सॉफ्टवेयर के प्रकार: यूटिलिटी, ओपन सोर्स और फ्रीवेयर
सॉफ्टवेयर के प्रकारों के परीक्षा नोट्स: सिस्टम एवं एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी प्रोग्राम तथा फ्रीवेयर, शेयरवेयर, ओपन सोर्स और प्रोप्राइटरी लाइसेंस।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर धातु और सिलिकॉन का डिब्बा है। सॉफ्टवेयर निर्देशों का वह समूह है जो हार्डवेयर को बताता है कि क्या करना है, और प्रश्नपत्र इसका विभाजन दो बार करते हैं: एक बार कार्य के आधार पर, सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर में, और दूसरी बार लाइसेंस के आधार पर, प्रोप्राइटरी, फ्रीवेयर, शेयरवेयर और ओपन सोर्स में। अभ्यर्थी अंक इसलिए खोते हैं कि ये दोनों विभाजन मिल जाते हैं: कोई प्रोग्राम कार्य के आधार पर यूटिलिटी और लाइसेंस के आधार पर फ्रीवेयर, दोनों एक साथ हो सकता है। दोनों प्रश्नों को अलग रखें तो कंप्यूटर जागरूकता खंड में यह विषय सरल अंक दे जाता है।
सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
सिस्टम सॉफ्टवेयर मशीन को स्वयं चलाता है और दूसरे प्रोग्रामों को चलने का स्थान देता है। इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम आता है, जैसे विंडोज़, लिनक्स, मैकओएस या एंड्रॉयड; डिवाइस ड्राइवर, जो ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रिंटर या ग्राफ़िक्स कार्ड से बात करने देते हैं; भाषा अनुवादक, अर्थात असेंबलर, कंपाइलर और इंटरप्रेटर; तथा यूटिलिटी प्रोग्राम। फर्मवेयर विशेष स्थिति है: वह सॉफ्टवेयर जो किसी चिप में स्थायी रूप से लिखा होता है, जैसे मदरबोर्ड का बायोस, इसलिए यह हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच बैठता है। एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर वह है जिसे उपयोगकर्ता अपना काम करने के लिए खोलता है। यह या तो सामान्य उद्देश्य का होता है, जैसे वर्ड प्रोसेसर, स्प्रेडशीट, प्रेज़ेंटेशन उपकरण, ब्राउज़र या डेटाबेस पैकेज, या किसी एक काम के लिए विशेष रूप से बनाया जाता है, जैसे रेलवे आरक्षण प्रणाली या किसी बैंक का कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर।
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर: रखरखाव के प्रोग्राम
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर, जिसे सेवा सॉफ्टवेयर भी कहते हैं, सिस्टम सॉफ्टवेयर के अंतर्गत गिना जाता है। यह दस्तावेज़ नहीं बनाता; यह मशीन को व्यवस्थित रखता है। प्रमुख उदाहरण हैं एंटीवायरस, डिस्क डीफ़्रैग्मेंटर जो फ़ाइलों के बिखरे टुकड़ों को क्रम में लगाकर पढ़ने की गति बढ़ाता है, डिस्क क्लीनअप जो अस्थायी फ़ाइलें हटाता है, फ़ाइल संपीड़न उपकरण, बैकअप एवं रिस्टोर उपकरण, फ़ाइल प्रबंधक, डिस्क विभाजन उपकरण और डायग्नोस्टिक प्रोग्राम। बार-बार पूछा जाने वाला बिंदु यह है कि कंपाइलर यूटिलिटी नहीं है; वह भाषा अनुवादक है, और दोनों सिस्टम सॉफ्टवेयर के अंतर्गत आते हैं।
लाइसेंस के आधार पर सॉफ्टवेयर
| प्रकार | मूल्य | सोर्स कोड | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्रोप्राइटरी या व्यावसायिक | सशुल्क लाइसेंस | बंद | माइक्रोसॉफ्ट विंडोज़, एमएस ऑफिस, टैली |
| फ्रीवेयर | नि:शुल्क | बंद | एडोब एक्रोबैट रीडर, स्काइप, गूगल क्रोम |
| शेयरवेयर | नि:शुल्क परीक्षण, फिर सशुल्क | बंद | विनज़िप, विनरार, अनेक मोबाइल गेम |
| ओपन सोर्स | सामान्यतः नि:शुल्क | खुला, बदला और बाँटा जा सकता है | लिनक्स, मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स, लिब्रेऑफिस, जिम्प, माईएसक्यूएल |
| पब्लिक डोमेन | नि:शुल्क | खुला, कोई कॉपीराइट नहीं | वह सॉफ्टवेयर जिसका कॉपीराइट छोड़ दिया गया या समाप्त हो गया |
फ्रीवेयर का कोई मूल्य नहीं लगता, परंतु उसका कोड बंद रहता है: आप उसका उपयोग कर सकते हैं, अध्ययन या परिवर्तन नहीं। शेयरवेयर "खरीदने से पहले आज़माओ" की पद्धति है, जो कुछ अवधि तक नि:शुल्क रहता है या जिसमें भुगतान तक कुछ सुविधाएँ रोक दी जाती हैं। ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर की पहचान यह है कि उसका कोड ऐसे लाइसेंस के अंतर्गत प्रकाशित होता है जो किसी को भी उसे पढ़ने, बदलने और आगे बाँटने देता है। प्रश्नपत्र का सबसे आम जाल फ्रीवेयर और ओपन सोर्स को एक मान लेना है; अंतर सोर्स कोड का है, मूल्य का नहीं।
फ्री सॉफ्टवेयर, ओपन सोर्स और लाइसेंस
ओपन सोर्स के पीछे का आंदोलन ग्नू परियोजना से आरंभ हुआ, जिसे रिचर्ड स्टॉलमैन ने 1983 में शुरू किया, और फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन से, जिसकी स्थापना उन्होंने 1985 में की। इसका नारा "फ्री" शब्द समझाता है: फ्री अर्थात स्वतंत्रता, नि:शुल्क नहीं। फाउंडेशन का लाइसेंस, ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस या जीपीएल, कॉपीलेफ्ट का विचार रखता है, जिसके अनुसार जो कोई संशोधित संस्करण आगे देता है, उसे सोर्स कोड भी देना होगा। ओपन सोर्स शब्द स्वयं 1998 का है, जब ओपन सोर्स इनिशिएटिव की स्थापना हुई, ताकि वही विचार व्यापार की भाषा में रखा जा सके; इसके लाइसेंसों में एमआईटी, बीएसडी और अपाचे जैसे उदार लाइसेंस आते हैं, जो बंद उत्पादों में भी उपयोग की अनुमति देते हैं। लिनक्स कर्नेल, जिसे लिनस टॉरवाल्ड्स ने 1991 में लिखा और जीपीएल के अंतर्गत जारी किया, प्रश्नपत्रों का मानक उदाहरण है, और उसके साथ मोज़िला फ़ायरफ़ॉक्स, लिब्रेऑफिस, जिम्प, अपाचे तथा माईएसक्यूएल पूछे जाते हैं।
भारत में ओपन सोर्स
भारत सरकार ने 2015 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपनाने की नीति स्वीकार की, जिसके अनुसार सरकारी विभागों को सॉफ्टवेयर खरीदते समय ओपन सोर्स विकल्पों पर विचार करना होता है। बॉस, अर्थात भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस, डेबियन पर आधारित भारतीय लिनक्स वितरण है, जिसे प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक) ने विकसित किया, और यह विद्यालयों तथा सर्वर के लिए अलग संस्करणों में आता है। प्रश्नपत्र अनुवादकों पर भी पूछते हैं: असेंबलर असेंबली भाषा को मशीन कोड में बदलता है, कंपाइलर पूरे उच्चस्तरीय प्रोग्राम को एक बार में मशीन कोड में बदलता है और सारी त्रुटियाँ साथ बताता है, जबकि इंटरप्रेटर एक समय में एक कथन का अनुवाद करके चलाता है, जिससे वह धीमा होता है परंतु त्रुटि सुधारना सरल रहता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से दो प्रकार के प्रश्न आते हैं। पहला किसी नामित प्रोग्राम का वर्गीकरण पूछता है: एमएस वर्ड एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर है, डिस्क डीफ़्रैग्मेंटर यूटिलिटी है, लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, बायोस फर्मवेयर है। दूसरा लाइसेंस पूछता है, और फ्रीवेयर तथा ओपन सोर्स का भेद सबसे प्रिय जाल है, क्योंकि अभ्यर्थी नि:शुल्क को ओपन सोर्स पढ़ लेते हैं, जबकि असली कसौटी यह है कि सोर्स कोड प्रकाशित है या नहीं। शेयरवेयर पर सीधा प्रश्न आता है, जिसकी पहचान परीक्षण अवधि है, तथा स्टॉलमैन और टॉरवाल्ड्स की जोड़ी पर भी, जहाँ 1983 एवं ग्नू परियोजना पहले के हैं और 1991 एवं लिनक्स कर्नेल दूसरे के। लाइसेंस के नाम समूह में पूछे जाते हैं, इसलिए जीपीएल को उदार एमआईटी, बीएसडी और अपाचे से अलग रखें। सी-डैक के साथ बॉस एवं परम तथा 2015 की नीति भारतीय जोड़ हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्य के दो प्रकार | सिस्टम सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर |
|---|---|
| यूटिलिटी सॉफ्टवेयर | सिस्टम सॉफ्टवेयर का भाग: एंटीवायरस, डीफ़्रैग्मेंटर, डिस्क क्लीनअप, संपीड़न, बैकअप |
| फर्मवेयर | चिप में स्थायी रूप से लिखा सॉफ्टवेयर, जैसे बायोस या यूईएफआई |
| भाषा अनुवादक | असेंबलर, कंपाइलर और इंटरप्रेटर |
| कंपाइलर | पूरे उच्चस्तरीय प्रोग्राम का एक बार में अनुवाद करता है और सारी त्रुटियाँ साथ बताता है |
| इंटरप्रेटर | एक समय में एक कथन का अनुवाद करके चलाता है; धीमा परंतु त्रुटि सुधार में सरल |
| फ्रीवेयर | नि:शुल्क, सोर्स कोड बंद: एडोब एक्रोबैट रीडर, स्काइप, गूगल क्रोम |
| शेयरवेयर | परीक्षण अवधि तक नि:शुल्क, फिर सशुल्क: विनज़िप, विनरार |
| ओपन सोर्स | सोर्स कोड प्रकाशित और परिवर्तनीय: लिनक्स, फ़ायरफ़ॉक्स, लिब्रेऑफिस, जिम्प, माईएसक्यूएल |
| ग्नू परियोजना | 1983 में रिचर्ड स्टॉलमैन द्वारा आरंभ; फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन 1985 |
| ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस | कॉपीलेफ्ट लाइसेंस; संशोधित संस्करण के साथ सोर्स कोड देना अनिवार्य |
| लिनक्स कर्नेल | लिनस टॉरवाल्ड्स द्वारा 1991 में लिखा, जीपीएल के अंतर्गत जारी |
| ओपन सोर्स इनिशिएटिव | स्थापना 1998 |
| बॉस | भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस, डेबियन आधारित, सी-डैक द्वारा विकसित |
| भारतीय नीति | भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपनाने की नीति, 2015 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
वह सॉफ्टवेयर जो कंप्यूटर के हार्डवेयर को नियंत्रित करता है और जिस पर दूसरे प्रोग्राम चलते हैं, उसे क्या कहा जाता है?
- A.यूटिलिटी सॉफ्टवेयर
- B.फर्मवेयर
- C.सिस्टम सॉफ्टवेयर
- D.एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सिस्टम सॉफ्टवेयर है। सिस्टम सॉफ्टवेयर मशीन को स्वयं संभालता है और दूसरे प्रोग्रामों को काम करने का स्थान देता है: इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम, डिवाइस ड्राइवर, भाषा अनुवादक और यूटिलिटी प्रोग्राम आते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि यूटिलिटी सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर का केवल एक भाग है, अर्थात रखरखाव वाला भाग जैसे एंटीवायरस और डिस्क डीफ़्रैग्मेंटर, और वह स्वयं कोई प्लेटफ़ॉर्म नहीं देता। विकल्प B गलत है क्योंकि फर्मवेयर वह सॉफ्टवेयर है जो किसी चिप में स्थायी रूप से लिखा होता है, जैसे मदरबोर्ड का बायोस, इसलिए वह एक हार्डवेयर से जुड़ा रहता है, सामान्य प्लेटफ़ॉर्म नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर वह है जिसे उपयोगकर्ता काम करने के लिए खोलता है, जैसे वर्ड प्रोसेसर या ब्राउज़र, और वह सिस्टम सॉफ्टवेयर के ऊपर चलता है।
निम्नलिखित में से कौन यूटिलिटी सॉफ्टवेयर का उदाहरण है?
- A.एमएस पावरपॉइंट
- B.डिस्क डीफ़्रैग्मेंटर
- C.ओरेकल
- D.लिनक्स
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, डिस्क डीफ़्रैग्मेंटर है। डीफ़्रैग्मेंटर यूटिलिटी का प्रमुख उदाहरण है: यह डिस्क पर फ़ाइलों के बिखरे टुकड़ों को क्रम में लगाता है, जिससे ड्राइव कम गति में उन्हें पढ़ लेती है, और यह रखरखाव का काम है, वह काम नहीं जिसके लिए उपयोगकर्ता बैठा था। विकल्प A गलत है क्योंकि एमएस पावरपॉइंट सामान्य उद्देश्य का एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर है, एक प्रेज़ेंटेशन पैकेज। विकल्प C गलत है क्योंकि ओरेकल डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली है, वह भी एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, चाहे उसका उपयोग सामान्य उपयोगकर्ता के स्थान पर प्रोग्रामर करते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो सिस्टम सॉफ्टवेयर है परंतु यूटिलिटी नहीं; ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफ़ॉर्म है, और यूटिलिटी वे छोटे सेवा प्रोग्राम हैं जो उसका रखरखाव करते हैं। एंटीवायरस, डिस्क क्लीनअप, बैकअप उपकरण और संपीड़न उपकरण अन्य मानक यूटिलिटी हैं।
वह सॉफ्टवेयर जो नि:शुल्क वितरित होता है परंतु जिसका सोर्स कोड उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराया जाता, उसे क्या कहते हैं?
- A.ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर
- B.शेयरवेयर
- C.पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर
- D.फ्रीवेयर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, फ्रीवेयर है। फ्रीवेयर के लिए उपयोगकर्ता को कुछ नहीं देना पड़ता, परंतु लाइसेंस केवल उपयोग की अनुमति देता है: सोर्स कोड स्वामी के पास रहता है, इसलिए प्रोग्राम का अध्ययन, परिवर्तन या बदले हुए रूप में वितरण नहीं किया जा सकता। एडोब एक्रोबैट रीडर, स्काइप और गूगल क्रोम सामान्यतः दिए जाने वाले उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर की पहचान ठीक उलटी है, अर्थात प्रकाशित सोर्स कोड जिसे पढ़ा, बदला और आगे बाँटा जा सकता है। विकल्प B गलत है क्योंकि शेयरवेयर केवल परीक्षण अवधि तक या सीमित संस्करण में नि:शुल्क रहता है, उसके बाद भुगतान देना होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर पर कोई कॉपीराइट ही नहीं होता, इसलिए उसे किसी लाइसेंस के बिना उपयोग और बदला जा सकता है। इस प्रश्न का जाल नि:शुल्क को ओपन सोर्स समझ लेना है; कसौटी सोर्स कोड है।
वह सॉफ्टवेयर जो सीमित परीक्षण अवधि तक नि:शुल्क मिलता है और उसके बाद उपयोग जारी रखने के लिए भुगतान करना पड़ता है, उसे क्या कहा जाता है?
- A.फ्रीवेयर
- B.पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर
- C.शेयरवेयर
- D.ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, शेयरवेयर है। शेयरवेयर "खरीदने से पहले आज़माओ" की पद्धति पर चलता है: प्रकाशक किसी को भी प्रोग्राम डाउनलोड करके परीक्षण अवधि तक उपयोग करने देता है, या ऐसे संस्करण में देता है जिसमें कुछ सुविधाएँ बंद रहती हैं, और आगे उपयोग के लिए भुगतान या पंजीकरण माँगता है। विनज़िप और विनरार सबसे अधिक दिए जाने वाले उदाहरण हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि फ्रीवेयर कितने भी समय उपयोग करने पर भुगतान नहीं माँगता। विकल्प B गलत है क्योंकि पब्लिक डोमेन सॉफ्टवेयर का कोई कॉपीराइट स्वामी नहीं होता जो शुल्क ले। विकल्प D गलत है क्योंकि ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर की पहचान खुला सोर्स कोड है, कोई भुगतान पद्धति नहीं; अधिकांश ओपन सोर्स प्रोग्राम नि:शुल्क हैं और उनमें शेयरवेयर जैसी परीक्षण अवधि नहीं होती। शेयरवेयर को "परीक्षण" शब्द से याद रखें।
लिनक्स कर्नेल का विकास किसने किया था?
- A.रिचर्ड स्टॉलमैन
- B.डेनिस रिची
- C.लिनस टॉरवाल्ड्स
- D.बिल गेट्स
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, लिनस टॉरवाल्ड्स है। फ़िनलैंड के विद्यार्थी लिनस टॉरवाल्ड्स ने 1991 में लिनक्स कर्नेल लिखा और उसे ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस के अंतर्गत जारी किया, इसी कारण प्रश्नपत्रों में लिनक्स ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर का मानक उदाहरण है। विकल्प A गलत है परंतु सबसे निकट का जाल है: रिचर्ड स्टॉलमैन ने 1983 में ग्नू परियोजना आरंभ की और 1985 में फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन की स्थापना की, और ग्नू के उपकरण कर्नेल के साथ मिलकर पूरा तंत्र बनाते हैं, फिर भी कर्नेल उन्होंने नहीं लिखा। विकल्प B गलत है क्योंकि डेनिस रिची ने सी भाषा बनाई और केन थॉम्पसन के साथ यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम, जिससे लिनक्स मिलता-जुलता है परंतु जिससे वह निकला नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक हैं, जिसका विंडोज़ प्रोप्राइटरी सॉफ्टवेयर है, अर्थात ओपन सोर्स का उलटा।
1983 में आरंभ ग्नू परियोजना तथा फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन की शुरुआत किसने की थी?
- A.लिनस टॉरवाल्ड्स
- B.रिचर्ड स्टॉलमैन
- C.एरिक रेमंड
- D.केन थॉम्पसन
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर B, रिचर्ड स्टॉलमैन है। रिचर्ड स्टॉलमैन ने 1983 में ग्नू परियोजना की घोषणा की, जिसका उद्देश्य केवल फ्री सॉफ्टवेयर से बना पूरा ऑपरेटिंग सिस्टम तैयार करना था, और 1985 में उन्होंने इसके लिए फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन की स्थापना की; उन्होंने ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस भी लिखा, जिसमें कॉपीलेफ्ट की शर्त है कि संशोधित संस्करण सोर्स कोड के साथ ही आगे दिया जाए। विकल्प A गलत है क्योंकि लिनस टॉरवाल्ड्स ने 1991 में, अर्थात आठ वर्ष बाद, लिनक्स कर्नेल लिखा। विकल्प C गलत है क्योंकि एरिक रेमंड 1998 में ओपन सोर्स इनिशिएटिव के संस्थापकों में थे, जिसने उसी विचार को व्यापार की भाषा में रखा और जिसे फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन से भ्रमित किया जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि केन थॉम्पसन ने बेल लैब्स में डेनिस रिची के साथ यूनिक्स पर काम किया, जो पूरी तरह अलग कहानी है।
लिनक्स कर्नेल किस लाइसेंस के अंतर्गत जारी किया जाता है?
- A.एमआईटी लाइसेंस
- B.अपाचे लाइसेंस
- C.बीएसडी लाइसेंस
- D.ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस है। लिनक्स कर्नेल अपने आरंभिक संस्करणों से ही जीपीएल के अंतर्गत वितरित होता है, इसी कारण जो कोई संशोधित कर्नेल देता है, उसे संशोधित सोर्स कोड भी उपलब्ध कराना पड़ता है; कॉपीलेफ्ट की यही शर्त इस लाइसेंस की पहचान है। विकल्प A, B और C तीनों वास्तविक ओपन सोर्स लाइसेंस हैं, परंतु तीनों उदार हैं, कॉपीलेफ्ट नहीं: एमआईटी, बीएसडी और अपाचे लाइसेंस कोड को किसी बंद, प्रोप्राइटरी उत्पाद में लेने की अनुमति देते हैं और परिवर्तन प्रकाशित करना अनिवार्य नहीं करते। कॉपीलेफ्ट और उदार लाइसेंस का यही अंतर प्रश्नपत्र इन चार नामों को साथ रखकर जाँचता है। याद रखें कि जीपीएल फ्री सॉफ्टवेयर फाउंडेशन से आया, जिसे रिचर्ड स्टॉलमैन ने बनाया था, और उदार लाइसेंस विश्वविद्यालयों तथा अपाचे सॉफ्टवेयर फाउंडेशन से जुड़े हैं।
बॉस (भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस) नामक भारतीय ग्नू/लिनक्स वितरण किसने विकसित किया है?
- A.इसरो
- B.एनआईसी
- C.सी-डैक
- D.डीआरडीओ
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, सी-डैक है। भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस को डेबियन ग्नू/लिनक्स पर प्रगत संगणन विकास केंद्र ने बनाया है, जो इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत शोध संस्था है और परम श्रेणी के सुपर कंप्यूटरों के लिए भी जानी जाती है; बॉस विद्यालयों, डेस्कटॉप और सर्वर के लिए अलग संस्करणों में आता है और भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि इसरो अंतरिक्ष एजेंसी है और कोई ऑपरेटिंग सिस्टम प्रकाशित नहीं करती। विकल्प B गलत है क्योंकि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र सरकारी विभागों को नेटवर्क और ई-गवर्नेंस सेवाएँ देता है, लिनक्स वितरण नहीं बनाता। विकल्प D गलत है क्योंकि डीआरडीओ रक्षा शोध एवं विकास का काम करता है। सी-डैक को बॉस और परम दोनों के साथ जोड़कर याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र दोनों पूछते हैं।
निम्नलिखित में से कौन संपूर्ण उच्चस्तरीय भाषा के प्रोग्राम को एक बार में मशीन कोड में बदलता है?
- A.इंटरप्रेटर
- B.असेंबलर
- C.लोडर
- D.कंपाइलर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर D, कंपाइलर है। कंपाइलर उच्चस्तरीय भाषा में लिखे पूरे स्रोत प्रोग्राम को पढ़ता है, उसे एक ही बार में मशीन कोड में बदलता है और मिली सारी त्रुटियाँ साथ बताता है, जिसके बाद संकलित प्रोग्राम अनुवादक की उपस्थिति के बिना तेज़ी से चलता है। विकल्प A गलत है क्योंकि इंटरप्रेटर एक समय में एक कथन का अनुवाद करके चलाता है और पहली त्रुटि पर रुक जाता है, जिससे चलने में धीमा परंतु त्रुटि सुधार में सरल रहता है। विकल्प B गलत है क्योंकि असेंबलर असेंबली भाषा, जो निम्नस्तरीय भाषा है, को मशीन कोड में बदलता है, उच्चस्तरीय भाषा को नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि लोडर कोई अनुवाद नहीं करता; वह पहले से अनुवादित प्रोग्राम को मुख्य स्मृति में रखता है जिससे प्रोसेसर उसे चला सके। ये चारों सिस्टम सॉफ्टवेयर में गिने जाते हैं।
केवल पठनीय स्मृति चिप में स्थायी रूप से संग्रहीत सॉफ्टवेयर, जैसे कंप्यूटर का बायोस, क्या कहलाता है?
- A.मिडलवेयर
- B.फ्रीवेयर
- C.फर्मवेयर
- D.शेयरवेयर
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर C, फर्मवेयर है। फर्मवेयर वह प्रोग्राम कोड है जो किसी उपकरण की केवल पठनीय या फ्लैश स्मृति चिप में लिखा जाता है, इसलिए बिजली बंद होने पर भी वह हार्डवेयर के साथ बना रहता है; मदरबोर्ड का बायोस या यूईएफआई, जो मशीन चालू करके नियंत्रण ऑपरेटिंग सिस्टम को देता है, प्रश्नपत्रों का उदाहरण है, और वॉशिंग मशीन, राउटर या कैमरे के भीतर के नियंत्रण प्रोग्राम भी वही बात हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि मिडलवेयर वह सॉफ्टवेयर है जो किसी एप्लिकेशन और डेटाबेस या नेटवर्क के बीच बैठकर संदेश पहुँचाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि फ्रीवेयर लाइसेंस की श्रेणी है, अर्थात बंद सोर्स वाला नि:शुल्क सॉफ्टवेयर। विकल्प D गलत है क्योंकि शेयरवेयर भी लाइसेंस की श्रेणी है, जो केवल परीक्षण तक नि:शुल्क है। फर्मवेयर "कैसे संग्रहीत है" का उत्तर है, "कितना मूल्य है" का नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फ्रीवेयर और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर में क्या अंतर है?
फ्रीवेयर नि:शुल्क होता है परंतु उसका सोर्स कोड बंद रहता है, इसलिए उसका केवल उपयोग किया जा सकता है, अध्ययन, परिवर्तन या बदले रूप में वितरण नहीं। ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपना सोर्स कोड ऐसे लाइसेंस के अंतर्गत प्रकाशित करता है जो किसी को भी उसे पढ़ने, बदलने और आगे बाँटने देता है; कसौटी मूल्य नहीं, सोर्स कोड है।
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर का भाग है या एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर का?
यूटिलिटी सॉफ्टवेयर सिस्टम सॉफ्टवेयर के अंतर्गत गिना जाता है। यह मशीन को चलाते रहने का रखरखाव करता है, जैसे एंटीवायरस जाँच, डिस्क डीफ़्रैग्मेंटेशन, डिस्क क्लीनअप, फ़ाइल संपीड़न और बैकअप, और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर की तरह उपयोगकर्ता के दस्तावेज़ नहीं बनाता।
शेयरवेयर क्या है?
शेयरवेयर वह सॉफ्टवेयर है जो "खरीदने से पहले आज़माओ" के आधार पर वितरित होता है। यह परीक्षण अवधि तक नि:शुल्क रहता है या ऐसे संस्करण में मिलता है जिसमें कुछ सुविधाएँ बंद रहती हैं, और पूर्ण उपयोग जारी रखने के लिए भुगतान या पंजीकरण करना पड़ता है। विनज़िप और विनरार सामान्य उदाहरण हैं, और इसका सोर्स कोड बंद रहता है।
ग्नू जनरल पब्लिक लाइसेंस में कॉपीलेफ्ट का क्या अर्थ है?
कॉपीलेफ्ट वह शर्त है कि जो कोई प्रोग्राम का संशोधित संस्करण वितरित करे, उसे उसका सोर्स कोड भी उसी लाइसेंस के अंतर्गत देना होगा, जिससे कोड पढ़ने और बदलने की स्वतंत्रता आगे की कड़ी में छीनी न जा सके। यही शर्त जीपीएल को एमआईटी, बीएसडी और अपाचे जैसे उदार लाइसेंसों से अलग करती है।
बॉस किसने विकसित किया और यह किस पर आधारित है?
बॉस, अर्थात भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक) ने विकसित किया। यह डेबियन ग्नू/लिनक्स वितरण पर आधारित है और विद्यालयों, डेस्कटॉप तथा सर्वर के लिए अलग संस्करणों में आता है, जिनमें भारतीय भाषाओं का समर्थन है।
स्रोत
- भारत सरकार के लिए ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर अपनाने की नीति — इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार
- बॉस: भारत ऑपरेटिंग सिस्टम सॉल्यूशंस, संस्करण एवं दस्तावेज़ — प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक)
- कंप्यूटर विज्ञान, कक्षा ग्यारह, कंप्यूटर प्रणाली एवं सॉफ्टवेयर अध्याय — एनसीईआरटी





