भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण: उत्खनन और अधिनियम
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर परीक्षोपयोगी नोट्स: 1861 में स्थापना, कनिंघम, मार्शल और व्हीलर, एएमएएसआर अधिनियम, तथा प्रमुख उत्खनन और उनके उत्खननकर्ता।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 3 मिनट

प्राचीन भारत के विषय में विद्यार्थी जो कुछ जानता है, मोहनजोदड़ो की ईंटों से भीमबेटका की शैलाश्रयों तक, वह लगभग सारा एक ही संस्था ने खोदा, नापा और प्रकाशित किया है: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या एएसआई। परीक्षक इससे तीन प्रकार के प्रश्न पूछते हैं। स्थापना कब और किसने की, किस कानून से वह किसी स्मारक की रक्षा करता है, और कौन सा स्थल किस पुरातत्वविद् ने खोदा। तीसरा सबसे कठिन और सबसे अधिक पूछा जाने वाला है, इसलिए स्थल और नाम को जोड़े के रूप में याद करना चाहिए।
सर्वेक्षण की स्थापना
सर्वेक्षण की स्थापना 1861 में, ताज के शासन के आरंभिक वर्षों में हुई, और इसके पहले प्रमुख अलेक्जेंडर कनिंघम थे, बंगाल इंजीनियर्स के वह अभियंता जिन्होंने सारनाथ तथा सांची का सर्वेक्षण पहले ही कर लिया था और जिन्हें भारतीय पुरातत्व का पिता कहा जाता है। कनिंघम ने चीनी यात्रियों फाह्यान और ह्वेनसांग के यात्रा विवरणों को मार्गदर्शक बनाकर प्राचीन स्थानों की पहचान अपने समय के गांवों से की। वे 1861 में पुरातत्व सर्वेक्षक नियुक्त हुए और 1871 में विभाग के पुनर्गठन पर पहले महानिदेशक बने।
धन के अभाव में सर्वेक्षण लगभग बंद होने को था, तब वायसराय लॉर्ड कर्जन ने उसे पुनर्जीवित किया, 1902 में जॉन मार्शल को महानिदेशक नियुक्त किया और 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम पारित किया, जो भारत में स्मारकों की रक्षा का पहला वास्तविक कानून था। मार्शल 1928 तक इस पद पर रहे; उनके समय में ही हड़प्पा और मोहनजोदड़ो खोदे गए और 1924 में सिंधु सभ्यता के अस्तित्व की घोषणा संसार के सामने हुई। राय बहादुर दयाराम साहनी 1931 में पहले भारतीय महानिदेशक बने, और 1944 से महानिदेशक रहे सर मॉर्टिमर व्हीलर ने भारतीय पुरातत्वविदों को परत-दर-परत, अर्थात स्तरिकीय खनन की सावधान विधि सिखाई।
सर्वेक्षण से जुड़े कानून
एएसआई संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और उसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, तथा देश मंडलों में बंटा है। उसकी शक्तियां तीन कानूनों से आती हैं। 1958 का प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, जिसे संक्षेप में एएमएएसआर अधिनियम कहते हैं, केंद्र सरकार को किसी स्मारक या स्थल को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने और उसे पहुंचाई हानि पर दंड देने की शक्ति देता है। 2010 के संशोधन ने ऐसे स्मारक के चारों ओर 100 मीटर की पट्टी को निषिद्ध क्षेत्र बनाया, जहां निर्माण और खनन वर्जित है, तथा उसके आगे के 200 मीटर को विनियमित क्षेत्र, और आवेदनों के निपटारे के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण बनाया। 1972 का प्राचीन वस्तु एवं कलानिधि अधिनियम प्राचीन वस्तुओं के व्यापार को नियंत्रित करता और उनके निर्यात पर रोक लगाता है, तथा पुराना 1878 का कोष निधि अधिनियम गड़े धन के मिलने पर लागू होता है। सर्वेक्षण वार्षिक विवरण इंडियन आर्कियोलॉजी: अ रिव्यू तथा अभिलेख श्रृंखला एपिग्राफिया इंडिका भी प्रकाशित करता है।
प्रमुख उत्खनन और उनके उत्खननकर्ता
| स्थल | कहां | उत्खननकर्ता और वर्ष | प्रसिद्ध प्राप्ति |
|---|---|---|---|
| हड़प्पा | रावी तट, पंजाब (अब पाकिस्तान) | दयाराम साहनी, 1921 | अन्नागार, समाधि क्षेत्र आर-37 |
| मोहनजोदड़ो | सिंधु तट, सिंध (अब पाकिस्तान) | आर. डी. बनर्जी, 1922 | विशाल स्नानागार, कांस्य नर्तकी, पशुपति मुहर |
| कालीबंगा | हनुमानगढ़, राजस्थान | ए. घोष (खोज), बी. बी. लाल और बी. के. थापर | जुता हुआ खेत, हवन कुंड |
| लोथल | अहमदाबाद जिला, गुजरात | एस. आर. राव, 1955 से | गोदीबाड़ा, मनका कारखाना, चावल की भूसी |
| धोलावीरा | खदीर द्वीप, कच्छ, गुजरात | जे. पी. जोशी (खोज), आर. एस. बिष्ट | जल संग्रह कुंड, दस चिह्नों का सूचना पट |
| राखीगढ़ी | हिसार, हरियाणा | सूरज भान, बाद में अमरेंद्र नाथ | भारत में सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल |
| रोपड़ | रूपनगर, पंजाब | वाई. डी. शर्मा | स्वतंत्रता के बाद खोदा गया पहला स्थल |
| भीमबेटका | रायसेन, मध्य प्रदेश | वी. एस. वाकणकर, 1957 | प्रागैतिहासिक शैल चित्र |
| अरिकामेडु | पुडुचेरी के निकट | मॉर्टिमर व्हीलर | रोमन मृद्भांड और व्यापारिक वस्तुएं |
| तक्षशिला | अब पाकिस्तान में | जॉन मार्शल | गांधार नगर और विहार |
परीक्षा में काम आने वाले अन्य नाम हैं चन्हूदड़ो, मनका बनाने वालों का नगर; सुरकोटदा, जहां घोड़े की अस्थियां बताई गईं; हरियाणा का बनावली; महाराष्ट्र का दायमाबाद अपने कांस्य रथ के साथ; कौशांबी, जिसे जी. आर. शर्मा ने खोदा; पटना के निकट कुम्हरार, जहां डी. बी. स्पूनर को पाटलिपुत्र का स्तंभ युक्त सभा भवन मिला; तथा हस्तिनापुर और अतरंजीखेड़ा, जहां बी. बी. लाल ने चित्रित धूसर मृद्भांड का क्रम निकाला। धोलावीरा 2021 में और भीमबेटका की शैलाश्रय 2003 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में सम्मिलित हुए।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से तीन प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला स्थापना के तथ्य: सर्वेक्षण के लिए 1861, पहले प्रमुख तथा भारतीय पुरातत्व के पिता के रूप में कनिंघम, 1902 और 1904 में कर्जन तथा मार्शल, पहले भारतीय महानिदेशक दयाराम साहनी और स्तरिकी के लिए व्हीलर। दूसरा कानून: 1958 का एएमएएसआर अधिनियम, 1972 का प्राचीन वस्तु एवं कलानिधि अधिनियम, 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम, निषिद्ध तथा विनियमित क्षेत्र के 100 और 200 मीटर, और मूल मंत्रालय के रूप में संस्कृति मंत्रालय। तीसरा और सबसे आम स्थल का उत्खननकर्ता या उसकी प्राप्ति से मिलान: हड़प्पा के साथ साहनी, मोहनजोदड़ो के साथ बनर्जी, लोथल तथा गोदीबाड़े के साथ एस. आर. राव, धोलावीरा और उसके कुंडों के साथ आर. एस. बिष्ट, कालीबंगा और जुता हुआ खेत, भीमबेटका के साथ वाकणकर तथा अरिकामेडु के साथ व्हीलर। प्रत्येक स्थल को उसकी नदी या जिले के साथ भी याद करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| एएसआई की स्थापना | 1861; पहले प्रमुख अलेक्जेंडर कनिंघम, 1871 से पहले महानिदेशक |
|---|---|
| भारतीय पुरातत्व के पिता | अलेक्जेंडर कनिंघम |
| मूल मंत्रालय | संस्कृति मंत्रालय, मुख्यालय नई दिल्ली |
| पुनर्जीवित किया | लॉर्ड कर्जन ने, जिन्होंने 1902 में जॉन मार्शल को महानिदेशक नियुक्त किया |
| स्मारकों का पहला कानून | प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम, 1904 |
| आज का मुख्य कानून | प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 |
| निषिद्ध और विनियमित क्षेत्र | 2010 के संशोधन से संरक्षित स्मारक के चारों ओर 100 मीटर और उसके आगे 200 मीटर |
| प्राचीन वस्तु कानून | प्राचीन वस्तु एवं कलानिधि अधिनियम, 1972 |
| पहले भारतीय महानिदेशक | राय बहादुर दयाराम साहनी, 1931 |
| स्तरिकीय विधि | भारत में सर मॉर्टिमर व्हीलर ने प्रारंभ की, जो 1944 से महानिदेशक रहे |
| हड़प्पा | दयाराम साहनी ने 1921 में खोदा, रावी तट पर |
| मोहनजोदड़ो | आर. डी. बनर्जी ने 1922 में खोदा, सिंधु तट पर |
| लोथल | एस. आर. राव ने खोदा; गोदीबाड़ा और मनका कारखाना प्रसिद्ध |
| धोलावीरा | आर. एस. बिष्ट ने खोदा; जल कुंड और सूचना पट; विश्व विरासत, 2021 |
| भीमबेटका | शैलाश्रय 1957 में वी. एस. वाकणकर ने खोजीं; विश्व विरासत, 2003 |
| वार्षिक प्रकाशन | इंडियन आर्कियोलॉजी: अ रिव्यू |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1784
- B.1861
- C.1904
- D.1947
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व्याख्या
सही उत्तर B, 1861 है। 1857 के विद्रोह के बाद ताज के शासन के आरंभिक वर्षों में इसी वर्ष सर्वेक्षण की स्थापना हुई और अलेक्जेंडर कनिंघम इसके पहले पुरातत्व सर्वेक्षक बने; 1871 में इसे पूर्ण विभाग के रूप में पुनर्गठित किया गया और कनिंघम महानिदेशक हुए। विकल्प A गलत है क्योंकि 1784 में सर विलियम जोंस ने कलकत्ता में एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की स्थापना की, जिसने भारतीय प्राचीनता का विद्वत्तापूर्ण अध्ययन आरंभ किया, परंतु वह विद्वत समाज था, सरकारी सर्वेक्षण नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1904 लॉर्ड कर्जन के समय पारित प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम का वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि स्वतंत्रता तक सर्वेक्षण लगभग नब्बे वर्ष पुराना हो चुका था और वह नई सरकार को हस्तांतरित हुआ, जिसने बाद में उसे 1958 का एएमएएसआर अधिनियम दिया।
भारतीय पुरातत्व का पिता किसे कहा जाता है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले प्रमुख भी थे?
- A.जॉन मार्शल
- B.अलेक्जेंडर कनिंघम
- C.मॉर्टिमर व्हीलर
- D.जेम्स प्रिंसेप
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व्याख्या
सही उत्तर B, अलेक्जेंडर कनिंघम है। बंगाल इंजीनियर्स के इस अभियंता ने सर्वेक्षण के अस्तित्व में आने से बहुत पहले सारनाथ और सांची का सर्वेक्षण किया था; वे 1861 में पहले पुरातत्व सर्वेक्षक और 1871 में पहले महानिदेशक नियुक्त हुए, और उन्होंने चीनी यात्रियों फाह्यान तथा ह्वेनसांग के विवरणों से प्राचीन नगरों की पहचान अपने समय के गांवों से की। विकल्प A गलत है क्योंकि जॉन मार्शल 1902 से महानिदेशक रहे और हड़प्पा, मोहनजोदड़ो तथा तक्षशिला के लिए याद किए जाते हैं, सर्वेक्षण की स्थापना के लिए नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि मॉर्टिमर व्हीलर 1944 में महानिदेशक बनकर आए और स्तरिकीय विधि के लिए स्मरणीय हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी तथा खरोष्ठी लिपियों को पढ़ा, जो अभिलेखशास्त्र की उपलब्धि है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण भारत सरकार के किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.शिक्षा मंत्रालय
- B.पर्यटन मंत्रालय
- C.संस्कृति मंत्रालय
- D.गृह मंत्रालय
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व्याख्या
सही उत्तर C, संस्कृति मंत्रालय है। सर्वेक्षण उसी मंत्रालय का संलग्न कार्यालय है, उसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, और वह देश को मंडलों में बांटता है, जिनमें से प्रत्येक अधीक्षण पुरातत्वविद् के अधीन रहकर राष्ट्रीय महत्व घोषित स्मारकों तथा स्थलों की देखरेख करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि शिक्षा मंत्रालय विद्यालय, विश्वविद्यालय तथा एनसीईआरटी और यूजीसी जैसी संस्थाएं चलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पर्यटन मंत्रालय यात्रा को प्रोत्साहन देता है और स्मारकों पर दर्शक सुविधाओं की योजनाएं चलाता है, जिससे अभ्यर्थी भ्रमित होते हैं, परंतु स्मारक उसके स्वामित्व या संरक्षण में नहीं होते। विकल्प D गलत है क्योंकि गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा, पुलिस और जनगणना देखता है। राष्ट्रीय संग्रहालय तथा साहित्य अकादमी भी संस्कृति मंत्रालय के अधीन हैं। इसलिए स्मारक किसके अधीन है यह पूछे जाने पर उत्तर सदा संस्कृति मंत्रालय ही होगा।
हड़प्पा का उत्खनन 1921 में किस पुरातत्वविद् ने किया?
- A.आर. डी. बनर्जी
- B.दयाराम साहनी
- C.एस. आर. राव
- D.बी. बी. लाल
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व्याख्या
सही उत्तर B, दयाराम साहनी है, जिन्होंने 1921 में रावी के तट पर स्थित हड़प्पा में खनन किया, जब जॉन मार्शल महानिदेशक थे, और जो दस वर्ष बाद सर्वेक्षण का नेतृत्व करने वाले पहले भारतीय बने। विकल्प A गलत है क्योंकि राखालदास बनर्जी ने 1922 में, हड़प्पा के एक वर्ष बाद, सिंधु तट पर मोहनजोदड़ो खोदा, और हड़प्पा के साथ साहनी तथा मोहनजोदड़ो के साथ बनर्जी का यह जोड़ा इस अध्याय में सबसे अधिक पूछा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि एस. आर. राव ने पचास के दशक के मध्य से गुजरात के लोथल में काम किया, जहां उन्हें गोदीबाड़ा मिला। विकल्प D गलत है क्योंकि बी. बी. लाल ने बी. के. थापर के साथ कालीबंगा खोदा और हस्तिनापुर तथा अतरंजीखेड़ा में चित्रित धूसर मृद्भांड का क्रम निकाला, जो बाद की पीढ़ी का कार्य है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को पुनर्जीवित करने और प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम पारित करने का श्रेय किस वायसराय को है?
- A.लॉर्ड रिपन
- B.लॉर्ड लिटन
- C.लॉर्ड कर्जन
- D.लॉर्ड माउंटबेटन
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व्याख्या
सही उत्तर C, लॉर्ड कर्जन है। उन्होंने सर्वेक्षण को धन के अभाव में लगभग समाप्त होने की स्थिति में पाया, उसका बजट बहाल किया, 1902 में जॉन मार्शल को महानिदेशक नियुक्त किया और 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम पारित कराया, जो भारत का पहला ऐसा कानून था जिससे सरकार किसी स्मारक की रक्षा कर सकती थी और उसके स्वामी को उसे नष्ट करने या बाहर भेजने से रोक सकती थी। विकल्प A गलत है क्योंकि लॉर्ड रिपन स्थानीय स्वशासन और पहले कारखाना अधिनियम के लिए स्मरणीय हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि लॉर्ड लिटन वर्नाक्यूलर प्रेस अधिनियम तथा 1877 के दिल्ली दरबार के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि लॉर्ड माउंटबेटन अंतिम वायसराय थे, जिनका संबंध 1947 के सत्ता हस्तांतरण से है।
आज भारत में राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की रक्षा करने वाला मुख्य कानून कौन सा है?
- A.प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम, 1904
- B.प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958
- C.प्राचीन वस्तु एवं कलानिधि अधिनियम, 1972
- D.कोष निधि अधिनियम, 1878
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व्याख्या
सही उत्तर B, 1958 का प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम है, जिसे सामान्यतः एएमएएसआर अधिनियम कहा जाता है। यह केंद्र सरकार को किसी स्मारक या पुरातत्वीय स्थल को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करने देता है, उत्खनन को नियंत्रित करता है और हानि पर दंड देता है, तथा उसके 2010 के संशोधन ने स्मारक के चारों ओर सौ मीटर को निषिद्ध क्षेत्र और उसके आगे दो सौ मीटर को विनियमित क्षेत्र बनाया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1904 का अधिनियम पहले का औपनिवेशिक कानून था, जो अब प्रतिस्थापित हो चुका है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1972 का अधिनियम प्राचीन वस्तुओं के लेन-देन को नियंत्रित करता और निर्यात रोकता है, स्मारकों की रक्षा नहीं करता। विकल्प D गलत है क्योंकि 1878 का कोष निधि अधिनियम केवल गड़े धन के मिलने और उस पर दावे से संबंधित है।
2010 में संशोधित एएमएएसआर अधिनियम के अनुसार संरक्षित स्मारक के चारों ओर कितने मीटर का क्षेत्र निषिद्ध क्षेत्र होता है?
- A.50 मीटर
- B.100 मीटर
- C.200 मीटर
- D.300 मीटर
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व्याख्या
सही उत्तर B, 100 मीटर है। 2010 के संशोधन ने प्रत्येक केंद्रीय संरक्षित स्मारक या स्थल के चारों ओर सौ मीटर की पट्टी को निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया, जहां स्मारक की ही मरम्मत के अतिरिक्त निर्माण और खनन वर्जित हैं, और उसके आगे दो सौ मीटर को विनियमित क्षेत्र, जहां निर्माण के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की अनुमति चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि पचास मीटर दूसरे विषय का आंकड़ा है, अर्थात सीआरजेड अधिसूचना में घनी आबादी वाले ग्रामीण तटीय भागों का विकास निषिद्ध क्षेत्र। विकल्प C गलत है क्योंकि दो सौ मीटर निषिद्ध क्षेत्र के आगे पड़ने वाले विनियमित क्षेत्र की चौड़ाई है, इसलिए दोनों मिलकर तीन सौ मीटर बनते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि तीन सौ मीटर दोनों पट्टियों का योग है, स्वयं निषिद्ध क्षेत्र नहीं, और यही इस प्रश्न का जाल है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक पद पर पहुंचने वाले पहले भारतीय कौन थे?
- A.आर. डी. बनर्जी
- B.दयाराम साहनी
- C.ए. घोष
- D.बी. बी. लाल
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, दयाराम साहनी है, जो 1931 में नियुक्त हुए और जिन्होंने दस वर्ष पहले हड़प्पा का उत्खनन करके अपना नाम बना लिया था। विकल्प A गलत है क्योंकि राखालदास बनर्जी, जिन्होंने 1922 में मोहनजोदड़ो खोदा और बंगाल तथा ओडिशा के इतिहास पर भी लिखा, महानिदेशक नहीं बने, यद्यपि वे उस पीढ़ी के दूसरे बड़े भारतीय नाम हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि कालीबंगा की खोज करने वाले अमलानंद घोष सर्वेक्षण के प्रमुख बहुत बाद में, पचास और साठ के दशक में बने। विकल्प D गलत है क्योंकि कालीबंगा तथा हस्तिनापुर के उत्खननकर्ता बी. बी. लाल साठ के दशक में महानिदेशक रहे, साहनी से काफी बाद। याद रखने योग्य क्रम है सबसे पहले कनिंघम, 1902 से मार्शल, 1931 में पहले भारतीय के रूप में साहनी और 1944 से व्हीलर।
हड़प्पा कालीन गोदीबाड़ा किस स्थल पर और किस पुरातत्वविद् को मिला?
- A.कालीबंगा, बी. बी. लाल को
- B.लोथल, एस. आर. राव को
- C.धोलावीरा, आर. एस. बिष्ट को
- D.राखीगढ़ी, अमरेंद्र नाथ को
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व्याख्या
सही उत्तर B, लोथल, एस. आर. राव को है। लोथल गुजरात के अहमदाबाद जिले में भोगावा नदी पर है, और वहां मिला पकी ईंटों का वह कुंड, जो एक नाली से नदी से जुड़ा था, सामान्यतः गोदीबाड़ा माना जाता है, जिससे लोथल हड़प्पा संसार का बंदरगाह नगर बनता है; वहीं मनका कारखाना, गोदाम और चावल की भूसी का सबसे पुराना उल्लेख भी मिला। विकल्प A गलत है क्योंकि राजस्थान का कालीबंगा जुते हुए खेत तथा हवन कुंडों की पंक्ति के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C गलत है क्योंकि कच्छ के खदीर द्वीप पर स्थित धोलावीरा अपने जल संग्रह कुंडों की श्रृंखला और दस बड़े चिह्नों वाले सूचना पट के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प D गलत है क्योंकि हरियाणा का राखीगढ़ी भारत का सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल होने के लिए याद किया जाता है।
भीमबेटका की प्रागैतिहासिक शैलाश्रयों की खोज 1957 में किसने की?
- A.वी. एस. वाकणकर
- B.एच. डी. सांकलिया
- C.जे. पी. जोशी
- D.रॉबर्ट ब्रूस फुट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, वी. एस. वाकणकर है। 1957 में मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से रेल से गुजरते हुए उन्होंने वन के ऊपर उठी शैल संरचनाएं देखीं, लौटकर उनकी जांच की और सैकड़ों ऐसे आश्रय पाए जिनकी दीवारों पर शिकारियों, नर्तकों और पशुओं के चित्र उच्च पुरापाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक फैले हैं; भीमबेटका 2003 में यूनेस्को विश्व विरासत सूची में जोड़ा गया। विकल्प B गलत है क्योंकि एच. डी. सांकलिया नेवासा तथा डेक्कन कॉलेज से जुड़े प्रागितिहासकार थे। विकल्प C गलत है क्योंकि जे. पी. जोशी धोलावीरा को देखने और सुरकोटदा के कार्य के लिए स्मरणीय हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय प्रागितिहास के पिता कहे जाने वाले रॉबर्ट ब्रूस फुट ने 1863 में चेन्नई के निकट पल्लवरम में भारत का पहला पुरापाषाण उपकरण पाया था, लगभग एक शताब्दी पहले।
1924 में सिंधु घाटी सभ्यता की खोज की घोषणा के समय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक कौन थे?
- A.अलेक्जेंडर कनिंघम
- B.जॉन मार्शल
- C.मॉर्टिमर व्हीलर
- D.जेम्स बर्जेस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, जॉन मार्शल है। लॉर्ड कर्जन ने उन्हें 1902 में नियुक्त किया और वे 1928 तक महानिदेशक रहे; उन्होंने हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो का कार्य दयाराम साहनी और आर. डी. बनर्जी को सौंपा, समझा कि दोनों स्थानों की मुहरें और ईंटें एक ही अज्ञात सभ्यता की हैं, और 1924 में उसकी घोषणा की; बाद में उन्होंने मोहनजोदड़ो पर बड़े ग्रंथ प्रकाशित किए तथा तक्षशिला और सांची का उत्खनन किया। विकल्प A गलत है क्योंकि कनिंघम का 1893 में देहांत हो चुका था, यद्यपि उन्होंने एक हड़प्पा मुहर देखी थी और उसका अर्थ नहीं जान सके थे। विकल्प C गलत है क्योंकि मॉर्टिमर व्हीलर भारत 1944 में आए और बाद में बेहतर विधि से हड़प्पा फिर खोदा। विकल्प D गलत है क्योंकि जेम्स बर्जेस अस्सी के दशक में महानिदेशक थे और पश्चिमी भारत के गुहा मंदिरों के सर्वेक्षण के लिए स्मरणीय हैं।
भारत में उत्खनन की सावधान स्तरिकीय विधि किस पुरातत्वविद् ने प्रारंभ की?
- A.सर मॉर्टिमर व्हीलर
- B.दयाराम साहनी
- C.अलेक्जेंडर कनिंघम
- D.जी. आर. शर्मा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, सर मॉर्टिमर व्हीलर है, जो 1944 में महानिदेशक बनकर आए और जिन्होंने आग्रह किया कि किसी टीले को परत-दर-परत खोदा जाए तथा प्रत्येक परत को उसके मृद्भांडों के साथ काट-चित्र में अंकित किया जाए, जिससे बसावट का क्रम स्वयं मिट्टी से पढ़ा जा सके; उन्होंने यह विधि हड़प्पा में, पुडुचेरी के निकट अरिकामेडु में, जहां उन्होंने रोमन व्यापारिक मृद्भांड पहचाने, तथा ब्रह्मगिरि में लगाई और भारतीय पुरातत्वविदों की एक पीढ़ी को इसमें प्रशिक्षित किया। विकल्प B गलत है क्योंकि दयाराम साहनी बड़े पैमाने पर सफाई करके खोदने की पुरानी परंपरा के थे। विकल्प C गलत है क्योंकि कनिंघम मुख्यतः सर्वेक्षण, पहचान और परीक्षण खाइयों से काम करते थे। विकल्प D गलत है क्योंकि कौशांबी के उत्खननकर्ता जी. आर. शर्मा बाद में आए और व्हीलर की स्थापित विधि के भीतर कार्य किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की स्थापना कब हुई और उसका पहला प्रमुख कौन था?
इसकी स्थापना 1861 में हुई, भारत का शासन ताज के हाथ आने के कुछ ही समय बाद, और अलेक्जेंडर कनिंघम इसके पहले पुरातत्व सर्वेक्षक नियुक्त हुए तथा 1871 में विभाग के पुनर्गठन पर पहले महानिदेशक बने। सारनाथ, सांची और दर्जनों अन्य स्थलों के सर्वेक्षण के कारण उन्हें भारतीय पुरातत्व का पिता कहा जाता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण किस मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन। सर्वेक्षण का मुख्यालय नई दिल्ली में है और वह देश को मंडलों में बांटता है, जिनमें से प्रत्येक अधीक्षण पुरातत्वविद् के अधीन होता है और राष्ट्रीय महत्व घोषित स्मारकों तथा स्थलों की देखरेख करता है।
आज भारत में प्राचीन स्मारकों की रक्षा कौन सा अधिनियम करता है?
1958 का प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, जिसे एएमएएसआर अधिनियम कहते हैं। उसके 2010 के संशोधन ने संरक्षित स्मारक के चारों ओर 100 मीटर को निषिद्ध क्षेत्र और उसके आगे 200 मीटर को विनियमित क्षेत्र बनाया, तथा वहां निर्माण के आवेदनों पर निर्णय के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण बनाया। पुराना कानून लॉर्ड कर्जन के समय का 1904 का प्राचीन स्मारक परिरक्षण अधिनियम था।
हड़प्पा और मोहनजोदड़ो का उत्खनन किसने किया?
हड़प्पा का उत्खनन 1921 में दयाराम साहनी ने और मोहनजोदड़ो का 1922 में राखालदास बनर्जी ने किया, दोनों जॉन मार्शल के अधीन, जो तब महानिदेशक थे और जिन्होंने 1924 में सिंधु सभ्यता की खोज की घोषणा की। साहनी बाद में सर्वेक्षण के पहले भारतीय महानिदेशक बने।
भीमबेटका की शैलाश्रयों की खोज किसने की?
वी. एस. वाकणकर ने, 1957 में। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से रेल से गुजरते हुए उन्होंने इन शैल संरचनाओं को देखा और लौटकर उनका अध्ययन किया। इन आश्रयों में उच्च पुरापाषाण काल से ऐतिहासिक काल तक के चित्र बने हैं और 2003 में इन्हें यूनेस्को विश्व विरासत सूची में जोड़ा गया।
कौन सा हड़प्पा स्थल गोदीबाड़े के लिए और कौन सा जल कुंडों के लिए प्रसिद्ध है?
गुजरात का लोथल, जिसे एस. आर. राव ने खोदा, अपने गोदीबाड़े के लिए प्रसिद्ध है, और वहीं मनका कारखाना तथा चावल की भूसी का सबसे पुराना उल्लेख भी मिला। धोलावीरा, जो गुजरात में ही है और जिसे आर. एस. बिष्ट ने खोदा, अपने विस्तृत जल संग्रह कुंडों तथा प्रवेश द्वार के निकट मिले दस बड़े हड़प्पा चिह्नों वाले सूचना पट के लिए प्रसिद्ध है।
स्रोत
- भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 1 (कक्षा 12), अध्याय 1: ईंटें, मनके तथा अस्थियां — एनसीईआरटी
- प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 — संस्कृति मंत्रालय
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण: संगठन और कार्य — भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण





