ऊर्जा संरक्षण: बीईई, स्टार लेबलिंग और उजाला
परीक्षा नोट्स: ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001, बीईई, स्टार लेबल और आईएसईईआर, पैट योजना एवं ईएससर्ट, ईसीबीसी तथा उजाला एलईडी कार्यक्रम का पूरा विवरण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

ऊर्जा संरक्षण का अर्थ है उतना ही काम कम ऊर्जा में करना। भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा आयात करता है और अपनी बिजली का अधिकांश भाग कोयले से बनाता है, इसलिए बचाई गई बिजली की हर इकाई नई बनाई गई इकाई से सस्ती और स्वच्छ होती है; इसी कारण बचाई गई इकाई को नेगावाट कहा जाता है। परीक्षा में यह अध्याय कानून और योजनाओं का विषय है: अधिनियम, उससे बना संस्थान, उपकरणों पर लगने वाला लेबल, उद्योगों के लिए व्यापार योजना और दो बड़े प्रकाश कार्यक्रम। नाम, वर्ष और एजेंसी याद रखें, प्रश्नपत्र यही पूछता है।
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 में पारित हुआ और इसका प्रशासन विद्युत मंत्रालय करता है। इसने भारत को ऊर्जा दक्षता की पहली वैधानिक व्यवस्था दी। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार ऊर्जा-गहन उद्योगों और प्रतिष्ठानों को नामित उपभोक्ता घोषित कर सकती है, जिन्हें ऊर्जा प्रबंधक नियुक्त करना होता है, मान्यताप्राप्त ऊर्जा लेखापरीक्षक से समय-समय पर ऊर्जा ऑडिट कराना होता है, खपत का रिकॉर्ड रखना होता है और अपने लिए तय खपत मानदंड पूरे करने होते हैं। अधिनियम केंद्र को यह शक्ति भी देता है कि वह उपकरणों के लिए दक्षता मानक तय करे, मानक पूरा न करने वाले उपकरणों के निर्माण या बिक्री पर रोक लगाए और भवन संहिता बनाए। राज्य सरकारें अधिनियम लागू कराने के लिए राज्य नामित अभिकरण बनाती हैं।
ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 ने मूल अधिनियम का दायरा बढ़ाया। इसने कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना का प्रावधान किया, नामित उपभोक्ताओं के लिए गैर-जीवाश्म ऊर्जा का न्यूनतम हिस्सा तय करने की शक्ति दी और बड़े आवासीय भवनों को भी भवन संहिता के दायरे में लाया।
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) इस अधिनियम के अंतर्गत बना वैधानिक निकाय है; यह 1 मार्च 2002 को विद्युत मंत्रालय के अधीन अस्तित्व में आया। इसकी गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष केंद्रीय विद्युत मंत्री होते हैं और इसका प्रमुख महानिदेशक होता है। बीईई बिजली नहीं बनाता, वह नियम बनाता और प्रेरित करता है। इसके मुख्य कार्यक्रम हैं मानक और लेबलिंग, ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता, कृषि तथा नगरपालिकाओं में मांग पक्ष प्रबंधन, ऊर्जा लेखापरीक्षकों का प्रशिक्षण और राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार।
मानक और लेबलिंग: स्टार लेबल
बीईई ने मानक और लेबलिंग कार्यक्रम 2006 में शुरू किया। हर कवर किए गए उपकरण पर एक स्टार से पाँच स्टार तक की रेटिंग वाला लेबल लगता है: जितने अधिक स्टार, उतनी ही कम बिजली उतने ही काम के लिए, अर्थात पाँच स्टार सबसे दक्ष। लेबल पर ब्रांड, मॉडल और वार्षिक ऊर्जा खपत किलोवाट-घंटा में भी छपी होती है, जिससे खरीदार चलाने का खर्च तुलना कर सकता है। योजना में एक अनिवार्य सूची है, जिसमें लेबल लगाना और न्यूनतम मानक पूरा करना आवश्यक है, और एक स्वैच्छिक सूची है जिसमें निर्माता स्वयं शामिल हो सकते हैं; उपकरण समय के साथ स्वैच्छिक से अनिवार्य सूची में आते हैं, और स्टार की सीमाएँ समय-समय पर कड़ी की जाती हैं, इसलिए कल का पाँच स्टार उपकरण आज चार स्टार का हो सकता है।
| शब्द | क्या मापता है | कहाँ प्रयोग होता है |
|---|---|---|
| स्टार रेटिंग | सापेक्ष दक्षता, 1 से 5 स्टार | सभी लेबल वाले उपकरण |
| आईएसईईआर | भारतीय मौसमी ऊर्जा दक्षता अनुपात; पूरे मौसम में प्रति इकाई बिजली से मिली शीतलता | रूम एयर कंडीशनर |
| ल्यूमेन प्रति वाट | प्रति इकाई शक्ति से मिला प्रकाश | लैंप और लाइटें |
| वार्षिक ऊर्जा खपत | परीक्षण स्थितियों में वर्ष भर में खर्च बिजली इकाइयाँ | लेबल पर छपी होती है |
पैट: दक्षता एक व्यापार योग्य वस्तु
परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड (पैट) योजना उन्नत ऊर्जा दक्षता राष्ट्रीय मिशन के अंतर्गत चलती है, जो जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के मिशनों में से एक है। अधिसूचित क्षेत्रों के प्रत्येक नामित उपभोक्ता को एक चक्र में अपनी विशिष्ट ऊर्जा खपत घटाने का लक्ष्य दिया जाता है। जो संयंत्र लक्ष्य से अधिक बचत करता है उसे ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र (ईएससर्ट) मिलते हैं, जिन्हें वह विद्युत एक्सचेंजों पर लक्ष्य से पीछे रह गए संयंत्र को बेच सकता है; लक्ष्य न पाने और प्रमाणपत्र न खरीदने पर जुर्माना लगता है। पैट के पहले चक्र में आठ ऊर्जा-गहन क्षेत्र थे: ताप विद्युत संयंत्र, लोहा और इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, एल्युमिनियम, वस्त्र, लुगदी और कागज तथा क्लोर-अल्कली। बाद के चक्रों में रेलवे, रिफाइनरी और विद्युत वितरण कंपनियाँ जैसे क्षेत्र जोड़े गए।
भवन संहिता
ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (ईसीबीसी) 2007 में उन नए वाणिज्यिक भवनों के लिए लाई गई जिनका संयोजित भार 100 किलोवाट या अधिक अथवा अनुबंधित मांग 120 केवीए या अधिक हो। यह भवन आवरण, प्रकाश व्यवस्था, वातानुकूलन, जल तापन और विद्युत प्रणालियों के लिए शर्तें तय करती है। घरों के लिए बीईई ने 2018 में आवासीय भवन संहिता इको निवास संहिता जारी की। भूमि और भवन राज्य के विषय हैं, इसलिए कोई संहिता तभी लागू होती है जब राज्य उसे अधिसूचित करता है।
उजाला और प्रकाश कार्यक्रम
बचत की सबसे आसान फसल प्रकाश में थी, क्योंकि 9 वाट का एलईडी बल्ब लगभग 60 वाट के तापदीप्त बल्ब जितना प्रकाश देता है। तापदीप्त लैंप लगभग 15 ल्यूमेन प्रति वाट और सीएफएल लगभग 60 ल्यूमेन प्रति वाट देता है, जबकि एलईडी 100 से अधिक; सीएफएल में थोड़ा पारा भी होता है, एलईडी में नहीं। 5 जनवरी 2015 को सरकार ने घरेलू दक्ष प्रकाश कार्यक्रम शुरू किया, जिसे उजाला (उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल) नाम दिया गया, और उसी दिन स्ट्रीट लाइटिंग राष्ट्रीय कार्यक्रम (एसएलएनपी) भी आरंभ हुआ। दोनों का कार्यान्वयन एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) करता है, जो विद्युत मंत्रालय के अधीन चार सार्वजनिक उपक्रमों का संयुक्त उद्यम है। उजाला में एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और पंखे घरेलू उपभोक्ताओं को खुदरा मूल्य से बहुत कम दाम पर वारंटी के साथ दिए जाते हैं, और लागत थोक खरीद से निकाली जाती है; एसएलएनपी में ईईएसएल शहरी स्थानीय निकायों की पुरानी स्ट्रीट लाइटें एलईडी से बदलता है और उसका भुगतान बिजली बिल में हुई बचत से होता है। राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 14 दिसंबर को मनाया जाता है, जब राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार दिए जाते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय के प्रश्न लगभग हमेशा तथ्यात्मक होते हैं। सबसे आम हैं ऊर्जा संरक्षण अधिनियम का वर्ष, इसका प्रशासन करने वाला मंत्रालय, बीईई की स्थापना का वर्ष, उजाला का पूरा नाम और उसे चलाने वाली एजेंसी, राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस की तिथि तथा आईएसईईआर किस उपकरण पर लागू होता है। दूसरा समूह पूछता है कि स्टार लेबल का अर्थ क्या है, और जाल यह मानना है कि एक स्टार सबसे अच्छा होता है; अधिक स्टार का अर्थ सदैव कम बिजली है। तीसरा समूह पैट पर है: वह किस मिशन के अंतर्गत है, उसमें बने प्रमाणपत्र का नाम ईएससर्ट है और वे विद्युत एक्सचेंजों पर बिकते हैं। कथन आधारित प्रश्नों में अधिनियम को गलत मंत्रालय से, उजाला को विद्युत के बजाय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से, या ईसीबीसी को वाणिज्यिक के बजाय आवासीय भवनों से जोड़ दिया जाता है। बीईई नियामक है और ईईएसएल कार्यान्वयन एजेंसी, यह अंतर भी ध्यान रखें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| ऊर्जा संरक्षण अधिनियम | 2001; प्रशासन विद्युत मंत्रालय द्वारा |
|---|---|
| बीईई की स्थापना | 1 मार्च 2002, अधिनियम के अंतर्गत वैधानिक निकाय |
| मानक और लेबलिंग आरंभ | 2006 |
| स्टार सीमा | 1 स्टार से 5 स्टार; 5 स्टार सबसे दक्ष |
| आईएसईईआर | भारतीय मौसमी ऊर्जा दक्षता अनुपात, रूम एयर कंडीशनर के लिए |
| पैट का मिशन | उन्नत ऊर्जा दक्षता राष्ट्रीय मिशन |
| पैट का प्रमाणपत्र | ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र, ईएससर्ट, विद्युत एक्सचेंजों पर व्यापार |
| पैट प्रथम चक्र के क्षेत्र | ताप विद्युत, लोहा-इस्पात, सीमेंट, उर्वरक, एल्युमिनियम, वस्त्र, लुगदी-कागज, क्लोर-अल्कली |
| ईसीबीसी | 2007; 100 किलोवाट संयोजित भार या 120 केवीए अनुबंधित मांग वाले वाणिज्यिक भवन |
| आवासीय संहिता | इको निवास संहिता, 2018 |
| उजाला | उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल, 5 जनवरी 2015 को आरंभ |
| एसएलएनपी | स्ट्रीट लाइटिंग राष्ट्रीय कार्यक्रम, 5 जनवरी 2015 को आरंभ |
| कार्यान्वयन एजेंसी | एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड, ईईएसएल, विद्युत मंत्रालय के अधीन |
| राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस | 14 दिसंबर |
| 2022 का संशोधन | कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना और गैर-जीवाश्म ऊर्जा बाध्यता |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
ऊर्जा दक्षता ब्यूरो की स्थापना निम्नलिखित में से किस अधिनियम के अंतर्गत हुई?
- A.विद्युत अधिनियम, 2003
- B.ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001
- C.पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- D.वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
उत्तर देखें
इसी अधिनियम ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को वैधानिक निकाय के रूप में बनाया और उसे दक्षता मानक तय करने, लेबलिंग कार्यक्रम चलाने तथा भवन संहिता तैयार करने की शक्ति दी; ब्यूरो 1 मार्च 2002 को विद्युत मंत्रालय के अधीन अस्तित्व में आया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऊर्जा दक्षता ब्यूरो किस केंद्रीय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- B.नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- C.विद्युत मंत्रालय
- D.भारी उद्योग मंत्रालय
उत्तर देखें
बीईई विद्युत मंत्रालय से संबद्ध वैधानिक निकाय है और उसकी गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष केंद्रीय विद्युत मंत्री होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →किसी उपकरण पर लगे बीईई स्टार लेबल में अधिक स्टार का अर्थ है कि वह उपकरण
- A.उतने ही काम के लिए कम बिजली खर्च करता है
- B.उतने ही काम के लिए अधिक बिजली खर्च करता है
- C.कम स्टार वाले मॉडल से सस्ता है
- D.अधिक लंबी वारंटी के साथ आता है
उत्तर देखें
स्टार लेबल उपकरण को उसके ऊर्जा प्रदर्शन के आधार पर एक स्टार से पाँच स्टार तक के वर्ग में रखता है, इसलिए पाँच स्टार मॉडल सबसे दक्ष होता है और अपने आकार वर्ग में सबसे कम वार्षिक ऊर्जा खपत दिखाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →दक्ष प्रकाश व्यवस्था की सरकारी योजना उजाला का पूरा नाम क्या है?
- A.उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल
- B.यूनिवर्सल ज्योति एंड लाइटिंग असिस्टेंस
- C.अर्बन ज्योति एंड अफोर्डेबल लैंप्स फॉर ऑल
- D.उन्नत जन आधार लाइटिंग अभियान
उत्तर देखें
यह कार्यक्रम घरेलू दक्ष प्रकाश कार्यक्रम के रूप में शुरू हुआ और 5 जनवरी 2015 को उजाला नाम से आरंभ किया गया, जिसमें घरेलू उपभोक्ताओं को एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और दक्ष पंखे खुदरा दर से बहुत कम मूल्य पर दिए जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →उजाला और स्ट्रीट लाइटिंग राष्ट्रीय कार्यक्रम का कार्यान्वयन कौन करता है?
- A.ऊर्जा दक्षता ब्यूरो
- B.एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड
- C.केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण
- D.सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया
उत्तर देखें
सही उत्तर B, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड है, जो विद्युत मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों का संयुक्त उद्यम है और एलईडी बल्ब तथा स्ट्रीट लाइट थोक में खरीदकर लागत उपभोक्ताओं से या नगरपालिका के बिजली बिल में हुई बचत से वसूलता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →आईएसईईआर अर्थात भारतीय मौसमी ऊर्जा दक्षता अनुपात का उपयोग निम्नलिखित में से किसकी रेटिंग के लिए होता है?
- A.सीलिंग फैन
- B.रूम एयर कंडीशनर
- C.एलईडी बल्ब
- D.वितरण ट्रांसफॉर्मर
उत्तर देखें
आईएसईईआर पूरे शीतलन मौसम में एयर कंडीशनर द्वारा दी गई कुल शीतलता को उस मौसम में खर्च बिजली से भाग देकर निकाला जाता है, इसलिए यह एक निश्चित तापमान के बजाय भारतीय जलवायु में आंशिक भार पर काम को दर्शाता है; अधिक आईएसईईआर का अर्थ अधिक दक्ष मशीन है और…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस कब मनाया जाता है?
- A.5 जून
- B.14 दिसंबर
- C.28 फरवरी
- D.22 अप्रैल
उत्तर देखें
विद्युत मंत्रालय हर वर्ष इसी तिथि को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस मनाता है और उन उद्योगों, भवनों तथा संस्थानों को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार दिए जाते हैं जिन्होंने अपनी ऊर्जा खपत घटाई है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड योजना के अंतर्गत अपने ऊर्जा बचत लक्ष्य से अधिक बचत करने वाली इकाई को क्या जारी किया जाता है?
- A.नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र
- B.ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र
- C.कार्बन उत्सर्जन कटौती इकाइयाँ
- D.ग्रीन बॉन्ड
उत्तर देखें
पैट प्रत्येक नामित उपभोक्ता को एक चक्र में अपनी विशिष्ट ऊर्जा खपत घटाने का लक्ष्य देता है; लक्ष्य से अधिक बचत करने वाले संयंत्र को ईएससर्ट मिलते हैं और वह उन्हें विद्युत एक्सचेंजों पर लक्ष्य से पीछे रह गए संयंत्र को बेच सकता है, जिससे दक्षता व्यापार योग्य वस्तु बन…
पूरी व्याख्या पढ़ें →2007 में जारी ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता उन नए वाणिज्यिक भवनों पर लागू थी जिनका संयोजित भार कम से कम कितना हो?
- A.10 किलोवाट
- B.50 किलोवाट
- C.100 किलोवाट
- D.500 किलोवाट
उत्तर देखें
यह संहिता ऊर्जा दक्षता ब्यूरो ने उन नए वाणिज्यिक भवनों के लिए बनाई जिनका संयोजित भार 100 किलोवाट या अधिक अथवा अनुबंधित मांग 120 केवीए या अधिक हो, और यह भवन आवरण, प्रकाश, वातानुकूलन, जल तापन तथा विद्युत प्रणालियों की शर्तें तय करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऊर्जा संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2022 द्वारा निम्नलिखित में से क्या लाया गया?
- A.कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना
- B.नवीकरणीय खरीद बाध्यता
- C.राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष के लिए कोयला उपकर
- D.राष्ट्रीय सौर मिशन
उत्तर देखें
ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के 2022 के संशोधन ने केंद्र सरकार को कार्बन क्रेडिट व्यापार योजना अधिसूचित करने, नामित उपभोक्ताओं के लिए गैर-जीवाश्म ऊर्जा का न्यूनतम हिस्सा तय करने और भवन संहिता को बड़े आवासीय भवनों तक बढ़ाने की शक्ति दी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के अंतर्गत अधिसूचित ऊर्जा-गहन उद्योग और प्रतिष्ठान किस नाम से जाने जाते हैं?
- A.नामित उपभोक्ता
- B.बाध्य संस्थाएँ
- C.मान्यताप्राप्त लेखापरीक्षक
- D.राज्य नामित अभिकरण
उत्तर देखें
अधिनियम की अनुसूची में ऊर्जा-गहन क्षेत्र गिनाए गए हैं, और उनमें अधिसूचित वार्षिक ऊर्जा खपत से ऊपर की इकाइयाँ नामित उपभोक्ता बन जाती हैं; प्रत्येक को ऊर्जा प्रबंधक नियुक्त करना, निर्धारित अंतराल पर ऊर्जा ऑडिट कराना, खपत का रिकॉर्ड रखना और अपने लिए तय मानदंड पूरे करने होते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बीईई और ईईएसएल में क्या अंतर है?
बीईई ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 से बना वैधानिक नियामक है। यह मानक बनाता है, स्टार लेबल चलाता है, भवन संहिता तैयार करता है और लेखापरीक्षकों को प्रशिक्षित करता है। ईईएसएल एक कंपनी है, विद्युत क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों का संयुक्त उद्यम, जो जमीन पर दक्षता परियोजनाएँ चलाती है, जैसे उजाला और एलईडी स्ट्रीट लाइट कार्यक्रम। संक्षेप में, नियम बीईई बनाता है और खरीद तथा स्थापना ईईएसएल करती है।
क्या पाँच स्टार उपकरण तीन स्टार उपकरण से हमेशा सस्ता चलता है?
एक ही आकार और प्रकार के उपकरण में हाँ, क्योंकि स्टार की सीमाएँ प्रति इकाई काम पर खर्च ऊर्जा से तय होती हैं, इसलिए पाँच स्टार मशीन उतनी ही शीतलता के लिए कम बिजली लेती है। लेकिन बड़े टन भार का पाँच स्टार एयर कंडीशनर छोटे टन भार के तीन स्टार से अधिक बिजली ले सकता है, इसलिए स्टार के साथ लेबल पर छपी वार्षिक ऊर्जा खपत भी देखें।
उजाला का पूरा नाम क्या है और इसमें कौन खरीद सकता है?
उजाला का पूरा नाम उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल है। घरेलू बिजली उपभोक्ता वितरण केंद्रों और निर्धारित काउंटरों पर अपनी बिजली वितरण कंपनी का उपभोक्ता होने का प्रमाण दिखाकर एलईडी बल्ब, ट्यूबलाइट और ऊर्जा दक्ष पंखे खुदरा दर से बहुत कम मूल्य पर वारंटी के साथ खरीद सकते हैं।
ईएससर्ट क्या हैं?
ईएससर्ट यानी ऊर्जा बचत प्रमाणपत्र परफॉर्म, अचीव एंड ट्रेड योजना के अंतर्गत उस नामित उपभोक्ता को जारी किए जाते हैं जो अपने लक्ष्य से अधिक ऊर्जा बचाता है। एक प्रमाणपत्र तेल समतुल्य टन में मापी गई एक निश्चित मात्रा की बचत दर्शाता है। लक्ष्य से पीछे रह गए संयंत्र अनुपालन के लिए विद्युत एक्सचेंजों से ईएससर्ट खरीदते हैं, जिससे दक्षता का एक बाजार मूल्य बन जाता है।
क्या ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता पूरे भारत में बाध्यकारी है?
संहिता केंद्र में बीईई तैयार करता है, परंतु भवन और स्थानीय उपविधियाँ राज्य के विषय हैं। किसी राज्य को संहिता अधिसूचित करनी पड़ती है, सामान्यतः अपने जलवायु क्षेत्र के अनुसार संशोधन के साथ, और उसे नगरपालिका उपविधियों में शामिल कराना पड़ता है, तभी वह किसी निर्माता पर बाध्यकारी होती है। इसी कारण अनुपालन राज्य दर राज्य भिन्न है।
स्रोत
- ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- मानक एवं लेबलिंग कार्यक्रम — ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, विद्युत मंत्रालय
- उन्नत ज्योति बाय अफोर्डेबल एलईडीज फॉर ऑल (उजाला) — एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड





