जैव विविधता और संरक्षण: हॉटस्पॉट तथा कानून
परीक्षा के लिए जैव विविधता पर पर्यावरण नोट्स: उसके तीन स्तर, हॉटस्पॉट और स्थानिकता, ह्रास के कारण, रेड लिस्ट श्रेणियाँ, संरक्षण के उपाय तथा कानून।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

जैव विविधता का अर्थ है जीवन की वह विविधता जो हर स्तर पर मिलती है, एक ही जाति के भीतर के जीनों से लेकर किसी क्षेत्र को ढकने वाले पारितंत्रों तक। यह शब्द 1985 में जैविक विविधता के संक्षिप्त रूप में गढ़ा गया और जीवविज्ञानी एडवर्ड विल्सन ने इसे प्रचलित किया। परीक्षार्थी के लिए यह विषय दो कारणों से महत्वपूर्ण है: इसमें स्पष्ट परिभाषाएँ मिलती हैं, और इसके साथ तिथियों, संधियों तथा भारतीय कानूनों की लंबी सूची जुड़ी है जो सीधे पूछी जाती है।
जैव विविधता के तीन स्तर
- आनुवंशिक विविधता एक ही जाति के भीतर की भिन्नता है, जैसे भारत में उगाई जाने वाली धान की अनेक किस्में या एक ही औषधीय पौधे की अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न क्षमता।
- जातीय विविधता किसी क्षेत्र में जातियों की विविधता है, जिसे जाति समृद्धि अर्थात जातियों की संख्या और जाति समता अर्थात उनमें जीवों के बँटवारे से नापा जाता है।
- पारितंत्रीय विविधता किसी क्षेत्र के आवासों की विविधता है, जैसे वन, घास के मैदान, आर्द्रभूमि, मरुस्थल, मैंग्रोव और प्रवाल भित्तियाँ।
मापन का दूसरा पैमाना रॉबर्ट व्हिटेकर के दिए तीन शब्द हैं: अल्फा विविधता, अर्थात एक ही समुदाय या आवास के भीतर की विविधता; बीटा विविधता, अर्थात एक आवास से दूसरे तक जातियों की बदलती संरचना; और गामा विविधता, अर्थात बड़े भूदृश्य की कुल विविधता। विविधता पृथ्वी पर समान रूप से नहीं फैली है। ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने पर वह बढ़ती जाती है, इसलिए उष्ण कटिबंधीय वनों में शीतोष्ण वनों से कहीं अधिक जातियाँ मिलती हैं और अमेजन वर्षावन सबसे समृद्ध क्षेत्र है।
हॉटस्पॉट, स्थानिकता और भारत
जैव विविधता हॉटस्पॉट वह क्षेत्र है जो जातियों की दृष्टि से असाधारण रूप से समृद्ध हो और साथ ही गंभीर संकट में हो। यह विचार नॉर्मन मायर्स ने 1988 में दिया, और कोई क्षेत्र तभी इसमें आता है जब वहाँ बड़ी संख्या में स्थानिक पादप जातियाँ हों और उसकी अधिकांश मूल वनस्पति नष्ट हो चुकी हो। स्थानिक जातियाँ वे हैं जो केवल एक ही भौगोलिक क्षेत्र में मिलती हैं और कहीं नहीं, जैसे पश्चिमी घाट का सिंहपुच्छी मकाक या निकोबार मेगापोड।
| भारत का हॉटस्पॉट | विस्तार क्षेत्र |
|---|---|
| हिमालय | पूर्वी हिमालय और उत्तर के पर्वत |
| इंडो-बर्मा | हिमालय शृंखला से आगे का पूर्वोत्तर |
| पश्चिमी घाट और श्रीलंका | प्रायद्वीप के पश्चिमी तट की पहाड़ी शृंखला |
| सुंडालैंड | निकोबार द्वीप समूह |
भारत विश्व के मेगाविविध देशों में गिना जाता है, क्योंकि यहाँ थोड़े से भूभाग पर विश्व की जातियों का बड़ा हिस्सा मिलता है, और यह फसल पौधों की उत्पत्ति के बड़े केंद्रों में भी है।
जैव विविधता क्यों घटती है
चार कारणों को मिलाकर दुष्ट चतुष्क कहा जाता है। आवास का ह्रास और विखंडन अकेला सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि वन काटे जाते हैं, आर्द्रभूमियाँ सुखाई जाती हैं और घास के मैदान जोत लिए जाते हैं, और जो टुकड़े बचते हैं वे बड़े जीवों के लिए बहुत छोटे होते हैं। अतिदोहन का अर्थ है प्रकृति की पूर्ति से अधिक लेना, जैसे अत्यधिक मत्स्याखेट या खाल, सींग तथा हड्डी के लिए शिकार। आक्रामक विदेशी जातियाँ वे जीव हैं जो बाहर से आकर देशी जातियों को दबा देते हैं, जैसे भारतीय जलाशयों में जलकुंभी और नदियों में अफ्रीकी मांगुर। सह विलुप्ति तब होती है जब कोई जाति समाप्त होकर अपने साथ उन जातियों को भी ले जाती है जो उस पर निर्भर थीं, जैसे कोई परजीवी या परागणकर्ता।
रेड लिस्ट और उसकी श्रेणियाँ
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ, जिसकी स्थापना 1948 में हुई और जिसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लांड में है, रेड लिस्ट बनाए रखता है, जिसमें किसी जाति की संख्या और विस्तार का आकलन करके उसे एक निश्चित श्रेणी में रखा जाता है। संकट के घटते क्रम में ये हैं विलुप्त, प्रकृति में विलुप्त, अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, सुभेद्य, संकट के निकट और कम चिंतनीय, तथा जिनका आकलन न हो सके उनके लिए आँकड़ा अपर्याप्त एवं अमूल्यांकित श्रेणियाँ हैं। अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और सुभेद्य तीनों को मिलाकर संकटग्रस्त श्रेणियाँ कहा जाता है।
संरक्षण: स्वस्थाने और बहिःस्थाने
स्वस्थाने संरक्षण किसी जाति की उसके प्राकृतिक घर में ही रक्षा करता है, और यही अधिक अच्छा उपाय है क्योंकि उसके साथ पूरा पारितंत्र भी बच जाता है। यह राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, जीवमंडल निचयों, संरक्षण तथा सामुदायिक निचयों और उन पवित्र उपवनों से किया जाता है जिन्हें गाँव सदियों से परंपरा के बल पर बचाते आए हैं। राष्ट्रीय उद्यान की सीमाएँ निश्चित होती हैं और उसके भीतर मानव अधिकार या पशुचारण की अनुमति नहीं होती, जबकि अभयारण्य किसी विशेष जाति या समूह के लिए होता है और वहाँ कुछ नियंत्रित गतिविधियाँ चल सकती हैं। जीवमंडल निचय बड़ी इकाई है जो तीन क्षेत्रों में बँटी रहती है: अछूता क्रोड़ क्षेत्र, बफर क्षेत्र जहाँ शोध और सीमित उपयोग की अनुमति है, और संक्रमण क्षेत्र जहाँ बस्तियाँ तथा खेती चलती रहती हैं। ये निचय यूनेस्को के मानव और जीवमंडल कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं, जो 1971 में आरंभ हुआ, और 1986 में अधिसूचित नीलगिरि जीवमंडल निचय भारत का पहला था।
बहिःस्थाने संरक्षण किसी जाति की उसके आवास से बाहर रक्षा करता है, जैसे चिड़ियाघरों, वानस्पतिक उद्यानों, बीज बैंकों, जीन बैंकों और निम्नतापीय परिरक्षण सुविधाओं में, तथा पात्रे निषेचन एवं ऊतक संवर्धन जैसी तकनीकों से। यह बचाव की दूसरी पंक्ति है, जिसका उपयोग तब होता है जब आबादी बहुत घट चुकी हो या आवास बहुत क्षतिग्रस्त हो।
याद रखने योग्य कानून और संधियाँ
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 में पारित हुआ और वही राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों तथा संरक्षित जातियों की अनुसूचियों का कानूनी आधार है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में और प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992 में आरंभ हुआ। जैव विविधता अधिनियम 2002 में पारित हुआ और उसने तीन स्तरीय ढाँचा बनाया, जिसमें चेन्नई में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य बोर्ड और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता अभिसमय 1992 में रियो डी जनेरियो के पृथ्वी शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षरित हुआ और उसके तीन उद्देश्य हैं: जैव विविधता का संरक्षण, उसका संपोषणीय उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों से मिलने वाले लाभों का न्यायसंगत बँटवारा। उसका 2000 का कार्टाजेना प्रोटोकॉल जैव सुरक्षा से और 2010 का नागोया प्रोटोकॉल पहुँच तथा लाभ बँटवारे से संबंधित है। 1971 का रामसर अभिसमय आर्द्रभूमियों की रक्षा करता है और 1973 का साइट्स संकटग्रस्त जातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
यहाँ अधिकांश प्रश्न एक पंक्ति के तथ्यात्मक होते हैं, और तिथियाँ इनकी रीढ़ हैं: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972, प्रोजेक्ट टाइगर तथा साइट्स 1973, रामसर अभिसमय और मानव एवं जीवमंडल कार्यक्रम 1971, रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन तथा प्रोजेक्ट एलीफेंट 1992, और जैव विविधता अधिनियम 2002। हॉटस्पॉट प्रायः बेमेल विकल्प के रूप में पूछे जाते हैं, जिनमें पूर्वी घाट और अरावली सामान्य गलत विकल्प होते हैं। स्वस्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण का अंतर उदाहरणों से जाँचा जाता है, इसलिए याद रखिए कि चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान और बीज बैंक बहिःस्थाने हैं जबकि राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और पवित्र उपवन स्वस्थाने। जीवमंडल निचय के तीन क्षेत्र, रेड लिस्ट श्रेणियों का क्रम और दुष्ट चतुष्क के चार सदस्य निश्चित प्रश्नों की सूची पूरी करते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| जैव विविधता के स्तर | आनुवंशिक, जातीय और पारितंत्रीय विविधता |
|---|---|
| हॉटस्पॉट संकल्पना | नॉर्मन मायर्स ने 1988 में दी |
| भारत के हॉटस्पॉट | हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट के साथ श्रीलंका, और निकोबार द्वीपों वाला सुंडालैंड |
| ह्रास का सबसे बड़ा कारण | आवास का ह्रास और विखंडन, दुष्ट चतुष्क का पहला सदस्य |
| आईयूसीएन | स्थापना 1948, मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लांड में |
| संकटग्रस्त श्रेणियाँ | अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और सुभेद्य |
| जीवमंडल निचय के क्षेत्र | क्रोड़, बफर और संक्रमण |
| भारत का पहला जीवमंडल निचय | नीलगिरि, 1986 में अधिसूचित |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 में पारित |
| प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट एलीफेंट | क्रमशः 1973 और 1992 |
| जैव विविधता अधिनियम | 2002 में पारित; राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण चेन्नई में |
| जैव विविधता अभिसमय | 1992 में रियो डी जनेरियो के पृथ्वी शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षरित |
| रामसर अभिसमय और साइट्स | आर्द्रभूमि, 1971; संकटग्रस्त जातियों का व्यापार, 1973 |
| अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस | 22 मई |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
जैव विविधता हॉटस्पॉट की संकल्पना किस वैज्ञानिक ने दी?
- A.नॉर्मन मायर्स
- B.चार्ल्स डार्विन
- C.रॉबर्ट व्हिटेकर
- D.अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. नॉर्मन मायर्स
व्याख्या
सही उत्तर A, नॉर्मन मायर्स है, जिन्होंने 1988 में यह विचार रखा ताकि संरक्षण के सीमित साधन उन स्थानों पर लगें जहाँ सबसे अधिक जातियाँ बचाई जा सकें। कोई क्षेत्र तभी हॉटस्पॉट बनता है जब वहाँ कहीं और न मिलने वाली जातियाँ बहुत हों और उसकी अधिकांश मूल वनस्पति नष्ट हो चुकी हो।
विकल्प B, चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक चयन द्वारा विकास का सिद्धांत दिया और इस वर्गीकरण से उनका संबंध नहीं। विकल्प C, रॉबर्ट व्हिटेकर वास्तविक जाल हैं, क्योंकि अल्फा, बीटा तथा गामा विविधता के शब्द उन्हीं के दिए हैं और वे पाँच जगत वाले वर्गीकरण के लिए भी जाने जाते हैं। विकल्प D, हम्बोल्ट ने बताया कि क्षेत्रफल बढ़ने के साथ जाति समृद्धि कैसे बढ़ती है। भारत तक चार हॉटस्पॉट फैले हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट के साथ श्रीलंका, और निकोबार द्वीपों वाला सुंडालैंड, और इन्हें एक साथ याद रखना ही इस अध्याय का सबसे निश्चित अंक है।
निम्नलिखित में से कौन भारत तक फैला जैव विविधता हॉटस्पॉट नहीं है?
- A.हिमालय
- B.इंडो-बर्मा
- C.पूर्वी घाट
- D.पश्चिमी घाट और श्रीलंका
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. पूर्वी घाट
व्याख्या
सही उत्तर C, पूर्वी घाट है। ये टूटी हुई और तुलनात्मक रूप से शुष्क पहाड़ी शृंखला हैं और हॉटस्पॉट की दोनों कसौटियों, अर्थात असाधारण स्थानिकता तथा गंभीर संकट, पर खरी नहीं उतरतीं।
विकल्प A, हिमालय, विकल्प B, इंडो-बर्मा, जो हिमालय शृंखला से आगे पूर्वोत्तर को घेरता है, और विकल्प D, पश्चिमी घाट के साथ श्रीलंका, भारत तक फैले चार हॉटस्पॉट में से तीन हैं। चौथा सुंडालैंड है, जिसमें निकोबार द्वीप समूह आता है। प्रश्नपत्र इसे बेमेल विकल्प के रूप में पूछते हैं और सामान्य गलत विकल्प पूर्वी घाट तथा अरावली होते हैं, जो उस अभ्यर्थी को सही लगते हैं जिसने केवल इतना पढ़ा हो कि हॉटस्पॉट पहाड़ी होते हैं। स्थानिकता के लिए पश्चिमी घाट अवश्य याद रखिए, क्योंकि सिंहपुच्छी मकाक और अनेक उभयचर वहीं मिलते हैं और कहीं नहीं, और यही असाधारण स्थानिकता उसे हॉटस्पॉट बनाती है।
जैव विविधता अभिसमय किस सम्मेलन में हस्ताक्षरित हुआ था?
- A.1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन
- B.1992 का रियो डी जनेरियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन
- C.1997 का क्योटो सम्मेलन
- D.1971 का रामसर सम्मेलन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1992 का रियो डी जनेरियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन
व्याख्या
सही उत्तर B, 1992 में रियो डी जनेरियो में हुआ पृथ्वी शिखर सम्मेलन है। इस अभिसमय के तीन उद्देश्य हैं: जैव विविधता का संरक्षण, उसके घटकों का संपोषणीय उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों का न्यायसंगत बँटवारा।
विकल्प A, 1972 का स्टॉकहोम सम्मेलन मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का पहला बड़ा सम्मेलन था जिससे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम बना। विकल्प C, 1997 का क्योटो सम्मेलन ग्रीनहाउस गैसों में कटौती के प्रोटोकॉल से जुड़ा है और जलवायु परिवर्तन अध्याय का है। विकल्प D, 1971 का रामसर सम्मेलन आर्द्रभूमियों का अभिसमय लाया। रियो अभिसमय के बाद दो प्रोटोकॉल आए: जैव सुरक्षा से संबंधित 2000 का कार्टाजेना प्रोटोकॉल और आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच तथा लाभ बँटवारे से संबंधित 2010 का नागोया प्रोटोकॉल, और परीक्षा में इन दोनों के वर्ष तथा विषय दोनों पूछे जाते हैं।
भारत में स्थापित पहला जीवमंडल निचय कौन सा था?
- A.नंदा देवी
- B.नीलगिरि
- C.सुंदरबन
- D.मन्नार की खाड़ी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नीलगिरि
व्याख्या
सही उत्तर B, नीलगिरि जीवमंडल निचय है, जो 1986 में अधिसूचित हुआ। यह पश्चिमी घाट में तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के मिलन बिंदु पर फैला है और अपने भीतर कई प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान तथा अभयारण्य समेटे है।
विकल्प A, उत्तराखंड का नंदा देवी, विकल्प C, पश्चिम बंगाल का सुंदरबन और विकल्प D, तमिलनाडु तट के पास मन्नार की खाड़ी सभी भारत के जीवमंडल निचय हैं, पर सभी नीलगिरि के बाद घोषित हुए। प्रश्न लगभग हमेशा यही पूछता है कि पहला कौन था, इसलिए नीलगिरि और 1986 का जोड़ा याद रखिए। साथ ही उस ढाँचे को भी याद रखिए जिससे ये जुड़े हैं, अर्थात यूनेस्को का 1971 में आरंभ मानव और जीवमंडल कार्यक्रम, तथा हर निचय के तीन क्षेत्र, अर्थात क्रोड़, बफर और संक्रमण क्षेत्र, जिन पर अलग से भी प्रश्न बनते हैं।
जीवमंडल निचय किन तीन क्षेत्रों में बँटा होता है?
- A.क्रोड़, बफर और संक्रमण
- B.क्रोड़, अभयारण्य और उद्यान
- C.भीतरी, मध्य और बाहरी
- D.संरक्षित, प्रतिबंधित और खुला
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. क्रोड़, बफर और संक्रमण
व्याख्या
सही उत्तर A, क्रोड़, बफर और संक्रमण क्षेत्र है। क्रोड़ क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित और अछूता रहता है और वहाँ किसी मानव गतिविधि की अनुमति नहीं होती। उसके चारों ओर का बफर क्षेत्र शोध, शिक्षा और सीमित संसाधन उपयोग की अनुमति देता है जिससे क्रोड़ को हानि न पहुँचे। सबसे बाहर संक्रमण क्षेत्र है, जहाँ बस्तियाँ, खेती और स्थानीय लोगों की गतिविधियाँ चलती रहती हैं।
विकल्प B दो अलग प्रकार के संरक्षित क्षेत्रों को मिला देता है; अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत घोषित होते हैं और जीवमंडल निचय के क्षेत्र नहीं हैं, यद्यपि वे प्रायः किसी निचय के भीतर पड़ते हैं। विकल्प C और D गढ़े हुए नाम हैं। तीन क्षेत्रों की यही रचना केंद्र में कठोर संरक्षण और किनारे पर आजीविका दोनों संभव बनाती है।
भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ?
- A.1962
- B.1972
- C.1980
- D.1986
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1972
व्याख्या
सही उत्तर B, 1972 है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम राष्ट्रीय उद्यानों तथा वन्यजीव अभयारण्यों की घोषणा का कानूनी आधार देता है, अपनी अनुसूचियों में संरक्षित जातियाँ सूचीबद्ध करता है, और उनके शिकार तथा व्यापार पर रोक लगाता है।
विकल्प C, 1980 वन संरक्षण अधिनियम का वर्ष है, जो वन भूमि के गैर वन उपयोग पर रोक लगाता है। विकल्प D, 1986 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का वर्ष है, जो भोपाल गैस त्रासदी के बाद बना छत्र कानून है, और इसी वर्ष नीलगिरि जीवमंडल निचय भी अधिसूचित हुआ। विकल्प A, 1962 से ऐसा कोई कानून नहीं जुड़ा। ये तीन वर्ष बारी-बारी पूछे जाते हैं और इन्हें 1973 के प्रोजेक्ट टाइगर, 1992 के प्रोजेक्ट एलीफेंट तथा 2002 के जैव विविधता अधिनियम के साथ याद करना चाहिए, क्योंकि प्रश्नपत्र प्रायः इन्हीं वर्षों को विकल्पों में आमने-सामने रखते हैं।
रामसर अभिसमय किसके संरक्षण से संबंधित है?
- A.आर्द्रभूमि
- B.मरुस्थल
- C.उष्ण कटिबंधीय वन
- D.केवल प्रवाल भित्तियाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आर्द्रभूमि
व्याख्या
सही उत्तर A, आर्द्रभूमि है। यह अभिसमय 1971 में ईरान के रामसर नगर में अपनाया गया, जिससे इसका नाम पड़ा, और यह अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों की सूची बनाने तथा हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा उनके विवेकपूर्ण उपयोग की व्यवस्था करता है।
विकल्प B, मरुस्थल मरुस्थलीकरण रोकने वाले अभिसमय का विषय हैं। विकल्प C, उष्ण कटिबंधीय वनों का इस प्रकार का कोई एक अभिसमय नहीं है, यद्यपि वे व्यापक जैव विविधता अभिसमय में आते हैं। विकल्प D बहुत संकीर्ण है, क्योंकि प्रवाल भित्तियाँ सूचीबद्ध हो सकती हैं पर यह अभिसमय दलदल, झील, नदी, मैंग्रोव और ज्वारनदमुख को भी ढकता है। आर्द्रभूमियाँ भूजल भरती हैं, बाढ़ रोकती हैं, प्रदूषकों को छानती हैं और प्रवासी पक्षियों को शरण देती हैं, इसीलिए अपने छोटे क्षेत्रफल के बावजूद इनका महत्व बहुत बड़ा है और इन्हें भूदृश्य का गुर्दा कहा जाता है।
आईयूसीएन रेड लिस्ट में निम्नलिखित में से कौन सी श्रेणी प्रकृति में विलुप्ति का सबसे अधिक खतरा दर्शाती है?
- A.सुभेद्य
- B.संकटग्रस्त
- C.अति संकटग्रस्त
- D.संकट के निकट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अति संकटग्रस्त
व्याख्या
सही उत्तर C, अति संकटग्रस्त है। जो जातियाँ अब भी प्रकृति में जीवित हैं उनमें यह सबसे गंभीर श्रेणी है, जो उन जातियों को दी जाती है जिन पर निकट भविष्य में विलुप्ति का अत्यधिक खतरा है।
विकल्प B, संकटग्रस्त इसके बाद आती है और विकल्प A, सुभेद्य उसके बाद; ये तीनों मिलकर संकटग्रस्त श्रेणियाँ कहलाती हैं। विकल्प D, संकट के निकट हल्की चेतावनी है, जो उस जाति के लिए है जो संकटग्रस्त बनने के पास है पर अभी हुई नहीं। घटते क्रम में पूरा क्रम है विलुप्त, प्रकृति में विलुप्त, अति संकटग्रस्त, संकटग्रस्त, सुभेद्य, संकट के निकट और कम चिंतनीय, तथा जिनका आकलन न हो सके उनके लिए आँकड़ा अपर्याप्त एवं अमूल्यांकित। यह सूची अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ रखता है, जिसकी स्थापना 1948 में हुई और जिसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लांड में है।
भारत में प्रोजेक्ट टाइगर किस वर्ष आरंभ हुआ?
- A.1971
- B.1973
- C.1982
- D.1992
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1973
व्याख्या
सही उत्तर B, 1973 है। प्रोजेक्ट टाइगर बाघ की रक्षा के लिए उसके आवश्यक आवास के संरक्षण के उद्देश्य से आरंभ हुआ, और चूँकि बाघ आहार शृंखला के शीर्ष पर है, उसे बचाने से नीचे का पूरा वन बच जाता है। ऐसी जाति को छत्र जाति कहा जाता है।
विकल्प D, 1992 प्रोजेक्ट एलीफेंट के आरंभ का वर्ष है, और दोनों को साथ रखकर यही देखा जाता है कि अभ्यर्थी इन्हें अलग कर पाता है या नहीं। विकल्प A, 1971 रामसर अभिसमय तथा मानव और जीवमंडल कार्यक्रम का वर्ष है। विकल्प C, 1982 से ऐसी कोई योजना नहीं जुड़ी। ठीक पिछला वर्ष भी ध्यान रखिए: 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम ने उद्यानों और अभयारण्यों का कानूनी ढाँचा बनाया, और अगले ही वर्ष यह परियोजना उस पर खड़ी हुई।
निम्नलिखित में से कौन बहिःस्थाने संरक्षण का उदाहरण है?
- A.राष्ट्रीय उद्यान
- B.वन्यजीव अभयारण्य
- C.बीज बैंक
- D.पवित्र उपवन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बीज बैंक
व्याख्या
सही उत्तर C, बीज बैंक है। बहिःस्थाने संरक्षण का अर्थ है किसी जाति की उसके प्राकृतिक आवास से बाहर रक्षा करना, और बीज बैंक यही करता है, क्योंकि वह बीजों को नियंत्रित ताप तथा आर्द्रता में भविष्य के लिए संचित रखता है। चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, जीन बैंक और निम्नतापीय परिरक्षण सुविधाएँ भी इसी समूह में हैं।
विकल्प A, राष्ट्रीय उद्यान, विकल्प B, वन्यजीव अभयारण्य और विकल्प D, पवित्र उपवन सभी स्वस्थाने हैं, अर्थात वे जाति की उसी स्थान पर रक्षा करते हैं जहाँ वह रहती है और उसके साथ पूरा पारितंत्र बचाते हैं। पवित्र उपवन वे वन खंड हैं जिन्हें गाँव परंपरा से किसी देवता को समर्पित मानकर बचाते आए हैं और जिन्होंने बिना किसी कानून के दुर्लभ पौधे सदियों तक सुरक्षित रखे हैं। स्वस्थाने उपाय सदा श्रेष्ठ माना जाता है; बहिःस्थाने उपाय तब अपनाया जाता है जब आबादी बहुत घट चुकी हो या आवास बहुत क्षतिग्रस्त हो।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस किस तिथि को मनाया जाता है?
- A.22 अप्रैल
- B.22 मई
- C.5 जून
- D.2 अक्टूबर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 22 मई
व्याख्या
सही उत्तर B, 22 मई है। यह दिवस जैव विविधता अभिसमय के पाठ को अपनाए जाने की स्मृति में मनाया जाता है और हर वर्ष जातियों तथा आवासों के ह्रास की ओर ध्यान खींचने के लिए प्रयुक्त होता है।
विकल्प A, 22 अप्रैल पृथ्वी दिवस है। विकल्प C, 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है, जो 1972 में मानव पर्यावरण पर स्टॉकहोम सम्मेलन के आरंभ की स्मृति में मनाया जाता है और यहाँ अभ्यर्थी प्रायः यही गलती से चुन लेते हैं। विकल्प D, 2 अक्टूबर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस है और उसका पर्यावरण से कोई संबंध नहीं। महत्वपूर्ण दिवस इस विषय में निश्चित अंक देते हैं, इसलिए इनके साथ 21 मार्च अंतरराष्ट्रीय वन दिवस और 2 फरवरी विश्व आर्द्रभूमि दिवस भी याद कर लीजिए, जो रामसर अभिसमय पर हस्ताक्षर की स्मृति में मनाया जाता है।
जैव विविधता के ह्रास का अकेला सबसे बड़ा कारण कौन सा माना जाता है?
- A.आवास का ह्रास और विखंडन
- B.सह विलुप्ति
- C.आक्रामक विदेशी जातियाँ
- D.अतिदोहन
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. आवास का ह्रास और विखंडन
व्याख्या
सही उत्तर A, आवास का ह्रास और विखंडन है। जब वन काटे जाते हैं, आर्द्रभूमियाँ सुखाई जाती हैं और घास के मैदान जोत लिए जाते हैं तो जातियों को आवश्यक स्थान नहीं मिलता, और जो टुकड़े बचते हैं वे प्रायः बड़े जीवों को संभालने या आबादियों के आपस में मिलने के लिए बहुत छोटे होते हैं।
विकल्प D, अतिदोहन दुष्ट चतुष्क का दूसरा सदस्य है और उसमें अत्यधिक मत्स्याखेट तथा खाल, सींग या हड्डी के लिए शिकार आते हैं। विकल्प C, आक्रामक विदेशी जातियाँ वे जीव हैं जो बाहर से आकर देशी जातियों को दबा देते हैं, जैसे जलाशयों में जलकुंभी। विकल्प B, सह विलुप्ति तब होती है जब कोई जाति समाप्त होकर उन जातियों को भी ले जाती है जो उस पर निर्भर थीं। चारों को मिलाकर दुष्ट चतुष्क कहा जाता है, और परीक्षक सूची भी पूछते हैं तथा यह भी कि इनमें पहला कौन है, इसलिए आवास के ह्रास को अग्रणी कारण के रूप में निश्चित कर लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वस्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण में क्या अंतर है?
स्वस्थाने संरक्षण किसी जाति की उसी स्थान पर रक्षा करता है जहाँ वह स्वाभाविक रूप से रहती है, अर्थात राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, जीवमंडल निचयों और पवित्र उपवनों के माध्यम से, जिससे जाति के साथ पूरा पारितंत्र भी बचता है। बहिःस्थाने संरक्षण उसे आवास से बाहर बचाता है, जैसे चिड़ियाघरों, वानस्पतिक उद्यानों, बीज बैंकों और जीन बैंकों में। स्वस्थाने उपाय श्रेष्ठ माना जाता है; बहिःस्थाने बचाव की दूसरी पंक्ति है।
कोई क्षेत्र जैव विविधता हॉटस्पॉट कब कहलाता है?
हॉटस्पॉट के लिए आवश्यक है कि वहाँ ऐसी जातियाँ बड़ी संख्या में हों जो कहीं और न मिलती हों, और साथ ही वह क्षेत्र गंभीर संकट में हो तथा उसकी अधिकांश मूल वनस्पति नष्ट हो चुकी हो। यह विचार नॉर्मन मायर्स ने 1988 में रखा था। भारत में चार हॉटस्पॉट फैले हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट के साथ श्रीलंका, और सुंडालैंड जिसमें निकोबार द्वीप समूह आता है।
राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य में क्या अंतर है?
राष्ट्रीय उद्यान की सीमाएँ कानून से निश्चित होती हैं और उसके भीतर मानव बस्ती, पशुचारण या निजी अधिकार की अनुमति नहीं होती। वन्यजीव अभयारण्य किसी विशेष जाति या जाति समूह के लिए घोषित होता है, उसकी सीमाएँ उतनी कठोर नहीं होतीं, और कुछ नियंत्रित मानव गतिविधियाँ चल सकती हैं यदि उनसे वन्यजीवों को हानि न हो। दोनों 1972 के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत स्वस्थाने संरक्षण के रूप हैं।
जीवमंडल निचय के तीन क्षेत्र कौन से हैं?
क्रोड़ क्षेत्र कानूनी रूप से संरक्षित और अछूता रहता है, जहाँ किसी मानव गतिविधि की अनुमति नहीं। बफर क्षेत्र उसके चारों ओर होता है और वहाँ शोध, शिक्षा तथा सीमित संसाधन उपयोग की अनुमति रहती है जिससे क्रोड़ को हानि न पहुँचे। संक्रमण क्षेत्र सबसे बाहरी है, जहाँ बस्तियाँ, खेती और स्थानीय लोगों की अन्य गतिविधियाँ चलती रहती हैं। यह रचना यूनेस्को के 1971 में आरंभ मानव और जीवमंडल कार्यक्रम से आई है।
जैव विविधता अभिसमय के उद्देश्य क्या हैं?
इसके तीन उद्देश्य हैं: जैव विविधता का संरक्षण, उसके घटकों का संपोषणीय उपयोग, और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों का न्यायसंगत तथा समान बँटवारा। यह 1992 में रियो डी जनेरियो में हुए पृथ्वी शिखर सम्मेलन में हस्ताक्षरित हुआ। इसके बाद दो प्रोटोकॉल आए, जैव सुरक्षा पर 2000 का कार्टाजेना प्रोटोकॉल और पहुँच तथा लाभ बँटवारे पर 2010 का नागोया प्रोटोकॉल।
स्रोत
- जीव विज्ञान (कक्षा 12), जैव विविधता एवं संरक्षण अध्याय — एनसीईआरटी
- समकालीन भारत दो (कक्षा 10), वन एवं वन्य जीव संसाधन अध्याय — एनसीईआरटी



