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GK24
बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यमपूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 1 March 2019, Shift 1

उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2018 ने किस वर्ष के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का स्थान लिया है?

  1. A.1981
  2. B.1986
  3. C.1991
  4. D.1978

सही उत्तर

B. 1986

व्याख्या

सही उत्तर B, 1986 है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 भारत का पहला व्यापक उपभोक्ता कानून था और उसने जिला फोरम, राज्य आयोग तथा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग की त्रिस्तरीय व्यवस्था बनाई। 2018 में प्रस्तुत विधेयक आगे बढ़कर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 बना, जिसने 1986 के अधिनियम को निरसित करके उसका स्थान लिया, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण जोड़ा, ई-कॉमर्स और उत्पाद दायित्व के नियम लाए, तथा फोरम को आयोग नाम दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 1981 में इस प्रकार का कोई केंद्रीय उपभोक्ता कानून नहीं आया। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों का वर्ष है, उपभोक्ता कानून का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 1978 इस अधिनियम से पहले का है। 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में याद रखें।

पूरा लेख पढ़ें: बैंकिंग लोकपाल और ग्राहक अधिकार: आरबी-आईओएस नोट्स

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Q1.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताआसान

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार किस वर्ष लागू की?

  1. A.1991
  2. B.1995
  3. C.2006
  4. D.2021
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 1995

व्याख्या

सही उत्तर B, 1995 है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के अंतर्गत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए पहली बैंकिंग लोकपाल योजना 1995 में अधिसूचित की, जिससे बैंक ग्राहकों को न्यायालय के बाहर निःशुल्क और शीघ्र मंच मिले। विकल्प A गलत है क्योंकि 1991 आर्थिक सुधारों तथा वित्तीय प्रणाली पर नरसिंहम समिति का वर्ष है, लोकपाल का नहीं। विकल्प C मजबूत भ्रम है: योजना को बैंकिंग लोकपाल योजना, 2006 के रूप में फिर गढ़ा गया, जो 2017 के संशोधन के साथ एकीकृत योजना में मिलने तक चली, परंतु 2006 संशोधन का वर्ष था, आरंभ का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2021 रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना का वर्ष है। प्रश्न में देखें कि पहली योजना पूछी गई है या वर्तमान।

Q2.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

तीन पूर्ववर्ती लोकपाल योजनाओं को मिलाने वाली रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना किस वर्ष शुरू हुई?

  1. A.2017
  2. B.2018
  3. C.2019
  4. D.2021
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 2021

व्याख्या

सही उत्तर D, 2021 है। रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना यानी आरबी-आईओएस 12 नवंबर 2021 को शुरू हुई और इसने 2006 की बैंकिंग लोकपाल योजना, 2018 की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी लोकपाल योजना तथा 2019 की डिजिटल लेनदेन लोकपाल योजना को "एक राष्ट्र, एक लोकपाल" के सिद्धांत पर एक योजना में मिला दिया। विकल्प A गलत है क्योंकि 2017 में 2006 की योजना में गलत बिक्री और मोबाइल बैंकिंग जोड़ने का संशोधन हुआ था। विकल्प B गलत है क्योंकि 2018 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की अलग योजना का वर्ष है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2019 डिजिटल लेनदेन की योजना का वर्ष है। विकल्पों के तीनों वर्ष इस कहानी की वास्तविक तिथियाँ हैं, इसीलिए क्रम याद रखना लाभदायक है। एकीकरण का उद्देश्य यह था कि ग्राहक को यह न सोचना पड़े कि उसकी शिकायत किस योजना में आती है और किस कार्यालय को भेजनी है।

Q3.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकतामध्यम

रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना, 2021 के अंतर्गत शिकायतों का केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र कहाँ स्थित है?

  1. A.मुंबई
  2. B.नई दिल्ली
  3. C.चंडीगढ़
  4. D.हैदराबाद
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. चंडीगढ़

व्याख्या

सही उत्तर C, चंडीगढ़ है। एकीकृत योजना क्षेत्राधिकार-निरपेक्ष है, इसलिए शिकायत किसी विशेष क्षेत्र के लोकपाल कार्यालय को भेजना आवश्यक नहीं रहा; ऑनलाइन, ईमेल या कागज़ पर दी गई सभी शिकायतें चंडीगढ़ में स्थापित एक ही केंद्रीकृत प्राप्ति एवं प्रसंस्करण केंद्र में प्राप्त और प्रसंस्कृत होती हैं, जो फिर उन्हें आवंटित करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मुंबई भारतीय रिज़र्व बैंक तथा उसके उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग का प्रधान कार्यालय है, प्राप्ति केंद्र नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि नई दिल्ली में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग है, जो पूर्णतः भिन्न मंच है। विकल्प D गलत है क्योंकि हैदराबाद की इसमें कोई भूमिका नहीं है, भले वहाँ रिज़र्व बैंक का क्षेत्रीय कार्यालय है। यह केंद्र शिकायतों की पहली छँटाई करता है और उन्हें संबंधित लोकपाल कार्यालय को सौंपता है, जिससे ग्राहक को क्षेत्राधिकार की चिंता नहीं करनी पड़ती।

Q4.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

आरबी-आईओएस, 2021 के अंतर्गत समय की हानि, व्यय, उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए लोकपाल अधिकतम कितनी क्षतिपूर्ति दे सकता है?

  1. A.दस हजार रुपये
  2. B.एक लाख रुपये
  3. C.पाँच लाख रुपये
  4. D.बीस लाख रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. एक लाख रुपये

व्याख्या

सही उत्तर B, एक लाख रुपये है। योजना दो प्रकार के अधिनिर्णय अलग करती है। शिकायतकर्ता को वास्तव में हुई हानि के लिए लोकपाल वास्तविक हानि या बीस लाख रुपये, जो कम हो, दे सकता है। इसके अतिरिक्त वह शिकायतकर्ता के समय की हानि, उसके व्यय तथा उत्पीड़न और मानसिक कष्ट के लिए एक लाख रुपये तक दे सकता है। विकल्प A गलत है क्योंकि दस हजार रुपये की सीमा कुछ पुराने उपभोक्ता क्षतिपूर्ति नियमों में थी, इस योजना में नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पाँच लाख रुपये निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम का जमा बीमा कवर है, जो पूर्णतः भिन्न आँकड़ा है। विकल्प D वास्तविक हानि की सीमा है, इसीलिए दोनों संख्याएँ अलग-अलग याद रखनी चाहिए। परीक्षा में यही जोड़ी सबसे अधिक उलझाई जाती है, इसलिए याद रखें: हानि के लिए बीस लाख, उत्पीड़न के लिए एक लाख।

Q5.बैंकिंग और वित्तीय जागरूकताकठिन

रिज़र्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना के अंतर्गत दिए गए अधिनिर्णय के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी कौन है?

  1. A.भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर
  2. B.रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक
  3. C.सचिव, वित्तीय सेवाएँ विभाग
  4. D.राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक

व्याख्या

सही उत्तर B, भारतीय रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता शिक्षा एवं संरक्षण विभाग के प्रभारी कार्यपालक निदेशक है। शिकायतकर्ता अथवा विनियमित संस्था, कोई भी, अधिनिर्णय प्राप्त होने के तीस दिन के भीतर इस अधिकारी को अपील कर सकता है, और जिस संस्था ने प्रधान नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं किया, वह अपील ही नहीं कर सकती। विकल्प A गलत है क्योंकि गवर्नर व्यक्तिगत अधिनिर्णयों पर अपील नहीं सुनते; यह कार्य नामित कार्यपालक निदेशक को सौंपा गया है। विकल्प C गलत है क्योंकि वित्तीय सेवाएँ विभाग वित्त मंत्रालय का अंग है और इन अपीलों के निर्णय में उसकी कोई भूमिका नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि राष्ट्रीय आयोग उपभोक्ता संरक्षण के अलग रास्ते का है; ग्राहक एक रास्ता चुनता है और दोनों एक-दूसरे के ऊपर नहीं हैं।