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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में कौन-सा एंजाइम प्रयोग होता है, क्योंकि वह उच्च ताप पर भी सक्रिय रहता है?

  1. A.डीएनए लाइगेज
  2. B.टैक पॉलीमरेज
  3. C.प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज इकोआरआई
  4. D.रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज

सही उत्तर

B. टैक पॉलीमरेज

व्याख्या

सही उत्तर है B, टैक पॉलीमरेज। कैरी मुलिस द्वारा 1983 में आविष्कृत पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में तीन चरण दोहराए जाते हैं: डीएनए लगभग पंचानबे डिग्री सेल्सियस पर विकृत होता है, छोटे प्राइमर कम ताप पर जुड़ते हैं और श्रृंखला लगभग बहत्तर डिग्री पर बढ़ाई जाती है। साधारण पॉलीमरेज तापन के चरण में नष्ट हो जाता, इसलिए अभिक्रिया में गर्म जलस्रोत के जीवाणु थर्मस एक्वेटिकस से प्राप्त टैक पॉलीमरेज काम आता है, जो इन तापों पर सक्रिय रहता है।

विकल्प A, डीएनए लाइगेज, खंड जोड़ता है और पुनर्योगज डीएनए के कार्य में आता है, प्रवर्धन में नहीं। विकल्प C, इकोआरआई, प्रतिबंधन एंजाइम है जो डीएनए को निश्चित अनुक्रम पर काटता है; काटना इस अभिक्रिया की आवश्यकता के विपरीत है। विकल्प D, रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज, आरएनए से डीएनए बनाता है और जब प्रारंभिक पदार्थ आरएनए हो तब पहले प्रयोग होता है, जैसे आरएनए विषाणुओं की जांच में, पर उसके बाद के प्रवर्धन में भी ताप-सह पॉलीमरेज आवश्यक रहता है।

पूरा लेख पढ़ें: जीनोमिक्स, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और जीन संपादन: क्रिस्पर

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का विकास 1984 में किस वैज्ञानिक ने किया था?

  1. A.कैरी मुलिस
  2. B.एलेक जेफ्रीज
  3. C.फ्रेडरिक सैंगर
  4. D.हैमिल्टन स्मिथ
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एलेक जेफ्रीज

व्याख्या

सही उत्तर है B, एलेक जेफ्रीज। लेस्टर विश्वविद्यालय में 1984 में कार्य करते हुए एलेक जेफ्रीज ने पाया कि कुछ छोटे अनुक्रम, अर्थात मिनीसैटेलाइट या परिवर्तनीय संख्या अनुत्तरिक पुनरावृत्तियां, भिन्न व्यक्तियों में भिन्न संख्या में दोहराई जाती हैं और उनसे बना प्रतिरूप व्यक्ति की पहचान कर देता है। उनकी विधि में डीएनए प्रतिबंधन एंजाइमों से काटा जाता था, टुकड़े जेल वैद्युतकण संचलन से अलग किए जाते थे और सदर्न ब्लॉटिंग से दिखाए जाते थे।

विकल्प A, कैरी मुलिस, ने 1983 में पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया का आविष्कार किया, जिस प्रवर्धन के कारण आगे कुछ कोशिकाओं से भी फिंगरप्रिंटिंग संभव हुई; उन्हें 1993 का रसायन नोबेल मिला। विकल्प C, फ्रेडरिक सैंगर, ने डीएनए अनुक्रमण की श्रृंखला-समापन विधि दी, जो क्षारों का क्रम पढ़ती है, पुनरावृत्ति प्रतिरूप की तुलना नहीं करती। विकल्प D, हैमिल्टन स्मिथ, को प्रतिबंधन एंजाइमों के लिए 1978 का नोबेल मिला। भारत में इस तकनीक की नींव लालजी सिंह ने रखी, जिन्हें भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का जनक कहा जाता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

रसायन विज्ञान का 2020 का नोबेल पुरस्कार क्रिस्पर-कैस9 जीनोम संपादन विधि के विकास के लिए किसे दिया गया?

  1. A.जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक
  2. B.इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना
  3. C.कैरी मुलिस और माइकल स्मिथ
  4. D.वर्नर आर्बर और डेनियल नाथन्स
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना

व्याख्या

सही उत्तर है B, इमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना। इन दोनों वैज्ञानिकों ने दिखाया कि जीवाणु की क्रिस्पर-कैस9 प्रणाली को बनाए गए गाइड आरएनए से किसी भी चुने हुए डीएनए अनुक्रम पर काटने के लिए निर्देशित किया जा सकता है, जिससे सूक्ष्मजीव की एक प्रतिरक्षा प्रणाली जीनोम संपादन का सामान्य औजार बन गई; इसके लिए उन्हें 2020 का रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला।

विकल्प A, वाटसन और क्रिक, ने 1953 में द्विकुंडलिनी प्रतिरूप दिया और मॉरिस विल्किंस के साथ 1962 का चिकित्सा नोबेल साझा किया। विकल्प C, कैरी मुलिस और माइकल स्मिथ, को 1993 का रसायन नोबेल मिला, मुलिस को पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया के लिए और स्मिथ को स्थल-निर्देशित उत्परिवर्तन के लिए। विकल्प D, वर्नर आर्बर और डेनियल नाथन्स, ने हैमिल्टन स्मिथ के साथ 1978 का चिकित्सा नोबेल प्रतिबंधन एंजाइमों के लिए साझा किया। 1962, 1978, 1993 और 2020 के क्रम में इन पुरस्कारों को याद रखना सबसे सरल उपाय है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

क्रिस्पर-कैस9 प्रणाली में कैस9 प्रोटीन किस रूप में कार्य करता है?

  1. A.लाइगेज, जो डीएनए खंडों को जोड़ता है
  2. B.एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है
  3. C.पॉलीमरेज, जो डीएनए की प्रतिकृति बनाता है
  4. D.प्लाज्मिड, जो जीन को कोशिका में पहुंचाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है

व्याख्या

सही उत्तर है B, एंडोन्यूक्लिएज, जो डीएनए की दोनों श्रृंखलाएं काटता है। कैस9 वह एंजाइम है जो उस स्थान पर डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं की शर्करा-फॉस्फेट रीढ़ तोड़ देता है जहां उसका गाइड आरएनए जुड़ा हो, बशर्ते पास में पैम नामक छोटा संकेत उपस्थित हो। इसके बाद कोशिका इस द्विश्रृंखला विच्छेद की मरम्मत करती है और उसी मरम्मत में जीन निष्क्रिय हो जाता है अथवा साँचा दिए जाने पर सुधरा अनुक्रम लिख दिया जाता है।

विकल्प A डीएनए लाइगेज का वर्णन है, जो खंडों को जोड़ता है और पुनर्योगज डीएनए बनाने में उपयोग होता है। विकल्प C टैक पॉलीमरेज जैसे डीएनए पॉलीमरेज का वर्णन है, जो पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया में नई श्रृंखला बनाता है; कैस9 किसी की प्रतिकृति नहीं बनाता। विकल्प D वाहक का वर्णन है: प्लाज्मिड तथा एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमेफेशिएंस का टीआई प्लाज्मिड जीन को कोशिका में ले जाते हैं, जबकि कैस9 स्वयं भेजा जाने वाला भार है। दोनों भाग अलग याद रखें: पता गाइड आरएनए चुनता है और काटने का कार्य कैस9 करता है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

जेल वैद्युतकण संचलन में डीएनए खंड किस इलेक्ट्रोड की ओर चलते हैं और क्यों?

  1. A.कैथोड की ओर, क्योंकि डीएनए धनावेशित है
  2. B.एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है
  3. C.कैथोड की ओर, क्योंकि डीएनए उदासीन पर हल्का है
  4. D.वे चलते नहीं, केवल रंजक चलता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है

व्याख्या

सही उत्तर है B, एनोड की ओर, क्योंकि डीएनए ऋणावेशित है। डीएनए के प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट समूह होता है और यही फॉस्फेट रीढ़ प्रयोगशाला के पीएच पर पूरे अणु को शुद्ध ऋण आवेश देती है। अतः विद्युत क्षेत्र में खंड धनात्मक इलेक्ट्रोड, अर्थात एनोड, की ओर चलते हैं, और एगारोज जेल लंबे खंडों को छोटे खंडों से अधिक रोकता है, जिससे टुकड़े आकार के अनुसार क्रम में आ जाते हैं।

विकल्प A और विकल्प C दोनों डीएनए को कैथोड, अर्थात ऋणात्मक इलेक्ट्रोड, की ओर भेजते हैं, जिसके लिए अणु को धनावेशित या उदासीन होना पड़ेगा; प्रोटीन कुछ पीएच पर ऐसा व्यवहार कर सकते हैं, डीएनए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पृथक्करण ही जेल का कार्य है; एथिडियम ब्रोमाइड जैसा रंजक केवल अलग हुई पट्टियों को पराबैंगनी प्रकाश में दृश्य बनाता है। परीक्षा में यह नियम भी पूछा जाता है कि छोटे खंड कुंड से अधिक दूर तक जाते हैं।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

मानव जीनोम का अनुक्रमण करने वाली मानव जीनोम परियोजना किस वर्ष पूर्ण घोषित की गई?

  1. A.1990
  2. B.1998
  3. C.2003
  4. D.2010
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 2003

व्याख्या

सही उत्तर है C, 2003। मानव जीनोम परियोजना 1990 में एक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रयास के रूप में आरंभ हुई, जिसका समन्वय संयुक्त राज्य अमेरिका में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान और ऊर्जा विभाग करते थे और जिसमें कई देशों की प्रयोगशालाएं सम्मिलित थीं। वर्ष 2000 में कार्यकारी प्रारूप घोषित हुआ और अप्रैल 2003 में परियोजना पूर्ण घोषित की गई, अर्थात द्विकुंडलिनी के वर्णन के पचासवें वर्ष में। इसी से सिद्ध हुआ कि मानव जीनोम में लगभग तीन अरब क्षार युग्म और करीब बीस हजार प्रोटीन-कोडिंग जीन हैं।

विकल्प A, 1990, परियोजना के आरंभ का वर्ष है और यही सबसे आम गलत चयन है। विकल्प B, 1998, उस वर्ष है जब एक निजी कंपनी ने प्रतिस्पर्धी अनुक्रमण आरंभ किया, जिससे सार्वजनिक परियोजना की गति बढ़ी। विकल्प D, 2010, परियोजना के किसी पड़ाव से संबंधित नहीं है। भारत के अपने जीनोम कार्यक्रम बाद में आए: 2019 से इंडीजेन और जनवरी 2020 से जीनोम इंडिया परियोजना।