प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट: एनटीसीए, अभयारण्य और माइक
परीक्षा के लिए प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट के नोट्स: शुरुआत के वर्ष, पहले बाघ अभयारण्य, एनटीसीए का आधार, हाथी गलियारे, माइक और महत्वपूर्ण दिवस।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट वे दो प्रजाति आधारित कार्यक्रम हैं जिन पर भारत का वन्यजीव संरक्षण टिका है। दोनों केंद्र प्रायोजित योजनाएँ हैं और केंद्रीय पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन चलती हैं, तथा दोनों किसी एक प्रजाति की रक्षा उसके आवास की रक्षा करके करती हैं, जिससे उस आवास में रहने वाला बाकी सारा जीवन भी बच जाता है। पारिस्थितिकीविद बाघ और हाथी को छत्रक प्रजाति कहते हैं, और परीक्षाओं में इनसे जुड़े प्रश्न अधिकतर तिथियों, बनाई गई संस्थाओं और उनके कानूनी आधार पर आते हैं।
प्रोजेक्ट टाइगर
प्रोजेक्ट टाइगर 1 अप्रैल 1973 को शुरू हुआ, उसी वर्ष जब बाघ ने सिंह के स्थान पर भारत के राष्ट्रीय पशु का स्थान लिया। इसकी शुरुआत वर्तमान उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से हुई और आरंभ में नौ बाघ अभयारण्य इसमें शामिल थे: कॉर्बेट, मानस, पलामू, सिमलीपाल, कान्हा, मेलघाट, बांदीपुर, रणथंभौर और सुंदरबन। तब से अभयारण्यों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है और ये उन लगभग सभी राज्यों में फैले हैं जहाँ बाघ का आवास है।
यह योजना क्रोड़ और बफर की रणनीति पर चलती है। क्रोड़ अर्थात क्रांतिक बाघ आवास को मानवीय उपयोग से मुक्त रखा जाता है और केवल बाघ के लिए प्रबंधित किया जाता है, जबकि उसके चारों ओर के बफर क्षेत्र में नियंत्रित उपयोग की छूट रहती है और उसका प्रबंध वहाँ रहने वाले लोगों तथा वन्यजीव दोनों को ध्यान में रखकर होता है। प्रत्येक अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत बनी बाघ संरक्षण योजना के अनुसार चलाया जाता है। 2005 में सरिस्का अभयारण्य के सभी बाघों के समाप्त हो जाने का पता चलने पर बाघ कार्यदल बना और कानून में परिवर्तन हुआ।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण
वन्यजीव संरक्षण संशोधन अधिनियम 2006 ने 1972 के अधिनियम में नया अध्याय जोड़कर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को वैधानिक दर्जा दिया। इसके अध्यक्ष पर्यावरण और वन देखने वाले केंद्रीय मंत्री होते हैं तथा इसमें सांसद, अधिकारी और विशेषज्ञ सदस्य होते हैं। यह प्रत्येक अभयारण्य की बाघ संरक्षण योजना को स्वीकृति देता है, प्रबंधन के मानक तय करता है, राज्य सरकारों को क्रोड़ और बफर क्षेत्र अधिसूचित करने की संस्तुति देता है, और इसकी सलाह के बिना क्रोड़ क्षेत्र की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। इसी संशोधन से वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का प्रावधान हुआ, जो 2007 में वन्यजीव अंगों के संगठित व्यापार से लड़ने के लिए बना। प्राधिकरण भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ मिलकर हर चार वर्ष में अखिल भारतीय बाघ गणना कराता है, जिसमें कैमरा ट्रैप और चिह्नों का सर्वेक्षण इतने बड़े पैमाने पर होता है कि यह अपनी तरह का विश्व का सबसे बड़ा कार्य बन चुका है। भारत ग्लोबल टाइगर फोरम का भी सदस्य है, जो बाघ के लिए समर्पित एकमात्र अंतर सरकारी संस्था है और जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, तथा 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में तेरह बाघ आवास वाले देशों के उस समझौते का भी, जिसमें जंगली बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया। विश्व बाघ दिवस 29 जुलाई को मनाया जाता है।
प्रोजेक्ट एलीफेंट
प्रोजेक्ट एलीफेंट फरवरी 1992 में शुरू हुआ। इसके उद्देश्य हैं हाथियों, उनके आवास तथा उन गलियारों की रक्षा करना जिनसे होकर वे चलते हैं, हाथी और मनुष्य के बीच के संघर्ष से निपटना, तथा बंदी अवस्था में रखे गए हाथियों के कल्याण का ध्यान रखना। इस योजना के अंतर्गत हाथी अभयारण्य राज्य सरकारें अधिसूचित करती हैं, और भारत में हाथियों का विस्तार मुख्यतः चार क्षेत्रों में है, पूर्वोत्तर, पूर्व मध्य, उत्तर पश्चिम और दक्षिण। एशियाई हाथी को 2010 में भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया और विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त को मनाया जाता है। भारत माइक कार्यक्रम में भाग लेता है, अर्थात हाथियों के अवैध वध की निगरानी, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय के अंतर्गत चलता है और 2003 से दक्षिण एशिया के स्थलों को शामिल करता है। 2023 में दोनों परियोजनाओं को मंत्रालय के एक ही प्रभाग के अंतर्गत ले आया गया, जिससे अभयारण्य, गलियारे और धन एक साथ प्रबंधित किए जा सकें।
कानूनी संरक्षण और साझी समस्याएँ
| विषय | बाघ | हाथी |
|---|---|---|
| परियोजना की शुरुआत | 1 अप्रैल 1973 | फरवरी 1992 |
| वैधानिक संस्था | राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण | मंत्रालय द्वारा राज्यों के माध्यम से |
| भारतीय कानून में संरक्षण | वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 | उसी अधिनियम की अनुसूची 1 |
| अंतरराष्ट्रीय सूची | साइटीज का परिशिष्ट 1 | साइटीज का परिशिष्ट 1 |
| विशेष दिवस | विश्व बाघ दिवस, 29 जुलाई | विश्व हाथी दिवस, 12 अगस्त |
दोनों प्रजातियाँ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची 1 में हैं, जो सर्वोच्च संरक्षण और शिकार पर सबसे कठोर दंड देती है, तथा दोनों साइटीज के परिशिष्ट 1 में हैं, जिससे इनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबंधित है। दोनों के सामने समस्याएँ भी एक जैसी हैं: सड़कों, रेल पटरियों, नहरों और खानों से आवास का नष्ट होना और टुकड़ों में बँट जाना; गलियारों का अवरुद्ध होना, जो हाथी के लिए जीवन मरण का प्रश्न है क्योंकि झुंड को ऋतु के अनुसार एक वन से दूसरे वन जाना पड़ता है; खाल, हड्डी और हाथीदाँत के लिए अवैध शिकार; तथा खेतों और गाँवों में जानवरों के घुस आने से उपजा संघर्ष। समाधान भी दोनों के लिए साझे हैं, अर्थात सुरक्षित क्रोड़ क्षेत्र, अंडरपास और ओवरपास से खुले रखे गए गलियारे, फसल और पशु हानि का शीघ्र मुआवजा, तथा पर्यटन से होने वाली आय में आसपास रहने वाले लोगों की भागीदारी।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से प्रश्न तिथियों और संस्थाओं पर आते हैं: शुरुआत के वर्ष 1973 और 1992, प्रोजेक्ट टाइगर किस उद्यान से शुरू हुआ, आरंभ में कितने अभयारण्य थे, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण किस अधिनियम से वैधानिक बना, तथा धरोहर पशु घोषित होने और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के वर्ष। दो भ्रम बार बार आते हैं। पहला दिवसों का जोड़ा है, बाघ के लिए 29 जुलाई और हाथी के लिए 12 अगस्त, जबकि विश्व वन्यजीव दिवस 3 मार्च को है। दूसरा कानूनी आधार है, क्योंकि प्राधिकरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम पर टिका है, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम या भारतीय वन अधिनियम पर नहीं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत | 1 अप्रैल 1973, जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से |
|---|---|
| आरंभिक अभयारण्य | नौ, जिनमें कॉर्बेट, मानस, कान्हा, मेलघाट, बांदीपुर और सुंदरबन शामिल |
| राष्ट्रीय पशु | बाघ, जिसने 1973 में सिंह का स्थान लिया |
| रणनीति | क्रोड़ और बफर: भीतर क्रांतिक बाघ आवास, बाहर बहुउद्देशीय बफर |
| राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण | वन्यजीव संरक्षण संशोधन अधिनियम 2006 से वैधानिक |
| प्राधिकरण के अध्यक्ष | पर्यावरण और वन देखने वाले केंद्रीय मंत्री |
| वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो | उसी संशोधित अधिनियम के अंतर्गत 2007 में स्थापित |
| बाघ गणना | प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा हर चार वर्ष में |
| ग्लोबल टाइगर फोरम | बाघ के लिए एकमात्र अंतर सरकारी संस्था; मुख्यालय नई दिल्ली |
| प्रोजेक्ट एलीफेंट की शुरुआत | फरवरी 1992, केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में |
| राष्ट्रीय धरोहर पशु | एशियाई हाथी, 2010 में घोषित |
| माइक कार्यक्रम | हाथियों के अवैध वध की निगरानी, साइटीज के अंतर्गत, 2003 से दक्षिण एशिया में |
| दिवस | विश्व बाघ दिवस 29 जुलाई; विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
प्रोजेक्ट टाइगर किस वर्ष शुरू किया गया था?
- A.1972
- B.1973
- C.1992
- D.2005
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1973
व्याख्या
सही उत्तर B, 1973 है। प्रोजेक्ट टाइगर 1 अप्रैल 1973 को नौ बाघ अभयारण्यों के साथ केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू हुआ, और उसी वर्ष बाघ ने सिंह के स्थान पर भारत के राष्ट्रीय पशु का स्थान लिया।
विकल्प A 1972 वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का वर्ष है, वही कानून जिसके अंतर्गत अभयारण्य और संरक्षित क्षेत्र घोषित होते हैं, और छात्र प्रायः कानून तथा उसके बाद आई योजना को मिला देते हैं। विकल्प C 1992 वह वर्ष है जब प्रोजेक्ट एलीफेंट शुरू हुआ, जो देश का दूसरा बड़ा प्रजाति कार्यक्रम है। विकल्प D 2005 वह वर्ष है जब सरिस्का अभयारण्य के सभी बाघों के समाप्त हो जाने का पता चला और बाघ कार्यदल बना, जिससे अगले वर्ष कानून में संशोधन हुआ। इस प्रकार 1972 कानून का, 1973 परियोजना का, 1992 हाथी परियोजना का और 2006 प्राधिकरण का वर्ष है, और इन्हीं चार वर्षों से अधिकांश प्रश्न बनते हैं।
प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत किस राष्ट्रीय उद्यान से की गई थी?
- A.जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
- B.कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
- C.बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान
- D.काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
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सही उत्तर: A. जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
व्याख्या
सही उत्तर A, जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान है, जो वर्तमान उत्तराखंड में है। यह भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है और परियोजना की औपचारिक शुरुआत 1 अप्रैल 1973 को वहीं से हुई।
विकल्प B मध्य प्रदेश का कान्हा और विकल्प C कर्नाटक का बांदीपुर दोनों उन नौ अभयारण्यों में थे जिनसे परियोजना आरंभ हुई, इसीलिए वे अच्छे भ्रम बनते हैं, पर शुभारंभ कॉर्बेट में हुआ था। विकल्प D असम का काजीरंगा शुभारंभ स्थल नहीं है; वह मुख्यतः एक सींग वाले गैंडे के लिए प्रसिद्ध है और बहुत बाद में बाघ अभयारण्य बना। छात्र को आरंभिक नौ अभयारण्य एक समूह के रूप में याद रखने चाहिए: कॉर्बेट, मानस, पलामू, सिमलीपाल, कान्हा, मेलघाट, बांदीपुर, रणथंभौर और सुंदरबन। इस उद्यान का नाम शिकारी से प्रकृतिविद बने जिम कॉर्बेट के नाम पर है, जिनके लेखन ने भारत में बाघ को सार्वजनिक चिंता का विषय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को किस कानून में संशोधन कर वैधानिक दर्जा दिया गया?
- A.वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
- B.भारतीय वन अधिनियम 1927
- C.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986
- D.जैव विविधता अधिनियम 2002
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सही उत्तर: A. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972
व्याख्या
सही उत्तर A, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 है। 2006 के संशोधन अधिनियम ने इसमें नया अध्याय जोड़कर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण बनाया तथा क्रांतिक बाघ आवास और बफर वाले बाघ अभयारण्यों का प्रावधान किया, साथ ही वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो का भी।
विकल्प B भारतीय वन अधिनियम 1927 आरक्षित और संरक्षित वनों तथा वन उपज से संबंधित है, इस प्राधिकरण से नहीं। विकल्प C पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 भोपाल दुर्घटना के बाद बना छत्रक कानून है और प्रदूषण तथा पर्यावरणीय स्वीकृति के नियमों का आधार है। विकल्प D जैव विविधता अधिनियम 2002 ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण बनाया और जैविक संसाधनों तक पहुँच तथा लाभ के बँटवारे से संबंधित है, और दोनों नामों की समानता ही यहाँ का भ्रम है। ध्यान रखें कि बाघ अभयारण्य की अधिसूचना, क्रांतिक बाघ आवास और बफर की व्यवस्था भी इसी संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से आती है।
प्रोजेक्ट एलीफेंट किस वर्ष शुरू किया गया था?
- A.1973
- B.1992
- C.2010
- D.1986
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1992
व्याख्या
सही उत्तर B, 1992 है। प्रोजेक्ट एलीफेंट फरवरी 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू हुआ, ताकि राज्यों को हाथियों, उनके आवासों और गलियारों की रक्षा में, हाथी तथा मनुष्य के संघर्ष को घटाने में और बंदी हाथियों के कल्याण में सहायता मिल सके।
विकल्प A 1973 प्रोजेक्ट टाइगर का वर्ष है, और इन दोनों वर्षों का जोड़ा इस अध्याय से सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। विकल्प C 2010 वह वर्ष है जब हाथी को भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया, जो अलग घटना है और प्रायः परियोजना की शुरुआत से मिला दी जाती है। विकल्प D 1986 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और गंगा कार्य योजना का वर्ष है, जिनका हाथियों से संबंध नहीं। दोनों परियोजनाओं को अलग रखने का सरल तरीका यह है कि बाघ पहले आया, जिसके पीछे 1972 का कानून था, और हाथी लगभग बीस वर्ष बाद।
हाथी को भारत का राष्ट्रीय धरोहर पशु किस वर्ष घोषित किया गया?
- A.2010
- B.1992
- C.2005
- D.1973
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 2010
व्याख्या
सही उत्तर A, 2010 है। यह घोषणा हाथियों पर बने कार्यदल की रिपोर्ट के बाद हुई और इसका उद्देश्य नीति में इस पशु का दर्जा ऊँचा करना तथा उसके आवासों और गलियारों की सुरक्षा मजबूत करना था।
विकल्प B 1992 स्वयं प्रोजेक्ट एलीफेंट की शुरुआत का वर्ष है, घोषणा का नहीं, और यही दोनों सामान्य भ्रम बनाते हैं। विकल्प C 2005 सरिस्का प्रकरण और बाघ कार्यदल से जुड़ा है। विकल्प D 1973 प्रोजेक्ट टाइगर का तथा बाघ के राष्ट्रीय पशु बनने का वर्ष है। शब्दों का अंतर ध्यान रखें: बाघ राष्ट्रीय पशु है और हाथी राष्ट्रीय धरोहर पशु, और परीक्षक प्रायः दोनों को एक ही प्रश्न में आमने सामने रख देते हैं। इसी क्रम में यह भी याद रखें कि हाथी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 1 में और साइटीज के परिशिष्ट 1 में रखा गया है, जिससे उसके अंगों का व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है।
भारत जिस माइक कार्यक्रम में भाग लेता है, वह किससे संबंधित है?
- A.हाथियों के अवैध वध की निगरानी
- B.कैमरा ट्रैप से बाघों की गणना
- C.हिमालय में हिमनदों के पिघलने की निगरानी
- D.उद्योगों से मीथेन उत्सर्जन का मापन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. हाथियों के अवैध वध की निगरानी
व्याख्या
सही उत्तर A, हाथियों के अवैध वध की निगरानी है। माइक की स्थापना लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय के अंतर्गत हुई। चुने हुए स्थलों पर अधिकारी मिलने वाले हर हाथी के शव और मृत्यु के कारण को एक ही प्रारूप में दर्ज करते हैं, जिससे अवैध शिकार से हुई मौतों का अनुपात देशों के बीच और समय के साथ तुलना योग्य बनता है। भारत सहित दक्षिण एशिया के स्थल 2003 से इसमें शामिल हैं।
विकल्प B राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा की जाने वाली अखिल भारतीय बाघ गणना का वर्णन है, जो पूरी तरह अलग कार्य है। विकल्प C और विकल्प D जलवायु तथा प्रदूषण की निगरानी से संबंधित हैं और इस कार्यक्रम से उनका कोई नाता नहीं। नाम का पूरा रूप ही उत्तर है, इसलिए उसे याद रखना उपयोगी है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य कौन सा है?
- A.नागार्जुनसागर श्रीशैलम
- B.सुंदरबन
- C.कॉर्बेट
- D.कान्हा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नागार्जुनसागर श्रीशैलम
व्याख्या
सही उत्तर A, नागार्जुनसागर श्रीशैलम है, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की नल्लामला पहाड़ियों में फैला है और क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा बाघ अभयारण्य है।
विकल्प B पश्चिम बंगाल का सुंदरबन भारत का एकमात्र मैंग्रोव बाघ आवास और आरंभिक नौ अभयारण्यों में से एक है, पर वह इससे छोटा है। विकल्प C उत्तराखंड का कॉर्बेट वही उद्यान है जहाँ से प्रोजेक्ट टाइगर शुरू हुआ और वह सबसे प्रसिद्ध अभयारण्यों में है, फिर भी उसकी पहचान आकार नहीं है। विकल्प D मध्य प्रदेश का कान्हा भी आरंभिक नौ में है और कठोर भूमि वाले बारहसिंगा के लिए प्रसिद्ध है। ये तीनों किसी न किसी दूसरे प्रश्न के सही उत्तर हैं, इसीलिए यहाँ रखे गए हैं। परीक्षा की दृष्टि से अभयारण्यों के साथ उनकी अलग पहचान जोड़कर याद रखना सबसे उपयोगी रहता है, जैसे सबसे बड़ा, सबसे पुराना और एकमात्र मैंग्रोव आवास।
विश्व बाघ दिवस प्रतिवर्ष किस तिथि को मनाया जाता है?
- A.29 जुलाई
- B.12 अगस्त
- C.5 जून
- D.3 मार्च
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 29 जुलाई
व्याख्या
सही उत्तर A, 29 जुलाई है। यह दिवस 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग में हुए बाघ शिखर सम्मेलन में तय हुआ, जहाँ तेरह बाघ आवास वाले देशों ने जंगली बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य अपनाया, और यह प्रतिवर्ष इस प्रजाति के संरक्षण की ओर ध्यान खींचने के लिए मनाया जाता है।
विकल्प B 12 अगस्त विश्व हाथी दिवस है, और यही जोड़ा इस अध्याय में सदा परखा जाता है। विकल्प C 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है, जो 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के बाद से मनाया जाता है। विकल्प D 3 मार्च विश्व वन्यजीव दिवस है, जो इसलिए चुना गया कि लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय पर 1973 में इसी तिथि को हस्ताक्षर हुए थे। चारों तिथियाँ एक साथ याद रखने योग्य हैं, क्योंकि एक ही प्रश्न प्रायः इन्हें मिला देता है।
बाघ संरक्षण के लिए समर्पित एकमात्र अंतर सरकारी संस्था ग्लोबल टाइगर फोरम का मुख्यालय कहाँ है?
- A.नई दिल्ली
- B.काठमांडू
- C.जिनेवा
- D.ग्लांड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नई दिल्ली
व्याख्या
सही उत्तर A, नई दिल्ली है। ग्लोबल टाइगर फोरम की स्थापना नब्बे के दशक में बाघ आवास वाले देशों और इस प्रजाति के संरक्षण में लगे अन्य सदस्यों की अंतरराष्ट्रीय संस्था के रूप में हुई, और इसका सचिवालय नई दिल्ली में है, जो विश्व के जंगली बाघों में भारत के हिस्से को दर्शाता है।
विकल्प B काठमांडू दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन तथा अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र का मुख्यालय है, इस फोरम का नहीं। विकल्प C जिनेवा में लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय का सचिवालय है, और अनेक अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ भी वहीं हैं। विकल्प D स्विट्जरलैंड का ग्लांड अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ का मुख्यालय है, जो रेड लिस्ट प्रकाशित करता है, तथा विश्व वन्यजीव कोष का भी। इन चारों नामों को उनके मुख्यालयों के साथ एक बार तालिका बनाकर याद कर लेना ठीक रहता है, क्योंकि परीक्षक इन्हीं को आपस में बदलकर प्रश्न बनाते हैं।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत बाघ और हाथी किस अनुसूची में रखे गए हैं?
- A.अनुसूची 1
- B.अनुसूची 2
- C.अनुसूची 3
- D.अनुसूची 4
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अनुसूची 1
व्याख्या
सही उत्तर A, अनुसूची 1 है। इस अनुसूची में वे प्रजातियाँ आती हैं जिन्हें सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है, जिनका शिकार पूरे भारत में वर्जित है और जिनके लिए अधिनियम का सबसे कठोर दंड रखा गया है तथा अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होता है। बाघ और एशियाई हाथी दोनों इसी में हैं और दोनों साइटीज के परिशिष्ट 1 में भी हैं, जिससे इनका अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लेनदेन प्रतिबंधित है।
विकल्प B, विकल्प C और विकल्प D उन अनुसूचियों के नाम हैं जिनमें कम संरक्षण और हल्के दंड वाली प्रजातियाँ रखी जाती हैं। छात्र को अनुसूची और पशु का संबंध जोड़कर याद रखना चाहिए: बाघ, हाथी, एक सींग वाला गैंडा, हिम तेंदुआ, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और सिंहपुच्छ मकाक सभी पहली अनुसूची में आते हैं, जिससे परीक्षक सबसे अधिक प्रश्न बनाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रोजेक्ट टाइगर कब और कहाँ से शुरू हुआ था?
यह 1 अप्रैल 1973 को वर्तमान उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान से शुरू हुआ। आरंभ में इसमें नौ बाघ अभयारण्य थे, अर्थात कॉर्बेट, मानस, पलामू, सिमलीपाल, कान्हा, मेलघाट, बांदीपुर, रणथंभौर और सुंदरबन, और तब से अभयारण्यों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का कानूनी आधार क्या है?
वन्यजीव संरक्षण संशोधन अधिनियम 2006 ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में नया अध्याय जोड़कर इस प्राधिकरण को वैधानिक संस्था बनाया। यह प्रत्येक अभयारण्य की बाघ संरक्षण योजना स्वीकृत करता है, प्रबंधन के मानक तय करता है तथा क्रोड़ और बफर क्षेत्रों की अधिसूचना और उनमें परिवर्तन पर सलाह देता है।
बाघ अभयारण्य की क्रोड़ और बफर रणनीति क्या है?
क्रोड़ अर्थात क्रांतिक बाघ आवास को मानवीय उपयोग से मुक्त रखा जाता है और केवल बाघ के लिए प्रबंधित किया जाता है। उसके चारों ओर बफर क्षेत्र होता है, जहाँ नियंत्रित उपयोग की अनुमति रहती है और जिसका प्रबंध वन्यजीव तथा वहाँ रहने वाले लोगों दोनों के लिए होता है, ताकि क्रोड़ पर किनारे से अचानक दबाव न पड़े।
प्रोजेक्ट एलीफेंट कब शुरू हुआ और वह क्या करता है?
यह फरवरी 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू हुआ। यह राज्यों को हाथियों, उनके आवासों और उनके वनों को जोड़ने वाले गलियारों की रक्षा में, हाथी और मनुष्य के संघर्ष को घटाने में तथा बंदी हाथियों के कल्याण में सहायता देता है, और इसके अंतर्गत हाथी अभयारण्य राज्य सरकारें अधिसूचित करती हैं।
माइक कार्यक्रम क्या है?
माइक का अर्थ है हाथियों के अवैध वध की निगरानी। यह लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय के अंतर्गत चलता है और चुने हुए स्थलों पर मिलने वाले हाथियों के शवों की जानकारी एक ही प्रारूप में इकट्ठा करता है, ताकि अवैध शिकार की प्रवृत्ति की तुलना देशों के बीच हो सके। भारत सहित दक्षिण एशिया के स्थल 2003 से इसमें शामिल हैं।
हाथी गलियारे इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?
हाथियों के झुंड को बहुत बड़े क्षेत्र की आवश्यकता होती है और वे चारे तथा जल की खोज में ऋतु के अनुसार एक वन से दूसरे वन जाते हैं। गलियारा वही भूमि पट्टी है जो दो वनों को जोड़ती है। जब सड़क, रेल लाइन, नहर या बागान उसे काट देता है तो झुंड को खेतों और गाँवों से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दोनों ओर जानें जाती हैं; इसलिए अंडरपास और ओवरपास से गलियारों को खुला रखना इस परियोजना का केंद्रीय काम है।
स्रोत
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, यथा संशोधित 2006 — भारत सरकार
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- प्रोजेक्ट एलीफेंट से संबंधित मंत्रालय के पृष्ठ — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय



