भारत में नवीकरणीय ऊर्जा: स्रोत, मिशन और प्रश्न
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के परीक्षोपयोगी नोट्स: सौर, पवन, जल, जैव, भूतापीय और ज्वारीय ऊर्जा, संबंधित मंत्रालय, मिशन तथा जलवायु प्रतिबद्धताएं।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

ऊर्जा स्रोतों को परंपरागत और गैर-परंपरागत में, या इस अध्याय की अधिक उपयोगी भाषा में अनवीकरणीय और नवीकरणीय में बांटा जाता है। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और नाभिकीय ईंधन सीमित भंडार में हैं और उपयोग से समाप्त होते जाते हैं; सूर्य का प्रकाश, पवन, बहता जल, जैव पदार्थ, पृथ्वी की ऊष्मा और ज्वार लगातार भरते रहते हैं, इसलिए वे नवीकरणीय हैं। भारत ने दूसरे समूह पर इसलिए जोर दिया है कि उसके जीवाश्म भंडार सीमित हैं, तेल का आयात बिल बड़ा है और जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताएं बिजली व्यवस्था को कोयले से दूर ले जाने की मांग करती हैं।
तुलना के लिए परंपरागत स्रोत
कोयले का वर्गीकरण उसमें कार्बन के अनुपात से होता है, जिससे यह तय होता है कि वह कितनी ऊष्मा देगा। पीट पहली और सबसे निम्न अवस्था है, जो आंशिक रूप से सड़ी वनस्पति से बनी होती है; उसके बाद लिग्नाइट या भूरा कोयला आता है; बिटुमिनस उद्योग और बिजलीघरों में सर्वाधिक प्रयुक्त श्रेणी है; और एंथ्रेसाइट सबसे कठोर, सबसे पुराना तथा सर्वोत्तम है, जिसमें कार्बन सर्वाधिक होता है और जो लगभग धुआं रहित ज्वाला से जलता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस इस जीवाश्म समूह को पूरा करते हैं। हानियां सभी में एक जैसी हैं: भंडार सीमित है, खनन भूमि को नष्ट करता है और जलाने पर कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य प्रदूषक निकलते हैं।
नवीकरणीय स्रोत
| स्रोत | कार्यविधि | भारतीय स्थल और अग्रणी राज्य |
|---|---|---|
| सौर | प्रकाश वोल्टीय सेल सूर्य प्रकाश को सीधे बिजली में बदलते हैं; सौर तापीय संयंत्र दर्पणों से भाप बनाते हैं | राजस्थान में भड़ला, कर्नाटक में पावागड़ा, आंध्र प्रदेश में कुरनूल |
| पवन | चलती वायु जनित्र से जुड़े टरबाइन को घुमाती है | तमिलनाडु में मुप्पंडल, राजस्थान में जैसलमेर; तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक अग्रणी |
| जल | गिरता जल टरबाइन चलाता है; लघु जल परियोजना पच्चीस मेगावाट तक मानी जाती है | हिमालयी नदियां और पश्चिमी घाट |
| जैव द्रव्य और बायोगैस | कृषि अवशेष, गोबर और नगरीय कचरा जलाकर या पचाकर गैस तथा बिजली | महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों का सह-उत्पादन |
| भूतापीय | चट्टान और भूजल में संचित ऊष्मा से भाप या सीधे गर्म जल | लद्दाख में पुगा घाटी, हिमाचल में मणिकर्ण, छत्तीसगढ़ में तातापानी |
| ज्वारीय और तरंग | समुद्र के उतार-चढ़ाव और तरंगों से टरबाइन चलते हैं | गुजरात में खंभात और कच्छ की खाड़ी, सुंदरबन |
भूतापीय संयंत्र परंपरागत कोयला आधारित भाप संयंत्र की तुलना में बहुत कम तापमान और दाब पर चलता है, क्योंकि ऊष्मा भट्टी से नहीं बल्कि प्राकृतिक भंडार से आती है; इससे उसकी दक्षता कम रहती है पर चालन लागत और उत्सर्जन बहुत कम।
संस्थाएं
भारत उन गिने-चुने देशों में है जहां इस क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय है। 1982 में बना गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत विभाग 1992 में पूर्ण मंत्रालय बना और 2006 में उसका नाम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय रखा गया। इसके अधीन गुरुग्राम में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान, चेन्नई में राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान और कपूरथला में राष्ट्रीय जैव ऊर्जा संस्थान काम करते हैं। 2011 में स्थापित भारतीय सौर ऊर्जा निगम तथा भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण परियोजना विकास और वित्तपोषण संभालते हैं। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001 के अंतर्गत बना ऊर्जा दक्षता ब्यूरो मांग पक्ष पर स्टार लेबलिंग और भवन संहिता के माध्यम से काम करता है।
मिशन और प्रतिबद्धताएं
2008 में जारी जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना में आठ राष्ट्रीय मिशन हैं, जिनमें जनवरी 2010 में आरंभ जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन सबसे अधिक पूछा जाता है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में भारत और फ्रांस ने संयुक्त रूप से आरंभ किया और उसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है, जिससे वह भारत में मुख्यालय वाला पहला संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन बन गया। बाद के कार्यक्रमों में किसानों के लिए सौर पंप हेतु 2019 की पीएम-कुसुम योजना, 2023 में स्वीकृत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन तथा घरों के लिए छत पर सौर योजनाएं शामिल हैं। 2021 के ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में भारत ने पंचामृत नाम से प्रतिबद्धताएं घोषित कीं, जिनमें 2030 तक पांच सौ गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन शामिल हैं; 2022 में प्रस्तुत संशोधित राष्ट्रीय अंशदान में भारत ने 2030 तक अपनी संचयी स्थापित विद्युत क्षमता का आधा भाग गैर-जीवाश्म स्रोतों से पूरा करने और अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता 2005 के स्तर से पैंतालीस प्रतिशत घटाने की बात कही है।
यह बदलाव क्यों आवश्यक है
नवीकरणीय संयंत्र एक बार बन जाने पर ईंधन नहीं मांगते, इसलिए चालन लागत लगभग स्थिर रहती है और आयातित तेल तथा कोयले की कीमत से अछूती रहती है। बिजली बनाते समय वे कार्बन डाइऑक्साइड नहीं छोड़ते और अन्य प्रदूषण भी नाममात्र होता है। छोटी इकाइयां वहीं लगाई जा सकती हैं जहां मांग है, जो ग्रिड से दूर के गांवों के लिए उपयुक्त है। सीमाएं भी उतनी ही परीक्षोपयोगी हैं: सौर और पवन रुक-रुक कर मिलते हैं और उन्हें भंडारण या भरोसेमंद विकल्प चाहिए, संयंत्र बड़ी भूमि घेरते हैं और आरंभिक लागत ऊंची रहती है। जल और ज्वारीय परियोजनाओं की अपनी पर्यावरणीय कीमत डूब क्षेत्र और तटीय पारितंत्र की क्षति के रूप में होती है, इसीलिए बड़ी परियोजनाओं का मूल्यांकन स्वीकृति से पहले किया जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार जगहों से आते हैं। पहला, वर्गीकरण ही: कौन-सा स्रोत नवीकरणीय है, और कोयले का कार्बन के अनुसार क्रम, जिसमें एंथ्रेसाइट सबसे ऊपर और पीट सबसे नीचे बार-बार पूछा जाता है। दूसरा, संस्थाएं और उनके स्थान: मंत्रालय, भारतीय सौर ऊर्जा निगम, चेन्नई का पवन संस्थान और सबसे अधिक गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय। तीसरा, मिशन और उनके वर्ष, विशेषकर 2010 का सौर मिशन और 2008 की जलवायु कार्य योजना। चौथा, स्थलों का भूगोल: भड़ला, मुप्पंडल, पुगा घाटी और खंभात की खाड़ी। गीगावाट में स्थापित क्षमता रटने से बचें, क्योंकि यह आंकड़ा हर तिमाही बदलता है और प्रश्न बैंक पुराना आंकड़ा दोहराते रहते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मंत्रालय | नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, 2006 में यह नाम |
|---|---|
| सर्वाधिक कार्बन वाला कोयला | एंथ्रेसाइट |
| कोयले की निम्नतम श्रेणी | पीट |
| राष्ट्रीय सौर मिशन | जनवरी 2010 में आरंभ |
| जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना | 2008 में जारी, आठ मिशन |
| अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन मुख्यालय | गुरुग्राम, हरियाणा |
| भारतीय सौर ऊर्जा निगम | 2011 में मंत्रालय के अधीन स्थापित |
| भूतापीय स्थल | पुगा घाटी, मणिकर्ण और तातापानी |
| ज्वारीय ऊर्जा स्थल | खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी |
| लघु जल विद्युत | पच्चीस मेगावाट तक की परियोजनाएं |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
निम्नलिखित में से किस प्रकार के कोयले में कार्बन की मात्रा सर्वाधिक होती है?
- A.बिटुमिनस
- B.लिग्नाइट
- C.पीट
- D.एंथ्रेसाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. एंथ्रेसाइट
व्याख्या
सही उत्तर D, एंथ्रेसाइट है। एंथ्रेसाइट कोयले की सबसे पुरानी और सबसे कठोर श्रेणी है, जिसमें कार्बन का अनुपात सर्वाधिक होता है, इसलिए वह अपने भार के हिसाब से सबसे अधिक ऊष्मा देता है और लगभग धुआं रहित ज्वाला से जलता है। विकल्प A गलत है क्योंकि बिटुमिनस कोयला उद्योग और बिजलीघरों में सर्वाधिक प्रयुक्त होने पर भी कार्बन में एंथ्रेसाइट से नीचे है और अधिक धुआं देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि लिग्नाइट, जिसे भूरा कोयला कहते हैं, अधिक नमी वाली निम्न श्रेणी है, जो प्रायः खदान के पास बने बिजलीघरों में जलाई जाती है। विकल्प C गलत है क्योंकि पीट इस प्रक्रिया की पहली अवस्था है, जो आंशिक रूप से सड़ी वनस्पति से अधिक कुछ नहीं, और उसमें कार्बन सबसे कम तथा नमी सबसे अधिक होती है। बढ़ता क्रम है पीट, लिग्नाइट, बिटुमिनस, एंथ्रेसाइट।
परंपरागत भाप संयंत्र की तुलना में भूतापीय संयंत्र में तापमान और दाब कैसे होते हैं?
- A.लगभग समान
- B.बहुत अधिक
- C.अधिक
- D.कम
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. कम
व्याख्या
सही उत्तर D, कम है। भूतापीय संयंत्र भाप या गर्म जल भूमिगत प्राकृतिक भंडार से लेता है, जिसका तापमान चट्टान तय करती है और जो भट्टी से मिलने वाले तापमान तक प्रायः पहुंचता ही नहीं, इसलिए टरबाइन पर तापमान और दाब दोनों कोयला आधारित भाप संयंत्र से काफी कम रहते हैं और तापीय दक्षता भी उसी अनुपात में कम रहती है। विकल्प B और C इसी कारण गलत हैं: जानबूझकर जलाई गई भट्टी से अधिक गर्म कोई प्राकृतिक भंडार नहीं होता, और अधिक बताना स्रोत की गहराई को उसके तापमान से जोड़ बैठना है। विकल्प A गलत है क्योंकि दोनों लगभग समान भी नहीं हैं; अंतर इतना बड़ा है कि भूतापीय टरबाइन अलग ढंग से बनाए जाते हैं और प्रायः कम ताप पर उबलने वाले किसी अन्य द्रव पर चलते हैं। दक्षता में जो घटता है वह ईंधन लागत और उत्सर्जन में बचत से पूरा हो जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय कहां स्थित है?
- A.नई दिल्ली
- B.गुरुग्राम, हरियाणा
- C.बेंगलुरु, कर्नाटक
- D.पेरिस, फ्रांस
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. गुरुग्राम, हरियाणा
व्याख्या
सही उत्तर B, गुरुग्राम, हरियाणा है। इस गठबंधन का सचिवालय गुरुग्राम के ग्वाल पहाड़ी में राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के परिसर में है, और चूंकि यह अपने सदस्यों के बीच एक रूपरेखा समझौते पर टिका है, इसलिए यह भारत में मुख्यालय रखने वाला पहला संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन है। विकल्प A गलत है क्योंकि गठबंधन का भारत सरकार से घनिष्ठ संबंध होने पर भी सचिवालय नई दिल्ली में नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि बेंगलुरु में नवीकरणीय ऊर्जा की अनेक कंपनियां और शोध संस्थान हैं पर गठबंधन का कोई अंग नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पेरिस वह स्थान है जहां 2015 के जलवायु सम्मेलन में भारत और फ्रांस ने इसे आरंभ किया था, और अभ्यर्थी प्रायः आरंभ के स्थान को सचिवालय का स्थान मान बैठते हैं।
जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन किस वर्ष आरंभ किया गया?
- A.2006
- B.2008
- C.2010
- D.2015
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2010
व्याख्या
सही उत्तर C, 2010 है। यह मिशन जनवरी 2010 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के आठ मिशनों में से एक के रूप में आरंभ हुआ, और इसका उद्देश्य चरणबद्ध क्षमता निर्माण तथा घरेलू विनिर्माण को सहारा देकर सौर बिजली को प्रतिस्पर्धी बनाना था। विकल्प A गलत है क्योंकि 2006 वह वर्ष है जब मंत्रालय को वर्तमान नाम नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय मिला, जो अलग पड़ाव है और प्रायः विकल्पों में रखा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि 2008 में जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना जारी हुई थी, यानी वह छतरी जिसके नीचे यह मिशन बाद में आया। विकल्प D गलत है क्योंकि 2015 पेरिस जलवायु सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के आरंभ का वर्ष है, जो राष्ट्रीय मिशन से पांच वर्ष बाद की बात है।
निम्नलिखित में से कौन नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत नहीं है?
- A.ज्वारीय ऊर्जा
- B.प्राकृतिक गैस
- C.जैव द्रव्य
- D.भूतापीय ऊर्जा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. प्राकृतिक गैस
व्याख्या
सही उत्तर B, प्राकृतिक गैस है। प्राकृतिक गैस जीवाश्म ईंधन है, जो दबे हुए जैव पदार्थ से लाखों वर्षों में बनी; भंडार सीमित है, इसलिए जली हुई हर इकाई सदा के लिए चली जाती है, और जलने पर कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है, यद्यपि समान ऊष्मा के लिए कोयले से कम। विकल्प A उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि ज्वारीय ऊर्जा चंद्रमा और सूर्य के खिंचाव से आने वाले समुद्री उतार-चढ़ाव से मिलती है, जो समाप्त नहीं होगा। विकल्प C उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि जैव द्रव्य कृषि अवशेष, गोबर तथा अन्य वानस्पतिक पदार्थ है, जो हर मौसम फिर उगता है और इसलिए नवीकरणीय है, बशर्ते उसे उगने की गति से अधिक तेजी से न जलाया जाए। विकल्प D उत्तर के रूप में गलत है क्योंकि भूतापीय ऊर्जा पृथ्वी के भीतर लगातार बनने वाली ऊष्मा से आती है, जिसे भारत में पुगा घाटी और मणिकर्ण जैसे स्थलों पर लिया जाता है।
भारत का प्रसिद्ध मुप्पंडल पवन फार्म किस राज्य में है?
- A.गुजरात
- B.राजस्थान
- C.तमिलनाडु
- D.महाराष्ट्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. तमिलनाडु
व्याख्या
सही उत्तर C, तमिलनाडु है। मुप्पंडल राज्य के सुदूर दक्षिण में कन्याकुमारी के पास है, जहां पश्चिमी घाट की दरार से होकर आती पवन वर्ष के बड़े भाग में तेज और नियमित रहती है, और तमिलनाडु लंबे समय से देश के अग्रणी पवन ऊर्जा राज्यों में गिना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि गुजरात अपने तट पर बड़े पवन फार्मों के साथ प्रमुख पवन राज्य तो है, पर मुप्पंडल वहां नहीं है। विकल्प B गलत है क्योंकि राजस्थान में जैसलमेर के आसपास बड़े पवन फार्म और भड़ला जैसे विशाल सौर पार्क हैं, पर मुप्पंडल उनमें नहीं आता। विकल्प D गलत है क्योंकि महाराष्ट्र में सह्याद्रि की श्रेणियों पर पवन क्षमता और चीनी मिलों का व्यापक सह-उत्पादन है, फिर भी प्रश्न में नामित स्थल प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण का है।
भूतापीय ऊर्जा की संभावना के लिए प्रसिद्ध पुगा घाटी कहां स्थित है?
- A.लद्दाख
- B.उत्तराखंड
- C.सिक्किम
- D.मेघालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लद्दाख
व्याख्या
सही उत्तर A, लद्दाख है। पूर्वी लद्दाख की पुगा घाटी में गर्म जल स्रोत और गंधक के निक्षेप हैं और यह देश का सबसे अधिक अध्ययन किया गया भूतापीय क्षेत्र है, जिसकी ऊष्मा हिमालय के नवीन पर्वत निर्माण से जुड़ी है। विकल्प B गलत है क्योंकि उत्तराखंड में अपने गर्म जल स्रोत तो हैं पर उनमें से कोई मानक पाठ्यपुस्तक उदाहरण नहीं बनता; हिमाचल का नामित स्थल पार्वती घाटी का मणिकर्ण है। विकल्प C गलत है क्योंकि सिक्किम खड़ी धाराओं पर बनी लघु जल परियोजनाओं के लिए जाना जाता है, भूतापीय क्षेत्रों के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि मेघालय कोयला और चूना पत्थर तथा अत्यधिक वर्षा से जुड़ा है, भूतापीय ऊर्जा से नहीं। साथ याद रखने योग्य तीन स्थल हैं लद्दाख में पुगा, हिमाचल प्रदेश में मणिकर्ण और छत्तीसगढ़ में तातापानी।
भारत में ज्वारीय ऊर्जा की सर्वोत्तम संभावना कहां पाई जाती है?
- A.खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी
- B.पाक जलडमरूमध्य
- C.अंडमान सागर
- D.लक्षद्वीप सागर
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी
व्याख्या
सही उत्तर A, खंभात की खाड़ी और कच्छ की खाड़ी है। दोनों गुजरात तट पर लंबी और सिकुड़ती हुई खाड़ियां हैं, और ऐसी आकृति आती हुई ज्वार-तरंग को संकरा कर देती है, जिससे ज्वार-भाटा का अंतर बड़ा हो जाता है, और ज्वारीय विद्युत योजना को यही चाहिए; दूसरा प्रायः नामित स्थल सुंदरबन तट है। विकल्प B गलत है क्योंकि भारत और श्रीलंका के बीच का पाक जलडमरूमध्य उथला है और वहां ज्वार का अंतर कम रहता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अंडमान सागर समुद्री जैव विविधता और द्वीप चाप की भूकंपीय सक्रियता से जुड़ा है, बड़े ज्वारीय अंतर से नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि लक्षद्वीप के आसपास के समुद्र में महासागरीय तापीय ऊर्जा पर अध्ययन होता है, जो सतह और गहरे जल के तापमान अंतर का उपयोग करती है, ज्वार का नहीं।
आठ राष्ट्रीय मिशनों वाली जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना किस वर्ष जारी हुई?
- A.2005
- B.2008
- C.2012
- D.2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2008
व्याख्या
सही उत्तर B, 2008 है। इस योजना में सौर ऊर्जा, उन्नत ऊर्जा दक्षता, सतत आवास, जल, हिमालयी पारितंत्र, हरित भारत, सतत कृषि तथा जलवायु परिवर्तन हेतु सामरिक ज्ञान के आठ मिशन रखे गए, और इस क्षेत्र का हर बाद का कार्यक्रम इसी की ओर संकेत करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 2005 भारत के उत्सर्जन तीव्रता लक्ष्य का आधार वर्ष है, योजना का वर्ष नहीं, और दोनों में भ्रम सहज है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2012 में क्योटो प्रोटोकॉल की पहली प्रतिबद्धता अवधि समाप्त हुई थी। विकल्प D गलत है क्योंकि 2016 में पेरिस समझौता लागू हुआ और उसी वर्ष भारत ने उसका अनुसमर्थन किया; राष्ट्रीय कार्य योजना उससे आठ वर्ष पुरानी और अंतरराष्ट्रीय नहीं बल्कि घरेलू दस्तावेज है। इन आठ मिशनों में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन सबसे अधिक पूछा जाता है, इसलिए योजना का वर्ष और मिशन का वर्ष अलग-अलग याद रखें।
भारत में किसी जल विद्युत परियोजना को लघु जल विद्युत तब माना जाता है जब उसकी क्षमता कितनी तक हो?
- A.5 मेगावाट
- B.10 मेगावाट
- C.25 मेगावाट
- D.100 मेगावाट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 25 मेगावाट
व्याख्या
सही उत्तर C, पच्चीस मेगावाट है। इस आकार तक की परियोजनाएं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लघु जल विद्युत कार्यक्रम में आती हैं, जबकि इससे बड़ी परियोजनाएं विद्युत मंत्रालय परंपरागत जल विद्युत के रूप में देखता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पांच मेगावाट लघु जल विद्युत परिवार के भीतर प्रायः मिनी जल विद्युत कही जाने वाली उपश्रेणी की सीमा है, पूरे वर्ग की बाहरी सीमा नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि दस मेगावाट की सीमा कई अन्य देशों तथा कुछ अंतरराष्ट्रीय परिभाषाओं में प्रयुक्त होती है, इसीलिए वह भ्रमित करने वाले विकल्प के रूप में रखी जाती है। विकल्प D गलत है क्योंकि सौ मेगावाट की परियोजना पर्याप्त जलाशय या मोड़ संरचनाओं वाला पूर्ण आकार का जल विद्युत केंद्र होती है और उसे कहीं भी लघु जल विद्युत नहीं माना जाता। ध्यान रहे कि लघु जल विद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा में गिना जाता है और बड़ी जल परियोजनाओं को भी 2019 से नवीकरणीय माना जाने लगा है।
भारत सरकार का कौन-सा मंत्रालय नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी है?
- A.विद्युत मंत्रालय
- B.नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
- C.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- D.पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर B, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है। यह 1982 में बने गैर-परंपरागत ऊर्जा स्रोत विभाग से विकसित हुआ, 1992 में पूर्ण मंत्रालय बना और 2006 में उसे वर्तमान नाम मिला, तथा भारत विश्व के उन गिने-चुने देशों में है जहां इस क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय है। विकल्प A गलत है क्योंकि विद्युत मंत्रालय परंपरागत बिजली के उत्पादन, पारेषण और वितरण को देखता है, जिसमें तापीय तथा बड़े जल विद्युत केंद्र आते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वन, वन्यजीव, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु वार्ताओं में भारत का पक्ष देखता है, नवीकरणीय क्षमता बनाने का काम नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तेल तथा गैस से जुड़ा है, जो जीवाश्म ईंधन हैं और प्रश्न में पूछे गए क्षेत्र के उलट हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस श्रेणी के कोयले में कार्बन सबसे अधिक होता है?
एंथ्रेसाइट में। निम्नतम से उच्चतम क्रम है पीट, लिग्नाइट या भूरा कोयला, बिटुमिनस और एंथ्रेसाइट। कार्बन बढ़ने के साथ कोयला अधिक कठोर होता जाता है, समान भार पर अधिक ऊष्मा देता है और कम धुआं छोड़ता है, इसीलिए एंथ्रेसाइट सर्वोत्तम माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय कहां है?
हरियाणा के गुरुग्राम में, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान के परिसर में। इस गठबंधन को भारत और फ्रांस ने 2015 के पेरिस जलवायु सम्मेलन में संयुक्त रूप से आरंभ किया था और यह भारत में मुख्यालय रखने वाला पहला संधि आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
भारत में पवन ऊर्जा में कौन-से राज्य अग्रणी हैं?
तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक, जबकि राजस्थान तथा महाराष्ट्र भी महत्वपूर्ण हैं। सबसे प्रसिद्ध पवन फार्म तमिलनाडु का मुप्पंडल है, जो पालघाट दर्रे के पास है, जहां पश्चिमी घाट की दरार से छनकर आती पवन वर्ष के बड़े भाग में तेज और नियमित रहती है।
नवीकरणीय ऊर्जा को स्वच्छ ऊर्जा क्यों कहा जाता है?
क्योंकि सूर्य प्रकाश, पवन, जल या ज्वार से बिजली बनाते समय कार्बन डाइऑक्साइड और लगभग कोई अन्य प्रदूषक नहीं निकलता। उत्सर्जन केवल उपकरण बनाने और ढोने में होता है, जो संयंत्र के पूरे जीवन में कोयला या तेल जलाने से निकलने वाले कार्बन की तुलना में बहुत कम है।
सौर और पवन ऊर्जा की मुख्य सीमाएं क्या हैं?
ये रुक-रुक कर मिलती हैं: रात में सूर्य नहीं रहता और पवन भी एक-सी नहीं चलती, इसलिए आपूर्ति के साथ भंडारण या कोई भरोसेमंद स्रोत जोड़ना पड़ता है। दोनों को दिए गए उत्पादन के लिए बड़ी भूमि चाहिए और संयंत्र बनाने की आरंभिक लागत ऊंची रहती है, भले ही बाद में ईंधन निःशुल्क हो।
स्रोत
- समकालीन भारत दो (कक्षा दस), अध्याय: खनिज तथा ऊर्जा संसाधन — एनसीईआरटी
- भौतिक स्वरूप एवं संसाधन, परंपरागत तथा गैर-परंपरागत ऊर्जा अध्याय — एनसीईआरटी





