास योजना शामिल हैं।
इंडो-सारासेनिक शैली क्या है?
यह औपनिवेशिक शैली है, जिसमें गुंबद, छतरी, मेहराब और जाली जैसे भारतीय तत्वों को यूरोपीय योजना तथा आधुनिक अभियांत्रिकी से जोड़ा गया। गेटवे ऑफ इंडिया, मुंबई का प्रिंस ऑफ वेल्स संग्रहालय, मैसूर पैलेस और मद्रास उच्च न्यायालय प्रश्नपत्रों में दिए जाने वाले मानक उदाहरण हैं।
लॉरी बेकर क्यों याद किए जाते हैं?
ब्रिटेन में जन्मे और केरल में बसे बेकर ने स्थानीय खुली ईंट, फिलर स्लैब और जालीदार दीवारों का प्रयोग करके घर, अस्पताल और संस्थान सामान्य लागत के एक अंश में बनाए, जिससे प्लास्टर, इस्पात और कृत्रिम शीतलन की आवश्यकता घट गई। उनका कार्य भारत में टिकाऊ और कम लागत वाली वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है।
स्रोत
- ले कॉर्बूजिए का स्थापत्य कार्य, विश्व धरोहर सूची — यूनेस्को
- राष्ट्रपति भवन: इतिहास और स्थापत्य — राष्ट्रपति सचिवालय, भारत
- भारतीय कला एवं संस्कृति का परिचय, कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक — एनसीईआरटी





