संख्या पद्धतियां और डेटा निरूपण: बाइनरी, ऑक्टल, हेक्साडेसिमल
संख्या पद्धतियों के परीक्षोपयोगी नोट्स: बाइनरी, ऑक्टल तथा हेक्साडेसिमल रूपांतरण, बिट, बाइट और भंडारण इकाइयां, ASCII, EBCDIC, BCD, यूनिकोड एवं पूरक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

कंप्यूटर के भीतर रखी हर सूचना, चाहे वह टाइप किया गया अक्षर हो, कोई चित्र हो, गीत हो या किसी प्रोग्राम का निर्देश, अंत में दो अवस्थाओं के रूप में ही संचित होती है: धारा का बहना या न बहना, चुंबकित होना या न होना। यही कारण है कि मशीन दशमलव नहीं, बल्कि द्विआधारी यानी बाइनरी पद्धति में गिनती करती है। यह अध्याय बताता है कि दशमलव 25 बाइनरी में 11001 कैसे बनता है, ऐसे आठ अंक मिलकर एक बाइट कैसे बनाते हैं, और स्मृति में अक्षर A का मान 65 क्यों होता है। एसएससी, रेलवे और बैंकिंग की परीक्षाओं में यह अध्याय हर वर्ष पूछा जाता है, क्योंकि एक छोटी-सी गणना से ही प्रश्न बन जाता है।
आधार, मूलांक और स्थानीय मान
किसी भी संख्या पद्धति की पहचान उसके आधार से होती है, जिसे मूलांक भी कहते हैं। आधार का अर्थ है उस पद्धति में प्रयुक्त अलग-अलग अंकों की संख्या। दशमलव पद्धति का आधार 10 है, क्योंकि उसमें 0 से 9 तक दस अंक होते हैं। हर स्थानीय पद्धति में अंक का मान उसके स्थान पर निर्भर करता है, और दाईं ओर से बाईं ओर बढ़ते हुए हर स्थान का मान आधार की बढ़ती घातों के बराबर होता है। दशमलव 345 में 3 का अर्थ 3 x 10², 4 का अर्थ 4 x 10¹ और 5 का अर्थ 5 x 10⁰ है। यही नियम हर आधार पर लागू होता है, इसलिए बाइनरी 1011 का मान 1 x 2³ + 0 x 2² + 1 x 2¹ + 1 x 2⁰ यानी दशमलव में 11 होता है। एक तथ्य कई प्रश्न हल कर देता है: किसी भी पद्धति का सबसे बड़ा अंक उसके आधार से सदैव एक कम होता है, इसलिए ऑक्टल संख्या में 8 और 9 कभी नहीं आ सकते।
कंप्यूटर में प्रयुक्त चार संख्या पद्धतियां
| पद्धति | आधार | प्रयुक्त अंक | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| बाइनरी | 2 | 0, 1 | 1011 |
| ऑक्टल | 8 | 0 से 7 | 627 |
| दशमलव | 10 | 0 से 9 | 345 |
| हेक्साडेसिमल | 16 | 0 से 9 तथा A से F | 2AF |
हेक्साडेसिमल पद्धति में A, B, C, D, E और F अक्षर क्रमशः दशमलव 10, 11, 12, 13, 14 और 15 के लिए प्रयुक्त होते हैं, क्योंकि इनके लिए कोई एक अंक उपलब्ध नहीं है। ऑक्टल और हेक्साडेसिमल का उपयोग संक्षेप लेखन के लिए होता है: ये बिट की लंबी श्रृंखला को कुछ ही पढ़ने योग्य चिह्नों में समेट देते हैं, इसीलिए स्मृति के पते और रंग कोड हेक्साडेसिमल में लिखे जाते हैं।
एक पद्धति से दूसरी में रूपांतरण
- दशमलव से बाइनरी: संख्या को बार-बार 2 से भाग दें, हर शेषफल लिखें और शेषफलों को नीचे से ऊपर पढ़ें। 25 को भाग देने पर शेषफल 1, 0, 0, 1, 1 मिलते हैं, अतः 25 का बाइनरी 11001 है।
- बाइनरी से दशमलव: हर बिट को उसके स्थानीय मान से गुणा करके जोड़ दें। 11001 के लिए यह 16 + 8 + 0 + 0 + 1 अर्थात 25 है।
- बाइनरी से ऑक्टल: दाईं ओर से तीन-तीन बिट के समूह बनाकर हर समूह का दशमलव मान लिखें, क्योंकि 2³ = 8 होता है। इस प्रकार 110 010 111 का ऑक्टल 627 है।
- बाइनरी से हेक्साडेसिमल: दाईं ओर से चार-चार बिट के समूह बनाएं, क्योंकि 2⁴ = 16 होता है। इस प्रकार 1110 का हेक्साडेसिमल E है।
- ऑक्टल से हेक्साडेसिमल: सीधा कोई सरल तरीका नहीं है; पहले ऑक्टल को बाइनरी में खोलें, फिर बिट को चार-चार के समूहों में बांटकर हेक्साडेसिमल अंक पढ़ें।
बिट, बाइट और भंडारण की इकाइयां
बिट का पूरा नाम बाइनरी डिजिट है; एक 0 या एक 1 ही एक बिट है और यही आंकड़ों की सबसे छोटी इकाई है। चार बिट से एक निबल और आठ बिट से एक बाइट बनती है, और सामान्यतः एक अक्षर एक बाइट में संचित होता है। बड़ी इकाइयां 2¹⁰ यानी 1024 के गुणक में बढ़ती हैं, 1000 के नहीं, और परीक्षक यहीं भ्रम उत्पन्न करते हैं।
| इकाई | बराबर | बाइट में |
|---|---|---|
| निबल | 4 बिट | आधी बाइट |
| बाइट | 8 बिट | 1 |
| किलोबाइट (KB) | 1024 बाइट | 2¹⁰ |
| मेगाबाइट (MB) | 1024 KB | 2²⁰ |
| गीगाबाइट (GB) | 1024 MB | 2³⁰ |
| टेराबाइट (TB) | 1024 GB | 2⁴⁰ |
अक्षरों और चित्रों का निरूपण
संख्याएं सीधे बाइनरी में रखी जाती हैं, परंतु अक्षरों और चिह्नों के लिए ऐसा कोड चाहिए जो तय करे कि कौन-सा बिट प्रारूप किस अक्षर को दर्शाएगा। मानक ASCII, अर्थात अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर इन्फॉर्मेशन इंटरचेंज, सात बिट का कोड है और इसमें 128 अक्षर आते हैं; बड़ा A का मान 65, छोटा a का मान 97 और अंक चिह्न 0 का मान 48 होता है। विस्तारित ASCII आठवां बिट जोड़कर 256 अक्षरों तक पहुंचता है। EBCDIC आईबीएम का आठ बिट कोड है जो मेनफ्रेम कंप्यूटरों में प्रयुक्त होता था। BCD अर्थात बाइनरी कोडेड डेसिमल में हर दशमलव अंक अलग-अलग चार बिट में रखा जाता है, इसलिए 25 को 0010 0101 लिखा जाता है। यूनिकोड इसलिए बनाया गया ताकि देवनागरी सहित संसार की हर लिपि निरूपित की जा सके; इसके पहले 128 कोड बिंदु ASCII जैसे ही हैं, जिससे पुरानी फाइलें पढ़ी जाती रहें। चित्र पिक्सेल के जाल के रूप में रखा जाता है, जिसमें हर पिक्सेल लाल, हरे और नीले रंग की तीव्रता रखता है, और ध्वनि प्रति सेकंड हजारों नमूनों की संख्याओं के रूप में।
बाइनरी अंकगणित और पूरक
बाइनरी जोड़ के चार नियम हैं: 0 + 0 = 0, 0 + 1 = 1, 1 + 0 = 1 तथा 1 + 1 = 0 और हासिल 1। घटाव प्रायः सीधे नहीं किया जाता; कंप्यूटर पूरक की सहायता से उसे जोड़ में बदल देता है। किसी बाइनरी संख्या का 1 का पूरक हर 0 को 1 और हर 1 को 0 करके प्राप्त होता है। 2 का पूरक 1 के पूरक में एक जोड़ने पर मिलता है और ऋणात्मक संख्याओं को रखने की यही मानक विधि है, क्योंकि तब एक ही योजक परिपथ जोड़ और घटाव दोनों कर लेता है। चिह्नयुक्त बाइनरी संख्या में सबसे बाईं ओर का बिट, जिसे सर्वाधिक सार्थक बिट कहते हैं, चिह्न बिट होता है: 0 धनात्मक और 1 ऋणात्मक संख्या दर्शाता है। आठ बिट का चिह्नरहित समूह 0 से 255 तक के मान रख सकता है, क्योंकि 2⁸ = 256 होता है।
परीक्षा की दृष्टि से
इस अध्याय से परीक्षक पांच बातें पूछते हैं। पहली, सीधा रूपांतरण: दशमलव से बाइनरी, तीन-तीन बिट के समूह बनाकर बाइनरी से ऑक्टल और चार-चार बिट के समूह बनाकर बाइनरी से हेक्साडेसिमल। दूसरी, आधार और मान्य अंक, जो प्रायः इस रूप में आता है कि कौन-सी संख्या मान्य ऑक्टल या बाइनरी नहीं है। तीसरी, इकाइयां, जहां किलोबाइट के लिए 1024 के स्थान पर 1000 चुन लेना और निबल तथा बाइट में भ्रम होना सामान्य भूल है। चौथी, कोडिंग योजनाएं: ASCII, EBCDIC और यूनिकोड की बिट संख्या, उनके अक्षरों की गिनती तथा A, a और 0 के ASCII मान। पांचवीं, पूरक, जहां अभ्यर्थी 1 का पूरक निकालकर एक जोड़ना भूल जाते हैं। यह भी देखें कि प्रश्न प्रारूपों की गिनती 256 चाहता है या सबसे बड़ा मान 255।
महत्वपूर्ण तथ्य
| बाइनरी का आधार | 2, केवल अंक 0 और 1 |
|---|---|
| ऑक्टल का आधार | 8, अंक 0 से 7 तक |
| हेक्साडेसिमल का आधार | 16, अंक 0 से 9 तथा अक्षर A से F |
| हेक्साडेसिमल A से F का मान | 10, 11, 12, 13, 14 और 15 |
| निबल | 4 बिट, आधी बाइट |
| बाइट | 8 बिट, सामान्यतः एक अक्षर |
| एक किलोबाइट | 1024 बाइट, अर्थात 2 की घात 10 |
| मानक ASCII | सात बिट का कोड, 128 अक्षर |
| विस्तारित ASCII और EBCDIC | आठ बिट के कोड, 256 अक्षर; EBCDIC आईबीएम का है |
| A, a और 0 का ASCII मान | 65, 97 और 48 |
| ऑक्टल तथा हेक्साडेसिमल अंक के बिट | क्रमशः 3 बिट और 4 बिट |
| 2 का पूरक | 1 का पूरक जोड़ एक |
| चिह्नरहित बाइट का परास | 0 से 255, क्योंकि 2 की घात 8 का मान 256 है |
| चिह्न बिट | सबसे बाईं ओर का बिट; 0 धनात्मक, 1 ऋणात्मक |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बाइनरी संख्या (1110)2 का हेक्साडेसिमल तुल्यांक क्या है?
- A.F
- B.B
- C.A
- D.E
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. E
व्याख्या
सही उत्तर D, E है। हेक्साडेसिमल पद्धति का आधार 16 है और चूंकि 2 की घात 4 का मान 16 होता है, इसलिए ठीक चार बाइनरी बिट मिलकर एक हेक्साडेसिमल अंक बनाते हैं। दी गई संख्या 1110 पहले से ही चार बिट का समूह है, अतः एक ही चरण में रूपांतरण हो जाता है। इसके स्थानीय मान 8, 4, 2 और 1 हैं तथा बिट क्रमशः 1, 1, 1 और 0 हैं, इसलिए दशमलव मान 8 + 4 + 2 + 0 अर्थात 14 है। हेक्साडेसिमल में दशमलव 10 से 15 तक के मान A से F अक्षरों से लिखे जाते हैं, अर्थात 10 के लिए A, 11 के लिए B, 12 के लिए C, 13 के लिए D, 14 के लिए E और 15 के लिए F। अतः 14 का चिह्न E है। विकल्प A गलत है क्योंकि F का मान 15 है, जिसका बाइनरी 1111 होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि B का मान 11 यानी 1011 है। विकल्प C गलत है क्योंकि A का मान 10 यानी 1010 है।
ऑक्टल संख्या 627 का बाइनरी तुल्यांक है:
- A.111010110
- B.110010110
- C.110010111
- D.011010111
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 110010111
व्याख्या
सही उत्तर C, 110010111 है। ऑक्टल पद्धति का आधार 8 है और चूंकि 2 की घात 3 का मान 8 होता है, इसलिए हर ऑक्टल अंक ठीक तीन बाइनरी बिट में खुलता है। 627 के अंक एक-एक करके लीजिए। अंक 6 का बाइनरी 110, अंक 2 का 010 और अंक 7 का 111 होता है। इन्हें उसी क्रम में लिखने पर 110 010 111 अर्थात 110010111 प्राप्त होता है। जांच उलटी दिशा में भी हो सकती है: 110010111 को दाईं ओर से तीन-तीन के समूह में बांटने पर 110, 010 और 111 मिलते हैं, जो पुनः 6, 2 और 7 पढ़े जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि 111010110 का अर्थ 7, 2 और 6 यानी ऑक्टल 726 है। विकल्प B गलत है क्योंकि 110010110 का अंतिम समूह 110 है, अतः वह 626 पढ़ा जाएगा। विकल्प D गलत है क्योंकि 011010111 का अर्थ 3, 2 और 7 यानी ऑक्टल 327 है।
बाइनरी संख्या (1101 0001)2 किस ऑक्टल संख्या के बराबर है?
- A.(321)8
- B.(123)8
- C.(641)8
- D.(146)8
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. (321)8
व्याख्या
सही उत्तर A, (321)8 है। बाइनरी को ऑक्टल में बदलने के लिए बिट को सबसे दाईं ओर से तीन-तीन के समूहों में बांटा जाता है और अंतिम समूह को पूरा करने के लिए आगे शून्य जोड़ दिए जाते हैं, क्योंकि तीन बिट से आठों ऑक्टल अंक बन जाते हैं। संख्या 11010001 के समूह 11, 010 और 001 बनते हैं तथा पहला समूह 011 लिखा जाएगा। समूह 011 का मान 3, समूह 010 का मान 2 और समूह 001 का मान 1 है, अतः ऑक्टल संख्या 321 है। दशमलव में जांच भी यही बताती है: 11010001 का मान 128 + 64 + 16 + 1 यानी 209 है, और ऑक्टल 321 का मान 3 गुणा 64 जोड़ 2 गुणा 8 जोड़ 1 अर्थात पुनः 209 है। विकल्प B गलत है क्योंकि 123 वही अंक उलटे क्रम में हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि 641 के लिए बिट 110100001 चाहिए। विकल्प D गलत है क्योंकि ऑक्टल 146 का दशमलव मान 102 है।
दो बाइनरी संख्याओं 10010000 और 1111001 का अंतर है:
- A.11101
- B.11011
- C.10111
- D.10011
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 10111
व्याख्या
सही उत्तर C, 10111 है। परीक्षा में बाइनरी घटाव करने का सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि दोनों संख्याओं को दशमलव में बदलें, घटाएं और उत्तर को पुनः बाइनरी में बदल लें। पहली संख्या 10010000 में 128 और 16 वाले स्थानों पर 1 है, अतः इसका मान 144 है। दूसरी संख्या 1111001 में 64, 32, 16, 8 और 1 वाले स्थानों पर 1 है, अतः इसका मान 121 है। अंतर 144 घटा 121 अर्थात 23 हुआ। अब 23 को बार-बार 2 से भाग देकर बाइनरी में बदलिए; शेषफल ऊपर से पढ़ने पर 1, 0, 1, 1, 1 मिलते हैं, यानी 10111। विकल्प A गलत है क्योंकि 11101 का मान 29 है। विकल्प B गलत है क्योंकि 11011 का मान 27 है। विकल्प D गलत है क्योंकि 10011 का मान 19 है। केवल 10111 का मान 23 है, इसलिए C सही है।
एक निबल कितने बिट से बनती है?
- A.2
- B.4
- C.8
- D.16
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 4
व्याख्या
सही उत्तर B, 4 है। बिट का पूरा नाम बाइनरी डिजिट है; एक 0 या एक 1 ही एक बिट है और यही कंप्यूटर के आंकड़ों की सबसे छोटी इकाई है। चार बिट मिलकर एक निबल बनाते हैं, जो ठीक आधी बाइट के बराबर होती है, और यह नाम अंग्रेजी के छोटे कौर के अर्थ से आया है। व्यवहार में निबल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक हेक्साडेसिमल अंक ठीक चार बिट में संचित होता है, और इसी कारण हेक्साडेसिमल बाइनरी का सुविधाजनक संक्षेप माना जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि दो बिट की कोई नामित इकाई नहीं होती और उनसे केवल चार संयोजन बनते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि आठ बिट से एक बाइट बनती है, जिसमें सामान्यतः एक अक्षर रखा जाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि सोलह बिट से दो बाइट बनती हैं। क्रम याद रखें: बिट, चार बिट की निबल, आठ बिट की बाइट।
एक किलोबाइट (KB) ठीक-ठीक कितने बाइट के बराबर होती है?
- A.1000
- B.1024
- C.2048
- D.512
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1024
व्याख्या
सही उत्तर B, 1024 है। कंप्यूटर में भंडारण की इकाइयां दस की घातों में नहीं, बल्कि दो की घातों में बढ़ती हैं, क्योंकि पते बाइनरी में होते हैं। एक किलोबाइट 2 की घात 10 बाइट अर्थात 1024 बाइट के बराबर होती है। यही 1024 का क्रम आगे भी चलता है: 1024 किलोबाइट से एक मेगाबाइट, 1024 मेगाबाइट से एक गीगाबाइट और 1024 गीगाबाइट से एक टेराबाइट बनती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1000 बाइट वाली दशमलव किलोबाइट डिस्क बनाने वाली कंपनियां विज्ञापन में प्रयोग करती हैं, और यही इस प्रश्न का जाल है। विकल्प C गलत है क्योंकि 2048 बाइट दो किलोबाइट के बराबर हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि 512 बाइट आधी किलोबाइट है, जो डिस्क सेक्टर के पुराने आकार के कारण याद रह जाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में किलोबाइट सदैव 1024 बाइट मानें।
निम्नलिखित में से कौन-सी एक मान्य ऑक्टल संख्या नहीं है?
- A.377
- B.128
- C.745
- D.66
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 128
व्याख्या
सही उत्तर B, 128 है। ऑक्टल पद्धति का आधार 8 है, इसलिए उसमें केवल 0 से 7 तक के आठ अंक प्रयुक्त होते हैं। सामान्य नियम यह है कि किसी भी संख्या पद्धति का सबसे बड़ा अंक उसके आधार से एक कम होता है, अर्थात ऑक्टल संख्या में 8 और 9 कभी नहीं आ सकते। संख्या 128 में अंक 8 है, इसलिए वह ऑक्टल संख्या नहीं हो सकती, यद्यपि वह पूरी तरह मान्य दशमलव अथवा हेक्साडेसिमल संख्या है। विकल्प A सही उत्तर नहीं है क्योंकि 377 में केवल 3 और 7 हैं, जो दोनों मान्य हैं। विकल्प C सही उत्तर नहीं है क्योंकि 745 में 7, 4 और 5 हैं, जो सभी 8 से छोटे हैं। विकल्प D सही उत्तर नहीं है क्योंकि 66 में केवल अंक 6 है। यही परीक्षण बाइनरी और हेक्साडेसिमल पर भी लगाइए।
बाइनरी संख्या 11001 का दशमलव तुल्यांक है:
- A.21
- B.23
- C.25
- D.27
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 25
व्याख्या
सही उत्तर C, 25 है। बाइनरी को दशमलव में बदलने के लिए दाईं ओर से स्थानीय मान 1, 2, 4, 8, 16 इस प्रकार लिखिए, हर बिट को उसके स्थानीय मान से गुणा कीजिए और सबको जोड़ दीजिए। संख्या 11001 में पांच बिट हैं, अतः बाएं से दाएं स्थानीय मान 16, 8, 4, 2 और 1 हैं तथा बिट क्रमशः 1, 1, 0, 0 और 1 हैं। योग 16 + 8 + 0 + 0 + 1 अर्थात 25 होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 21 का बाइनरी 10101 है। विकल्प B गलत है क्योंकि 23 का बाइनरी 10111 है। विकल्प D गलत है क्योंकि 27 का बाइनरी 11011 है। एक उपयोगी जांच यह है कि 1 पर समाप्त होने वाली बाइनरी संख्या सदैव विषम और 0 पर समाप्त होने वाली सदैव सम होती है, जिससे सम विकल्प तुरंत हट जाते हैं।
मानक ASCII में एक अक्षर को दर्शाने के लिए कितने बिट प्रयुक्त होते हैं?
- A.6
- B.7
- C.8
- D.16
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 7
व्याख्या
सही उत्तर B, 7 है। ASCII का पूरा नाम अमेरिकन स्टैंडर्ड कोड फॉर इन्फॉर्मेशन इंटरचेंज है। अपने मानक रूप में यह सात बिट का कोड है, अतः इससे 2 की घात 7 यानी 128 भिन्न अक्षर दर्शाए जा सकते हैं, जिनमें अंग्रेजी के बड़े और छोटे अक्षर, दस अंक चिह्न, विराम चिह्न तथा नियंत्रण कोड सम्मिलित हैं। इसी कोड में बड़े A का मान 65, छोटे a का मान 97 और अंक चिह्न 0 का मान 48 होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि छह बिट से केवल 64 अक्षर बनते, जो वर्णमाला के दोनों रूपों के लिए पर्याप्त नहीं हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि आठ बिट विस्तारित ASCII तथा EBCDIC के हैं, जो 256 अक्षरों तक पहुंचते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि सोलह बिट यूनिकोड के पुराने स्थिर रूप से संबंधित हैं, जो देवनागरी सहित हर लिपि के लिए बना।
बाइनरी संख्या 1010 का 2 का पूरक क्या है?
- A.0101
- B.0110
- C.1011
- D.1001
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 0110
व्याख्या
सही उत्तर B, 0110 है। 2 का पूरक दो चरणों में निकाला जाता है। पहले 1 का पूरक लीजिए, अर्थात हर 0 को 1 और हर 1 को 0 कर दीजिए; 1010 के लिए यह 0101 बनता है। इसके बाद इस परिणाम में 1 जोड़ दीजिए: 0101 जोड़ 1 बराबर 0110। अतः 1010 का 2 का पूरक 0110 है। कंप्यूटर ऋणात्मक संख्याओं को 2 के पूरक के रूप में इसलिए रखता है, क्योंकि तब एक ही योजक परिपथ जोड़ और घटाव दोनों कर लेता है और हार्डवेयर की बचत होती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 0101 केवल 1 का पूरक है, अर्थात पहला चरण, और एक जोड़ना भूल जाना इस प्रश्न की सबसे आम भूल है। विकल्प C गलत है क्योंकि 1011 तो केवल 1010 का अंतिम बिट बदलकर बना है। विकल्प D गलत है क्योंकि 1001 इसका कोई पूरक नहीं है।
हेक्साडेसिमल पद्धति में चिह्न D किस दशमलव मान को दर्शाता है?
- A.11
- B.12
- C.13
- D.14
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 13
व्याख्या
सही उत्तर C, 13 है। हेक्साडेसिमल पद्धति का आधार 16 है, इसलिए उसे सोलह भिन्न चिह्न चाहिए। पहले दस मानों के लिए 0 से 9 तक के अंक काम आते हैं, और चूंकि 10 से 15 तक के मानों के लिए कोई एक अंक उपलब्ध नहीं है, इसलिए A से F तक के अक्षर उधार लिए जाते हैं। इनका क्रम इस प्रकार है: A का मान 10, B का 11, C का 12, D का 13, E का 14 और F का 15। अक्षर D इनमें चौथा है, अतः उसका मान 13 है, जिसका बाइनरी रूप 1101 होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 11 के लिए B है। विकल्प B गलत है क्योंकि 12 के लिए C है। विकल्प D गलत है क्योंकि 14 के लिए E है। याद रखने का सरल तरीका यह है कि अक्षर दस के आगे की गिनती जारी रखते हैं।
एक बाइट में संचित की जा सकने वाली सबसे बड़ी चिह्नरहित दशमलव संख्या कौन-सी है?
- A.127
- B.128
- C.255
- D.256
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 255
व्याख्या
सही उत्तर C, 255 है। एक बाइट में आठ बिट होते हैं और हर बिट 0 या 1 हो सकता है, अतः भिन्न प्रारूपों की कुल संख्या 2 की घात 8 अर्थात 256 होती है। चिह्नरहित बाइट में ये 256 प्रारूप 0 से लेकर 255 तक की संख्याएं दर्शाते हैं, क्योंकि गिनती शून्य से आरंभ होती है। सबसे बड़ा प्रारूप 11111111 है, जिसका योग 128 + 64 + 32 + 16 + 8 + 4 + 2 + 1 अर्थात 255 होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 127 चिह्नयुक्त बाइट का सबसे बड़ा धनात्मक मान है, जिसमें सबसे बाईं ओर का बिट चिह्न के लिए रख लिया जाता है और मान के लिए केवल सात बिट बचते हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि 128 केवल सबसे बाएं बिट का स्थानीय मान है। विकल्प D गलत है क्योंकि 256 प्रारूपों की गिनती है, सबसे बड़ा मान नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कंप्यूटर बाइनरी संख्या पद्धति का ही प्रयोग क्यों करते हैं?
कोई डिजिटल परिपथ भरोसे के साथ केवल दो अवस्थाएं पहचान सकता है, जैसे वोल्टता का होना या न होना, अथवा डिस्क पर किसी बिंदु का चुंबकित होना या न होना। ये दो अवस्थाएं 0 और 1 अंकों से स्वाभाविक रूप से मेल खाती हैं, इसलिए बाइनरी आंकड़े रखने और भेजने का सबसे सस्ता तथा सबसे कम त्रुटि वाला ढंग है। दस अवस्थाओं वाली पद्धति के लिए दस वोल्टता स्तर चाहिए होते, जिन्हें परिपथ बार-बार गलत पढ़ता।
एक किलोबाइट में 1000 बाइट होती हैं या 1024?
कंप्यूटर में एक किलोबाइट 1024 बाइट की होती है, क्योंकि स्मृति के पते दो की घातों में दिए जाते हैं और 1024 का अर्थ 2 की घात 10 है। 1000 वाली दशमलव किलोबाइट डिस्क बनाने वाली कंपनियों की पैकिंग पर मिलती है, इसीलिए 500 जीबी बताई गई डिस्क परदे पर कम क्षमता दिखाती है। परीक्षा में किलोबाइट को सदैव 1024 बाइट मानिए।
ASCII और यूनिकोड में क्या अंतर है?
मानक ASCII सात बिट का कोड है जिसमें 128 अक्षर आते हैं और वह केवल अंग्रेजी अक्षरों, अंकों, विराम चिह्नों तथा नियंत्रण कोड को समेटता है। यूनिकोड इसलिए बनाया गया ताकि देवनागरी, तमिल और चीनी सहित संसार की हर लेखन प्रणाली उसमें आ सके, और हर अक्षर को एक अद्वितीय कोड बिंदु मिले। यूनिकोड के पहले 128 कोड बिंदु ASCII जैसे ही हैं, इसलिए साधारण अंग्रेजी पाठ दोनों में पढ़ा जा सकता है।
बाइनरी संख्या को शीघ्रता से हेक्साडेसिमल में कैसे बदलें?
सबसे दाईं ओर के बिट से आरंभ करके चार-चार बिट के समूह बनाइए, अंतिम समूह पूरा करने के लिए आगे शून्य जोड़ दीजिए, और हर समूह के स्थान पर उसका हेक्साडेसिमल चिह्न रख दीजिए। समूह 1110 का चिह्न E और 1010 का चिह्न A है, इसलिए 10101110 का हेक्साडेसिमल AE बनता है। यह विधि इसलिए चलती है क्योंकि चार बिट से सोलह संयोजन बनते हैं, जो हेक्साडेसिमल चिह्नों की संख्या के बराबर है।
कंप्यूटर ऋणात्मक संख्याओं को 2 के पूरक रूप में क्यों रखता है?
2 के पूरक रूप में किसी संख्या को घटाना उसके पूरक को जोड़ने के बराबर हो जाता है, इसलिए प्रोसेसर को जोड़ और घटाव के लिए अलग-अलग परिपथ नहीं, केवल एक योजक परिपथ चाहिए। इसमें शून्य का भी एक ही प्रारूप बनता है, जबकि 1 के पूरक वाली विधि में धनात्मक और ऋणात्मक दो शून्य मिलते हैं।
स्रोत
- कंप्यूटर विज्ञान, कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तक, इकाई 1: कंप्यूटर तंत्र और संगठन — एनसीईआरटी
- The Unicode Standard, Chapter 2: General Structure — Unicode Consortium
- ANSI X3.4, Coded Character Set, 7-Bit American National Standard Code for Information Interchange — American National Standards Institute





