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GK नोट्सपर्यावरण और पारिस्थितिकीओज़ोन परत और अम्लीय वर्षा

ओज़ोन परत और अम्लीय वर्षा: कारण, प्रभाव, संधियाँ

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ओज़ोन परत और अम्लीय वर्षा के पूर्ण नोट्स: ओज़ोन छिद्र, ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और अम्लीय वर्षा से होने वाली हानि।

लेखक · प्रकाशित · 4 मिनट

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ओज़ोन परत और अम्लीय वर्षा: कारण, प्रभाव, संधियाँ — GK24 title card
ओज़ोन परत और अम्लीय वर्षा: कारण, प्रभाव, संधियाँ — GK24 title card

प्रदूषण के ये दो पुराने विषय हर पाठ्यक्रम में साथ रखे जाते हैं, क्योंकि दोनों उन गैसों से होते हैं जो वहाँ से बहुत दूर छोड़ी जाती हैं जहाँ हानि दिखाई देती है। ओज़ोन क्षय समतापमंडल की वैश्विक समस्या है और अम्लीय वर्षा निचले वायुमंडल की क्षेत्रीय समस्या। परीक्षाएँ पूछती हैं कि कौन गैस क्या करती है, कौन संधि किस पदार्थ से जुड़ी है, और कौन इकाई या तिथि कहाँ आती है।

ओज़ोन: ऊपर अच्छी, नीचे बुरी

ओज़ोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं का अणु है, जिसे O3 लिखते हैं; यह हल्की नीली, तीखी गंध वाली और अत्यधिक क्रियाशील होती है। इसका लगभग नब्बे प्रतिशत भाग समतापमंडल में, धरातल से लगभग पंद्रह से पैंतीस किलोमीटर ऊपर रहता है, जहाँ पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणुओं को तोड़ती हैं और मुक्त परमाणु दूसरे ऑक्सीजन अणुओं से जुड़कर ओज़ोन बनाते हैं। यह परत सूर्य की अधिकांश हानिकारक पराबैंगनी विकिरण सोख लेती है और इसे अच्छी ओज़ोन कहा जाता है। धरातल के पास ओज़ोन द्वितीयक प्रदूषक है: वह सीधे नहीं निकलती, बल्कि वाहनों और उद्योगों से आए नाइट्रोजन ऑक्साइड तथा वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया से बनती है, और वही प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे का मुख्य घटक है, जो आँखों तथा फेफड़ों में जलन करती है और फसलों को नुकसान पहुँचाती है। ओज़ोन स्तंभ की मोटाई डॉब्सन इकाई में मापी जाती है।

ओज़ोन छिद्र और उसके कारण

अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन के भारी मौसमी क्षय की सूचना ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने 1985 में दी और उसे ओज़ोन छिद्र कहा जाता है। यह अंटार्कटिक बसंत में दिखाई देता है, क्योंकि ध्रुवीय शीत ऋतु की अत्यधिक ठंड से ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल बनते हैं और ध्रुवीय भँवर वायु को घेर लेता है, जिससे क्रियाशील क्लोरीन जमा होती रहती है और सूर्य का प्रकाश लौटते ही ओज़ोन तेजी से नष्ट होने लगती है। इसके लिए उत्तरदायी पदार्थों को ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ कहते हैं।

पदार्थकहाँ प्रयोग होता था
क्लोरोफ्लोरो कार्बनप्रशीतक, एरोसोल स्प्रे, फोम निर्माण
हैलॉनअग्निशामक यंत्र
कार्बन टेट्राक्लोराइड और मेथिल क्लोरोफॉर्मविलायक और सफाई के रसायन
मेथिल ब्रोमाइडमृदा और फसल का धूमन

इन यौगिकों से निकला एक क्लोरीन परमाणु समाप्त होने से पहले ओज़ोन के बहुत बड़ी संख्या में अणु नष्ट कर सकता है, इसीलिए थोड़ी मात्रा भी इतनी हानि करती है। पतली परत का परिणाम धरातल पर अधिक पराबैंगनी विकिरण है, और इससे मनुष्यों में त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, समुद्री खाद्य शृंखला के आधार प्लवक को हानि, और संवेदनशील फसलों की उपज में गिरावट होती है।

संधियाँ

  • ओज़ोन परत के संरक्षण के लिए वियना अभिसमय 1985 में रूपरेखा समझौते के रूप में अपनाया गया
  • ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में अपनाया गया और वही वह संधि है जो चरणबद्ध समाप्ति की समय सारणी तय करती है
  • 2016 के किगाली संशोधन ने हाइड्रोफ्लोरो कार्बन को, जो ओज़ोन को हानि नहीं पहुँचाते परंतु प्रबल ग्रीनहाउस गैस हैं, घटाई जाने वाली सूची में जोड़ा
  • सोलह सितंबर ओज़ोन परत संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जो मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर के दिन की स्मृति में मनाया जाता है

अम्लीय वर्षा

वर्षा स्वाभाविक रूप से थोड़ी अम्लीय होती है, लगभग 5.6 पीएच के आसपास, क्योंकि उसमें कार्बन डाइऑक्साइड घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है। जब वर्षा का पीएच इस स्तर से नीचे चला जाए तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं। इसका कारण सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड हैं, जो तापीय बिजलीघरों, प्रगालकों, रिफाइनरियों और वाहनों में कोयला तथा तेल जलने पर निकलते हैं। वायुमंडल में इनका ऑक्सीकरण होता है और ये जल की बूँदों में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं, जो वर्षा, हिम और कोहरे के साथ आर्द्र निक्षेपण के रूप में गिरते हैं या अम्लीय कणों के शुष्क निक्षेपण के रूप में बैठ जाते हैं। अम्लीय वर्षा शब्द का प्रयोग रसायनज्ञ रॉबर्ट एंगस स्मिथ ने उन्नीसवीं शताब्दी में औद्योगिक मैनचेस्टर की वायु के अध्ययन के बाद किया था।

अम्लीय वर्षा से क्या होता है

  • झीलें और जलधाराएँ अम्लीय हो जाती हैं, मछलियों के अंडे नहीं फूटते और संवेदनशील प्रजातियाँ लुप्त हो जाती हैं
  • मृदा से कैल्शियम तथा मैग्नीशियम निक्षालन से निकल जाते हैं और एल्युमिनियम मुक्त होता है, जो जड़ों को हानि पहुँचाता है
  • वन क्षतिग्रस्त होते हैं, वृक्षों के शिखर पतले पड़ जाते हैं और वृद्धि धीमी हो जाती है
  • संगमरमर तथा चूना पत्थर की इमारतें क्षरित होती हैं क्योंकि अम्ल कैल्शियम कार्बोनेट पर आक्रमण करता है; ताजमहल के संगमरमर का पीला पड़ना और गड्ढेदार होना संगमरमर कैंसर कहलाता है
  • धातु संरचनाएँ, पुल और पाइपलाइनें तेजी से जंग खाती हैं और स्मारकों की नक्काशी घिस जाती है

उपाय स्वच्छ ईंधन और स्वच्छ दहन हैं। फ्लू गैस डीसल्फराइजेशन इकाइयाँ बिजलीघरों की चिमनी से सल्फर डाइऑक्साइड हटाती हैं, कम सल्फर वाला कोयला तथा तेल उसे स्रोत पर ही घटाते हैं, उत्प्रेरक परिवर्तक और कड़े वाहन उत्सर्जन मानक नाइट्रोजन ऑक्साइड कम करते हैं, और प्रभावित झीलों में कभी-कभी चूना डालकर पीएच सुधारा जाता है। चूँकि ये प्रदूषक हवा के साथ सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, अम्लीय वर्षा प्रायः उस देश में गिरती है जिसने वे गैसें छोड़ी ही नहीं थीं, इसीलिए इसे सीमापारीय समस्या माना जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्नपत्र लगभग हर सत्र में अच्छी और बुरी ओज़ोन का भेद पूछते हैं, इसलिए ऐसे कथन के लिए तैयार रहिए कि धरातल की ओज़ोन हानिकारक है और समतापमंडल की ओज़ोन रक्षक; दोनों एक साथ सही हैं। संधियों की जोड़ियाँ ठीक-ठीक याद कीजिए: 1985 का वियना अभिसमय रूपरेखा, 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल नियंत्रण संधि, और हाइड्रोफ्लोरो कार्बन के लिए 2016 का किगाली संशोधन, जो ग्रीनहाउस गैस हैं, ओज़ोन क्षयकारी नहीं। डॉब्सन इकाई, ओज़ोन छिद्र के लिए 1985 और सोलह सितंबर वे छोटे तथ्य हैं जो एक अंक तय कर देते हैं। अम्लीय वर्षा के लिए याद रखिए कि गैसें सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड हैं, कार्बन डाइऑक्साइड नहीं, सीमा पीएच लगभग 5.6 है, और संगमरमर कैंसर स्मारकों के कैल्शियम कार्बोनेट के क्षरण को कहते हैं। एक बार-बार आने वाला जाल यह पूछता है कि क्या ओज़ोन छिद्र वैश्विक तापन करता है: नहीं करता, यद्यपि कई ओज़ोन क्षयकारी पदार्थ स्वयं ग्रीनहाउस गैस भी हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

ओज़ोनO3, ऑक्सीजन के तीन परमाणु, समतापमंडल में केंद्रित
ओज़ोन परत की ऊँचाईधरातल से लगभग 15 से 35 किलोमीटर
मापन की इकाईडॉब्सन इकाई, ओज़ोन स्तंभ की मोटाई के लिए
ओज़ोन छिद्र1985 में अंटार्कटिका के ऊपर बताया गया, अंटार्कटिक बसंत में दिखता है
प्रमुख ओज़ोन क्षयकारी पदार्थक्लोरोफ्लोरो कार्बन, हैलॉन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मेथिल ब्रोमाइड
वियना अभिसमय1985, ओज़ोन परत की रक्षा के लिए रूपरेखा समझौता
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल1987, ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों की चरणबद्ध समाप्ति की संधि
किगाली संशोधन2016, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन में चरणबद्ध कमी
अम्लीय वर्षा की सीमापीएच लगभग 5.6 से नीचे
अम्लीय वर्षा की गैसेंसल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: RRB JE · 29 Aug 2019मध्यम

ओज़ोन के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?

  1. A.सभी विकल्प
  2. B.ओज़ोन अत्यधिक क्रियाशील है
  3. C.ओज़ोन हमें सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से बचाती है
  4. D.ओज़ोन प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे का प्रमुख घटक है
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. सभी विकल्प

व्याख्या

सही उत्तर A, सभी विकल्प है। शेष तीनों कथन अपने आप में सही हैं, और इसी कारण संयुक्त विकल्प ही उत्तर बनता है। विकल्प B उत्तर नहीं बल्कि एक सत्य कथन है: ओज़ोन में ऑक्सीजन के तीन परमाणु होते हैं, वह अस्थायी है और प्रबल ऑक्सीकारक है, इसीलिए जल के कीटाणुशोधन में प्रयुक्त होती है। विकल्प C भी सत्य है: समतापमंडल की ओज़ोन सूर्य की अधिकांश पराबैंगनी विकिरण सोख लेती है और जीवों को त्वचा कैंसर तथा मोतियाबिंद से बचाती है। विकल्प D भी सत्य है, परंतु धरातल की ओज़ोन के लिए, जो वाहनों तथा उद्योगों से आए नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन पर सूर्य के प्रकाश की क्रिया से द्वितीयक प्रदूषक के रूप में बनती है और प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे का मुख्य घटक है। चूँकि B, C और D तीनों सही हैं, इनमें से कोई अकेला उत्तर नहीं हो सकता और विकल्प A चुनना पड़ेगा। ओज़ोन का यही अच्छा और बुरा स्वभाव यहाँ परखा जा रहा है।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: SSC MTS · 5 August 2019, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से कौन द्वितीयक प्रदूषक है?

  1. A.कार्बन मोनोऑक्साइड
  2. B.धूम कोहरा
  3. C.कार्बन डाइऑक्साइड
  4. D.फ्लाई ऐश
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. धूम कोहरा

व्याख्या

सही उत्तर B, धूम कोहरा है। प्राथमिक प्रदूषक सीधे स्रोत से निकलता है, जबकि द्वितीयक प्रदूषक वायुमंडल में प्राथमिक प्रदूषकों की आपसी अभिक्रिया से बनता है। प्रकाश रासायनिक धूम कोहरा तब बनता है जब सूर्य का प्रकाश नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों पर क्रिया करके ओज़ोन तथा अन्य जलनकारी पदार्थ बनाता है, इसलिए वही उत्कृष्ट द्वितीयक प्रदूषक है और धरातलीय ओज़ोन भी उसी के साथ गिनी जाती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड सीधे इंजन या चूल्हे से तब निकलती है जब ईंधन पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना जलता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड दहन और श्वसन से सीधे निकलती है। विकल्प D गलत है क्योंकि फ्लाई ऐश तापीय बिजलीघर की चिमनी से निकलने वाला सूक्ष्म कण पदार्थ है, जो जैसा बनता है वैसा ही उत्सर्जित होता है। यही भेद अम्लीय वर्षा पर भी लागू होता है, जहाँ सल्फ्यूरिक तथा नाइट्रिक अम्ल प्राथमिक गैसों से बने द्वितीयक उत्पाद हैं।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC General Studies 2020कठिन

निम्नलिखित में से कौन वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से पाई जाने वाली ग्रीनहाउस गैस नहीं है?

  1. A.नाइट्रोजन ऑक्साइड
  2. B.कार्बन डाइऑक्साइड
  3. C.मीथेन
  4. D.ओज़ोन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नाइट्रोजन ऑक्साइड

व्याख्या

सही उत्तर A, नाइट्रोजन ऑक्साइड है। नाइट्रिक ऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, जिन्हें मिलाकर नाइट्रोजन ऑक्साइड कहा जाता है, मुख्यतः वाहनों तथा बिजलीघरों के दहन से निकलने वाले वायु प्रदूषक हैं; वे धूम कोहरा और अम्लीय वर्षा बनाने में सहायक हैं, परंतु प्राकृतिक वायुमंडल की ग्रीनहाउस गैसों में नहीं गिने जाते। इस परिवार की जो गैस ग्रीनहाउस गैस है वह नाइट्रस ऑक्साइड है, जो एक भिन्न यौगिक है, इसलिए नाम ध्यान से पढ़िए। विकल्प B उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड श्वसन, अपघटन और ज्वालामुखी से प्राकृतिक रूप से आती है और प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है। विकल्प C गलत है क्योंकि मीथेन आर्द्रभूमियों और पशुओं के पाचन से प्राकृतिक रूप से निकलती है तथा प्रबल ग्रीनहाउस गैस है। विकल्प D गलत है क्योंकि ओज़ोन समतापमंडल में प्राकृतिक रूप से मिलती है, ग्रीनहाउस गैसों में गिनी जाती है और धरातल के पास प्रदूषक के रूप में भी बनती है। यहाँ जाल नाइट्रोजन ऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड की समानता है।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

पृथ्वी को पराबैंगनी विकिरण से बचाने वाली ओज़ोन परत वायुमंडल के किस स्तर में है?

  1. A.क्षोभमंडल
  2. B.समतापमंडल
  3. C.मध्यमंडल
  4. D.तापमंडल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. समतापमंडल

व्याख्या

सही उत्तर B, समतापमंडल है। वायुमंडल की लगभग नब्बे प्रतिशत ओज़ोन समतापमंडल में, धरातल से लगभग पंद्रह से पैंतीस किलोमीटर ऊपर रहती है, जहाँ पराबैंगनी किरणें ऑक्सीजन अणुओं को तोड़ती हैं और मुक्त परमाणु दूसरे ऑक्सीजन अणुओं से मिलकर ओज़ोन बनाते हैं। वहाँ पराबैंगनी विकिरण के अवशोषण के कारण ही इस स्तर में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता है। विकल्प A गलत है क्योंकि क्षोभमंडल सबसे निचला स्तर है, जहाँ मौसम की घटनाएँ होती हैं और ओज़ोन केवल धूम कोहरे में प्रदूषक के रूप में मिलती है। विकल्प C गलत है क्योंकि मध्यमंडल समतापमंडल के ऊपर है, सबसे ठंडा स्तर है और वहीं उल्काएँ जलती हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि तापमंडल बहुत ऊपर है, उसमें रेडियो तरंगें परावर्तित करने वाला आयनमंडल है और वहाँ वायु इतनी विरल है कि ओज़ोन परत नहीं बन सकती। स्तरों का क्रम तैयार रखिए, क्योंकि प्रश्नपत्र इसके साथ यह भी पूछते हैं कि किस स्तर में ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ता या घटता है।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

वायुमंडल में ओज़ोन स्तंभ की मोटाई किस इकाई में मापी जाती है?

  1. A.डॉब्सन इकाई
  2. B.क्यूरी
  3. C.डेसिबल
  4. D.एंगस्ट्रॉम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. डॉब्सन इकाई

व्याख्या

सही उत्तर A, डॉब्सन इकाई है। वायुमंडलीय ओज़ोन मापने का उपकरण बनाने वाले वैज्ञानिक के नाम पर बनी यह इकाई बताती है कि यदि सारी ओज़ोन को मानक ताप और दाब पर धरातल तक ले आया जाए तो उसकी परत कितनी मोटी होगी; सौ डॉब्सन इकाई एक मिलीमीटर मोटी परत के बराबर होती है। विकल्प B गलत है क्योंकि क्यूरी रेडियोसक्रियता की इकाई है, जो किसी पदार्थ के क्षय की दर बताती है। विकल्प C गलत है क्योंकि डेसिबल ध्वनि की प्रबलता मापता है और ध्वनि प्रदूषण के मानकों में प्रयुक्त होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एंगस्ट्रॉम लंबाई की इकाई है, जो एक मीटर का दस अरबवाँ भाग है और परमाणुओं तथा प्रकाश की तरंगदैर्घ्य के लिए काम आती है, गैस के स्तंभ के लिए नहीं। डॉब्सन इकाई को 1985 के साथ याद रखिए, जब अंटार्कटिका के ऊपर ओज़ोन के क्षय की सूचना दी गई थी।

Q6.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

1987 में अपनाया गया मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?

  1. A.ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
  2. B.ओज़ोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ
  3. C.खतरनाक अपशिष्ट का सीमापारीय आवागमन
  4. D.आर्द्रभूमियों का संरक्षण
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ओज़ोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ

व्याख्या

सही उत्तर B, ओज़ोन परत का क्षय करने वाले पदार्थ है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1985 के वियना अभिसमय के अंतर्गत 1987 में अपनाया गया और यह वह समय सारणी तय करता है जिसके अनुसार देशों को क्लोरोफ्लोरो कार्बन, हैलॉन, कार्बन टेट्राक्लोराइड, मेथिल क्लोरोफॉर्म तथा मेथिल ब्रोमाइड का उत्पादन और उपयोग बंद करना है। विकल्प A गलत है क्योंकि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन और उसके अंतर्गत हुए समझौतों का विषय है, यद्यपि 2016 के किगाली संशोधन ने ग्रीनहाउस गैस हाइड्रोफ्लोरो कार्बन को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में जोड़ दिया। विकल्प C गलत है क्योंकि खतरनाक अपशिष्ट का सीमापारीय आवागमन बासेल अभिसमय से नियंत्रित होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि आर्द्रभूमियाँ रामसर अभिसमय के अंतर्गत आती हैं। हर अभिसमय को उसके एक विषय से जोड़ लेना सबसे तेज तैयारी है, क्योंकि ऐसा प्रश्न पर्यावरण खंड में लगभग हमेशा आता है।

Q7.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

अम्लीय वर्षा मुख्यतः किन गैसों के वायुमंडल में छोड़े जाने से होती है?

  1. A.कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन
  2. B.सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  3. C.कार्बन मोनोऑक्साइड और ओज़ोन
  4. D.क्लोरोफ्लोरो कार्बन और हैलॉन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड

व्याख्या

सही उत्तर B, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड है। ये गैसें तापीय बिजलीघरों, प्रगालकों और वाहनों में कोयला तथा तेल जलने से निकलती हैं, वायुमंडल में ऑक्सीकृत होती हैं और जल की बूँदों में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल तथा नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जो अम्लीय वर्षा के रूप में गिरते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन ग्रीनहाउस गैसें हैं; कार्बन डाइऑक्साइड घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल अवश्य बनाती है, परंतु उससे सामान्य वर्षा केवल थोड़ी अम्लीय, लगभग 5.6 पीएच की होती है, और उसे अम्लीय वर्षा नहीं कहते। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन मोनोऑक्साइड विषैली गैस है जो प्रबल अम्ल नहीं बनाती, और धरातलीय ओज़ोन धूम कोहरे में जलन पैदा करने वाला पदार्थ है, अम्लता का स्रोत नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि क्लोरोफ्लोरो कार्बन और हैलॉन समतापमंडलीय ओज़ोन नष्ट करते हैं और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का विषय हैं, जो अम्लीय वर्षा से अलग समस्या है।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

संगमरमर कैंसर शब्द किसे कहते हैं?

  1. A.अम्लीय प्रदूषकों से संगमरमर के स्मारकों का क्षरण
  2. B.संगमरमर काटने वाले खदान मजदूरों का रोग
  3. C.संगमरमर के फर्श पर शैवाल का उगना
  4. D.तापमान की अति से संगमरमर का चटकना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अम्लीय प्रदूषकों से संगमरमर के स्मारकों का क्षरण

व्याख्या

सही उत्तर A है। संगमरमर कैल्शियम कार्बोनेट है, और प्रदूषित वायु की सल्फर डाइऑक्साइड तथा अम्लीय वर्षा का सल्फ्यूरिक अम्ल उससे अभिक्रिया करके कैल्शियम सल्फेट बनाते हैं, जिससे पत्थर की चमक जाती रहती है, वह पीला पड़ता है और गड्ढेदार तथा परतदार हो जाता है। इसी हानि को संगमरमर कैंसर कहते हैं, और इसकी चर्चा सबसे अधिक आगरा के ताजमहल के संदर्भ में होती है, इसीलिए उसके आसपास के उद्योगों पर नियंत्रण रखा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि पत्थर की धूल साँस में जाने से होने वाला फेफड़े का रोग सिलिकोसिस है, जो बिल्कुल अलग विषय है। विकल्प C गलत है क्योंकि शैवाल का उगना जैविक धब्बा है, जिसे साफ किया जा सकता है, और इस शब्द का वह अर्थ नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि ताप से चटकना भौतिक अपक्षय की प्रक्रिया है, जो अनेक चट्टानों में होती है और प्रदूषण से उसका संबंध नहीं। याद रखिए कि संगमरमर या चूना पत्थर का हर स्मारक संवेदनशील है, क्योंकि दोनों कैल्शियम कार्बोनेट हैं।

Q9.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

ओज़ोन परत संरक्षण का अंतरराष्ट्रीय दिवस किस दिन मनाया जाता है?

  1. A.5 जून
  2. B.22 अप्रैल
  3. C.16 सितंबर
  4. D.2 दिसंबर
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 16 सितंबर

व्याख्या

सही उत्तर C, 16 सितंबर है। यह दिवस 1987 में ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर की स्मृति में है और हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विषय के साथ मनाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पाँच जून विश्व पर्यावरण दिवस है, जो 1972 के स्टॉकहोम सम्मेलन के आरंभ की याद दिलाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि बाईस अप्रैल पृथ्वी दिवस है। विकल्प D गलत है क्योंकि दो दिसंबर भारत में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो 1984 की भोपाल गैस त्रासदी की स्मृति में है। पर्यावरण खंड इन चारों तिथियों को प्रायः एक ही प्रश्न में रखता है, इसलिए इन्हें जैव विविधता के लिए बाईस मई और आर्द्रभूमियों के लिए दो फरवरी के साथ एक समूह में याद कीजिए।

Q10.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में 2016 का किगाली संशोधन किसमें चरणबद्ध कमी की व्यवस्था करता है?

  1. A.क्लोरोफ्लोरो कार्बन
  2. B.हाइड्रोफ्लोरो कार्बन
  3. C.सल्फर डाइऑक्साइड
  4. D.मेथिल ब्रोमाइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हाइड्रोफ्लोरो कार्बन

व्याख्या

सही उत्तर B, हाइड्रोफ्लोरो कार्बन है। प्रशीतन और वातानुकूलन में क्लोरोफ्लोरो कार्बन के स्थान पर हाइड्रोफ्लोरो कार्बन अपनाए गए क्योंकि वे ओज़ोन परत को हानि नहीं पहुँचाते, परंतु वे बहुत प्रबल ग्रीनहाउस गैस निकले, इसलिए 2016 के किगाली संशोधन ने उन्हें उपयोग घटाने की समय सारणी के साथ मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के दायरे में ले लिया। विकल्प A गलत है क्योंकि क्लोरोफ्लोरो कार्बन 1987 के मूल प्रोटोकॉल में ही शामिल थे और उनका उत्पादन उसी के अंतर्गत समाप्त किया जा चुका है। विकल्प C गलत है क्योंकि अम्लीय वर्षा का मुख्य कारण सल्फर डाइऑक्साइड राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता कानूनों और उत्सर्जन मानकों से नियंत्रित होता है, इस संधि से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मृदा के धूमन में प्रयुक्त मेथिल ब्रोमाइड भी ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों की मूल सूची का भाग है। यहाँ यही परखा जा रहा है कि किगाली एक ओज़ोन संधि के माध्यम से जलवायु गैस पर काम करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओज़ोन को अच्छी और बुरी दोनों क्यों कहा जाता है?

समतापमंडल में वह हानिकारक पराबैंगनी विकिरण सोखकर जीवन की रक्षा करती है, इसलिए अच्छी ओज़ोन है। धरातल पर वह सूर्य के प्रकाश में बनने वाला द्वितीयक प्रदूषक है, प्रकाश रासायनिक धूम कोहरे का मुख्य भाग है और फेफड़ों तथा फसलों को हानि पहुँचाती है।

ओज़ोन छिद्र अंटार्कटिका के ऊपर ही क्यों बनता है?

ध्रुवीय शीत ऋतु की अत्यधिक ठंड से ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल बनते हैं और ध्रुवीय भँवर वायु को घेर लेता है। क्रियाशील क्लोरीन इन बादल कणों पर जमा होती जाती है और बसंत में सूर्य का प्रकाश लौटते ही ओज़ोन तेजी से नष्ट कर देती है।

वियना अभिसमय और मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल में क्या अंतर है?

1985 का वियना अभिसमय एक रूपरेखा समझौता है, जो ओज़ोन परत की रक्षा का संकल्प बताता है। 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल उसी के अंतर्गत काम करने वाली संधि है, जो तय करती है कि कौन पदार्थ कब तक समाप्त करने हैं।

सामान्य वर्षा भी थोड़ी अम्लीय क्यों होती है?

हवा की कार्बन डाइऑक्साइड वर्षा जल में घुलकर दुर्बल कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जिससे पीएच लगभग 5.6 रहता है। जब सल्फ्यूरिक और नाइट्रिक अम्ल के कारण पीएच इससे नीचे जाए, तभी उसे अम्लीय वर्षा कहा जाता है।

संगमरमर कैंसर क्या है?

अम्लीय प्रदूषकों से संगमरमर के स्मारकों का क्षरण। सल्फर डाइऑक्साइड और अम्लीय वर्षा संगमरमर के कैल्शियम कार्बोनेट पर आक्रमण करते हैं, जिससे वह पीला और गड्ढेदार हो जाता है; यह हानि सबसे अधिक ताजमहल के संदर्भ में चर्चा में रहती है।

स्रोत

  • विज्ञान (कक्षा X), अध्याय 13: हमारा पर्यावरण — एनसीईआरटी
  • ओज़ोन क्षयकारी पदार्थों पर मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल, 1987 — संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
  • ओज़ोन प्रकोष्ठ, भारत में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल संबंधी कार्य — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार
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