भारत में कंप्यूटर का इतिहास: टिफ्रैक से परम तक
भारत में कंप्यूटर के इतिहास पर परीक्षा नोट्स: एचईसी-2एम, टिफ्रैक, ईसीआईएल, एनआईसी, अर्नेट, सी-डैक, परम 8000 और राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत की कंप्यूटर कथा कोलकाता के एक संस्थान में रखी एक आयातित मशीन से चलकर देश में ही बने सुपर कंप्यूटरों के राष्ट्रीय जाल तक पहुंचती है, और राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन देश भर के विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों में परम प्रणालियां जोड़ता रहा है। बैंकिंग, एसएससी और रेलवे की परीक्षाएं इस इतिहास को सीधे तथ्यों के रूप में पूछती हैं: पहली मशीन कौन थी, वह कहां बनी, परम परियोजना का नेतृत्व किसने किया, सुपर कंप्यूटर कौन संस्था बनाती है और मिशन की पहली मशीन किस संस्थान को मिली। इस अध्याय में यही श्रृंखला क्रम से रखी गई है।
पहली मशीनें, 1955 से 1970
भारत में काम करने वाला पहला कंप्यूटर 1955 में कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में लगाया गया, जो ब्रिटेन से लाया गया एचईसी-2एम था, और आगे उसी संस्थान में सोवियत यूराल मशीन भी जोड़ी गई। भारत में डिज़ाइन और निर्मित पहला डिजिटल कंप्यूटर मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान से आया, जहां एक दल ने 1960 में टीआईएफआर ऑटोमैटिक कैलकुलेटर पूरा किया; इस मशीन को टिफ्रैक नाम जवाहरलाल नेहरू ने दिया। 1966 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान और जादवपुर विश्वविद्यालय ने मिलकर आईएसआईजेयू बनाया, जो भारत का आरंभिक ट्रांजिस्टर आधारित कंप्यूटर था।
मशीनों के बाद संस्थान बने। 1967 में हैदराबाद में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निगम लिमिटेड स्थापित हुआ, जिसने प्रयोगशाला और औद्योगिक उपयोग के लिए टीडीसी श्रेणी, अर्थात ट्रॉम्बे डिजिटल कंप्यूटर, बनाए। क्षेत्र की योजना के लिए 1970 में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और 1971 में इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग बने, तथा देश में पहले से लगी मशीनों की सेवा के लिए 1975 में कंप्यूटर मेंटेनेंस कॉरपोरेशन स्थापित किया गया।
नेटवर्क, नीति और परम तक का मार्ग
सरकारी कंप्यूटिंग खड़ी करने के लिए 1976 में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की स्थापना हुई, और आगे उपग्रह आधारित निकनेट ने जिलों को राज्यों तथा राजधानी से जोड़ा। शिक्षा और अनुसंधान नेटवर्क अर्नेट 1986 में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से आरंभ किया और उसी ने भारत में शैक्षिक इंटरनेट ढोया। स्वदेशी दूरसंचार स्विचिंग के लिए 1984 में सी-डॉट की स्थापना हुई, और 1991 की सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया योजना ने सॉफ्टवेयर निर्यात उद्योग को उसका पहला ठिकाना दिया।
मोड़ तब आया जब भारत को अमेरिकी क्रे सुपर कंप्यूटर देने से मना कर दिया गया। उसके स्थान पर अपना सुपर कंप्यूटर बनाने के दायित्व के साथ 1988 में पुणे में प्रगत संगणन विकास केंद्र अर्थात सी-डैक स्थापित हुआ, और 1991 में विजय भाटकर के नेतृत्व वाले दल ने परम 8000 पूरा किया, जो भारत का पहला सुपर कंप्यूटर था और ट्रांसप्यूटर प्रोसेसरों से बनी समानांतर मशीन था। परम नाम समानांतर मशीन से बना है और संस्कृत में सर्वोच्च का भाव भी रखता है। यह उपलब्धि अकेली नहीं थी: बेंगलुरु की राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला ने 1986 में फ्लोसॉल्वर समानांतर मशीन बनाई थी, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने अनुपम श्रेणी विकसित की, और हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अनुराग ने पेस बनाया, जो वायुगतिकीय संगणन और मूल्यांकन का प्रोसेसर था।
परम पद्म से राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन तक
सी-डैक ने परम 8000 के बाद 2002 में परम पद्म, 2008 में परम युवा और 2013 में परम युवा दो बनाए, जिनमें प्रत्येक गति की दृष्टि से बड़ी छलांग थी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 2011 में ग्राफिक्स प्रोसेसरों से सागा-220 बनाया, और 2018 में मौसम तथा जलवायु सेवाओं को पुणे के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में प्रत्यूष तथा राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र में मिहिर मिले।
राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन 2015 में स्वीकृत हुआ और उसका संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग संयुक्त रूप से करते हैं, जिसकी कार्यान्वयन एजेंसियां सी-डैक तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु हैं। उसका लक्ष्य शैक्षिक और शोध संस्थानों में सुपर कंप्यूटर लगाना, हार्डवेयर को चरणबद्ध ढंग से भारत में बनाना तथा उसके उपयोग के लिए लोगों को प्रशिक्षित करना है। मिशन की पहली प्रणाली परम शिवाय 2019 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में आरंभ हुई, और उसके बाद संस्थानों की लंबी सूची में प्रणालियां लगीं। सी-डैक ने कृत्रिम बुद्धि के कार्य के लिए पुणे में ऐरावत भी बनाया।
| पड़ाव | वर्ष | स्थान |
|---|---|---|
| भारत का पहला कंप्यूटर, एचईसी-2एम | 1955 | भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता |
| टिफ्रैक, भारत में बना पहला कंप्यूटर | 1960 | टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, मुंबई |
| आईएसआईजेयू, आरंभिक ट्रांजिस्टर कंप्यूटर | 1966 | आईएसआई और जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता |
| ईसीआईएल और टीडीसी श्रेणी | 1967 | हैदराबाद |
| सी-डैक की स्थापना | 1988 | पुणे |
| परम 8000, भारत का पहला सुपर कंप्यूटर | 1991 | सी-डैक, पुणे |
| राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन की स्वीकृति | 2015 | मंत्रालय और विभाग, सी-डैक तथा आईआईएससी के माध्यम से |
| परम शिवाय, मिशन की पहली प्रणाली | 2019 | आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी |
सुपर कंप्यूटर क्यों महत्वपूर्ण है
सुपर कंप्यूटर कोई एक अत्यंत तेज प्रोसेसर नहीं होता, बल्कि हजारों प्रोसेसर एक ही समस्या पर समानांतर काम करते हैं, और उसकी गति प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाओं में मापी जाती है, इसीलिए समाचारों में पेटाफ्लॉप और टेराफ्लॉप के आंकड़े आते हैं। ऐसी मशीनों की आवश्यकता उस काम में पड़ती है जो कोई देश बाजार से खरीद नहीं सकता: मौसम पूर्वानुमान और मानसून की भविष्यवाणी, जलवायु मॉडलिंग, औषधि तथा अणु की अभिकल्पना, जीनोमिकी, वायुयान और वाहन की अभिकल्पना, तेल खोज के लिए भूकंपीय अध्ययन, परमाणु और अंतरिक्ष अनुकरण, तथा अब बड़े कृत्रिम बुद्धि मॉडलों का प्रशिक्षण। यही कारण है कि अस्सी के दशक में क्रे देने से इनकार ने भारत को अपनी मशीन बनाने की ओर धकेला, और यही कारण है कि परम श्रेणी तथा राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन को केवल कंप्यूटिंग का नहीं, आत्मनिर्भरता का विषय माना जाता है।
परीक्षा की दृष्टि से
कंप्यूटर जागरूकता खंड इस अध्याय को एक-तथ्य वाले प्रश्नों के रूप में पूछता है, और सबसे अधिक पूछे जाने वाले तीन तथ्य हैं भारत में बना पहला कंप्यूटर टिफ्रैक, भारत का पहला सुपर कंप्यूटर 1991 का परम 8000, तथा उसका नेतृत्व करने वाले विजय भाटकर। स्थायी जाल दो प्रथमों की जोड़ी है: 1955 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान का एचईसी-2एम भारत में काम करने वाली पहली मशीन था, जबकि 1960 का टिफ्रैक यहां बना पहला था, और प्रश्न में दोनों विकल्प रखे जाते हैं। दूसरा क्षेत्र वर्ष हैं, इसलिए सी-डैक 1988, परम 8000 1991 और राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन 2015 पक्का कर लें। तीसरा संस्था और मशीन का मेल है: सी-डैक के साथ परम, बार्क के साथ अनुपम, राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला के साथ फ्लोसॉल्वर, डीआरडीओ के अनुराग के साथ पेस और इसरो के साथ सागा-220। मिशन की पहली प्रणाली आईआईटी (बीएचयू) का परम शिवाय तथा मौसम की मशीन पुणे का प्रत्यूष भी याद रखें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| भारत में लगाया गया पहला कंप्यूटर | एचईसी-2एम, 1955, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता |
|---|---|
| भारत में बना पहला कंप्यूटर | टिफ्रैक, 1960, टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, मुंबई |
| टिफ्रैक को नाम किसने दिया | जवाहरलाल नेहरू |
| ईसीआईएल | 1967 में हैदराबाद में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन स्थापित; टीडीसी श्रेणी बनाई |
| सी-डैक | क्रे सुपर कंप्यूटर देने से इनकार के बाद 1988 में पुणे में स्थापित |
| भारत का पहला सुपर कंप्यूटर | परम 8000, 1991, सी-डैक द्वारा निर्मित |
| परम परियोजना का नेतृत्व | विजय भाटकर |
| भारत का पहला समानांतर कंप्यूटर | फ्लोसॉल्वर, 1986, राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला, बेंगलुरु |
| राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन | 2015 में स्वीकृत; कार्यान्वयन सी-डैक और आईआईएससी बेंगलुरु |
| मिशन की पहली प्रणाली | परम शिवाय, 2019, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी |
| 2018 के मौसम सुपर कंप्यूटर | आईआईटीएम पुणे में प्रत्यूष और एनसीएमआरडब्ल्यूएफ में मिहिर |
| सुपर कंप्यूटर की गति की इकाई | प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाएं, टेराफ्लॉप और पेटाफ्लॉप के रूप में |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत में डिज़ाइन और निर्मित पहला डिजिटल कंप्यूटर कौन था?
- A.एचईसी-2एम
- B.टिफ्रैक
- C.परम 8000
- D.टीडीसी-12
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टिफ्रैक
व्याख्या
सही उत्तर B, टिफ्रैक है। टीआईएफआर ऑटोमैटिक कैलकुलेटर मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान में 1960 में पूरा हुआ और उसे भारत में डिज़ाइन तथा निर्मित पहला डिजिटल कंप्यूटर माना जाता है; टिफ्रैक नाम जवाहरलाल नेहरू ने दिया था। विकल्प A गलत है क्योंकि एचईसी-2एम ब्रिटेन से लाकर 1955 में कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में लगाया गया था, इसलिए वह भारत में काम करने वाला पहला कंप्यूटर था, यहां बना पहला नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 का परम 8000 भारत का पहला सुपर कंप्यूटर था, जो तीन दशक बाद आया। विकल्प D गलत है क्योंकि टीडीसी-12, अर्थात एक ट्रॉम्बे डिजिटल कंप्यूटर, 1967 में स्थापित भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निगम लिमिटेड ने बनाया था। दोनों प्रथम अलग रखें: भारत में पहला कंप्यूटर एचईसी-2एम, भारत में बना पहला टिफ्रैक। भारतीय रेल ने भी साठ के दशक में आरक्षण और लेखा कार्य के लिए आईबीएम 1401 जैसी मशीनें लगाई थीं।
भारत का पहला सुपर कंप्यूटर परम 8000 वर्ष 1991 में किस संस्था ने विकसित किया?
- A.इसरो
- B.बार्क
- C.सी-डैक
- D.डीआरडीओ
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सी-डैक
व्याख्या
सही उत्तर C, सी-डैक है। प्रगत संगणन विकास केंद्र की स्थापना 1988 में पुणे में इसी विशेष दायित्व के साथ हुई थी कि अमेरिकी क्रे मशीन देने से इनकार के बाद स्वदेशी सुपर कंप्यूटर बनाया जाए, और 1991 में उसके दल ने परम 8000 पूरा किया, जो ट्रांसप्यूटर प्रोसेसरों से बनी समानांतर मशीन थी। विकल्प A गलत है क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 2011 में ग्राफिक्स प्रोसेसरों से सागा-220 प्रणाली बनाई, जो परम से बहुत बाद की है। विकल्प B गलत है क्योंकि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने समानांतर कंप्यूटरों की अनुपम श्रेणी विकसित की, जो परमाणु ऊर्जा के लिए अलग कार्य-धारा थी। विकल्प D गलत है क्योंकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के भीतर हैदराबाद के अनुराग ने पेस बनाया, जो वायुगतिकीय संगणन और मूल्यांकन का प्रोसेसर था। सी-डैक ने कृत्रिम बुद्धि के कार्य के लिए पुणे में ऐरावत भी बनाया, जो उसकी सबसे नई प्रसिद्ध प्रणाली है।
भारत में परम श्रेणी के सुपर कंप्यूटरों के विकास का नेतृत्व किसने किया?
- A.होमी जहांगीर भाभा
- B.सतीश धवन
- C.राज रेड्डी
- D.विजय भाटकर
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. विजय भाटकर
व्याख्या
सही उत्तर D, विजय भाटकर है। विजय भाटकर ने सी-डैक में उस दल का नेतृत्व किया जिसने 1991 में परम 8000 बनाया, और इसी कारण उन्हें भारत की परम श्रेणी के सुपर कंप्यूटरों का शिल्पी कहा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि होमी जहांगीर भाभा भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तथा टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान के संस्थापक थे, जहां टिफ्रैक बना, परंतु उनका निधन 1966 में हो गया, परम परियोजना से बहुत पहले। विकल्प B गलत है क्योंकि सतीश धवन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के नेता तथा इसरो के अध्यक्ष थे, जिनका नाम श्रीहरिकोटा के प्रक्षेपण केंद्र से जुड़ा है। विकल्प C गलत है क्योंकि राज रेड्डी भारत में जन्मे वे कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं जिन्होंने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धि तथा वाक् पहचान पर कार्य किया और वे परम परियोजना का अंग नहीं थे।
प्रगत संगणन विकास केंद्र, अर्थात सी-डैक, की स्थापना किस वर्ष हुई?
- A.1976
- B.1988
- C.1991
- D.1998
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1988
व्याख्या
सही उत्तर B, 1988 है। सी-डैक की स्थापना 1988 में पुणे में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के अधीन इस उद्देश्य से हुई कि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा भारत को क्रे मशीन देने से इनकार के बाद स्वदेशी सुपर कंप्यूटर की अभिकल्पना और निर्माण किया जाए। विकल्प A गलत है क्योंकि 1976 में सरकार के लिए कंप्यूटिंग खड़ी करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र स्थापित हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि 1991 में उस अभियान का पहला उत्पाद परम 8000 पूरा हुआ, और इस प्रश्न में यही सामान्य भ्रम है; 1991 सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया योजना का भी वर्ष है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1998 भारतीय विज्ञान की अन्य घटनाओं का वर्ष है और यहां उसका कोई संबंध नहीं। याद रखने योग्य जोड़ी है सी-डैक 1988 और परम 8000 उसके तीन वर्ष बाद 1991।
भारत में 1955 में स्थापित और प्रयोग में आया पहला कंप्यूटर कहां था?
- A.भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता
- B.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान, मुंबई
- C.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
- D.भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ट्रॉम्बे
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता
व्याख्या
सही उत्तर A, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता है। ब्रिटेन से लाया गया एचईसी-2एम 1955 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान में लगाया गया और उसे भारत में काम करने वाला पहला कंप्यूटर माना जाता है; आगे उसी संस्थान में सोवियत यूराल मशीन जुड़ी और 1966 में उसने जादवपुर विश्वविद्यालय के साथ आईएसआईजेयू बनाया। विकल्प B गलत है क्योंकि टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान ने टिफ्रैक बनाया, जो 1960 में पूरा हुआ और भारत में डिज़ाइन तथा निर्मित पहला कंप्यूटर है, यहां लगाया गया पहला नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि भारतीय विज्ञान संस्थान आज बड़ा संगणन केंद्र और राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन की कार्यान्वयन एजेंसी होने पर भी पहली मशीन का स्थान नहीं था। विकल्प D गलत है क्योंकि ट्रॉम्बे का कार्य बाद में ईसीआईएल तथा टीडीसी श्रेणी के माध्यम से आया। उसी संस्थान में आगे आई सोवियत यूराल मशीन को भी कभी-कभी इस प्रश्न में जाल के रूप में रखा जाता है।
टीडीसी श्रेणी के कंप्यूटर बनाने वाला भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निगम लिमिटेड (ईसीआईएल) 1967 में किस विभाग के अधीन स्थापित हुआ?
- A.इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग
- B.रेल मंत्रालय
- C.परमाणु ऊर्जा विभाग
- D.रक्षा मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. परमाणु ऊर्जा विभाग
व्याख्या
सही उत्तर C, परमाणु ऊर्जा विभाग है। ईसीआईएल की स्थापना 1967 में हैदराबाद में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन इस उद्देश्य से हुई कि परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जाएं, और उसने प्रयोगशाला तथा औद्योगिक उपयोग के लिए टीडीसी श्रेणी, अर्थात ट्रॉम्बे डिजिटल कंप्यूटर, बनाए। विकल्प A गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग स्वयं 1970 में बना, ईसीआईएल के तीन वर्ष बाद, और उसने आगे सी-डैक तथा अर्नेट को प्रायोजित किया। विकल्प B गलत है क्योंकि रेल मंत्रालय कंप्यूटरों का बड़ा उपयोगकर्ता था और उसने आरक्षण तथा लेखा कार्य के लिए आईबीएम मशीनें लगाई थीं, परंतु ईसीआईएल उसने स्थापित नहीं किया। विकल्प D गलत है क्योंकि रक्षा क्षेत्र की संगणन धारा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन से चली, जिसकी अनुराग प्रयोगशाला ने पेस प्रोसेसर बनाया। ईसीआईएल ने टीडीसी-316 भी बनाया, जो उसी परिवार की बाद की और अधिक सक्षम मशीन थी।
वर्ष 1986 में आरंभ अर्नेट किस उद्देश्य से स्थापित किया गया था?
- A.शैक्षिक और शोध संस्थानों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए
- B.रेलवे आरक्षण के कंप्यूटरीकरण के लिए
- C.जिला कार्यालयों को राज्य राजधानियों से जोड़ने के लिए
- D.भारत में अर्धचालक चिप बनाने के लिए
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. शैक्षिक और शोध संस्थानों को नेटवर्क से जोड़ने के लिए
व्याख्या
सही उत्तर A है। शिक्षा और अनुसंधान नेटवर्क अर्नेट 1986 में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग ने संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों तथा शोध प्रयोगशालाओं को जोड़ने के लिए आरंभ किया, और उसी ने भारत में पहला शैक्षिक इंटरनेट यातायात ढोया। विकल्प B गलत है क्योंकि रेलवे आरक्षण का कंप्यूटरीकरण 1986 से अलग ढंग से रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र के माध्यम से हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि जिला कार्यालयों को राज्य राजधानियों तथा केंद्र से जोड़ने का कार्य निकनेट का था, जो राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र का उपग्रह नेटवर्क है। विकल्प D गलत है क्योंकि चिप निर्माण सत्तर के दशक में मोहाली में स्थापित सेमीकंडक्टर कॉम्प्लेक्स का विषय है और वह किसी नेटवर्क परियोजना का अंग नहीं। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र का उपग्रह नेटवर्क निकनेट ही अर्नेट के साथ रखा जाने वाला सामान्य जाल है।
राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के अंतर्गत पहला सुपर कंप्यूटर परम शिवाय कहां स्थापित किया गया?
- A.आईआईटी खड़गपुर
- B.आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी
- C.आईआईएसईआर पुणे
- D.आईआईटी कानपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी
व्याख्या
सही उत्तर B, आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी है। परम शिवाय, जो 2019 में वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में आरंभ हुआ, राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के अंतर्गत स्थापित पहला सुपर कंप्यूटर था; यह मिशन 2015 में स्वीकृत हुआ था। विकल्प A गलत है क्योंकि आईआईटी खड़गपुर को परम शक्ति मिला, जो शिवाय के बाद आया। विकल्प C गलत है क्योंकि आईआईएसईआर पुणे को परम ब्रह्म मिला। विकल्प D गलत है क्योंकि आईआईटी कानपुर को परम संगणक मिला। मिशन की अन्य प्रणालियों में जेएनसीएएसआर बेंगलुरु का परम युक्ति, आईआईटी रुड़की का परम गंगा, आईआईटी गांधीनगर का परम अनंत, आईआईटी मंडी का परम हिमालय तथा एनआईटी तिरुचिरापल्ली का परम पोरुल आते हैं, इसलिए प्रश्न सामान्यतः पहली प्रणाली पर अथवा किसी एक संस्थान की मशीन पर बनता है। मिशन का एक उद्देश्य प्रत्येक चरण में भारत में अभिकल्पित और संयोजित घटकों का हिस्सा बढ़ाना भी है।
राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन का कार्यान्वयन किन दो एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से होता है?
- A.इसरो और डीआरडीओ
- B.बार्क और एनआईसी
- C.सी-डैक और आईआईएससी बेंगलुरु
- D.एनआईसी और अर्नेट इंडिया
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सी-डैक और आईआईएससी बेंगलुरु
व्याख्या
सही उत्तर C, सी-डैक और आईआईएससी बेंगलुरु है। 2015 में स्वीकृत राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन का संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग संयुक्त रूप से करते हैं, और उसका कार्यान्वयन पुणे का प्रगत संगणन विकास केंद्र तथा बेंगलुरु का भारतीय विज्ञान संस्थान मिलकर करते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि इसरो और डीआरडीओ अपनी अंतरिक्ष तथा रक्षा आवश्यकताओं के लिए कंप्यूटर बनाते हैं, जैसे सागा-220 और पेस। विकल्प B गलत है क्योंकि बार्क की अनुपम श्रेणी परमाणु ऊर्जा के लिए है और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र सरकारी नेटवर्क चलाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एनआईसी तथा अर्नेट इंडिया नेटवर्क और ई-शासन के निकाय हैं, सुपर कंप्यूटर बनाने वाले नहीं। मिशन के उद्देश्य हैं प्रणालियां लगाना, हार्डवेयर भारत में बनाना और उपयोगकर्ताओं को प्रशिक्षित करना। मिशन के अंतर्गत 2024 में परम रुद्र नाम की तीन प्रणालियां भी राष्ट्र को समर्पित की गईं।
वर्ष 2018 में पुणे के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में आरंभ सुपर कंप्यूटर प्रत्यूष मुख्यतः किस कार्य के लिए है?
- A.परमाणु अनुकरण
- B.मौसम और जलवायु मॉडलिंग
- C.उपग्रह चित्र संसाधन
- D.जीनोम अनुक्रमण
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. मौसम और जलवायु मॉडलिंग
व्याख्या
सही उत्तर B, मौसम और जलवायु मॉडलिंग है। प्रत्यूष 2018 में पुणे के भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान में लगाया गया, और उसके साथी तंत्र मिहिर को राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र में रखा गया; यह जोड़ी मानसून पूर्वानुमान, चक्रवात के मार्ग तथा जलवायु अध्ययन के उच्च विभेदन मॉडल चलाने के लिए ली गई थी। विकल्प A गलत है क्योंकि परमाणु अनुकरण भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की अनुपम प्रणालियों पर होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि उपग्रह चित्रों का संसाधन इसरो की अपनी संगणन सुविधाएं करती हैं, जिनमें सागा-220 भी है। विकल्प D गलत है क्योंकि जीनोम कार्य संस्थागत क्लस्टरों तथा राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन की प्रणालियों पर होता है, किसी समर्पित मौसम मशीन पर नहीं। जोड़ी याद रखें: पुणे में प्रत्यूष और नोएडा में मिहिर, दोनों मौसम के लिए।
सुपर कंप्यूटर की गति सामान्यतः किसमें मापी जाती है?
- A.प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाएं
- B.प्रति सेकंड बिट
- C.प्रति कोर हर्ट्ज़
- D.प्रति अनुदेश बाइट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाएं
व्याख्या
सही उत्तर A, प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाएं है। सुपर कंप्यूटर का प्रदर्शन फ्लॉप्स में बताया जाता है, अर्थात वह एक सेकंड में कितनी चल बिंदु गणनाएं पूरी करता है, और इसी कारण आंकड़े टेराफ्लॉप, पेटाफ्लॉप और एक्साफ्लॉप के रूप में आते हैं; एक पेटाफ्लॉप का अर्थ प्रति सेकंड एक हजार लाख करोड़ ऐसी संक्रियाएं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि प्रति सेकंड बिट यह मापता है कि किसी संचार संपर्क पर आंकड़े किस दर से चलते हैं, संगणन की गति नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि हर्ट्ज़ एक प्रोसेसर की घड़ी आवृत्ति मापता है, और सुपर कंप्यूटर की शक्ति ऊंची घड़ी गति से नहीं, हजारों प्रोसेसरों के समानांतर काम करने से आती है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रति अनुदेश बाइट कोई प्रदर्शन माप ही नहीं है। ऐसी गति की आवश्यकता मौसम पूर्वानुमान, औषधि अभिकल्पना तथा बड़े कृत्रिम बुद्धि मॉडलों के प्रशिक्षण में पड़ती है।
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?
- A.फ्लोसॉल्वर — भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र
- B.अनुपम — राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला
- C.पेस — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
- D.सागा-220 — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. सागा-220 — भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
व्याख्या
सही उत्तर D है। सागा-220 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 2011 में ग्राफिक्स प्रोसेसिंग इकाइयों से बनाया था, इसलिए यही युग्म सही है। विकल्प A गलत है क्योंकि फ्लोसॉल्वर 1986 में बेंगलुरु की राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशाला में बना और उसे भारत का पहला समानांतर कंप्यूटर माना जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि समानांतर कंप्यूटरों की अनुपम श्रेणी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र ने विकसित की, अर्थात विकल्प A और B में संस्थाएं आपस में बदल दी गई हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि पेस, अर्थात वायुगतिकीय संगणन और मूल्यांकन का प्रोसेसर, हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशाला अनुराग ने बनाया, इसरो ने नहीं। इस कार्य की चौथी धारा सी-डैक की परम श्रेणी है, जो 1991 के परम 8000 से आरंभ हुई। इस कार्य की तुलना करते समय यह भी ध्यान रखें कि 2002 का परम पद्म पहली भारतीय मशीन थी जो संसार की सबसे तेज मशीनों की सूची में पहुंची।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत का पहला सुपर कंप्यूटर कौन था और उसे किसने बनाया?
परम 8000, जो 1991 में पुणे के प्रगत संगणन विकास केंद्र ने विजय भाटकर के नेतृत्व में पूरा किया। वह ट्रांसप्यूटर प्रोसेसरों से बनी समानांतर मशीन थी, और सी-डैक की स्थापना 1988 में ठीक इसी उद्देश्य से हुई थी, क्योंकि अमेरिका ने भारत को क्रे सुपर कंप्यूटर बेचने से मना कर दिया था। परम श्रेणी आगे 2002 के परम पद्म तथा 2013 के परम युवा दो के साथ चली।
एचईसी-2एम और टिफ्रैक में क्या अंतर है?
एचईसी-2एम ब्रिटेन से आयातित मशीन थी, जो 1955 में कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान में लगाई गई और वह भारत में काम करने वाला पहला कंप्यूटर था। टिफ्रैक, अर्थात टीआईएफआर ऑटोमैटिक कैलकुलेटर, मुंबई के टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान में 1960 में पूरा हुआ और वह भारत में डिज़ाइन तथा निर्मित पहला डिजिटल कंप्यूटर था; उसका नाम जवाहरलाल नेहरू ने दिया।
राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन क्या है?
यह 2015 में स्वीकृत वह कार्यक्रम है जिसका संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग संयुक्त रूप से करते हैं और जिसका कार्यान्वयन सी-डैक तथा भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु करते हैं। उसके उद्देश्य हैं शैक्षिक और शोध संस्थानों में सुपर कंप्यूटर लगाना, अधिक हार्डवेयर भारत में बनाना तथा उच्च प्रदर्शन संगणन में लोगों को प्रशिक्षित करना। उसकी पहली प्रणाली 2019 में आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी का परम शिवाय थी।
किसी देश को अपने सुपर कंप्यूटर क्यों चाहिए?
क्योंकि जिन समस्याओं के लिए वे चाहिए उन्हें हल कराने के लिए विदेश नहीं भेजा जा सकता: मानसून और चक्रवात का पूर्वानुमान, जलवायु मॉडलिंग, औषधि तथा अणु की अभिकल्पना, जीनोमिकी, वायुयान और वाहन की अभिकल्पना, तेल खोज के लिए भूकंपीय अध्ययन, परमाणु और अंतरिक्ष अनुकरण तथा बड़े कृत्रिम बुद्धि मॉडलों का प्रशिक्षण। अस्सी के दशक में अमेरिकी क्रे मशीन देने से इनकार ने ही भारत को घर में परम श्रेणी बनाने की ओर धकेला।
परम का अर्थ क्या है और सुपर कंप्यूटर की गति कैसे मापी जाती है?
परम समानांतर मशीन से बना है और संस्कृत में सर्वोच्च का भाव भी रखता है, जो अनेक प्रोसेसरों के साथ मिलकर काम करने से बनी मशीन पर ठीक बैठता है। गति प्रति सेकंड चल बिंदु संक्रियाओं में मापी जाती है, जिसका संक्षेप फ्लॉप्स है, और इसी कारण प्रणालियों का वर्णन टेराफ्लॉप तथा पेटाफ्लॉप में होता है; सुपर कंप्यूटर की शक्ति किसी एक तेज प्रोसेसर से नहीं, हजारों प्रोसेसरों के समानांतर काम से आती है।
स्रोत
- राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन — इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
- प्रगत संगणन विकास केंद्र: सी-डैक के बारे में — सी-डैक, भारत सरकार





