भारत के जैव-भौगोलिक क्षेत्र: दसों क्षेत्र और वन्यजीव
भारत के दसों जैव-भौगोलिक क्षेत्रों के संपूर्ण नोट्स: रॉजर्स-पंवार वर्गीकरण, प्रत्येक क्षेत्र का विस्तार, वनस्पति, विशिष्ट वन्यजीव और परीक्षा के जाल।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

भारत का जैव-भौगोलिक वर्गीकरण वह नक्शा है जो बताता है कि हिम तेंदुआ, सिंहपुच्छी लंगूर और एक सींग वाला गैंडा, तीनों भारतीय वन्यजीव क्यों कहे जाते हैं। जैव-भौगोलिक क्षेत्र एक ऐसा विस्तृत भूभाग होता है जिसकी जलवायु, भू-आकृति, मिट्टी और विकास-यात्रा ने पौधों तथा प्राणियों का एक अलग समूह तैयार किया है। वर्ष 1988 में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून के डब्ल्यू. ए. रॉजर्स और एच. एस. पंवार ने संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की योजना संबंधी अपनी रिपोर्ट में देश को दस जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में बांटा और परीक्षाओं में यही दस क्षेत्रों वाली योजना पूछी जाती है। इन क्षेत्रों को आगे जैविक प्रांतों में बांटा गया है, संशोधित योजना में इनकी संख्या छब्बीस है। परीक्षक इस अध्याय को पसंद करते हैं क्योंकि यह सीधे एक अंक की जोड़ियों में बदल जाता है: क्षेत्र और उसका राज्य, क्षेत्र और उसका विशिष्ट प्राणी, क्षेत्र और उसका क्षेत्रफल।
क्षेत्र, जगत और वन प्रकार: तीन अलग बातें
जैव-भौगोलिक जगत महाद्वीपीय इकाई है; भारत मुख्य रूप से ओरिएंटल जगत में आता है, जबकि ट्रांस-हिमालयी पट्टी पैलिआर्कटिक जगत का भाग है, इसीलिए लद्दाख में उष्णकटिबंधीय नहीं बल्कि तिब्बती प्रकार के प्राणी मिलते हैं। जैव-भौगोलिक क्षेत्र रॉजर्स और पंवार का राष्ट्रीय स्तर का विभाजन है। इसके विपरीत वन प्रकार चैंपियन और सेठ के 1968 के वर्गीकरण से आता है, जिसने भारतीय वनों को सोलह प्रमुख समूहों में बांटा, जैसे उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार और उपोष्ण चीड़ वन। इन तीनों को मिला देना इस अध्याय की सबसे आम भूल है: चैंपियन और सेठ ने वनों का वर्गीकरण किया, रॉजर्स और पंवार ने जैव-भूगोल का।
दसों जैव-भौगोलिक क्षेत्र एक दृष्टि में
| क्षेत्र | विस्तार | क्षेत्रफल का भाग (लगभग) | विशिष्ट वन्यजीव और स्थल |
|---|---|---|---|
| 1. ट्रांस-हिमालय | लद्दाख, लाहौल-स्पीति, उत्तरी सिक्किम | 5.7 प्रतिशत | हिम तेंदुआ, कियांग, जंगली याक, काली गर्दन वाला सारस; चांगथांग |
| 2. हिमालय | जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक | 7.2 प्रतिशत | हंगुल, कस्तूरी मृग, लाल पांडा; दाचीगाम, ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान |
| 3. भारतीय मरुस्थल | राजस्थान का थार, गुजरात का कच्छ | 6.9 प्रतिशत | गोडावण, चिंकारा, जंगली गधा; मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान |
| 4. अर्ध-शुष्क | पंजाब के मैदान और गुजरात-राजवाड़ा पट्टी | 15.6 प्रतिशत | एशियाई सिंह, भेड़िया, कृष्णमृग; गिर, रणथंभौर, वेलावदर |
| 5. पश्चिमी घाट | गुजरात से केरल तक पहाड़ी श्रृंखला और मालाबार तट | 5.8 प्रतिशत | सिंहपुच्छी लंगूर, नीलगिरि तहर; साइलेंट वैली, पेरियार, इरविकुलम |
| 6. दक्कन प्रायद्वीप | मध्य उच्चभूमि, छोटा नागपुर, दक्कन पठार | 42 प्रतिशत | बाघ, भालू, चीतल; साल और सागौन वन; कान्हा, पेंच, बांदीपुर |
| 7. गंगा का मैदान | ऊपरी और निचला गंगा मैदान, तराई | 10.8 प्रतिशत | बारहसिंगा, गंगा डॉल्फिन; दुधवा, वाल्मीकि |
| 8. उत्तर-पूर्व भारत | ब्रह्मपुत्र घाटी और पूर्वोत्तर की पहाड़ियां | 5.2 प्रतिशत | एक सींग वाला गैंडा, हूलॉक गिबन, सुनहरा लंगूर; काजीरंगा, मानस, नोकरेक |
| 9. तट | पूर्वी और पश्चिमी तटीय पट्टियां तथा उनके मैंग्रोव | 0.3 प्रतिशत | ऑलिव रिडले कछुआ, डुगोंग, सुंदरी वृक्ष; सुंदरवन, गहिरमाथा |
| 10. द्वीप | अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप | 0.03 प्रतिशत | नारकोंडम हॉर्नबिल, निकोबार मेगापोड, प्रवाल भित्तियां |
क्षेत्रवार याद रखने योग्य बिंदु
- ट्रांस-हिमालय शीत मरुस्थल है: बृहद् हिमालय की वृष्टि छाया में होने के कारण वर्षा बहुत कम होती है और वनस्पति विरल अल्पाइन स्टेपी है। इसके प्राणी तिब्बती प्रकार के हैं, उष्णकटिबंधीय भारतीय नहीं।
- हिमालयी क्षेत्र में नीचे से ऊपर उपोष्ण चीड़, शीतोष्ण बांज और देवदार तथा अल्पाइन घास के मैदान मिलते हैं। हंगुल या कश्मीरी हिरण केवल दाचीगाम में बचा है और लाल पांडा तथा कस्तूरी मृग इसी क्षेत्र के हैं।
- भारतीय मरुस्थल क्षेत्र के दो प्रांत हैं, थार का बालू मरुस्थल और कच्छ का लवणीय रण। खेजड़ी इसका विशिष्ट वृक्ष है, जंगली गधा केवल कच्छ के छोटे रण में मिलता है और जैसलमेर के निकट मरुस्थल राष्ट्रीय उद्यान गोडावण की शरणस्थली है।
- अर्ध-शुष्क क्षेत्र मरुस्थल और दक्कन के बीच की पट्टी है, जहां कंटीले और शुष्क पर्णपाती वन मिलते हैं। एशियाई सिंह का गिर इसी क्षेत्र में आता है, मरुस्थल क्षेत्र में नहीं, और यही सबसे पसंदीदा जाल है।
- पश्चिमी घाट क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन तथा ऊंचाई पर शोला-घास का मिश्रण मिलता है और प्रायद्वीपीय भारत की सर्वाधिक स्थानिकता यहीं है।
- दक्कन प्रायद्वीप सबसे बड़ा क्षेत्र है, जो देश के लगभग दो-पांचवें भाग में फैला है और साल तथा सागौन वनों के साथ भारत के बाघ अभयारण्यों का मुख्य आधार है।
- गंगा का मैदान सर्वाधिक जुता हुआ क्षेत्र है, इसलिए यहां प्राकृतिक वनस्पति बहुत कम बची है; वन्यजीव तराई की घास भूमि और दुधवा जैसे दलदली भागों में सीमित हैं।
- उत्तर-पूर्व भारत भारतीय, चीनी और मलायी तत्वों का संगम स्थल है, सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है और काजीरंगा की जलोढ़ घास भूमि इसी में है।
- तट क्षेत्र पतली पट्टी है, फिर भी मैंग्रोव वन, सुंदरवन का सुंदरी वृक्ष और ऑलिव रिडले कछुए के सामूहिक घोंसले वाले तट इसी में आते हैं।
- द्वीप क्षेत्र क्षेत्रफल में सबसे छोटा है, पर स्थानिक प्रजातियों में सबसे धनी है; प्रवाल भित्तियां, नारकोंडम हॉर्नबिल और निकोबार मेगापोड कहीं और नहीं मिलते।
यह वर्गीकरण क्यों किया गया
यह योजना केवल शैक्षणिक नहीं थी, इसका उद्देश्य यह जांचना था कि भारत के प्रत्येक प्राकृतिक भाग के अपने संरक्षित क्षेत्र हैं या नहीं। प्रतिनिधिक नेटवर्क का अर्थ है हर क्षेत्र और प्रांत के लिए राष्ट्रीय उद्यान या अभयारण्य, जिससे शीत मरुस्थल, मैंग्रोव और शोला भी सुरक्षित हों, केवल आकर्षक बाघ वन ही नहीं। इसी ढांचे से जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों की पहचान भी होती है, जो प्रतिनिधिक पारितंत्रों को समेटने के लिए घोषित किए जाते हैं; उदाहरण के लिए मेघालय का नोकरेक उत्तर-पूर्व क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। भारत सत्रह महाविविध देशों में एक है और विश्व के मात्र 2.4 प्रतिशत भूभाग पर होते हुए भी दर्ज प्रजातियों का कहीं बड़ा भाग रखता है, तथा विश्व के चार जैवविविधता हॉटस्पॉट के हिस्से यहां आते हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका और निकोबार के रास्ते सुंडालैंड।
परीक्षा के जाल
तीन जोड़ियां अधिकांश प्रश्न तय करती हैं। दक्कन प्रायद्वीप सबसे बड़ा और द्वीप सबसे छोटा क्षेत्र है। ट्रांस-हिमालय शीत मरुस्थल है, जबकि भारतीय मरुस्थल गर्म मरुस्थल। गिर अर्ध-शुष्क क्षेत्र का, कच्छ का जंगली गधा मरुस्थल क्षेत्र का और काजीरंगा उत्तर-पूर्व भारत का उदाहरण है। यह भी याद रखें कि पश्चिमी घाट क्षेत्र में मालाबार तटीय मैदान शामिल है, इसलिए उसे तट क्षेत्र में नहीं गिना जाता।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न लगभग सदैव जोड़ी मिलान के होते हैं: क्षेत्र के साथ उसके राज्य, क्षेत्रफल का भाग या प्रमुख प्रजाति और संरक्षित क्षेत्र। सामान्य जाल ये हैं: गिर को अर्ध-शुष्क के स्थान पर मरुस्थल क्षेत्र में रखना, भारतीय मरुस्थल को ट्रांस-हिमालय के स्थान पर शीत मरुस्थल कहना, दस क्षेत्रों का श्रेय चैंपियन और सेठ को देना, तथा मालाबार तट को तट क्षेत्र में गिनना जबकि वह पश्चिमी घाट क्षेत्र का भाग है। कथन आधारित प्रश्न सबसे बड़े एवं सबसे छोटे क्षेत्र और लद्दाख के जगत पर भी पूछे जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वर्गीकरण | दस जैव-भौगोलिक क्षेत्र, रॉजर्स और पंवार, भारतीय वन्यजीव संस्थान, 1988 |
|---|---|
| जैविक प्रांत | संशोधित योजना में छब्बीस |
| सबसे बड़ा क्षेत्र | दक्कन प्रायद्वीप, लगभग 42 प्रतिशत भाग |
| सबसे छोटा क्षेत्र | द्वीप, लगभग 0.03 प्रतिशत भाग |
| शीत मरुस्थल क्षेत्र | ट्रांस-हिमालय, लद्दाख और लाहौल-स्पीति |
| गर्म मरुस्थल क्षेत्र | भारतीय मरुस्थल, थार और कच्छ |
| जगत | मुख्यतः ओरिएंटल; ट्रांस-हिमालय पैलिआर्कटिक जगत में |
| वन प्रकार | सोलह प्रमुख समूह, चैंपियन और सेठ, 1968 |
| विश्व भूभाग में भाग | भारत लगभग 2.4 प्रतिशत, और सत्रह महाविविध देशों में एक |
| भारत में हॉटस्पॉट | हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट एवं श्रीलंका, निकोबार के रास्ते सुंडालैंड |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत को दस जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में बांटने का कार्य किस वैज्ञानिक जोड़ी ने किया?
- A.चैंपियन और सेठ
- B.रॉजर्स और पंवार
- C.हूकर और थॉमसन
- D.सालिम अली और रिप्ले
उत्तर देखें
भारतीय वन्यजीव संस्थान के डब्ल्यू. ए. रॉजर्स और एच. एस. पंवार ने 1988 में देश के लिए प्रतिनिधिक संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की योजना बनाते समय दस क्षेत्रों वाला जैव-भौगोलिक वर्गीकरण प्रस्तुत किया और ये दस क्षेत्र तथा उनके जैविक प्रांत आज भी आधिकारिक ढांचा हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा जैव-भौगोलिक क्षेत्र कौन है?
- A.अर्ध-शुष्क क्षेत्र
- B.दक्कन प्रायद्वीप
- C.गंगा का मैदान
- D.हिमालय
उत्तर देखें
दक्कन प्रायद्वीप क्षेत्र देश के लगभग बयालीस प्रतिशत भाग, यानी करीब दो-पांचवें हिस्से में फैला है और इसमें मध्य उच्चभूमि, छोटा नागपुर, पूर्वी उच्चभूमि तथा दक्कन पठार आते हैं; भारत के अधिकांश साल और सागौन वन तथा बाघ अभयारण्य यहीं हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का निम्नलिखित में से कौन-सा जीवमंडल आरक्षित क्षेत्र मेघालय में स्थित है?
- A.पन्ना
- B.सिमलीपाल
- C.मानस
- D.नोकरेक
उत्तर देखें
नोकरेक मेघालय की गारो पहाड़ियों में स्थित है और जीवमंडल आरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क में उत्तर-पूर्व भारत जैव-भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है; यह जंगली नींबू प्रजाति भारतीय जंगली संतरे तथा हूलॉक गिबन के लिए जाना जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लद्दाख तथा लाहौल-स्पीति का शीत मरुस्थल भारत के किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र में आता है?
- A.हिमालय
- B.ट्रांस-हिमालय
- C.भारतीय मरुस्थल
- D.अर्ध-शुष्क
उत्तर देखें
ट्रांस-हिमालय वह पट्टी है जो बृहद् हिमालय के पीछे लद्दाख, लाहौल-स्पीति और उत्तरी सिक्किम में फैली है; ऊंची श्रेणियों की वृष्टि छाया में होने के कारण यह शीत मरुस्थल है और यही एकमात्र भारतीय क्षेत्र है जिसके प्राणी, जैसे कियांग, जंगली याक और काली गर्दन वाला सारस, तिब्बती या पैलिआर्कटिक…
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में टिकाऊ और कठोर इमारती लकड़ी देने वाले सुंदरी वृक्ष कहां पाए जाते हैं?
- A.उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन
- B.मैंग्रोव वन
- C.पर्वतीय वन
- D.उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन
उत्तर देखें
सुंदरी तट क्षेत्र के ज्वारीय डेल्टाई वनों का मैंग्रोव वृक्ष है और गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा के सुंदरवन का नाम इसी से पड़ा; इसकी लकड़ी कठोर और टिकाऊ होती है तथा अन्य मैंग्रोव की तरह इसमें लवण सहने वाली जड़ें और दलदली मिट्टी में श्वसन मूल होती हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सिंहपुच्छी लंगूर और नीलगिरि तहर किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र के विशिष्ट प्राणी हैं?
- A.दक्कन प्रायद्वीप
- B.पश्चिमी घाट
- C.उत्तर-पूर्व भारत
- D.तट
उत्तर देखें
पश्चिमी घाट क्षेत्र में पहाड़ी श्रृंखला के साथ मालाबार तटीय मैदान भी शामिल है और इसके आर्द्र सदाबहार वन तथा ऊंचाई पर शोला-घास मिश्रण में स्थानिक प्रजातियों का बहुत बड़ा भाग मिलता है, जिनमें वर्षावन की छत्रछाया में रहने वाला सिंहपुच्छी लंगूर और इरविकुलम की घास भूमि का नीलगिरि तहर…
पूरी व्याख्या पढ़ें →दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
- A.कस्तूरी मृग
- B.गोल्डन ओरिओल
- C.पीले गले वाला मार्टेन
- D.हंगुल या कश्मीरी हिरण
उत्तर देखें
श्रीनगर के निकट हिमालय जैव-भौगोलिक क्षेत्र में स्थित दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान हंगुल का अंतिम प्रमुख आश्रय है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में लाल हिरण समूह की एकमात्र बची उपजाति तथा जम्मू-कश्मीर का राज्य पशु है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कच्छ के छोटे रण तक सीमित भारतीय जंगली गधा किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र का प्राणी है?
- A.भारतीय मरुस्थल
- B.अर्ध-शुष्क
- C.तट
- D.दक्कन प्रायद्वीप
उत्तर देखें
भारतीय मरुस्थल क्षेत्र के दो भाग हैं, राजस्थान का बालू भरा थार और गुजरात के कच्छ का लवणीय रण, और भारतीय जंगली गधा या खुर केवल कच्छ के छोटे रण में बचा है, जहां जंगली गधा अभयारण्य उसकी रक्षा करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत का कौन-सा जैव-भौगोलिक क्षेत्र क्षेत्रफल में सबसे छोटा पर स्थानिक प्रजातियों में अत्यंत समृद्ध है?
- A.तट
- B.द्वीप
- C.पश्चिमी घाट
- D.ट्रांस-हिमालय
उत्तर देखें
अंडमान-निकोबार समूह और लक्षद्वीप से बने द्वीप क्षेत्र का भाग भारत के क्षेत्रफल का लगभग 0.03 प्रतिशत ही है, जो किसी भी क्षेत्र से कम है, फिर भी यहां प्रवाल भित्तियां तथा नारकोंडम हॉर्नबिल और निकोबार मेगापोड जैसी प्रजातियां मिलती हैं जो कहीं और नहीं पाई जातीं, क्योंकि लंबे समय…
पूरी व्याख्या पढ़ें →एशियाई सिंह का एकमात्र प्राकृतिक निवास गिर वन किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र में स्थित है?
- A.भारतीय मरुस्थल
- B.अर्ध-शुष्क
- C.दक्कन प्रायद्वीप
- D.पश्चिमी घाट
उत्तर देखें
गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित गिर अर्ध-शुष्क क्षेत्र के गुजरात-राजवाड़ा प्रांत में आता है, जो मरुस्थल और दक्कन के बीच कंटीले तथा शुष्क पर्णपाती वनों की पट्टी है और जिसमें रणथंभौर, सरिस्का तथा वेलावदर की कृष्णमृग घास भूमि भी शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जलोढ़ घास भूमि और एक सींग वाले गैंडे वाला काजीरंगा किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र का प्रतिनिधि है?
- A.गंगा का मैदान
- B.हिमालय
- C.उत्तर-पूर्व भारत
- D.दक्कन प्रायद्वीप
उत्तर देखें
उत्तर-पूर्व भारत क्षेत्र के दो भाग हैं, ब्रह्मपुत्र घाटी और पूर्वोत्तर की पहाड़ियां, तथा काजीरंगा घाटी वाले भाग में है, जहां प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ ऊंची आर्द्र घास भूमि बनाए रखती है और उसी पर एक सींग वाला गैंडा, जंगली भैंसा, बारहसिंगा तथा पाढ़ा निर्भर हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →तराई की घास भूमि और दुधवा का बारहसिंगा किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र की विशेषता हैं?
- A.गंगा का मैदान
- B.हिमालय
- C.अर्ध-शुष्क
- D.उत्तर-पूर्व भारत
उत्तर देखें
गंगा के मैदान क्षेत्र में ऊपरी और निचला गंगा मैदान तथा हिमालय की तलहटी वाली तराई पट्टी शामिल है, और उत्तर प्रदेश का दुधवा इसके बारहसिंगा के साथ बाघ तथा पुनर्स्थापन के बाद गैंडे की भी रक्षा करता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत में कितने जैव-भौगोलिक क्षेत्र हैं?
दस। भारतीय वन्यजीव संस्थान में 1988 में संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क की योजना के लिए तैयार रॉजर्स और पंवार की योजना देश को दस जैव-भौगोलिक क्षेत्रों में बांटती है, जिन्हें आगे जैविक प्रांतों में विभाजित किया गया है।
भारत का सबसे बड़ा और सबसे छोटा जैव-भौगोलिक क्षेत्र कौन है?
दक्कन प्रायद्वीप सबसे बड़ा है, जो देश के लगभग बयालीस प्रतिशत भाग में है, और द्वीप क्षेत्र सबसे छोटा है, जिसका भाग लगभग 0.03 प्रतिशत ही है, फिर भी वह स्थानिक प्रजातियों में बहुत समृद्ध है।
जैव-भौगोलिक क्षेत्र और वन प्रकार में क्या अंतर है?
जैव-भौगोलिक क्षेत्र जलवायु, भू-आकृति और वहां रहने वाली प्रजातियों के समूह से तय होता है, जैसे रॉजर्स-पंवार के दस क्षेत्र। वन प्रकार वनस्पति का वर्ग है, जैसे चैंपियन और सेठ, 1968 के सोलह प्रमुख समूह।
गिर राष्ट्रीय उद्यान किस जैव-भौगोलिक क्षेत्र में है?
सौराष्ट्र में एशियाई सिंह का घर गिर अर्ध-शुष्क क्षेत्र के गुजरात-राजवाड़ा प्रांत में आता है, भारतीय मरुस्थल क्षेत्र में नहीं, जो प्रायः गलत विकल्प के रूप में दिया जाता है।
ट्रांस-हिमालय को हिमालय से अलग क्षेत्र क्यों माना जाता है?
ट्रांस-हिमालय बृहद् हिमालय के पीछे वृष्टि छाया में है, इसलिए वह विरल स्टेपी वनस्पति वाला शीत मरुस्थल है और कियांग तथा जंगली याक जैसे इसके प्राणी ओरिएंटल नहीं बल्कि तिब्बती या पैलिआर्कटिक स्वभाव के हैं।
स्रोत
- प्लानिंग अ वाइल्डलाइफ प्रोटेक्टेड एरिया नेटवर्क इन इंडिया, खंड एक — भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून
- भारत के जैव-भौगोलिक क्षेत्र — ईएनवीआईएस केंद्र, वन्यजीव एवं संरक्षित क्षेत्र, भारतीय वन्यजीव संस्थान
- भारत: भौतिक पर्यावरण, कक्षा ग्यारह की पाठ्यपुस्तक, प्राकृतिक वनस्पति अध्याय — एनसीईआरटी





