पर्यावरण प्रभाव आकलन: प्रक्रिया, श्रेणियां और प्राधिकरण
परीक्षा के लिए पर्यावरण प्रभाव आकलन के नोट्स: 2006 की अधिसूचना, श्रेणी ए और बी, मंजूरी के चार चरण, संबंधित प्राधिकरण और राष्ट्रीय हरित अधिकरण।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

पर्यावरण प्रभाव आकलन किसी प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरण पर संभावित प्रभावों का वह अध्ययन है, जो परियोजना आरंभ होने से पहले किया जाता है। इसका उद्देश्य निवारक है: बांध, खदान, राजमार्ग या सीमेंट संयंत्र अपने आसपास की भूमि, जल, वायु और लोगों को बदल देता है, और विधि यह अपेक्षा करती है कि पहली ईंट रखने से पहले उन परिवर्तनों का पूर्वानुमान किया जाए, उन्हें मापा जाए और उन्हें टाला या कम किया जाए। परीक्षा में इस विषय से पारिस्थितिकी के स्थान पर विधि और प्रक्रिया पूछी जाती है, इसलिए याद रखने योग्य तथ्य हैं मूल अधिनियम, अधिसूचना का वर्ष, परियोजनाओं की दो श्रेणियां, मंजूरी के चार चरण, प्रत्येक चरण का प्राधिकरण और अपील का मंच।
यह व्यवस्था कहां से आई
पर्यावरण आकलन को वैधानिक आवश्यकता बनाने वाला पहला देश संयुक्त राज्य अमेरिका था, जिसने 1969 में राष्ट्रीय पर्यावरण नीति अधिनियम बनाया। भारत में यह चलन 1978 और 1979 में आरंभ हुआ, जब नदी घाटी परियोजनाओं का पर्यावरणीय दृष्टि से प्रशासनिक स्तर पर पहली बार आकलन किया गया। यह कानूनी आवश्यकता 1994 की ईआईए अधिसूचना से बनी, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत जारी हुई। उस अधिसूचना का स्थान 2006 की ईआईए अधिसूचना ने लिया, जो आज प्रभावी है और जिसने परियोजनाओं को केंद्र और राज्य स्तर पर बांटकर पूरी प्रक्रिया का पुनर्गठन किया।
मूल अधिनियम महत्वपूर्ण है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 दिसंबर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद एक छत्र विधि के रूप में पारित हुआ, जिसने केंद्र सरकार को पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए सभी आवश्यक उपाय करने की व्यापक शक्ति दी। इसका आधार अनुच्छेद 48ए है, जो राज्य को पर्यावरण की रक्षा का निर्देश देता है, तथा अनुच्छेद 51ए(जी) है, जो इसे प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य बनाता है, और यह 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन में भारत द्वारा दी गई प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है।
श्रेणी ए और श्रेणी बी
| बिंदु | श्रेणी ए | श्रेणी बी |
|---|---|---|
| मूल्यांकन | केंद्र की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा | राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा |
| मंजूरी देने वाला | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय | राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण |
| स्क्रीनिंग | आवश्यक नहीं; प्रत्येक श्रेणी ए परियोजना के लिए मंजूरी अनिवार्य है | आवश्यक है, और उससे तय होता है कि परियोजना बी1 है या बी2 |
| ईआईए रिपोर्ट | सदैव आवश्यक | बी1 के लिए आवश्यक; बी2 को छूट |
यह विभाजन परियोजना के आकार और संभावित प्रभाव पर आधारित है। संरक्षित क्षेत्र, अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र, पर्यावरण संवेदी क्षेत्र के भीतर या निकट, अथवा किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय सीमा से दस किलोमीटर के भीतर की परियोजनाएं आकार कुछ भी हो, केंद्र स्तर पर ही निपटाई जाती हैं।
मंजूरी के चार चरण
- स्क्रीनिंग से तय होता है कि किसी श्रेणी बी परियोजना को पूर्ण आकलन चाहिए, जिससे वह बी1 बनती है, अथवा नहीं, जिससे वह बी2 बनती है।
- स्कोपिंग वह चरण है जिसमें विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति संदर्भ शर्तें जारी करती है, अर्थात उन विषयों की सूची जिन्हें आकलन में शामिल करना आवश्यक है।
- जन परामर्श के दो भाग हैं: परियोजना स्थल पर जन सुनवाई, जो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या संघ राज्यक्षेत्र की प्रदूषण नियंत्रण समिति कराती है, तथा अन्य हितधारकों से लिखित उत्तर। कुछ परियोजनाओं, जैसे बी2 परियोजनाएं, सिंचाई का विस्तार और अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र के भीतर की इकाइयां, को सुनवाई से छूट है।
- मूल्यांकन में समिति ईआईए रिपोर्ट और जन सुनवाई के अभिलेख की विस्तृत जांच करती है और मंजूरी देने या न देने की संस्तुति करती है। अंतिम निर्णय नियामक प्राधिकरण देता है, और स्वीकृत परियोजना को शर्तों के साथ पूर्व पर्यावरण मंजूरी मिलती है।
प्रक्रिया के केंद्र में दो दस्तावेज हैं: ईआईए रिपोर्ट, जिसमें वायु, जल, मृदा, ध्वनि, वनस्पति, जीव-जंतु और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार आंकड़े तथा प्रभावों का पूर्वानुमान रहता है, और पर्यावरण प्रबंधन योजना, जो शमन उपाय और परियोजना प्रस्तावक द्वारा की जाने वाली निगरानी तय करती है।
आकलन के प्रकार और विधियां
- त्वरित ईआईए में मानसून को छोड़कर एक ही ऋतु के आधार आंकड़े लिए जाते हैं और इसका उपयोग वहां होता है जहां शीघ्र आकलन पर्याप्त हो।
- व्यापक ईआईए में पूरे वर्ष की सभी ऋतुओं के आंकड़े लिए जाते हैं।
- सामरिक पर्यावरण आकलन इसी विचार को एक परियोजना के स्थान पर किसी नीति, योजना या कार्यक्रम पर लागू करता है।
- संचयी आकलन एक ही क्षेत्र की कई परियोजनाओं के सम्मिलित प्रभाव को देखता है, जैसे एक नदी पर बने बांधों की श्रृंखला।
- सामान्य विधियां हैं जांच सूची, आव्यूह विधि जिसमें लियोपोल्ड आव्यूह सर्वाधिक प्रसिद्ध है, नेटवर्क अथवा कारण-प्रभाव आरेख, और नक्शों का अध्यारोपण।
अपील और आलोचना
पर्यावरण मंजूरी देने या न देने के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष होती है, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 से बना और जिसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है। अधिकरण से अपेक्षा है कि वह यथासंभव छह मास में मामले निपटाए और वह सिविल प्रक्रिया संहिता से बंधा नहीं है, इसलिए वह सामान्य न्यायालय से तेज है। तटीय परियोजनाओं को तटीय नियमन क्षेत्र अधिसूचना के अंतर्गत अलग मंजूरी लेनी होती है।
भारतीय व्यवस्था की आलोचनाएं भी वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों में पूछी जाती हैं। रिपोर्ट उन सलाहकारों से बनवाई जाती है जिन्हें परियोजना प्रस्तावक भुगतान करता है, जिससे स्वतंत्रता पर प्रश्न उठता है; आधार आंकड़े कभी-कभी अपर्याप्त या नकल किए हुए होते हैं; जन सुनवाई कमजोर या छोड़ दी गई है; और निर्माण आरंभ होने के बाद दी गई मंजूरी, जिसे पश्चातवर्ती मंजूरी कहते हैं, को न्यायालयों ने विधि के निवारक उद्देश्य के विरुद्ध मानकर रद्द किया है।
परीक्षा की दृष्टि से
वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र इस विषय से पांच बातें पूछते हैं। पहला, वर्षों का मेल: अमेरिकी कानून 1969, मूल अधिनियम 1986, भारत की पहली अधिसूचना 1994 और प्रभावी अधिसूचना 2006। दूसरा, श्रेणी और प्राधिकरण का मेल, जिसमें जाल यह है कि श्रेणी बी को केंद्रीय मंत्रालय के सामने रख दिया जाए। तीसरा, चार चरणों का क्रम, जिसमें सबसे पसंदीदा प्रश्न यह है कि संदर्भ शर्तें किस चरण में बनती हैं। चौथा, जन सुनवाई कौन कराता है, जिसका उत्तर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है, मूल्यांकन समिति नहीं। पांचवां, अपील का मंच, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण है। वर्णनात्मक प्रश्नपत्र प्रक्रिया की कमियां पूछते हैं, जहां पश्चातवर्ती मंजूरी और सलाहकार के हितों का टकराव मानक बिंदु हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वैधानिक ईआईए वाला पहला देश | संयुक्त राज्य अमेरिका, राष्ट्रीय पर्यावरण नीति अधिनियम, 1969 |
|---|---|
| भारत में मूल अधिनियम | पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, धारा 3 |
| भारत की पहली ईआईए अधिसूचना | 1994 |
| प्रभावी अधिसूचना | ईआईए अधिसूचना, 2006 |
| श्रेणी ए की मंजूरी | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की संस्तुति पर |
| श्रेणी बी की मंजूरी | राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की संस्तुति पर |
| चार चरण | स्क्रीनिंग, स्कोपिंग, जन परामर्श, मूल्यांकन |
| संदर्भ शर्तें किस चरण में | स्कोपिंग चरण में |
| जन सुनवाई कराने वाला | राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या संघ राज्यक्षेत्र प्रदूषण नियंत्रण समिति |
| त्वरित ईआईए | मानसून छोड़कर एक ऋतु के आधार आंकड़े |
| व्यापक ईआईए | पूरे वर्ष की सभी ऋतुओं के आधार आंकड़े |
| अपील का मंच | राष्ट्रीय हरित अधिकरण, 2010 के अधिनियम से; प्रधान पीठ नई दिल्ली |
| सर्वाधिक प्रसिद्ध आव्यूह विधि | लियोपोल्ड आव्यूह |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 48ए नीति निर्देशक तत्व के रूप में और अनुच्छेद 51ए(जी) मूल कर्तव्य के रूप में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
पर्यावरण प्रभाव आकलन को वैधानिक आवश्यकता बनाने वाला पहला देश कौन था?
- A.ब्रिटेन
- B.संयुक्त राज्य अमेरिका
- C.स्वीडन
- D.भारत
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, संयुक्त राज्य अमेरिका है। 1969 का राष्ट्रीय पर्यावरण नीति अधिनियम, जो 1970 से प्रभावी हुआ, अमेरिकी संघीय सरकार की प्रत्येक एजेंसी से अपेक्षा करता था कि वह अपने किसी भी बड़े प्रस्तावित कार्य के पर्यावरणीय प्रभावों का विवरण तैयार करे, और इसी अपेक्षा को विश्व में पर्यावरण प्रभाव आकलन के कानूनी कर्तव्य के रूप में आरंभ माना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ब्रिटेन ने यूरोपीय समुदाय के निर्देशों के अंतर्गत बाद में यह व्यवस्था अपनाई। विकल्प C गलत है क्योंकि स्वीडन ने 1972 में स्टॉकहोम में मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आयोजित किया था, जो अलग घटना है और भ्रम का सामान्य कारण है। विकल्प D गलत है क्योंकि भारत ने 1978 में प्रशासनिक रूप से नदी घाटी परियोजनाओं का आकलन आरंभ किया और 1994 की अधिसूचना से इसे कानूनी बनाया।
भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना किस अधिनियम के अंतर्गत जारी की जाती है?
- A.वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- B.जल प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम, 1974
- C.पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
- D.वन संरक्षण अधिनियम, 1980
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 है। उस अधिनियम की धारा 3 केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार के लिए आवश्यक समझे जाने वाले सभी उपाय करने की शक्ति देती है, और 1994 तथा 2006 दोनों ईआईए अधिसूचनाएं उसी के अंतर्गत जारी हुईं। यह अधिनियम 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित हुआ और पर्यावरण नियमन की छत्र विधि है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1972 का वन्यजीव संरक्षण अधिनियम संरक्षित क्षेत्रों, प्रजातियों की अनुसूचियों और शिकार से संबंधित है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1974 के जल अधिनियम ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाए और वह बहिस्राव मानकों तथा संचालन सहमति से संबंधित है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1980 का वन संरक्षण अधिनियम वन भूमि के अन्य उपयोग में परिवर्तन को नियंत्रित करता है।
भारत में वर्तमान में प्रभावी पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना किस वर्ष जारी हुई?
- A.1986
- B.1994
- C.2006
- D.2010
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, 2006 है। 2006 की ईआईए अधिसूचना ने 1994 की पूर्व अधिसूचना का स्थान लिया और पूरी मंजूरी प्रक्रिया का पुनर्गठन किया, मुख्यतः परियोजनाओं को श्रेणी ए, जिसका मूल्यांकन और मंजूरी केंद्र स्तर पर होती है, तथा श्रेणी बी, जिसका मूल्यांकन और मंजूरी राज्य स्तर पर होती है, में बांटकर, और स्क्रीनिंग, स्कोपिंग, जन परामर्श तथा मूल्यांकन के चार चरण तय करके। विकल्प A गलत है क्योंकि 1986 मूल अधिनियम का वर्ष है, किसी अधिसूचना का नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि 1994 की अधिसूचना, जिसने भारत में आकलन पहली बार अनिवार्य किया, अब प्रतिस्थापित हो चुकी है। विकल्प D गलत है क्योंकि 2010 राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम का वर्ष है, जिसने मंजूरी के विरुद्ध अपील का मंच बनाया। परीक्षा में 1986, 1994, 2006 और 2010 इन चार वर्षों को एक साथ याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रश्न इनमें से किसी भी वर्ष को अधिसूचना, अधिनियम या अधिकरण से जोड़कर पूछा जाता है।
श्रेणी ए की परियोजना को पर्यावरण मंजूरी कौन देता है?
- A.राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण
- B.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- C.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- D.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय है। 2006 की अधिसूचना के अनुसार श्रेणी ए की परियोजना का मूल्यांकन केंद्र पर गठित विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति करती है और उसी समिति की संस्तुति पर मंत्रालय पूर्व पर्यावरण मंजूरी देता या अस्वीकार करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण श्रेणी बी की परियोजनाओं को मंजूरी देता है, राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की संस्तुति पर; दोनों श्रेणियों को आपस में बदल देना इस प्रश्न की सबसे आम भूल है। विकल्प C गलत है क्योंकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मानक बनाता और प्रदूषण की निगरानी करता है, पर्यावरण मंजूरी नहीं देता। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रीय हरित अधिकरण अपीलीय और न्यायनिर्णायक निकाय है, जो दी गई या अस्वीकृत मंजूरी को चुनौती सुनता है।
पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया के चरणों का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन है?
- A.स्कोपिंग, स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, जन परामर्श
- B.स्क्रीनिंग, स्कोपिंग, जन परामर्श, मूल्यांकन
- C.जन परामर्श, स्क्रीनिंग, स्कोपिंग, मूल्यांकन
- D.स्क्रीनिंग, जन परामर्श, स्कोपिंग, मूल्यांकन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, स्क्रीनिंग, स्कोपिंग, जन परामर्श, मूल्यांकन है। स्क्रीनिंग सबसे पहले आती है और तय करती है कि किसी श्रेणी बी परियोजना को पूर्ण आकलन चाहिए, जिससे वह बी1 बनती है, या नहीं, जिससे वह बी2 बनती है। इसके बाद स्कोपिंग आती है, जिसमें मूल्यांकन समिति संदर्भ शर्तें जारी करती है। तीसरा चरण जन परामर्श है, जिसमें स्थल पर जन सुनवाई और लिखित उत्तर सम्मिलित हैं। अंत में मूल्यांकन होता है, जब समिति रिपोर्ट और सुनवाई के अभिलेख की जांच कर संस्तुति देती है। विकल्प A गलत है क्योंकि स्कोपिंग स्क्रीनिंग से पहले नहीं हो सकती। विकल्प C गलत है क्योंकि रिपोर्ट बनने से पहले जन सुनवाई संभव नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि परामर्श स्कोपिंग के बाद ही होता है, क्योंकि सुनवाई संदर्भ शर्तों के अनुसार बनी प्रारूप रिपोर्ट पर होती है।
ईआईए प्रक्रिया के किस चरण में संदर्भ शर्तें जारी की जाती हैं?
- A.स्क्रीनिंग
- B.स्कोपिंग
- C.जन परामर्श
- D.मूल्यांकन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, स्कोपिंग है। स्कोपिंग वह चरण है जिसमें विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति, या श्रेणी बी1 की परियोजना के लिए राज्य समिति, संदर्भ शर्तें तय करती है: उन विषयों, अध्ययन क्षेत्र, आंकड़ों की ऋतुओं और विशिष्ट चिंताओं की विस्तृत सूची जिन्हें आकलन में शामिल करना आवश्यक है। सलाहकार उसी सूची के अनुसार ईआईए रिपोर्ट बनाता है, इसलिए अपूर्ण संदर्भ शर्तें आगे की पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर देती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि स्क्रीनिंग केवल श्रेणी बी की परियोजनाओं को बी1 और बी2 में बांटती है और कोई शर्तें जारी नहीं करती। विकल्प C गलत है क्योंकि जन परामर्श उस प्रारूप रिपोर्ट पर होता है जो पहले से तैयार हो चुकी होती है। विकल्प D गलत है क्योंकि मूल्यांकन उस रिपोर्ट की अंतिम जांच है।
ईआईए प्रक्रिया के जन परामर्श चरण में जन सुनवाई कौन कराता है?
- A.विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति
- B.राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- C.केवल जिला कलेक्टर
- D.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है। 2006 की अधिसूचना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अथवा संघ राज्यक्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण समिति, को यह उत्तरदायित्व देती है कि वह परियोजना स्थल पर या उसके निकट जन सुनवाई कराए, कार्यवाही का अभिलेख रखे और वह अभिलेख मूल्यांकन समिति को भेजे। विकल्प A गलत है क्योंकि विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति संदर्भ शर्तें जारी करती है और बाद में रिपोर्ट का मूल्यांकन करती है, सुनवाई नहीं कराती। विकल्प C गलत है क्योंकि जिला प्रशासन सहयोग करता है और कोई वरिष्ठ जिला अधिकारी कार्यवाही की अध्यक्षता करता है, परंतु सुनवाई कराने का उत्तरदायित्व बोर्ड का है। विकल्प D गलत है क्योंकि मंत्रालय श्रेणी ए की परियोजना पर अंतिम निर्णय देता है और परियोजना स्थलों पर सुनवाई नहीं कराता। इसलिए प्रश्न का सूत्र यह है कि संदर्भ शर्तें समिति जारी करती है, सुनवाई बोर्ड कराता है और अंतिम निर्णय नियामक प्राधिकरण देता है, और इन तीन कामों को तीन अलग संस्थाओं से जोड़कर याद रखना चाहिए।
2006 की ईआईए अधिसूचना के अंतर्गत किस श्रेणी की परियोजनाओं के लिए स्क्रीनिंग आवश्यक नहीं है?
- A.श्रेणी ए
- B.श्रेणी बी1
- C.श्रेणी बी2
- D.सभी श्रेणियों के लिए स्क्रीनिंग आवश्यक है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, श्रेणी ए है। श्रेणी ए की परियोजना के लिए केंद्र सरकार से पूर्व पर्यावरण मंजूरी इसी तथ्य से अनिवार्य है कि वह अनुसूची में सूचीबद्ध है, इसलिए स्क्रीनिंग चरण के लिए तय करने योग्य कुछ नहीं बचता और प्रक्रिया सीधे स्कोपिंग से आरंभ होती है। विकल्प B और C गलत हैं क्योंकि स्क्रीनिंग ही वह चरण है जो श्रेणी बी की परियोजनाओं को बी1, जिन्हें पूर्ण ईआईए रिपोर्ट बनानी होती है, और बी2, जिन्हें नहीं बनानी होती, में बांटता है; बी1 या बी2 का वर्गीकरण स्क्रीनिंग का परिणाम है और उसके बिना हो नहीं सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि यह अधिसूचना की संरचना के विरुद्ध है, जो श्रेणी ए को स्क्रीनिंग से स्पष्ट रूप से मुक्त रखती है। इस प्रश्न के कई रूप पूछे जाते हैं, परंतु यह एक सूत्र याद रखने से सब हल हो जाते हैं कि स्क्रीनिंग केवल श्रेणी बी की परियोजनाओं के लिए होती है और श्रेणी ए की प्रक्रिया सीधे स्कोपिंग से आरंभ होती है।
पर्यावरण मंजूरी दिए जाने के विरुद्ध अपील किस मंच पर की जाती है?
- A.केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
- B.राष्ट्रीय हरित अधिकरण
- C.राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
- D.केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, राष्ट्रीय हरित अधिकरण है। अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 से हुई, उसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है, और वह पर्यावरण मंजूरी दिए जाने या अस्वीकार किए जाने के विरुद्ध अपील तथा अन्य पर्यावरण विधियों के विवाद सुनता है। वह सिविल प्रक्रिया संहिता से बंधा नहीं है और उससे यथासंभव छह मास में निर्णय की अपेक्षा की जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तकनीकी और नियामक निकाय है, जो मानक बनाता और प्रदूषण की निगरानी करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, जो जैव विविधता अधिनियम 2002 से बना, जैविक संसाधनों की पहुंच और लाभ साझेदारी देखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण केवल चिड़ियाघरों को मान्यता देता और उनका नियमन करता है।
त्वरित ईआईए व्यापक ईआईए से मुख्यतः किस कारण भिन्न है?
- A.इसमें मानसून छोड़कर एक ही ऋतु के आधार आंकड़े लिए जाते हैं
- B.इसमें पर्यावरण प्रबंधन योजना की आवश्यकता नहीं होती
- C.यह सलाहकार के स्थान पर सरकार द्वारा तैयार की जाती है
- D.यह केवल संरक्षित क्षेत्रों के भीतर की परियोजनाओं पर लागू होती है
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A है। त्वरित आकलन मानसून के अतिरिक्त किसी एक ऋतु में एकत्र किए गए आधार आंकड़ों पर आधारित होता है, जिससे अध्ययन शीघ्र पूरा हो जाता है, जबकि व्यापक आकलन पूरे वर्ष की सभी ऋतुओं के आंकड़े लेता है और इसलिए वायु गुणवत्ता, जल प्रवाह तथा जैविक गतिविधि में ऋतुवार अंतर को पकड़ पाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पर्यावरण प्रबंधन योजना, जो शमन और निगरानी के उपाय बताती है, प्रत्येक आकलन रिपोर्ट का आवश्यक भाग है, चाहे वह त्वरित हो या व्यापक। विकल्प C गलत है क्योंकि दोनों स्थितियों में रिपोर्ट परियोजना प्रस्तावक द्वारा नियुक्त मान्यताप्राप्त सलाहकार बनाता है, जो व्यवस्था की स्थायी आलोचनाओं में से एक है। विकल्प D गलत है क्योंकि संरक्षित क्षेत्रों के भीतर या निकट की परियोजनाएं केंद्र स्तर पर निपटती हैं और उनके लिए सामान्यतः विस्तृत अध्ययन चाहिए।
पर्यावरण प्रभाव आकलन में लियोपोल्ड आव्यूह का उपयोग किस लिए किया जाता है?
- A.जल में प्रदूषकों की सांद्रता मापने के लिए
- B.परियोजना की गतिविधियों और पर्यावरणीय घटकों के बीच प्रभाव की पहचान और श्रेणीकरण के लिए
- C.शमन उपायों की लागत का अनुमान लगाने के लिए
- D.पर्यावरण संवेदी क्षेत्रों की सीमाएं अंकित करने के लिए
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B है। लियोपोल्ड आव्यूह आव्यूह विधियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध है: परियोजना की गतिविधियां एक अक्ष पर और पर्यावरण के घटक दूसरे अक्ष पर रखे जाते हैं, और जहां कोई गतिविधि किसी घटक से मिलती है वहां उस कोष्ठ में प्रभाव की तीव्रता और महत्व अंकित किया जाता है। इससे यह चित्र शीघ्र स्पष्ट हो जाता है कि कौन सी गतिविधियां सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं और कौन से पर्यावरणीय घटक सबसे अधिक संकट में हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रदूषकों की सांद्रता प्रयोगशाला विश्लेषण और उपकरणों से मापी जाती है और वह आधार आंकड़ों का भाग है। विकल्प C गलत है क्योंकि लागत का अनुमान पर्यावरण प्रबंधन योजना और परियोजना अर्थशास्त्र का विषय है। विकल्प D गलत है क्योंकि पर्यावरण संवेदी क्षेत्रों की सीमाएं सरकार अधिसूचित करती है और उनका अंकन अध्यारोपण तथा भौगोलिक सूचना तकनीकों का कार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पर्यावरण प्रभाव आकलन सरल शब्दों में क्या है?
यह वह अध्ययन है जो किसी परियोजना को आरंभ करने की अनुमति देने से पहले किया जाता है, ताकि पता चले कि वह आसपास की वायु, जल, मृदा, वन, वन्यजीव और लोगों को कैसे प्रभावित करेगी। अध्ययन संभावित हानि का पूर्वानुमान करता है, उसे टालने या कम करने के उपाय सुझाता है और प्रबंधन योजना देता है, जिसके आधार पर सरकार तय करती है कि परियोजना को किस शर्त पर मंजूरी दी जाए।
ईआईए अधिसूचना किस अधिनियम के अंतर्गत जारी होती है?
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के अंतर्गत, जो केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता की रक्षा और सुधार के लिए सभी आवश्यक उपाय करने की शक्ति देती है। इसके अंतर्गत पहली अधिसूचना 1994 में आई और उसका स्थान 2006 की ईआईए अधिसूचना ने लिया, जो आज प्रभावी है।
श्रेणी ए और श्रेणी बी परियोजनाओं में क्या अंतर है?
श्रेणी ए की परियोजनाएं बड़ी या अधिक संवेदनशील होती हैं, उनका मूल्यांकन केंद्र की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति करती है और मंजूरी पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देता है; मंजूरी अनिवार्य है और स्क्रीनिंग की आवश्यकता नहीं होती। श्रेणी बी का मूल्यांकन राज्य समिति करती है और मंजूरी राज्य प्राधिकरण देता है, और स्क्रीनिंग उन्हें बी1 तथा बी2 में बांटती है।
संदर्भ शर्तें किस चरण में जारी होती हैं?
स्कोपिंग चरण में। आवेदन करने के बाद विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति या उसकी राज्य समिति संदर्भ शर्तें तय करती है, अर्थात उन विषयों, क्षेत्रों और आंकड़ों की विस्तृत सूची जिन्हें आकलन में शामिल करना आवश्यक है। सलाहकार उसी सूची के अनुसार ईआईए रिपोर्ट तैयार करता है।
ईआईए प्रक्रिया में जन सुनवाई कौन कराता है?
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अथवा संघ राज्यक्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण समिति, परियोजना स्थल पर या उसके निकट जन सुनवाई कराता है, और उसकी कार्यवाही का अभिलेख मूल्यांकन समिति को भेजा जाता है। अन्य इच्छुक व्यक्तियों से मिले लिखित उत्तर जन परामर्श चरण का दूसरा भाग होते हैं।
पर्यावरण मंजूरी के विरुद्ध अपील कहां की जा सकती है?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण के समक्ष, जो राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत बना और जिसकी प्रधान पीठ नई दिल्ली में है। अधिकरण पर्यावरण विधियों से जुड़े विवाद सुनता है, सिविल प्रक्रिया संहिता से बंधा नहीं है और उससे यथासंभव छह मास में निर्णय की अपेक्षा की जाती है।
स्रोत
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 — इंडिया कोड, भारत सरकार





