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GK नोट्सबैंकिंग और वित्तीय जागरूकतारिटेल, होलसेल, यूनिवर्सल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग

रिटेल, होलसेल और यूनिवर्सल बैंकिंग: प्रकार और तथ्य

बैंक परीक्षाओं के लिए रिटेल, होलसेल, यूनिवर्सल और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के नोट्स: ग्राहक, उत्पाद, धन के स्रोत, खान कार्य समूह, नैरो बैंकिंग और एमसीक्यू।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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रिटेल, होलसेल और यूनिवर्सल बैंकिंग: प्रकार और तथ्य — GK24 title card
रिटेल, होलसेल और यूनिवर्सल बैंकिंग: प्रकार और तथ्य — GK24 title card

बैंकों का वर्गीकरण केवल स्वामित्व से नहीं होता, बल्कि इस आधार पर भी होता है कि वे किस प्रकार के ग्राहक को सेवा देते हैं और कैसा कारोबार करते हैं। रिटेल बैंकिंग व्यक्तियों और परिवारों को छोटी राशि में, परंतु बहुत बड़ी संख्या में सेवा देती है। होलसेल बैंकिंग कंपनियों, सरकारों और संस्थाओं को बड़ी राशि में, परंतु कम खातों में सेवा देती है। यूनिवर्सल बैंकिंग इन दोनों को तथा बीमा और पूंजी बाजार के कार्य को एक ही संस्था या समूह के भीतर रखती है। इन्वेस्टमेंट बैंकिंग जमा पर नहीं चलती, वह निर्गमकर्ता कंपनियों के लिए पूंजी जुटाती है और सौदों पर सलाह देती है। परीक्षा में इन प्रतिरूपों को उनके ग्राहक, उत्पाद और धन के स्रोत से जोड़ना पूछा जाता है, तथा उन समितियों के नाम पूछे जाते हैं जो भारत में यूनिवर्सल बैंकिंग लाईं।

रिटेल बैंकिंग

रिटेल बैंकिंग को व्यक्तिगत बैंकिंग या मास बैंकिंग भी कहा जाता है। यह व्यक्तियों, परिवारों और अति लघु कारोबारियों से जुड़ी होती है। इसके उत्पाद हैं बचत और चालू खाते, आवर्ती और सावधि जमा, गृह ऋण, वाहन ऋण, शिक्षा ऋण, व्यक्तिगत ऋण, स्वर्ण ऋण, क्रेडिट और डेबिट कार्ड, लॉकर तथा बीमा और म्यूचुअल फंड जैसे तृतीय पक्ष उत्पाद।

  • प्रति खाता राशि छोटी और खातों की संख्या बहुत अधिक, इसलिए बैंक की कमाई संख्या पर टिकी होती है।
  • उत्पाद मानकीकृत होते हैं और ऋण का मूल्यांकन क्रेडिट स्कोर के आधार पर होता है, मोलभाव से नहीं।
  • ऋण जोखिम लाखों उधारकर्ताओं में बंट जाता है, इसलिए यह पुस्तक कुछ बड़े ऋणों की तुलना में सुरक्षित मानी जाती है।
  • वितरण शाखा, एटीएम, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और बैंक मित्र के माध्यम से होता है।
  • इसका मुख्य आधार कासा जमा है, अर्थात चालू खाता और बचत खाता की शेष राशि, जो बैंक के लिए सबसे सस्ता धन है।

होलसेल बैंकिंग

होलसेल बैंकिंग को प्रायः कॉर्पोरेट बैंकिंग कहा जाता है। यह बड़ी और मध्यम कंपनियों, सार्वजनिक उपक्रमों, सरकारी विभागों, संस्थाओं और अन्य बैंकों को सेवा देती है। इसमें नकद ऋण और ओवरड्राफ्ट से कार्यशील पूंजी, सावधि ऋण और परियोजना वित्त, साख पत्र तथा बैंक गारंटी जैसा व्यापार वित्त, नकदी प्रबंधन सेवाएं, विदेशी मुद्रा सुरक्षा और ऋण समूहन शामिल हैं। इसका धन थोक जमा, जमा प्रमाणपत्र और बाजार से उधारी से आता है, छोटे बचत खातों से नहीं। खाते कम और बड़े होते हैं, मूल्य निर्धारण मोलभाव से होता है, प्रत्येक ग्राहक के लिए संबंध प्रबंधक होता है, और सबसे बड़ा खतरा संकेंद्रण जोखिम है, क्योंकि एक उधारकर्ता की चूक भी बैंक को झटका दे सकती है।

यूनिवर्सल बैंकिंग

यूनिवर्सल बैंकिंग का अर्थ है एक ही संस्था द्वारा एक छत के नीचे संपूर्ण वित्तीय सेवाएं देना, अर्थात जमा और ऋण, इन्वेस्टमेंट बैंकिंग, बीमा, परिसंपत्ति प्रबंधन और पेंशन। यह प्रतिरूप मूलतः यूरोपीय है और जर्मनी इसका उत्कृष्ट उदाहरण है। भारत में एस. एच. खान की अध्यक्षता वाले कार्य समूह ने 1998 में विकास वित्तीय संस्थानों और बैंकों की भूमिकाओं का अध्ययन किया और उन्हें समरूप बनाकर यूनिवर्सल बैंकिंग की दिशा में बढ़ने की सिफारिश की; 1998 की नरसिम्हम समिति द्वितीय ने भी विकास वित्तीय संस्थानों के बैंक में बदलने का समर्थन किया। विकास वित्तीय संस्थान आईसीआईसीआई का 2002 में अपनी ही अनुषंगी आईसीआईसीआई बैंक में विलय हुआ, जिसे उलटा विलय कहा जाता है, और इससे भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक बना। आईडीबीआई को 2004 में बैंकिंग कंपनी में बदला गया। इसके लाभ हैं पैमाने की बचत, ग्राहक के लिए एक ही स्थान पर सब कुछ और शुल्क आधारित आय; जोखिम हैं हितों का टकराव, डूबने के लिए बहुत बड़ी संस्थाएं और अनेक कार्यों पर फैली पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी।

इन्वेस्टमेंट और मर्चेंट बैंकिंग

इन्वेस्टमेंट बैंक जमा पर नहीं चलता। वह सार्वजनिक निर्गम के प्रबंधन, अभिगोपन, बुक बिल्डिंग, निजी नियोजन, योग्य संस्थागत नियोजन, विलय और अधिग्रहण की सलाह तथा संपदा प्रबंधन से शुल्क कमाता है। भारत में इस कारोबार को मर्चेंट बैंकिंग कहा जाता है और यह सेबी (मर्चेंट बैंकर्स) विनियम, 1992 के अंतर्गत सेबी में पंजीकृत तथा उसके द्वारा नियंत्रित होता है; किसी भी सार्वजनिक निर्गम का लीड मैनेजर सेबी में पंजीकृत मर्चेंट बैंकर ही हो सकता है। वाणिज्यिक बैंक यह कार्य एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज जैसी अनुषंगियों के माध्यम से करते हैं। अमेरिका में 1933 के ग्लास-स्टीगल अधिनियम ने महामंदी के बाद वाणिज्यिक और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग को अलग किया था, और 1999 के ग्राम-लीच-ब्लाइली अधिनियम ने यह दीवार हटा दी।

परीक्षा में पूछे जाने वाले अन्य प्रतिरूप

  • नैरो बैंकिंग: जमा राशि केवल अल्पकालिक जोखिम रहित सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना, जिसे 1997 की तारापोर समिति ने कमजोर बैंकों के लिए सुझाया था ताकि अनर्जक ऋण और न बढ़ें।
  • प्राइवेट बैंकिंग: उच्च आय वर्ग के ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत सेवा और संपदा प्रबंधन।
  • पैरा बैंकिंग: भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से बैंक द्वारा किए जाने वाले गैर बैंकिंग कार्य, जैसे बीमा और म्यूचुअल फंड का वितरण।
  • बैंकएश्योरेंस: कमीशन के बदले बैंक शाखाओं से बीमा पॉलिसियों की बिक्री।
  • शैडो बैंकिंग: नियंत्रित बैंकिंग व्यवस्था के बाहर दिया जाने वाला ऋण।
  • इस्लामिक बैंकिंग: लाभ हानि में भागीदारी पर आधारित ब्याज रहित बैंकिंग।

चारों प्रतिरूपों की तुलना

प्रतिरूपग्राहकप्रमुख उत्पादधन या आय का स्रोत
रिटेल बैंकिंगव्यक्ति, परिवार, अति लघु इकाइयांबचत और सावधि जमा, गृह, वाहन और व्यक्तिगत ऋण, कार्डकासा और खुदरा सावधि जमा
होलसेल बैंकिंगकंपनियां, सार्वजनिक उपक्रम, सरकारें, संस्थाएंकार्यशील पूंजी, परियोजना वित्त, साख पत्र, गारंटीथोक जमा और जमा प्रमाणपत्र
यूनिवर्सल बैंकिंगऊपर के सभीबैंकिंग के साथ बीमा और पूंजी बाजारजमा तथा बड़ी शुल्क आय
इन्वेस्टमेंट बैंकिंगनिर्गमकर्ता और निवेशकनिर्गम प्रबंधन, अभिगोपन, सौदों पर सलाहशुल्क और कमीशन

इन प्रतिरूपों को आकार की सीढ़ी के रूप में याद रखें। ग्राहक जितना छोटा, उत्पाद उतना मानकीकृत और जमा उतनी सस्ती; ग्राहक जितना बड़ा, सौदा उतना मोलभाव वाला और जोखिम उतना तेज। यूनिवर्सल बैंक दोनों पायदानों पर खड़ा होता है, इसलिए उसका नियमन और पर्यवेक्षण इस कहानी का सबसे कठिन हिस्सा है।

परीक्षा की दृष्टि से

इस अध्याय से परिभाषा और नाम मिलान वाले प्रश्न बनते हैं। पूछा जाता है कि रिटेल बैंकिंग का आधार कौन सी जमा है (कासा), यूनिवर्सल बैंकिंग की सिफारिश किस कार्य समूह ने की (एस. एच. खान, 1998) और नैरो बैंकिंग किसने सुझाई (तारापोर, 1997), भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक कौन है (आईसीआईसीआई बैंक, 2002 का उलटा विलय), मर्चेंट बैंकिंग का नियामक कौन है (सेबी, 1992 के विनियम), 1933 का ग्लास-स्टीगल अधिनियम और 1999 में उसका निरसन, तथा होलसेल उत्पादों के बीच छिपे किसी रिटेल उत्पाद को पहचानने वाले प्रश्न। सामान्य भूलें हैं खान और तारापोर समितियों को आपस में बदल देना, मर्चेंट बैंकर का नियामक रिजर्व बैंक मान लेना, और पैरा बैंकिंग को शैडो बैंकिंग समझ लेना।

महत्वपूर्ण तथ्य

रिटेल बैंकिंग का आधारमुख्यतः कासा जमा, जो सबसे सस्ता धन है
यूनिवर्सल बैंकिंग की सिफारिशएस. एच. खान कार्य समूह, 1998
भारत का पहला यूनिवर्सल बैंकआईसीआईसीआई बैंक, 2002 में आईसीआईसीआई के उलटे विलय से
आईडीबीआई का बैंक में रूपांतरण2004
मर्चेंट बैंकिंग का नियामकसेबी, सेबी (मर्चेंट बैंकर्स) विनियम, 1992 के अंतर्गत
नैरो बैंकिंग का सुझावतारापोर समिति, 1997
अमेरिका में दोनों बैंकिंग का अलगावग्लास-स्टीगल अधिनियम, 1933
अलगाव का निरसनग्राम-लीच-ब्लाइली अधिनियम, 1999
जमा प्रमाणपत्रथोक मुद्रा बाजार उपकरण, न्यूनतम ₹5 लाख और उसके बाद ₹5 लाख के गुणकों में
पैरा बैंकिंगरिजर्व बैंक की अनुमति से बैंक का गैर बैंकिंग कार्य, जैसे बीमा वितरण

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

बैंक के लिए सबसे सस्ता धन कौन सी जमा है, जो रिटेल बैंकिंग का मुख्य आधार भी है?

  1. A.जमा प्रमाणपत्र
  2. B.कासा जमा
  3. C.थोक सावधि जमा
  4. D.अंतर बैंक उधारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कासा जमा

व्याख्या

सही उत्तर B, कासा जमा है। कासा का अर्थ है चालू खाता और बचत खाता की शेष राशि। चालू खाते पर ब्याज नहीं मिलता और बचत खाते पर दर बहुत कम होती है, इसलिए इन खातों से जुटाया धन बैंक को किसी भी अन्य स्रोत से सस्ता पड़ता है, और लाखों व्यक्तियों से यही राशि जुटाना रिटेल बैंकिंग का कार्य है। विकल्प A, जमा प्रमाणपत्र, थोक मुद्रा बाजार का उपकरण है जो बड़ी राशि में बाजार से जुड़ी दर पर जारी होता है, इसलिए वह महंगा है। विकल्प C, थोक सावधि जमा, कंपनियों और संस्थाओं की बड़ी जमा है, जिस पर मोलभाव से तय दर सामान्य दर से अधिक होती है। विकल्प D, अंतर बैंक उधारी, अन्य बैंकों से मांग मुद्रा दर पर लिया गया अल्पकालिक धन है, जो सबसे अस्थिर और प्रायः सबसे महंगा होता है। इसी कारण ऊंचा कासा अनुपात मजबूत रिटेल कारोबार का संकेत माना जाता है।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में 1998 में यूनिवर्सल बैंकिंग की सिफारिश करने वाले कार्य समूह के अध्यक्ष कौन थे?

  1. A.एम. नरसिम्हम
  2. B.एस. एच. खान
  3. C.एस. एस. तारापोर
  4. D.आर. एन. मल्होत्रा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एस. एच. खान

व्याख्या

सही उत्तर B, एस. एच. खान है। भारतीय रिजर्व बैंक ने आईडीबीआई के तत्कालीन अध्यक्ष एस. एच. खान की अध्यक्षता में कार्य समूह बनाया था, जिसने विकास वित्तीय संस्थानों और बैंकों की भूमिका की जांच की और 1998 की अपनी रिपोर्ट में दोनों को समरूप बनाकर यूनिवर्सल बैंकिंग की दिशा में बढ़ने की सिफारिश की, इसलिए यह विचार उनके नाम से जुड़ा है। विकल्प A, एम. नरसिम्हम, ने 1991 और 1998 की बैंकिंग सुधार समितियों की अध्यक्षता की थी; दूसरी समिति ने विकास वित्तीय संस्थानों के बैंक बनने का समर्थन किया, परंतु उसे यूनिवर्सल बैंकिंग कार्य समूह नहीं कहा जाता। विकल्प C, एस. एस. तारापोर, पूंजी खाता परिवर्तनीयता समिति के अध्यक्ष थे और इस अध्याय में नैरो बैंकिंग के सुझाव के लिए याद किए जाते हैं। विकल्प D, आर. एन. मल्होत्रा, ने बीमा क्षेत्र सुधार समिति की अध्यक्षता की, जिससे बीमा नियामक की स्थापना हुई।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

वर्ष 2002 में उलटे विलय से भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक कौन बना?

  1. A.आईडीबीआई बैंक
  2. B.आईसीआईसीआई बैंक
  3. C.एचडीएफसी बैंक
  4. D.एक्सिस बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईसीआईसीआई बैंक

व्याख्या

सही उत्तर B, आईसीआईसीआई बैंक है। आईसीआईसीआई की स्थापना दीर्घकालिक औद्योगिक वित्त के लिए विकास वित्तीय संस्थान के रूप में हुई थी और 2002 में उसका अपनी ही बैंकिंग अनुषंगी आईसीआईसीआई बैंक में विलय हो गया। चूंकि मूल संस्था अपनी अनुषंगी में समाहित हुई, इस सौदे को उलटा विलय कहा जाता है, और बनी हुई संस्था जमा, खुदरा तथा कॉर्पोरेट ऋण, परियोजना वित्त, बीमा और पूंजी बाजार सेवाएं एक साथ देने लगी, जिससे वह भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक बना। विकल्प A, आईडीबीआई बैंक, दूसरा प्रसिद्ध रूपांतरण है, परंतु आईडीबीआई को 2004 में, अर्थात दो वर्ष बाद, बैंकिंग कंपनी बनाया गया। विकल्प C, एचडीएफसी बैंक, को 1994 में नए निजी बैंक लाइसेंस के पहले दौर में अनुमति मिली और वह स्वयं बढ़ा। विकल्प D, एक्सिस बैंक, 1994 में यूटीआई बैंक के रूप में शुरू हुआ और 2007 में उसका नाम बदला, इसलिए वह भी इस विवरण पर नहीं बैठता।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारत में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग मर्चेंट बैंकिंग के रूप में होती है, जिसका पंजीकरण और नियमन कौन करता है?

  1. A.भारतीय रिजर्व बैंक
  2. B.सेबी
  3. C.आईआरडीएआई
  4. D.पीएफआरडीए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सेबी

व्याख्या

सही उत्तर B, सेबी है। निर्गम प्रबंधन, अभिगोपन, बुक बिल्डिंग और इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के शेष कार्य प्रतिभूति बाजार से जुड़े हैं, जो सेबी का क्षेत्र है, और संस्था को सेबी (मर्चेंट बैंकर्स) विनियम, 1992 के अंतर्गत मर्चेंट बैंकर के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र लेना होता है; किसी भी सार्वजनिक निर्गम का लीड मैनेजर ऐसा पंजीकृत मर्चेंट बैंकर ही हो सकता है। विकल्प A, भारतीय रिजर्व बैंक, बैंकिंग कारोबार, भुगतान प्रणाली और मौद्रिक नीति का नियमन करता है और बैंक को अनुषंगी के माध्यम से पूंजी बाजार कार्य की अनुमति देता है, परंतु मर्चेंट बैंकर का पंजीकरण नहीं करता। विकल्प C, आईआरडीएआई, बीमा कंपनियों, अभिकर्ताओं और दलालों का नियमन करता है। विकल्प D, पीएफआरडीए, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली और पेंशन कोषों का नियमन करता है। परीक्षा के लिए नियम यह है कि उपकरण से नियामक तय होता है: जमा पर रिजर्व बैंक, प्रतिभूति पर सेबी, पॉलिसी पर आईआरडीएआई और पेंशन पर पीएफआरडीए।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

अमेरिका में 1933 में वाणिज्यिक बैंकिंग को इन्वेस्टमेंट बैंकिंग से किस कानून ने अलग किया था?

  1. A.ग्लास-स्टीगल अधिनियम
  2. B.ग्राम-लीच-ब्लाइली अधिनियम
  3. C.डोड-फ्रैंक अधिनियम
  4. D.सर्बनेस-ऑक्सले अधिनियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ग्लास-स्टीगल अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर A, ग्लास-स्टीगल अधिनियम है। शेयर बाजार की गिरावट और महामंदी के बाद 1933 में पारित इस कानून ने जमा स्वीकार करने वाले वाणिज्यिक बैंक को प्रतिभूति कारोबार से रोक दिया और संघीय जमा बीमा की व्यवस्था भी की, क्योंकि सांसदों का मानना था कि जमाकर्ताओं के धन से किए गए सट्टे ने संकट को गहरा किया था। विकल्प B, 1999 का ग्राम-लीच-ब्लाइली अधिनियम, इसका उलटा है, क्योंकि उसने यह अलगाव समाप्त कर वित्तीय धारक कंपनियों को बैंकिंग, प्रतिभूति और बीमा साथ करने की अनुमति दी। विकल्प C, 2010 का डोड-फ्रैंक अधिनियम, वैश्विक वित्तीय संकट के बाद आया और उसने पर्यवेक्षण, डेरिवेटिव कारोबार तथा उपभोक्ता संरक्षण कड़ा किया, मूल दीवार नहीं बनाई। विकल्प D, 2002 का सर्बनेस-ऑक्सले अधिनियम, एनरॉन और वर्ल्डकॉम घोटालों के बाद आया और कॉर्पोरेट अभिशासन, लेखा समितियों तथा वित्तीय प्रकटन से जुड़ा है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत में कमजोर बैंकों के लिए सुझाई गई नैरो बैंकिंग का अर्थ है कि बैंक

  1. A.केवल प्राथमिक क्षेत्र को ऋण दे
  2. B.अपनी जमा केवल अल्पकालिक जोखिम रहित सरकारी प्रतिभूतियों में लगाए
  3. C.केवल एक शाखा से कार्य करे
  4. D.केवल विदेशी मुद्रा जमा स्वीकार करे
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अपनी जमा केवल अल्पकालिक जोखिम रहित सरकारी प्रतिभूतियों में लगाए

व्याख्या

सही उत्तर B है। नैरो बैंकिंग में बैंक जमा लेना जारी रखता है, परंतु ऋण देने के बजाय उसे अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों में लगाता है, जिससे नया ऋण जोखिम नहीं बनता और पुराने अनर्जक ऋणों की वसूली या बट्टे खाते में डालने का काम चलता रहता है; 1997 की तारापोर समिति ने कमजोर भारतीय बैंकों के लिए यही सुझाया था। विकल्प A प्राथमिक क्षेत्र के मानकों के अंतर्गत निर्दिष्ट ऋण का वर्णन करता है, जो ऋण देने की बाध्यता है, नैरो बैंकिंग नहीं। विकल्प C स्थानीय क्षेत्र या एक कार्यालय वाले बैंक का वर्णन करता है, जो नेटवर्क के आकार से जुड़ा लाइसेंस का प्रश्न है, जमा के उपयोग से नहीं। विकल्प D अपतटीय या विदेशी मुद्रा बैंकिंग इकाई का वर्णन करता है। नैरो शब्द परिसंपत्ति पक्ष की संकीर्णता बताता है, अर्थात बैंक क्या रख सकता है इस पर लगे प्रतिबंध को, न कि शाखाओं की संख्या या मुद्रा को।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

निम्नलिखित में से कौन होलसेल बैंकिंग का उत्पाद नहीं है?

  1. A.आयातक के लिए साख पत्र
  2. B.कंपनी के लिए नकदी प्रबंधन सेवाएं
  3. C.परिवार को दिया गया स्वर्ण ऋण
  4. D.बिजलीघर के लिए परियोजना वित्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. परिवार को दिया गया स्वर्ण ऋण

व्याख्या

सही उत्तर C, परिवार को दिया गया स्वर्ण ऋण है। स्वर्ण ऋण आभूषण की जमानत पर किसी व्यक्ति को दिया गया छोटा और मानकीकृत सुरक्षित अग्रिम है, इसलिए वह पूरी तरह रिटेल बैंकिंग का उत्पाद है। विकल्प A, साख पत्र, व्यापार वित्त का उपकरण है, जिसके द्वारा बैंक अपने आयातक ग्राहक की ओर से निर्यातक को भुगतान का वचन देता है और यह कारोबारी ग्राहकों को दिया जाता है। विकल्प B, नकदी प्रबंधन सेवाएं, का अर्थ है किसी कंपनी के लिए प्राप्तियां एकत्र करना और थोक भुगतान करना, जो शुल्क आधारित होलसेल सेवा है। विकल्प D, बिजलीघर के लिए परियोजना वित्त, परियोजना की नकदी धाराओं पर मूल्यांकित बड़ा दीर्घकालिक ऋण है और सबसे बड़ी राशि वाला होलसेल कारोबार है। ऐसे प्रश्नों में कसौटी ग्राहक है: यदि उधारकर्ता परिवार या अति लघु इकाई है तो उत्पाद रिटेल है, और यदि कंपनी, सरकार या संस्था है तो होलसेल।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

होलसेल जमा का प्रमुख उपकरण जमा प्रमाणपत्र कम से कम कितनी राशि के लिए जारी किया जाता है?

  1. A.₹1 लाख
  2. B.₹5 लाख
  3. C.₹10 लाख
  4. D.₹1 करोड़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ₹5 लाख

व्याख्या

सही उत्तर B, ₹5 लाख है। जमा प्रमाणपत्र पर भारतीय रिजर्व बैंक के निदेशों के अनुसार एक निवेशक को न्यूनतम ₹5 लाख का प्रमाणपत्र जारी किया जाता है और उसके बाद ₹5 लाख के गुणकों में, जिससे यह उपकरण छोटे बचतकर्ताओं के बजाय कंपनियों, न्यासों और संस्थाओं के हाथ में रहता है; यह विपत्र रूप में परक्राम्य उपकरण है और अंकित मूल्य पर बट्टे के साथ जारी होता है। विकल्प A, ₹1 लाख, बहुत छोटी राशि है और इस प्रकार का आंकड़ा खुदरा सावधि जमा में मिलता है। विकल्प C, ₹10 लाख, और विकल्प D, ₹1 करोड़, न्यूनतम सीमा से बड़ी राशियां हैं; प्रमाणपत्र इन राशियों में जारी हो सकता है क्योंकि वे ₹5 लाख के गुणक हैं, परंतु प्रश्न न्यूनतम राशि पूछ रहा है। यह भी याद रखें कि बैंक जमा प्रमाणपत्र की जमानत पर ऋण नहीं दे सकता।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारतीय रिजर्व बैंक की शब्दावली में पैरा बैंकिंग का अर्थ है

  1. A.नियंत्रित बैंकिंग व्यवस्था के बाहर दिया गया ऋण
  2. B.रिजर्व बैंक की अनुमति से बैंक द्वारा किए गए गैर बैंकिंग कार्य
  3. C.केवल बैंक मित्रों के माध्यम से की गई बैंकिंग
  4. D.लाभ हानि में भागीदारी पर आधारित ब्याज रहित बैंकिंग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रिजर्व बैंक की अनुमति से बैंक द्वारा किए गए गैर बैंकिंग कार्य

व्याख्या

सही उत्तर B है। पैरा बैंकिंग में वे वित्तीय सेवाएं आती हैं जो बैंक शुद्ध बैंकिंग के अतिरिक्त भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति मिलने पर कर सकता है, जैसे बीमा पॉलिसियों और म्यूचुअल फंड यूनिटों का वितरण, उपकरण पट्टा, किराया क्रय, फैक्टरिंग, पोर्टफोलियो प्रबंधन और पेंशन कोष सलाहकार का कार्य, जो विभाग अथवा अनुषंगी के माध्यम से किया जाता है। विकल्प A शैडो बैंकिंग का वर्णन करता है, अर्थात नियंत्रित व्यवस्था के बाहर की संस्थाओं द्वारा दिया गया ऋण, जो बिल्कुल भिन्न विचार है और बैंक का अनुमत कारोबार नहीं है। विकल्प C वित्तीय समावेशन में प्रयुक्त बैंक मित्र आधारित शाखा रहित वितरण प्रतिरूप है। विकल्प D इस्लामिक या ब्याज रहित बैंकिंग है, जो लाभ हानि में भागीदारी पर चलती है और भारत में बैंकिंग कारोबार के रूप में नहीं होती। पैरा का अर्थ साथ साथ है, इसलिए पैरा बैंकिंग जमा और ऋण के मूल कारोबार के साथ चलने वाला कारोबार है।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

बैंक की शाखाओं के माध्यम से ग्राहकों को बीमा पॉलिसियां बेचने की व्यवस्था को क्या कहा जाता है?

  1. A.बैंकएश्योरेंस
  2. B.पुनर्बीमा
  3. C.अभिगोपन
  4. D.प्रतिभूतिकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बैंकएश्योरेंस

व्याख्या

सही उत्तर A, बैंकएश्योरेंस है। यह शब्द बैंक और एश्योरेंस से बना है और उस व्यवस्था को बताता है जिसमें बीमा कंपनी बैंक की शाखाओं तथा ग्राहक आधार का उपयोग पॉलिसी बेचने में करती है और बैंक कॉर्पोरेट अभिकर्ता या दलाल के रूप में शुल्क आय कमाता है; भारत में यह अनुमत पैरा बैंकिंग कार्य है। विकल्प B, पुनर्बीमा, वह बीमा है जो बीमा कंपनी स्वयं लेती है, जिससे बड़े जोखिम का एक भाग दूसरी बीमा कंपनी को चला जाता है, और उसका बैंक शाखाओं से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C, अभिगोपन, मर्चेंट बैंकर का वह वचन है कि सार्वजनिक निर्गम का अभिदान रहित भाग वह स्वयं ले लेगा, और बीमा में इसका अर्थ जोखिम का आकलन तथा मूल्य निर्धारण है, वितरण नहीं। विकल्प D, प्रतिभूतिकरण, ऋणों को एकत्र कर व्यापार योग्य प्रतिभूतियों में बदलने की प्रक्रिया है। बैंक को बैंकएश्योरेंस इसलिए भाता है कि इसमें पूंजी लगाए बिना आय मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिटेल और होलसेल बैंकिंग में क्या अंतर है?

रिटेल बैंकिंग व्यक्तियों और परिवारों को छोटे और मानकीकृत उत्पाद बहुत बड़ी संख्या में देती है और कासा तथा खुदरा जमा पर चलती है। होलसेल बैंकिंग कंपनियों, सरकारों और संस्थाओं को कार्यशील पूंजी और परियोजना वित्त जैसी बड़ी, मोलभाव वाली सुविधाएं देती है और थोक जमा तथा जमा प्रमाणपत्र पर चलती है।

भारत का पहला यूनिवर्सल बैंक कौन था?

आईसीआईसीआई बैंक। वर्ष 2002 में विकास वित्तीय संस्थान आईसीआईसीआई का अपनी ही बैंकिंग अनुषंगी आईसीआईसीआई बैंक में विलय हुआ। इस उलटे विलय से एक ही संस्था बनी जो वाणिज्यिक बैंकिंग, परियोजना वित्त, बीमा और पूंजी बाजार का कार्य करती थी।

भारत में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग का नियामक कौन है?

सेबी। यहां इन्वेस्टमेंट बैंकिंग को मर्चेंट बैंकिंग कहा जाता है और संस्था को सेबी (मर्चेंट बैंकर्स) विनियम, 1992 के अंतर्गत सेबी में पंजीकरण कराना होता है। बैंक का नियमन रिजर्व बैंक करता है, परंतु निर्गम प्रबंधन और अभिगोपन सेबी के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

नैरो बैंकिंग क्या है?

ऐसा बैंक जो जमा स्वीकार करता है, परंतु ऋण देने के बजाय उसे केवल अल्पकालिक जोखिम रहित सरकारी प्रतिभूतियों में लगाता है। वर्ष 1997 की तारापोर समिति ने कमजोर भारतीय बैंकों के लिए यह सुझाया था, जिससे सफाई के दौरान उनके अनर्जक ऋण और न बढ़ें।

पैरा बैंकिंग किसे कहते हैं?

भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति से बैंक द्वारा किया जाने वाला गैर बैंकिंग वित्तीय कार्य, जैसे बीमा पॉलिसियों और म्यूचुअल फंड यूनिटों का वितरण, उपकरण पट्टा, फैक्टरिंग या पेंशन कोष सलाहकार का कार्य, जो विभाग या अनुषंगी के माध्यम से किया जाता है।

स्रोत

  • विकास वित्तीय संस्थानों और बैंकों की भूमिका तथा कार्यों में समरूपता पर कार्य समूह (खान कार्य समूह) की रिपोर्ट, 1998 — भारतीय रिजर्व बैंक
  • सेबी (मर्चेंट बैंकर्स) विनियम, 1992 — भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड
  • भारतीय रिजर्व बैंक (जमा प्रमाणपत्र) निदेश, 2021 — भारतीय रिजर्व बैंक
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