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GK नोट्सबैंकिंग और वित्तीय जागरूकतालघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक

लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक: आरबीआई के नियम

भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक पर बैंकिंग जागरूकता नोट्स, आरबीआई के दिशानिर्देश, पूंजी और जमा सीमाएं, ऋण संबंधी शर्तें तथा परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रथम तथ्य।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक: आरबीआई के नियम — GK24 title card
लघु वित्त बैंक और भुगतान बैंक: आरबीआई के नियम — GK24 title card

सार्वत्रिक बैंक सब कुछ करता है, वह किसी भी आकार की जमा लेता है और किसी को भी ऋण देता है। विभेदित बैंक को उस काम का केवल एक भाग करने का लाइसेंस मिलता है, और बदले में प्रवेश की शर्तें हल्की रहती हैं, तथा भारत ने ऐसी दो श्रेणियां एक ही दिशानिर्देश समूह में बनाईं। परीक्षक की रुचि सीमा रेखा में है। भुगतान बैंक जमा ले सकता है परंतु ऋण नहीं दे सकता, लघु वित्त बैंक दोनों कर सकता है परंतु उसे अधिकतर छोटा ऋण ही देना है। यह याद कर लें कि प्रत्येक सीमा कहां पड़ती है और उससे जुड़े आंकड़े क्या हैं, तो इस अध्याय का हर प्रश्न स्मरण का प्रश्न बन जाता है।

ये दो श्रेणियां क्यों बनीं

भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2013 में नचिकेत मोर की अध्यक्षता में लघु व्यवसायों तथा निम्न आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवा समिति गठित की। 2014 के आरंभ में प्रस्तुत उसके प्रतिवेदन ने कहा कि वित्तीय समावेशन संकुचित उद्देश्य के लिए बने बैंकों से अधिक शीघ्र आएगा, बजाय इसके कि पूर्ण सेवा बैंकों के अंतिम गांव तक पहुंचने की प्रतीक्षा की जाए। इसी पर कार्य करते हुए रिजर्व बैंक ने 27 नवंबर 2014 को भुगतान बैंकों तथा लघु वित्त बैंकों के लाइसेंस के अंतिम दिशानिर्देश जारी किए। आवेदकों को 2015 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिली, भुगतान बैंकों को अगस्त में और लघु वित्त बैंकों को उसी वर्ष सितंबर में। दोनों श्रेणियां कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकृत होती हैं और बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 22 के अंतर्गत लाइसेंस पाती हैं, और रिजर्व बैंक के संतुष्ट होने पर वे भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची में अनुसूचित बैंक के रूप में सम्मिलित की जाती हैं।

भुगतान बैंक

भुगतान बैंक का उद्देश्य धन का हस्तांतरण तथा प्रवासी श्रमिकों, निम्न आय परिवारों, लघु व्यवसायों और असंगठित क्षेत्र की छोटी बचत रखना है। वह मांग जमा अर्थात बचत और चालू खाते स्वीकार कर सकता है, परंतु प्रत्येक व्यक्तिगत ग्राहक के लिए दो लाख रुपये की सीमा के अधीन, दिशानिर्देश जारी होते समय यह सीमा एक लाख रुपये थी और अप्रैल 2021 में बढ़ाई गई। वह डेबिट कार्ड जारी कर सकता है, किसी भी माध्यम से भुगतान और विप्रेषण सेवाएं दे सकता है, तथा किसी अन्य बैंक का व्यवसाय प्रतिनिधि बन सकता है। वह ऐसे सरल उत्पाद भी वितरित कर सकता है जिनमें उसका कोई जोखिम नहीं होता, जैसे म्यूचुअल फंड की इकाइयां, बीमा और पेंशन उत्पाद।

जो वह नहीं कर सकता, वह भाग परीक्षा में अधिक पूछा जाता है। भुगतान बैंक ऋण नहीं दे सकता, किसी भी प्रकार का ऋण नहीं और क्रेडिट कार्ड भी नहीं। वह अनिवासी भारतीयों से जमा स्वीकार नहीं कर सकता, और गैर बैंकिंग वित्तीय व्यवसाय के लिए अनुषंगी कंपनी नहीं बना सकता। चूंकि वह ऋण नहीं दे सकता, उसका धन सुरक्षित परिसंपत्तियों में रखना पड़ता है, और नियम स्पष्ट है, उसकी मांग जमा शेष का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत सांविधिक तरलता अनुपात के लिए योग्य सरकारी प्रतिभूतियों तथा राजकोष बिलों में एक वर्ष तक की परिपक्वता के साथ निवेश करना होगा, और पच्चीस प्रतिशत से अधिक अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के चालू खातों तथा सावधि जमाओं में नहीं रखा जा सकता। न्यूनतम प्रदत्त इक्विटी पूंजी सौ करोड़ रुपये है, प्रवर्तक को उसका कम से कम चालीस प्रतिशत लाना होगा और वह हिस्सा पांच वर्ष तक अवरुद्ध रहेगा, तथा नकद आरक्षित अनुपात अन्य बैंकों की तरह लागू होता है।

लघु वित्त बैंक

लघु वित्त बैंक सामान्य बैंकिंग करता है, परंतु एक विशेष वर्ग के लिए, लघु व्यवसाय इकाइयां, छोटे और सीमांत किसान, सूक्ष्म तथा लघु उद्योग और असंगठित क्षेत्र की इकाइयां। वह प्रति ग्राहक सीमा के बिना जमा लेता है और ऋण देता है, परंतु तीन अनुपात उसकी पहचान बनाते हैं। उसके समायोजित निवल बैंक ऋण का पचहत्तर प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्र को जाना चाहिए, जबकि सार्वत्रिक बैंक के लिए यह चालीस प्रतिशत है। उसके ऋण संविभाग का कम से कम पचास प्रतिशत पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों का होना चाहिए, यही नियम उसके ऋण को छोटा रखता है। और उसके कम से कम पच्चीस प्रतिशत बैंकिंग केंद्र बैंक रहित ग्रामीण केंद्रों में होने चाहिए, जिन्हें नवीनतम जनगणना के अनुसार 9,999 तक जनसंख्या वाले केंद्र माना जाता है।

पूंजी की शर्त एक बार बदली है और प्रश्नपत्र उस परिवर्तन को जांचते हैं। 2014 के दिशानिर्देशों ने न्यूनतम प्रदत्त मताधिकार इक्विटी पूंजी सौ करोड़ रुपये रखी, 5 दिसंबर 2019 के आन टैप लाइसेंसिंग दिशानिर्देशों ने इसे दो सौ करोड़ रुपये कर दिया, तथा स्वेच्छा से परिवर्तित होने वाले शहरी सहकारी बैंकों को यह छूट दी कि वे सौ करोड़ से आरंभ कर पांच वर्ष में दो सौ करोड़ तक पहुंचें। प्रवर्तक का योगदान भुगतान बैंक की तरह चालीस प्रतिशत है, और लघु वित्त बैंक को पांच सौ करोड़ रुपये की निवल संपत्ति तक पहुंचने के तीन वर्ष के भीतर अपने शेयर सूचीबद्ध कराने होते हैं। उसके कार्यक्षेत्र पर कोई प्रतिबंध नहीं है, और वह गैर बैंकिंग वित्तीय कार्य के लिए अनुषंगी कंपनी नहीं बना सकता।

दोनों की तुलना

विशेषताभुगतान बैंकलघु वित्त बैंक
दिशानिर्देश जारी27 नवंबर 201427 नवंबर 2014, आन टैप दिशानिर्देश 5 दिसंबर 2019
न्यूनतम प्रदत्त पूंजीसौ करोड़ रुपयेसौ करोड़ रुपये, आन टैप मार्ग में दो सौ करोड़
ऋण देनापूर्णतः वर्जितअनुमत, समायोजित निवल बैंक ऋण का पचहत्तर प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्र को
जमाकेवल मांग जमा, प्रति ग्राहक दो लाख रुपये तकसभी जमा, प्रति ग्राहक कोई सीमा नहीं
कार्डडेबिट कार्ड हां, क्रेडिट कार्ड नहींदोनों अनुमत
निवेश नियममांग जमा शेष का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत एक वर्ष तक की सरकारी प्रतिभूतियों मेंसामान्य सांविधिक तरलता अनुपात तथा नकद आरक्षित अनुपात
प्रवर्तक योगदानकम से कम चालीस प्रतिशत, पांच वर्ष तक अवरुद्धकम से कम चालीस प्रतिशत, पांच वर्ष तक अवरुद्ध

नाम और प्रथम तथ्य

एयरटेल पेमेंट्स बैंक कार्य आरंभ करने वाला पहला भुगतान बैंक था, जनवरी 2017 में। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक 1 सितंबर 2018 को आरंभ हुआ, यह पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व में है और डाक विभाग तथा डाकघरों के जाल के माध्यम से कार्य करता है। जालंधर का कैपिटल स्माल फाइनेंस बैंक कार्य आरंभ करने वाला पहला लघु वित्त बैंक था, अप्रैल 2016 में। अधिकांश लघु वित्त बैंक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकृत सूक्ष्म वित्त संस्थाओं से परिवर्तित हुए, जबकि एयू स्माल फाइनेंस बैंक एक सामान्य गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी से परिवर्तित हुआ, और कुछ लघु वित्त बैंकों को आगे सार्वत्रिक बैंक लाइसेंस की दिशा में बढ़ने की अनुमति भी मिली है।

प्रश्नपत्र कहां जाल लगाते हैं

पहला जाल दोनों श्रेणियां बदल देता है, प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण का प्रश्न लघु वित्त बैंक का है और जमा सीमा का प्रश्न भुगतान बैंक का। दूसरा जाल पचहत्तर और पच्चीस प्रतिशत का जोड़ा है, जो दोनों श्रेणियों में भिन्न अर्थों के साथ आता है, इसलिए पढ़िए कि प्रश्न जमा के निवेश के विषय में है या प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण के विषय में। तीसरा पूंजी का आंकड़ा है, जहां सौ करोड़ भुगतान बैंक के लिए तथा लघु वित्त बैंक के पुराने नियम के लिए सही है, और दो सौ करोड़ आन टैप मार्ग के लिए। और यह याद रखिए कि दोनों भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की दूसरी अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित बैंक हैं, इसलिए उनमें रखी जमा पर अन्य बैंकों की तरह जमा बीमा का संरक्षण है।

परीक्षा की दृष्टि से

बैंकिंग जागरूकता के प्रश्नपत्र इस अध्याय को उसके आंकड़ों और निषेधों से पूछते हैं। भुगतान बैंक की जमा सीमा, उसका ऋण न देना और क्रेडिट कार्ड न जारी करना, उसका पचहत्तर प्रतिशत निवेश नियम, प्रत्येक श्रेणी की न्यूनतम पूंजी तथा लघु वित्त बैंक के लिए सौ से दो सौ करोड़ का परिवर्तन अपेक्षित है। लघु वित्त बैंक की ओर से पचहत्तर प्रतिशत प्राथमिकता क्षेत्र लक्ष्य, पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों में संविभाग का पचास प्रतिशत तथा बैंक रहित ग्रामीण केंद्रों में पच्चीस प्रतिशत केंद्र अपेक्षित हैं। कथन आधारित प्रश्न, जिनमें दो या तीन कथनों में से सही चुनना होता है, सामान्य हैं और वे प्रायः एक श्रेणी का नियम दूसरी में डालकर बनाए जाते हैं। सुधार के पीछे की समिति, दिशानिर्देशों का वर्ष, बैंककारी विनियमन अधिनियम की धारा तथा प्रत्येक प्रकार का पहला बैंक भी तैयार रखें।

महत्वपूर्ण तथ्य

सुधार के पीछे की समितिनचिकेत मोर समिति, व्यापक वित्तीय सेवा पर, 2013 में गठित
दिशानिर्देश जारी27 नवंबर 2014, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा
लाइसेंस का आधारबैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 22
भुगतान बैंक की जमा सीमाप्रति व्यक्तिगत ग्राहक दो लाख रुपये, अप्रैल 2021 में एक लाख से बढ़ाई गई
भुगतान बैंक की पूंजीन्यूनतम प्रदत्त इक्विटी पूंजी सौ करोड़ रुपये
भुगतान बैंक का निवेश नियममांग जमा शेष का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत एक वर्ष तक की सरकारी प्रतिभूतियों में
भुगतान बैंक पर निषेधऋण नहीं, क्रेडिट कार्ड नहीं, अनिवासी जमा नहीं, गैर बैंकिंग वित्तीय अनुषंगी नहीं
लघु वित्त बैंक का प्राथमिकता क्षेत्र लक्ष्यसमायोजित निवल बैंक ऋण का पचहत्तर प्रतिशत
लघु वित्त बैंक का संविभाग नियमकम से कम पचास प्रतिशत ऋण पच्चीस लाख रुपये तक के हों
बैंक रहित ग्रामीण केंद्रकम से कम पच्चीस प्रतिशत बैंकिंग केंद्र 9,999 तक जनसंख्या वाले केंद्रों में
लघु वित्त बैंक के लिए आन टैप लाइसेंसिंग5 दिसंबर 2019 के दिशानिर्देश, न्यूनतम निवल संपत्ति दो सौ करोड़ रुपये
प्रवर्तक का योगदानदोनों श्रेणियों में प्रदत्त मताधिकार इक्विटी का कम से कम चालीस प्रतिशत, पांच वर्ष अवरुद्ध
पहला भुगतान बैंकएयरटेल पेमेंट्स बैंक, जनवरी 2017
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक1 सितंबर 2018 को आरंभ, पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व में
पहला लघु वित्त बैंककैपिटल स्माल फाइनेंस बैंक, जालंधर, अप्रैल 2016

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारतीय रिजर्व बैंक ने भुगतान बैंकों और लघु वित्त बैंकों के लाइसेंस के अंतिम दिशानिर्देश किस वर्ष जारी किए?

  1. A.2012
  2. B.2014
  3. C.2016
  4. D.2019
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2014

व्याख्या

सही उत्तर B, 2014 है। रिजर्व बैंक ने 27 नवंबर 2014 को भुगतान बैंकों तथा लघु वित्त बैंकों दोनों के लाइसेंस के अंतिम दिशानिर्देश जारी किए, जो लघु व्यवसायों और निम्न आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवा पर नचिकेत मोर समिति के प्रतिवेदन पर आधारित थे। विकल्प A, 2012, तो उस समिति के गठन से भी पहले है, जो सितंबर 2013 में बनी। विकल्प C, 2016, वह वर्ष है जब पहला लघु वित्त बैंक कार्य आरंभ किया, जब उसी वर्ष अप्रैल में कैपिटल स्माल फाइनेंस बैंक खुला, इसलिए वह व्यवसाय के आरंभ का वर्ष है, नियम बनने का नहीं। विकल्प D, 2019, वह वर्ष है जब रिजर्व बैंक ने 5 दिसंबर को लघु वित्त बैंकों के लिए आन टैप लाइसेंसिंग दिशानिर्देश जारी किए, जिसने न्यूनतम निवल संपत्ति की शर्त दो सौ करोड़ रुपये कर दी, यही सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है क्योंकि वह भी दिशानिर्देश की तिथि है, इसलिए पढ़िए कि प्रश्न मूल दिशानिर्देश पूछ रहा है या आन टैप वाले।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भुगतान बैंक किसी व्यक्तिगत ग्राहक के लिए अधिकतम कितना शेष रख सकता है?

  1. A.50,000 रुपये
  2. B.1 लाख रुपये
  3. C.2 लाख रुपये
  4. D.कोई सीमा नहीं है
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 2 लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर C, दो लाख रुपये है। भुगतान बैंक मांग जमा अर्थात बचत और चालू खाते स्वीकार कर सकता है, परंतु बैंक में किसी व्यक्तिगत ग्राहक का कुल शेष दिन के अंत में दो लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकता। विकल्प B, एक लाख रुपये, 2014 के दिशानिर्देशों में रखी गई मूल सीमा थी और यही सबसे प्रचलित गलत उत्तर है, क्योंकि रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2021 में इस सीमा को दो लाख कर दिया, जिससे ये बैंक छोटे बचतकर्ताओं और छोटे व्यवसायों के लिए अधिक उपयोगी हो सकें। विकल्प A, पचास हजार रुपये, इन दिशानिर्देशों के अंतर्गत कोई सीमा नहीं है और यह बैंकिंग के अन्य भागों के लघु खाता तथा मूल बचत खाता स्तरों से लिया गया है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह सीमा भुगतान बैंक के लाइसेंस की परिभाषिक विशेषता है, इसके विपरीत लघु वित्त बैंक पर जमा की प्रति ग्राहक कोई सीमा नहीं है, और प्रश्न यही अंतर जांच रहा है।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

निम्नलिखित में से कौन सा कार्य भुगतान बैंक को करने की अनुमति नहीं है?

  1. A.डेबिट कार्ड जारी करना
  2. B.ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना
  3. C.मांग जमा स्वीकार करना
  4. D.म्यूचुअल फंड और बीमा उत्पाद वितरित करना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना

व्याख्या

सही उत्तर B, ऋण देना और क्रेडिट कार्ड जारी करना है। भुगतान बैंक के लाइसेंस से ऋण पूर्णतः बाहर है, वह किसी को ऋण नहीं दे सकता और क्रेडिट कार्ड भी जारी नहीं कर सकता, और यही एक निषेध उसे भारत के हर दूसरे प्रकार के बैंक से अलग करता है। विकल्प A अनुमत है, क्योंकि भुगतान बैंक अपने ग्राहकों को एटीएम तथा डेबिट कार्ड जारी कर सकता है और उन्हें सामान्य भुगतान नेटवर्क पर चला सकता है। विकल्प C अनुमत है, क्योंकि बचत और चालू खातों में मांग जमा स्वीकार करना उसके व्यवसाय का मूल है, प्रति व्यक्तिगत ग्राहक दो लाख रुपये की सीमा के अधीन। विकल्प D अनुमत है, क्योंकि भुगतान बैंक ऐसे सरल वित्तीय उत्पाद वितरित कर सकता है जिनका जोखिम उसके खातों पर नहीं आता, जैसे म्यूचुअल फंड की इकाइयां, बीमा पालिसी और पेंशन उत्पाद, तथा वह किसी अन्य बैंक का व्यवसाय प्रतिनिधि भी बन सकता है।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भुगतान बैंक को अपनी मांग जमा शेष का कम से कम कितना भाग एक वर्ष तक की परिपक्वता वाली सरकारी प्रतिभूतियों और राजकोष बिलों में निवेश करना होता है?

  1. A.40 प्रतिशत
  2. B.50 प्रतिशत
  3. C.75 प्रतिशत
  4. D.100 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 75 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर C, पचहत्तर प्रतिशत है। चूंकि भुगतान बैंक ऋण नहीं दे सकता, दिशानिर्देश यह तय करते हैं कि उसकी जमा कहां जाएगी, मांग जमा शेष का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत सांविधिक तरलता अनुपात के लिए योग्य सरकारी प्रतिभूतियों तथा राजकोष बिलों में एक वर्ष तक की परिपक्वता के साथ निवेश करना होगा, और पच्चीस प्रतिशत से अधिक अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के चालू खातों तथा सावधि जमाओं में परिचालन और तरलता प्रबंध के लिए रखा जा सकता है। विकल्प A, चालीस प्रतिशत, सार्वत्रिक वाणिज्यिक बैंक का प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य है और वह भिन्न नियम का अंग है। विकल्प B, पचास प्रतिशत, लघु वित्त बैंक के ऋण संविभाग का वह भाग है जो पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों में होना चाहिए। विकल्प D, सौ प्रतिशत, गलत है क्योंकि शेष चौथाई भाग जानबूझकर बैंक जमाओं में रखने की अनुमति है, जिससे भुगतान बैंक दैनिक निपटान की आवश्यकता पूरी कर सके।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

लघु वित्त बैंक को अपने समायोजित निवल बैंक ऋण का कितना भाग प्राथमिकता क्षेत्र को देना होता है?

  1. A.40 प्रतिशत
  2. B.60 प्रतिशत
  3. C.75 प्रतिशत
  4. D.50 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 75 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर C, पचहत्तर प्रतिशत है। लघु वित्त बैंक छोटे ऋणियों की सेवा के लिए बना है, और दिशानिर्देश उस उद्देश्य को यह शर्त रखकर लागू करते हैं कि उसके समायोजित निवल बैंक ऋण का पचहत्तर प्रतिशत उन क्षेत्रों को जाए जो प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के लिए योग्य हैं, जिनमें कृषि, सूक्ष्म तथा लघु उद्यम, शिक्षा, आवास और कमजोर वर्ग आते हैं। विकल्प A, चालीस प्रतिशत, सार्वत्रिक घरेलू वाणिज्यिक बैंक का प्राथमिकता क्षेत्र लक्ष्य है, और यही सबसे तीखा भ्रामक विकल्प है क्योंकि अभ्यर्थी वह आंकड़ा सामान्य प्राथमिकता क्षेत्र अध्याय से याद रखते हैं। विकल्प B, साठ प्रतिशत, इन दिशानिर्देशों में कोई लक्ष्य नहीं है। विकल्प D, पचास प्रतिशत, इस अध्याय का वास्तविक आंकड़ा है परंतु भिन्न नियम का, लघु वित्त बैंक के ऋण संविभाग का कम से कम आधा भाग पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों का होना चाहिए, जो ऋण का आकार सीमित करता है, क्षेत्र नहीं।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

लघु वित्त बैंक के ऋण संविभाग का कम से कम 50 प्रतिशत कितनी राशि तक के ऋणों और अग्रिमों का होना चाहिए?

  1. A.10 लाख रुपये
  2. B.25 लाख रुपये
  3. C.50 लाख रुपये
  4. D.1 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 25 लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर B, पच्चीस लाख रुपये है। दिशानिर्देशों की अपेक्षा है कि लघु वित्त बैंक के ऋण संविभाग का कम से कम आधा भाग पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों और अग्रिमों से बने, और इसका उद्देश्य यह है कि बैंक बढ़ने के बाद भी छोटा ऋण देता रहे तथा लाइसेंस मिलने के बाद बड़े कारपोरेट ऋण की ओर न खिसक जाए। विकल्प A, दस लाख रुपये, इन दिशानिर्देशों की सीमा नहीं है, यद्यपि अभ्यर्थी इसे छोटे ऋणी की अन्य योजनाओं से याद कर लेते हैं। विकल्प C, पचास लाख रुपये, तथा विकल्प D, एक करोड़ रुपये, दोनों सीमा से बहुत ऊपर हैं और इस श्रेणी के उद्देश्य को ही विफल कर देंगे, इन्हें इसलिए रखा गया है कि ये लघु व्यवसाय के संभाव्य आंकड़े जैसे लगते हैं। ध्यान रखिए कि यह नियम ऋण का आकार सीमित करता है, जबकि समायोजित निवल बैंक ऋण का पचहत्तर प्रतिशत का अलग नियम यह तय करता है कि ऋण किस क्षेत्र को जाए।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

लघु वित्त बैंक को अपने कम से कम कितने प्रतिशत बैंकिंग केंद्र बैंक रहित ग्रामीण केंद्रों में खोलने होते हैं?

  1. A.10 प्रतिशत
  2. B.25 प्रतिशत
  3. C.50 प्रतिशत
  4. D.75 प्रतिशत
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 25 प्रतिशत

व्याख्या

सही उत्तर B, पच्चीस प्रतिशत है। लघु वित्त बैंक के कम से कम एक चौथाई बैंकिंग केंद्र बैंक रहित ग्रामीण केंद्रों में होने चाहिए, जिन्हें दिशानिर्देश नवीनतम जनगणना के अनुसार 9,999 तक जनसंख्या वाले केंद्र मानते हैं, यही परिभाषा सार्वत्रिक बैंकों के लिए भी प्रयुक्त होती है, और यह शर्त इसलिए है कि वित्तीय समावेशन के नाम पर लाइसेंस पाने वाला बैंक वास्तव में वहीं खुले जहां बैंकिंग नहीं है। विकल्प A, दस प्रतिशत, बहुत कम है और दिशानिर्देशों में इसका कोई आधार नहीं है। विकल्प C, पचास प्रतिशत, ऋण संविभाग का वह भाग है जो पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों में होना चाहिए, इसलिए वह इसी अध्याय के भिन्न नियम का अंग है। विकल्प D, पचहत्तर प्रतिशत, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण लक्ष्य तथा भुगतान बैंक का निवेश अनुपात है, और अभ्यर्थी इसी आंकड़े को सबसे अधिक गलत जगह रखते हैं, क्योंकि पचहत्तर और पच्चीस इस अध्याय में भिन्न अर्थों के साथ बार बार आते हैं।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में भुगतान बैंकों और लघु वित्त बैंकों का निर्माण किस समिति की अनुशंसाओं के बाद हुआ?

  1. A.नरसिम्हम समिति
  2. B.नचिकेत मोर समिति
  3. C.रघुराम राजन समिति
  4. D.उर्जित पटेल समिति
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नचिकेत मोर समिति

व्याख्या

सही उत्तर B, नचिकेत मोर समिति है। रिजर्व बैंक ने सितंबर 2013 में नचिकेत मोर की अध्यक्षता में लघु व्यवसायों तथा निम्न आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवा समिति गठित की, और उसके प्रतिवेदन ने विभेदित बैंक लाइसेंस की अनुशंसा की, जिनमें भुगतान बैंक भी थे, क्योंकि पूर्ण सेवा बैंकों के विस्तार की प्रतीक्षा करने से यह मार्ग वित्तीय समावेशन के लिए तेज था। विकल्प A, नरसिम्हम समिति, ने 1991 और 1998 में बैंकिंग क्षेत्र सुधार, पूंजी पर्याप्तता तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संरचना पर प्रतिवेदन दिए, जो पूरी एक पीढ़ी पहले की बात है। विकल्प C, वित्तीय क्षेत्र सुधार पर रघुराम राजन समिति, ने 2008 में प्रतिवेदन दिया और उसमें छोटे बैंकों की चर्चा भी थी, इसलिए वह वास्तविक भ्रामक विकल्प है, परंतु 2014 के दिशानिर्देश मोर समिति के बाद आए। विकल्प D, उर्जित पटेल समिति, ने मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण तथा मौद्रिक नीति ढांचे की अनुशंसा की, जो सर्वथा भिन्न विषय है।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व वाला और डाक विभाग के माध्यम से कार्य करने वाला कौन सा बैंक 1 सितंबर 2018 को आरंभ हुआ?

  1. A.एयरटेल पेमेंट्स बैंक
  2. B.फिनो पेमेंट्स बैंक
  3. C.इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक
  4. D.कैपिटल स्माल फाइनेंस बैंक
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक

व्याख्या

सही उत्तर C, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक है। यह 1 सितंबर 2018 को आरंभ हुआ, पूर्णतः भारत सरकार के स्वामित्व में है और डाक विभाग के अंतर्गत कार्य करता है, ग्राहकों तक पहुंचने के लिए डाकघरों के जाल तथा डाक कर्मियों का उपयोग करता है, जिससे यह देश में सबसे व्यापक भौतिक पहुंच वाला भुगतान बैंक बनता है। विकल्प A, एयरटेल पेमेंट्स बैंक, भारत में कार्य आरंभ करने वाला पहला भुगतान बैंक था, जनवरी 2017 में, और वह सरकार के स्थान पर निजी प्रवर्तकों का है, इसीलिए प्रथम से जुड़े प्रश्न में वह सबसे प्रबल भ्रामक विकल्प है। विकल्प B, फिनो पेमेंट्स बैंक, एक और निजी प्रवर्तित भुगतान बैंक है। विकल्प D, जालंधर का कैपिटल स्माल फाइनेंस बैंक, दूसरी श्रेणी का है और अप्रैल 2016 में कार्य आरंभ करने वाला पहला लघु वित्त बैंक था। दोनों प्रथम तथ्य और सरकारी स्वामित्व वाला बैंक अलग अलग याद रखिए।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक किस विधिक प्रावधान के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त करते हैं?

  1. A.बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 22
  2. B.भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 45
  3. C.केवल कंपनी अधिनियम 2013
  4. D.भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 22

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 22 है। यही वह धारा है जिसके अंतर्गत रिजर्व बैंक भारत में बैंकिंग व्यवसाय चलाने का लाइसेंस देता है, और दोनों विभेदित श्रेणियां उसी के अंतर्गत लाइसेंस पाती हैं, तथा रिजर्व बैंक के संतुष्ट होने पर वे भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची में भी सम्मिलित होकर अनुसूचित बैंक बनती हैं। विकल्प B भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम के उन भिन्न प्रावधानों की ओर संकेत करता है जो अभिकरण तथा अन्य कार्यों से संबंधित हैं, बैंकिंग लाइसेंस देने से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकरण केवल वह निगमित रूप है जो इन बैंकों को लेना होता है, वह स्वयं बैंकिंग व्यवसाय की अनुमति नहीं देता। विकल्प D, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007, भुगतान प्रणालियों तथा उनके संचालकों जैसे समाशोधन गृहों का विनियमन करता है, बैंकों के लाइसेंस का नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भुगतान बैंक और लघु वित्त बैंक में मुख्य अंतर क्या है?

भुगतान बैंक जमा स्वीकार कर सकता है और धन हस्तांतरित कर सकता है परंतु ऋण नहीं दे सकता। लघु वित्त बैंक जमा भी ले सकता है और ऋण भी दे सकता है, परंतु उसे अपने ऋण का तीन चौथाई भाग प्राथमिकता क्षेत्र को देना होता है और आधा संविभाग पच्चीस लाख रुपये तक के ऋणों में रखना होता है।

भुगतान बैंक के खाते में अधिकतम कितना धन रखा जा सकता है?

प्रति व्यक्तिगत ग्राहक दो लाख रुपये तक, उस ग्राहक की बैंक में रखी सभी जमाओं को जोड़कर। 2014 के दिशानिर्देशों में मूल सीमा एक लाख रुपये थी और रिजर्व बैंक ने अप्रैल 2021 में इसे दो लाख कर दिया।

क्या भुगतान बैंक ऋण दे सकता है या क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है?

नहीं। ऋण देना उसके लाइसेंस से बाहर है, और वह क्रेडिट कार्ड भी जारी नहीं कर सकता। वह डेबिट कार्ड जारी कर सकता है, भुगतान तथा विप्रेषण सेवाएं दे सकता है, किसी अन्य बैंक का व्यवसाय प्रतिनिधि बन सकता है और म्यूचुअल फंड, बीमा तथा पेंशन उत्पाद वितरित कर सकता है।

भुगतान बैंक को अपनी तीन चौथाई जमा सरकारी प्रतिभूतियों में क्यों रखनी होती है?

क्योंकि वह ऋण नहीं दे सकता, इसलिए जमाकर्ताओं का धन सुरक्षित रखते हुए कुछ प्रतिफल पाने का उसके पास दूसरा उपाय नहीं है। नियम के अनुसार मांग जमा शेष का कम से कम पचहत्तर प्रतिशत एक वर्ष तक की सरकारी प्रतिभूतियों और राजकोष बिलों में रहे, तथा पच्चीस प्रतिशत से अधिक अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की जमाओं में न हो।

क्या इन बैंकों में रखी जमा सुरक्षित है?

दोनों श्रेणियां लाइसेंस प्राप्त बैंक हैं और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम की दूसरी अनुसूची में सम्मिलित हैं, इसलिए उनका विनियमन अन्य बैंकों की तरह होता है और उनकी जमाओं पर निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम का वही जमा बीमा संरक्षण लागू होता है।

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