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GK नोट्सपर्यावरण और पारिस्थितिकीजलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग

जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग: परीक्षा नोट्स

परीक्षा के लिए जलवायु परिवर्तन के नोट्स: ग्रीनहाउस प्रभाव और गैसें, तापवृद्धि के प्रभाव, यूएनएफसीसीसी, क्योटो प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता और भारत की कार्ययोजना।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग: परीक्षा नोट्स — GK24 title card
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग: परीक्षा नोट्स — GK24 title card

मौसम किसी स्थान पर किसी क्षण की वायुमंडलीय दशा है, जबकि जलवायु लंबी अवधि, प्रायः तीस वर्ष या उससे अधिक, के मौसम का औसत है। जलवायु परिवर्तन का अर्थ है उसी औसत में स्थायी बदलाव, और ग्लोबल वार्मिंग उसका वह भाग है जिसमें पृथ्वी के औसत सतही तापमान की वृद्धि होती है। पृथ्वी की जलवायु हिमयुगों और गर्म कालों के बीच अनेक बार बदली है, पर आज जिस परिवर्तन की चर्चा है वह भिन्न है क्योंकि वह तेज है और मानव गतिविधि से चल रहा है, विशेषकर औद्योगिक क्रांति के बाद से कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस के दहन से।

ग्रीनहाउस प्रभाव

सूर्य से आने वाला लघु तरंगदैर्घ्य विकिरण वायुमंडल से सहज ही निकलकर पृथ्वी की सतह को गर्म करता है। गर्म सतह इस ऊर्जा को दीर्घ तरंगदैर्घ्य वाले अवरक्त विकिरण के रूप में लौटाती है, और वायुमंडल की कुछ गैसें इस बाहर जाते विकिरण का एक भाग सोखकर पुनः नीचे की ओर विकीर्ण कर देती हैं। ऊष्मा का यही रुक जाना ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाता है, जिसका नाम भीतर से गर्म रहने वाले काँच के घर पर पड़ा। यह प्राकृतिक और आवश्यक प्रक्रिया है; इसके बिना पृथ्वी का औसत तापमान हिमांक से कहीं नीचे होता और जीवन संभव न होता। समस्या बढ़े हुए ग्रीनहाउस प्रभाव की है, अर्थात मानव गतिविधि से वायु में जुड़ी गैसों द्वारा इस प्राकृतिक कंबल का मोटा हो जाना।

ग्रीनहाउस गैसमुख्य मानवजनित स्रोतयाद रखने योग्य बात
कार्बन डाइऑक्साइडकोयला, तेल और गैस का दहन; सीमेंट निर्माण; वनोन्मूलनसबसे अधिक मात्रा में निकलती है; इसी की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता एक मानी जाती है
मीथेनधान के खेत, पशुधन, कचरा भराव, कोयला खदानें, गैस पाइपलाइन से रिसावसौ वर्ष की अवधि में कार्बन डाइऑक्साइड से कहीं प्रबल, पर वायु में बहुत कम समय टिकती है
नाइट्रस ऑक्साइडनाइट्रोजन उर्वरक, ईंधन तथा जैवभार का दहनयह समतापमंडलीय ओजोन को भी नष्ट करती है
फ्लोरीनयुक्त गैसेंप्रशीतन, वातानुकूलन, विद्युत स्विचगियर, उद्योगक्योटो सूची की गैसों में सल्फर हेक्साफ्लोराइड की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता सबसे अधिक है
जलवाष्पप्राकृतिक वाष्पीकरणसबसे प्रचुर ग्रीनहाउस गैस, पर इसकी मात्रा उत्सर्जन नहीं, तापमान तय करता है

प्रमाण और प्रभाव

गर्म होती दुनिया के संकेत सभी मापों में एक जैसे मिलते हैं। हिमालय, आल्प्स और एंडीज के हिमनद पीछे हट रहे हैं, आर्कटिक की समुद्री बर्फ सिकुड़ रही है, और समुद्र तल बढ़ रहा है, क्योंकि गर्म होने पर समुद्री जल फैलता भी है और स्थल की बर्फ पिघलकर उसमें मिलती भी है। महासागर कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर अधिक अम्लीय हो रहे हैं, जिससे मूँगे और कवचधारी जीवों को हानि होती है। असामान्य रूप से गर्म जल के दौर के बाद प्रवाल विरंजन होता है, अर्थात मूँगों के भीतर रहने वाले और उन्हें रंग देने वाले शैवाल निकल जाते हैं। लू, भारी वर्षा की घटनाएँ, सूखा और प्रचंड चक्रवात अधिक बार आ रहे हैं, तथा जीव-जंतु ऊँचे अक्षांशों और अधिक ऊँचाइयों की ओर खिसक रहे हैं। भारत के लिए खतरे संकेंद्रित हैं: खेती जिस पर टिकी है उस मानसून का अनिश्चित होना, लंबे और घनी आबादी वाले तट का डूबना, उत्तरी नदियों को पोसने वाले हिमालयी हिमनदों का पिघलना, और खुले में काम करने वालों पर सीधी पड़ती गर्मी।

वैश्विक प्रतिक्रिया

  • आईपीसीसी: जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल, जिसकी स्थापना 1988 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने की। यह स्वयं शोध नहीं करता; प्रकाशित विज्ञान का आकलन कर आकलन रिपोर्ट जारी करता है।
  • यूएनएफसीसीसी: जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना समझौता, जो 1992 में रियो दे जनेरो के पृथ्वी सम्मेलन में अपनाया गया। यह साझी किंतु विभेदित जिम्मेदारियों के सिद्धांत पर टिका है और इसके सदस्य पक्षकारों के सम्मेलन यानी सीओपी में मिलते हैं।
  • क्योटो प्रोटोकॉल: 1997 में अपनाया गया और 2005 से प्रभावी। इसने केवल संलग्नक एक में सूचीबद्ध विकसित देशों पर बाध्यकारी उत्सर्जन कटौती रखी और उत्सर्जन व्यापार, संयुक्त क्रियान्वयन तथा स्वच्छ विकास तंत्र जैसे बाजार साधन बनाए।
  • पेरिस समझौता: 2015 में पेरिस के सीओपी 21 में अपनाया गया और 4 नवंबर 2016 से प्रभावी। यह सभी देशों पर लागू होता है, हर देश से अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान माँगता है, और लक्ष्य रखता है कि वैश्विक औसत तापमान की वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रहे तथा उसे डेढ़ डिग्री तक सीमित रखने के प्रयास किए जाएँ।
  • मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल: 1987 में क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसे ओजोन क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध रूप से हटाने के लिए हुआ। इसके 2016 के किगाली संशोधन ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन को भी इसमें जोड़ा, जो ग्रीनहाउस गैसें हैं।

भारत के कदम

भारत ने 2008 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना जारी की, जिसमें आठ राष्ट्रीय मिशन हैं: सौर मिशन, संवर्धित ऊर्जा दक्षता, सतत आवास, जल, हिमालयी पारितंत्र का संरक्षण, हरित भारत, सतत कृषि और जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान। भारत और फ्रांस ने 2015 के पेरिस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत की, जिसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है। 2021 के ग्लासगो सम्मेलन में भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य घोषित किया, साथ ही नवीकरणीय क्षमता और उत्सर्जन तीव्रता पर संकल्प भी रखे। अन्य कदमों में स्टार लेबलिंग वाला ऊर्जा संरक्षण कार्यक्रम, विद्युत वाहनों, संपीड़ित बायोगैस तथा हरित हाइड्रोजन का प्रोत्साहन और हरित भारत मिशन के तहत वनरोपण शामिल हैं।

ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन क्षरण अलग हैं

परीक्षाओं में ये दोनों समस्याएँ लगातार गड्डमड्ड होती हैं, जबकि ये अलग हैं। ग्लोबल वार्मिंग निचले वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों द्वारा बाहर जाती ऊष्मा का रुक जाना है। ओजोन क्षरण समतापमंडल की ओजोन परत का क्लोरोफ्लोरोकार्बन तथा वैसे ही रसायनों से पतला होना है, जिससे अधिक हानिकारक पराबैंगनी विकिरण भीतर आता है और त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा फसलों को नुकसान होता है। ओजोन की संधि मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल है और जलवायु की संधियाँ क्योटो प्रोटोकॉल तथा पेरिस समझौता हैं। दोनों के बीच कड़ी यह है कि हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसे कुछ पदार्थ दोनों के लिए महत्व रखते हैं।

परीक्षा की दृष्टि से

यहाँ अधिकांश प्रश्न संधियों और संस्थाओं पर आते हैं: कौन सा वर्ष, कौन सा शहर, आईपीसीसी किसने बनाया, कौन सा प्रोटोकॉल केवल विकसित देशों को बाँधता है, और पेरिस का तापमान लक्ष्य क्या है। दूसरा समूह गैसों पर है, जिसमें सबसे अधिक मात्रा में निकलने वाली गैस, सबसे अधिक ग्लोबल वार्मिंग क्षमता वाली गैस और मीथेन के स्रोत पूछे जाते हैं। तीसरा समूह ग्लोबल वार्मिंग और ओजोन क्षरण का अंतर है, जो किसी न किसी रूप में लगभग हर वर्ष आता है। जाल ये हैं: मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को जलवायु संधि मान लेना, 1987, 1992, 1997 और 2015 के वर्ष आपस में मिला देना, और ग्रीनहाउस प्रभाव को ही हानिकारक बता देना जबकि समस्या उसके बढ़ जाने की है।

महत्वपूर्ण तथ्य

ग्रीनहाउस प्रभाववायुमंडलीय गैसों द्वारा बाहर जाते अवरक्त विकिरण का रुकना
प्रमुख ग्रीनहाउस गैसेंजलवाष्प, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और फ्लोरीनयुक्त गैसें
संदर्भ गैसकार्बन डाइऑक्साइड, जिसकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता एक मानी जाती है
सर्वाधिक ग्लोबल वार्मिंग क्षमताक्योटो सूची की गैसों में सल्फर हेक्साफ्लोराइड
आईपीसीसी1988 में डब्ल्यूएमओ और यूएनईपी द्वारा स्थापित; आकलन रिपोर्ट जारी करता है
यूएनएफसीसीसी1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन में अपनाया; पक्षकार सीओपी में मिलते हैं
क्योटो प्रोटोकॉल1997 में अपनाया, 2005 से प्रभावी; केवल संलग्नक एक देशों पर बाध्यकारी
क्योटो तंत्रउत्सर्जन व्यापार, संयुक्त क्रियान्वयन, स्वच्छ विकास तंत्र
पेरिस समझौता2015 के सीओपी 21 में अपनाया, 4 नवंबर 2016 से प्रभावी
पेरिस लक्ष्यदो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे, डेढ़ डिग्री की दिशा में प्रयास
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल1987, ओजोन क्षयकारी पदार्थों पर; 2016 का किगाली संशोधन एचएफसी पर
भारत की कार्ययोजनाजलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना, 2008, आठ मिशनों के साथ
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधनभारत और फ्रांस द्वारा 2015 में शुरू; मुख्यालय गुरुग्राम
भारत का शुद्ध शून्य लक्ष्यवर्ष 2070, जिसकी घोषणा 2021 के ग्लासगो सम्मेलन में हुई

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 15th December 2021, Shift 3आसान

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ________ होता है।

  1. A.ग्लोबल वार्मिंग
  2. B.वायुदाब
  3. C.संरक्षण
  4. D.वर्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ग्लोबल वार्मिंग

व्याख्या

सही उत्तर A, ग्लोबल वार्मिंग है। कार्बन डाइऑक्साइड एक ग्रीनहाउस गैस है: यह सूर्य के लघु तरंगदैर्घ्य विकिरण को भीतर आने देती है पर गर्म पृथ्वी द्वारा लौटाए जाने वाले दीर्घ तरंगदैर्घ्य के अवरक्त विकिरण का एक भाग सोख लेती है और उसे फिर नीचे की ओर विकीर्ण कर देती है। कोयले, तेल और गैस के दहन तथा वनोन्मूलन से जैसे-जैसे इसकी सांद्रता बढ़ती है, निचले वायुमंडल में अधिक ऊष्मा रुकती है और पृथ्वी का औसत सतही तापमान बढ़ता है। यही वृद्धि ग्लोबल वार्मिंग है और आज के जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है।

विकल्प B वायुदाब तापमान, ऊँचाई और ऊपर की वायु की मात्रा पर निर्भर करता है, किसी अल्प मात्रा वाली गैस के अंश पर नहीं। विकल्प C संरक्षण संसाधनों की रक्षा और विवेकपूर्ण उपयोग है, कोई परिणाम नहीं। विकल्प D वर्षा का स्वरूप जलवायु गर्म होने पर बदल सकता है, पर वह अप्रत्यक्ष प्रभाव है।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की स्थापना 1988 में किन दो संगठनों ने की थी?

  1. A.यूनेस्को और एफएओ
  2. B.विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
  3. C.विश्व बैंक और आईएमएफ
  4. D.डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम

व्याख्या

सही उत्तर B, विश्व मौसम विज्ञान संगठन और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम है। इन दोनों संस्थाओं ने 1988 में यह पैनल इसलिए बनाया कि सरकारों को जलवायु परिवर्तन पर विज्ञान का एक प्रामाणिक सारांश मिल सके। यह पैनल स्वयं शोध या निगरानी नहीं करता; यह प्रकाशित वैज्ञानिक साहित्य की समीक्षा कर आकलन रिपोर्ट तथा विशेष रिपोर्ट प्रकाशित करता है, जिनका नीति निर्माताओं हेतु सारांश सदस्य सरकारें पंक्ति दर पंक्ति स्वीकृत करती हैं।

विकल्प A संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा और कृषि संस्थाओं के नाम देता है, जिनकी ऐसी कोई भूमिका नहीं। विकल्प C वित्तीय संस्थाएँ हैं, जो जलवायु परियोजनाओं को धन तो देती हैं पर पैनल उन्होंने नहीं बनाया। विकल्प D स्वास्थ्य और विकास संस्थाओं के नाम हैं। आईपीसीसी को 2007 का नोबेल शांति पुरस्कार अल गोर के साथ मिला था।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना समझौता किस सम्मेलन में अपनाया गया था?

  1. A.स्टॉकहोम सम्मेलन, 1972
  2. B.रियो दे जनेरो का पृथ्वी सम्मेलन, 1992
  3. C.जोहानसबर्ग शिखर सम्मेलन, 2002
  4. D.कोपेनहेगन सम्मेलन, 2009
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रियो दे जनेरो का पृथ्वी सम्मेलन, 1992

व्याख्या

सही उत्तर B, 1992 का रियो दे जनेरो पृथ्वी सम्मेलन है। पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, जिसे लोकप्रिय रूप से पृथ्वी सम्मेलन कहा जाता है, ने जैव विविधता अभिसमय तथा एजेंडा 21 के साथ यह संरचना समझौता भी दिया। इस समझौते ने ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता सुरक्षित स्तर पर स्थिर करने का लक्ष्य रखा और यह साझी किंतु विभेदित जिम्मेदारियों के सिद्धांत पर टिका है, जो मानता है कि संचित उत्सर्जन का अधिकांश भाग औद्योगिक देशों का है।

विकल्प A 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन पर्यावरण पर पहला विश्व सम्मेलन था, जिससे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम बना। विकल्प C जोहानसबर्ग शिखर सम्मेलन ने सतत विकास की प्रगति की समीक्षा की। विकल्प D कोपेनहेगन सम्मेलन इसी समझौते के पक्षकारों की बाद की बैठक थी, अर्थात कोई नया समझौता वहाँ नहीं अपनाया गया।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य तय करने वाला क्योटो प्रोटोकॉल किस वर्ष अपनाया गया था?

  1. A.1987
  2. B.1992
  3. C.1997
  4. D.2005
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 1997

व्याख्या

सही उत्तर C, 1997 है। क्योटो प्रोटोकॉल जापान के क्योटो शहर में हुए पक्षकारों के तीसरे सम्मेलन में 1997 में अपनाया गया और पर्याप्त देशों के अनुसमर्थन के बाद 2005 में प्रभावी हुआ। यह उत्सर्जन पर कानूनी रूप से बाध्यकारी सीमा तय करने वाला पहला समझौता था, पर यह सीमा केवल समझौते के संलग्नक एक में सूचीबद्ध विकसित देशों पर थी, और इसने तीन बाजार तंत्र बनाए: उत्सर्जन व्यापार, संयुक्त क्रियान्वयन तथा स्वच्छ विकास तंत्र, जिसके अंतर्गत किसी विकासशील देश की परियोजना क्रेडिट अर्जित कर सकती थी।

विकल्प A 1987 ओजोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का वर्ष है। विकल्प B 1992 रियो पृथ्वी सम्मेलन और संरचना समझौते का वर्ष है। विकल्प D 2005 वह वर्ष है जब प्रोटोकॉल प्रभावी हुआ, अपनाया नहीं गया, और यही इस प्रश्न का सबसे आम जाल है।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

2015 के पेरिस समझौते के अंतर्गत देशों ने वैश्विक औसत तापमान की वृद्धि को किस सीमा में रखने पर सहमति दी?

  1. A.पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे, डेढ़ डिग्री की दिशा में प्रयास सहित
  2. B.वर्तमान स्तर से ठीक 3 डिग्री सेल्सियस
  3. C.वर्ष 2100 तक 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे
  4. D.कोई संख्यात्मक सीमा नहीं
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. पूर्व-औद्योगिक स्तर से 2 डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे, डेढ़ डिग्री की दिशा में प्रयास सहित

व्याख्या

सही उत्तर A है। पेरिस समझौता, जो 2015 में पक्षकारों के इक्कीसवें सम्मेलन में अपनाया गया और नवंबर 2016 से प्रभावी है, अपने पक्षकारों को इस बात के लिए प्रतिबद्ध करता है कि वैश्विक औसत तापमान की वृद्धि पूर्व-औद्योगिक स्तर से दो डिग्री सेल्सियस से काफी नीचे रखी जाए और उसे डेढ़ डिग्री तक सीमित करने के प्रयास किए जाएँ। क्योटो प्रोटोकॉल के विपरीत यह सभी देशों पर लागू है, और हर देश अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान स्वयं तय करता है, जिसकी रिपोर्ट देकर उसे समय के साथ बढ़ाना होता है।

विकल्प B एक गढ़ा हुआ आँकड़ा है और उसे पूर्व-औद्योगिक के बजाय वर्तमान स्तर से मापता है। विकल्प C ऐसी सीमा देता है जो समझौते की कल्पना से कहीं ऊपर है। विकल्प D गलत है क्योंकि संख्यात्मक लक्ष्य ही इस समझौते की सबसे प्रसिद्ध बात है।

Q6.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

निम्नलिखित में से किस गैस की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता सबसे अधिक है?

  1. A.कार्बन डाइऑक्साइड
  2. B.मीथेन
  3. C.नाइट्रस ऑक्साइड
  4. D.सल्फर हेक्साफ्लोराइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सल्फर हेक्साफ्लोराइड

व्याख्या

सही उत्तर D, सल्फर हेक्साफ्लोराइड है। ग्लोबल वार्मिंग क्षमता मापती है कि किसी गैस की दी गई मात्रा चुनी गई अवधि में उतनी ही मात्रा की कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कितनी ऊष्मा रोकती है, और कार्बन डाइऑक्साइड को मान एक दिया जाता है। उच्च वोल्टेज के विद्युत स्विचगियर में विद्युतरोधी गैस के रूप में प्रयुक्त सल्फर हेक्साफ्लोराइड की क्षमता क्योटो सूची की गैसों में कहीं अधिक है, क्योंकि यह अवरक्त विकिरण को प्रबलता से सोखती है और वायुमंडल में हजारों वर्ष टिकी रहती है।

विकल्प A कार्बन डाइऑक्साइड संदर्भ गैस है, जिसकी क्षमता एक है; वह अपनी विशाल मात्रा के कारण सबसे बड़ी समस्या है, प्रबलता के कारण नहीं। विकल्प B मीथेन सौ वर्ष में कहीं अधिक ऊष्मा रोकती है पर लगभग एक दशक में टूट जाती है। विकल्प C नाइट्रस ऑक्साइड और भी प्रबल है तथा ओजोन पर भी प्रहार करती है, पर दोनों सल्फर हेक्साफ्लोराइड के आसपास नहीं ठहरतीं।

Q7.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

भारत की 2008 में जारी जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना में कितने राष्ट्रीय मिशन हैं?

  1. A.पाँच
  2. B.छह
  3. C.आठ
  4. D.दस
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. आठ

व्याख्या

सही उत्तर C, आठ है। जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना 2008 में जारी हुई और आठ राष्ट्रीय मिशनों के इर्द-गिर्द बनी है: राष्ट्रीय सौर मिशन, संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन, सतत आवास मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारितंत्र के संरक्षण का मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन और जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान मिशन। इनमें कुछ उत्सर्जन घटाने से जुड़े हैं और कुछ बदली हुई जलवायु के साथ अनुकूलन से।

विकल्प A, B और D गलत संख्याएँ हैं। अभ्यर्थी को कम से कम सौर, जल, हिमालयी और हरित भारत मिशन के नाम याद रखने चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः यह पूछता है कि दिए गए चार में से कौन सा मिशन इस योजना का भाग नहीं है। इस योजना को प्रधानमंत्री की जलवायु परिवर्तन संबंधी परिषद ने स्वीकृत किया था।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किस पर्यावरणीय समस्या से संबंधित है?

  1. A.ओजोन परत का क्षरण
  2. B.आर्द्रभूमियों का संरक्षण
  3. C.संकटग्रस्त प्रजातियों का व्यापार
  4. D.खतरनाक अपशिष्ट का आवागमन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ओजोन परत का क्षरण

व्याख्या

सही उत्तर A, ओजोन परत का क्षरण है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में वियना अभिसमय के अंतर्गत उन पदार्थों को चरणबद्ध रूप से हटाने के लिए हुआ जो समतापमंडलीय ओजोन को नष्ट करते हैं, मुख्यतः प्रशीतन, वातानुकूलन और एरोसोल स्प्रे में प्रयुक्त क्लोरोफ्लोरोकार्बन। इसे सबसे सफल पर्यावरणीय संधि माना जाता है, क्योंकि यह चरणबद्ध निष्कासन वास्तव में हुआ और ओजोन परत के सुधरने की आशा है। इसके 2016 के किगाली संशोधन ने हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जोड़े, जो ओजोन को हानि नहीं पहुँचाते पर प्रबल ग्रीनहाउस गैसें हैं।

विकल्प B आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय का विषय है। विकल्प C साइटीस का विषय है। विकल्प D खतरनाक अपशिष्ट के सीमापार आवागमन पर बेसल अभिसमय का विषय है। इन चारों अभिसमयों के विषय और वर्ष एक साथ तालिका बनाकर याद रखने चाहिए, क्योंकि प्रश्न प्रायः इन्हें एक-दूसरे के विकल्प के रूप में रखता है।

Q9.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय कहाँ स्थित है?

  1. A.पेरिस, फ्रांस
  2. B.गुरुग्राम, भारत
  3. C.नैरोबी, केन्या
  4. D.अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. गुरुग्राम, भारत

व्याख्या

सही उत्तर B, गुरुग्राम, भारत है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की शुरुआत भारत और फ्रांस ने 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में उन देशों के बीच सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए की, जो मुख्यतः कर्क और मकर रेखा के बीच पड़ते हैं, और इसका सचिवालय हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के परिसर में बना। यह संधि आधारित पहला अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मुख्यालय भारत में है, और परीक्षक प्रायः यही बिंदु जाँचते हैं।

विकल्प A पेरिस वह स्थान है जहाँ गठबंधन की घोषणा हुई, मुख्यालय नहीं। विकल्प C नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम है। विकल्प D अबू धाबी में अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी है, जो अलग संस्था है और इस प्रश्न का आम भ्रामक विकल्प है। गठबंधन का एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड का विचार भी इसी से जुड़ा है।

Q10.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

निम्नलिखित में से कौन सा ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम नहीं है?

  1. A.समुद्र तल में वृद्धि
  2. B.हिमनदों का पीछे हटना
  3. C.प्रवाल विरंजन
  4. D.सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना

व्याख्या

सही उत्तर D, सतह तक अधिक पराबैंगनी विकिरण का पहुँचना है। यह ओजोन क्षरण का परिणाम है, जो अलग समस्या है और क्लोरोफ्लोरोकार्बन द्वारा समतापमंडल की ओजोन परत के पतला होने से होती है; इसके लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल बना है। इन दोनों समस्याओं को मिला देना पाठ्यक्रम के इस भाग की सबसे आम भूल है।

विकल्प A समुद्र तल की वृद्धि गर्म होने पर समुद्री जल के फैलने तथा स्थल की बर्फ के पिघलने दोनों से होती है। विकल्प B हिमनदों का पीछे हटना हिमालय, आल्प्स और एंडीज में देखा गया है और इससे उन पर निर्भर नदियों का प्रवाह संकट में है। विकल्प C प्रवाल विरंजन तब होता है जब असामान्य रूप से गर्म जल के कारण मूँगे अपने भीतर रहने वाले और उन्हें रंग देने वाले शैवाल बाहर निकाल देते हैं और सफेद पड़कर मरने लगते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रीनहाउस प्रभाव और ग्लोबल वार्मिंग में क्या अंतर है?

ग्रीनहाउस प्रभाव वह प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें वायुमंडल की कुछ गैसें पृथ्वी से विकीर्ण ऊष्मा सोखकर उसका एक भाग लौटा देती हैं और ग्रह को जीवन के योग्य गर्म बनाए रखती हैं। ग्लोबल वार्मिंग औसत सतही तापमान की वह वृद्धि है जो मानव गतिविधि से इन गैसों के बढ़ने पर इसी प्रभाव के प्रबल होने से होती है। संक्षेप में, ग्रीनहाउस प्रभाव क्रियाविधि है और ग्लोबल वार्मिंग उसके बढ़ जाने का परिणाम।

क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते में क्या अंतर है?

1997 के क्योटो प्रोटोकॉल ने केवल संलग्नक एक में सूचीबद्ध विकसित देशों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी कटौती लक्ष्य रखे, विकासशील देशों पर कोई बाध्यता नहीं डाली और बाजार तंत्रों के माध्यम से काम किया। 2015 का पेरिस समझौता हर देश पर लागू होता है, पर लक्ष्य बाहर से थोपे नहीं जाते; हर देश अपना राष्ट्रीय निर्धारित योगदान स्वयं प्रस्तुत करता है और उसकी रिपोर्ट देता है। क्योटो ऊपर से नीचे और सीमित था, पेरिस सार्वभौमिक और नीचे से बना है।

किसी गैस की ग्लोबल वार्मिंग क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?

ग्लोबल वार्मिंग क्षमता बताती है कि किसी गैस की दी गई मात्रा चुनी गई अवधि में, प्रायः सौ वर्ष में, उतनी ही मात्रा की कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कितनी ऊष्मा रोकती है; कार्बन डाइऑक्साइड को मान एक दिया जाता है। इससे भिन्न गैसों के उत्सर्जन को कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य के रूप में जोड़ा जा सकता है। मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड की क्षमता कार्बन डाइऑक्साइड से कहीं अधिक है और क्योटो सूची में सबसे अधिक सल्फर हेक्साफ्लोराइड की है, इसलिए थोड़ी मात्रा भी महत्व रखती है।

राष्ट्रीय कार्ययोजना के आठ मिशन कौन से हैं?

ये हैं राष्ट्रीय सौर मिशन, संवर्धित ऊर्जा दक्षता मिशन, सतत आवास मिशन, राष्ट्रीय जल मिशन, हिमालयी पारितंत्र के संरक्षण का मिशन, हरित भारत मिशन, सतत कृषि मिशन और जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान मिशन। यह योजना 2008 में जारी हुई और इसके मिशन उत्सर्जन घटाने तथा बदली जलवायु के साथ अनुकूलन दोनों को समेटते हैं।

क्या ओजोन छिद्र से ग्लोबल वार्मिंग होती है?

नहीं, ये अलग समस्याएँ हैं। समतापमंडल की ओजोन परत पराबैंगनी विकिरण सोखती है, और क्लोरोफ्लोरोकार्बन से उसके पतले होने पर अधिक पराबैंगनी विकिरण सतह तक पहुँचता है, जिससे त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और फसलों की हानि होती है। ग्लोबल वार्मिंग निचले वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों द्वारा बाहर जाती ऊष्मा का रुकना है। दोनों के लिए अलग संधियाँ हैं, ओजोन के लिए मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और जलवायु के लिए पेरिस समझौता, यद्यपि हाइड्रोफ्लोरोकार्बन जैसे कुछ रसायन दोनों से जुड़ते हैं।

स्रोत

  • समकालीन भारत दो (कक्षा दस), खनिज तथा ऊर्जा संसाधन अध्याय — एनसीईआरटी
  • भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत (कक्षा ग्यारह), वायुमंडल का संघटन तथा संरचना अध्याय — एनसीईआरटी
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