भारत में पर्यावरण कानून और संस्थाएं: अधिनियम और प्रश्न
भारत के पर्यावरण कानूनों पर परीक्षोपयोगी नोट्स: अनुच्छेद 48क और 51क, 1972 से 2010 तक के अधिनियम, प्रदूषण बोर्ड, हरित अधिकरण और वैश्विक अभिसमय।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत का पर्यावरण कानून कुछ गिने-चुने अधिनियमों, कुछ वैधानिक संस्थाओं और उच्चतम न्यायालय के निर्णयों की शृंखला से बना है, और परीक्षक तीनों से प्रश्न पूछते हैं। प्रश्न प्रायः किसी वर्ष, पूरे नाम या उस अधिनियम पर होते हैं जिसके अंतर्गत कोई संस्था बनी, इसलिए इस लेख में हर अधिनियम उसकी तिथि और उद्देश्य के साथ, हर संस्था अपने मूल अधिनियम और मुख्यालय के साथ, तथा भारत द्वारा स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय अभिसमय क्रम से दिए गए हैं।
संवैधानिक आधार
मूल संविधान में पर्यावरण का उल्लेख नहीं था। 1976 के बयालीसवें संशोधन ने अनुच्छेद 48क जोड़ा, जो नीति निदेशक तत्व है और राज्य से अपेक्षा करता है कि वह पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन करे तथा देश के वन और वन्य जीवन की रक्षा करे, और अनुच्छेद 51क का खंड छ जोड़ा, जो प्रत्येक नागरिक का वही मूल कर्तव्य बनाता है। उच्चतम न्यायालय ने स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को अनुच्छेद 21 के जीवन के अधिकार में भी पढ़ा है, इसीलिए पर्यावरण से जुड़े मामले रिट याचिका के रूप में लाए जा सकते हैं। इसी संशोधन ने वन तथा वन्य जीव-जंतुओं और पक्षियों की रक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में भेजा।
प्रमुख पर्यावरण अधिनियम
| अधिनियम | वर्ष | उद्देश्य |
|---|---|---|
| भारतीय वन अधिनियम | 1927 | आरक्षित, संरक्षित और ग्राम वनों का वर्गीकरण |
| वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम | 1972 | अनुसूचियों से प्रजातियों की रक्षा और संरक्षित क्षेत्र |
| जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम | 1974 | केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों की स्थापना |
| वन (संरक्षण) अधिनियम | 1980 | वन भूमि के अन्य उपयोग के लिए केंद्र की पूर्व अनुमति |
| वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम | 1981 | बोर्डों का कार्य वायु गुणवत्ता तक बढ़ाना |
| पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम | 1986 | भोपाल दुर्घटना के बाद बना छत्र कानून |
| जैविक विविधता अधिनियम | 2002 | राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण की स्थापना |
| वन अधिकार अधिनियम | 2006 | वनवासी समुदायों के अधिकारों की मान्यता |
| राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम | 2010 | विशेष पर्यावरण अधिकरण की स्थापना |
1986 का पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम सबसे महत्वपूर्ण है। यह दिसंबर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित हुआ और इसे छत्र कानून इसलिए कहते हैं कि यह केंद्र सरकार को पर्यावरण से जुड़े किसी भी विषय पर नियम बनाने की व्यापक शक्ति देता है। संकटपूर्ण अपशिष्ट, ध्वनि, प्लास्टिक अपशिष्ट और ई-अपशिष्ट संबंधी नियम तथा नई परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अनिवार्य करने वाली अधिसूचना इसी के अंतर्गत बने हैं। 1991 का सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, जो संकटपूर्ण पदार्थों का काम करने वाले उद्योगों से दुर्घटना बीमा कराता है, इसी अनुभव से निकला।
कानून लागू करने वाली संस्थाएँ
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय नोडल मंत्रालय है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 1974 के जल अधिनियम के अंतर्गत गठित हुआ और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ काम करता है, जो बहिःस्राव और उत्सर्जन के मानक तय और लागू करते हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण 2010 में अपने ही अधिनियम के अंतर्गत बना, ताकि पर्यावरण के मामले शीघ्र निपटें; इसकी मुख्य पीठ नई दिल्ली में और क्षेत्रीय पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में हैं, इसका अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है, इससे छह माह में आवेदन निपटाने की अपेक्षा है और इसके निर्णय के विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायालय में होती है। 2002 के अधिनियम के अंतर्गत बने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मुख्यालय चेन्नई में है और वह राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से काम करता है। अन्य स्मरणीय संस्थाएँ हैं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, भारतीय जीव कल्याण बोर्ड, तथा तीन पुराने सर्वेक्षण संगठन: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, जिनके मुख्यालय कोलकाता में हैं, और देहरादून का भारतीय वन सर्वेक्षण, जो हर दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित करता है।
न्यायालयों के सिद्धांत
भारतीय पर्यावरण निर्णयों में चार विचार बार-बार आते हैं। प्रदूषक भुगतान करे सिद्धांत के अनुसार क्षति पहुँचाने वाला ही उसकी भरपाई का खर्च उठाएगा। एहतियाती सिद्धांत कहता है कि जहाँ गंभीर हानि की आशंका हो वहाँ पूर्ण वैज्ञानिक निश्चितता के अभाव को कार्रवाई टालने का कारण नहीं बनाया जा सकता, और यह प्रमाण का भार विकासकर्ता पर डाल देता है। सतत विकास, जो 1987 की ब्रंटलैंड रिपोर्ट से आया, कहता है कि वर्तमान की आवश्यकताएँ इस प्रकार पूरी हों कि भावी पीढ़ियों की क्षमता पर आँच न आए। लोक न्यास सिद्धांत वायु, जल, वन और समुद्र तट को ऐसी संपदा मानता है जिसे राज्य जनता के लिए न्यास में रखता है। इनके साथ उच्चतम न्यायालय ने 1986 में दिल्ली की ओलियम गैस रिसाव से उठे मामले में पूर्ण दायित्व का नियम जोड़ा, जिसके अनुसार संकटपूर्ण गतिविधि चलाने वाला उद्यम बिना किसी अपवाद के हानि के लिए उत्तरदायी है।
भारत द्वारा स्वीकृत अंतरराष्ट्रीय अभिसमय
1972 का स्टॉकहोम में हुआ मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आरंभ बिंदु है; उसी वर्ष नैरोबी मुख्यालय के साथ संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम बना, और 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1971 में ईरान में हस्ताक्षरित रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों की रक्षा करता है। 1973 का साइट्स संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। 1985 का वियना अभिसमय और 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ओजोन परत क्षयकारी पदार्थों से संबंधित हैं, और 16 सितंबर विश्व ओजोन दिवस है। 1989 का बासेल अभिसमय संकटपूर्ण अपशिष्ट के आवागमन पर है और 2001 का स्टॉकहोम अभिसमय दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर। 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन से जैविक विविधता अभिसमय निकला, जिसके साथ जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल और लाभ साझेदारी पर नागोया प्रोटोकॉल हैं, तथा जलवायु परिवर्तन पर रूपरेखा अभिसमय निकला, जिसके अंतर्गत 1997 का क्योटो प्रोटोकॉल और 2015 का पेरिस समझौता स्वीकार किए गए। 1948 में स्थापित और स्विट्जरलैंड में स्थित अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ संधि संस्था नहीं है, पर वह संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची रखता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से चार प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला, अधिनियम का वर्ष: वन्यजीव के लिए 1972, जल के लिए 1974, वन संरक्षण के लिए 1980, वायु के लिए 1981, छत्र अधिनियम के लिए 1986, जैव विविधता के लिए 2002 और अधिकरण के लिए 2010। दूसरा, संस्था और उसका मूल कानून या मुख्यालय: जल अधिनियम के अंतर्गत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, चेन्नई में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, देहरादून में भारतीय वन सर्वेक्षण, नई दिल्ली में हरित अधिकरण की मुख्य पीठ। तीसरा, संवैधानिक प्रावधान, जहाँ अनुच्छेद 48क और 51क खंड छ का जोड़ा तथा बयालीसवाँ संशोधन एक साथ पूछे जाते हैं। चौथा, अभिसमय और उनके विषय: आर्द्रभूमि के लिए रामसर, व्यापार के लिए साइट्स, ओजोन के लिए मॉन्ट्रियल, संकटपूर्ण अपशिष्ट के लिए बासेल, दीर्घस्थायी प्रदूषकों के लिए स्टॉकहोम, जलवायु के लिए क्योटो और पेरिस। सबसे आम भूलें हैं पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का वर्ष 1984 बता देना, जो दुर्घटना का वर्ष था, और जैव विविधता प्राधिकरण को चेन्नई के बजाय दिल्ली में मान लेना।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संवैधानिक अनुच्छेद | निदेशक तत्व 48क और मूल कर्तव्य 51क(छ), 1976 में जोड़े गए |
|---|---|
| जोड़ने वाला संशोधन | बयालीसवाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 |
| छत्र कानून | पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 |
| 1986 के अधिनियम का कारण | दिसंबर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी |
| प्रदूषण बोर्ड | जल अधिनियम, 1974 के अंतर्गत गठित सीपीसीबी और एसपीसीबी |
| राष्ट्रीय हरित अधिकरण | 2010 में स्थापित; मुख्य पीठ नई दिल्ली; अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश |
| हरित अधिकरण की क्षेत्रीय पीठें | भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई |
| राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण | जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत; मुख्यालय चेन्नई |
| भारत वन स्थिति रिपोर्ट | भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून द्वारा हर दो वर्ष में |
| लाल सूची | अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा संधारित |
| विश्व पर्यावरण दिवस | 5 जून, 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन से |
| ओजोन संधियाँ | 1985 का वियना अभिसमय और 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल |
| आर्द्रभूमि संधि | रामसर अभिसमय, 1971 |
| जलवायु संधियाँ | यूएनएफसीसीसी 1992, क्योटो प्रोटोकॉल 1997, पेरिस समझौता 2015 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
दिसंबर 1984 में भोपाल में भारत की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक किस कारखाने में हुई थी?
- A.एक्साइड
- B.भारत रसायन लिमिटेड
- C.यूनियन कार्बाइड
- D.यूपीएल लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. यूनियन कार्बाइड
व्याख्या
सही उत्तर C, यूनियन कार्बाइड है। 2 और 3 दिसंबर 1984 की रात मध्य प्रदेश के भोपाल में यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के कीटनाशक संयंत्र से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ, जिससे हजारों लोगों की मृत्यु हुई और अनगिनत लोग प्रभावित हुए। इसी दुर्घटना के कारण संसद ने 1986 में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम और बाद में 1991 में सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम पारित किया।
विकल्प A, एक्साइड, बैटरी बनाने वाली कंपनी है और उसका इस रिसाव से कोई संबंध नहीं था। विकल्प B, भारत रसायन लिमिटेड, कृषि रसायन कंपनी अवश्य है पर भोपाल से असंबद्ध है। विकल्प D, यूपीएल लिमिटेड, भी कृषि रसायन कंपनी है और इस त्रासदी से उसका कोई लेना-देना नहीं। परीक्षा के लिए यह शृंखला याद रखें: यूनियन कार्बाइड, मिथाइल आइसोसाइनेट, भोपाल, दिसंबर 1984 और उसके बाद आया 1986 का पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम।
संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची देने वाली लाल आँकड़ा पुस्तिका किसके द्वारा संधारित की जाती है?
- A.संयुक्त राष्ट्र संघ
- B.आईयूसीएन
- C.विश्व स्वास्थ्य संगठन
- D.डब्ल्यूडब्ल्यूएफ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईयूसीएन
व्याख्या
सही उत्तर B, आईयूसीएन अर्थात अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ है। 1948 में स्थापित और स्विट्जरलैंड में स्थित यह संस्था संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची रखती है, जिसमें प्रजातियों को न्यूनतम चिंतित, संकटासन्न, संवेदनशील, संकटग्रस्त, अति संकटग्रस्त, जंगल में विलुप्त और विलुप्त श्रेणियों में रखा जाता है। सरकारें और परीक्षक दोनों इसी को मानक संदर्भ मानते हैं।
विकल्प A, संयुक्त राष्ट्र संघ, अनेक अभिकरणों की मूल संस्था है पर यह सूची स्वयं नहीं बनाता; उसका पर्यावरण अंग संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम आईयूसीएन के साथ काम करता है, उसका स्थान नहीं लेता। विकल्प C, विश्व स्वास्थ्य संगठन, मानव स्वास्थ्य और रोगों से जुड़ा है। विकल्प D, विश्व वन्यजीव कोष, पांडा चिह्न और जीवित ग्रह रिपोर्ट के लिए जाना जाने वाला संरक्षण संगठन है, और वह इसी क्षेत्र में काम करता है इसलिए सबसे आम गलत विकल्प है, पर लाल सूची आईयूसीएन की है।
दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों पर स्टॉकहोम अभिसमय किस वर्ष हस्ताक्षरित हुआ?
- A.2000
- B.2001
- C.1998
- D.1999
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2001
व्याख्या
सही उत्तर B, 2001 है। स्टॉकहोम अभिसमय 2001 में स्वीकार हुआ और 2004 में प्रभावी हुआ। इसका उद्देश्य दीर्घस्थायी कार्बनिक प्रदूषकों को समाप्त करना या सीमित करना है, अर्थात ऐसे रसायन जो सरलता से विघटित नहीं होते, दूर तक फैलते हैं, वसा ऊतकों में जमा होते हैं और मानव स्वास्थ्य को हानि पहुँचाते हैं; आरंभिक सूची को गंदा दर्जन कहा जाता था। भारत इस अभिसमय का पक्षकार है।
विकल्प A, 2000, जैविक विविधता अभिसमय के अंतर्गत बने जैव सुरक्षा पर कार्टाजेना प्रोटोकॉल का वर्ष है, इसलिए भ्रम होता है। विकल्प C, 1998, व्यापार में संकटपूर्ण रसायनों पर पूर्व सूचित सहमति से जुड़े रॉटरडैम अभिसमय का वर्ष है, जो संबंधित पर अलग संधि है। विकल्प D, 1999, से कोई बड़ा रासायनिक अभिसमय जुड़ा नहीं है। याद रखने योग्य तिकड़ी है: संकटपूर्ण अपशिष्ट पर 1989 का बासेल, रसायन व्यापार पर 1998 का रॉटरडैम और दीर्घस्थायी प्रदूषकों पर 2001 का स्टॉकहोम।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम किस वर्ष आरंभ किया?
- A.2018
- B.2017
- C.2020
- D.2019
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 2019
व्याख्या
सही उत्तर D, 2019 है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जनवरी 2019 में आरंभ किया, ताकि उन शहरों में कणिकीय प्रदूषण घटाया जा सके जो राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते। यह शहरवार काम करता है, जिसमें कार्ययोजनाएँ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ बनती हैं और निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करता है।
विकल्प A, 2018, वह वर्ष है जब कार्यक्रम का प्रारूप टिप्पणियों के लिए रखा गया था, इसीलिए यह सबसे लुभावना गलत विकल्प है। विकल्प B, 2017, प्रस्ताव से भी पहले का है। विकल्प C, 2020, आरंभ के बाद का वर्ष है और उसे कभी-कभी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए बने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से मिला दिया जाता है, जो बाद में आया। कार्यक्रम के लिए 2019 याद रखें, और यह भी कि उसका कानूनी आधार 1981 का वायु अधिनियम तथा 1986 का पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम है।
छत्र कानून कहा जाने वाला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष बना?
- A.1974
- B.1981
- C.1986
- D.1991
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1986
व्याख्या
सही उत्तर C, 1986 है। यह अधिनियम भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित हुआ और केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार के लिए आवश्यक समझे जाने वाले कोई भी उपाय करने की सामान्य शक्ति देता है। संकटपूर्ण अपशिष्ट, ध्वनि, प्लास्टिक अपशिष्ट, इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के इतने नियम इसी के अंतर्गत बने हैं कि इसे छत्र कानून कहा जाता है।
विकल्प A, 1974, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम का वर्ष है, जिसने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाए। विकल्प B, 1981, वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम का वर्ष है, जिसने उन्हीं बोर्डों का काम वायु गुणवत्ता तक बढ़ाया। विकल्प D, 1991, सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम का वर्ष है, जिसके अनुसार संकटपूर्ण पदार्थों का काम करने वाले उद्योगों को पीड़ितों के लिए बीमा रखना पड़ता है। इस प्रश्न का जाल 1984 उत्तर दे देना है, जो दुर्घटना का वर्ष है, अधिनियम का नहीं।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण किस वर्ष के अधिनियम के अंतर्गत स्थापित हुआ?
- A.1995
- B.2006
- C.2010
- D.2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2010
व्याख्या
सही उत्तर C, 2010 है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम 2010 में पारित हुआ और अधिकरण ने उसी वर्ष काम आरंभ किया, ताकि पर्यावरण संरक्षण और वन संरक्षण के मामलों का शीघ्र और विशेषज्ञ निपटारा हो सके। इसकी मुख्य पीठ नई दिल्ली में है, क्षेत्रीय पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई में हैं, और इसका अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है।
विकल्प A, 1995, राष्ट्रीय पर्यावरण अधिकरण अधिनियम का वर्ष है, जो पहले का प्रयास था, कभी ठीक से चला नहीं और 2010 के अधिनियम ने उसका स्थान ले लिया। विकल्प B, 2006, वन अधिकार अधिनियम का वर्ष है और उसी वर्ष के संशोधन ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को वैधानिक दर्जा दिया। विकल्प D, 2016, प्रतिपूरक वनीकरण निधि अधिनियम का वर्ष है। अधिकरण से केवल 2010 जुड़ा है, और उसके निर्णयों के विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायालय में होती है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन किस अधिनियम के अंतर्गत हुआ?
- A.वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981
- B.जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974
- C.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- D.कारखाना अधिनियम, 1948
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974
व्याख्या
सही उत्तर B, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 है। इसी अधिनियम ने बोर्ड की स्थापना की, ताकि वह केंद्र सरकार को परामर्श दे, बहिःस्राव के मानक तय करे और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के कार्य में समन्वय करे, जो राज्यों में इसी कानून से बने।
विकल्प A, 1981 का वायु अधिनियम, बोर्ड की स्थापना नहीं करता; उसने पहले से बने बोर्ड को वायु गुणवत्ता से जुड़े अतिरिक्त कार्य सौंपे, इसीलिए यही सबसे लोकप्रिय गलत उत्तर है। विकल्प C, 1986 का पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, वह छत्र कानून है जिसके अंतर्गत अधिकांश पर्यावरण नियम बनते हैं, पर बोर्ड उससे बारह वर्ष पहले का है। विकल्प D, 1948 का कारखाना अधिनियम, कारखाना श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशाओं से जुड़ा है और निरीक्षणालय बनाता है, प्रदूषण बोर्ड नहीं। जोड़ा याद रखें: बोर्ड के लिए 1974 का जल अधिनियम और अतिरिक्त कार्य के लिए 1981 का वायु अधिनियम।
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण का मुख्यालय कहाँ है?
- A.नई दिल्ली
- B.चेन्नई
- C.देहरादून
- D.हैदराबाद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चेन्नई
व्याख्या
सही उत्तर B, चेन्नई है। प्राधिकरण 2002 के जैविक विविधता अधिनियम के अंतर्गत बना और तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित है। यह भारत के जैविक संसाधनों तक पहुँच और उनके उपयोग से होने वाले लाभ के बँटवारे को नियंत्रित करता है, तथा राज्य जैव विविधता बोर्डों और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से काम करता है।
विकल्प A, नई दिल्ली, में मंत्रालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण की मुख्य पीठ हैं, और अभ्यर्थी प्रायः मान लेते हैं कि हर राष्ट्रीय प्राधिकरण वहीं होगा। विकल्प C, देहरादून, भारतीय वन सर्वेक्षण, भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद का मुख्यालय है, अर्थात वह अलग संस्थाओं का समूह है। विकल्प D, हैदराबाद, में 2012 में जैविक विविधता अभिसमय के पक्षकारों का ग्यारहवाँ सम्मेलन हुआ था, इसीलिए वह यहाँ विकल्प के रूप में आता है, पर प्राधिकरण का स्थान नहीं है।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनुच्छेद 48क और अनुच्छेद 51क का खंड छ किस संविधान संशोधन से जोड़े गए?
- A.बयालीसवाँ संशोधन, 1976
- B.चवालीसवाँ संशोधन, 1978
- C.तिहत्तरवाँ संशोधन, 1992
- D.छियासीवाँ संशोधन, 2002
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बयालीसवाँ संशोधन, 1976
व्याख्या
सही उत्तर A, 1976 का बयालीसवाँ संशोधन है। इसने नीति निदेशक तत्वों में अनुच्छेद 48क जोड़ा, जो राज्य से पर्यावरण की रक्षा और संवर्धन तथा वन और वन्य जीवन की सुरक्षा की अपेक्षा करता है, और मूल कर्तव्यों में अनुच्छेद 51क का खंड छ जोड़ा, जो यही दायित्व प्रत्येक नागरिक पर डालता है। इसी संशोधन ने वन तथा वन्य जीव-जंतुओं और पक्षियों की रक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में भेजा।
विकल्प B, 1978 का चवालीसवाँ संशोधन, आपातकाल के अनेक परिवर्तनों को पलटता है और उसने संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से हटाया। विकल्प C, 1992 का तिहत्तरवाँ संशोधन, पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देता है। विकल्प D, 2002 का छियासीवाँ संशोधन, अनुच्छेद 21क के अंतर्गत प्रारंभिक शिक्षा को मूल अधिकार बनाता है। पर्यावरण संबंधी प्रावधान केवल बयालीसवें संशोधन में हैं, और मूल कर्तव्य भी उसी ने पहली बार जोड़े थे।
रामसर अभिसमय किसके संरक्षण से संबंधित है?
- A.आर्द्रभूमि
- B.उष्णकटिबंधीय वन
- C.ओजोन परत
- D.प्रवासी व्हेल
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आर्द्रभूमि
व्याख्या
सही उत्तर A, आर्द्रभूमि है। यह अभिसमय 1971 में ईरान के रामसर नगर में हस्ताक्षरित हुआ और आधुनिक वैश्विक संरक्षण संधियों में सबसे पुराना है। इसके अंतर्गत सूचीबद्ध आर्द्रभूमियाँ रामसर स्थल कहलाती हैं, और पक्षकार देश उनका विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा उनका पारिस्थितिक स्वरूप बनाए रखने का वचन देते हैं। भारत भी इसका पक्षकार है और उसके अनेक आर्द्रभूमि स्थल इस सूची में दर्ज हैं, जिनमें ओडिशा की चिल्का और राजस्थान का केवलादेव सबसे पुराने हैं।
विकल्प B, उष्णकटिबंधीय वन, मुख्यतः जैविक विविधता अभिसमय और जलवायु अभिसमय के वन संबंधी कार्य के अंतर्गत आते हैं, रामसर के नहीं। विकल्प C, ओजोन परत, 1985 के वियना अभिसमय और 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का विषय है, जो ओजोन क्षयकारी रसायनों को चरणबद्ध रूप से हटाते हैं। विकल्प D, प्रवासी व्हेल, अंतरराष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग के अधीन आती हैं, जबकि प्रवासी प्रजातियाँ सामान्यतः 1979 के बॉन अभिसमय के अंतर्गत आती हैं। रामसर के साथ जोड़ने योग्य शब्द आर्द्रभूमि है और जोड़ने योग्य वर्ष 1971, तथा 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस इसी अभिसमय की तिथि पर मनाया जाता है।
1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किससे संबंधित है?
- A.ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन
- B.ओजोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ
- C.संकटपूर्ण अपशिष्ट का सीमापार आवागमन
- D.संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ओजोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ
व्याख्या
सही उत्तर B, ओजोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1985 के वियना अभिसमय के अंतर्गत स्वीकार हुआ और क्लोरोफ्लोरोकार्बन, हैलोन तथा ऐसे ही रसायनों को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की समय सारणी तय करता है। इसे प्रायः सबसे सफल पर्यावरण संधि कहा जाता है, और 16 सितंबर ओजोन परत संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय दिवस है।
विकल्प A, ग्रीनहाउस गैसें, जलवायु व्यवस्था का विषय हैं: 1992 का रूपरेखा अभिसमय, 1997 का क्योटो प्रोटोकॉल और 2015 का पेरिस समझौता। विकल्प C, सीमापार संकटपूर्ण अपशिष्ट, 1989 के बासेल अभिसमय का विषय है। विकल्प D, संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार, 1973 में स्वीकृत साइट्स के अंतर्गत आता है। अभ्यर्थी मॉन्ट्रियल और क्योटो को मिलाकर अंक गँवाते हैं, इसलिए जोड़ा पक्का कर लें: ओजोन के लिए मॉन्ट्रियल, जलवायु के लिए क्योटो।
भारत वन स्थिति रिपोर्ट किस संगठन द्वारा प्रकाशित की जाती है?
- A.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- B.भारतीय वन सर्वेक्षण
- C.भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण
- D.भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारतीय वन सर्वेक्षण
व्याख्या
सही उत्तर B, भारतीय वन सर्वेक्षण है। 1981 में स्थापित और देहरादून में स्थित यह संस्था उपग्रह आँकड़ों से देश के वन और वृक्ष आवरण का आकलन करती है और हर दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट निकालती है, जिसमें राज्यवार और सघनता वर्गवार आवरण दिया जाता है।
विकल्प A, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वायु और जल की गुणवत्ता की निगरानी करता है तथा वायु गुणवत्ता के आँकड़े प्रकाशित करता है, वन आवरण के नहीं। विकल्प C, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, 1890 में स्थापित और कोलकाता में स्थित है, जो देश की वनस्पति संपदा का सर्वेक्षण करता है और वनस्पति ग्रंथ प्रकाशित करता है, अर्थात विषय निकट है पर कार्य भिन्न। विकल्प D, भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून में ही है पर वह वानिकी में अनुसंधान और शिक्षा का समन्वय करती है, राष्ट्रीय आवरण आकलन नहीं। जोड़ा याद रखें: भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून और द्विवार्षिक रिपोर्ट।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 को छत्र कानून क्यों कहते हैं?
क्योंकि यह किसी एक प्रदूषक या एक माध्यम से नहीं जुड़ा, बल्कि केंद्र सरकार को पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए आवश्यक समझे जाने वाले सभी उपाय करने की सामान्य शक्ति देता है। संकटपूर्ण अपशिष्ट, ध्वनि, प्लास्टिक अपशिष्ट, ई-अपशिष्ट और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन के नियम इसी के अंतर्गत जारी होते हैं।
संविधान में पर्यावरण किस संशोधन से जोड़ा गया?
1976 के बयालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम से। इसने अनुच्छेद 48क जोड़ा, जो राज्य से पर्यावरण, वन और वन्य जीवन की रक्षा की अपेक्षा करने वाला निदेशक तत्व है, और अनुच्छेद 51क का खंड छ जोड़ा, जो नागरिकों का वही मूल कर्तव्य है। इसी संशोधन ने वन और वन्य जीवन को समवर्ती सूची में भेजा।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण क्या है और कहाँ बैठता है?
यह 2010 के राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम के अंतर्गत बना विशेष अधिकरण है, जो पर्यावरण संरक्षण और वन संरक्षण के मामले तय करता है। इसकी मुख्य पीठ नई दिल्ली में और क्षेत्रीय पीठें भोपाल, पुणे, कोलकाता तथा चेन्नई में हैं। इसका अध्यक्ष उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश होता है और इसके विरुद्ध अपील उच्चतम न्यायालय में जाती है।
प्रदूषक भुगतान करे सिद्धांत का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि प्रदूषण रोकने और उससे हुई क्षति की भरपाई का खर्च उसी व्यक्ति या उद्योग को उठाना होगा जो उसके लिए उत्तरदायी है, राज्य या प्रभावित समुदाय को नहीं। भारतीय न्यायालयों ने इसे लागू करते हुए उद्योगों को दूषित भूमि और जल के पुनरुद्धार का खर्च देने का आदेश दिया है।
कौन सा अभिसमय आर्द्रभूमि से और कौन सा ओजोन से जुड़ा है?
1971 में ईरान के रामसर नगर में हस्ताक्षरित रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों के संरक्षण से जुड़ा है, और उसके अंतर्गत सूचीबद्ध स्थल रामसर स्थल कहलाते हैं। ओजोन परत 1985 के वियना अभिसमय और 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के अंतर्गत आती है, जो क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे ओजोन क्षयकारी पदार्थ चरणबद्ध रूप से समाप्त करता है।
संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची कौन रखता है?
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ, जिसकी स्थापना 1948 में हुई और जो स्विट्जरलैंड में स्थित है। उसकी लाल सूची प्रजातियों को न्यूनतम चिंतित से लेकर संवेदनशील, संकटग्रस्त, अति संकटग्रस्त, जंगल में विलुप्त और विलुप्त तक की श्रेणियों में रखती है।
स्रोत
- भारत का संविधान, अनुच्छेद 21, 48क और 51क — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- पर्यावरण अधिनियम और नियम: जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण: अधिकारिता, पीठें और प्रक्रिया — राष्ट्रीय हरित अधिकरण
- जल और वायु अधिनियमों के अंतर्गत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कार्य — केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- बहुपक्षीय पर्यावरण समझौते: रामसर, साइट्स, मॉन्ट्रियल, बासेल, स्टॉकहोम और रियो अभिसमय — संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम





