जीवों के पारस्परिक संबंध: सहोपकारिता, परजीविता और परभक्षण
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जीवों के पारस्परिक संबंधों पर नोट्स: सहोपकारिता, सहभोजिता, परजीविता, परभक्षण, प्रतिस्पर्धा, अमेंसलिज्म, उदाहरण और शिकार की रक्षा युक्तियां।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

प्रकृति में कोई भी जीव अकेला नहीं रहता। हर पौधा, जंतु और सूक्ष्मजीव अपने आवास को दूसरों के साथ साझा करता है, और दो जातियों के एक-दूसरे पर पड़ने वाले प्रभाव को जीवों के पारस्परिक संबंध या समष्टि अंतरक्रिया कहते हैं। पारिस्थितिकीविद् इन्हें एक सरल कसौटी से बांटते हैं: संबंध से जाति को लाभ होता है, हानि होती है, या कोई प्रभाव नहीं पड़ता? लाभ को धन चिह्न, हानि को ऋण चिह्न और कोई प्रभाव न होने को शून्य से दर्शाया जाता है। इसी कसौटी से छह नाम निकलते हैं जो परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं: सहोपकारिता, सहभोजिता, परजीविता, परभक्षण, प्रतिस्पर्धा और अमेंसलिज्म। हर एक का चिह्न प्रारूप और दो-तीन निश्चित उदाहरण याद कर लेने से इस अध्याय के लगभग सभी प्रश्न हल हो जाते हैं।
परीक्षा में काम आने वाली चिह्न तालिका
| संबंध | जाति अ | जाति ब | मानक उदाहरण |
|---|---|---|---|
| सहोपकारिता | लाभ | लाभ | लाइकेन: शैवाल और कवक |
| सहभोजिता | लाभ | कोई प्रभाव नहीं | आम की शाखा पर उगा आर्किड |
| परजीविता | लाभ | हानि | झाड़ी पर उगी अमरबेल |
| परभक्षण | लाभ | हानि | बाघ और हिरण |
| प्रतिस्पर्धा | हानि | हानि | एक ही चट्टान पर दो बार्नेकल जातियां |
| अमेंसलिज्म | हानि | कोई प्रभाव नहीं | पेनिसिलियम और जीवाणु |
परभक्षण और परजीविता के चिह्न एक समान हैं, इसलिए अंतर अलग से याद रखना पड़ता है: परभक्षी सामान्यतः अपने शिकार से बड़ा होता है और उसे मारकर खा जाता है, जबकि परजीवी पोषी से छोटा होता है, उसके ऊपर या भीतर रहता है और पोषी को जीवित रखता है, क्योंकि उसका अपना जीवन उसी पर निर्भर है।
सहोपकारिता: दोनों जातियों को लाभ
सहोपकारिता वह संबंध है जिसमें दोनों साझेदारों को लाभ होता है, और जब कोई भी दूसरे के बिना जीवित नहीं रह सकता तो उसे अनिवार्य सहोपकारिता कहते हैं। लाइकेन सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है, जिसमें शैवाल प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाता है और कवक जल तथा खनिज सोखकर दोनों को नग्न चट्टान से जोड़े रखता है। कवकमूल उच्च पादप की जड़ों के साथ कवक का संबंध है; कवक मृदा से फॉस्फोरस तथा अन्य खनिज पौधे तक पहुंचाता है और बदले में शर्करा लेता है। राइजोबियम जीवाणु चना, मटर और मूंगफली जैसी फलीदार फसलों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहते हैं, वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके उसे पौधे के उपयोग योग्य बनाते हैं और जड़ से आश्रय तथा भोजन पाते हैं। अंजीर का वृक्ष और उसकी ततैया एक-से-एक जोड़ी का विख्यात उदाहरण हैं: ततैया अंजीर का परागण करती है और उसी में अंडे देती है, जिसके डिंभ विकसित हो रहे कुछ बीजों को खाते हैं। मधुमक्खियां, तितलियां और शक्करखोरा मकरंद के बदले परागकण ढोते हैं, और समुद्र में क्लाउनफिश समुद्री एनीमोन के दंशकारी स्पर्शकों के बीच शरण लेती है।
सहभोजिता: एक को लाभ, दूसरे पर प्रभाव नहीं
- आम की शाखा पर अधिपादप के रूप में उगा आर्किड प्रकाश और स्थान पाता है; आम के वृक्ष को कोई हानि नहीं होती।
- व्हेल की पीठ से चिपके बार्नेकल भोजन से भरे जल में घूमते रहते हैं और व्हेल को कोई कष्ट नहीं होता।
- गाय-बगुला चरते मवेशियों के पीछे चलता है और उनके खुरों से उड़ने वाले कीट पकड़ लेता है।
- रेमोरा या चूसक मछली शार्क से चिपक जाती है और उसके भोजन के बचे टुकड़े खाती है।
परजीविता: पोषी की हानि पर परजीवी का लाभ
परजीवी पोषी से भोजन लेता है और उसे हानि पहुंचाता है, पर सामान्यतः तुरंत मारता नहीं। बाह्य परजीवी जैसे जूं, चिचड़ी, जोंक और मछली के क्लोम पर रहने वाले कोपीपोड शरीर की बाहरी सतह पर रहते हैं; अंतः परजीवी जैसे फीताकृमि, गोलकृमि और यकृत पर्णाभ शरीर के भीतर रहते हैं। अमरबेल यानी कस्कुटा एक पूर्ण स्तंभ परजीवी है, जिसने पर्णहरित और पत्तियां खो दी हैं और जो चूषकांग द्वारा पोषी से रस खींचता है। परजीवियों में निश्चित अनुकूलन दिखते हैं: अनावश्यक ज्ञानेंद्रियों का ह्रास, चूषक तथा अंकुश जैसे चिपकने वाले अंग, पाचन तंत्र का ह्रास या अभाव, और नए पोषी तक पहुंचने की कम संभावना की भरपाई के लिए अत्यधिक प्रजनन क्षमता। अनेक परजीवियों को मध्यवर्ती पोषी या वाहक की आवश्यकता होती है, जैसे मानव यकृत पर्णाभ को घोंघा और मछली तथा मलेरिया परजीवी को मादा एनाफिलीज मच्छर। मुर्गी-परजीविता यानी ब्रूड परजीविता में एक पक्षी दूसरे पक्षी के घोंसले में अंडे देकर उनके पालन का भार उसी पर छोड़ देता है, जिसका भारतीय उदाहरण कौए के घोंसले में अंडे देने वाली कोयल है।
परभक्षण, प्रतिस्पर्धा और शिकार की रक्षा युक्तियां
परभक्षी खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा को ऊपर पहुंचाते हैं, शिकार की संख्या नियंत्रित रखते हैं और इस प्रकार समुदाय की विविधता बनाए रखते हैं। जहां कोई परभक्षी किसी प्रबल प्रतिस्पर्धी को दबाकर रखता है, वहां उसके हटने पर पूरा समुदाय बिगड़ जाता है; ऐसी जाति कीस्टोन जाति कहलाती है। रॉबर्ट पेन ने अमेरिका के प्रशांत तट की चट्टानी कुंडों से तारामीन पाइसैस्टर हटाकर यह दिखाया, जिसके बाद दस से अधिक अकशेरुकी जातियां लुप्त हो गईं। परभक्षियों का उपयोग जैविक नियंत्रण में भी होता है: ऑस्ट्रेलिया में फैले नागफनी को कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम नामक शलभ ने नियंत्रित किया। शिकार परभक्षण का उत्तर छदम वर्णता, अनुहरण, बबूल तथा नागफनी के कांटों और रासायनिक रक्षा से देते हैं, जैसे अरुचिकर मोनार्क तितली और आक का विषैला दूध। अंतरजातीय प्रतिस्पर्धा में दो जातियां एक ही सीमित संसाधन चाहती हैं; गॉस के प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत के अनुसार ठीक एक ही संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती दो जातियां अनिश्चित काल तक साथ नहीं रह सकतीं और दुर्बल जाति हट जाती है। कॉनेल ने पाया कि स्कॉटलैंड के तट की ज्वारनद चट्टानों पर बड़ा बार्नेकल बैलेनस छोटे कैथेमैलस को हटा देता है। साथ रहने वाली जातियां प्रायः संसाधन विभाजन से टकराव टालती हैं, अर्थात भिन्न समय, गहराई या ऊंचाई पर भोजन करती हैं।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से प्रश्न तीन प्रकार से बनते हैं। पहला, सीधा मिलान: किसी संबंध का नाम देकर उसका चिह्न युग्म या उदाहरण पूछना, अथवा उदाहरणों की सूची को सहोपकारिता, सहभोजिता, परजीविता और अमेंसलिज्म से मिलाना। दूसरा, निश्चित नाम: पूर्ण स्तंभ परजीवी के रूप में अमरबेल, शैवाल और कवक के रूप में लाइकेन, कवक और जड़ के रूप में कवकमूल, फलीदार ग्रंथिकाओं में राइजोबियम, नागफनी के लिए कैक्टोब्लास्टिस, कीस्टोन प्रयोग के लिए पाइसैस्टर, कैथेमैलस के विरुद्ध बैलेनस, तथा ब्रूड परजीविता के लिए कोयल और कौआ। तीसरा, सिद्धांत: गॉस का प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत, संसाधन विभाजन और परभक्षी तथा परजीवी का अंतर। सामान्य भूल सहभोजिता को सहोपकारिता और अमेंसलिज्म को परजीविता समझ लेना है, इसलिए उदाहरणों से पहले चिह्न प्रारूप पक्का करें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सहोपकारिता के चिह्न | दोनों जातियों को लाभ, अर्थात धन और धन |
|---|---|
| सहभोजिता के चिह्न | एक को लाभ, दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं, अर्थात धन और शून्य |
| अमेंसलिज्म के चिह्न | एक को हानि, दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं, अर्थात ऋण और शून्य |
| लाइकेन | शैवाल और कवक की सहोपकारिता |
| कवकमूल | उच्च पादप की जड़ों के साथ कवक की सहोपकारिता |
| राइजोबियम | फलीदार पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकारक जीवाणु |
| पूर्ण स्तंभ परजीवी | कस्कुटा, जिसे अमरबेल भी कहते हैं |
| भारत में ब्रूड परजीवी | कोयल, जो कौए के घोंसले में अंडे देती है |
| प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत | जी. एफ. गॉस द्वारा दिया गया |
| कीस्टोन परभक्षी प्रयोग | रॉबर्ट पेन, प्रशांत तट पर तारामीन पाइसैस्टर के साथ |
| नागफनी का जैविक नियंत्रण | ऑस्ट्रेलिया में कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम शलभ |
| बार्नेकल प्रतिस्पर्धा अध्ययन | जोसेफ कॉनेल, बैलेनस द्वारा कैथेमैलस का अपवर्जन |
| मलेरिया परजीवी का वाहक | मादा एनाफिलीज मच्छर |
| यकृत पर्णाभ के पोषी | घोंघा और मछली मध्यवर्ती पोषी के रूप में |
| रासायनिक रक्षा के उदाहरण | मोनार्क तितली और आक का दूध |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
लाइकेन किस प्रकार के पारस्परिक संबंध का उदाहरण है?
- A.परजीविता
- B.सहभोजिता
- C.सहोपकारिता
- D.अमेंसलिज्म
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सहोपकारिता है। लाइकेन शैवाल और कवक के बीच की घनिष्ठ साझेदारी है, जिसमें दोनों साझेदारों को लाभ होता है। शैवाल प्रकाश संश्लेषण से कार्बोहाइड्रेट बनाकर कवक को देता है, और कवक मृदा या छाल से जल तथा खनिज सोखकर रोके रखता है और दोनों को नग्न चट्टान या वृक्ष की छाल से जोड़े रखता है। कोई भी साझेदार अकेले नग्न चट्टान पर नहीं बस सकता, इसलिए इसे अनिवार्य सहोपकारिता कहा जाता है और लाइकेन को चट्टानी अनुक्रमण की अग्रगामी जाति माना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि परजीविता में एक साझेदार को हानि होती है, जबकि यहां शैवाल और कवक दोनों लाभान्वित होते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि सहभोजिता में एक साझेदार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। विकल्प D गलत है क्योंकि अमेंसलिज्म में एक जाति को हानि और दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं होता, जैसे पेनिसिलियम जीवाणुओं को मारता है।
झाड़ीदार पौधे पर उगने वाली कस्कुटा यानी अमरबेल किसका उदाहरण है?
- A.पूर्ण स्तंभ परजीवी
- B.आंशिक मूल परजीवी
- C.अधिपादप
- D.मृतजीवी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, पूर्ण स्तंभ परजीवी है। कस्कुटा, जिसे अमरबेल या डॉडर कहते हैं, एक पुष्पी पादप है जिसने अपना पर्णहरित और पत्तियां खो दी हैं और जो अपना भोजन नहीं बना सकता। उसका लिपटने वाला स्तंभ पोषी से चिपककर चूषकांग पोषी की संवहन ऊतक में भेजता है, जिनसे वह जल और बना हुआ भोजन दोनों खींचता है। कार्बनिक भोजन तथा जल दोनों के लिए पोषी पर निर्भर होने से यह पूर्ण परजीवी है, और संपर्क स्तंभ से होने के कारण स्तंभ परजीवी कहलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि चंदन जैसे आंशिक मूल परजीवी पर्णहरित बनाए रखते हैं और जड़ से जुड़ते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अधिपादप, जैसे आम पर आर्किड, पोषी का उपयोग केवल आधार के लिए करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मृतजीवी मृत कार्बनिक पदार्थ पर पलते हैं, जीवित पोषी पर नहीं।
चरते मवेशियों के पीछे चलकर उड़ने वाले कीट पकड़ने वाला गाय-बगुला किसका उदाहरण है?
- A.सहोपकारिता
- B.सहभोजिता
- C.परभक्षण
- D.प्रतिस्पर्धा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, सहभोजिता है। बगुला चरते मवेशियों के साथ-साथ चलता है और उनके खुरों से घास में से उड़ने वाले टिड्डे तथा अन्य कीट खा लेता है। पक्षी को सहज भोजन मिल जाता है, जबकि मवेशियों को उसकी उपस्थिति से न लाभ होता है न हानि, और यही सहभोजिता का धन तथा शून्य प्रारूप है। व्हेल की पीठ पर बार्नेकल और आम की शाखा पर आर्किड भी इसी श्रेणी में आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि सहोपकारिता में दोनों जातियों को लाभ चाहिए, और मवेशियों को कुछ नहीं मिलता। विकल्प C गलत है क्योंकि बगुले और मवेशियों के बीच का संबंध परभक्षण नहीं है, चाहे बगुला कीटों का परभक्षण करता हो। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रतिस्पर्धा में दोनों जातियों को एक ही सीमित संसाधन चाहिए और दोनों को हानि होनी चाहिए, जो यहां नहीं होता।
ऑस्ट्रेलिया के विशाल क्षेत्रों में फैल चुके नागफनी को किसके प्रवेश से नियंत्रित किया गया?
- A.कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम शलभ
- B.तारामीन पाइसैस्टर
- C.बार्नेकल बैलेनस
- D.कवक पेनिसिलियम
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम शलभ है। नागफनी उन्नीसवीं शताब्दी में ऑस्ट्रेलिया ले जाया गया और वहां चरागाहों पर अनियंत्रित रूप से फैल गया, क्योंकि कोई स्थानीय जंतु उसे नहीं खाता था। तब नागफनी खाने वाला शलभ कैक्टोब्लास्टिस कैक्टोरम छोड़ा गया, जिसके डिंभ नागफनी के पर्वों में छेद करके उन्हें नष्ट कर देते हैं, और इस खरपतवार पर नियंत्रण हो गया। यह जैविक नियंत्रण का पाठ्यपुस्तक उदाहरण है, जिसमें रसायन के स्थान पर प्राकृतिक परभक्षी या शाकाहारी का उपयोग होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पाइसैस्टर वह तारामीन है जिसका उपयोग रॉबर्ट पेन ने अमेरिकी प्रशांत तट पर कीस्टोन जाति के प्रयोग में किया। विकल्प C गलत है क्योंकि बैलेनस वह बार्नेकल है जिसने कॉनेल के अध्ययन में कैथेमैलस को हटाया। विकल्प D गलत है क्योंकि पेनिसिलियम अमेंसलिज्म का उदाहरण है, खरपतवार नियंत्रण का नहीं।
एक ही सीमित संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती दो जातियां अनिश्चित काल तक साथ नहीं रह सकतीं, यह प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत किसने दिया?
- A.रॉबर्ट पेन
- B.जी. एफ. गॉस
- C.जोसेफ कॉनेल
- D.चार्ल्स एल्टन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, जी. एफ. गॉस है। रूसी पारिस्थितिकीविद् जी. एफ. गॉस ने पैरामीशियम की संवर्धन संस्कृतियों पर कार्य करके निष्कर्ष निकाला कि जब दो जातियों को एक ही स्थान में ठीक एक ही सीमित संसाधन चाहिए, तो दीर्घकाल में उनमें से एक सदा हट जाती है; इसे प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत या गॉस का सिद्धांत कहते हैं। साथ रहती दिखने वाली जातियां प्रायः संसाधन को समय, गहराई या आकार के आधार पर बांट लेती हैं, जिसे संसाधन विभाजन कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि रॉबर्ट पेन ने तारामीन पाइसैस्टर हटाकर कीस्टोन जाति की अवधारणा सिद्ध की। विकल्प C गलत है क्योंकि जोसेफ कॉनेल ने बार्नेकल पर क्षेत्रीय प्रयोग से अपवर्जन दिखाया, पर सिद्धांत नहीं दिया। विकल्प D गलत है क्योंकि चार्ल्स एल्टन पारिस्थितिक निकेत और संख्या के पिरामिड के लिए जाने जाते हैं।
रॉबर्ट पेन के अमेरिकी प्रशांत तट के प्रसिद्ध प्रयोग में किस परभक्षी को हटाने पर दस से अधिक अकशेरुकी जातियां लुप्त हो गईं?
- A.समुद्री ऊदबिलाव
- B.तारामीन पाइसैस्टर
- C.समुद्री एनीमोन
- D.रेमोरा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, तारामीन पाइसैस्टर है। रॉबर्ट पेन ने चट्टानी ज्वारनद कुंडों से परभक्षी तारामीन पाइसैस्टर हटा दिया और पाया कि थोड़े ही समय में वे शंबुक, जिन्हें तारामीन खाती थी, पूरी चट्टानी सतह पर फैल गए और अन्य जंतुओं को हटा दिया, जिससे कुंडों से दस से अधिक अकशेरुकी जातियां समाप्त हो गईं। इस प्रयोग से पारिस्थितिकी को कीस्टोन जाति की अवधारणा मिली, अर्थात वह जाति जिसका समुदाय की संरचना पर प्रभाव उसकी संख्या से कहीं अधिक होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि समुद्री ऊदबिलाव केल्प वनों की कीस्टोन जाति है, पर पेन के ज्वारनद प्रयोग का जंतु वह नहीं था। विकल्प C गलत है क्योंकि समुद्री एनीमोन का उल्लेख क्लाउनफिश के साथ सहभोजिता के उदाहरण में होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि रेमोरा वह चूसक मछली है जो शार्क पर सवार होकर उसका बचा भोजन खाती है।
फलीदार पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में रहने वाले राइजोबियम जीवाणु किस संबंध को दर्शाते हैं?
- A.परजीविता
- B.अमेंसलिज्म
- C.सहोपकारिता
- D.परभक्षण
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सहोपकारिता है। राइजोबियम चना, मटर, मूंगफली और अरहर जैसी फलीदार फसलों की जड़ों पर बनी ग्रंथिकाओं के भीतर रहता है। यह जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में बदल देता है, जिसे पौधा सोखकर प्रोटीन बना सकता है, और बदले में पौधा जीवाणु को आश्रय तथा प्रकाश संश्लेषण से बनी शर्करा देता है। दोनों साझेदारों को लाभ होने से यह सहोपकारिता है, और इसी कारण मृदा की उपजाऊ शक्ति लौटाने के लिए फसल चक्र में दलहन बोया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पौधे को हानि नहीं होती, उसकी वृद्धि वास्तव में सुधरती है। विकल्प B गलत है क्योंकि अमेंसलिज्म में एक जाति को हानि और दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि परभक्षण में एक जीव दूसरे को मारकर खाता है, जो इस साझेदारी का वर्णन नहीं करता।
पेनिसिलियम कवक द्वारा पेनिसिलिन का स्राव, जो आसपास के जीवाणुओं को मार देता है, किसका मानक उदाहरण है?
- A.अमेंसलिज्म
- B.सहभोजिता
- C.परजीविता
- D.सहोपकारिता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, अमेंसलिज्म है। अमेंसलिज्म में एक जाति को हानि होती है और दूसरी को न लाभ होता है न हानि, जिसे ऋण और शून्य से लिखा जाता है। पेनिसिलियम अपने परिवेश में पेनिसिलिन छोड़ता है और यह प्रतिजैविक आसपास के जीवाणुओं को मार देता है या उनकी वृद्धि रोक देता है, फिर भी कवक को उनकी मृत्यु से कोई मापनीय लाभ नहीं मिलता। किसी जीव द्वारा दूसरी जाति के विरुद्ध वृद्धिरोधक रसायन छोड़ने को एलीलोपैथी भी कहा जाता है, जैसे कुछ वृक्षों की पत्तियों का कचरा उनके नीचे अन्य पौधों के अंकुरण को रोक देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि सहभोजिता में एक को लाभ और दूसरी पर कोई प्रभाव नहीं होता, हानि नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि परजीवी जीवित पोषी से भोजन लेकर लाभ उठाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सहोपकारिता में दोनों जातियों को लाभ चाहिए।
भारत में ब्रूड परजीविता का श्रेष्ठ उदाहरण कोयल द्वारा किस पक्षी के घोंसले में अंडे देना है?
- A.कौआ
- B.गौरैया
- C.कबूतर
- D.मैना
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, कौआ है। ब्रूड परजीविता दूसरी जाति के घोंसले में अंडे देकर उनके सेने और बच्चों के पालन का भार पोषी पक्षी पर छोड़ देने की आदत है। एशियाई कोयल, जो कुकू कुल की है, कौए के घोंसले में अंडे देती है, और प्राकृतिक वरण ने कोयल के अंडों को आकार तथा रंग में कौए के अंडों से इतना मिलता-जुलता बना दिया है कि कौआ उन्हें पहचान नहीं पाता। पोषी को हानि होती है क्योंकि वह अपनी ऊर्जा दूसरे पक्षी के बच्चे पालने में लगा देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि घरेलू गौरैया कोयल की नियमित पोषी नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि कबूतर का घोंसला ढीला-ढाला होता है और उस पर इस प्रकार परजीविता नहीं होती। विकल्प D गलत है क्योंकि मैना कोटरों में घोंसला बनाती है, जिनका कोयल उपयोग नहीं करती; पाठ्यपुस्तक का पोषी कौआ ही है।
कवकमूल किनके बीच का संबंध है?
- A.शैवाल और कवक
- B.कवक और उच्च पादप की जड़ें
- C.जीवाणु और पत्ती
- D.कवक और कीट
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, कवक और उच्च पादप की जड़ें है। कवकमूल में कवक के तंतु पौधे की सूक्ष्म जड़ों के चारों ओर या उनके भीतर बढ़ते हैं और उस सतह को बहुत बढ़ा देते हैं जिससे मृदा से खनिज, विशेषकर फॉस्फोरस, अवशोषित हो सकते हैं। कवक ये खनिज तथा अतिरिक्त जल पौधे तक पहुंचाता है और बदले में प्रकाश संश्लेषण से बनी शर्करा पाता है, इसलिए दोनों साझेदारों को लाभ होता है और संबंध सहोपकारिता है। उदाहरण के लिए चीड़ के पौधे अपने कवकमूल के बिना मृदा में ठीक से नहीं बढ़ते। विकल्प A गलत है क्योंकि शैवाल और कवक का संबंध लाइकेन कहलाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि इस नाम से कोई मानक संबंध वर्णित नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि कवक उगाने वाली दीमक और चींटियां अलग उदाहरण हैं और उन्हें कवकमूल नहीं कहते।
स्कॉटलैंड के चट्टानी समुद्र तट पर जोसेफ कॉनेल के अध्ययन में बड़ा बार्नेकल बैलेनस छोटे कैथेमैलस को ज्वारनद क्षेत्र से हटा देता पाया गया। यह किसे दर्शाता है?
- A.अंतरजातीय प्रतिस्पर्धा
- B.सहोपकारिता
- C.ब्रूड परजीविता
- D.सहभोजिता
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर A, अंतरजातीय प्रतिस्पर्धा है। कॉनेल ने क्षेत्र में दिखाया कि स्कॉटलैंड के तट की ज्वारनद चट्टानों पर बड़ा और तेज बढ़ने वाला बार्नेकल बैलेनस जहां भी छोटे कैथेमैलस के साथ बसता है, उसे भौतिक रूप से हटा देता है, जिससे कैथेमैलस केवल तट के ऊपरी भाग में बचता है, जहां बैलेनस खुलेपन को सहन नहीं कर पाता। दोनों जातियों को एक ही सीमित संसाधन, अर्थात चट्टान पर स्थान चाहिए, और दोनों को दूसरे की उपस्थिति से हानि होती है, जो प्रतिस्पर्धा का ऋण और ऋण प्रारूप है। इस अध्ययन को गॉस के प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत का क्षेत्रीय प्रमाण भी माना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि किसी भी बार्नेकल को दूसरे से लाभ नहीं होता। विकल्प C गलत है क्योंकि ब्रूड परजीविता पक्षियों के दूसरे घोंसले में अंडे देने से संबंधित है। विकल्प D गलत है क्योंकि सहभोजिता में एक जाति पर कोई प्रभाव न पड़ना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परभक्षी और परजीवी में क्या अंतर है?
परभक्षी सामान्यतः अपने शिकार से बड़ा होता है, उसे मारकर एक ही बार में खा जाता है और उस पर रहता नहीं। परजीवी अपने पोषी से छोटा होता है, लंबे समय तक उसके ऊपर या भीतर रहता है, धीरे-धीरे उससे भोजन लेता है और उसे शीघ्र मारने से बचता है, क्योंकि पोषी की मृत्यु से परजीवी का भोजन और आश्रय दोनों समाप्त हो जाते हैं।
क्लाउनफिश और समुद्री एनीमोन का संबंध सहोपकारिता है या सहभोजिता?
पाठ्यपुस्तकें इसे सहभोजिता के उदाहरणों में गिनती हैं, क्योंकि क्लाउनफिश को दंशकारी स्पर्शकों से सुरक्षा मिलती है और एनीमोन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। अनेक क्षेत्रीय अध्ययन इसे सहोपकारिता मानते हैं, क्योंकि मछली एनीमोन के शत्रुओं को भी भगाती है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न में निर्धारित पाठ्यपुस्तक के अनुसार सहभोजिता ही उत्तर दें।
लाइकेन किस प्रकार का संबंध दर्शाता है?
सहोपकारिता। लाइकेन शैवाल और कवक की साझेदारी है, जिसमें शैवाल प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाता है और कवक जल, खनिज तथा आधार देता है। कोई भी साझेदार नग्न चट्टान पर अकेला नहीं जी सकता, इसलिए यह अनिवार्य सहोपकारिता का उदाहरण है और लाइकेन चट्टान पर अनुक्रमण की अग्रगामी जाति कहलाते हैं।
प्रतिस्पर्धी अपवर्जन सिद्धांत क्या है?
जी. एफ. गॉस द्वारा दिया गया यह सिद्धांत कहता है कि एक ही स्थान पर ठीक एक ही सीमित संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती दो जातियां अनिश्चित काल तक साथ नहीं रह सकतीं; प्रतिस्पर्धा में दुर्बल जाति अंततः उस आवास से हट जाती है। साथ रहने वाली जातियां संसाधन को समय, स्थान या आकार के आधार पर बांट लेती हैं, जिसे संसाधन विभाजन कहते हैं।
कीस्टोन जाति क्या है?
कीस्टोन जाति वह है जिसकी उपस्थिति समुदाय की संरचना को संभाले रखती है, इसलिए उसके हटने पर विविधता असमान रूप से गिर जाती है। रॉबर्ट पेन द्वारा प्रशांत तट की चट्टानी कुंडों से हटाई गई तारामीन पाइसैस्टर इसका श्रेष्ठ उदाहरण है; उसके हटने के बाद दस से अधिक अकशेरुकी जातियां समाप्त हो गईं।
अमेंसलिज्म का एक उदाहरण दीजिए।
पेनिसिलियम कवक पेनिसिलिन स्रावित करता है, जो आसपास के जीवाणुओं को मार देता है, जबकि कवक को उनकी मृत्यु से न लाभ होता है न हानि। किसी पादप या सूक्ष्मजीव द्वारा दूसरी जाति के विरुद्ध वृद्धिरोधक रसायन छोड़ने को एलीलोपैथी भी कहते हैं, और यह अमेंसलिज्म का सर्वाधिक उद्धृत उदाहरण है।
स्रोत
- जीव विज्ञान (कक्षा 12), जीव और समष्टियां: समष्टि अंतरक्रिया — एनसीईआरटी
- जीव विज्ञान (कक्षा 12), पारितंत्र: पोषी स्तर और ऊर्जा प्रवाह — एनसीईआरटी
- विज्ञान (कक्षा 10), हमारा पर्यावरण: आहार श्रृंखला और आहार जाल — एनसीईआरटी





