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GK नोट्सविज्ञान और प्रौद्योगिकीजीनोमिक्स, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और जीन संपादन (क्रिस्पर)

जीनोमिक्स, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और जीन संपादन: क्रिस्पर

जीनोमिक्स और जीन संपादन के नोट्स: डीएनए संरचना, मानव जीनोम परियोजना, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, पीसीआर, प्रतिबंधन एंजाइम तथा क्रिस्पर-कैस9 के परीक्षा तथ्य।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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जीनोमिक्स, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और जीन संपादन: क्रिस्पर — GK24 title card
जीनोमिक्स, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और जीन संपादन: क्रिस्पर — GK24 title card

जीवित शरीर की प्रत्येक कोशिका में चार अक्षरों में लिखी एक निर्देश पुस्तिका रहती है। जीनोमिक्स उस पूरी पुस्तिका को पढ़ना है, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग उसकी कुछ अनोखी पंक्तियों से एक व्यक्ति को दूसरे से अलग पहचानना है, और जीन संपादन किसी पंक्ति को फिर से लिखना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रम में ये तीनों साथ आते हैं क्योंकि तीनों का आधार एक ही अणु और गिने-चुने एंजाइम हैं। इन नोट्स में अणु की संरचना, उस पर बनी तकनीकें, उनका उपयोग करने वाली भारतीय संस्थाएं तथा वे नाम, वर्ष और पुरस्कार दिए गए हैं जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

अणु और उसकी संरचना

डीएनए, अर्थात डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल, दो प्रतिसमांतर श्रृंखलाओं की द्विकुंडलिनी है। प्रत्येक श्रृंखला न्यूक्लियोटाइड की लड़ी है और प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में एक नाइट्रोजन क्षार, एक डिऑक्सीराइबोस शर्करा और एक फॉस्फेट समूह होता है। क्षार चार हैं: एडेनीन, थायमीन, गुआनीन और साइटोसीन। एडेनीन सदा थायमीन से दो हाइड्रोजन आबंधों द्वारा और गुआनीन साइटोसीन से तीन आबंधों द्वारा जुड़ता है, इसी कारण दोनों श्रृंखलाएं पूरक होती हैं और एक श्रृंखला से दूसरी बन सकती है। जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक ने 1953 में द्विकुंडलिनी का प्रतिरूप प्रस्तुत किया, जिसमें रोजालिंड फ्रैंकलिन तथा मॉरिस विल्किंस के एक्स-किरण विवर्तन चित्रों का उपयोग हुआ; वाटसन, क्रिक और विल्किंस को 1962 का चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार मिला।

जीनोमिक्स और जीनोम अनुक्रमण

जीनोम का अर्थ है किसी जीव का संपूर्ण डीएनए। मानव जीनोम में लगभग तीन अरब क्षार युग्म और करीब बीस हजार प्रोटीन-कोडिंग जीन होते हैं, और किसी भी दो असंबंधित व्यक्तियों का जीनोम लगभग 99.9 प्रतिशत तक एक जैसा होता है। जीनोमिक्स एक समय में एक जीन के स्थान पर इस पूरे समुच्चय का अध्ययन करता है, और इसकी शाखाओं के नाम इस पर हैं कि वे क्या पढ़ती हैं: एक्सोम प्रोटीन-कोडिंग भाग है, ट्रांसक्रिप्टोम उससे बना आरएनए और प्रोटिओम उससे बने प्रोटीन। फ्रेडरिक सैंगर की श्रृंखला-समापन विधि ने अनुक्रमण संभव बनाया और आज की अगली पीढ़ी की अनुक्रमण तकनीक एक साथ लाखों खंड पढ़ती है।

कार्यक्रमवर्षकार्य
मानव जीनोम परियोजना1990 से 2003अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक परियोजना, जिसने मानव जीनोम का अनुक्रमण किया; अप्रैल 2003 में पूर्ण घोषित
इंडीजेन2019 सेवैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद का कार्यक्रम, जिसने एक हजार भारतीय जीनोम का अनुक्रमण किया
जीनोम इंडिया परियोजनाजनवरी 2020 सेजैव प्रौद्योगिकी विभाग की परियोजना, लगभग बीस संस्थानों के साथ, दस हजार भारतीय जीनोम के संदर्भ आधार के लिए

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का विकास एलेक जेफ्रीज ने 1984 में लेस्टर विश्वविद्यालय में किया। यह विधि पूरा जीनोम नहीं पढ़ती; यह उन छोटे अनुक्रमों को पढ़ती है जो भिन्न व्यक्तियों में भिन्न संख्या में दोहराए जाते हैं। जेफ्रीज ने मिनीसैटेलाइट, जिन्हें परिवर्तनीय संख्या अनुत्तरिक पुनरावृत्ति भी कहते हैं, प्रतिबंधन एंजाइमों से काटे, जेल वैद्युतकण संचलन से पृथक किए और सदर्न ब्लॉटिंग द्वारा चिह्नित प्रोब से पहचाने। आज की प्रयोगशालाएं पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया से लघु अनुत्तरिक पुनरावृत्तियों को प्रवर्धित करती हैं, इसलिए रक्त, वीर्य, बाल की जड़ या अस्थि की थोड़ी कोशिकाएं भी पर्याप्त हैं। दो असंबंधित व्यक्तियों का पूरा प्रोफाइल एक होने की संभावना नगण्य है, जबकि माता-पिता और संतान का आधा प्रोफाइल समान रहता है, और इसी कारण यह परीक्षण न्यायालयिक तथा पितृत्व दोनों मामलों में काम करता है।

भारत में इस तकनीक की नींव लालजी सिंह ने रखी, जिन्हें कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र, हैदराबाद में विकसित बीकेएम प्रोब के कारण भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का जनक कहा जाता है। समर्पित राष्ट्रीय संस्थान डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र है, जो 1995 में हैदराबाद में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्थापित हुआ। अपराध और पितृत्व के अतिरिक्त यह विधि आपदा में मृतकों की पहचान करती है, आप्रवास के दावे सुलझाती है, पशुओं की वंशावली बताती है और वन्यजीव न्यायालयिकी द्वारा शिकारियों को दोषी सिद्ध करती है। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए, जो केवल माता से मिलता है, पुराने या क्षतिग्रस्त प्रतिदर्श में उपयोग होता है, और वाई गुणसूत्र के चिह्न पितृ वंश का पता देते हैं।

एंजाइमों का औजार-बक्सा

  • प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज डीएनए को निश्चित अनुक्रम पर काटते हैं और आणविक कैंची कहलाते हैं; एस्चेरिकिया कोलाई से मिला इकोआरआई इसका मानक उदाहरण है। इनके लिए वर्नर आर्बर, डेनियल नाथन्स और हैमिल्टन स्मिथ को 1978 का चिकित्सा नोबेल मिला।
  • डीएनए लाइगेज खंडों को जोड़ता है, इसी से पुनर्योगज डीएनए बनता है; पहला पुनर्योगज प्लाज्मिड स्टेनली कोहेन और हर्बर्ट बॉयर ने 1973 में बनाया।
  • टैक पॉलीमरेज, जो गर्म जलस्रोत के जीवाणु थर्मस एक्वेटिकस से मिलता है, उबलने पर भी नष्ट नहीं होता और इसलिए 1983 में कैरी मुलिस द्वारा आविष्कृत पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया चलाता है; मुलिस को 1993 का रसायन नोबेल मिला।
  • जेल वैद्युतकण संचलन खंडों को आकार के अनुसार अलग करता है; फॉस्फेट रीढ़ ऋणावेशित होने के कारण डीएनए सदा एनोड, अर्थात धनात्मक इलेक्ट्रोड, की ओर चलता है।

जीन संपादन और क्रिस्पर

क्रिस्पर का पूरा रूप है क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स। यह मनुष्य का आविष्कार नहीं, जीवाणु की प्रतिरक्षा है: जीवाणु उन विषाणुओं के टुकड़े संचित रखता है जिन्होंने उस पर आक्रमण किया और उन्हीं से उसी विषाणु को दोबारा पहचानता है। इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना ने इस प्रणाली को औजार बनाया और उन्हें 2020 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला। एक छोटा गाइड आरएनए कैस9 एंजाइम को मिलते-जुलते अनुक्रम तक ले जाता है, जिसके पास पैम नामक संकेत होता है, और एंडोन्यूक्लिएज कैस9 दोनों श्रृंखलाएं काट देता है। इसके बाद कोशिका की अपनी मरम्मत प्रणाली उस जीन को निष्क्रिय कर देती है अथवा साँचा दिए जाने पर सुधरा अनुक्रम लिख देती है। जिंक फिंगर न्यूक्लिएज और टैलेन यही कार्य प्रोटीन आधारित लक्ष्यीकरण से करते हैं, तथा नए क्षार संपादन और प्राइम संपादन पूरी द्विश्रृंखला काट बिना अक्षर बदल देते हैं।

जीन संपादन से सिकल सेल अरक्तता और थैलेसीमिया जैसे एकल जीन रोगों के उपचार की आशा बंधी है, और क्रिस्पर पर आधारित पहली चिकित्सा को 2023 के अंत में ब्रिटेन तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में सिकल सेल रोग के लिए स्वीकृति मिली। इससे कठिन प्रश्न भी उठते हैं, क्योंकि भ्रूण में किया गया संपादन आगे की पीढ़ियों में चला जाएगा। कृषि में भारत आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीवों का नियमन पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत आनुवंशिक इंजीनियरी मूल्यांकन समिति तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति के माध्यम से करता है; 2002 में स्वीकृत बीटी कपास देश में व्यावसायिक खेती के लिए अनुमत एकमात्र आनुवंशिक रूपांतरित फसल है, जबकि बीटी बैंगन पर 2010 में रोक लगा दी गई थी।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्नपत्र इस विषय को नाम, वर्ष और कार्य के रूप में पूछते हैं। खोजकर्ता और तकनीक की जोड़ी बिठाएं: 1984 में जेफ्रीज और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, 1983 में मुलिस और पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया, सैंगर और अनुक्रमण, 1973 में कोहेन तथा बॉयर और पुनर्योगज डीएनए, शारपेंटिए तथा डूडना और क्रिस्पर के लिए 2020 का रसायन नोबेल। एक प्रश्न एंजाइम के कार्य पर आता है, जिसमें एंडोन्यूक्लिएज कैस9 को लाइगेज, पॉलीमरेज और वाहक से अलग पहचानना होता है, और एक जेल वैद्युतकण संचलन की दिशा पर, जो सदा एनोड की ओर होती है। सीधे पूछी जाने वाली संख्याएं हैं दो और तीन हाइड्रोजन आबंध, तीन अरब क्षार युग्म, करीब बीस हजार जीन, मानव जीनोम परियोजना के लिए 2003 और नोबेल के लिए 2020। भारत से जुड़े प्रश्न हैदराबाद के डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र, जैव प्रौद्योगिकी विभाग की जीनोम इंडिया परियोजना, सीएसआईआर के इंडीजेन तथा एकमात्र स्वीकृत जीएम फसल बीटी कपास पर आते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

द्विकुंडलिनी प्रतिरूपजेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक, 1953; मॉरिस विल्किंस के साथ 1962 का चिकित्सा नोबेल
क्षार युग्मनएडेनीन-थायमीन (दो हाइड्रोजन आबंध), गुआनीन-साइटोसीन (तीन आबंध)
मानव जीनोम का आकारलगभग 3 अरब क्षार युग्म; करीब 20,000 प्रोटीन-कोडिंग जीन
मानव जीनोम परियोजना1990 में आरंभ, अप्रैल 2003 में पूर्ण घोषित
डीएनए फिंगरप्रिंटिंगएलेक जेफ्रीज, लेस्टर विश्वविद्यालय, 1984, मिनीसैटेलाइट के आधार पर
भारत में जनकलालजी सिंह, हैदराबाद में विकसित बीकेएम प्रोब के लिए
सीडीएफडीडीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र, हैदराबाद, 1995, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत
पीसीआरकैरी मुलिस, 1983; थर्मस एक्वेटिकस से टैक पॉलीमरेज; 1993 का रसायन नोबेल
आणविक कैंचीइकोआरआई जैसे प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज; 1978 का चिकित्सा नोबेल
क्रिस्पर-कैस9इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना; 2020 का रसायन विज्ञान नोबेल
जीनोम इंडिया परियोजनाजनवरी 2020, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, लगभग 20 संस्थान, 10,000 भारतीय जीनोम
भारत में जीएम फसलबीटी कपास, 2002 में स्वीकृत; बीटी बैंगन पर 2010 से रोक
नियामकआनुवंशिक इंजीनियरी मूल्यांकन समिति (पर्यावरण मंत्रालय) तथा आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति (जैव प्रौद्योगिकी विभाग)

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का विकास 1984 में किस वैज्ञानिक ने किया था?

  1. A.कैरी मुलिस
  2. B.एलेक जेफ्रीज
  3. C.फ्रेडरिक सैंगर
  4. D.हैमिल्टन स्मिथ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एलेक जेफ्रीज

व्याख्या

सही उत्तर है B, एलेक जेफ्रीज। लेस्टर विश्वविद्यालय में 1984 में कार्य करते हुए एलेक जेफ्रीज ने पाया कि कुछ छोटे अनुक्रम, अर्थात मिनीसैटेलाइट या परिवर्तनीय संख्या अनुत्तरिक पुनरावृत्तियां, भिन्न व्यक्तियों में भिन्न संख्या में दोहराई जाती हैं और उनसे बना प्रतिरूप व्यक्ति की पहचान कर देता है। उनकी विधि में डीएनए प्रतिबंधन एंजाइमों से काटा जाता था, टुकड़े जेल वैद्युतकण संचलन से अलग किए जाते थे और सदर्न ब्लॉटिंग से दिखाए जाते थे।

विकल्प A, कैरी मुलिस, ने 1983 में पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया का आविष्कार किया, जिस प्रवर्धन के कारण आगे कुछ कोशिकाओं से भी फिंगरप्रिंटिंग संभव हुई; उन्हें 1993 का रसायन नोबेल मिला। विकल्प C, फ्रेडरिक सैंगर, ने डीएनए अनुक्रमण की श्रृंखला-समापन विधि दी, जो क्षारों का क्रम पढ़ती है, पुनरावृत्ति प्रतिरूप की तुलना नहीं करती। विकल्प D, हैमिल्टन स्मिथ, को प्रतिबंधन एंजाइमों के लिए 1978 का नोबेल मिला। भारत में इस तकनीक की नींव लालजी सिंह ने रखी, जिन्हें भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का जनक कहा जाता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

रसायन विज्ञान का 2020 का नोबेल पुरस्कार क्रिस्पर-कैस9 जीनोम संपादन विधि के विकास के लिए किसे दिया गया?

  1. A.जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक
  2. B.इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना
  3. C.कैरी मुलिस और माइकल स्मिथ
  4. D.वर्नर आर्बर और डेनियल नाथन्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना

व्याख्या

सही उत्तर है B, इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना। इन दोनों वैज्ञानिकों ने दिखाया कि जीवाणु की क्रिस्पर-कैस9 प्रणाली को बनाए गए गाइड आरएनए से किसी भी चुने हुए डीएनए अनुक्रम पर काटने के लिए निर्देशित किया जा सकता है, जिससे सूक्ष्मजीव की एक प्रतिरक्षा प्रणाली जीनोम संपादन का सामान्य औजार बन गई; इसके लिए उन्हें 2020 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला।

विकल्प A, वाटसन और क्रिक, ने 1953 में द्विकुंडलिनी प्रतिरूप दिया और मॉरिस विल्किंस के साथ 1962 का चिकित्सा नोबेल साझा किया। विकल्प C, कैरी मुलिस और माइकल स्मिथ, को 1993 का रसायन नोबेल मिला, मुलिस को पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया के लिए और स्मिथ को स्थल-निर्देशित उत्परिवर्तन के लिए। विकल्प D, वर्नर आर्बर और डेनियल नाथन्स, ने हैमिल्टन स्मिथ के साथ 1978 का चिकित्सा नोबेल प्रतिबंधन एंजाइमों के लिए साझा किया। 1962, 1978, 1993 और 2020 के क्रम में इन पुरस्कारों को याद रखना सबसे सरल उपाय है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

क्रिस्पर-कैस9 प्रणाली में कैस9 प्रोटीन किस रूप में कार्य करता है?

  1. A.लाइगेज, जो डीएनए खंडों को जोड़ता है
  2. B.एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है
  3. C.पॉलीमरेज, जो डीएनए की प्रतिकृति बनाता है
  4. D.प्लाज्मिड, जो जीन को कोशिका में पहुंचाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है

व्याख्या

सही उत्तर है B, एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है। कैस9 वह एंजाइम है जो उस स्थान पर डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं की शर्करा-फॉस्फेट रीढ़ तोड़ देता है जहां उसका गाइड आरएनए जुड़ा हो, बशर्ते पास में पैम नामक छोटा संकेत उपस्थित हो। इसके बाद कोशिका इस द्विश्रृंखला विच्छेद की मरम्मत करती है और उसी मरम्मत में जीन निष्क्रिय हो जाता है अथवा साँचा दिए जाने पर सुधरा अनुक्रम लिख दिया जाता है।

विकल्प A डीएनए लाइगेज का वर्णन है, जो खंडों को जोड़ता है और पुनर्योगज डीएनए बनाने में उपयोग होता है। विकल्प C टैक पॉलीमरेज जैसे डीएनए पॉलीमरेज का वर्णन है, जो पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में नई श्रृंखला बनाता है; कैस9 किसी की प्रतिकृति नहीं बनाता। विकल्प D वाहक का वर्णन है: प्लाज्मिड तथा एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेशिएंस का टीआई प्लाज्मिड जीन को कोशिका में ले जाते हैं, जबकि कैस9 स्वयं भेजा जाने वाला भार है। दोनों भाग अलग याद रखें: पता गाइड आरएनए चुनता है और काटने का कार्य कैस9 करता है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

जेल वैद्युतकण संचलन में डीएनए खंड किस इलेक्ट्रोड की ओर चलते हैं और क्यों?

  1. A.कैथोड की ओर, क्योंकि डीएनए धनावेशित है
  2. B.एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है
  3. C.कैथोड की ओर, क्योंकि डीएनए उदासीन पर हल्का है
  4. D.वे चलते नहीं, केवल रंजक चलता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है

व्याख्या

सही उत्तर है B, एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है। डीएनए के प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट समूह होता है और यही फॉस्फेट रीढ़ प्रयोगशाला के पीएच पर पूरे अणु को शुद्ध ऋण आवेश देती है। अतः विद्युत क्षेत्र में खंड धनात्मक इलेक्ट्रोड, अर्थात एनोड, की ओर चलते हैं, और एगारोज जेल लंबे खंडों को छोटे खंडों से अधिक रोकता है, जिससे टुकड़े आकार के अनुसार क्रम में आ जाते हैं।

विकल्प A और विकल्प C दोनों डीएनए को कैथोड, अर्थात ऋणात्मक इलेक्ट्रोड, की ओर भेजते हैं, जिसके लिए अणु को धनावेशित या उदासीन होना पड़ेगा; प्रोटीन कुछ पीएच पर ऐसा व्यवहार कर सकते हैं, डीएनए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पृथक्करण ही जेल का कार्य है; एथिडियम ब्रोमाइड जैसा रंजक केवल अलग हुई पट्टियों को पराबैंगनी प्रकाश में दृश्य बनाता है। परीक्षा में यह नियम भी पूछा जाता है कि छोटे खंड कुंड से अधिक दूर तक जाते हैं।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

मानव जीनोम का अनुक्रमण करने वाली मानव जीनोम परियोजना किस वर्ष पूर्ण घोषित की गई?

  1. A.1990
  2. B.1998
  3. C.2003
  4. D.2010
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2003

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2003। मानव जीनोम परियोजना 1990 में एक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रयास के रूप में आरंभ हुई, जिसका समन्वय संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और ऊर्जा विभाग करते थे और जिसमें कई देशों की प्रयोगशालाएं सम्मिलित थीं। वर्ष 2000 में कार्यकारी प्रारूप घोषित हुआ और अप्रैल 2003 में परियोजना पूर्ण घोषित की गई, अर्थात द्विकुंडलिनी के वर्णन के पचासवें वर्ष में। इसी से सिद्ध हुआ कि मानव जीनोम में लगभग तीन अरब क्षार युग्म और करीब बीस हजार प्रोटीन-कोडिंग जीन हैं।

विकल्प A, 1990, परियोजना के आरंभ का वर्ष है और यही सबसे आम गलत चयन है। विकल्प B, 1998, उस वर्ष है जब एक निजी कंपनी ने प्रतिस्पर्धी अनुक्रमण आरंभ किया, जिससे सार्वजनिक परियोजना की गति बढ़ी। विकल्प D, 2010, परियोजना के किसी पड़ाव से संबंधित नहीं है। भारत के अपने जीनोम कार्यक्रम बाद में आए: 2019 से इंडीजेन और जनवरी 2020 से जीनोम इंडिया परियोजना।

Q6.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में कौन-सा एंजाइम प्रयोग होता है, क्योंकि वह उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है?

  1. A.डीएनए लाइगेज
  2. B.टैक पॉलीमरेज
  3. C.प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज इकोआरआई
  4. D.रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. टैक पॉलीमरेज

व्याख्या

सही उत्तर है B, टैक पॉलीमरेज। कैरी मुलिस द्वारा 1983 में आविष्कृत पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में तीन चरण दोहराए जाते हैं: डीएनए लगभग पंचानबे डिग्री सेल्सियस पर विकृत होता है, छोटे प्राइमर कम ताप पर जुड़ते हैं और श्रृंखला लगभग बहत्तर डिग्री पर बढ़ाई जाती है। साधारण पॉलीमरेज तापन के चरण में नष्ट हो जाता, इसलिए अभिक्रिया में गर्म जलस्रोत के जीवाणु थर्मस एक्वेटिकस से प्राप्त टैक पॉलीमरेज काम आता है, जो इन तापों पर सक्रिय रहता है।

विकल्प A, डीएनए लाइगेज, खंड जोड़ता है और पुनर्योगज डीएनए के कार्य में आता है, प्रवर्धन में नहीं। विकल्प C, इकोआरआई, प्रतिबंधन एंजाइम है जो डीएनए को निश्चित अनुक्रम पर काटता है; काटना इस अभिक्रिया की आवश्यकता के विपरीत है। विकल्प D, रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज, आरएनए से डीएनए बनाता है और जब प्रारंभिक पदार्थ आरएनए हो तब पहले प्रयोग होता है, जैसे आरएनए विषाणुओं की जांच में, पर उसके बाद के प्रवर्धन में भी ताप-सह पॉलीमरेज आवश्यक रहता है।

Q7.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डीएनए अणु में एडेनीन, थायमीन से कितने हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़ता है?

  1. A.एक
  2. B.दो
  3. C.तीन
  4. D.चार
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दो

व्याख्या

सही उत्तर है B, दो। वाटसन और क्रिक के प्रतिरूप में दोनों श्रृंखलाएं पूरक क्षारों के बीच हाइड्रोजन आबंधों से जुड़ी रहती हैं: एडेनीन थायमीन से दो हाइड्रोजन आबंधों द्वारा और गुआनीन साइटोसीन से तीन आबंधों द्वारा जुड़ता है। गुआनीन-साइटोसीन युग्म में एक आबंध अधिक होने के कारण इन दो क्षारों से भरपूर डीएनए खंड को अलग करने के लिए अधिक ताप चाहिए, और इस तथ्य का उपयोग पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया की दशाएं तय करने में होता है।

विकल्प A, एक, डीएनए के किसी भी क्षार युग्म के लिए कम है। विकल्प C, तीन, गुआनीन-साइटोसीन युग्म की संख्या है और एडेनीन-थायमीन के लिए इसे रखना इस प्रश्न का सामान्य जाल है। विकल्प D, चार, किसी युग्म से मेल नहीं खाता। साथ के तथ्य भी याद रखें: एडेनीन और गुआनीन प्यूरीन हैं, थायमीन और साइटोसीन पिरिमिडीन हैं, तथा आरएनए में एडेनीन के सामने थायमीन के स्थान पर यूरैसिल आता है।

Q8.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत 1995 में स्थापित डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र कहां स्थित है?

  1. A.पुणे
  2. B.हैदराबाद
  3. C.कल्याणी
  4. D.लखनऊ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. हैदराबाद

व्याख्या

सही उत्तर है B, हैदराबाद। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र 1995 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान के रूप में स्थापित हुआ और हैदराबाद में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग सेवाओं, आनुवंशिक विकारों के निदान तथा जीनोमिक्स के अनुसंधान का कार्य करता है। हैदराबाद ही वह नगर है जहां लालजी सिंह ने कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र में बीकेएम प्रोब विकसित किया, इसीलिए भारत में इस तकनीक का आरंभ इस नगर से जोड़ा जाता है।

विकल्प A, पुणे, में राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र है, जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग का भिन्न संस्थान है। विकल्प C, पश्चिम बंगाल का कल्याणी, राष्ट्रीय जैव चिकित्सा जीनोमिकी संस्थान का स्थान है, जो जीनोमिक्स पर कार्य करता है पर फिंगरप्रिंटिंग केंद्र नहीं है। विकल्प D, लखनऊ, में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान तथा भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान हैं, जो वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत आते हैं। संस्थान और नगर की जोड़ी याद रखें, क्योंकि प्रश्नपत्र यही मिलान सीधे पूछते हैं।

Q9.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

भारतीय जीनोम का संदर्भ आधार बनाने के लिए जनवरी 2020 में आरंभ जीनोम इंडिया परियोजना का समन्वय कौन करता है?

  1. A.भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद
  2. B.जैव प्रौद्योगिकी विभाग
  3. C.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
  4. D.केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जैव प्रौद्योगिकी विभाग

व्याख्या

सही उत्तर है B, जैव प्रौद्योगिकी विभाग। जीनोम इंडिया परियोजना जनवरी 2020 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने आरंभ की, जिसमें लगभग बीस शैक्षणिक संस्थान मिलकर भारतीय जीनोम का अनुक्रमण करते हैं और देश की आनुवंशिक विविधता दर्शाने वाला संदर्भ समुच्चय तैयार करते हैं। ऐसा आधार इसलिए आवश्यक है क्योंकि यूरोपीय जनसंख्या में मिले रोग-संबद्ध प्रकार भारतीय रोगियों पर सदा लागू नहीं होते।

विकल्प A, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, चिकित्सा अनुसंधान और निगरानी करती है पर इस परियोजना की समन्वयक नहीं है। विकल्प C, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, अंतरिक्ष विज्ञान का कार्य करता है और इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं। विकल्प D, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन, औषधि नियामक है जो दवाओं और टीकों को स्वीकृति देता है। साथ का कार्यक्रम भी ध्यान रखें: 2019 से वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद का इंडीजेन, जिसने एक हजार भारतीय जीनोम का अनुक्रमण किया।

Q10.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत में व्यावसायिक खेती के लिए कौन-सी आनुवंशिक रूपांतरित फसल स्वीकृत है?

  1. A.बीटी बैंगन
  2. B.बीटी कपास
  3. C.गोल्डन चावल
  4. D.जीएम सोयाबीन
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सही उत्तर: B. बीटी कपास

व्याख्या

सही उत्तर है B, बीटी कपास। बीटी कपास में मृदा जीवाणु बैसिलस थुरिंजिएंसिस के जीन होते हैं, जिनसे पौधा वह प्रोटीन बनाता है जो चित्तीदार सूंडी के लार्वा के लिए विषैला है। इसे 2002 में व्यावसायिक खेती की स्वीकृति मिली और यह भारत में किसानों द्वारा व्यावसायिक खेती के लिए अनुमत एकमात्र आनुवंशिक रूपांतरित फसल है। स्वीकृति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आनुवंशिक इंजीनियरी मूल्यांकन समिति देती है, जबकि अनुसंधान की देखरेख जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति करती है।

विकल्प A, बीटी बैंगन, को मिली स्वीकृति 2010 में रोक के कारण स्थगित हो गई और उसकी व्यावसायिक खेती नहीं होती। विकल्प C, गोल्डन चावल, विदेश में विकसित विटामिन ए संवर्धित चावल है और भारत में खेती के लिए अनुमत नहीं है। विकल्प D, जीएम सोयाबीन, कुछ अन्य देशों में उगाया जाता है; भारत उससे प्राप्त कुछ तेलों के आयात की अनुमति देता है, फसल की खेती की नहीं। परीक्षक का लक्ष्य एकमात्र स्वीकृत फसल और नियामक का नाम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीनोमिक्स और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग में क्या अंतर है?

जीनोमिक्स पूरा जीनोम पढ़ता है, मानव में सभी तीन अरब क्षार युग्म, जिससे जीन और उनके प्रकारों का अध्ययन होता है। डीएनए फिंगरप्रिंटिंग केवल उन छोटे दोहराए जाने वाले अनुक्रमों को पढ़ती है जिनकी संख्या व्यक्तियों में भिन्न होती है, और इतना ही एक व्यक्ति को दूसरे से अलग पहचानने या पितृत्व सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है; यह व्यक्ति के जीन या स्वास्थ्य के बारे में कुछ नहीं बताती।

क्रिस्पर-कैस9 जीन का संपादन कैसे करता है?

लक्ष्य अनुक्रम से मेल खाने के लिए बनाया गया गाइड आरएनए कैस9 एंजाइम को उस स्थान तक ले जाता है, जहां पास में पैम नामक संकेत होना आवश्यक है। कैस9 डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काट देता है और इसके बाद कोशिका की अपनी मरम्मत प्रणाली उस जीन को निष्क्रिय कर देती है अथवा साँचा दिए जाने पर सुधरा अनुक्रम लिख देती है।

पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में टैक पॉलीमरेज क्यों प्रयोग होता है?

क्योंकि इस अभिक्रिया में प्रत्येक चक्र में श्रृंखलाएं अलग करने के लिए प्रतिदर्श को लगभग पंचानबे डिग्री सेल्सियस तक गर्म किया जाता है। टैक पॉलीमरेज गर्म जलस्रोत के जीवाणु थर्मस एक्वेटिकस से मिलता है और इस ताप पर भी सक्रिय रहता है, जबकि साधारण पॉलीमरेज पहले ही चक्र में नष्ट हो जाता।

भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का कार्य कौन-सी संस्था करती है?

हैदराबाद का डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एवं निदान केंद्र, जो 1995 में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत स्थापित हुआ, इसका समर्पित संस्थान है। भारत में इस तकनीक की नींव उसी नगर के कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र में लालजी सिंह ने रखी, और अब राज्यों की न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशालाओं में भी डीएनए इकाइयां कार्य करती हैं।

भारत में कौन-सी आनुवंशिक रूपांतरित फसलें उगाई जा सकती हैं?

केवल बीटी कपास, जिसे 2002 में व्यावसायिक खेती की स्वीकृति मिली। बीटी बैंगन पर 2010 में रोक लगा दी गई थी। पर्यावरण में छोड़ने की स्वीकृति पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत आनुवंशिक इंजीनियरी मूल्यांकन समिति देती है।

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