वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972: अनुसूचियां और प्रावधान
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के संपूर्ण नोट्स: पृष्ठभूमि, पुरानी छह और नई चार अनुसूचियां, संरक्षित क्षेत्र, बोर्ड तथा प्राधिकरण और दंड के प्रावधान।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 वह कानून है जिस पर भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं के लगभग सभी वन्यजीव प्रश्न टिके हुए हैं। यही अधिनियम शिकार पर रोक लगाता है, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों को कानूनी दर्जा देता है, संरक्षित प्रजातियों की सूची बनाता है और उनके विरुद्ध अपराध पर दंड तय करता है। परीक्षक इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि इसका ढांचा सीधे एक अंक के प्रश्नों में बदल जाता है: एक वर्ष, एक अनुसूची संख्या, एक धारा, एक प्राधिकरण और उसका अध्यक्ष।
अधिनियम क्यों बना और कहां लागू है
वर्ष 1972 से पहले भारत में मुख्य रूप से जंगली पक्षी एवं पशु संरक्षण अधिनियम, 1912 तथा रियासतों और प्रांतों के अलग-अलग नियम ही लागू थे, जो बढ़ते अवैध शिकार के सामने अपर्याप्त सिद्ध हुए। उस समय वन्य पशु-पक्षियों का संरक्षण राज्य सूची का विषय था, इसलिए संसद ने संविधान के अनुच्छेद 252 का सहारा लिया, जिसके अंतर्गत दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल प्रस्ताव पारित करके संसद को उस विषय पर कानून बनाने का अधिकार दे सकते हैं। अधिनियम को 9 सितंबर 1972 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। चार वर्ष बाद 42वें संविधान संशोधन, 1976 ने वन तथा वन्य पशु-पक्षियों के संरक्षण को प्रविष्टि 17क और 17ख के रूप में समवर्ती सूची में डाल दिया, जिससे अब केंद्र और राज्य दोनों इस विषय पर कानून बना सकते हैं। आरंभ में यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था, जहां 1978 का अपना कानून चलता था; जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के बाद यह पूरे भारत पर लागू है।
अनुसूचियां: 2022 से पहले छह, उसके बाद चार
अनुसूचियां इस अधिनियम का हृदय हैं, क्योंकि किसी प्रजाति के विरुद्ध अपराध पर दंड की कठोरता इसी से तय होती है कि वह किस अनुसूची में रखी गई है। वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 ने इस ढांचे को नया रूप दिया और छह अनुसूचियों को घटाकर चार कर दिया।
| 2022 से पहले | किसे शामिल करती थी | 2022 के बाद |
|---|---|---|
| अनुसूची I | पूर्ण संरक्षण, कठोरतम दंड | अनुसूची I: सर्वाधिक संरक्षण वाले प्राणी |
| अनुसूची II | उच्च संरक्षण, शिकार प्रतिबंधित | अनुसूची II: कम संरक्षण वाले प्राणी |
| अनुसूची III और IV | संरक्षित प्रजातियां, अपेक्षाकृत कम दंड | दोनों प्राणी अनुसूचियों में समाहित |
| अनुसूची V | वर्मिन, जैसे कौआ, चमगादड़, चूहे | समाप्त; अब धारा 62 से घोषणा |
| अनुसूची VI | विनिर्दिष्ट पौधे, जैसे नीला वांडा | अनुसूची III: विनिर्दिष्ट पौधे |
| समकक्ष नहीं | – | अनुसूची IV: साइटीस परिशिष्टों के नमूने |
नई अनुसूची IV पर विद्यार्थियों का ध्यान प्रायः नहीं जाता। यह लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय साइटीस को, जिसमें भारत 1976 में शामिल हुआ, सीधे भारतीय कानून में लाती है, और संशोधन ने अनुमति प्रणाली चलाने के लिए प्रबंधन प्राधिकरण तथा वैज्ञानिक प्राधिकरण की भी व्यवस्था की है।
अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्र
अभयारण्य की अधिसूचना धारा 18 और 26क के अंतर्गत तथा राष्ट्रीय उद्यान की धारा 35 के अंतर्गत होती है। अभयारण्य में मुख्य वन्यजीव वार्डन चराई जैसी सीमित गतिविधियों की अनुमति दे सकता है, जबकि राष्ट्रीय उद्यान में न चराई की अनुमति है और न किसी व्यक्ति के अधिकार बने रह सकते हैं, इसीलिए राष्ट्रीय उद्यान अधिक कठोर संरक्षण देता है। राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य की सीमाओं में परिवर्तन राज्य विधानमंडल के प्रस्ताव के बिना नहीं किया जा सकता। वर्ष 2002 के संशोधन ने दो नई श्रेणियां जोड़ीं: धारा 36क के अंतर्गत संरक्षण रिजर्व, जो प्रायः संरक्षित क्षेत्र से लगी सरकारी भूमि पर बनते हैं, और धारा 36ग के अंतर्गत सामुदायिक रिजर्व, जो निजी या सामुदायिक भूमि पर स्वैच्छिक संरक्षण के लिए घोषित होते हैं। वर्ष 2006 के संशोधन ने धारा 38थ के अंतर्गत बाघ रिजर्व की श्रेणी जोड़ी, जिसमें क्रोड़ क्षेत्र, बफर क्षेत्र और बाघ संरक्षण योजना होती है।
बोर्ड, प्राधिकरण और अधिकारी
- धारा 4 के अंतर्गत राज्य सरकार मुख्य वन्यजीव वार्डन और वन्यजीव वार्डन नियुक्त करती है; अनुमति देने वाला मुख्य अधिकारी यही होता है।
- राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड 2002 के संशोधन द्वारा धारा 5क के अंतर्गत बना और इसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है; इसकी स्थायी समिति का अध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होता है।
- राज्य वन्यजीव बोर्ड का अध्यक्ष संबंधित राज्य का मुख्यमंत्री होता है।
- केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण 1991 के संशोधन द्वारा अध्याय चार-क के रूप में जोड़ा गया और यह चिड़ियाघरों को मान्यता देता तथा उनका विनियमन करता है।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण 2006 के संशोधन से बना और इसने 1 अप्रैल 1973 को आरंभ प्रोजेक्ट टाइगर को वैधानिक आधार दिया।
- वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भी 2006 के संशोधन की देन है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
शिकार, व्यापार और दंड
धारा 2 में शिकार की परिभाषा बहुत व्यापक है और इसमें किसी प्राणी को मारना, पकड़ना, फंसाना, विष देना, घायल करना तथा पक्षियों और सरीसृपों के अंडे या घोंसले नष्ट करना भी शामिल है। धारा 9 संरक्षित प्रजातियों के शिकार पर रोक लगाती है। धारा 11 एक अपवाद देती है: मुख्य वन्यजीव वार्डन ऐसे संरक्षित प्राणी को मारने की अनुमति दे सकता है जो मानव जीवन के लिए खतरनाक हो गया हो अथवा इतना अपंग या रोगग्रस्त हो कि उसका स्वस्थ होना संभव न हो। धारा 39 के अनुसार अधिनियम के उल्लंघन में प्राप्त प्रत्येक वन्य प्राणी, पशु वस्तु, ट्रॉफी या व्युत्पन्न सरकार की संपत्ति है। अनुसूची I के प्राणी से जुड़े अपराध पर कम से कम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष का कारावास तथा जुर्माना होता है; अन्य अपराधों में तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वर्ष 2022 के संशोधन ने जुर्माने की राशि बढ़ाई और पालतू हाथियों के रखरखाव तथा हस्तांतरण को भी नियंत्रित किया।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न प्रायः चार बिंदुओं पर आते हैं। पहला, वर्ष और संवैधानिक मार्ग: 1972, अनुच्छेद 252 तथा 42वां संशोधन, जिसने विषय को समवर्ती सूची में डाला। दूसरा, अनुसूचियां: पौधे किस अनुसूची में हैं, वर्मिन किसमें थे, और यह कि 2022 के संशोधन के बाद केवल चार अनुसूचियां बचीं जिनमें साइटीस नमूने अनुसूची IV में हैं। तीसरा, धाराओं के साथ संस्थाएं: धारा 4 मुख्य वन्यजीव वार्डन, 5क राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड, 35 राष्ट्रीय उद्यान, 36क और 36ग संरक्षण तथा सामुदायिक रिजर्व, 38थ बाघ रिजर्व। चौथा, कौन किसका अध्यक्ष है, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री विकल्पों की क्लासिक जोड़ी बनते हैं। सामान्य भ्रम दो हैं: चराई के अधिकार पर अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान को उलट देना, तथा यह मान लेना कि अधिनियम आरंभ से जम्मू-कश्मीर पर लागू था।
महत्वपूर्ण तथ्य
| स्वीकृति | 9 सितंबर 1972 |
|---|---|
| संवैधानिक मार्ग | अनुच्छेद 252, राज्य विधानमंडलों के प्रस्ताव से |
| 2022 के बाद अनुसूचियां | चार: I और II प्राणी, III पौधे, IV साइटीस नमूने |
| पुरानी वर्मिन अनुसूची | अनुसूची V (कौआ, फल चमगादड़, चूहे) |
| राष्ट्रीय उद्यान | धारा 35 |
| संरक्षण और सामुदायिक रिजर्व | धारा 36क और 36ग, 2002 में जोड़ी गईं |
| बाघ रिजर्व | धारा 38थ, 2006 में जोड़ी गई |
| राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड | धारा 5क; अध्यक्ष प्रधानमंत्री |
| केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण | अध्याय चार-क, 1991 के संशोधन से |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1 अप्रैल 1973 को आरंभ; 2006 में एनटीसीए से वैधानिक |
| अनुसूची I का दंड | तीन से सात वर्ष का कारावास और जुर्माना |
| वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो | मुख्यालय नई दिल्ली |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत में शिकार पर रोक लगाने तथा राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों को कानूनी दर्जा देने वाला वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष बनाया गया?
- A.1972
- B.1980
- C.1986
- D.1991
उत्तर देखें
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम को 9 सितंबर 1972 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और यह आज भी देश का प्रमुख वन्यजीव कानून है, जो शिकार, संरक्षित क्षेत्रों, पशु वस्तुओं के व्यापार तथा संरक्षित प्रजातियों की अनुसूचियों को नियंत्रित करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 के बाद इस अधिनियम में कितनी अनुसूचियां हैं?
- A.तीन
- B.चार
- C.पांच
- D.छह
उत्तर देखें
वर्ष 2022 के संशोधन ने मूल अधिनियम की अनुसूचियों को तर्कसंगत बनाया: अनुसूची I में सर्वाधिक संरक्षण वाले प्राणी, अनुसूची II में कम संरक्षण वाले प्राणी, अनुसूची III में विनिर्दिष्ट पौधे तथा अनुसूची IV में लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय साइटीस के परिशिष्टों में सूचीबद्ध…
पूरी व्याख्या पढ़ें →वर्ष 2022 में पुनर्गठित अनुसूचियों के अनुसार वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में विनिर्दिष्ट पौधे किस अनुसूची में संरक्षित हैं?
- A.अनुसूची I
- B.अनुसूची II
- C.अनुसूची III
- D.अनुसूची IV
उत्तर देखें
पुनर्गठित अधिनियम में पौधों की अनुसूची पुरानी अनुसूची VI से हटकर नई अनुसूची III बन गई, और इसमें अब भी नीला वांडा, घटपर्णी तथा कुछ संकटग्रस्त आर्किड और साइकैड जैसी प्रजातियां संरक्षित हैं, जिनका उखाड़ना और व्यापार नियंत्रित है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की किस धारा के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया जाता है?
- A.धारा 18
- B.धारा 29
- C.धारा 35
- D.धारा 38थ
उत्तर देखें
धारा 35 राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह पारिस्थितिक या प्राणिवैज्ञानिक दृष्टि से पर्याप्त महत्व वाले क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करे, जहां चराई की अनुमति नहीं होती और किसी व्यक्ति के अधिकार बने नहीं रह सकते।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का अध्यक्ष कौन होता है?
- A.भारत के राष्ट्रपति
- B.भारत के प्रधानमंत्री
- C.केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री
- D.मुख्य वन्यजीव वार्डन
उत्तर देखें
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड 2002 के संशोधन द्वारा धारा 5क के अंतर्गत वन्यजीव संबंधी सर्वोच्च सलाहकार निकाय के रूप में बनाया गया और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संरक्षण रिजर्व और सामुदायिक रिजर्व नामक नई श्रेणियां वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में किस संशोधन द्वारा जोड़ी गईं?
- A.1991 का संशोधन
- B.2002 का संशोधन
- C.2006 का संशोधन
- D.2022 का संशोधन
उत्तर देखें
इसी संशोधन ने संरक्षण रिजर्व के लिए धारा 36क जोड़ी, जो प्रायः राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य से लगी सरकारी भूमि पर घोषित होता है, तथा सामुदायिक रिजर्व के लिए धारा 36ग जोड़ी, जो निजी या सामुदायिक भूमि पर लोगों की स्वैच्छिक सहमति से बनता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में चिड़ियाघरों को मान्यता देने और उनका विनियमन करने वाला केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण किस वर्ष के संशोधन द्वारा अधिनियम में जोड़ा गया?
- A.1982
- B.1986
- C.1991
- D.2002
उत्तर देखें
वर्ष 1991 के संशोधन ने अधिनियम में अध्याय चार-क जोड़कर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की स्थापना की, जो पशुओं के रखरखाव और आवास के मानक तय करता है, चिड़ियाघरों को मान्यता देता या वापस लेता है तथा उनके बीच पशुओं के आदान-प्रदान को नियंत्रित करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की पुरानी अनुसूची V में निम्नलिखित में से कौन सा प्राणी वर्मिन के रूप में सूचीबद्ध नहीं था?
- A.कौआ
- B.फल चमगादड़
- C.मोर
- D.घरेलू चूहा
उत्तर देखें
मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है और उसे अनुसूची I में रखा गया था, अर्थात सर्वाधिक संरक्षण वाले वर्ग में, इसलिए उसे कभी वर्मिन नहीं माना जा सकता था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वन्य पशु-पक्षियों का संरक्षण उस समय राज्य सूची का विषय था, इसलिए संसद ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 किस अनुच्छेद का प्रयोग करके बनाया?
- A.अनुच्छेद 249
- B.अनुच्छेद 250
- C.अनुच्छेद 252
- D.अनुच्छेद 253
उत्तर देखें
अनुच्छेद 252 के अंतर्गत जब दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल प्रस्ताव पारित कर दें, तब संसद उन राज्यों के लिए राज्य सूची के विषय पर कानून बना सकती है, और बाद में कोई अन्य राज्य उसे अपनाकर लागू कर सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत अनुसूची I में सूचीबद्ध प्राणी से जुड़े अपराध के लिए कारावास की अवधि क्या है?
- A.कम से कम एक वर्ष, अधिकतम तीन वर्ष
- B.कम से कम तीन वर्ष, अधिकतम सात वर्ष
- C.केवल छह माह तक
- D.कम से कम सात वर्ष, अधिकतम चौदह वर्ष
उत्तर देखें
अधिनियम की धारा 51 सर्वाधिक संरक्षण वाले प्राणियों से जुड़े अपराधों के लिए यही बढ़ा हुआ दंड जुर्माने के साथ निर्धारित करती है, और 2022 के संशोधन ने जुर्माने की राशि और बढ़ा दी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम में अब कितनी अनुसूचियां हैं?
चार। वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 ने मूल छह अनुसूचियों के स्थान पर दो स्तरों के संरक्षण वाले प्राणियों के लिए अनुसूची I और II, विनिर्दिष्ट पौधों के लिए अनुसूची III तथा साइटीस के परिशिष्टों में सूचीबद्ध नमूनों के लिए अनुसूची IV रखी है।
राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य में क्या अंतर है?
अभयारण्य धारा 18 और 26क के अंतर्गत अधिसूचित होता है और वहां मुख्य वन्यजीव वार्डन चराई जैसी सीमित गतिविधियों की अनुमति दे सकता है। राष्ट्रीय उद्यान धारा 35 के अंतर्गत अधिसूचित होता है, जहां न चराई की अनुमति है और न किसी के अधिकार बने रहते हैं, इसलिए संरक्षण अधिक कठोर है। अभयारण्य को राष्ट्रीय उद्यान में उन्नत किया जा सकता है और दोनों की सीमाएं राज्य विधानमंडल के प्रस्ताव से ही बदली जा सकती हैं।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड का अध्यक्ष कौन होता है?
भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं। यह बोर्ड 2002 के संशोधन द्वारा धारा 5क के अंतर्गत बनाया गया था। इसकी स्थायी समिति, जो अधिकांश प्रस्तावों पर निर्णय लेती है, का अध्यक्ष केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री होता है, जबकि प्रत्येक राज्य वन्यजीव बोर्ड का अध्यक्ष मुख्यमंत्री होता है।
अधिनियम में किन प्राणियों को वर्मिन कहा गया था?
पुरानी अनुसूची V में रखे प्राणियों को वर्मिन माना जाता था और उनका शिकार स्वतंत्र रूप से किया जा सकता था। इसमें कौआ, फल चमगादड़, चूहे और मूस शामिल थे। वर्ष 2022 के संशोधन ने यह अनुसूची हटा दी, पर केंद्र सरकार अब भी धारा 62 के अंतर्गत अनुसूची I के अतिरिक्त किसी वन्य प्राणी को निश्चित क्षेत्र और अवधि के लिए वर्मिन घोषित कर सकती है।
क्या यह अधिनियम पूरे भारत पर लागू होता है?
हां, आज पूरे देश पर लागू है। जब यह पारित हुआ तब जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं था, क्योंकि वहां 1978 का अपना वन्यजीव कानून चलता था। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के बाद केंद्रीय अधिनियम वहां भी लागू कर दिया गया, इसलिए अब यह संपूर्ण भारत पर प्रभावी है।
स्रोत
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (अधिनियम संख्या 53, 1972) — इंडिया कोड, विधायी विभाग, भारत सरकार
- वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार
- जीव विज्ञान, कक्षा 12 की पाठ्यपुस्तक — एनसीईआरटी





