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GK नोट्सबैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामनी लॉन्ड्रिंग निवारण: पीएमएलए और एफआईयू-इंडिया

भारत में धन शोधन निवारण: पीएमएलए, ईडी और एफआईयू

बैंकिंग परीक्षाओं के लिए धन शोधन निवारण के पूर्ण नोट्स: पीएमएलए 2002, बैंकों के रिपोर्टिंग नियम, प्रवर्तन निदेशालय, एफआईयू-इंडिया और एफएटीएफ का ढांचा।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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भारत में धन शोधन निवारण: पीएमएलए, ईडी और एफआईयू — GK24 title card
भारत में धन शोधन निवारण: पीएमएलए, ईडी और एफआईयू — GK24 title card

धन शोधन या मनी लॉन्ड्रिंग वह प्रक्रिया है जिससे अपराध से कमाए धन को वैध स्रोत से आया हुआ दिखाया जाता है। जो अपराध यह धन पैदा करता है उसे मूल या अनुसूचित अपराध कहते हैं, और वह धन अपराध की आय कहलाता है। बैंकिंग जागरूकता की परीक्षाएं इस अध्याय को अनिवार्य मानती हैं, क्योंकि बैंक का लिपिक या अधिकारी स्वयं उन रिपोर्टिंग दायित्वों से बंधा होता है जो कानून बैंकों पर डालता है, और क्योंकि प्रश्न तथ्यात्मक होते हैं: अधिनियम का नाम, वर्ष, दंड, एजेंसी और सीमा।

शोधन कैसे किया जाता है

शोधन के तीन चरण बताए जाते हैं। पहला है स्थापन, जिसमें अपराध का नकद धन वित्तीय प्रणाली में प्रवेश करता है, छोटी जमाओं से, वाहक लिखतों की खरीद से या किसी नकदी वाले कारोबार की आय में मिलाकर। दूसरा है स्तरीकरण, जिसमें धन कई खातों, कागजी कंपनियों, विदेशी क्षेत्राधिकारों और कागजी लेनदेन से गुजारा जाता है जब तक लेखा-श्रृंखला पकड़ना कठिन हो जाए। तीसरा है एकीकरण, जिसमें धन स्वामी के पास प्रतीत रूप से स्वच्छ संपत्ति के रूप में लौटता है, जैसे अचल संपत्ति, ऋण की अदायगी, व्यापारिक लाभ या परामर्श शुल्क। अनौपचारिक हवाला माध्यम, जिसमें विश्वसनीय दलालों के जरिए मूल्य का हस्तांतरण होता है और धन सीमा पार नहीं करता, तथा व्यापार में गलत चालान बनाना और रिपोर्टिंग सीमा से जरा नीचे जमा तोड़ना जैसी तकनीकें प्रश्नपत्रों में सबसे अधिक पूछी जाती हैं।

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002

भारत का मुख्य कानून धन शोधन निवारण अधिनियम है, जो 2002 में पारित हुआ और एक जुलाई 2005 से लागू हुआ। इसके तीन उद्देश्य हैं: धन शोधन रोकना, अपराध की आय से बनी संपत्ति का अधिहरण करना, और अन्य देशों के साथ सहयोग की व्यवस्था करना। धारा 3 अपराध की परिभाषा देती है, जिसमें दूषित संपत्ति को छिपाना, रखना, अर्जित करना, उपयोग करना और उसे निर्दोष बताना या दावा करना शामिल है। धारा 4 में कम से कम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष का कठोर कारावास तथा जुर्माना है, और जहां अनुसूचित अपराध स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम के अंतर्गत आता है वहां यह दस वर्ष तक जा सकता है। धारा 5 निदेशक को एक सौ अस्सी दिन के लिए संपत्ति की अनंतिम कुर्की की शक्ति देती है, जिसके बाद न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को कुर्की की पुष्टि करनी होती है। धारा 24 यह सिद्ध करने का भार अभियुक्त पर डालती है कि संपत्ति दूषित नहीं है, इसीलिए इस अधिनियम को उल्टे भार वाला कानून कहा जाता है। धारा 43 विशेष न्यायालयों की व्यवस्था करती है, जिन्हें केंद्र सरकार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से नामित करती है, और अपराध संज्ञेय तथा अजमानतीय हैं जिनमें धारा 45 की कड़ी जमानत शर्तें लागू होती हैं। न्यायनिर्णायक प्राधिकारी से अपील अपील अधिकरण में और उसके बाद उच्च न्यायालय में जाती है। उच्चतम न्यायालय ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी निर्णय में इस अधिनियम के मुख्य प्रावधानों को वैध ठहराया।

बैंक को क्या करना होता है

धारा 12 बैंकों, वित्तीय संस्थाओं, मध्यवर्तियों और कुछ नामित व्यवसायों को रिपोर्टिंग इकाई बनाती है। उन्हें हर ग्राहक की पहचान सत्यापित करनी होती है, निर्धारित लेनदेन का अभिलेख रखना होता है और वित्तीय आसूचना इकाई को रिपोर्ट भेजनी होती है। लेनदेन के अभिलेख लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष तक रखे जाते हैं और पहचान के अभिलेख कारोबारी संबंध समाप्त होने के पांच वर्ष बाद तक। विस्तृत व्यवस्था धन शोधन निवारण अभिलेख रखरखाव नियम 2005 में है, जबकि ग्राहक सम्यक सावधानी की प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के 2016 के अपने ग्राहक को जानिए मास्टर निदेश में दी गई है, जिसमें ग्राहक स्वीकृति नीति, ग्राहकों का जोखिम वर्गीकरण, ग्राहक पहचान और लेनदेन की सतत निगरानी अनिवार्य है। पहचान दस्तावेज अब केंद्रीय केवाईसी अभिलेख रजिस्ट्री से साझा होते हैं, जिसका संचालन सर्साई करती है।

रिपोर्टक्या शामिलसीमा
नकद लेनदेन रिपोर्टखाते में नकद लेनदेनएक माह में दस लाख रुपये से अधिक
संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टकोई भी लेनदेन जिससे उचित संदेह उठेकोई मूल्य सीमा नहीं; सात कार्य दिवस में
जाली मुद्रा रिपोर्टकूटरचित या जाली नोट वाले लेनदेनकोई मूल्य सीमा नहीं
गैर-लाभकारी संगठन लेनदेन रिपोर्टकिसी गैर-लाभकारी संगठन की प्राप्तियांदस लाख रुपये से अधिक
सीमापार तार अंतरण रिपोर्टवे तार अंतरण जिनका स्रोत या गंतव्य भारत से बाहर हैपांच लाख रुपये से अधिक

एजेंसियां

दो निकाय महत्वपूर्ण हैं। प्रवर्तन निदेशालय इस अधिनियम के अपराधों का अन्वेषण और अभियोजन करता है तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम भी लागू करता है; यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करता है और इसकी शुरुआत एक मई 1956 को बने प्रवर्तन प्रकोष्ठ से मानी जाती है। वित्तीय आसूचना इकाई भारत, जो नवंबर 2004 में बनी, वह राष्ट्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना प्राप्त करती, संसाधित करती, विश्लेषण करती और वितरित करती है। यह अन्वेषण नहीं करती; यह बैंकों की भेजी रिपोर्टों का विश्लेषण करती है और आसूचना प्रवर्तन एजेंसियों को देती है। यह राजस्व विभाग के अधीन काम करती है और आर्थिक आसूचना परिषद को रिपोर्ट करती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड तथा बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण जैसे नियामक अपनी-अपनी संस्थाओं में अनुपालन लागू कराते हैं।

अंतरराष्ट्रीय ढांचा

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल, जो 1989 में पेरिस के जी-7 शिखर सम्मेलन में बना और जिसका कार्यालय पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुख्यालय में है, इस क्षेत्र का वैश्विक मानक निर्धारक है। यह धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर चालीस सिफारिशें जारी करता है और पारस्परिक मूल्यांकन के जरिए देशों की समीक्षा करता है। कमजोर व्यवस्था वाले देशों को बढ़ी निगरानी वाले क्षेत्राधिकारों की सूची में, जिसे अनौपचारिक रूप से ग्रे सूची कहते हैं, या कार्रवाई के आह्वान वाले उच्च जोखिम क्षेत्राधिकारों की सूची में, यानी अनौपचारिक ब्लैक सूची में, रखा जाता है। भारत जून 2010 में इस कार्य बल का पूर्ण सदस्य बना और 1998 से एशिया प्रशांत धन शोधन समूह का सदस्य है। एफआईयू-इंडिया एग्मोंट समूह का सदस्य है, जो वित्तीय आसूचना इकाइयों का अनौपचारिक नेटवर्क है और 1995 में ब्रुसेल्स के एग्मोंट-अरेनबर्ग महल में बना था। मुख्य अधिनियम के साथ भारत सौ करोड़ रुपये से अधिक के मामलों में भागे अपराधियों के लिए भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018, काला धन अप्रकटित विदेशी आय और संपत्ति अधिनियम 2015 तथा संशोधित बेनामी संपत्ति निषेध अधिनियम का प्रयोग करता है।

परीक्षा की दृष्टि से

बैंकिंग परीक्षाएं अधिनियम का वर्ष, लागू होने का वर्ष, धारा 4 का दंड, धारा 5 की कुर्की अवधि और रिपोर्टिंग सीमाएं पूछती हैं, विशेष रूप से दस लाख रुपये की नकद लेनदेन रिपोर्ट और संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट के सात कार्य दिवस। प्रश्नों का दूसरा समूह एजेंसियों को अलग करता है: वित्तीय आसूचना इकाई केवल रिपोर्ट प्राप्त कर विश्लेषण करती है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय अन्वेषण और अभियोजन करता है। तीसरा समूह वित्तीय कार्रवाई कार्य बल, उसके गठन के वर्ष, मुख्यालय और ग्रे सूची के अर्थ पर आता है। आम भ्रम हैं लागू होने के लिए 2005 के बजाय 2002 लिख देना, वित्तीय आसूचना इकाई को प्रवर्तन निदेशालय समझ लेना, और दस लाख की सीमा को नकद के बजाय तार अंतरण से जोड़ देना।

महत्वपूर्ण तथ्य

मुख्य कानूनधन शोधन निवारण अधिनियम, 2002; एक जुलाई 2005 से प्रवृत्त
अपराध की परिभाषापीएमएलए की धारा 3
दंडतीन से सात वर्ष कठोर कारावास और जुर्माना; एनडीपीएस से जुड़े मामलों में दस वर्ष तक
अनंतिम कुर्कीधारा 5 के अंतर्गत निदेशक द्वारा 180 दिन
सबूत का भारधारा 24, अभियुक्त पर
अभिलेख रखरखावधारा 12 के अंतर्गत लेनदेन अभिलेख पांच वर्ष
नकद लेनदेन रिपोर्टएक माह में दस लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन
संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टसंदेह बनने के सात कार्य दिवस के भीतर, कोई मूल्य सीमा नहीं
एफआईयू-इंडियागठन 2004; राजस्व विभाग के अधीन; आर्थिक आसूचना परिषद को रिपोर्ट
अन्वेषण एजेंसीप्रवर्तन निदेशालय, जो फेमा भी लागू करता है
एफएटीएफ1989 में जी-7 पेरिस शिखर सम्मेलन में गठित; मुख्यालय पेरिस; भारत जून 2010 से सदस्य
केंद्रीय केवाईसी अभिलेख रजिस्ट्रीसंचालन सर्साई द्वारा

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

धन शोधन के तीन चरण क्रम में कौन-से हैं?

  1. A.स्तरीकरण, स्थापन और एकीकरण
  2. B.स्थापन, स्तरीकरण और एकीकरण
  3. C.एकीकरण, स्थापन और स्तरीकरण
  4. D.स्थापन, एकीकरण और स्तरीकरण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्थापन, स्तरीकरण और एकीकरण

व्याख्या

सही उत्तर B, स्थापन, स्तरीकरण और एकीकरण है। स्थापन पहले आता है क्योंकि अपराधी को नकद धन वित्तीय प्रणाली में डालना होता है, जो वह छोटी जमाओं से, वाहक लिखतों की खरीद से या किसी दुकान अथवा पेट्रोल पंप की आय में मिलाकर करता है। इसके बाद स्तरीकरण आता है, जिसमें धन कई खातों, कागजी कंपनियों, विदेशी क्षेत्राधिकारों और कागजी लेनदेन से गुजारा जाता है जिससे लेखा-श्रृंखला टूट जाए। एकीकरण अंत में आता है, जब धन स्वामी तक वैध प्रतीत होते रूप में पहुंचता है, जैसे अचल संपत्ति, व्यापारिक लाभ या ऋण की अदायगी। विकल्प A गलत है क्योंकि स्तरीकरण स्थापन से पहले नहीं हो सकता; जब तक नकद प्रणाली में आया ही नहीं, स्तर बनाने को कुछ नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि परिभाषा से ही एकीकरण अंतिम चरण है, वही बिंदु जहां शोधन सफल हो जाता है। विकल्प D इसी कारण गलत है: एकीकरण स्तरीकरण से पहले नहीं आ सकता, क्योंकि स्तरीकरण ही धन को इतना स्वच्छ दिखाता है कि उसका एकीकरण संभव हो।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भारत का धन शोधन निवारण अधिनियम किस वर्ष से लागू हुआ?

  1. A.2002
  2. B.2003
  3. C.2005
  4. D.2012
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2005

व्याख्या

सही उत्तर C, 2005 है। धन शोधन निवारण अधिनियम संसद ने 2002 में पारित किया और उसी वर्ष के अधिनियम के रूप में उसकी संख्या है, पर वह एक जुलाई 2005 से ही लागू हुआ, और उसके साथ धन शोधन निवारण अभिलेख रखरखाव नियम 2005 भी लागू हुए, जिनमें बैंकों के रिपोर्टिंग दायित्व दिए गए हैं। अभ्यर्थियों को दोनों तिथियां अलग रखनी चाहिए क्योंकि प्रश्नपत्र कोई भी एक पूछ सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 2002 अधिनियमन का वर्ष है, वही वर्ष जो अधिनियम के संक्षिप्त नाम में आता है, प्रवर्तन का वर्ष नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 2003 वह वर्ष है जब जनवरी में अधिनियम को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। विकल्प D गलत है क्योंकि 2012 एक बड़े संशोधन का वर्ष है, जिसने अपराध की आय की परिभाषा विस्तृत की और कुछ अनुसूचित अपराधों की पुरानी मूल्य सीमा हटाई; इसके बाद 2019 में और संशोधन हुए।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

धन शोधन निवारण अधिनियम के अपराधों का अन्वेषण और अभियोजन कौन-सी एजेंसी करती है?

  1. A.वित्तीय आसूचना इकाई भारत
  2. B.प्रवर्तन निदेशालय
  3. C.केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो
  4. D.भारतीय रिजर्व बैंक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्रवर्तन निदेशालय

व्याख्या

सही उत्तर B, प्रवर्तन निदेशालय है। यह निदेशालय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करता है, इसकी शुरुआत एक मई 1956 को बने प्रवर्तन प्रकोष्ठ से मानी जाती है, और यह अधिनियम के अंतर्गत मामले दर्ज करता है, संपत्ति की अनंतिम कुर्की करता है, गिरफ्तारी करता है और विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दाखिल करता है। यह विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम भी लागू करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वित्तीय आसूचना इकाई केवल बैंकों की रिपोर्ट प्राप्त कर, संसाधित कर, विश्लेषण कर उन्हें वितरित करती है; उसे गिरफ्तारी या अभियोजन की शक्ति नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो मूल या अनुसूचित अपराध, जैसे भ्रष्टाचार या छल, का अन्वेषण करता है और उसके बाद का धन शोधन मामला प्रवर्तन निदेशालय उठाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक बैंकों के अनुपालन की निगरानी करता है और उन पर जुर्माना लगा सकता है, पर शोधन का अभियोजन नहीं करता।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

वित्तीय आसूचना इकाई भारत की स्थापना किस वर्ष हुई?

  1. A.1996
  2. B.2002
  3. C.2004
  4. D.2010
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2004

व्याख्या

सही उत्तर C, 2004 है। वित्तीय आसूचना इकाई भारत को भारत सरकार ने नवंबर 2004 में उस केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में स्थापित किया जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना प्राप्त करे, संसाधित करे, विश्लेषण करे और वितरित करे। यह वित्तीय आसूचना का राष्ट्रीय केंद्र है, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करती है और आर्थिक आसूचना परिषद को रिपोर्ट करती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 1996 में ऐसी कोई इकाई नहीं थी; जिस कानून से रिपोर्टिंग व्यवस्था बनी वह तब तक पारित ही नहीं हुआ था। विकल्प B गलत है क्योंकि 2002 धन शोधन निवारण अधिनियम के अधिनियमन का वर्ष है, जो इकाई की स्थापना से दो वर्ष और अधिनियम के लागू होने से तीन वर्ष पहले है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2010 वह वर्ष है जब भारत वित्तीय कार्रवाई कार्य बल का पूर्ण सदस्य बना, जब तक यह इकाई छह वर्ष काम कर चुकी थी।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

पीएमएलए के अंतर्गत बने नियमों के अनुसार बैंक को खाते में नकद लेनदेन की रिपोर्ट कितने से अधिक पर देनी होती है?

  1. A.एक माह में एक लाख रुपये
  2. B.एक माह में पांच लाख रुपये
  3. C.एक माह में दस लाख रुपये
  4. D.एक माह में पचास लाख रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक माह में दस लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर C, एक माह में दस लाख रुपये है। धन शोधन निवारण अभिलेख रखरखाव नियम 2005 के अनुसार रिपोर्टिंग इकाई को दस लाख रुपये या विदेशी मुद्रा में उसके समतुल्य से अधिक मूल्य के सभी नकद लेनदेन, तथा आपस में जुड़े ऐसे नकद लेनदेनों की वे श्रृंखलाएं जो एक माह में मिलकर उस राशि से अधिक हो जाएं, रिपोर्ट करनी होती हैं। यह रिपोर्ट अगले माह की पंद्रह तारीख तक वित्तीय आसूचना इकाई को भेजी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि इन नियमों में एक लाख रुपये कोई रिपोर्टिंग सीमा नहीं है, भले बैंक जोखिम प्रोफाइल के लिए ऐसी राशियों पर आंतरिक नजर रखते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि पांच लाख रुपये सीमापार तार अंतरण रिपोर्ट की सीमा है, नकद लेनदेन रिपोर्ट की नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि इन नियमों में पचास लाख रुपये की कोई सीमा ही नहीं है; इन तीन अंकों को मिला देना इस प्रश्न की सामान्य भूल है।

Q6.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

पीएमएलए नियमों के अंतर्गत संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट कितने समय में भेजनी होती है?

  1. A.संदेह बनने के सात कार्य दिवस के भीतर
  2. B.संदेह बनने के तीस दिन के भीतर
  3. C.अगले माह की पंद्रह तारीख तक
  4. D.संदेह बनने के नब्बे दिन के भीतर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संदेह बनने के सात कार्य दिवस के भीतर

व्याख्या

सही उत्तर A, सात कार्य दिवस है। नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग इकाई को उस तारीख से, जब वह संतुष्ट हो जाए कि लेनदेन संदिग्ध है, सात कार्य दिवस के भीतर वित्तीय आसूचना इकाई को संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट भेजनी होती है। इसमें कोई न्यूनतम मूल्य नहीं है, रिपोर्ट पूर्ण तथा प्रयास किए गए दोनों लेनदेनों पर बनती है, और बैंक ग्राहक को यह संकेत नहीं दे सकता कि रिपोर्ट भेजी गई है। विकल्प B गलत है क्योंकि इस रिपोर्ट की सीमा तीस दिन नहीं है; इतनी देरी उसके उद्देश्य को ही नष्ट कर देगी, जो धन के ट्रेस होने योग्य रहते आसूचना देना है। विकल्प C गलत है क्योंकि अगले माह की पंद्रह तारीख मासिक नकद लेनदेन रिपोर्ट की नियत तारीख है, संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट की नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि इन नियमों में नब्बे दिन का कोई स्थान नहीं है; अभ्यर्थी जो अंक याद कर रहे होते हैं वे कुर्की और न्यायनिर्णयन की समयसीमाएं हैं।

Q7.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत धन शोधन का दंड कितने कठोर कारावास का है?

  1. A.एक से तीन वर्ष
  2. B.तीन से सात वर्ष
  3. C.पांच से दस वर्ष
  4. D.सात से चौदह वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीन से सात वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर B, तीन से सात वर्ष है। धारा 4 में कहा गया है कि जो कोई धन शोधन का अपराध करेगा वह कम से कम तीन वर्ष के कठोर कारावास से, जो सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, तथा जुर्माने से दंडित होगा। जहां अपराध की आय अनुसूची के भाग क के पैरा दो के अपराध से, यानी स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम के अपराध से संबंधित हो, वहां अधिकतम दंड दस वर्ष हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एक से तीन वर्ष न्यूनतम को कम बताता है; तीन वर्ष निचली सीमा है और न्यायालय उससे नीचे नहीं जा सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि पांच से दस वर्ष सामान्य सीमा नहीं है, भले स्वापक से जुड़े मामलों में दस वर्ष बढ़ा हुआ अधिकतम है। विकल्प D गलत है क्योंकि सात से चौदह वर्ष अन्य विशेष कानूनों की सीमा है और इस धारा की नहीं; यहां सात वर्ष साधारण अधिकतम है, न्यूनतम नहीं।

Q8.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

पीएमएलए की धारा 5 के अंतर्गत निदेशक द्वारा की गई संपत्ति की अनंतिम कुर्की कितने समय तक प्रभावी रहती है?

  1. A.तीस दिन
  2. B.नब्बे दिन
  3. C.एक सौ अस्सी दिन
  4. D.एक वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक सौ अस्सी दिन

व्याख्या

सही उत्तर C, एक सौ अस्सी दिन है। धारा 5 निदेशक या प्राधिकृत अधिकारी को, लिखित में कारण अभिलिखित करने पर, उस संपत्ति की अनंतिम कुर्की की शक्ति देती है जिसके अपराध की आय होने का विश्वास हो, और यह कुर्की एक सौ अस्सी दिन के लिए होती है। इस अवधि में न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को तय करना होता है कि कुर्की की पुष्टि की जाए या नहीं, अन्यथा कुर्की समाप्त हो जाती है और संपत्ति मुक्त हो जाती है। अधिकारी को आदेश और सामग्री मुहरबंद लिफाफे में न्यायनिर्णायक प्राधिकारी को भेजनी भी होती है। विकल्प A गलत है क्योंकि तीस दिन कुछ कार्यवाहियों में अपील दाखिल करने की अवधि है, कुर्की की अवधि नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि इस धारा की अनंतिम कुर्की पर नब्बे दिन लागू नहीं होते। विकल्प D गलत है क्योंकि एक वर्ष तक संपत्ति बिना किसी न्यायनिर्णयन के जमी रहेगी, और एक सौ अस्सी दिन की सीमा ठीक इसी स्थिति को रोकती है।

Q9.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

पीएमएलए के अंतर्गत रिपोर्टिंग इकाई को उन लेनदेनों के अभिलेख कितने समय तक रखने होते हैं जिनकी रिपोर्ट देना आवश्यक है?

  1. A.लेनदेन की तारीख से तीन वर्ष
  2. B.लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष
  3. C.लेनदेन की तारीख से आठ वर्ष
  4. D.लेनदेन की तारीख से पंद्रह वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष

व्याख्या

सही उत्तर B, लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष है। धारा 12 के अनुसार हर रिपोर्टिंग इकाई को निर्धारित प्रकार और मूल्य के सभी लेनदेनों का अभिलेख ग्राहक और इकाई के बीच लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष तक रखना होता है, तथा अपने ग्राहकों की पहचान के अभिलेख कारोबारी संबंध समाप्त होने या खाता बंद होने के पांच वर्ष बाद तक रखने होते हैं। अभिलेख ऐसे रखने होते हैं कि कोई प्राधिकारी मांगे तो किसी एक लेनदेन का पुनर्निर्माण हो सके। विकल्प A गलत है क्योंकि तीन वर्ष सांविधिक अवधि से कम है और लंबे अन्वेषणों में निशान ठंडा पड़ जाएगा। विकल्प C गलत है क्योंकि आठ वर्ष अधिनियम या नियमों में कहीं निर्धारित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि पंद्रह वर्ष आवश्यकता से बहुत अधिक है; पहले कानून में दस वर्ष निर्धारित थे, जिन्हें संशोधन से पांच वर्ष किया गया।

Q10.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

धन शोधन पर वैश्विक मानक निर्धारक वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की स्थापना किस वर्ष हुई?

  1. A.1974
  2. B.1989
  3. C.1995
  4. D.2001
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1989

व्याख्या

सही उत्तर B, 1989 है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल 1989 में पेरिस में हुए सात औद्योगिक देशों के समूह के शिखर सम्मेलन में बना, और उसका सचिवालय पेरिस में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुख्यालय में है। यह धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण पर चालीस सिफारिशें जारी करता है और पारस्परिक मूल्यांकन से सदस्य देशों की समीक्षा करता है, तथा कमजोर क्षेत्राधिकारों को बढ़ी निगरानी की सूची, यानी अनौपचारिक ग्रे सूची, या कार्रवाई के आह्वान की सूची, यानी अनौपचारिक ब्लैक सूची, में रखता है। भारत जून 2010 में पूर्ण सदस्य बना। विकल्प A गलत है क्योंकि 1974 में बैंकिंग पर्यवेक्षण की बासल समिति बनी थी, जो विवेकपूर्ण विनियमन से जुड़ा भिन्न निकाय है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1995 में ब्रुसेल्स में वित्तीय आसूचना इकाइयों का एग्मोंट समूह बना। विकल्प D गलत है क्योंकि 2001 में कार्य बल ने अपना दायरा आतंकवाद के वित्तपोषण तक बढ़ाया, वह उसकी स्थापना का वर्ष नहीं है।

Q11.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

वित्तीय आसूचना इकाई भारत किस निकाय को रिपोर्ट करती है?

  1. A.केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद
  2. B.केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड
  3. C.भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति
  4. D.प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद

व्याख्या

सही उत्तर A है। वित्तीय आसूचना इकाई भारत वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करती है और आर्थिक अपराधों के शीर्ष निकाय आर्थिक आसूचना परिषद को रिपोर्ट करती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं। यह परिषद आर्थिक अपराध से जुड़ी प्रवर्तन और आसूचना एजेंसियों के काम में समन्वय करती है। विकल्प B गलत है क्योंकि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड आयकर का प्रशासन करता है और उसी विभाग के अधीन सहोदर निकाय है, इकाई का रिपोर्टिंग प्राधिकारी नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए नीतिगत ब्याज दर तय करती है और उसका वित्तीय आसूचना से कोई संबंध नहीं है। विकल्प D दो कारणों से गलत है: वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद समष्टि-विवेकपूर्ण पर्यवेक्षण तथा अंतर-नियामक समन्वय से जुड़ी है, और उसकी अध्यक्षता भी केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं, प्रधानमंत्री नहीं।

Q12.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के अंतर्गत किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के लिए अनुसूचित अपराध की राशि कम से कम कितनी होनी चाहिए?

  1. A.एक करोड़ रुपये
  2. B.दस करोड़ रुपये
  3. C.सौ करोड़ रुपये
  4. D.एक हजार करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सौ करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर C, सौ करोड़ रुपये है। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 वहां लागू होता है जहां सौ करोड़ रुपये या अधिक मूल्य के किसी अनुसूचित अपराध में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ हो और व्यक्ति अभियोजन से बचने के लिए भारत छोड़ चुका हो, या उसका सामना करने के लिए लौटने से इनकार करे। धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत नामित विशेष न्यायालय तब उस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर सकता है, जिसके बाद केंद्र सरकार अपराध की आय तथा अपराधी की अन्य संपत्ति, जिसमें बेनामी संपत्ति भी है, का अधिहरण कर सकती है और उस व्यक्ति को दीवानी दावे चलाने से रोका जा सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एक करोड़ रुपये सांविधिक सीमा से बहुत नीचे है। विकल्प B गलत है क्योंकि दस करोड़ रुपये भी उससे नीचे है। विकल्प D गलत है क्योंकि एक हजार करोड़ रुपये की सीमा लगभग हर उस मामले को बाहर कर देगी जिसके लिए यह अधिनियम बना था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धन शोधन के तीन चरण कौन-से हैं?

स्थापन, स्तरीकरण और एकीकरण। स्थापन में अपराध का नकद धन जमाओं, वाहक लिखतों या नकदी वाले कारोबार के जरिए वित्तीय प्रणाली में प्रवेश करता है। स्तरीकरण में वह धन कई खातों, कागजी कंपनियों और विदेशी लेनदेन से गुजारा जाता है जिससे लेखा-श्रृंखला टूट जाए। एकीकरण में धन अपने स्वामी के पास प्रतीत रूप से वैध रूप में लौटता है, जैसे अचल संपत्ति, व्यापारिक लाभ, ऋण की अदायगी या परामर्श शुल्क।

प्रवर्तन निदेशालय और एफआईयू-इंडिया में क्या अंतर है?

एफआईयू-इंडिया एक आसूचना निकाय है। यह बैंकों और अन्य रिपोर्टिंग इकाइयों से नकद लेनदेन, संदिग्ध लेनदेन, जाली मुद्रा, गैर-लाभकारी संगठन और सीमापार तार अंतरण की रिपोर्ट प्राप्त करती है, उनका विश्लेषण करती है और आसूचना प्रवर्तन एजेंसियों को देती है। उसे गिरफ्तार करने या अभियोजन चलाने की शक्ति नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय अन्वेषण एजेंसी है: वह धन शोधन निवारण अधिनियम के अंतर्गत मामले दर्ज करता है, संपत्ति कुर्क करता है, गिरफ्तार करता है, विशेष न्यायालय में अभियोजन शिकायत दाखिल करता है और विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम भी लागू करता है।

बैंक को संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट कब भेजनी होती है?

जिस तारीख को वह संतुष्ट हो जाए कि कोई लेनदेन या लेनदेनों की श्रृंखला संदिग्ध है, उससे सात कार्य दिवस के भीतर। इसमें कोई न्यूनतम मूल्य नहीं है: संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट उसके आकार से स्वतंत्र रूप से दी जाती है, और इसमें वह प्रयास भी शामिल है जो पूरा नहीं हुआ। बैंक ग्राहक को यह नहीं बता सकता कि रिपोर्ट भेजी गई है, क्योंकि ऐसा संकेत देना रिपोर्ट के उद्देश्य को ही नष्ट कर देता है और स्वयं नियमों का उल्लंघन है।

एफएटीएफ की ग्रे सूची क्या है?

ग्रे सूची वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की बढ़ी निगरानी वाले क्षेत्राधिकारों की सूची का अनौपचारिक नाम है। किसी देश को उसमें तब रखा जाता है जब कार्य बल को उसकी धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण विरोधी व्यवस्था में रणनीतिक कमियां मिलती हैं, और उसके बाद वह देश तय समयसीमा में कार्य योजना पर कार्य बल के साथ काम करता है। इससे कड़ी सूची कार्रवाई के आह्वान वाले उच्च जोखिम क्षेत्राधिकारों की है, यानी अनौपचारिक ब्लैक सूची, जिसके लिए सदस्यों से प्रतिकार उपाय लागू करने को कहा जाता है।

पीएमएलए के अंतर्गत बैंक को अभिलेख कितने समय तक रखने होते हैं?

निर्धारित लेनदेन के अभिलेख ग्राहक और बैंक के बीच लेनदेन की तारीख से पांच वर्ष तक रखे जाते हैं। ग्राहकों की पहचान के अभिलेख, यानी अपने ग्राहक को जानिए के दस्तावेज, ग्राहक के साथ कारोबारी संबंध समाप्त होने या खाता बंद होने के पांच वर्ष बाद तक रखे जाते हैं, जो भी बाद में हो। अभिलेख इस ढंग से रखने होते हैं कि कोई प्राधिकारी मांगे तो किसी एक लेनदेन का पुनर्निर्माण किया जा सके।

भारत से भाग जाने वाले अपराधियों पर कौन-सा कानून लगता है?

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018। यह वहां लागू होता है जहां सौ करोड़ रुपये या अधिक के किसी अनुसूचित आर्थिक अपराध में गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ हो और व्यक्ति भारत छोड़ चुका हो या अभियोजन का सामना करने के लिए लौटने से इनकार कर दे। विशेष न्यायालय ऐसे व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर सकता है, जिसके बाद केंद्र सरकार अपराध की आय तथा अपराधी की अन्य संपत्ति, जिसमें बेनामी संपत्ति भी है, का अधिहरण कर सकती है।

स्रोत

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