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GK नोट्सपर्यावरण और पारिस्थितिकीजल संरक्षण और पारंपरिक वर्षा जल संचयन

जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन: पारंपरिक संरचनाएं और योजनाएं

भारत में जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के पूरे नोट्स: खड़ीन, टांका, जोहड़, जाबो, कुहल, आधुनिक पुनर्भरण विधियां तथा जल शक्ति मंत्रालय की प्रमुख योजनाएं।

लेखक · प्रकाशित · 6 मिनट

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जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन: पारंपरिक संरचनाएं और योजनाएं — GK24 title card
जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन: पारंपरिक संरचनाएं और योजनाएं — GK24 title card

जल संरक्षण का अर्थ है जल का ऐसा उपयोग जिसमें निकाला गया पानी प्रकृति द्वारा पुनः भरे जाने वाले पानी से अधिक न हो, और वर्षा जल संचयन इसका सबसे पुराना तरीका है: वर्षा को वहीं रोक लेना जहां वह गिरती है और उसे तालाब, टांके या भूमिगत जलभृत में सहेज लेना। भारत में विश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी रहती है, परंतु विश्व के मीठे जल का केवल लगभग 4 प्रतिशत भाग यहां है, और वर्षा का बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून के चार महीनों में ही मिल जाता है। इसलिए पानी को सहेजना भारत के लिए नया विचार नहीं, बहुत पुरानी परंपरा है और हर क्षेत्र ने अपनी वर्षा तथा चट्टान के अनुसार अपनी संरचना बनाई। परीक्षाओं में यह अध्याय भूगोल, पर्यावरण और सरकारी योजनाओं को एक साथ पूछने का अवसर देता है।

भारत को जल संरक्षण क्यों आवश्यक है

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितंबर तक वर्षा का सबसे बड़ा भाग देता है, अतः जल की आपूर्ति थोड़े समय में और असमान रूप से आती है और उसे रोकना पड़ता है।
  • भूजल ही भारत की अधिकांश सिंचाई और ग्रामीण पेयजल का आधार है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड आकलन इकाइयों को सुरक्षित, अर्ध-क्रांतिक, क्रांतिक और अति-दोहित श्रेणियों में बांटता है।
  • वर्षा का स्थानिक वितरण भी बहुत असमान है: पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि पश्चिमी राजस्थान तथा दक्कन का भीतरी भाग सूखा रहता है।
  • तटीय क्षेत्रों में खारे पानी का प्रवेश, कुछ जलभृतों में फ्लोराइड और आर्सेनिक तथा नदियों का प्रदूषण उपयोग योग्य जल को और घटाते हैं, इसलिए संरक्षण मात्रा के साथ गुणवत्ता का भी विषय है।

पारंपरिक जल संचयन संरचनाएं

संरचना और उसका क्षेत्र, यही जोड़ा परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है। नीचे की तालिका याद कर लेने पर मिलान वाले प्रश्न स्वयं हल हो जाते हैं।

संरचनाक्षेत्र या राज्यस्वरूप
खड़ीनजैसलमेर, राजस्थानपथरीले ढाल के निचले भाग में बनाया गया मिट्टी का बांध; बहाव का पानी रुककर मिट्टी को भिगोता है और पानी उतरने पर नम भूमि पर फसल ली जाती है। इसका श्रेय पंद्रहवीं शताब्दी के पालीवाल ब्राह्मणों को दिया जाता है।
टांकापश्चिमी राजस्थानआंगन में बना ढका हुआ भूमिगत टैंक, जिसमें छत और आंगन का छना हुआ पानी पेयजल के लिए जमा होता है
जोहड़अलवर क्षेत्र, राजस्थान तथा हरियाणामिट्टी का छोटा अवरोध बांध, जो मानसूनी बहाव को रोककर आसपास के कुओं का पुनर्भरण करता है
बावड़ीराजस्थान, गुजरातजलस्तर तक सीढ़ियों से उतरने वाला कुआं; पाटन की रानी की वाव और अडालज की वाव प्रसिद्ध हैं
कुंडथार मरुस्थलचूने से पक्का तश्तरीनुमा जलग्रहण क्षेत्र, जिसका पानी ढके कुएं में जाता है
जिंगलद्दाखहिमनद के पिघले जल को मार्गदर्शी नालियों से लाकर रोकने वाला छोटा टैंक
कुहलकांगड़ा, हिमाचल प्रदेशगुरुत्व से बहने वाली नहर, जो हिमनद और नाले का पानी सीढ़ीदार खेतों तक ले जाती है
आहर-पईनदक्षिण बिहार, प्राचीन मगध क्षेत्रपईन नदी से निकाली गई नहर है और आहर उसके सिरे पर बना तीन ओर से बंधा जलाशय
जाबोकिक्रुमा, नागालैंडबहाव को रोकने की पद्धति: पहाड़ी की चोटी का वर्षा जल तालाब में, फिर पशुबाड़े से होकर मछली पालने वाले धान के खेतों तक पहुंचता है
बांस टपक सिंचाईखासी और जयंतिया पहाड़ियां, मेघालयचीरे हुए बांस की नलियों से झरने का पानी बूंद-बूंद पान की बेल और काली मिर्च तक पहुंचाया जाता है
एरी और केरेतमिलनाडु, कर्नाटकगांव के तालाबों की श्रृंखला, जिसमें एक का अतिरिक्त पानी ढाल के नीचे दूसरे में जाता है
सुरंगमकासरगोड, केरललैटेराइट पहाड़ी में क्षैतिज सुरंग खोदकर रिसाव का पानी एकत्र करना
विरदाबन्नी घास क्षेत्र, कच्छमालधारी पशुपालकों द्वारा गड्ढे में खोदे गए छोटे कुएं, जो खारे पानी के ऊपर तैरती मीठे पानी की पतली परत तक पहुंचते हैं
फड़तापी बेसिन, महाराष्ट्रबंधारा से नदी का पानी मोड़कर खेतों के खंडों में क्रम से देने की व्यवस्था
डोंग, पाट और पनम केनीअसम, झाबुआ (मध्य प्रदेश), वायनाड (केरल)क्रमशः नहर, जल मोड़ने और लकड़ी के बेलनाकार कुएं की क्षेत्रीय पद्धतियां

आधुनिक वर्षा जल संचयन

आधुनिक प्रणाली वर्षा जल के साथ दो में से एक काम करती है: उसे सीधे उपयोग के लिए संचित करती है, या उसे भूमि में उतारकर जलभृत का पुनर्भरण करती है।

  • छत पर आधारित प्रणाली में जलग्रहण क्षेत्र यानी छत, परनाले, पहले बहाव को निकालने वाला उपकरण, छननी और अंत में भंडारण टंकी या पुनर्भरण संरचना होती है। पहली वर्षा छत की धूल, पत्ते और बीट बहाकर लाती है, इसलिए उसे बाहर कर दिया जाता है।
  • पुनर्भरण गड्ढे, पुनर्भरण खाइयां, कुएं से पुनर्भरण, पुनर्भरण कूप और अंतःक्षेपण कूप जल को भूमि में लौटाते हैं।
  • जलग्रहण क्षेत्र में रिसाव तालाब, अवरोध बांध, नाला बंध, समोच्च मेड़बंदी, समोच्च खाइयां और गली प्लगिंग बहाव को धीमा कर पानी को भूमि में उतारती हैं।
  • टपक और फुहार यानी सूक्ष्म सिंचाई उपयोग के स्थान पर ही जल बचाती है, जो महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि भारत के जल का सबसे बड़ा भाग लेती है।

योजनाएं, संस्थाएं और नीति

  • जल शक्ति मंत्रालय का गठन 2019 में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में मिलाकर किया गया।
  • जल जीवन मिशन की घोषणा 15 अगस्त 2019 को हुई, जिसका लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाना है; शहरों के लिए जल जीवन मिशन (शहरी) है।
  • अटल भूजल योजना 2019 में विश्व बैंक की सहायता से आरंभ हुई और सात राज्यों - गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश - के जल संकट वाले खंडों में समुदाय आधारित भूजल प्रबंधन करती है।
  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन का नारा है वर्षा को वहीं रोको, जब और जहां वह गिरे।
  • मिशन अमृत सरोवर 24 अप्रैल 2022 को आरंभ हुआ और इसका लक्ष्य देश के हर जिले में 75 तालाबों का निर्माण या जीर्णोद्धार है।
  • राष्ट्रीय जल मिशन, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (2008) के आठ मिशनों में से एक है और जल उपयोग दक्षता 20 प्रतिशत बढ़ाना इसका घोषित लक्ष्य है।
  • केंद्रीय भूमि जल बोर्ड भूजल का आकलन करता है और केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण दोहन का नियमन करता है। राष्ट्रीय जल नीति तीन बार आई है - 1987, 2002 और 2012 में।
  • तमिलनाडु भवनों में छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने वाला पहला राज्य बना, जिसने 2003 में अपने भवन नियमों में संशोधन किया।

राजस्थान के राजेंद्र सिंह, जिन्हें अलवर में जोहड़ों को पुनर्जीवित करने के कारण भारत का जलपुरुष कहा जाता है, 2001 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और 2015 में स्टॉकहोम जल पुरस्कार से सम्मानित हुए।

याद रखने योग्य शब्द

  • जलभृत: भूजल को रोकने और देने वाली चट्टानी परत; असीमित जलभृत ऊपर से पुनर्भरण पाता है, सीमित जलभृत अभेद्य परतों के बीच रहता है।
  • जलग्रहण क्षेत्र: एक ही निकास की ओर बहने वाली सारी भूमि, जिस पर मिट्टी और जल संरक्षण का काम नियोजित होता है।
  • आभासी जल: किसी वस्तु के उत्पादन में लगा जल, जो व्यापार के साथ वस्तु के रूप में स्थान बदलता है।
  • जल पदचिह्न: किसी व्यक्ति, फसल या देश द्वारा उपयोग किए गए मीठे जल की कुल मात्रा।
  • धूसर जल: रसोई, स्नान और धुलाई का प्रयुक्त जल, जो साधारण उपचार के बाद बागवानी और शौचालय में पुनः प्रयोग योग्य है।

परीक्षा की दृष्टि से

सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न संरचना और राज्य का मिलान है: खड़ीन, टांका, कुंड और जोहड़ का राजस्थान, जिंग का लद्दाख, कुहल का हिमाचल प्रदेश, जाबो का नागालैंड, बांस टपक सिंचाई का मेघालय, आहर-पईन का दक्षिण बिहार, सुरंगम का केरल, फड़ का महाराष्ट्र और विरदा का कच्छ। दूसरा पसंदीदा भाग योजनाओं का है - 2019 में कौन सा मंत्रालय बना, अटल भूजल योजना को कौन सहायता देता है, अमृत सरोवर में प्रति जिला कितने तालाब और कैच द रेन का नारा क्या है। छत प्रणाली के अंगों पर, विशेषकर पहले बहाव को निकालने वाले उपकरण के उद्देश्य पर एक प्रश्न अवश्य आता है, तथा संचय और पुनर्भरण के अंतर पर भी। सामान्य भ्रम ये हैं - जिंग और कुहल का आपस में बदल जाना, जाबो को मेघालय तथा बांस टपक सिंचाई को नागालैंड बता देना, आहर को नहर और पईन को जलाशय मान लेना, और पहले अनिवार्य नियम का श्रेय तमिलनाडु के स्थान पर महाराष्ट्र को दे देना।

महत्वपूर्ण तथ्य

भारत का हिस्साविश्व की लगभग 18 प्रतिशत आबादी, विश्व के मीठे जल का लगभग 4 प्रतिशत
खड़ीनजैसलमेर, राजस्थान; श्रेय पालीवाल ब्राह्मणों को, पंद्रहवीं शताब्दी
जाबोकिक्रुमा गांव, फेक जिला, नागालैंड; अर्थ है बहाव को रोकना
बांस टपक सिंचाईमेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियां, पान की बेल और काली मिर्च के लिए
आहर-पईनदक्षिण बिहार; पईन नहर है और आहर बंधा जलाशय
सुरंगमकासरगोड जिला, केरल; लैटेराइट में खोदी गई सुरंग
जल शक्ति मंत्रालय2019 में दो जल संबंधी मंत्रालयों को मिलाकर गठित
जल जीवन मिशनघोषणा 15 अगस्त 2019, हर ग्रामीण घर तक नल से जल
अटल भूजल योजना2019, विश्व बैंक सहायित, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान सहित सात राज्य
मिशन अमृत सरोवर24 अप्रैल 2022 को आरंभ, हर जिले में 75 तालाब
राष्ट्रीय जल मिशनजलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना, 2008 के आठ मिशनों में से एक
राष्ट्रीय जल नीति1987, 2002 और 2012 में जारी
अनिवार्य छत संचयन में पहला राज्यतमिलनाडु, 2003
भारत का जलपुरुषराजेंद्र सिंह; मैग्सेसे 2001, स्टॉकहोम जल पुरस्कार 2015

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: राजस्थान · RSMSSB JE Mechanical (Degree) held on 13आसान

राजस्थान में टांका और खड़ीन किस प्रकार के हैं?

  1. A.पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों के
  2. B.पारंपरिक युद्ध कौशल के
  3. C.पारंपरिक लोक नृत्यों के
  4. D.पारंपरिक कृषि पद्धति के
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों के

व्याख्या

सही उत्तर A, पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों के है। टांका पश्चिमी राजस्थान में आंगन के नीचे या घर के भीतर बना ढका हुआ भूमिगत टैंक है, जिसमें पक्के आंगन या छत पर गिरी वर्षा छननी से होकर जमा होती है और सूखे महीनों में पेयजल का काम देती है। खड़ीन पंद्रहवीं शताब्दी में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित पद्धति है, जिसमें पथरीले जलग्रहण ढाल के निचले भाग में लंबा मिट्टी का बांध बनाया जाता है; बहाव का पानी उसके पीछे रुकता है, मिट्टी को भिगोता है और पानी उतरने के बाद नम भूमि पर फसल ली जाती है। इस प्रकार दोनों मरुस्थल की पारंपरिक जल संचयन संरचनाओं के परिवार में आते हैं, जिसमें कुंड, जोहड़ और बावड़ी भी शामिल हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि इन शब्दों का युद्ध से कोई संबंध नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि राजस्थान के लोक नृत्य घूमर, कालबेलिया, तेरह ताली और चरी हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि खड़ीन से खेती होती है, फिर भी संरचना स्वयं जल संचयन कार्य है और टांका का कृषि से कोई अर्थ नहीं है।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

वर्षा जल संचयन की जाबो पद्धति किस राज्य में प्रचलित है?

  1. A.मेघालय
  2. B.नागालैंड
  3. C.मिजोरम
  4. D.मणिपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नागालैंड

व्याख्या

सही उत्तर B, नागालैंड है। जाबो शब्द का अर्थ ही बहाव को रोकना है और यह पद्धति नागालैंड के फेक जिले के किक्रुमा गांव के आसपास प्रचलित है। पहाड़ी की चोटी पर सुरक्षित वन क्षेत्र में गिरी वर्षा बीच की सीढ़ी पर बने तालाबों में रोकी जाती है, वहां से पशुबाड़ों से होकर बहती है जहां उसमें गोबर के पोषक तत्व मिल जाते हैं, और अंत में नीचे के धान के खेतों तक पहुंचती है जिनमें मछली भी पाली जाती है। इस प्रकार वन, जल, पशुधन और फसल एक जुड़ी हुई व्यवस्था के रूप में संभाले जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि मेघालय की पहचान बांस टपक सिंचाई से है, जिसमें चीरे हुए बांस की नलियों से झरने का पानी खासी और जयंतिया पहाड़ियों में पान की बेल तथा काली मिर्च तक बूंद-बूंद पहुंचाया जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि मिजोरम बांस के वनों और झूम खेती के लिए जाना जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मणिपुर इस अध्याय में लोकटक झील और तैरते फुमदी के लिए जाना जाता है।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

बांस टपक सिंचाई, जिसमें चीरे हुए बांस की नलियों से झरने का पानी खेतों तक पहुंचाया जाता है, किस राज्य की पारंपरिक पद्धति है?

  1. A.मेघालय
  2. B.केरल
  3. C.लद्दाख
  4. D.बिहार
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मेघालय

व्याख्या

सही उत्तर A, मेघालय है। खासी और जयंतिया पहाड़ियों में ढाल पर मौजूद झरने और नाले का पानी बांस की चीरी हुई नलियों, नालियों और मोड़ने वाली लकड़ियों के जाल से नीचे उतारा जाता है, और अंत में पान की बेल या काली मिर्च के पौधे की जड़ पर बूंद-बूंद छोड़ा जाता है। इस व्यवस्था में सीमेंट, पंप और बिजली की कोई आवश्यकता नहीं होती, और यह संसार की सबसे पुरानी सूक्ष्म सिंचाई विधियों में गिनी जाती है। विकल्प B गलत है क्योंकि इस अध्याय में केरल की पहचान सुरंगम से है, जो लैटेराइट पहाड़ी में क्षैतिज सुरंग खोदकर रिसाव का पानी लेने की विधि है, तथा वायनाड के लकड़ी के बेलनाकार पनम केनी कुएं से है। विकल्प C गलत है क्योंकि लद्दाख जिंग से जुड़ा है, जो हिमनद के पिघले जल को रोकने वाला छोटा टैंक है। विकल्प D गलत है क्योंकि दक्षिण बिहार आहर-पईन प्रणाली का क्षेत्र है।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

दक्षिण बिहार की पारंपरिक आहर-पईन प्रणाली में पईन क्या है?

  1. A.बहाव का पानी रोकने वाला बंधा जलाशय
  2. B.नदी से पानी लाने वाली मोड़ नहर
  3. C.ढका हुआ भूमिगत पेयजल टैंक
  4. D.जलस्तर तक उतरने वाला सीढ़ीदार कुआं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नदी से पानी लाने वाली मोड़ नहर

व्याख्या

सही उत्तर B, नदी से पानी लाने वाली मोड़ नहर है। प्राचीन मगध यानी दक्षिण बिहार में भूमि का ढाल मंद है और मिट्टी पानी कम रोकती है, इसलिए किसानों ने फल्गु, सकरी और मोरहर जैसी नदियों के बहाव से लंबी नहरें, अर्थात पईन, निकालकर पानी खेतों तक पहुंचाया। विकल्प A गलत है क्योंकि पईन के सिरे पर बना तीन ओर से बंधा जलाशय आहर कहलाता है, जिसका चौथा किनारा भूमि का प्राकृतिक ढाल होता है; आहर और पईन को आपस में बदल देना इस प्रश्न का सामान्य जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि ढका हुआ भूमिगत पेयजल टैंक पश्चिमी राजस्थान का टांका है। विकल्प D गलत है क्योंकि जलस्तर तक उतरने वाला सीढ़ीदार कुआं राजस्थान और गुजरात की बावड़ी या वाव है, जिसमें पाटन की रानी की वाव सर्वाधिक प्रसिद्ध है। इसलिए आहर-पईन का जोड़ा जलाशय और नहर, दोनों को मिलाकर बनता है।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

हिमनद के पिघले जल को एकत्र करने के लिए बनाया जाने वाला छोटा टैंक जिंग किस क्षेत्र की पारंपरिक संरचना है?

  1. A.हिमाचल प्रदेश
  2. B.उत्तराखंड
  3. C.लद्दाख
  4. D.सिक्किम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. लद्दाख

व्याख्या

सही उत्तर C, लद्दाख है। लद्दाख के शीत मरुस्थल में वर्षा बहुत कम होती है, इसलिए वहां काम का पानी हिमनद के पिघलने से मिलता है। मार्गदर्शी नालियां हिमनद के छोर से पिघला जल नीचे खेतों के पास बने जिंग तक लाती हैं, जहां वह दोपहर तक रोका जाता है, क्योंकि तब तक पिघलने की मात्रा सिंचाई के योग्य हो जाती है। गांव का जल अधिकारी, जिसे चुरपुन कहते हैं, यह पानी घरों में बांटता है। विकल्प A गलत है क्योंकि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा क्षेत्र की संरचना कुहल है, जो हिमनद और नाले का पानी सीढ़ीदार खेतों तक सीधे ले जाती है, टैंक में संचित नहीं करती; जिंग और कुहल को बदल देना यहां सबसे आम गलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि उत्तराखंड गूल नालियों और चाल-खाल तालाबों से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि सिक्किम में वर्षा बहुत अधिक होती है और वह ऐसे किसी पिघल जल टैंक से नहीं जाना जाता।

Q6.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

रिसाव का पानी लेने के लिए पहाड़ी में खोदी गई क्षैतिज सुरंग, सुरंगम, मुख्यतः कहां मिलती है?

  1. A.केरल के कासरगोड के लैटेराइट क्षेत्र में
  2. B.कच्छ के बन्नी घास क्षेत्र में
  3. C.महाराष्ट्र के तापी बेसिन में
  4. D.राजस्थान के अलवर जिले में
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केरल के कासरगोड के लैटेराइट क्षेत्र में

व्याख्या

सही उत्तर A, केरल के कासरगोड के लैटेराइट क्षेत्र में है। सुरंगम लगभग दो मीटर ऊंची वह सुरंग है जो लैटेराइट पहाड़ी के किनारे से लगभग समतल खोदी जाती है और रिसाव वाली परत तक पहुंचती है; चट्टान से टपकता पानी सुरंग के फर्श पर बहकर बाहर बने गड्ढे में जमा होता है, इसलिए यह संरचना बिना किसी पंप के भूजल ले आती है। यही विचार पड़ोसी दक्षिण कन्नड़ क्षेत्र की थुरंगम में भी दिखता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कच्छ के बन्नी घास क्षेत्र में विरदा मिलते हैं, जो मालधारी पशुपालकों द्वारा गड्ढे में खोदे गए छोटे कुएं हैं और खारे पानी के ऊपर की मीठे पानी की पतली परत तक पहुंचते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि तापी बेसिन में बंधारा पर आधारित फड़ प्रणाली है। विकल्प D गलत है क्योंकि अलवर जोहड़ों के लिए प्रसिद्ध है, जिन्हें राजेंद्र सिंह और तरुण भारत संघ ने पुनर्जीवित किया।

Q7.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जल शक्ति मंत्रालय का गठन 2019 में किन दो मंत्रालयों को मिलाकर किया गया?

  1. A.कृषि, तथा ग्रामीण विकास
  2. B.जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, तथा पेयजल एवं स्वच्छता
  3. C.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, तथा पृथ्वी विज्ञान
  4. D.आवासन और शहरी कार्य, तथा पंचायती राज
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, तथा पेयजल एवं स्वच्छता

व्याख्या

सही उत्तर B है। वर्ष 2019 में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय को पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में मिलाकर एक जल शक्ति मंत्रालय बनाया गया, जिससे सिंचाई, नदी बेसिन, भूजल, पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता का काम एक ही मंत्रालय के अधीन आ जाए। यह दो विभागों से चलता है - जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा पेयजल और स्वच्छता विभाग - और जल जीवन मिशन, जल शक्ति अभियान तथा अटल भूजल योजना इसके अंतर्गत चलते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कृषि और ग्रामीण विकास अलग मंत्रालय बने हुए हैं, यद्यपि जलग्रहण क्षेत्र विकास का काम ग्रामीण विकास के अधीन होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पर्यावरण और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालयों का विलय नहीं हुआ; वे वन, प्रदूषण और मौसम सेवाओं का काम देखते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि शहरी जलापूर्ति शहरी कार्य मंत्रालय से होती है, परंतु ऐसा कोई विलय नहीं हुआ।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जल संकट वाले खंडों में समुदाय आधारित भूजल प्रबंधन की अटल भूजल योजना को किसकी सहायता प्राप्त है?

  1. A.एशियाई विकास बैंक
  2. B.विश्व बैंक
  3. C.नव विकास बैंक
  4. D.अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विश्व बैंक

व्याख्या

सही उत्तर B, विश्व बैंक है। जल शक्ति मंत्रालय के अधीन 2019 में आरंभ अटल भूजल योजना एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसका एक भाग विश्व बैंक की सहायता से वित्तपोषित है। यह गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, इन सात राज्यों के जल संकट वाले खंडों में चलती है, और इसकी विशेषता यह है कि ग्राम पंचायतें जल सुरक्षा योजनाएं बनाती हैं तथा धन उन्हें केवल निर्माण के लिए नहीं, बल्कि भूजल की स्थिति में मापे गए सुधार के प्रोत्साहन के रूप में मिलता है। विकल्प A गलत है क्योंकि एशियाई विकास बैंक भारत की अनेक सिंचाई और शहरी जल परियोजनाओं को वित्त देता है, परंतु इस योजना को नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि ब्रिक्स देशों द्वारा स्थापित और शंघाई में मुख्यालय वाला नव विकास बैंक इसका भागीदार नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष भुगतान संतुलन के लिए ऋण देता है, इस प्रकार की विकास योजनाओं के लिए नहीं।

Q9.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

वर्ष 2022 में आरंभ मिशन अमृत सरोवर के अंतर्गत प्रत्येक जिले में कितने तालाबों के निर्माण या जीर्णोद्धार का लक्ष्य है?

  1. A.25
  2. B.50
  3. C.75
  4. D.100
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 75

व्याख्या

सही उत्तर C, 75 है। मिशन अमृत सरोवर 24 अप्रैल 2022 को, राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर, स्वतंत्रता के पचहत्तर वर्ष के उत्सव के अंग के रूप में आरंभ हुआ, और हर जिले में पचहत्तर तालाबों के लक्ष्य में आया 75 का अंक उसी वर्षगांठ से जुड़ा है। प्रत्येक अमृत सरोवर में लगभग दस हजार घन मीटर जल रोकने की योजना है, और यह काम ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम तथा ग्रामीण विकास के जलग्रहण संबंधी कार्यक्रमों में पहले से उपलब्ध धन के अभिसरण से किया जाता है। विकल्प A, विकल्प B और विकल्प D इसलिए गलत हैं कि घोषित संख्या यही नहीं है; पच्चीस, पचास और सौ ऐसे लक्ष्यों में सामान्य भ्रमजनक विकल्प होते हैं। 75 के अंक और स्वतंत्रता की वर्षगांठ के संबंध को याद रखना इस तथ्य को पकड़ने का सबसे सरल तरीका है।

Q10.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

राष्ट्रीय जल मिशन निम्नलिखित में से किसके आठ मिशनों में से एक है?

  1. A.जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना
  2. B.राष्ट्रीय जल नीति, 2012
  3. C.नमामि गंगे कार्यक्रम
  4. D.राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना

व्याख्या

सही उत्तर A, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना है। वर्ष 2008 में जारी इस योजना में आठ राष्ट्रीय मिशन बनाए गए, जिनमें राष्ट्रीय सौर मिशन, उन्नत ऊर्जा दक्षता मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारिस्थितिकी को बनाए रखने का मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन, सतत आवास मिशन और जलवायु परिवर्तन के सामरिक ज्ञान का मिशन शामिल हैं। जल मिशन का उद्देश्य समेकित जल संसाधन प्रबंधन तथा जल उपयोग दक्षता में बीस प्रतिशत की वृद्धि है। विकल्प B गलत है क्योंकि राष्ट्रीय जल नीति सिद्धांतों का कथन है, मिशनों की जनक नहीं, यद्यपि वह भी दक्षता पर बल देती है। विकल्प C गलत है क्योंकि नमामि गंगे गंगा बेसिन की नदी सफाई का कार्यक्रम है। विकल्प D गलत है क्योंकि ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम गांवों को जल देता था और बाद में जल जीवन मिशन में समाहित हो गया।

Q11.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

भवनों में छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने वाला भारत का पहला राज्य कौन था?

  1. A.महाराष्ट्र
  2. B.तमिलनाडु
  3. C.गुजरात
  4. D.राजस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तमिलनाडु

व्याख्या

सही उत्तर B, तमिलनाडु है। चेन्नई के आसपास भूजल स्तर में तीव्र गिरावट को देखते हुए राज्य ने 2003 में अपने भवन नियमों में संशोधन किया और भवनों में वर्षा जल संचयन संरचना आवश्यक कर दी; इसी कारण इसे ऐसा नियम बनाने वाला देश का पहला राज्य कहा जाता है। बाद में अन्य राज्यों तथा आदर्श भवन उपनियमों में भी इसी प्रकार के प्रावधान आए और अब अनेक नगर निगम भवन नक्शे की स्वीकृति को संचयन संरचना से जोड़ते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि महाराष्ट्र ने पानी पंचायत और जलयुक्त शिवार जैसे प्रयासों से जलग्रहण क्षेत्र के काम में आगे कदम बढ़ाया, परंतु इस भवन नियम में वह पहला नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि इस अध्याय में गुजरात सरदार सरोवर की नहर व्यवस्था तथा बावड़ियों और विरदाओं के जीर्णोद्धार से जुड़ा है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्थान टांका, कुंड और जोहड़ जैसी पारंपरिक मरुस्थलीय संरचनाओं का घर है, पहली कानूनी अनिवार्यता का नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन में क्या अंतर है?

जल संरक्षण व्यापक विचार है, जिसका अर्थ है जल का ऐसा उपयोग जिसमें दोहन पुनर्भरण से अधिक न हो; इसमें कुशल सिंचाई, पुनः उपयोग और रिसाव रोकना सब आता है। वर्षा जल संचयन उसी के भीतर एक विधि है, जिसमें छत या जलग्रहण क्षेत्र से वर्षा एकत्र कर संचित की जाती है या जलभृत के पुनर्भरण में लगाई जाती है।

खड़ीन प्रणाली किस राज्य से संबंधित है?

राजस्थान से, और उसमें विशेष रूप से जैसलमेर क्षेत्र से। खड़ीन पथरीले जलग्रहण ढाल के निचले भाग में बना मिट्टी का बांध है, जो बहाव का पानी रोककर मिट्टी को भिगोता है और पानी उतरने के बाद नम भूमि पर फसल लेने देता है। इसका श्रेय पंद्रहवीं शताब्दी के पालीवाल ब्राह्मणों को दिया जाता है।

जाबो पद्धति क्या है और कहां प्रचलित है?

जाबो का अर्थ है बहाव को रोकना और यह नागालैंड के किक्रुमा गांव में प्रचलित है। वन से ढकी पहाड़ी की चोटी पर गिरी वर्षा तालाबों में रोकी जाती है, फिर पशुबाड़े से होकर गोबर के पोषक तत्व लेकर नीचे सीढ़ीदार धान के खेतों में जाती है, जहां मछली भी पाली जाती है; इस प्रकार वन, जल, पशु और फसल एक ही व्यवस्था बनाते हैं।

छत के वर्षा जल संचयन में पहले बहाव को निकालने वाला उपकरण क्यों लगाया जाता है?

वर्षा की पहली धार छत की धूल, पत्ते और पक्षियों की बीट बहाकर लाती है, इसलिए वही पानी सबसे गंदा होता है। यह उपकरण आरंभिक मात्रा को बाहर बहा देता है और उसके बाद का अधिक स्वच्छ जल ही छननी और भंडारण टंकी तक पहुंचता है, जिससे संचित जल उपयोग योग्य बना रहता है।

छत के वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने वाला पहला राज्य कौन है?

तमिलनाडु, जिसने 2003 में अपने भवन नियमों में संशोधन कर भवनों में वर्षा जल संचयन संरचना आवश्यक की। बाद में अन्य राज्यों और आदर्श भवन उपनियमों में भी ऐसे प्रावधान आए, परंतु पहली अनिवार्यता के लिए अपेक्षित उत्तर तमिलनाडु ही है।

भारत का जलपुरुष किसे कहा जाता है?

राजस्थान के राजेंद्र सिंह को, जिन्होंने तरुण भारत संघ के माध्यम से अलवर क्षेत्र में जोहड़ों और सूखी नदियों को पुनर्जीवित किया। उन्हें 2001 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार और 2015 में स्टॉकहोम जल पुरस्कार प्राप्त हुआ।

स्रोत

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