आरबीआई के कार्य: मौद्रिक नीति और साख नियंत्रण
परीक्षा के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्यों के पूर्ण नोट्स: मौद्रिक नीति, नोट निर्गम, सरकार का बैंकर, नियमन, विदेशी मुद्रा तथा साख नियंत्रण उपकरण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारतीय रिज़र्व बैंक देश का केंद्रीय बैंक है। इसकी स्थापना हिल्टन यंग आयोग, अर्थात 1926 के भारतीय मुद्रा एवं वित्त संबंधी रॉयल कमीशन की संस्तुति पर हुई, और इसने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 के अंतर्गत 1 अप्रैल 1935 को कार्य आरंभ किया। यह आरंभ में शेयरधारकों का बैंक था और इसका केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता में था, जो 1937 में बंबई स्थानांतरित हुआ, और 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हुआ, तब से यह पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व में है। सर ओसबोर्न स्मिथ इसके पहले गवर्नर और सी. डी. देशमुख पहले भारतीय गवर्नर थे। अधिनियम की प्रस्तावना इसका उद्देश्य बैंक नोटों के निर्गम का नियमन, मौद्रिक स्थिरता के लिए प्रारक्षित निधि रखना तथा देश के हित में मुद्रा और साख व्यवस्था का संचालन बताती है।
मौद्रिक प्राधिकारी
रिज़र्व बैंक का प्रमुख कार्य मौद्रिक नीति बनाना और लागू करना है, ताकि विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनी रहे। 2016 में अधिनियम के संशोधन के बाद यह कार्य छह सदस्यों की मौद्रिक नीति समिति के माध्यम से होता है: अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, और केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन सदस्य। प्रत्येक सदस्य का एक मत होता है और मत बराबर होने पर गवर्नर को निर्णायक मत प्राप्त है। समिति वर्ष में कम से कम चार बार बैठक करती है, और मुद्रास्फीति लक्ष्य केंद्र सरकार रिज़र्व बैंक के परामर्श से प्रत्येक पाँच वर्ष में निर्धारित करती है। यदि लगातार तीन तिमाहियों तक लक्ष्य पूरा न हो, तो बैंक को सरकार को कारण और आगे की कार्ययोजना बतानी होती है।
मुद्रा निर्गम
अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक को भारत में बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार है। यह दो रुपये और उससे ऊपर के नोट जारी करता है; एक रुपये का नोट तथा सभी सिक्के भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है, यद्यपि उन्हें प्रचलन में बैंक ही लाता है। 1957 से नोट निर्गम न्यूनतम प्रारक्षित निधि प्रणाली के अनुसार होता है, जिसके अंतर्गत बैंक को कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का होना चाहिए। बैंक केंद्र सरकार की स्वीकृति से नोटों का अभिकल्प भी तय करता है, गंदे और कटे फटे नोट वापस लेता है, और वाणिज्यिक बैंकों के साथ करेंसी चेस्ट चलाता है ताकि नए नोट हर जिले तक पहुँचें।
सरकार का बैंकर, अभिकर्ता और सलाहकार
रिज़र्व बैंक संघ सरकार तथा उन राज्य सरकारों के खाते रखता है जिनके साथ उसका करार है, उनकी ओर से धन प्राप्त करता और भुगतान करता है, और प्राप्ति तथा भुगतान का मेल न बैठने पर अल्पकालिक सहायता देता है, जिसे तदर्थ अग्रिम कहा जाता है। यह सार्वजनिक ऋण का प्रबंधक भी है, जो राजकोषीय बिल तथा दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी करता है, उन पर ब्याज देता है और उन्हें भुनाता है, तथा बैंकिंग और वित्तीय प्रश्नों पर सरकार को सलाह देता है।
बैंकों का बैंक और अंतिम ऋणदाता
प्रत्येक अनुसूचित बैंक रिज़र्व बैंक में खाता रखता है, अपनी नकद प्रारक्षित निधि वहीं रखता है और दूसरे बैंकों के दावों का निपटान उसी के माध्यम से करता है। जब कोई सुदृढ़ बैंक कहीं और से धन न जुटा पाए, तब रिज़र्व बैंक पात्र प्रतिभूतियों के विरुद्ध उसे ऋण देता है, यही परंपरागत अंतिम ऋणदाता का कार्य है और इसी कारण एक बैंक की तरलता की कठिनाई पूरी व्यवस्था में घबराहट नहीं बनती।
नियामक और पर्यवेक्षक
बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 के अंतर्गत रिज़र्व बैंक बैंकों को लाइसेंस देता है, उनकी शाखाओं को स्वीकृति देता है, पूँजी, प्रावधान और जोखिम सीमा पर विवेकपूर्ण मानक तय करता है, उनका निरीक्षण करता है, तथा किसी बोर्ड को अधिक्रमित कर सकता है या बैंक को सुधारात्मक योजना में रख सकता है। यह गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का पंजीकरण और नियमन भी करता है, राज्य प्राधिकारियों के साथ मिलकर सहकारी बैंकों का नियमन करता है, और अपने पर्यवेक्षण विभाग के माध्यम से अस्वस्थ व्यवहारों पर कार्रवाई करता है।
विदेशी मुद्रा और भुगतान प्रणालियाँ
रिज़र्व बैंक विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 का प्रशासन करता है, देश का विदेशी मुद्रा भंडार रखता और निवेश करता है, तथा रुपये का मूल्य तय करने के लिए नहीं बल्कि बाजार को व्यवस्थित रखने के लिए हस्तक्षेप करता है। भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के अंतर्गत यह भुगतान प्रणालियों को प्राधिकृत तथा पर्यवेक्षित करता है, और वास्तविक समय सकल निपटान, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण प्रणाली तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की खुदरा प्रणालियों का संचालन या पर्यवेक्षण करता है।
विकासात्मक और संवर्धनात्मक कार्य
- प्राथमिकता क्षेत्र ऋण नियम, जो कृषि, लघु उद्यम, शिक्षा, आवास और कमजोर वर्गों की ओर साख मोड़ते हैं।
- मूल बचत खातों, व्यावसायिक प्रतिनिधियों और अग्रणी बैंक योजना के माध्यम से वित्तीय समावेशन।
- विनियमित संस्थाओं के विरुद्ध शिकायतों के लिए एकीकृत लोकपाल योजना से उपभोक्ता संरक्षण।
- अनुसंधान और सांख्यिकी, जिसमें वार्षिक रिपोर्ट, मौद्रिक नीति रिपोर्ट और वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट सम्मिलित हैं।
साख नियंत्रण के उपकरण
| उपकरण | कार्य |
|---|---|
| रेपो दर | प्रतिभूतियों के विरुद्ध अल्प अवधि के लिए बैंकों को ऋण देने की दर |
| स्थायी जमा सुविधा | बिना प्रतिभूति के बैंकों की अतिरिक्त राशि जमा करने की दर |
| सीमांत स्थायी सुविधा | प्रतिभूतियों के विरुद्ध रेपो दर से ऊपर की आपात खिड़की |
| बैंक दर | अग्रिमों की दीर्घकालिक दर, अब आपात खिड़की से जुड़ी |
| नकद प्रारक्षित अनुपात | जमा का वह अंश जो बैंक को नकद रूप में रिज़र्व बैंक के पास रखना होता है |
| वैधानिक तरलता अनुपात | जमा का वह अंश जो नकद, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों में रखना होता है |
| खुले बाजार की क्रियाएँ | तरलता बढ़ाने या घटाने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद बिक्री |
| गुणात्मक उपकरण | मार्जिन अपेक्षाएँ, साख राशनिंग, नैतिक दबाव और प्रत्यक्ष कार्रवाई |
यह याद रखिए कि रिज़र्व बैंक राजकोषीय घाटा या कर की दरें तय नहीं करता, ये सरकार के विषय हैं, और यह प्रतिभूति बाजार या बीमा का नियामक भी नहीं है, ये अन्य निकायों के अधीन हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
बैंकिंग प्रश्नपत्र इस अध्याय को एक पंक्ति के तथ्यों और कार्य सुमेलन के रूप में पूछते हैं। नियमित प्रश्न हैं: अधिनियम का वर्ष और बैंक के खुलने का वर्ष, संस्तुति देने वाला आयोग, राष्ट्रीयकरण का वर्ष, पहले गवर्नर और पहले भारतीय गवर्नर, मौद्रिक नीति समिति के सदस्यों की संख्या, एक रुपये का नोट कौन जारी करता है, तथा विदेशी मुद्रा या भुगतान प्रणालियों से संबंधित अधिनियम कौन सा है। दूसरे प्रकार के प्रश्न में विवरण देकर पूछा जाता है कि यह कौन सा कार्य है, जैसे अंतिम ऋणदाता या सरकार का बैंकर। तीन सामान्य जाल हैं: 1934 के अधिनियम, 1935 के आरंभ और 1949 के राष्ट्रीयकरण को मिला देना; यह मान लेना कि बैंक सिक्के और एक रुपये का नोट जारी करता है; और बैंक को वे शक्तियाँ दे देना जो सरकार, प्रतिभूति बाजार नियामक या बीमा नियामक के पास हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्तुति देने वाला आयोग | हिल्टन यंग आयोग, भारतीय मुद्रा एवं वित्त संबंधी रॉयल कमीशन, 1926 |
|---|---|
| संचालक अधिनियम | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 |
| कार्य आरंभ | 1 अप्रैल 1935 |
| केंद्रीय कार्यालय | पहले कलकत्ता, 1937 में बंबई स्थानांतरित |
| राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 |
| पहले गवर्नर | सर ओसबोर्न स्मिथ |
| पहले भारतीय गवर्नर | सी. डी. देशमुख |
| मौद्रिक नीति समिति | छह सदस्य, अध्यक्ष गवर्नर, जिन्हें निर्णायक मत प्राप्त है |
| समिति की बैठकें | वर्ष में कम से कम चार बार |
| नोट निर्गम का एकाधिकार | भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 22 |
| एक रुपये का नोट और सिक्के | भारत सरकार जारी करती है, बैंक प्रचलन में लाता है |
| न्यूनतम प्रारक्षित निधि प्रणाली | 1957 से: दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ, स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ |
| बैंक नियमन | बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 |
| विदेशी मुद्रा | विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 |
| भुगतान प्रणालियाँ | भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 |
| स्थानीय बोर्ड | चार, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और नई दिल्ली में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय रिज़र्व बैंक का राष्ट्रीयकरण किस वर्ष हुआ था?
- A.1971
- B.1956
- C.1949
- D.1935
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1949
व्याख्या
सही उत्तर C, 1949 है। भारतीय रिज़र्व बैंक आरंभ में शेयरधारकों का बैंक था और इसे रिज़र्व बैंक (सार्वजनिक स्वामित्व में अंतरण) अधिनियम 1948 के अंतर्गत 1 जनवरी 1949 को सार्वजनिक स्वामित्व में ले लिया गया। तब से इसकी संपूर्ण पूँजी भारत सरकार के पास है, यद्यपि बैंक का संचालन उसके अपने 1934 के अधिनियम के अंतर्गत बने केंद्रीय बोर्ड द्वारा ही होता है।
विकल्प A, 1971, 1969 के बैंक राष्ट्रीयकरण के निकट है, इसलिए भ्रम के लिए रखा गया है। विकल्प B, 1956, वह वर्ष है जब इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया को भारतीय स्टेट बैंक के रूप में पुनर्गठित करने की प्रक्रिया चल रही थी, और परीक्षार्थी इसे इस घटना से मिला देते हैं। विकल्प D, 1935, वह वर्ष है जब रिज़र्व बैंक ने 1934 के अधिनियम के अंतर्गत 1 अप्रैल को कार्य आरंभ किया, और यही चारों में सबसे आम गलत उत्तर है।
विदेशी मुद्रा भंडार के प्रबंधन से संबंधित विधिक प्रावधान भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, ______ में दिए गए हैं।
- A.1947
- B.1934
- C.1923
- D.1971
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1934
व्याख्या
सही उत्तर B, 1934 है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 वही विधि है जिसने बैंक की स्थापना की और इसी में देश के विदेशी मुद्रा भंडार की अभिरक्षा तथा उसके नियोजन संबंधी प्रावधान हैं, जिस भंडार को बैंक रखता और निवेश करता है। निवासियों के विदेशी मुद्रा संबंधी दैनिक लेनदेन अलग से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 से नियंत्रित होते हैं, जिसने 1973 के पुराने विनियमन अधिनियम का स्थान लिया, परंतु बैंक की अपनी भंडार प्रबंधन शक्तियाँ उसके स्थापक अधिनियम से आती हैं।
विकल्प A, 1947, स्वतंत्रता का वर्ष और पहले के विदेशी मुद्रा विनियमन कानून का वर्ष है, इसलिए आकर्षक लगता है। विकल्प C, 1923, बहुत पहले का है, क्योंकि बैंक की संस्तुति देने वाले हिल्टन यंग आयोग ने 1926 में ही रिपोर्ट दी थी। विकल्प D, 1971, रिज़र्व बैंक की किसी संबंधित विधि से मेल नहीं खाता।
भारत में रेपो दर और रिवर्स रेपो दर इनमें से कौन सी संस्था निर्धारित करती है?
- A.वित्त मंत्रालय
- B.भारतीय स्टेट बैंक
- C.भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
- D.भारतीय रिज़र्व बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. भारतीय रिज़र्व बैंक
व्याख्या
सही उत्तर D, भारतीय रिज़र्व बैंक है। नीतिगत दरों की घोषणा रिज़र्व बैंक करता है, और 2016 से यह निर्णय गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति लेती है। रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध बैंक से अल्पकालिक धन उधार लेते हैं, और रिवर्स रेपो वह दर है जिस पर बैंक उनकी अतिरिक्त राशि अपने पास लेता है, अतः दोनों केंद्रीय बैंक के उपकरण हैं, किसी अन्य निकाय के नहीं।
विकल्प A, वित्त मंत्रालय, बैंक के परामर्श से मुद्रास्फीति लक्ष्य तय करता है और समिति के तीन सदस्य नियुक्त करता है, परंतु दरें नहीं तय करता। विकल्प B, भारतीय स्टेट बैंक, एक वाणिज्यिक बैंक है जो इन्हीं दरों पर उधार लेता है। विकल्प C, नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक, सरकारी लेखाओं की लेखापरीक्षा करता है और मौद्रिक नीति में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपना कार्य कब आरंभ किया?
- A.1 अप्रैल 1935
- B.1 जुलाई 1955
- C.1 जनवरी 1949
- D.1 अप्रैल 1934
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 1 अप्रैल 1935
व्याख्या
सही उत्तर A, 1 अप्रैल 1935 है। भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 में पारित हुआ और बैंक ने अगले वर्ष अप्रैल की पहली तारीख को कलकत्ता स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय से कार्य आरंभ किया। इसकी स्थापना हिल्टन यंग आयोग की संस्तुति पर शेयरधारकों के बैंक के रूप में हुई, और इसके पहले गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ थे।
विकल्प B, 1 जुलाई 1955, वह दिन है जब इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का पुनर्गठन भारतीय स्टेट बैंक के रूप में हुआ। विकल्प C, 1 जनवरी 1949, रिज़र्व बैंक के राष्ट्रीयकरण का दिन है, जो एक भिन्न पड़ाव है। विकल्प D, 1 अप्रैल 1934, कार्य आरंभ की तिथि को अधिनियम के वर्ष से मिला देता है और यही वह जाल है जो उन परीक्षार्थियों को पकड़ता है जिन्हें अंक तो याद हैं पर यह नहीं कि कौन सा किससे जुड़ा है।
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना की संस्तुति किस आयोग ने की थी?
- A.हिल्टन यंग आयोग
- B.नरसिंहम समिति
- C.फजल अली आयोग
- D.सरकारिया आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हिल्टन यंग आयोग
व्याख्या
सही उत्तर A, हिल्टन यंग आयोग है। औपचारिक रूप से यह भारतीय मुद्रा एवं वित्त संबंधी रॉयल कमीशन था, जिसने 1926 में रिपोर्ट दी और संस्तुति की कि उस समय सरकार तथा इंपीरियल बैंक के बीच बँटे मुद्रा और साख संबंधी कार्य एक ही केंद्रीय बैंक को सौंपे जाएँ। इसी संस्तुति से भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 बना और 1935 में बैंक खुला।
विकल्प B, नरसिंहम समिति, ने 1991 और 1998 में बैंकिंग सुधार, विवेकपूर्ण मानकों और समेकन पर रिपोर्ट दी, जो बैंक के अस्तित्व में आने के बहुत बाद की बात है। विकल्प C, फजल अली आयोग, 1955 का राज्य पुनर्गठन आयोग था और राजव्यवस्था से संबंधित है, बैंकिंग से नहीं। विकल्प D, सरकारिया आयोग, ने अस्सी के दशक में केंद्र राज्य संबंधों की जाँच की। इनमें केवल पहला ही मुद्रा और वित्त संबंधी निकाय है।
भारतीय रिज़र्व बैंक के पहले गवर्नर कौन थे?
- A.सी. डी. देशमुख
- B.सर ओसबोर्न स्मिथ
- C.सर जेम्स टेलर
- D.बेनेगल रामा राव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सर ओसबोर्न स्मिथ
व्याख्या
सही उत्तर B, सर ओसबोर्न स्मिथ है। बैंक के 1935 में खुलने पर उन्होंने पहले गवर्नर के रूप में कार्यभार संभाला, और इससे पहले वे इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध गवर्नर रह चुके थे। विनिमय दर और ब्याज दर नीति पर सरकार से मतभेद के कारण उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया।
विकल्प A, सी. डी. देशमुख, बैंक के पहले भारतीय गवर्नर थे और बाद में संघ के वित्त मंत्री बने, इसीलिए यह यहाँ सबसे आकर्षक गलत उत्तर है। विकल्प C, सर जेम्स टेलर, दूसरे गवर्नर थे और उन्हीं के समय 1937 में केंद्रीय कार्यालय बंबई गया। विकल्प D, बेनेगल रामा राव, ने सबसे लंबे कार्यकाल तक गवर्नर पद संभाला और वित्त मंत्री से मतभेद पर त्यागपत्र दिया। प्रश्न ध्यान से पढ़िए: पहले गवर्नर और पहले भारतीय गवर्नर भिन्न व्यक्ति हैं।
निम्नलिखित में से कौन भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी नहीं किया जाता?
- A.दस रुपये का नोट
- B.पचास रुपये का नोट
- C.एक रुपये का नोट
- D.पाँच सौ रुपये का नोट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक रुपये का नोट
व्याख्या
सही उत्तर C, एक रुपये का नोट है। एक रुपये का नोट भारत सरकार वित्त मंत्रालय के माध्यम से जारी करती है और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं, गवर्नर के नहीं। सभी सिक्के भी सरकार ही जारी करती है। रिज़र्व बैंक को अपने अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत दो रुपये और उससे ऊपर के बैंक नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार है, और वह सरकार के अभिकर्ता के रूप में सरकारी सिक्के तथा एक रुपये का नोट प्रचलन में भी लाता है।
विकल्प A, B और D सभी एक रुपये से अधिक मूल्य के नोट हैं, अतः वे रिज़र्व बैंक द्वारा मुद्रित और जारी किए जाते हैं तथा उन पर गवर्नर के हस्ताक्षर और धारक को भुगतान का वचन अंकित होता है। यह प्रश्न जारीकर्ता के विषय में है, प्रचलन में लाने वाले के विषय में नहीं, और यही पूरा जाल है।
भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति में कितने सदस्य होते हैं?
- A.चार
- B.पाँच
- C.छह
- D.आठ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. छह
व्याख्या
सही उत्तर C, छह है। यह समिति 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के संशोधन से बनी। तीन सदस्य बैंक से आते हैं, अर्थात अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित एक अधिकारी, तथा तीन केंद्र सरकार नियुक्त करती है। प्रत्येक सदस्य का एक मत होता है, मत बराबर होने पर गवर्नर को निर्णायक मत प्राप्त है, और समिति को वर्ष में कम से कम चार बार बैठक करनी होती है।
विकल्प A, चार, वर्ष में बैठकों की न्यूनतम संख्या और बैठक का गणपूर्ति अंक भी है, इसलिए इसे सदस्य संख्या से भ्रमित कराने के लिए रखा गया है। विकल्प B, पाँच, और विकल्प D, आठ, अधिनियम के किसी प्रावधान से मेल नहीं खाते। यह याद रखिए कि निर्णय समिति का होता है, अकेले गवर्नर का नहीं, यही सुधार इस संशोधन ने किया।
जब भारतीय रिज़र्व बैंक किसी सुदृढ़ बैंक को ऋण देता है जो कहीं और से धन नहीं जुटा पा रहा, तब वह कौन सा कार्य कर रहा होता है?
- A.सरकार का बैंकर
- B.अंतिम ऋणदाता
- C.विदेशी मुद्रा का संरक्षक
- D.सार्वजनिक ऋण का प्रबंधक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अंतिम ऋणदाता
व्याख्या
सही उत्तर B, अंतिम ऋणदाता है। यह केंद्रीय बैंक का परंपरागत कार्य है: जब कोई बैंक शोधक्षम है पर नकदी की कमी में है और न बाजार न दूसरे बैंक उसे ऋण देते हैं, तब रिज़र्व बैंक पात्र प्रतिभूतियों के विरुद्ध उसे ऋण देता है, ताकि स्थानीय कमी सामान्य घबराहट और जमा निकासी की दौड़ में न बदले। सीमांत स्थायी सुविधा इसी खिड़की का एक आधुनिक रूप है।
विकल्प A, सरकार का बैंकर, संघ और राज्य सरकारों के खाते रखने तथा उनकी ओर से भुगतान करने का कार्य है। विकल्प C, विदेशी मुद्रा का संरक्षक, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 के अंतर्गत देश का भंडार रखने और निवेश करने का कार्य है। विकल्प D, सार्वजनिक ऋण का प्रबंधक, राजकोषीय बिल तथा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करने, उन पर ब्याज देने और उन्हें भुनाने का कार्य है। चारों बैंक के वास्तविक कार्य हैं, परंतु प्रश्न के विवरण पर केवल एक ही खरा उतरता है।
1957 से अपनाई गई न्यूनतम प्रारक्षित निधि प्रणाली के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को कम से कम कितनी परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं?
- A.दो सौ करोड़ रुपये, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ का हो
- B.एक सौ करोड़ रुपये, जिनमें स्वर्ण कम से कम पचास करोड़ का हो
- C.पाँच सौ करोड़ रुपये, जिनमें स्वर्ण कम से कम दो सौ करोड़ का हो
- D.दो सौ करोड़ रुपये, पूर्णतः स्वर्ण में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दो सौ करोड़ रुपये, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ का हो
व्याख्या
सही उत्तर A है। 1957 से भारत में नोट निर्गम की न्यूनतम प्रारक्षित निधि प्रणाली चल रही है, जिसके अंतर्गत रिज़र्व बैंक को प्रचलन में मौजूद नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का हो और शेष विदेशी प्रतिभूतियों में रखा जा सके। इस प्रणाली ने पहले की आनुपातिक प्रारक्षित प्रणाली का स्थान लिया और नोट निर्गम को सोने के एक निश्चित अनुपात से बँधे रहने के बजाय बढ़ती अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के साथ बढ़ने देती है।
विकल्प B दोनों अंक कम बताता है। विकल्प C दोनों अंक अधिक बताता है। विकल्प D इसलिए गलत है कि यह प्रारक्षित निधि पूरी तरह स्वर्ण में नहीं रखी जाती; केवल छोटा स्वर्ण अंश निश्चित है और शेष अनुमोदित विदेशी प्रतिभूतियों में रखा जा सकता है। प्रश्नपत्र इसी अंक युग्म को परखते हैं, इसलिए दोनों संख्याएँ साथ याद कीजिए।
भारत में भुगतान प्रणालियों के नियमन और पर्यवेक्षण का अधिकार भारतीय रिज़र्व बैंक को किस कानून से मिलता है?
- A.बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949
- B.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
- C.परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881
- D.कंपनी अधिनियम, 2013
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007
व्याख्या
सही उत्तर B, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 है। यह अधिनियम भारतीय रिज़र्व बैंक को भारत में भुगतान प्रणालियों के नियमन और पर्यवेक्षण के लिए नामित प्राधिकारी बनाता है, जिससे कोई भी व्यक्ति उसके प्राधिकार के बिना भुगतान प्रणाली नहीं चला सकता। वास्तविक समय सकल निपटान, राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण प्रणाली तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की खुदरा प्रणालियाँ इसी ढाँचे के अंतर्गत चलती हैं।
विकल्प A, बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949, स्वयं बैंकों के लाइसेंस, पूँजी, प्रबंधन और निरीक्षण को नियंत्रित करता है। विकल्प C, परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881, चेक, विनिमय पत्र और वचन पत्र तथा चेक अनादर के अपराध को नियंत्रित करता है, और यही सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है क्योंकि चेक भी भुगतान का साधन है। विकल्प D, कंपनी अधिनियम 2013, सामान्य रूप से कंपनियों के निगमन और प्रबंधन को नियंत्रित करता है।
भारतीय रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय कलकत्ता से बंबई किस वर्ष स्थानांतरित हुआ?
- A.1935
- B.1937
- C.1949
- D.1955
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1937
व्याख्या
सही उत्तर B, 1937 है। रिज़र्व बैंक 1935 में कलकत्ता में खुला और दो वर्ष बाद उसने अपना केंद्रीय कार्यालय स्थायी रूप से बंबई स्थानांतरित कर दिया, जहाँ गवर्नर बैठते हैं और जहाँ से नीति की घोषणा होती है। बैंक के चार स्थानीय बोर्ड भी हैं, पश्चिमी, पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी क्षेत्रों के लिए, जिनके मुख्यालय मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और नई दिल्ली में हैं।
विकल्प A, 1935, वह वर्ष है जब बैंक ने कार्य आरंभ किया, कलकत्ता में, बंबई में नहीं। विकल्प C, 1949, राष्ट्रीयकरण का वर्ष है, जब स्वामित्व भारत सरकार के पास आया और कार्यालय में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। विकल्प D, 1955, वह वर्ष है जब इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया से भारतीय स्टेट बैंक का गठन हुआ। इनमें से तीन वर्ष वास्तविक पड़ाव हैं, इसलिए यह प्रश्न उसी परीक्षार्थी को अंक देता है जिसने प्रत्येक वर्ष को सही घटना से जोड़ा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में एक रुपये का नोट कौन जारी करता है?
भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के माध्यम से, और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। सभी सिक्के भी सरकार ही जारी करती है। रिज़र्व बैंक दो रुपये और उससे ऊपर के नोट जारी करता है, तथा सरकार के सिक्के और एक रुपये का नोट उसकी ओर से प्रचलन में लाता है।
न्यूनतम प्रारक्षित निधि प्रणाली क्या है?
यह 1957 से भारत में नोट निर्गम के लिए अपनाया गया नियम है। रिज़र्व बैंक को जारी किए गए नोटों के विरुद्ध कम से कम दो सौ करोड़ रुपये की परिसंपत्तियाँ रखनी होती हैं, जिनमें स्वर्ण कम से कम एक सौ पंद्रह करोड़ रुपये का होना चाहिए। इसने पहले की आनुपातिक प्रारक्षित प्रणाली का स्थान लिया और नोट निर्गम को अर्थव्यवस्था की आवश्यकता के साथ बढ़ने देता है।
अंतिम ऋणदाता का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है कि जब कोई शोधक्षम बैंक बाजार या अन्य बैंकों से धन न जुटा पाए, तब रिज़र्व बैंक पात्र प्रतिभूतियों के विरुद्ध उसे ऋण देता है। उद्देश्य यह है कि एक बैंक की नकदी की कमी सामान्य घबराहट में न बदल जाए, और यह किसी भी केंद्रीय बैंक का परिभाषक कार्य है।
मौद्रिक नीति समिति में कितने सदस्य होते हैं?
छह। तीन रिज़र्व बैंक से होते हैं, अर्थात अध्यक्ष के रूप में गवर्नर, मौद्रिक नीति के प्रभारी उप गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी, तथा तीन केंद्र सरकार नियुक्त करती है। प्रत्येक का एक मत होता है और मत बराबर होने पर गवर्नर दोबारा मत देते हैं।
रिज़र्व बैंक कौन से कार्य नहीं करता?
यह संघ का बजट नहीं बनाता, कर की दरें नहीं तय करता और राजकोषीय घाटा निर्धारित नहीं करता, ये सब सरकार के विषय हैं। यह शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड का नियमन नहीं करता, जो प्रतिभूति बाजार नियामक के अधीन हैं, न ही बीमा कंपनियों या पेंशन निधियों का। यह जनता को सीधे ऋण भी नहीं देता।
रेपो दर और बैंक दर में क्या अंतर है?
रेपो दर वह दर है जिस पर रिज़र्व बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के विरुद्ध, जिन्हें बाद में पुनः खरीदा जाता है, बैंकों को अल्प अवधि के लिए ऋण देता है, और यही मौद्रिक नीति समिति द्वारा घोषित नीतिगत दर है। बैंक दर वह दर है जिस पर बैंक ऐसे पुनर्खरीद करार के बिना दीर्घकालिक अग्रिम देता है, और अब यह आपात ऋण खिड़की से जुड़ी हुई है।
स्रोत
- हमारे बारे में: भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्य — भारतीय रिज़र्व बैंक
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934, यथासंशोधित — भारतीय रिज़र्व बैंक
- बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार


