आयुष मंत्रालय के त्वचा रोग मानक उपचार दिशानिर्देश जारी
आयुष मंत्रालय ने 11वें आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए त्वचा रोगों के मानक उपचार दिशानिर्देश जारी किए, जिनमें योग भी शामिल है।

चर्चा में क्यों
आयुष मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी के लिए त्वचा रोगों के प्रबंधन पर मानक उपचार दिशानिर्देश जारी किए, जिन्हें 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किया गया।
आयुष मंत्रालय ने चार पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए त्वचा रोगों के प्रबंधन पर मानक उपचार दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनमें योग को भी शामिल किया गया है। इनमें शामिल चार पद्धतियां हैं आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी, और प्रत्येक के लिए अलग दस्तावेज प्रकाशित किया गया है। ये दिशानिर्देश 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किए गए।
किसने तैयार किए
इन दस्तावेजों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की आयुष इकाई ने तैयार किया है। घोषित उद्देश्य यह है कि आयुष पद्धतियों की नैदानिक देखभाल में अधिक एकरूपता, गुणवत्ता की गारंटी और प्रमाण आधारित व्यवहार आए।
कौन से रोग शामिल
प्रत्येक पद्धति के लिए दिशानिर्देशों में रोकथाम, निदान, उपचार, अनुवर्ती देखभाल और पुनर्वास पर सिफारिशें दी गई हैं। जिन त्वचा रोगों पर ध्यान दिया गया है उनमें सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो यानी श्वित्र, पित्ती और फंगल संक्रमण डर्मेटोफाइटोसिस शामिल हैं, अर्थात वे शिकायतें जिनके लिए सबसे अधिक रोगी त्वचा रोग विभाग पहुंचते हैं।
अधिकारियों ने क्या कहा
आयुष राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में आयुष पद्धतियों के एकीकरण को गहरा करेंगे और सुरक्षित, प्रभावी तथा समग्र देखभाल में मदद करेंगे। आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इन्हें मानकीकरण और प्रमाण आधारित व्यवहार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया तथा कहा कि ये प्रत्येक पद्धति के मूल सिद्धांतों को बनाए रखते हुए व्यावहारिक सलाह देते हैं। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने त्वचा रोग देखभाल सुधारने में बहुविषयक सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
तैयारी और परीक्षण
इन्हें बनाने में आयुष अनुसंधान परिषदों, चारों पद्धतियों के वरिष्ठ शिक्षाविदों, योग विशेषज्ञों तथा आधुनिक चिकित्सा के विशेषज्ञों का सहयोग लिया गया। प्रक्रिया में विशेषज्ञ परामर्श, शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन, वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों का आकलन और सहमति आधारित विचार विमर्श शामिल रहे। इसके बाद प्रोटोकॉल को क्षेत्र में परखा गया। आयुष इकाई ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ मिलकर प्राथमिक तथा द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों पर इनका परीक्षण किया। व्यवहार में उपयोगिता पर उनकी प्रतिक्रिया को अंतिम दस्तावेजों में जोड़ा गया। ये दिशानिर्देश चिकित्सकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के लिए संदर्भ सामग्री का काम करेंगे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| दस्तावेज | त्वचा रोगों के प्रबंधन पर मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) |
|---|---|
| जारीकर्ता | आयुष मंत्रालय |
| तैयार करने वाली इकाई | आयुष इकाई, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
| शामिल पद्धतियां | आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी, योग के समावेश सहित |
| जारी करने का अवसर | 11वां आयुर्वेद दिवस |
| शामिल रोग | सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, श्वित्र, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस |
| सलाह का दायरा | रोकथाम, निदान, उपचार, अनुवर्ती देखभाल और पुनर्वास |
| आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | श्री प्रतापराव जाधव |
| सचिव, आयुष मंत्रालय | वैद्य राजेश कोटेचा |
| स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक | डॉ. लवनीश जी. कृष्णा |
| क्षेत्रीय परीक्षण साझेदार | आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार |
परीक्षा की दृष्टि से
शामिल चार पद्धतियां आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी तथा योग का समावेश, तैयार करने वाली इकाई स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की आयुष इकाई, अवसर 11वां आयुर्वेद दिवस, सूचीबद्ध रोग सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, श्वित्र, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस, तथा आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और डीजीएचएस डॉ. लवनीश जी. कृष्णा के नाम याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
त्वचा रोगों पर नए मानक उपचार दिशानिर्देश किन चार पारंपरिक पद्धतियों के लिए हैं?
- A.आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और सिद्ध
- B.आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी
- C.आयुर्वेद, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा और सोवा-रिग्पा
- D.सिद्ध, यूनानी, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी है। आयुष मंत्रालय ने इन चारों पद्धतियों में से प्रत्येक के लिए अलग मानक उपचार दिशानिर्देश दस्तावेज प्रकाशित किया है, और योग को इनमें एक समावेश के रूप में जोड़ा गया है, पांचवीं पद्धति के रूप में अलग दस्तावेज के साथ नहीं। विकल्प क में योग और प्राकृतिक चिकित्सा को गलत ढंग से अलग दिशानिर्देश वाली पद्धतियों के रूप में गिना गया है। विकल्प ग और विकल्प घ में सोवा-रिग्पा का नाम आता है, जो आयुष के अंतर्गत आने वाली पद्धतियों में से एक है, परंतु त्वचा रोग के इन दिशानिर्देशों वाली चार पद्धतियों में शामिल नहीं है। परीक्षार्थियों को यह भी याद रखना चाहिए कि दस्तावेज स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की आयुष इकाई ने तैयार किए और इन्हें 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर जारी किया गया।
त्वचा रोगों पर आयुष के मानक उपचार दिशानिर्देश किस अवसर पर सार्वजनिक किए गए?
- A.विश्व स्वास्थ्य दिवस
- B.राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस
- C.11वां आयुर्वेद दिवस
- D.अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर 11वां आयुर्वेद दिवस है। आयुष मंत्रालय ने इसी अवसर को इन दिशानिर्देशों को सार्वजनिक करने के लिए चुना, जिससे यह जारी होना मंत्रालय के अपने आयोजनों के कैलेंडर से जुड़ जाता है। विकल्प क, विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व स्वास्थ्य संगठन के आयोजनों में आता है और यहां वह अवसर नहीं था। विकल्प ख, राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस, भारत में चिकित्सा पेशे को सम्मान देता है पर इस दस्तावेज से इसका संबंध नहीं है। विकल्प घ, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, एक स्वाभाविक अनुमान लगता है क्योंकि दिशानिर्देशों में योग को शामिल किया गया है, फिर भी इन्हें उस दिन जारी नहीं किया गया। परीक्षाओं के लिए संस्करण संख्या महत्वपूर्ण है, इसलिए याद रखें कि यह आयुर्वेद दिवस का ग्यारहवां आयोजन था।
नए दिशानिर्देशों पर बोलने वाले आयुष के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौन हैं?
- A.श्री प्रतापराव जाधव
- B.वैद्य राजेश कोटेचा
- C.डॉ. लवनीश जी. कृष्णा
- D.श्री जगत प्रकाश नड्डा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर श्री प्रतापराव जाधव हैं, जो राज्य मंत्री के रूप में आयुष मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार संभालते हैं और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भी हैं। उन्होंने कहा कि ये दिशानिर्देश राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में आयुष पद्धतियों के एकीकरण को गहरा करेंगे और सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी तथा समग्र देखभाल में सहायक होंगे। विकल्प ख, वैद्य राजेश कोटेचा, आयुष मंत्रालय के सचिव हैं और उन्होंने मानकीकरण तथा प्रमाण आधारित व्यवहार पर अलग से बात की, पर वे अधिकारी हैं, मंत्री नहीं। विकल्प ग, डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक हैं और उन्होंने बहुविषयक सहयोग पर जोर दिया। विकल्प घ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री का नाम है, जो भ्रामक विकल्प है क्योंकि महानिदेशालय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन आता है।
वास्तविक नैदानिक परिस्थितियों में उपचार प्रोटोकॉल परखने के लिए आयुष इकाई ने किसके साथ साझेदारी की?
- A.अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
- B.केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद
- C.आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार
- D.राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर आयुष निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार है। क्षेत्र स्तर पर परीक्षण इस कवायद की उल्लेखनीय विशेषता रही। इस निदेशालय के अधीन प्राथमिक तथा द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ प्रोटोकॉल परखे गए और रोजमर्रा के काम में उनकी उपयोगिता पर मिली प्रतिक्रिया अंतिम दस्तावेजों में शामिल की गई। विकल्प क, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान, आयुर्वेद का बड़ा संस्थान है पर परीक्षण साझेदार के रूप में इसका नाम नहीं है। विकल्प ख, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, उन आयुष अनुसंधान परिषदों में है जिनकी तकनीकी विशेषज्ञता दस्तावेज बनाने में लगी, जो क्षेत्रीय परीक्षण से अलग भूमिका है। विकल्प घ, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा का नियामक है और इस प्रक्रिया में शामिल नहीं था। दस्तावेज तैयार करने में विशेषज्ञ परामर्श, शास्त्रीय ग्रंथों का अध्ययन, वर्तमान वैज्ञानिक प्रमाणों का आकलन और सहमति आधारित विचार विमर्श शामिल रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आयुष के नए मानक उपचार दिशानिर्देश किस विषय पर हैं?
ये चार पारंपरिक पद्धतियों, अर्थात आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी में त्वचा रोगों के प्रबंधन पर हैं, जिनमें योग भी शामिल है, और प्रत्येक पद्धति के लिए रोकथाम, निदान, उपचार, अनुवर्ती देखभाल तथा पुनर्वास की सिफारिशें दी गई हैं।
ये दिशानिर्देश किस अवसर पर जारी किए गए?
इन्हें 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किया गया। दस्तावेज स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की आयुष इकाई ने तैयार किए हैं।
इनमें कौन कौन से त्वचा रोग शामिल हैं?
सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, श्वित्र यानी विटिलिगो, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस जैसे सामान्य त्वचा रोग शामिल हैं, और चारों आयुष पद्धतियों के लिए पद्धति विशेष नैदानिक सिफारिशें दी गई हैं।
जारी करने से पहले प्रोटोकॉल कैसे परखे गए?
आयुष इकाई ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ मिलकर प्राथमिक तथा द्वितीयक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों पर इन्हें परखा और व्यवहार में उपयोगिता पर मिली प्रतिक्रिया अंतिम दस्तावेजों में जोड़ी गई।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2322793 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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