वन संरक्षण और सामाजिक वानिकी: नोट्स और प्रश्न
परीक्षाओं के लिए वन संरक्षण और सामाजिक वानिकी के नोट्स: वन कानून और नीतियाँ, संयुक्त वन प्रबंधन, चिपको तथा अप्पिको आंदोलन और वन आवरण की श्रेणियाँ।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

वन मृदा को बाँधते हैं, भूजल का पुनर्भरण करते हैं, कार्बन संचित करते हैं, देश के अधिकांश वन्य जीवों को आश्रय देते हैं और उन करोड़ों लोगों का जीवन चलाते हैं जो उनके भीतर और आसपास रहते हैं। अतः जो बचा है उसकी रक्षा करना और अधिक उगाना दो भिन्न कार्य हैं, और भारतीय नीति इन्हें अलग अलग देखती है: संरक्षण विधि और वन प्रशासन का कार्य है, जबकि सामाजिक वानिकी आरक्षित वनों के बाहर ग्राम सामान्य भूमि, खेत की मेड़, नहर के किनारे, सड़क के किनारे और बंजर भूमि पर उन लोगों के साथ वृक्ष उगाने का कार्य है जो उनका उपयोग करेंगे। यह विषय प्रत्येक सामान्य जागरूकता प्रश्नपत्र में आता है, क्योंकि इसमें कानूनों की तिथियाँ, आंदोलनों के नाम और परिभाषाएँ एक साथ हैं, जिन्हें एक अंक के प्रश्न के रूप में पूछा जा सकता है।
भारत में वन संरक्षण की विधि
भारतीय वन अधिनियम, सन 1927, मूल कानून है और वह वनों को तीन प्रकारों में बाँटता है: आरक्षित वन, जहाँ कुछ भी तब तक वर्जित है जब तक विशेष रूप से अनुमत न हो; रक्षित वन, जहाँ सब कुछ तब तक अनुमत है जब तक विशेष रूप से निषिद्ध न हो; और ग्राम अथवा अवर्गीकृत वन। निर्णायक संरक्षण कानून वन संरक्षण अधिनियम, सन 1980 है, जिसने राज्य से यह अधिकार ले लिया कि वह स्वयं वन भूमि को गैर वन उपयोग में परिवर्तित कर दे; केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य हो गई। सन 1988 के संशोधन से यह और सुदृढ़ हुआ और सन 2023 में इसमें पुनः संशोधन हुआ। इसके चारों ओर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, सन 1972, भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, सन 1986, तथा प्रतिपूरक वनरोपण निधि अधिनियम, सन 2016 खड़े हैं, जिसके अंतर्गत परिवर्तित वन भूमि के बदले जमा धन कैम्पा व्यवस्था से रोपण पर खर्च होता है।
नीति कानून से आगे चली। राष्ट्रीय वन नीति, सन 1952, ने वह लक्ष्य रखा जो आज भी प्रत्येक प्रश्नपत्र में उद्धृत होता है: देश के भौगोलिक क्षेत्र का एक तिहाई भाग वन अथवा वृक्ष आवरण के अंतर्गत होना चाहिए, जिसमें पहाड़ों में लगभग साठ प्रतिशत और मैदानों में लगभग बीस प्रतिशत। राष्ट्रीय वन नीति, सन 1988, ने वन प्रबंधन का उद्देश्य राजस्व कमाने से बदलकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना कर दिया और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को घोषित सिद्धांत बनाया। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी वन अधिकार मान्यता अधिनियम, सन 2006, जिसे सामान्यतः वन अधिकार अधिनियम कहा जाता है, ने वन में रहने वाली जनजातियों तथा अन्य परंपरागत निवासियों के उस भूमि और वन उपज पर व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकार मान्य किए जिनका वे लंबे समय से उपयोग करते आए थे।
सामाजिक वानिकी और उसकी शाखाएँ
सामाजिक वानिकी शब्द भारतीय प्रयोग में राष्ट्रीय कृषि आयोग ने सन 1976 में लाया, जिसने नियमित वनों पर दबाव घटाने के लिए उनके बाहर वृक्ष उगाने की संस्तुति की। इसकी चार शाखाएँ मानी जाती हैं।
| शाखा | इसका अर्थ |
|---|---|
| कृषि वानिकी अर्थात फार्म फॉरेस्ट्री | किसान अपने खेतों, मेड़ों और सीमाओं पर ईंधन, चारे और छोटी इमारती लकड़ी के लिए वृक्ष उगाएँ |
| सामुदायिक वानिकी | ग्राम सामान्य भूमि और पंचायत भूमि पर पूरे गाँव के उपयोग के लिए उगाए गए वृक्ष |
| विस्तार वानिकी | सड़कों, रेल पटरियों, नहर के किनारों और बंजर भूमि पर रोपण, जो वृक्ष आवरण को वन सीमा से बाहर बढ़ाता है |
| कृषि वन प्रणाली अर्थात एग्रो फॉरेस्ट्री | एक ही भूखंड पर वृक्ष और कृषि फसलें तथा प्रायः पशुधन साथ साथ रखना |
संयुक्त वन प्रबंधन वह संस्थागत रूप है जो सन 1988 की नीति को आगे ले जाता है। इसके अंतर्गत ग्राम वन सुरक्षा समिति किसी क्षरित वन खंड की रक्षा का उत्तरदायित्व वन विभाग के साथ बाँटती है और बदले में उपभोग अर्थात घास, जलावन, गौण वन उपज तथा अंतिम कटाई का एक अंश पाती है। यह विचार पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के अराबारी प्रयोग से निकला, जो सन 1970 के दशक के आरंभ में शुरू हुआ, और सन 1990 के भारत सरकार के परिपत्र द्वारा राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया गया। वन महोत्सव, जो जुलाई के प्रथम सप्ताह में मनाया जाने वाला वृक्षारोपण पर्व है, सन 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री के एम मुंशी की पहल पर आरंभ हुआ।
वन के लिए जन आंदोलन
भारतीय वन संरक्षण जितना कानूनों की कथा है उतना ही समुदायों की। पश्चिमी राजस्थान का बिश्नोई समुदाय, पंद्रहवीं शताब्दी में गुरु जांभेश्वर द्वारा दिए उनतीस नियमों का पालन करते हुए, सदियों से खेजड़ी वृक्ष और काले हिरण की रक्षा करता आया है। सन 1730 में खेजड़ली में अमृता देवी और बड़ी संख्या में बिश्नोइयों ने प्राण दे दिए परंतु महाराजा के कारिंदों को खेजड़ी वृक्ष काटने नहीं दिए, और राष्ट्रीय अमृता देवी बिश्नोई वन्य जीव रक्षा पुरस्कार उनके नाम पर है। चिपको आंदोलन सन 1973 में गढ़वाल हिमालय के चमोली जिले में आरंभ हुआ, जो तब उत्तर प्रदेश का भाग था और अब उत्तराखंड में है, जब ग्रामवासियों ने ठेकेदारों को वृक्ष काटने से रोकने के लिए उन्हें गले लगा लिया; रेणी गाँव की महिलाओं का नेतृत्व गौरा देवी ने किया और सुंदरलाल बहुगुणा तथा चंडी प्रसाद भट्ट ने आंदोलन को आगे बढ़ाया। सन 1983 का अप्पिको आंदोलन कर्नाटक के पश्चिमी घाट में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में उसका दक्षिणी रूप था; अप्पिको कन्नड़ में गले लगाने का शब्द है। केरल के साइलेंट वैली अभियान ने एक उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन को जल विद्युत परियोजना से बचाया।
आवरण का मापन और उसकी वृद्धि
भारतीय वन सर्वेक्षण, जिसका मुख्यालय देहरादून में है, उपग्रह आँकड़ों से देश के वन और वृक्ष आवरण का आकलन करता है और प्रत्येक दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित करता है। वह वन आवरण को छत्र घनत्व के अनुसार श्रेणीबद्ध करता है: अति घने वन सत्तर प्रतिशत से ऊपर, मध्यम घने वन चालीस से सत्तर प्रतिशत, खुले वन दस से चालीस प्रतिशत और झाड़ी दस प्रतिशत से नीचे। राज्यों में मध्य प्रदेश का वन आवरण क्षेत्र सबसे बड़ा है, जबकि पूर्वोत्तर के पहाड़ी राज्यों में अपने क्षेत्र का सर्वाधिक अनुपात वन के अंतर्गत है। रोपण कार्यक्रमों में राष्ट्रीय वनरोपण कार्यक्रम, जलवायु परिवर्तन राष्ट्रीय कार्य योजना के अंतर्गत हरित भारत मिशन तथा मरुस्थलीय जिलों की रक्षक मेखला और बालुका स्तूप स्थिरीकरण का कार्य सम्मिलित हैं। वनरोपण का अर्थ वहाँ वृक्ष लगाना है जहाँ निकट स्मृति में वन नहीं था; पुनर्वनरोपण का अर्थ वहाँ फिर रोपण है जहाँ वन नष्ट हो गया; और वन संवर्धन अर्थात सिल्वीकल्चर वन फसल उगाने और उसकी देखभाल का विज्ञान है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से प्रश्नपत्र तीन बातें पूछते हैं। पहली, तिथियाँ: सन 1927 भारतीय वन अधिनियम, सन 1952 और सन 1988 वन नीति, सन 1972 वन्य जीव, सन 1980 वन संरक्षण, सन 1986 पर्यावरण, सन 2006 वन अधिकार और सन 2016 प्रतिपूरक वनरोपण। दूसरी, आंदोलन और उनके नेता, जिनमें चिपको और अप्पिको जानबूझकर बदले जाते हैं तथा बहुगुणा के सामने हेगड़े रखे जाते हैं। तीसरी, परिभाषाएँ: सामाजिक वानिकी की चार शाखाएँ, वनरोपण बनाम पुनर्वनरोपण तथा वन आवरण की छत्र घनत्व श्रेणियाँ। एक तिहाई का लक्ष्य, जुलाई में वन महोत्सव और अक्तूबर में वन्य जीव सप्ताह राज्य स्तरीय प्रश्नपत्रों में लगभग निश्चित हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भारतीय वन अधिनियम | सन 1927; आरक्षित, रक्षित और ग्राम वन |
|---|---|
| वन संरक्षण अधिनियम | सन 1980; सन 1988 और सन 2023 में संशोधित |
| वन्य जीव संरक्षण अधिनियम | सन 1972 |
| पर्यावरण संरक्षण अधिनियम | सन 1986, भोपाल गैस त्रासदी के बाद |
| वन अधिकार अधिनियम | सन 2006; दावों का सत्यापन ग्राम सभा करती है |
| प्रतिपूरक वनरोपण निधि अधिनियम | सन 2016; कैम्पा व्यवस्था |
| वन आवरण लक्ष्य | भौगोलिक क्षेत्र का 33 प्रतिशत; पहाड़ों में 60 और मैदानों में 20 प्रतिशत |
| सामाजिक वानिकी को नाम | राष्ट्रीय कृषि आयोग, सन 1976 |
| सामाजिक वानिकी की शाखाएँ | फार्म, सामुदायिक, विस्तार और एग्रो फॉरेस्ट्री |
| संयुक्त वन प्रबंधन का उद्गम | अराबारी, मिदनापुर जिला, पश्चिम बंगाल |
| वन महोत्सव | जुलाई का प्रथम सप्ताह; सन 1950 में के एम मुंशी द्वारा आरंभ |
| चिपको आंदोलन | सन 1973, चमोली, गढ़वाल; गौरा देवी, सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट |
| अप्पिको आंदोलन | सन 1983, उत्तर कन्नड़, कर्नाटक; पांडुरंग हेगड़े |
| खेजड़ली बलिदान | सन 1730; अमृता देवी और बिश्नोई, खेजड़ी वृक्षों के लिए |
| भारतीय वन सर्वेक्षण | देहरादून, सन 1981; प्रत्येक दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट |
| छत्र घनत्व श्रेणियाँ | अति घना 70 से ऊपर, मध्यम घना 40 से 70, खुला 10 से 40, झाड़ी 10 प्रतिशत से नीचे |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वन संरक्षण अधिनियम किस वर्ष अधिनियमित किया गया था?
- A.1972
- B.1976
- C.1980
- D.1984
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1980
व्याख्या
सही उत्तर C, सन 1980 है। वन संरक्षण अधिनियम सन 1980 में इसलिए पारित हुआ कि खनन, सड़क, बाँध और नगरों के लिए वन भूमि का लगातार होता ह्रास रुके। इसका केंद्रीय प्रावधान यह है कि कोई राज्य सरकार अथवा अन्य प्राधिकारी केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना न किसी आरक्षित वन का आरक्षण समाप्त कर सकता है और न वन भूमि को गैर वन प्रयोजन में ले सकता है, तथा सन 1988 के संशोधन ने प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई को भी इसके दायरे में लाकर इसे और कसा। विकल्प A, सन 1972, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का वर्ष है, जो जीवों, शिकार और संरक्षित क्षेत्रों से संबंधित है। विकल्प B, सन 1976, वह वर्ष है जब बयालीसवें संशोधन ने संविधान में अनुच्छेद 48क तथा 51क(छ) जोड़े और वन एवं वन्य जीव को समवर्ती सूची में डाला। विकल्प D, सन 1984, भोपाल गैस त्रासदी का वर्ष है, जिसके बाद सन 1986 का पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आया। क्रम स्मरण रखें: सन 1972 वन्य जीव, सन 1976 संवैधानिक कर्तव्य, सन 1980 वन संरक्षण और सन 1986 पर्यावरण संरक्षण।
कौन सा संप्रदाय हरे वृक्षों की रक्षा के लिए जाना जाता है?
- A.रामस्नेही
- B.बिश्नोई
- C.लालदासी
- D.निरंजनी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. बिश्नोई
व्याख्या
सही उत्तर B, बिश्नोई है। पश्चिमी राजस्थान का बिश्नोई समुदाय पंद्रहवीं शताब्दी में गुरु जांभेश्वर द्वारा दिए उनतीस नियमों का पालन करता है, जिनमें कई हरे वृक्ष काटने और जीव वध का निषेध करते हैं, और इसी कारण मरुस्थलीय जिलों में खेजड़ी के वन और काले हिरणों के झुंड बचे हुए हैं। सन 1730 में जोधपुर के निकट खेजड़ली में अमृता देवी और बड़ी संख्या में बिश्नोई खेजड़ी वृक्षों से चिपके रहते हुए मारे गए, जिन्हें महाराजा के चूना भट्ठे के लिए काटा जा रहा था, और राष्ट्रीय अमृता देवी बिश्नोई वन्य जीव रक्षा पुरस्कार उसी बलिदान की स्मृति है। विकल्प A रामस्नेही संप्रदाय, विकल्प C लालदासी संप्रदाय और विकल्प D निरंजनी संप्रदाय, ये तीनों राजस्थान की भक्ति परंपराएँ हैं, परंतु इनमें से किसी की पहचान वृक्ष और वन्य जीव रक्षा से नहीं है। प्रश्नपत्र इस प्रश्न को गढ़वाल हिमालय के चिपको आंदोलन के साथ जोड़ते हैं, जिसने बिश्नोई उदाहरण को खुलकर अपनाया।
किस भारतीय राज्य में वन आवरण के अंतर्गत सबसे बड़ा क्षेत्र है?
- A.केरल
- B.छत्तीसगढ़
- C.अरुणाचल प्रदेश
- D.मध्य प्रदेश
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सही उत्तर: D. मध्य प्रदेश
व्याख्या
सही उत्तर D, मध्य प्रदेश है। भारतीय वन सर्वेक्षण के क्रमिक आकलनों ने वन आवरण के निरपेक्ष क्षेत्र में राज्यों में मध्य प्रदेश को प्रथम रखा है, और यह स्थान उसे अपने विशाल आकार तथा सतपुड़ा, विंध्य और बघेलखंड क्षेत्रों के विस्तृत सागौन और साल वनों से मिला है। विकल्प C, अरुणाचल प्रदेश, क्षेत्र में सामान्यतः दूसरे स्थान पर रहता है और अपने भौगोलिक क्षेत्र के अनुपात में वन आवरण के मामले में कई राज्यों से आगे है, और यही अंतर प्रश्न जाँच रहा है: सबसे बड़ा क्षेत्र होना सर्वाधिक प्रतिशत होने के समान नहीं है। विकल्प B, छत्तीसगढ़, में भी घने साल वन हैं और वह अग्रणी राज्यों में है परंतु शीर्ष पर नहीं। विकल्प A, केरल, में पश्चिमी घाट के समृद्ध उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वन हैं परंतु वह क्षेत्र में अग्रणी होने के लिए बहुत छोटा है। जोड़ी इस प्रकार स्मरण रखें: सबसे बड़ा वन क्षेत्र मध्य प्रदेश में और क्षेत्र के अनुपात में सर्वाधिक वन पूर्वोत्तर के छोटे पहाड़ी राज्यों में।
चिपको आंदोलन सन 1973 में वर्तमान में किस राज्य के एक जिले में आरंभ हुआ था?
- A.उत्तराखंड
- B.हिमाचल प्रदेश
- C.कर्नाटक
- D.असम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्तराखंड
व्याख्या
सही उत्तर A, उत्तराखंड है। यह आंदोलन सन 1973 में गढ़वाल हिमालय के चमोली जिले में आरंभ हुआ, जो तब उत्तर प्रदेश का भाग था और सन 2000 से नए राज्य उत्तराखंड में है। ग्रामवासियों ने, और सबसे बढ़कर गौरा देवी के नेतृत्व में रेणी गाँव की महिलाओं ने, वृक्षों को गले लगा लिया जिससे ठेकेदार उन्हें काट न सकें, और सुंदरलाल बहुगुणा तथा चंडी प्रसाद भट्ट ने यह माँग तब तक आगे बढ़ाई जब तक एक निश्चित ऊँचाई से ऊपर हरी कटाई पर रोक नहीं लग गई। विकल्प B, हिमाचल प्रदेश, की अपनी वन रक्षा परंपराएँ हैं परंतु चिपको नहीं। विकल्प C, कर्नाटक, सन 1983 के अप्पिको आंदोलन का घर है, जो पश्चिमी घाट में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में चला और चिपको का दक्षिणी समानांतर है, इसी कारण उसे यहाँ भ्रम के लिए रखा जाता है। विकल्प D, असम, का इससे संबंध नहीं है। चिपको शब्द का अर्थ चिपकना है और अप्पिको कन्नड़ में गले लगाना है।
सन 1950 में आरंभ हुआ राष्ट्रीय वृक्षारोपण पर्व वन महोत्सव किस माह में मनाया जाता है?
- A.मार्च
- B.जुलाई
- C.अक्तूबर
- D.दिसंबर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जुलाई
व्याख्या
सही उत्तर B, जुलाई है। वन महोत्सव जुलाई के प्रथम सप्ताह में मनाया जाता है और यह समय इसलिए चुना गया है कि तब तक देश के अधिकांश भाग में मानसून आ जाता है और नया रोपा पौधा जीवित रहने की सर्वोत्तम संभावना पाता है। इसे सन 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि एवं खाद्य मंत्री के एम मुंशी की पहल पर आरंभ किया गया, जिसका उद्देश्य वृक्षारोपण को विभागीय कार्य के स्थान पर जन पर्व बनाना था। विकल्प A, मार्च, में इक्कीस तारीख को विश्व वानिकी दिवस और बाईस तारीख को विश्व जल दिवस आता है, परंतु वन महोत्सव नहीं। विकल्प C, अक्तूबर, के प्रथम सप्ताह में वन्य जीव सप्ताह आता है, जो जीवों को समर्पित पृथक आयोजन है। विकल्प D, दिसंबर, किसी राष्ट्रीय रोपण कार्यक्रम से जुड़ा नहीं है और शुष्क ऋतु में पड़ता है जब पौधों का जीवित रहना कठिन होता है। परीक्षक वन्य जीव सप्ताह और वन महोत्सव को एक ही विकल्प समूह में रखते हैं, अतः वृक्ष के लिए जुलाई और वन्य जीव के लिए अक्तूबर स्थिर कर लें।
वनों की रक्षा के लिए चले अप्पिको आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
- A.पांडुरंग हेगड़े
- B.मेधा पाटकर
- C.बाबा आमटे
- D.सुंदरलाल बहुगुणा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पांडुरंग हेगड़े
व्याख्या
सही उत्तर A, पांडुरंग हेगड़े है। अप्पिको आंदोलन सन 1983 में कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में पश्चिमी घाट में आरंभ हुआ, जहाँ ग्रामवासी वन में जाकर ठेकेदारों द्वारा कटाई के लिए चिह्नित वृक्षों से लिपट गए; पांडुरंग हेगड़े ने हिमालय के चिपको आंदोलन का अध्ययन करने के बाद इसे संगठित किया। विकल्प B, मेधा पाटकर, की पहचान नर्मदा पर बड़े बाँधों से होने वाले डूब क्षेत्र के विरुद्ध नर्मदा बचाओ आंदोलन से है। विकल्प C, बाबा आमटे, ने कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों के लिए कार्य किया और नर्मदा संघर्ष में भी सम्मिलित हुए, परंतु उन्होंने अप्पिको का नेतृत्व नहीं किया। विकल्प D, सुंदरलाल बहुगुणा, उत्तराखंड के चिपको आंदोलन तथा टिहरी बाँध विरोध का सर्वाधिक परिचित चेहरा हैं, और उन्हें यहाँ इसी कारण रखा जाता है कि अभ्यर्थी दोनों आंदोलनों में भ्रमित होते हैं। परीक्षा कक्ष में ले जाने योग्य सरल मिलान यह है: हिमालय में चिपको के साथ बहुगुणा और भट्ट, तथा पश्चिमी घाट में अप्पिको के साथ हेगड़े।
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार भारत के भौगोलिक क्षेत्र का कितना भाग वन अथवा वृक्ष आवरण के अंतर्गत होना चाहिए?
- A.एक पंचमांश
- B.एक चौथाई
- C.एक तिहाई
- D.आधा
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सही उत्तर: C. एक तिहाई
व्याख्या
सही उत्तर C, एक तिहाई है। राष्ट्रीय वन नीति, सन 1952, ने यह निर्धारित किया कि देश के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग तैंतीस प्रतिशत वन अथवा वृक्ष आवरण के अंतर्गत होना चाहिए, और उसने इस राष्ट्रीय आँकड़े को पहाड़ी तथा पर्वतीय प्रदेशों के लिए लगभग साठ प्रतिशत, जहाँ ढालों को अपरदन और भूस्खलन से बचाना है, तथा मैदानों के लिए लगभग बीस प्रतिशत में बाँटा। राष्ट्रीय वन नीति, सन 1988, ने यही लक्ष्य बनाए रखा और वन प्रबंधन का उद्देश्य राजस्व से पारिस्थितिक संतुलन की ओर मोड़ दिया। विकल्प A, एक पंचमांश, केवल मैदानों के लिए निर्धारित आँकड़ा है, इसी कारण उसे यहाँ रखा जाता है। विकल्प B, एक चौथाई, और विकल्प D, आधा, किसी भी नीति में नहीं आते। स्मरण रखने योग्य बात यह है कि यह नीति लक्ष्य है, उपलब्धि नहीं, और भारतीय वन सर्वेक्षण प्रत्येक दो वर्ष में प्रकाशित भारत वन स्थिति रिपोर्ट में मापता है कि देश वास्तव में उससे कितनी दूर है।
अराबारी का वह प्रयोग, जिससे संयुक्त वन प्रबंधन की राष्ट्रीय नीति निकली, किस राज्य में किया गया था?
- A.पश्चिम बंगाल
- B.ओडिशा
- C.गुजरात
- D.महाराष्ट्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पश्चिम बंगाल
व्याख्या
सही उत्तर A, पश्चिम बंगाल है। सन 1970 के दशक के आरंभ में पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले की अराबारी रेंज में वन अधिकारियों ने ग्रामवासियों को अतिक्रमणकारी मानना छोड़कर उन्हें एक क्षरित साल वन की रक्षा और उसकी उपज में हिस्सा दिया; वन उल्लेखनीय रूप से पुनर्जीवित हुआ और वह प्रयोग संयुक्त वन प्रबंधन का आदर्श बन गया, जिसे सन 1990 के भारत सरकार के परिपत्र द्वारा राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया गया। विकल्प B, ओडिशा, में स्वयं पहल से चलने वाली सामुदायिक वन रक्षा की प्रबल परंपरा और हजारों ग्राम समितियाँ हैं, परंतु अराबारी ओडिशा में नहीं है। विकल्प C, गुजरात, और विकल्प D, महाराष्ट्र, दोनों बड़े संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम चलाते हैं परंतु इस विचार का उद्गम नहीं हैं। संयुक्त वन प्रबंधन में ग्राम समिति उपभोग में हिस्सा पाती है, अर्थात घास, जलावन, गौण वन उपज तथा अंतिम कटाई का एक अंश, और यही विवरण सर्वाधिक पूछा जाता है।
भारतीय वन सर्वेक्षण का मुख्यालय किस स्थान पर है?
- A.नई दिल्ली
- B.देहरादून
- C.भोपाल
- D.कोयंबटूर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. देहरादून
व्याख्या
सही उत्तर B, देहरादून है। सन 1981 में स्थापित भारतीय वन सर्वेक्षण का मुख्यालय उत्तराखंड के देहरादून में है, और यही नगर वन अनुसंधान संस्थान तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी का भी घर है, जिससे देहरादून देश के वानिकी कार्य का केंद्र बन जाता है। यह संस्था उपग्रह चित्रों से वन और वृक्ष आवरण का मानचित्रण करती है और प्रत्येक दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित करती है, जिसमें छत्र घनत्व के अनुसार अति घने, मध्यम घने, खुले वन और झाड़ी की श्रेणियाँ दी जाती हैं। विकल्प A, नई दिल्ली, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का स्थान है, जो मूल मंत्रालय है परंतु स्वयं सर्वेक्षण संस्था नहीं। विकल्प C, भोपाल, में भारतीय वन प्रबंध संस्थान है, जो वन प्रबंधकों को प्रशिक्षित करने वाली पृथक संस्था है। विकल्प D, कोयंबटूर, में वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान है। वानिकी संस्थाओं और उनके स्थानों पर प्रश्न सामान्य हैं, अतः इन चारों को अलग अलग स्मरण रखें।
भारतीय वन सर्वेक्षण के वर्गीकरण में सत्तर प्रतिशत से अधिक छत्र घनत्व वाले वन को क्या कहा जाता है?
- A.खुला वन
- B.झाड़ी
- C.मध्यम घना वन
- D.अति घना वन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अति घना वन
व्याख्या
सही उत्तर D, अति घना वन है। भारतीय वन सर्वेक्षण वन आवरण को उस अनुपात के अनुसार बाँटता है जिस भूमि पर वृक्षों का छत्र छाया करता है। सत्तर प्रतिशत से ऊपर वह खंड अति घना वन है; चालीस से सत्तर प्रतिशत तक मध्यम घना वन; दस से चालीस प्रतिशत तक खुला वन; और दस प्रतिशत से नीचे झाड़ी, जिसकी गणना पृथक होती है और जिसे वन आवरण में नहीं गिना जाता। अतः विकल्प A, खुला वन, दस से चालीस प्रतिशत की पट्टी का है और भारत में अभिलिखित आवरण का बड़ा भाग उसी का है। विकल्प B, झाड़ी, दस प्रतिशत से नीचे की क्षरित श्रेणी है। विकल्प C, मध्यम घना वन, चालीस से सत्तर प्रतिशत की पट्टी है। सीखने योग्य संबंधित परिभाषा यह है कि एक हेक्टेयर या अधिक का कोई भी खंड जिसका छत्र घनत्व दस प्रतिशत से अधिक हो, उसकी विधिक स्थिति चाहे जो हो, वन आवरण में गिना जाता है, इसी कारण बाग और रोपण भी इस आँकड़े में आ जाते हैं।
वन में रहने वाली अनुसूचित जनजातियों और अन्य परंपरागत वन निवासियों के भूमि तथा वन उपज पर अधिकार किस कानून ने मान्य किए?
- A.भारतीय वन अधिनियम, 1927
- B.वन अधिकार अधिनियम, 2006
- C.वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- D.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. वन अधिकार अधिनियम, 2006
व्याख्या
सही उत्तर B, वन अधिकार अधिनियम, सन 2006 है। इसका पूरा नाम अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी वन अधिकार मान्यता अधिनियम है, और यह उस भूमि पर व्यक्तिगत अधिकार मान्य करता है जिस पर ऐसे परिवार खेती कर रहे थे, चरागाहों तथा जल स्रोतों पर सामुदायिक अधिकार मान्य करता है और गौण वन उपज पर अधिकार देता है, तथा दावों के सत्यापन का अधिकारी ग्राम सभा को बनाता है। विकल्प A, भारतीय वन अधिनियम, सन 1927, वह औपनिवेशिक मूल कानून है जो वनों को आरक्षित, रक्षित और ग्राम वन में बाँटता है और स्थानीय उपयोग को अधिकार के स्थान पर सुविधा मानता है। विकल्प C, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, सन 1972, प्रजातियों की रक्षा, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों से संबंधित है। विकल्प D, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, सन 1986, भोपाल त्रासदी के बाद पारित छत्र कानून है और सामान्यतः प्रदूषण तथा पर्यावरणीय अनुमति से संबंधित है। सन 2006 के अधिनियम को प्रायः सन 1996 के पेसा अधिनियम के साथ पूछा जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वन संरक्षण अधिनियम, सन 1980, वास्तव में क्या करता है?
यह राज्य से वह अधिकार ले लेता है कि वह स्वयं वन भूमि को गैर वन प्रयोजन में ले या किसी आरक्षित वन का आरक्षण समाप्त करे। केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य हो गई, और सन 1988 के संशोधन ने इसे रोपण हेतु प्राकृतिक रूप से उगे वृक्षों की कटाई तक बढ़ा दिया।
सामाजिक वानिकी और परंपरागत वानिकी में क्या अंतर है?
परंपरागत वानिकी अधिसूचित वनों का प्रबंध वन विभाग के माध्यम से करती है। सामाजिक वानिकी उन वनों के बाहर खेत की मेड़, ग्राम सामान्य भूमि, सड़क किनारे, नहर किनारे और बंजर भूमि पर स्थानीय लोगों के साथ और उनके लिए वृक्ष उगाती है, जिससे वन पर जलावन और चारे का दबाव घटे।
सामाजिक वानिकी की चार शाखाएँ कौन सी हैं?
फार्म फॉरेस्ट्री, जिसमें किसान अपनी भूमि पर रोपण करता है; सामुदायिक वानिकी, ग्राम सामान्य भूमि पर; विस्तार वानिकी, सड़क, रेल, नहर और बंजर भूमि के साथ; और एग्रो फॉरेस्ट्री, जिसमें वृक्ष और फसलें तथा प्रायः पशुधन एक ही भूखंड पर साथ रखे जाते हैं।
संयुक्त वन प्रबंधन कैसे कार्य करता है?
ग्राम वन सुरक्षा समिति और वन विभाग किसी क्षरित वन खंड की रक्षा तथा उसके उपभोग, अर्थात घास, जलावन, गौण वन उपज और अंतिम कटाई का निर्धारित अंश, दोनों में हिस्सेदारी रखते हैं। यह पश्चिम बंगाल के अराबारी प्रयोग से निकला और सन 1990 में नीति बना।
चिपको और अप्पिको आंदोलन में क्या अंतर है?
चिपको सन 1973 में गढ़वाल हिमालय के चमोली में आरंभ हुआ और उसके परिचित नाम गौरा देवी, सुंदरलाल बहुगुणा तथा चंडी प्रसाद भट्ट हैं। अप्पिको सन 1983 में कर्नाटक के पश्चिमी घाट में उत्तर कन्नड़ में पांडुरंग हेगड़े के नेतृत्व में आरंभ हुआ। दोनों ने चिह्नित वृक्षों से लिपटने की पद्धति अपनाई।
भारतीय वन सर्वेक्षण वन आवरण का वर्गीकरण कैसे करता है?
एक हेक्टेयर या अधिक का कोई भी खंड जिसका छत्र घनत्व दस प्रतिशत से अधिक हो, वन आवरण में गिना जाता है। सत्तर प्रतिशत से ऊपर अति घना वन, चालीस से सत्तर के बीच मध्यम घना, दस से चालीस के बीच खुला वन और दस प्रतिशत से नीचे भूमि झाड़ी के रूप में अभिलिखित होती है।
स्रोत
- समकालीन भारत दो, कक्षा 10, अध्याय दो: वन एवं वन्य जीव संसाधन — एनसीईआरटी
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980, जैसा भारत संहिता में प्रकाशित है — भारत सरकार
- भारतीय वन सर्वेक्षण: वन आवरण श्रेणियाँ और भारत वन स्थिति रिपोर्ट — भारतीय वन सर्वेक्षण, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय





