बैंकिंग लोकपाल और ग्राहक अधिकार: आरबी-आईओएस नोट्स
बैंकिंग परीक्षाओं के लिए रिज़र्व बैंक लोकपाल के नोट्स: 1995 और 2006 की योजनाएँ, आरबी-आईओएस 2021, क्षतिपूर्ति सीमाएँ, आंतरिक लोकपाल और ग्राहक अधिकार चार्टर।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

जो बैंक ग्राहक अपने बैंक से संतुष्ट नहीं है, उसके पास दो अलग रास्ते हैं: रिज़र्व बैंक की लोकपाल व्यवस्था, जो निःशुल्क और शीघ्र है, और उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत बने उपभोक्ता आयोग। बैंकिंग जागरूकता के प्रश्नपत्र दोनों पर प्रश्न पूछते हैं, और सबसे अधिक 2021 की रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, उसकी क्षतिपूर्ति सीमाओं तथा उन शर्तों पर, जो शिकायत को लोकपाल के सामने सुनवाई योग्य बनाती हैं।
लोकपाल व्यवस्था का विकास
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पहली बैंकिंग लोकपाल योजना 1995 में लागू की। यह योजना 2002 और फिर 2006 में संशोधित हुई, और 2006 के संस्करण में 2017 में संशोधन करके तीसरे पक्ष के उत्पादों की गलत बिक्री तथा मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग की शिकायतें जोड़ी गईं। इसके बाद दो और योजनाएँ आईं: 2018 में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए लोकपाल योजना और 2019 में डिजिटल लेनदेन के लिए लोकपाल योजना। ग्राहक को यह तय करना पड़ता था कि उसकी शिकायत किस योजना में आती है और किस कार्यालय का क्षेत्रीय अधिकार है — यही कमजोरी रिज़र्व बैंक ने दूर की।
रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, 2021
12 नवंबर 2021 को तीनों योजनाओं को मिलाकर रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना बनाई गई, जिसे आरबी-आईओएस कहा जाता है और जो "एक राष्ट्र, एक लोकपाल" के विचार पर आधारित है। परीक्षा में इसी की विशेषताएँ पूछी जाती हैं:
- यह क्षेत्राधिकार-निरपेक्ष है: शिकायत किसी क्षेत्रीय कार्यालय के बजाय एक ही केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र में जाती है, जो चंडीगढ़ में स्थापित है।
- शिकायत के निर्धारित आधारों की पुरानी सूची हटा दी गई। अब सेवा में कमी ही आधार है, कुछ अपवादों को छोड़कर।
- शिकायत दर्ज करने का कोई शुल्क नहीं है और ग्राहक को वकील की आवश्यकता नहीं होती।
- शिकायत रिज़र्व बैंक के शिकायत प्रबंधन पोर्टल से ऑनलाइन, ईमेल से, अथवा कागज़ पर चंडीगढ़ केंद्र को भेजी जा सकती है।
- विनियमित संस्था को अपना पक्ष रखने और सूचना देने के लिए प्रधान नोडल अधिकारी नियुक्त करना होता है, और ऐसा न करने पर उसका अपील का अधिकार समाप्त हो जाता है।
यह योजना अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंकों, निर्धारित आकार से बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, भुगतान प्रणाली सहभागियों, क्रेडिट सूचना कंपनियों तथा बड़े गैर-अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंकों पर लागू होती है।
लोकपाल क्या कर सकता है और क्या नहीं
| बिंदु | आरबी-आईओएस, 2021 का नियम |
|---|---|
| पहला कदम | पहले बैंक को शिकायत करें और उत्तर के लिए 30 दिन प्रतीक्षा करें |
| समय सीमा | बैंक के उत्तर से एक वर्ष के भीतर, उत्तर न आने पर शिकायत से एक वर्ष के भीतर |
| हानि की क्षतिपूर्ति | वास्तविक हानि या बीस लाख रुपये, जो कम हो |
| उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति | समय की हानि, व्यय, उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए एक लाख रुपये तक |
| अपील | अधिनिर्णय से 30 दिन के भीतर अपीलीय प्राधिकारी को |
| अपीलीय प्राधिकारी | रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक |
| शुल्क | शून्य |
शिकायत सुनवाई योग्य नहीं होती यदि वह पहले बैंक को नहीं दी गई, यदि वह किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ के समक्ष विचाराधीन है या वहाँ तय हो चुकी है, यदि वह समय-बाधित है, अथवा यदि वह तुच्छ या परेशान करने वाली है। लोकपाल बैंक के वाणिज्यिक निर्णय पर विचार नहीं कर सकता, इसलिए ऋण देने से इनकार या उस पर दी गई ब्याज दर योजना के बाहर है; दो बैंकों के बीच के विवाद तथा बैंक के आंतरिक सेवा और भर्ती मामले भी बाहर हैं। जहाँ शिकायत के लिए विस्तृत दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य चाहिए, वहाँ लोकपाल उसे अपनी संक्षिप्त प्रक्रिया के अनुपयुक्त मानकर अस्वीकार कर सकता है। लोकपाल पहले सहमति, सुलह या मध्यस्थता से मामला निपटाने का प्रयास करता है; वह विफल होने पर ही अधिनिर्णय देता है, जो शिकायतकर्ता के पूर्ण और अंतिम निपटान के रूप में स्वीकार करने पर बैंक को बाध्य करता है।
आंतरिक लोकपाल
रिज़र्व बैंक तक पहुँचने से पहले शिकायत बैंक के अपने वरिष्ठ समीक्षक से गुजरनी चाहिए। आंतरिक लोकपाल व्यवस्था के अंतर्गत दस या अधिक शाखाओं वाला प्रत्येक बैंक एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करता है, जो सेवानिवृत्त या वरिष्ठ अधिकारी होता है, साधारण अर्थ में बैंक का कर्मचारी नहीं होता और बोर्ड को रिपोर्ट करता है। बैंक जिस शिकायत को पूर्ण या अंशतः अस्वीकार करने का प्रस्ताव करता है, उसे अंतिम उत्तर भेजने से पहले आंतरिक लोकपाल को भेजना अनिवार्य है, जिससे अस्वीकृति पर एक स्वतंत्र दृष्टि पड़े। रिज़र्व बैंक ने यही अपेक्षा बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, क्रेडिट सूचना कंपनियों और गैर-बैंक भुगतान प्रणाली संचालकों पर भी लागू की है।
ग्राहक अधिकार चार्टर
रिज़र्व बैंक ने 2014 में ग्राहक अधिकार चार्टर जारी किया, जिसमें पाँच अधिकार हैं और प्रत्येक बैंक से अपेक्षा है कि वह उन्हें अपनी नीति में उतारे:
- उचित व्यवहार का अधिकार: लिंग, आयु, धर्म, जाति या शारीरिक क्षमता के आधार पर भेदभाव न हो।
- पारदर्शिता तथा उचित और ईमानदार व्यवहार का अधिकार: अनुबंध सरल भाषा में हों और हस्ताक्षर से पहले सभी प्रभार बताए जाएँ।
- उपयुक्तता का अधिकार: बेचा गया उत्पाद ग्राहक की आवश्यकता और समझ के अनुकूल हो — गलत बिक्री इसी नियम का उल्लंघन है।
- निजता का अधिकार: ग्राहक की सूचना गोपनीय रहे, सिवाय जहाँ कानून उसे देना अपेक्षित करे या ग्राहक अनुमति दे।
- शिकायत निवारण और क्षतिपूर्ति का अधिकार: शिकायत का निपटारा हो, और बैंक के अपने कार्य या उसके लिए काम करने वाले तीसरे पक्ष से हुई हानि की भरपाई हो।
चार्टर के साथ दो संबंधित सुरक्षाएँ पूछी जाती हैं। जमाराशियाँ निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम द्वारा प्रत्येक बैंक में प्रत्येक जमाकर्ता के लिए पाँच लाख रुपये तक बीमित हैं, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों सम्मिलित हैं। और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में ग्राहक की शून्य देयता होती है, जहाँ हानि बैंक की ही लापरवाही या बैंक के स्तर पर हुई चूक से हो, तथा वहाँ भी जहाँ दोष तीसरे पक्ष का हो और ग्राहक तीन कार्य दिवसों में लेनदेन की सूचना दे दे; सूचना देने में देरी के साथ देयता बढ़ती जाती है।
उपभोक्ता संरक्षण का रास्ता
बैंक ग्राहक उपभोक्ता भी है, और 1986 के अधिनियम का स्थान लेने वाला उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 उसे दूसरा रास्ता देता है। यह जिला आयोग, राज्य आयोग और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की त्रिस्तरीय संरचना बनाए रखता है, जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी, और इसने भ्रामक विज्ञापनों तथा अनुचित व्यापार व्यवहारों पर स्वतः कार्रवाई के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण जोड़ा। इसमें मान्य उपभोक्ता अधिकार हैं — सुरक्षा, सूचना, चयन, सुने जाने, निवारण पाने और उपभोक्ता शिक्षा के अधिकार। राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस 24 दिसंबर को मनाया जाता है, जिस दिन 1986 के अधिनियम को स्वीकृति मिली थी, और विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 15 मार्च को। ग्राहक कोई एक रास्ता चुन सकता है, दोनों एक साथ नहीं: जो मामला उपभोक्ता आयोग के समक्ष है, वह लोकपाल के क्षेत्र से बाहर है।
परीक्षा की दृष्टि से
बैंकिंग के प्रश्नपत्र इस योजना को संख्याओं और नामों के रूप में पूछते हैं। दो क्षतिपूर्ति सीमाएँ — वास्तविक हानि के लिए बीस लाख और उत्पीड़न के लिए एक लाख — सबसे अधिक पूछी जाने वाली जोड़ी हैं, और अभ्यर्थी इन्हें आपस में बदल देते हैं। इसके बाद आते हैं आरबी-आईओएस की तिथि, चंडीगढ़ का प्रसंस्करण केंद्र, लोकपाल के पास जाने से पहले तीस दिन की प्रतीक्षा, अपील की तीस दिन की अवधि और अपीलीय प्राधिकारी की पहचान। अपवाद के प्रश्न "कौन शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है" के रूप में आते हैं और उत्तर प्रायः बैंक के वाणिज्यिक निर्णय वाला विकल्प होता है। ग्राहक अधिकार चार्टर में चार सही और एक गढ़ा अधिकार देकर प्रश्न बनता है, इसलिए पाँचों कंठस्थ करें; गलत बिक्री उपयुक्तता के अधिकार से जुड़ती है। आंतरिक लोकपाल की दस शाखाओं की सीमा और पाँच लाख का जमा बीमा अन्य दोहराए जाने वाले आँकड़े हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| पहली बैंकिंग लोकपाल योजना | 1995, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के अंतर्गत |
|---|---|
| मिलाई गई योजनाएँ | बैंकिंग लोकपाल 2006, एनबीएफसी लोकपाल 2018, डिजिटल लेनदेन लोकपाल 2019 |
| आरबी-आईओएस का आरंभ | 12 नवंबर 2021 |
| प्रसंस्करण केंद्र | केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र, चंडीगढ़ |
| शिकायत का आधार | सेवा में कमी, कुछ अपवादों के साथ |
| वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति | वास्तविक हानि या बीस लाख रुपये, जो कम हो |
| उत्पीड़न की क्षतिपूर्ति | एक लाख रुपये तक |
| दाखिल करने से पहले प्रतीक्षा | बैंक को शिकायत देने के बाद 30 दिन |
| दाखिल करने की समय सीमा | बैंक के उत्तर से एक वर्ष |
| अपील | 30 दिन में रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के कार्यपालक निदेशक को |
| शुल्क | शून्य |
| आंतरिक लोकपाल | दस या अधिक शाखाओं वाले बैंकों में अनिवार्य |
| ग्राहक अधिकार चार्टर | 2014; पाँच अधिकार, जिनमें उपयुक्तता का अधिकार |
| जमा बीमा | प्रति बैंक प्रति जमाकर्ता पाँच लाख रुपये, डीआईसीजीसी |
| उपभोक्ता कानून | उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019, जिसने 1986 के अधिनियम का स्थान लिया |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार किस वर्ष लागू की?
- A.1991
- B.1995
- C.2006
- D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1995
व्याख्या
सही उत्तर B, 1995 है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पहली बैंकिंग लोकपाल योजना 1995 में अधिसूचित की, जिससे बैंक ग्राहकों को न्यायालय के बाहर निःशुल्क और शीघ्र मंच मिले। विकल्प A गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों तथा वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति का वर्ष है, लोकपाल का नहीं। विकल्प C मजबूत भ्रम है: योजना को बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के रूप में फिर गढ़ा गया, जो 2017 के संशोधन के साथ एकीकृत योजना में मिलने तक चली, परंतु 2006 संशोधन का वर्ष था, आरंभ का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2021 रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना का वर्ष है। प्रश्न में देखें कि पहली योजना पूछी गई है या वर्तमान।
तीन पूर्ववर्ती लोकपाल योजनाओं को मिलाने वाली रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना किस वर्ष शुरू हुई?
- A.2017
- B.2018
- C.2019
- D.2021
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 2021
व्याख्या
सही उत्तर D, 2021 है। रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना यानी आरबी-आईओएस 12 नवंबर 2021 को शुरू हुई और इसने 2006 की बैंकिंग लोकपाल योजना, 2018 की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी लोकपाल योजना तथा 2019 की डिजिटल लेनदेन लोकपाल योजना को "एक राष्ट्र, एक लोकपाल" के सिद्धांत पर एक योजना में मिला दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 2017 में 2006 की योजना में गलत बिक्री और मोबाइल बैंकिंग जोड़ने का संशोधन हुआ था। विकल्प B गलत है क्योंकि 2018 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की अलग योजना का वर्ष है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2019 डिजिटल लेनदेन की योजना का वर्ष है। विकल्पों के तीनों वर्ष इस कहानी की वास्तविक तिथियाँ हैं, इसीलिए क्रम याद रखना लाभदायक है। एकीकरण का उद्देश्य यह था कि ग्राहक को यह न सोचना पड़े कि उसकी शिकायत किस योजना में आती है और किस कार्यालय को भेजनी है।
रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 के अंतर्गत शिकायतों का केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र कहाँ स्थित है?
- A.मुंबई
- B.नई दिल्ली
- C.चंडीगढ़
- D.हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चंडीगढ़
व्याख्या
सही उत्तर C, चंडीगढ़ है। एकीकृत योजना क्षेत्राधिकार-निरपेक्ष है, इसलिए शिकायत किसी विशेष क्षेत्र के लोकपाल कार्यालय को भेजना आवश्यक नहीं रहा; ऑनलाइन, ईमेल या कागज़ पर दी गई सभी शिकायतें चंडीगढ़ में स्थापित एक ही केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र में प्राप्त और प्रसंस्कृत होती हैं, जो फिर उन्हें आवंटित करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मुंबई भारतीय रिज़र्व बैंक तथा उसके उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग का प्रधान कार्यालय है, प्राप्ति केंद्र नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि नई दिल्ली में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग है, जो पूर्णतः भिन्न मंच है। विकल्प D गलत है क्योंकि हैदराबाद की इसमें कोई भूमिका नहीं है, भले वहाँ रिज़र्व बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय है। यह केंद्र शिकायतों की पहली छँटाई करता है और उन्हें संबंधित लोकपाल कार्यालय को सौंपता है, जिससे ग्राहक को क्षेत्राधिकार की चिंता नहीं करनी पड़ती।
आरबी-आईओएस, 2021 के अंतर्गत समय की हानि, व्यय, उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए लोकपाल अधिकतम कितनी क्षतिपूर्ति दे सकता है?
- A.दस हजार रुपये
- B.एक लाख रुपये
- C.पाँच लाख रुपये
- D.बीस लाख रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक लाख रुपये
व्याख्या
सही उत्तर B, एक लाख रुपये है। योजना दो प्रकार के अधिनिर्णय अलग करती है। शिकायतकर्ता को वास्तव में हुई हानि के लिए लोकपाल वास्तविक हानि या बीस लाख रुपये, जो कम हो, दे सकता है। इसके अतिरिक्त वह शिकायतकर्ता के समय की हानि, उसके व्यय तथा उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए एक लाख रुपये तक दे सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि दस हजार रुपये की सीमा कुछ पुराने उपभोक्ता क्षतिपूर्ति नियमों में थी, इस योजना में नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पाँच लाख रुपये निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम का जमा बीमा कवर है, जो पूर्णतः भिन्न आँकड़ा है। विकल्प D वास्तविक हानि की सीमा है, इसीलिए दोनों संख्याएँ अलग-अलग याद रखनी चाहिए। परीक्षा में यही जोड़ी सबसे अधिक उलझाई जाती है, इसलिए याद रखें: हानि के लिए बीस लाख, उत्पीड़न के लिए एक लाख।
रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना के अंतर्गत दिए गए अधिनिर्णय के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी कौन है?
- A.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
- B.रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक
- C.सचिव, वित्तीय सेवाएँ विभाग
- D.राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक
व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक है। शिकायतकर्ता अथवा विनियमित संस्था, कोई भी, अधिनिर्णय प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर इस अधिकारी को अपील कर सकता है, और जिस संस्था ने प्रधान नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं किया, वह अपील ही नहीं कर सकती। विकल्प A गलत है क्योंकि गवर्नर व्यक्तिगत अधिनिर्णयों पर अपील नहीं सुनते; यह कार्य नामित कार्यपालक निदेशक को सौंपा गया है। विकल्प C गलत है क्योंकि वित्तीय सेवाएँ विभाग वित्त मंत्रालय का अंग है और इन अपीलों के निर्णय में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रीय आयोग उपभोक्ता संरक्षण के अलग रास्ते का है; ग्राहक एक रास्ता चुनता है और दोनों एक-दूसरे के ऊपर नहीं हैं।
ग्राहक बैंक को शिकायत देकर उत्तर के लिए कितनी अवधि प्रतीक्षा करने के बाद ही रिज़र्व बैंक के लोकपाल के पास जा सकता है?
- A.7 दिन
- B.15 दिन
- C.30 दिन
- D.60 दिन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 30 दिन
व्याख्या
सही उत्तर C, 30 दिन है। योजना बैंक को ही पहला मंच बनाती है: लोकपाल के समक्ष शिकायत तभी सुनवाई योग्य है जब ग्राहक ने पहले विनियमित संस्था को शिकायत दी हो और तीस दिन तक उत्तर न मिला हो, अथवा मिला उत्तर संतोषजनक न हो, अथवा शिकायत अस्वीकार कर दी गई हो। इसके बाद शिकायत उस उत्तर से एक वर्ष के भीतर दाखिल करनी होती है, और उत्तर न आने पर शिकायत की तिथि से एक वर्ष के भीतर। विकल्प A गलत है क्योंकि सात दिन कुछ शिकायतों की पावती की अवधि है, इस चरण की नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि पंद्रह दिन इस योजना के किसी चरण से संबंधित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि साठ दिन प्रतीक्षा अवधि दुगुनी कर देंगे, जिसे योजना टालना चाहती है।
निम्नलिखित में से कौन शिकायत रिज़र्व बैंक लोकपाल के क्षेत्र से बाहर है?
- A.विफल एटीएम लेनदेन की राशि लौटाने में देरी
- B.वाणिज्यिक निर्णय के रूप में बैंक का ऋण मंजूर करने से इनकार
- C.घोषित चेक संग्रहण नीति का पालन न करना
- D.ग्राहक को पूर्व सूचना दिए बिना प्रभार लगाना
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वाणिज्यिक निर्णय के रूप में बैंक का ऋण मंजूर करने से इनकार
व्याख्या
सही उत्तर B, वाणिज्यिक निर्णय के रूप में बैंक का ऋण मंजूर करने से इनकार है। लोकपाल यह तय करता है कि सेवा में कमी हुई या नहीं, यह नहीं कि ऋण का निर्णय उचित था या नहीं; बैंक का वाणिज्यिक निर्णय, जिसमें ऋण देना और उसकी शर्तें सम्मिलित हैं, योजना से स्पष्ट रूप से बाहर है, और इसी प्रकार बैंकों के बीच के विवाद तथा बैंक के कर्मचारी और भर्ती मामले भी। विकल्प A, C और D सभी सेवा में कमी हैं और योजना के भीतर आते हैं: विफल एटीएम लेनदेन लौटाने में देरी, बैंक की अपनी घोषित चेक संग्रहण नीति का पालन न करना, तथा वचन दी गई पूर्व सूचना के बिना प्रभार लगाना। भेद सरल है: बैंक ने ग्राहक की सेवा कैसे की, यह समीक्षा योग्य है; ऋणदाता के रूप में उसने क्या तय किया, यह नहीं।
किसी बैंक को आंतरिक लोकपाल नियुक्त करना कम से कम कितनी शाखाएँ होने पर आवश्यक है?
- A.5 शाखाएँ
- B.10 शाखाएँ
- C.25 शाखाएँ
- D.100 शाखाएँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 10 शाखाएँ
व्याख्या
सही उत्तर B, 10 शाखाएँ है। रिज़र्व बैंक की आंतरिक लोकपाल व्यवस्था के अंतर्गत दस या अधिक शाखाओं वाले प्रत्येक बैंक को आंतरिक लोकपाल नियुक्त करना होता है, जो वरिष्ठ व्यक्ति होता है, बैंक का साधारण कर्मचारी नहीं होता और उसके बोर्ड को रिपोर्ट करता है। बैंक जिस शिकायत को पूर्ण या अंशतः अस्वीकार करना चाहता है, उसे ग्राहक को अंतिम उत्तर भेजने से पहले आंतरिक लोकपाल के समक्ष रखना अनिवार्य है, जिससे अस्वीकृति पर बैंक के भीतर ही स्वतंत्र दृष्टि पड़े। विकल्प A गलत है क्योंकि पाँच शाखाएँ सीमा नहीं है और इतने छोटे बैंक केवल बाहरी लोकपाल से आते हैं। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि पच्चीस या सौ शाखाओं की सीमा से अधिकांश बैंक इस अपेक्षा से बाहर हो जाते, जिससे इसका उद्देश्य ही व्यर्थ हो जाता।
रिज़र्व बैंक के ग्राहक अधिकार चार्टर, 2014 के पाँच अधिकारों में निम्नलिखित में से कौन सम्मिलित है?
- A.उपयुक्तता का अधिकार
- B.निःशुल्क ऋण का अधिकार
- C.न्यूनतम शेष छूट का अधिकार
- D.असीमित निकासी का अधिकार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उपयुक्तता का अधिकार
व्याख्या
सही उत्तर A, उपयुक्तता का अधिकार है। रिज़र्व बैंक ने 2014 में जारी ग्राहक अधिकार चार्टर में पाँच अधिकार गिनाए हैं: उचित व्यवहार का अधिकार, पारदर्शिता तथा उचित और ईमानदार व्यवहार का अधिकार, उपयुक्तता का अधिकार, निजता का अधिकार, तथा शिकायत निवारण और क्षतिपूर्ति का अधिकार। उपयुक्तता के अधिकार का अर्थ है कि दिया गया उत्पाद ग्राहक की आवश्यकता, साधन और समझ के अनुरूप हो, और बैंक काउंटर से बीमा या निवेश उत्पादों की गलत बिक्री इसी अधिकार का उल्लंघन करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि कोई चार्टर निःशुल्क ऋण का वचन नहीं देता; ऋण देना वाणिज्यिक निर्णय रहता है। विकल्प C गलत है क्योंकि न्यूनतम शेष की अपेक्षा प्रत्येक बैंक की घोषित नीति का विषय है। विकल्प D गलत है क्योंकि निकासी की सीमाएँ उत्पाद की शर्तों और विनियमन से तय होती हैं।
आरबी-आईओएस, 2021 के अंतर्गत लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करने के लिए ग्राहक को कितना शुल्क देना होता है?
- A.कोई शुल्क नहीं
- B.सौ रुपये
- C.पाँच सौ रुपये
- D.दावे का एक प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कोई शुल्क नहीं
व्याख्या
सही उत्तर A, कोई शुल्क नहीं है। लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करना निःशुल्क है और शिकायतकर्ता को वकील की आवश्यकता नहीं; वह रिज़र्व बैंक के शिकायत प्रबंधन पोर्टल से ऑनलाइन, ईमेल से, अथवा कागज़ पर चंडीगढ़ के केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र को शिकायत भेज सकता है। मंच को निःशुल्क रखना इस योजना का मर्म है, क्योंकि खुदरा बैंकिंग में विवाद की राशि अक्सर इतनी छोटी होती है कि न्यायालय जाना महँगा पड़े। विकल्प B और C गलत हैं क्योंकि योजना में सौ या पाँच सौ रुपये का कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि दावे का कोई अनुपात शुल्क के रूप में नहीं लिया जाता, जबकि कुछ दीवानी कार्यवाहियों में मूल्यानुसार शुल्क देय होता है। यह भी ध्यान रखें कि अधिनिर्णय मिलने पर शिकायतकर्ता को कोई व्यय नहीं देना पड़ता, और उसे अपना पक्ष रखने के लिए वकील रखने की आवश्यकता नहीं होती।
निम्नलिखित में से कौन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 में निर्दिष्ट उपभोक्ता अधिकार हैं?
- A.सुरक्षा का अधिकार
- B.चयन का अधिकार
- C.उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
- D.उपरोक्त सभी
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. उपरोक्त सभी
व्याख्या
सही उत्तर D, उपरोक्त सभी है। उपभोक्ता संरक्षण कानून छह अधिकारों को मान्यता देता है, और विकल्पों में दिए तीनों उनमें सम्मिलित हैं: सुरक्षा का अधिकार, यानी जीवन और संपत्ति के लिए संकटकारी वस्तुओं और सेवाओं से रक्षा; चयन का अधिकार, यानी प्रतिस्पर्धी दामों पर अनेक वस्तुओं और सेवाओं में से चुनने की स्वतंत्रता; और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार, यानी सूचित उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल पाने का अधिकार। शेष तीन हैं — गुणवत्ता, मात्रा, क्षमता, शुद्धता, मानक और मूल्य की सूचना पाने का अधिकार, सुने जाने का अधिकार, तथा अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार के विरुद्ध निवारण पाने का अधिकार। इसलिए विकल्प A, B और C प्रत्येक सही पर अपूर्ण हैं, और इस प्रकार बने प्रश्न में संयुक्त विकल्प ही उत्तर है।
उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 ने किस वर्ष के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का स्थान लिया है?
- A.1981
- B.1986
- C.1991
- D.1978
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1986
व्याख्या
सही उत्तर B, 1986 है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 भारत का पहला व्यापक उपभोक्ता कानून था और उसने जिला फोरम, राज्य आयोग तथा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई। 2018 में प्रस्तुत विधेयक आगे बढ़कर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 बना, जिसने 1986 के अधिनियम को निरसित करके उसका स्थान लिया, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण जोड़ा, ई-कॉमर्स और उत्पाद दायित्व के नियम लाए, तथा फोरम को आयोग नाम दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1981 में इस प्रकार का कोई केंद्रीय उपभोक्ता कानून नहीं आया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों का वर्ष है, उपभोक्ता कानून का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1978 इस अधिनियम से पहले का है। 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में याद रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना क्या है?
यह वह एक ही लोकपाल योजना है जो रिज़र्व बैंक ने 12 नवंबर 2021 को शुरू की और जिसमें 2006 की बैंकिंग लोकपाल योजना, 2018 की एनबीएफसी योजना तथा 2019 की डिजिटल लेनदेन योजना मिला दी गईं। यह क्षेत्राधिकार-निरपेक्ष है, ग्राहक के लिए निःशुल्क है, और सेवा में किसी भी कमी को शिकायत का आधार मानती है।
लोकपाल कितनी क्षतिपूर्ति दे सकता है?
वास्तव में हुई हानि के लिए लोकपाल वास्तविक हानि या बीस लाख रुपये, जो कम हो, दे सकता है। इससे अलग, शिकायतकर्ता के समय की हानि, उसके व्यय तथा हुए उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए एक लाख रुपये तक दिए जा सकते हैं। परीक्षा में दोनों सीमाएँ पूछी जाती हैं।
लोकपाल को दी गई शिकायत कब सुनवाई योग्य नहीं होती?
जब वह पहले बैंक को नहीं दी गई हो, जब उत्तर के बिना तीस दिन न बीते हों, जब वह किसी न्यायालय, अधिकरण या मध्यस्थ के समक्ष विचाराधीन या तय हो चुकी हो, जब वह समय-बाधित हो, जब वह तुच्छ या परेशान करने वाली हो, अथवा जब वह बैंक के वाणिज्यिक निर्णय पर प्रश्न उठाए, जैसे ऋण देने से इनकार।
आंतरिक लोकपाल और रिज़र्व बैंक लोकपाल में क्या अंतर है?
आंतरिक लोकपाल बैंक के भीतर बैठता है: बैंक जिस शिकायत को अस्वीकार करना चाहता है, उसे अंतिम उत्तर से पहले उसे भेजना अनिवार्य है, और दस या अधिक शाखाओं वाले बैंकों को उसकी नियुक्ति करनी होती है। रिज़र्व बैंक लोकपाल बाहरी है, आरबी-आईओएस 2021 के अंतर्गत आता है, और बैंक के उत्तर अथवा तीस दिन की चुप्पी के बाद ही उसके पास जाया जाता है।
ग्राहक अधिकार चार्टर के पाँच अधिकार कौन हैं?
उचित व्यवहार का अधिकार, पारदर्शिता तथा उचित और ईमानदार व्यवहार का अधिकार, उपयुक्तता का अधिकार, निजता का अधिकार, तथा शिकायत निवारण और क्षतिपूर्ति का अधिकार। रिज़र्व बैंक ने यह चार्टर 2014 में जारी किया और प्रत्येक बैंक से अपेक्षा है कि वह उसे अपनी बोर्ड-अनुमोदित नीति में अपनाए।
स्रोत
- रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 — भारतीय रिज़र्व बैंक
- ग्राहक अधिकार चार्टर — भारतीय रिज़र्व बैंक
- आंतरिक लोकपाल पर मास्टर निदेश — भारतीय रिज़र्व बैंक
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 — भारत सरकार





