संकटग्रस्त प्रजातियां और आईयूसीएन लाल सूची: श्रेणियां और प्रश्न
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संकटग्रस्त प्रजातियों पर नोट्स: आईयूसीएन लाल सूची की नौ श्रेणियां, भारत की प्रजातियां तथा आवास, वन्यजीव कानून और संरक्षण परियोजनाएं।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

पर्यावरण और पारिस्थितिकी के हर प्रश्नपत्र में कम से कम एक प्रश्न उन प्रजातियों पर आता है जो लुप्त होने के कगार पर हैं, और उस सूची पर आता है जो इस खतरे को दर्ज करती है। आईयूसीएन लाल सूची पौधों और जंतुओं की संरक्षण स्थिति का विश्व स्तर पर स्वीकृत रजिस्टर है, जबकि भारत अपनी संकटग्रस्त वन्यजीव संपदा की रक्षा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 और प्रजाति पुनर्वास परियोजनाओं की एक श्रृंखला के माध्यम से करता है। यह नोट पूरे विषय को एक जगह लाता है: लाल सूची कैसे काम करती है, उसकी हर श्रेणी का अर्थ क्या है, भारत की कौन सी प्रजातियां संकटग्रस्त श्रेणियों में हैं, वे कहां बची हैं, और कौन से कानून तथा अंतरराष्ट्रीय अभिसमय उन्हें बचाते हैं।
आईयूसीएन और उसकी लाल सूची
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की स्थापना 1948 में हुई थी और इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लांड में है। इसने संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची 1964 में शुरू की, और आज यही सूची विलुप्ति के खतरे को मापने का सबसे अधिक प्रयुक्त पैमाना है। जिन खंडों में ये आकलन छपते हैं उन्हें आम भाषा में रेड डाटा बुक कहा जाता है। किसी प्रजाति का आकलन उसकी आबादी के आकार, आबादी के घटने की गति, उसके फैलाव के क्षेत्र और उस पर पड़ रहे खतरों के आधार पर किया जाता है, और फिर उसे नौ श्रेणियों में से किसी एक में रखा जाता है। यह आकलन खतरे का बयान है, कोई कानूनी आदेश नहीं; असली संरक्षण देश के कानूनों से मिलता है, जैसे भारत का 1972 का अधिनियम।
लाल सूची की नौ श्रेणियां
| श्रेणी | संकेत | अर्थ |
|---|---|---|
| विलुप्त | EX | प्रजाति का कोई भी जीव कहीं शेष नहीं |
| वन्य अवस्था में विलुप्त | EW | केवल कैद या संवर्धन में जीवित |
| गंभीर रूप से संकटग्रस्त | CR | वन्य अवस्था में विलुप्ति का अत्यधिक खतरा |
| संकटग्रस्त | EN | विलुप्ति का बहुत अधिक खतरा |
| संवेदनशील | VU | विलुप्ति का अधिक खतरा |
| संकट के निकट | NT | संकटग्रस्त श्रेणी के करीब पहुंचती हुई |
| कम चिंतनीय | LC | व्यापक और प्रचुर संख्या में |
| आंकड़ों की कमी | DD | खतरा आंकने के लिए जानकारी पर्याप्त नहीं |
| अमूल्यांकित | NE | अभी तक आकलन नहीं हुआ |
गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और संवेदनशील, इन तीनों श्रेणियों को मिलाकर संकटग्रस्त प्रजातियां कहा जाता है। विलुप्त से लेकर कम चिंतनीय तक का क्रम याद रखिए; एक आम जाल यह है कि संकट के निकट श्रेणी को भी संकटग्रस्त मान लिया जाता है, जबकि वह उसमें नहीं आती।
प्रजातियां संकट में क्यों आती हैं
- खेती, खनन, बांधों, सड़कों और बस्तियों से आवास का नष्ट होना और टुकड़ों में बंट जाना।
- अवैध शिकार तथा खाल, सींग, हाथीदांत, हड्डी और जीवित पालतू जीवों का गैरकानूनी व्यापार।
- प्रदूषण और विषाक्तता; पशुओं की दवा डाइक्लोफेनाक, जिस पर भारत में 2006 में पशु चिकित्सा प्रयोग हेतु रोक लगी, ने देश के अधिकांश गिद्ध समाप्त कर दिए।
- लैंटाना और जलकुंभी जैसी बाहरी आक्रामक प्रजातियां, जो देशी पौधों को दबा देती हैं।
- अत्यधिक मछली पकड़ना, अति चराई और औषधीय पौधों का सीमा से अधिक संग्रह।
- जलवायु परिवर्तन, जो बर्फ, वर्षा और वन की उन पट्टियों को खिसका देता है जिन पर प्रजाति निर्भर है।
भारत का कानूनी कवच
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 इस ढांचे की रीढ़ है। यह संरक्षित प्रजातियों को अनुसूचियों में रखता है, और अनुसूची I में सबसे कड़ा संरक्षण तथा सबसे कठोर दंड का प्रावधान है; बाघ, एशियाई सिंह, एक सींग वाला गैंडा, हिम तेंदुआ, भारतीय जंगली गधा और सोन चिरैया सभी अनुसूची I के जीव हैं। यही अधिनियम राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की व्यवस्था भी करता है। इसके साथ वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 खड़ा है, जो वन भूमि को बिना स्वीकृति अन्य कार्यों में बदलने से रोकता है, और जैव विविधता अधिनियम, 2002, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण चेन्नई से काम करता है।
प्रजाति संरक्षण परियोजनाएं
| परियोजना | आरंभ | प्रजाति |
|---|---|---|
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 | बाघ, बाघ आरक्षित क्षेत्रों के माध्यम से |
| मगरमच्छ संरक्षण परियोजना | 1975 | घड़ियाल, मगर और खारे पानी का मगरमच्छ |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 | एशियाई हाथी और उसके गलियारे |
| प्रोजेक्ट स्नो लेपर्ड | 2009 | ऊंचे हिमालय का हिम तेंदुआ |
प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ और जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान इसके पहले आरक्षित क्षेत्रों में था; इसी दौर में बाघ को भारत का राष्ट्रीय पशु बनाया गया। हाथी को 2010 में राष्ट्रीय धरोहर पशु और गंगा नदी की डॉल्फिन को 2009 में राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया। 1972 के अधिनियम में 2006 के संशोधन से बने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के पास बाघ आरक्षित क्षेत्रों की निगरानी है।
भारत की संकटग्रस्त प्रजातियां कहां बची हैं
| प्रजाति | मुख्य ठिकाना |
|---|---|
| एशियाई सिंह | गिर राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात |
| एक सींग वाला गैंडा | काजीरंगा, असम |
| भारतीय जंगली गधा | जंगली गधा अभयारण्य, छोटा रण, कच्छ |
| हंगुल या कश्मीरी बारहसिंगा | दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान |
| सिंह पुच्छ मकाक | साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान, केरल |
| नीलगिरि तहर | इरविकुलम राष्ट्रीय उद्यान, केरल |
| सोन चिरैया | मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान |
| हिम तेंदुआ | हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, लद्दाख |
| ऑलिव रिडले कछुआ | गहिरमाथा तट, ओडिशा |
| लाल पांडा | सिंगालीला और खंगचेंदजोंगा, पूर्वी हिमालय |
भारत ने प्रजातियां खोई भी हैं। एशियाई चीते को 1952 में देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया था, और गुलाबी सिर वाली बत्तख 1940 के दशक के बाद जंगल में कहीं दर्ज नहीं हुई।
अंतरराष्ट्रीय ढांचा
वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय, जिसे साइटीस कहते हैं, पर 1973 में वाशिंगटन में हस्ताक्षर हुए और यह 1975 में लागू हुआ; इसकी अनुसूची एक सबसे अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों के व्यापारिक व्यापार पर रोक लगाती है। प्रवासी प्रजातियों पर बॉन अभिसमय 1979 में अपनाया गया। आर्द्रभूमि पर रामसर अभिसमय 1971 में ईरान के रामसर शहर में हुआ, और जैव विविधता अभिसमय 1992 के रियो पृथ्वी सम्मेलन में खुला। सतत विकास लक्ष्यों में एसडीजी 15 थल पर जीवन है, जो जैव विविधता की हानि रोकने की बात करता है, जबकि एसडीजी 14 जल के नीचे जीवन है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से चार चीजें पूछी जाती हैं। पहली, लाल सूची की श्रेणियों का क्रम और यह तथ्य कि केवल CR, EN और VU ही संकटग्रस्त मानी जाती हैं। दूसरी, प्रजाति और आवास के जोड़े: जंगली गधा और कच्छ का रण, हंगुल और दाचीगाम, सिंह पुच्छ मकाक और साइलेंट वैली, एशियाई सिंह और गिर। तीसरी, परियोजनाओं तथा अधिनियमों के वर्ष, जिनमें प्रोजेक्ट टाइगर 1973 और प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 बार बार पूछे जाते हैं, साथ ही 1972 के अधिनियम की अनुसूची I। चौथी, अभिसमय और उनके नगर, जहां साइटीस 1973 वाशिंगटन और रामसर 1971 ईरान सबसे बड़े जाल हैं, क्योंकि अभ्यर्थी हस्ताक्षर के वर्ष और लागू होने के वर्ष में भ्रमित हो जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| आईयूसीएन की स्थापना | 1948, मुख्यालय ग्लांड, स्विट्जरलैंड |
|---|---|
| लाल सूची का आरंभ | 1964; प्रकाशित खंड रेड डाटा बुक कहलाते हैं |
| लाल सूची की श्रेणियां | नौ, विलुप्त से अमूल्यांकित तक |
| संकटग्रस्त श्रेणियां | गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और संवेदनशील |
| भारत में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण | वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 में आरंभ |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 में आरंभ |
| साइटीस | 1973 में वाशिंगटन में हस्ताक्षर, 1975 से लागू |
| चीता | 1952 में भारत में विलुप्त घोषित |
| राष्ट्रीय जलीय जीव | गंगा नदी की डॉल्फिन, 2009 में घोषित |
| राष्ट्रीय धरोहर पशु | हाथी, 2010 में घोषित |
| थल और जैव विविधता से जुड़ा लक्ष्य | एसडीजी 15, थल पर जीवन |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के बाद भारत की पहली वन्यजीव संरक्षण परियोजना का नाम क्या था?
- A.गिर
- B.टाइगर
- C.गैंडा
- D.हंगुल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टाइगर
व्याख्या
सही उत्तर B, टाइगर है। प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ, अर्थात वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम लागू होने के अगले ही वर्ष, और यह भारत की पहली प्रजाति पुनर्वास परियोजना थी। इसकी शुरुआत कुछ ही आरक्षित क्षेत्रों से हुई, जिनमें जिम कॉर्बेट शामिल था, और यह इस सिद्धांत पर चलती है कि कड़ाई से संरक्षित केंद्र के चारों ओर बफर क्षेत्र हो जिसमें नियंत्रित उपयोग की छूट रहे। विकल्प A गलत है क्योंकि गिर गुजरात का वह वन है जहां एशियाई सिंह रहते हैं, यह राष्ट्रीय उद्यान है, किसी परियोजना का नाम नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि असम और बंगाल के एक सींग वाले गैंडे के लिए कार्यक्रम बहुत बाद में आया। विकल्प D गलत है क्योंकि दाचीगाम के हंगुल के लिए राज्य स्तरीय प्रयास हैं, वह पहली राष्ट्रीय परियोजना कभी नहीं थी।
संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची प्रकाशित करने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ का मुख्यालय किस देश में है?
- A.भारत
- B.स्विट्जरलैंड
- C.केन्या
- D.संयुक्त राज्य अमेरिका
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्विट्जरलैंड
व्याख्या
सही उत्तर B, स्विट्जरलैंड है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की स्थापना 1948 में हुई और यह स्विट्जरलैंड के ग्लांड नामक कस्बे से काम करता है, जो जिनेवा के पास है और जहां कई पर्यावरण संस्थाओं के कार्यालय हैं। इसने संकटग्रस्त प्रजातियों की लाल सूची 1964 में आरंभ की और आज भी उसका संरक्षक है। विकल्प A गलत है क्योंकि भारत इसका सदस्य देश है और यहां इसका देश कार्यालय है, पर विश्व मुख्यालय यहां कभी नहीं रहा। विकल्प C गलत है क्योंकि केन्या के नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम का मुख्यालय है, जिसे अभ्यर्थी अकसर आईयूसीएन समझ बैठते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि इस विषय में वाशिंगटन 1973 में साइटीस पर हस्ताक्षर के कारण याद रखा जाता है, संघ के कारण नहीं। परीक्षा में इस संस्था से जुड़े तीन तथ्य पर्याप्त हैं: स्थापना का वर्ष 1948, मुख्यालय ग्लांड तथा लाल सूची का आरंभ 1964, और इन्हीं तीनों में से कोई एक पूछा जाता है।
एक सींग वाला गैंडा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की किस अनुसूची में सूचीबद्ध है?
- A.II
- B.IV
- C.III
- D.I
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. I
व्याख्या
सही उत्तर D, अनुसूची I है। असम के काजीरंगा और मानस का एक सींग वाला गैंडा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में रखा गया है, जो सर्वोच्च संरक्षण देती है और जिसमें शिकार या व्यापार पर सबसे कठोर दंड का प्रावधान है। बाघ, एशियाई सिंह, हिम तेंदुआ, भारतीय जंगली गधा और सोन चिरैया भी इसी अनुसूची में हैं। विकल्प A और C गलत हैं क्योंकि निचली अनुसूचियां उन जीवों के लिए थीं जिन्हें संरक्षण तो चाहिए पर सर्वोच्च स्तर का नहीं, और इतने भारी शिकार दबाव वाला कोई बड़ा स्तनधारी वहां नहीं रखा जाता। विकल्प B भी इसी कारण गलत है। परीक्षा में सरल नियम याद रखें कि भारत के सबसे संकटग्रस्त और सर्वाधिक शिकार किए जाने वाले जीव अनुसूची I में आते हैं।
आईयूसीएन लाल सूची की निम्नलिखित में से कौन सी श्रेणी संकटग्रस्त श्रेणी की तुलना में कम खतरे को दर्शाती है?
- A.गंभीर रूप से संकटग्रस्त
- B.संवेदनशील
- C.वन्य अवस्था में विलुप्त
- D.विलुप्त
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. संवेदनशील
व्याख्या
सही उत्तर B, संवेदनशील है। लाल सूची खतरे को एक सीढ़ी के रूप में सजाती है, और तीन संकटग्रस्त श्रेणियां घटते क्रम में गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त तथा संवेदनशील हैं। इसलिए संवेदनशील प्रजाति पर वन्य अवस्था में विलुप्ति का खतरा अधिक तो है, पर संकटग्रस्त प्रजाति से कम है। विकल्प A गलत है क्योंकि गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी संकटग्रस्त से ऊपर है और वन्य अवस्था से लुप्त होने से पहले की अंतिम सीढ़ी है। विकल्प C गलत है क्योंकि वन्य अवस्था में विलुप्त का अर्थ है कि प्रजाति केवल कैद या संवर्धन में बची है, जो किसी भी संकटग्रस्त श्रेणी से बुरी स्थिति है। विकल्प D गलत है क्योंकि विलुप्त सीढ़ी का अंतिम पायदान है, जहां कहीं कोई जीव शेष नहीं रहता। परीक्षा की दृष्टि से इस सीढ़ी को एक बार क्रम में याद कर लेना सबसे अच्छा है, क्योंकि प्रश्न प्रायः यही पूछते हैं कि कौन सी श्रेणी ऊपर है और कौन सी नीचे, और तब उत्तर बिना सोचे मिल जाता है।
निम्नलिखित में से किसे जंगली गधा अभयारण्य घोषित किया गया है?
- A.लद्दाख
- B.सुंदरबन
- C.स्पीति घाटी
- D.कच्छ का रण
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कच्छ का रण
व्याख्या
सही उत्तर D, कच्छ का रण है। जंगली गधा अभयारण्य गुजरात के छोटे रण में है और यही भारतीय जंगली गधे, जिसे स्थानीय भाषा में घुड़खर कहते हैं, का अंतिम ठिकाना है; यह अनुसूची I का जीव है और नमकीन रेगिस्तान में उभरे घास के टापुओं पर चरता है, जिन्हें बेट कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में कियांग नामक तिब्बती जंगली गधा मिलता है, पर जंगली गधा अभयारण्य वहां नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि पश्चिम बंगाल का सुंदरबन मैंग्रोव क्षेत्र है और रॉयल बंगाल टाइगर तथा खारे पानी के मगरमच्छ के लिए प्रसिद्ध है। विकल्प C गलत है क्योंकि हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी हिम तेंदुए और आइबेक्स का क्षेत्र है। घुड़खर को गुजरात से जोड़ लीजिए, प्रश्न हल है।
भारत में चीते को किस वर्ष आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था?
- A.1947
- B.1952
- C.1972
- D.1984
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1952
व्याख्या
सही उत्तर B, 1952 है। एशियाई चीता कभी मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के खुले घास के मैदानों और झाड़ वनों में शिकार करता था, राजा महाराजा उसे काले हिरण के शिकार के लिए सधाते थे, और शिकार तथा घास के मैदानों के हल के नीचे आ जाने से वह समाप्त हो गया। सरकार ने 1952 में उसे देश में विलुप्त घोषित किया, जिससे वह आधुनिक काल में भारत से लुप्त हुआ एकमात्र बड़ा स्तनधारी बन गया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1947 स्वतंत्रता का वर्ष है और इस घोषणा से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1972 वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम का वर्ष है, जो याद रखने योग्य तो है पर अलग है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1984 अन्य पर्यावरणीय घटनाओं का वर्ष है। परीक्षक 1952 के साथ 1972 इसी परख के लिए रखते हैं।
साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान कहां स्थित है?
- A.तमिलनाडु
- B.केरल
- C.ओडिशा
- D.छत्तीसगढ़
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केरल
व्याख्या
सही उत्तर B, केरल है। साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान केरल के पलक्कड़ जिले में, पश्चिमी घाट की नीलगिरि पहाड़ियों में है, और यह देश के बचे हुए अछूते उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों में से एक की रक्षा करता है। यह सिंह पुच्छ मकाक का गढ़ माना जाता है, जो केवल पश्चिमी घाट में मिलने वाला संकटग्रस्त वानर है, और एक लंबे जन आंदोलन के बाद इसे जल विद्युत परियोजना से बचाकर राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। विकल्प A गलत है क्योंकि तमिलनाडु में मुदुमलई और मुकुर्थी हैं, यद्यपि नीलगिरि क्षेत्र वह भी साझा करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि ओडिशा सिमलीपाल और गहिरमाथा कछुआ तट का राज्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि छत्तीसगढ़ में इंद्रावती और कांगेर घाटी हैं। साइलेंट वैली को केरल और सिंह पुच्छ मकाक के साथ जोड़कर याद रखिए, क्योंकि परीक्षक इसी उद्यान के साथ पश्चिमी घाट के अन्य राज्यों के विकल्प रखकर अभ्यर्थी को भटकाने का प्रयास करते हैं।
वन्य जीवों और वनस्पतियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी अभिसमय, साइटीस, किस वर्ष लागू हुआ?
- A.1971
- B.1973
- C.1975
- D.1992
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1975
व्याख्या
सही उत्तर C, 1975 है। साइटीस का प्रारूप बनाकर उस पर 1973 में वाशिंगटन में हस्ताक्षर हुए थे, पर कोई संधि सदस्य देशों पर तभी बाध्यकारी होती है जब पर्याप्त देश उसका अनुसमर्थन कर दें, और वह स्थिति 1975 में आई। यह तीन अनुसूचियों के माध्यम से सीमा पार व्यापार को नियंत्रित करता है, जिनमें अनुसूची एक बाघ और गैंडे जैसी सर्वाधिक संकटग्रस्त प्रजातियों के व्यापारिक व्यापार पर रोक लगाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1971 ईरान में हुए रामसर आर्द्रभूमि अभिसमय का वर्ष है। विकल्प B इस प्रश्न में गलत है क्योंकि 1973 हस्ताक्षर का वर्ष है, लागू होने का नहीं, और प्रश्न लागू होने का वर्ष पूछता है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1992 रियो पृथ्वी सम्मेलन और जैव विविधता अभिसमय का वर्ष है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: (क) हिमालयी क्षेत्र और जंगली बकरी तथा हिम तेंदुआ, (ख) अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा महोगनी और शीशम के वृक्ष, (ग) गिर वन और एशियाई सिंह। ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन सा या कौन से सही सुमेलित हैं?
- A.केवल (क)
- B.केवल (क) और (ग)
- C.केवल (ख) और (ग)
- D.(क), (ख) और (ग)
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. (क), (ख) और (ग)
व्याख्या
सही उत्तर D, तीनों युग्म है। हिमालयी क्षेत्र में आइबेक्स और तहर जैसी जंगली बकरियां तथा हिम तेंदुआ मिलते हैं, जो वृक्ष रेखा से ऊपर उन्हीं का शिकार करता है, इसलिए युग्म क सही है। अंडमान और निकोबार द्वीपों के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वनों से महोगनी और शीशम जैसी कठोर इमारती लकड़ी मिलती है, इसलिए युग्म ख सही है। गुजरात का गिर वन एशियाई सिंह का एकमात्र प्राकृतिक ठिकाना है, इसलिए युग्म ग भी सही है। विकल्प A, B और C इसीलिए गलत हैं कि हर विकल्प किसी न किसी सही सुमेलित युग्म को छोड़ देता है। इस प्रकार के प्रश्न उस अभ्यर्थी को अंक देते हैं जिसने प्रजाति को उसके भूदृश्य के साथ याद किया हो, और सुरक्षित आदत यह है कि विकल्प चुनने से पहले हर युग्म जांच लिया जाए।
हंगुल अथवा कश्मीरी बारहसिंगा मुख्य रूप से किस राष्ट्रीय उद्यान में संरक्षित है?
- A.दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान
- B.हेमिस राष्ट्रीय उद्यान
- C.कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
- D.मानस राष्ट्रीय उद्यान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान
व्याख्या
सही उत्तर A, दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान है। हंगुल, जिसे कश्मीरी बारहसिंगा भी कहते हैं, भारत में लाल हिरण की एकमात्र बची एशियाई उपजाति है और उसकी अंतिम टिकाऊ आबादी दाचीगाम में रहती है, जो श्रीनगर के ऊपर की पहाड़ियों में है और जिसके नाम का अर्थ दस गांव है। यह अनुसूची I का जीव और जम्मू कश्मीर का राज्य पशु है। विकल्प B गलत है क्योंकि लद्दाख का हेमिस अधिक ऊंचाई वाला उद्यान है और हिम तेंदुए तथा भरल के लिए जाना जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि मध्य प्रदेश का कान्हा बाघों का क्षेत्र है और वहां कठोर भूमि का बारहसिंगा मिलता है, जिसे अभ्यर्थी अकसर हंगुल समझ लेते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि असम का मानस पिग्मी हॉग, गैंडे और बाघ की रक्षा करता है।
निम्नलिखित में से किसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है?
- A.ऑलिव रिडले कछुआ
- B.गंगा नदी की डॉल्फिन
- C.डुगोंग
- D.गंगा शार्क
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गंगा नदी की डॉल्फिन
व्याख्या
सही उत्तर B, गंगा नदी की डॉल्फिन है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना तंत्र की यह लगभग दृष्टिहीन मीठे पानी की डॉल्फिन ध्वनि तरंगों से अपना शिकार खोजती है और इसे 2009 में भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया, ताकि उसकी नदियों के प्रदूषण और बांधों की ओर ध्यान जाए। यह अनुसूची I की प्रजाति है। विकल्प A गलत है क्योंकि ओडिशा के गहिरमाथा में सामूहिक घोंसले के लिए प्रसिद्ध ऑलिव रिडले कछुआ संरक्षित तो है पर उसे यह राष्ट्रीय उपाधि नहीं मिली। विकल्प C गलत है क्योंकि डुगोंग या समुद्री गाय मन्नार की खाड़ी और अंडमान के जल की संकटग्रस्त समुद्री स्तनधारी है, राष्ट्रीय जलीय जीव नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि गंगा शार्क एक दुर्लभ नदी शार्क है जिसे ऐसा कोई दर्जा प्राप्त नहीं है।
हाथियों और उनके गलियारों की रक्षा के लिए भारत सरकार द्वारा आरंभ प्रोजेक्ट एलिफेंट किस वर्ष शुरू किया गया था?
- A.1972
- B.1973
- C.1986
- D.1992
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. 1992
व्याख्या
सही उत्तर D, 1992 है। प्रोजेक्ट एलिफेंट 1992 में शुरू किया गया ताकि हाथियों, उनके आवास और उन गलियारों की रक्षा हो सके जिनसे होकर झुंड एक वन से दूसरे वन तक जाते हैं; यह मानव हाथी संघर्ष और पालतू हाथियों के कल्याण से भी जुड़ा है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1972 वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम का वर्ष है, जिस कानून के अंतर्गत ऐसी परियोजनाएं चलती हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि 1973 प्रोजेक्ट टाइगर का वर्ष है, जो पहले आया और बाद की प्रजाति परियोजनाओं का आदर्श बना। विकल्प C गलत है क्योंकि 1986 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम का वर्ष है, जो भोपाल गैस त्रासदी के बाद पारित हुआ और जिसका हाथियों से कोई संबंध नहीं। हाथी को 2010 में राष्ट्रीय धरोहर पशु घोषित किया गया था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संकटग्रस्त और गंभीर रूप से संकटग्रस्त में क्या अंतर है?
दोनों आईयूसीएन लाल सूची की संकटग्रस्त श्रेणियां हैं, पर गंभीर रूप से संकटग्रस्त अधिक गंभीर है: ऐसी प्रजाति पर वन्य अवस्था में विलुप्ति का अत्यधिक खतरा होता है, जबकि संकटग्रस्त प्रजाति पर बहुत अधिक खतरा। वन्य अवस्था में विलुप्त होने से ठीक पहले की श्रेणी यही है।
लाल सूची की कौन सी श्रेणियां संकटग्रस्त कहलाती हैं?
केवल तीन: गंभीर रूप से संकटग्रस्त, संकटग्रस्त और संवेदनशील। संकट के निकट श्रेणी नाम से मिलती जुलती है पर संकटग्रस्त श्रेणियों में नहीं गिनी जाती, और वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्रों में यही सबसे प्रिय जाल है।
भारत में वन्य जीवों को सर्वोच्च संरक्षण कौन सा अधिनियम देता है?
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972। इसकी अनुसूची I में रखे गए जीवों को सर्वोच्च संरक्षण मिलता है और उनके विरुद्ध अपराध पर सबसे कठोर दंड है। यही अधिनियम राष्ट्रीय उद्यानों, अभयारण्यों और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की व्यवस्था भी करता है।
प्रोजेक्ट टाइगर कब और क्यों शुरू हुआ?
प्रोजेक्ट टाइगर 1973 में शुरू हुआ, जब शिकार और आवास की हानि से बाघों की संख्या तेजी से गिर गई थी। यह बाघ आरक्षित क्षेत्र बनाकर काम करता है, जिनमें कड़ाई से संरक्षित केंद्र और उसके चारों ओर बफर क्षेत्र होता है, और इसकी निगरानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण करता है।
रेड डाटा बुक क्या है?
यह उन खंडों का प्रचलित नाम है जिनमें आईयूसीएन प्रजातियों की संरक्षण स्थिति प्रकाशित करता है। कोई देश अपनी सीमा में पाए जाने वाले पौधों और जंतुओं के लिए अपनी अलग रेड डाटा बुक भी रख सकता है।
भारत में 1952 में कौन सा पशु विलुप्त घोषित हुआ था?
एशियाई चीता, जो कभी मध्य और प्रायद्वीपीय भारत के घास के मैदानों में फैला था, शिकार और घास के मैदानों के नष्ट होने के कारण समाप्त हो गया और उसे 1952 में देश में विलुप्त घोषित कर दिया गया।
स्रोत
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 — इंडिया कोड, भारत सरकार
- जीव विज्ञान कक्षा 12, जैव विविधता एवं संरक्षण अध्याय — एनसीईआरटी
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, प्रोजेक्ट टाइगर के बारे में — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय





