सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन: पूरे नोट्स
परीक्षा के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी नोट्स: बैंड अंतराल, मादन, डायोड तथा ट्रांजिस्टर, चिप निर्माण और सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम की व्याख्या।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 5 मिनट

अर्धचालक वह पदार्थ है जिसकी धारा वहन की क्षमता चालक और विद्रोधी के बीच पड़ती है, और जिसकी चालकता जानबूझकर नियंत्रित की जा सकती है। यही एक गुण आज प्रयोग में आने वाले प्रत्येक कंप्यूटर, फोन, कार और उपग्रह की नींव है, इसी कारण परीक्षाएं अब अर्धचालकों को दो ओर से पूछती हैं: पदार्थ की भौतिकी, जो विद्यालय के पाठ्यक्रम से आती है, और चिप बनाने का भारत का अपना कार्यक्रम, जो समकालीन घटनाओं से आता है। ये नोट्स दोनों को समेटते हैं।
अर्धचालक चालन क्यों करता है
ठोस में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाएं बैंडों में बंटती हैं। संयोजकता बैंड बंधन के इलेक्ट्रॉन रखता है; चालन बैंड उन इलेक्ट्रॉनों को रखता है जो चलने के लिए मुक्त हैं; दोनों के बीच वर्जित अंतराल होता है। धातु में दोनों बैंड अतिव्यापी होते हैं, इसलिए धारा स्वतंत्र रूप से बहती है। हीरे जैसे विद्रोधी में अंतराल लगभग साढ़े पांच इलेक्ट्रॉन वोल्ट है, जो साधारण ताप के पार करने के लिए बहुत अधिक है। अर्धचालक में अंतराल छोटा है: सिलिकॉन में लगभग 1.1 eV, जर्मेनियम में लगभग 0.7 eV और गैलियम आर्सेनाइड में लगभग 1.43 eV। इसलिए ताप अथवा प्रकाश इलेक्ट्रॉनों को पार करा सकता है, और पार जाने वाला प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पीछे एक रिक्ति छोड़ता है, जिसे कोटर कहते हैं और जो गतिशील धनात्मक वाहक की तरह व्यवहार करती है। चूंकि गर्म करने से वाहक बनते हैं, अर्धचालक का प्रतिरोध ताप बढ़ने पर घटता है, यानी उसका प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक है, जो धातु के उलट है। परम शून्य पर शुद्ध अर्धचालक विद्रोधी की तरह व्यवहार करता है। सिलिकॉन उद्योग का मुख्य आधार है क्योंकि वह पृथ्वी की भूपर्पटी में ऑक्सीजन के बाद सर्वाधिक पाया जाने वाला तत्व है, स्थायी ऑक्साइड बनाता है और अत्यंत शुद्ध एकल क्रिस्टल के रूप में उगाया जा सकता है।
मादन, डायोड और ट्रांजिस्टर
शुद्ध क्रिस्टल नैज कहलाता है, और उसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या कोटरों की संख्या के बराबर होती है। किसी अन्य तत्व की नियंत्रित मात्रा मिलाना मादन है। फॉस्फोरस, आर्सेनिक अथवा एंटीमनी जैसा पंचसंयोजक अपद्रव्य प्रति परमाणु एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन देता है और n प्रकार का क्रिस्टल बनाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक हैं। बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम अथवा इंडियम जैसा त्रिसंयोजक अपद्रव्य एक बंध अपूर्ण छोड़ता है और p प्रकार का क्रिस्टल बनाता है, जिसमें कोटर बहुसंख्यक वाहक हैं। दोनों समग्र रूप से विद्युत उदासीन रहते हैं। दोनों प्रकारों को जोड़ने पर p n संधि बनती है, जिसमें अवक्षय क्षेत्र होता है और अवरोध विभव सिलिकॉन में लगभग 0.7 वोल्ट तथा जर्मेनियम में 0.3 वोल्ट रहता है; यह अग्र अभिनति में चालन करती और पश्च अभिनति में रोकती है, इसलिए दिष्टकारी बनती है। संधि के रूपांतर अन्य कार्य करते हैं: जेनर डायोड पश्च भंजन में वोल्टेज नियंत्रित करता है, प्रकाश उत्सर्जक डायोड धारा को प्रकाश में बदलता है, तथा फोटो डायोड और सौर सेल प्रकाश को धारा में। तीन क्षेत्रों को जोड़ने पर द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर बनता है, जिसमें उत्सर्जक, पतला हल्का मादित आधार तथा संग्राहक होते हैं; अल्फा संग्राहक धारा को उत्सर्जक धारा से भाग देने पर मिलता है और एक से कुछ कम होता है, जबकि बीटा, यानी संग्राहक धारा को आधार धारा से भाग देने पर मिलने वाला मान, धारा लाभ है। ट्रांजिस्टर 1947 में बेल प्रयोगशाला में जॉन बार्डीन, वॉल्टर ब्रैटेन और विलियम शॉकले ने बनाया, जिन्हें 1956 का भौतिकी का नोबेल मिला। आगे जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस ने सिलिकॉन की एक ही परत पर अनेक युक्तियां रखकर एकीकृत परिपथ बनाया, और किल्बी को 2000 में भौतिकी का नोबेल मिला। गॉर्डन मूर का 1965 का प्रेक्षण, कि चिप पर अवयवों की संख्या स्थिर दर से दोगुनी होती है, आज भी उद्योग की गति तय करता है।
चिप वास्तव में कैसे बनती है
चिप निर्माण के तीन चरण हैं। डिजाइन में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन स्वचालन सॉफ्टवेयर तथा पुनः प्रयोग योग्य परिपथ खंड काम आते हैं; जो कंपनियां केवल डिजाइन करती हैं वे फैबलेस कहलाती हैं। फैब्रिकेशन फैब में होता है, जहां चमकाया गया सिलिकॉन वेफर फोटो लिथोग्राफी, नक्काशी, मादन तथा निक्षेपण से कई बार गुजरकर परत दर परत परिपथ बनाता है, और सबसे छोटी रचना का माप नैनोमीटर में बताया जाता है। पश्च चरण वेफर को काटकर चिप बनाता है और फिर उन्हें जोड़ता, परखता, अंकित करता तथा पैक करता है, जिसे उद्योग ATMP कहता है; यह काम दूसरों के लिए करने वाली कंपनी OSAT इकाई है। फैब अत्यंत महंगे होते हैं और सबसे उन्नत लिथोग्राफी मशीनें नीदरलैंड की एक ही कंपनी से आती हैं, इसी कारण ताइवान, दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के नेतृत्व में कुछ ही देशों के पास अग्रणी क्षमता है।
भारत का सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से स्वीकृत किया, और इसे चलाने के लिए इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत भारत सेमीकंडक्टर मिशन बनाया गया। कार्यक्रम के चार अंग हैं: सेमीकंडक्टर फैब की योजना, डिस्प्ले फैब की योजना, यौगिक अर्धचालक तथा ATMP या OSAT इकाइयों की योजना, और चिप डिजाइन के लिए डिजाइन संबद्ध प्रोत्साहन योजना। स्वीकृत परियोजनाओं में गुजरात के साणंद में माइक्रोन की पैकेजिंग तथा परीक्षण इकाई शामिल है, जो 2023 में मंजूर हुई, और 2024 में गुजरात के धोलेरा में एक ताइवानी भागीदार के साथ टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का फैब, असम के जागीरोड में टाटा की पैकेजिंग इकाई तथा साणंद में अन्य इकाइयां। भारत की विद्यमान सरकारी फैब पंजाब के मोहाली की सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला है, जो इसरो तथा डीआरडीओ के लिए पुराने नोड पर चिप बनाती है। इनके साथ अभियंताओं के प्रशिक्षण का चिप्स टू स्टार्टअप कार्यक्रम, बड़े पैमाने की इलेक्ट्रॉनिकी तथा कंप्यूटर हार्डवेयर की उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन योजनाएं और 2019 की राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी नीति भी जुड़ी हैं।
| मद | याद रखने योग्य मान |
|---|---|
| सिलिकॉन का बैंड अंतराल | लगभग 1.1 eV |
| जर्मेनियम का बैंड अंतराल | लगभग 0.7 eV |
| n प्रकार के अपद्रव्य | पंचसंयोजक: फॉस्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी, बिस्मथ |
| p प्रकार के अपद्रव्य | त्रिसंयोजक: बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम, इंडियम |
| अवरोध विभव | सिलिकॉन में लगभग 0.7 V, जर्मेनियम में 0.3 V |
| ट्रांजिस्टर का आविष्कार | 1947, बेल प्रयोगशाला; भौतिकी का नोबेल 1956 |
| सेमीकॉन इंडिया स्वीकृति | दिसंबर 2021, परिव्यय 76,000 करोड़ रुपये |
| नोडल मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय |
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय से दो प्रकार के प्रश्न आते हैं। भौतिकी वाला भाग बैंड अंतराल के मान, कौन सा अपद्रव्य कौन सा प्रकार देता है, कौन वाहक बहुसंख्यक है, सिलिकॉन बनाम जर्मेनियम का अवरोध विभव, अल्फा तथा बीटा की परिभाषा और ताप के साथ प्रतिरोध की दिशा पूछता है। वहां सबसे आम जाल धातु का नियम अर्धचालक पर लगाकर यह उत्तर देना है कि गर्म करने पर प्रतिरोध बढ़ता है। नीति वाला भाग भारत सेमीकंडक्टर मिशन का मंत्रालय, सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का वर्ष तथा परिव्यय, ATMP और OSAT का पूरा रूप, किसी स्वीकृत इकाई का राज्य और सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला का स्थान पूछता है। दूसरा बार बार मिलने वाला जाल डिजाइन केंद्र को, जो बेंगलूरु तथा हैदराबाद में अनेक हैं, फैब्रिकेशन संयंत्र समझ लेना है, जो भारत में बहुत कम हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| सिलिकॉन का बैंड अंतराल | कक्ष ताप पर लगभग 1.1 eV |
|---|---|
| जर्मेनियम का बैंड अंतराल | लगभग 0.7 eV |
| n प्रकार का अपद्रव्य | पंचसंयोजक: फॉस्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी, बिस्मथ |
| p प्रकार का अपद्रव्य | त्रिसंयोजक: बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम, इंडियम |
| अवरोध विभव | सिलिकॉन संधि में लगभग 0.7 V, जर्मेनियम में 0.3 V |
| ट्रांजिस्टर का अल्फा | संग्राहक धारा बटा उत्सर्जक धारा, एक से कुछ कम |
| ट्रांजिस्टर का बीटा | संग्राहक धारा बटा आधार धारा, यानी धारा लाभ |
| ट्रांजिस्टर का आविष्कार | 1947, बेल प्रयोगशाला, बार्डीन, ब्रैटेन तथा शॉकले द्वारा |
| सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम | दिसंबर 2021 में स्वीकृत; परिव्यय 76,000 करोड़ रुपये |
| नोडल संस्था और मंत्रालय | भारत सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत |
| ATMP | असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग; बाहरी प्रदाता OSAT इकाई |
| भारत की सरकारी फैब | सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला, मोहाली, पंजाब; इसरो तथा डीआरडीओ के लिए |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
कक्ष ताप पर सिलिकॉन का वर्जित ऊर्जा अंतराल लगभग कितना होता है?
- A.0.3 eV
- B.0.7 eV
- C.1.1 eV
- D.5.5 eV
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 1.1 eV
व्याख्या
सही उत्तर C, लगभग 1.1 eV है। संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच का ऊर्जा अंतराल तय करता है कि कोई ठोस चालन करेगा या नहीं: सिलिकॉन में यह अंतराल लगभग 1.1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट है, जो इतना छोटा है कि ताप अथवा प्रकाश कुछ इलेक्ट्रॉनों को पार करा दे, और इसी से सिलिकॉन अर्धचालक बनता है। विकल्प A गलत है क्योंकि 0.3 वोल्ट जर्मेनियम डायोड का अग्र अवरोध वोल्टेज है, जो पूरी तरह भिन्न राशि है। विकल्प B गलत है क्योंकि लगभग 0.7 eV जर्मेनियम का बैंड अंतराल है, और यही सिलिकॉन डायोड का अग्र वोल्टेज पात भी है, इसी से परीक्षार्थी दोनों संख्याएं मिला देते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि लगभग 5.5 eV हीरे का अंतराल है, जो विद्युतरोधी है। तीनों साथ याद रखें: जर्मेनियम 0.7 eV, सिलिकॉन 1.1 eV, गैलियम आर्सेनाइड लगभग 1.43 eV।
यदि किसी नैज अर्धचालक में np और ne क्रमशः कोटरों तथा इलेक्ट्रॉनों की संख्या हैं, तो:
- A.npne = 1
- B.np > ne
- C.np = ne
- D.np < ne
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. np = ne
व्याख्या
सही उत्तर C, कोटरों की संख्या इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर है है। नैज यानी रासायनिक रूप से शुद्ध अर्धचालक में प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन किसी सहसंयोजक बंध के टूटने से बनता है, और बंध टूटने पर ठीक एक कोटर पीछे छूटता है, इसलिए इलेक्ट्रॉन और कोटर सदा जोड़ों में बनते हैं तथा उनकी सांद्रता बराबर रहनी ही चाहिए। विकल्प A गलत है क्योंकि दो सांद्रताओं का गुणनफल किसी शुद्ध संख्या एक के बराबर नहीं हो सकता; वह गुणनफल ताप तथा बैंड अंतराल से तय होता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कोटर इलेक्ट्रॉनों से अधिक केवल p प्रकार के क्रिस्टल में होते हैं, जिसके लिए त्रिसंयोजक अपद्रव्य चाहिए। विकल्प D गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन कोटरों से अधिक केवल n प्रकार में होते हैं, जिसके लिए पंचसंयोजक अपद्रव्य चाहिए। बराबर संख्या शुद्ध क्रिस्टल की पहचान है।
n प्रकार का अर्धचालक बनाने के लिए सिलिकॉन में निम्नलिखित में से कौन सा अपद्रव्य मिलाया जाता है?
- A.बोरॉन
- B.एल्युमिनियम
- C.फॉस्फोरस
- D.इंडियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. फॉस्फोरस
व्याख्या
सही उत्तर C, फॉस्फोरस है। सिलिकॉन में चार संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए फॉस्फोरस, आर्सेनिक, एंटीमनी अथवा बिस्मथ जैसा पंचसंयोजक परमाणु मिलाने पर चार बंध बनने के बाद एक इलेक्ट्रॉन बच जाता है; वह अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ढीला बंधा होता है और मुक्त वाहक बन जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन बहुसंख्यक वाहक होते हैं और क्रिस्टल n प्रकार का बनता है। विकल्प A गलत है क्योंकि बोरॉन त्रिसंयोजक है और रिक्ति बनाकर p प्रकार का क्रिस्टल देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि एल्युमिनियम भी त्रिसंयोजक p प्रकार का अपद्रव्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि इंडियम भी त्रिसंयोजक है। ध्यान रखें कि n प्रकार का क्रिस्टल ऋणात्मक आवेशित नहीं होता: दाता परमाणु अपना धनात्मक नाभिक रखता है, इसलिए पूरा क्रिस्टल विद्युत उदासीन रहता है, और परीक्षक ठीक यही बिंदु पूछते हैं।
p प्रकार के अर्धचालक में बहुसंख्यक आवेश वाहक कौन होते हैं?
- A.इलेक्ट्रॉन
- B.कोटर
- C.प्रोटॉन
- D.धनात्मक आयन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. कोटर
व्याख्या
सही उत्तर B, कोटर है। बोरॉन, एल्युमिनियम, गैलियम अथवा इंडियम जैसा त्रिसंयोजक अपद्रव्य आसपास के सिलिकॉन परमाणुओं से केवल तीन सहसंयोजक बंध बनाता है, जिससे एक बंध अपूर्ण रह जाता है; वह रिक्ति गतिशील धनात्मक वाहक की तरह व्यवहार करती है और कोटर कहलाती है, इसलिए कोटर बहुसंख्यक वाहक बन जाते हैं जबकि ताप से बने इलेक्ट्रॉन अल्पसंख्यक वाहक रहते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि इलेक्ट्रॉन n प्रकार के क्रिस्टल में बहुसंख्यक होते हैं और यहां केवल अल्पसंख्यक हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि प्रोटॉन नाभिक में बंधे रहते हैं और क्रिस्टल जालक में कभी नहीं चलते। विकल्प D गलत है क्योंकि अपद्रव्य आयन जालक में स्थिर रहते हैं और आवेशित होते हुए भी धारा नहीं ले जा सकते। यह भी याद रखें कि p प्रकार का क्रिस्टल समग्र रूप से विद्युत उदासीन होता है।
1947 में बेल प्रयोगशाला में ट्रांजिस्टर का आविष्कार किस वैज्ञानिक दल ने किया था?
- A.बार्डीन, ब्रैटेन और शॉकले
- B.किल्बी, नॉयस और मूर
- C.फैराडे, मैक्सवेल और हर्ट्ज
- D.टाउंस, बासोव और प्रोखोरोव
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. बार्डीन, ब्रैटेन और शॉकले
व्याख्या
सही उत्तर A, बार्डीन, ब्रैटेन और शॉकले है। जॉन बार्डीन, वॉल्टर ब्रैटेन तथा विलियम शॉकले ने 1947 में संयुक्त राज्य अमेरिका की बेल प्रयोगशाला में पहला कार्यशील ट्रांजिस्टर बनाया, और ट्रांजिस्टर प्रभाव की खोज के लिए तीनों को 1956 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला; इस युक्ति ने भारी निर्वात नलिका का स्थान लिया और आगे का पूरा इलेक्ट्रॉनिकी संभव बनाया। विकल्प B गलत है क्योंकि जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस ने 1958 तथा 1959 में स्वतंत्र रूप से एकीकृत परिपथ विकसित किया, और गॉर्डन मूर ने उद्योग को उसका प्रसिद्ध दोगुनापन नियम दिया। विकल्प C गलत है क्योंकि फैराडे, मैक्सवेल और हर्ट्ज विद्युतचुंबकत्व के इतिहास से हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि टाउंस, बासोव तथा प्रोखोरोव को मेसर और लेसर के कार्य के लिए 1964 का नोबेल मिला।
द्विध्रुवी ट्रांजिस्टर में अल्फा किसका अनुपात होता है?
- A.संग्राहक धारा और उत्सर्जक धारा का
- B.उत्सर्जक धारा और संग्राहक धारा का
- C.आधार धारा और संग्राहक धारा का
- D.संग्राहक धारा और आधार धारा का
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संग्राहक धारा और उत्सर्जक धारा का
व्याख्या
सही उत्तर A, संग्राहक धारा और उत्सर्जक धारा का है। द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर में उत्सर्जक वाहक भेजता है, पतला तथा हल्का मादित आधार उनमें से अधिकांश को पार जाने देता है, और संग्राहक उन्हें एकत्र करता है, इसलिए उत्सर्जक धारा एक बड़ी संग्राहक धारा तथा एक छोटी आधार धारा में बंट जाती है; अल्फा संग्राहक धारा को उत्सर्जक धारा से भाग देकर परिभाषित होता है और इसलिए सदा एक से कुछ कम रहता है, सामान्यतः 0.95 से 0.99 के बीच। विकल्प B गलत है क्योंकि यह अनुपात उलटा है और एक से बड़ा मान देगा। विकल्प C गलत है क्योंकि आधार से संग्राहक का अनुपात एक छोटा अंश है जिसका मानक नाम नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि संग्राहक धारा को आधार धारा से भाग देने पर बीटा मिलता है। अल्फा एक से कम और बीटा एक से बहुत अधिक रखें।
ट्रांजिस्टर का बीटा धारा अनुपात क्या है?
- A.IC/IB
- B.IB/IE
- C.IE/IC
- D.IC/IE
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. IC/IB
व्याख्या
सही उत्तर A, संग्राहक धारा को आधार धारा से भाग देने पर है। बीटा उभयनिष्ठ उत्सर्जक व्यवस्था में द्विध्रुवी संधि ट्रांजिस्टर का धारा लाभ है: आधार धारा में अत्यंत छोटा परिवर्तन संग्राहक धारा में बहुत बड़ा परिवर्तन उत्पन्न करता है, और दोनों का अनुपात बीटा है, जो सामान्यतः लगभग बीस से कई सौ के बीच रहता है। इसी कारण ट्रांजिस्टर प्रवर्धक का काम कर सकता है। विकल्प B गलत है क्योंकि आधार धारा को उत्सर्जक धारा से भाग देने पर मिलने वाला छोटा अंश किसी मानक प्रतीक से नहीं जाना जाता। विकल्प C गलत है क्योंकि यह अल्फा के अनुपात को उलटा कर देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि संग्राहक धारा को उत्सर्जक धारा से भाग देने पर अल्फा मिलता है, जो एक से कुछ कम होता है। दोनों राशियां जुड़ी हैं, क्योंकि बीटा अल्फा को एक घटा अल्फा से भाग देने पर मिलता है।
1965 में प्रस्तुत मूर का नियम निम्नलिखित में से किससे संबंधित है?
- A.परम शून्य पर अर्धचालक का प्रतिरोध
- B.एक नियमित अवधि में चिप पर ट्रांजिस्टरों की संख्या का दोगुना होना
- C.डायोड द्वारा रोके जा सकने वाला अधिकतम वोल्टेज
- D.निर्वात नलिका में इलेक्ट्रॉनों की चाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक नियमित अवधि में चिप पर ट्रांजिस्टरों की संख्या का दोगुना होना
व्याख्या
सही उत्तर B, एक नियमित अवधि में चिप पर ट्रांजिस्टरों की संख्या का दोगुना होना है। इंटेल के सह संस्थापक गॉर्डन मूर ने 1965 में देखा कि एकीकृत परिपथ में मितव्ययी ढंग से भरे जा सकने वाले अवयवों की संख्या एक स्थिर दर से दोगुनी होती जा रही है, और यह प्रेक्षण, जिसे आगे लगभग प्रत्येक दो वर्ष में दोगुना होने के रूप में उद्धृत किया गया, पूरे उद्योग का नियोजन नियम बन गया। विकल्प A गलत है क्योंकि परम शून्य पर शुद्ध अर्धचालक का विद्युतरोधी जैसा व्यवहार बैंड सिद्धांत से निकलता है, मूर के किसी नियम से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि डायोड का रोक वोल्टेज उसकी भंजन रेटिंग है। विकल्प D गलत है क्योंकि निर्वात नलिका में इलेक्ट्रॉन की चाल उस पुरानी प्रौद्योगिकी की बात है जिसे ट्रांजिस्टर ने हटाया। मूर का नियम अनुभवजन्य प्रवृत्ति है, भौतिकी का नियम नहीं।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन किस केंद्रीय मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
- A.भारी उद्योग मंत्रालय
- B.विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- C.इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- D.वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर C, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को लागू करने के लिए बनाया गया, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से स्वीकृत किया, और यह इसी मंत्रालय के अंतर्गत विशेष प्रभाग के रूप में काम करता है तथा सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, यौगिक अर्धचालक व पैकेजिंग इकाइयों तथा डिजाइन संबद्ध प्रोत्साहन की योजनाएं संभालता है। विकल्प A गलत है क्योंकि भारी उद्योग मंत्रालय पूंजीगत वस्तुएं तथा विद्युत वाहन प्रोत्साहन योजना देखता है। विकल्प B गलत है क्योंकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय विज्ञान तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग जैसे शोध विभाग चलाता है। विकल्प D गलत है क्योंकि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय व्यापार नीति तथा व्यापक मेक इन इंडिया प्रयास देखता है। इतना और जोड़ लें कि यही मिशन डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन के भीतर एक स्वतंत्र प्रभाग के रूप में काम करता है और मोहाली की सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला भी इसी मंत्रालय के अंतर्गत आती है।
अर्धचालक उद्योग में ATMP का पूरा रूप क्या है?
- A.एडवांस्ड ट्रांजिस्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस
- B.असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग
- C.ऑटोमेटेड थर्मल मेटल प्लेटिंग
- D.एप्लाइड टेक्नोलॉजी फॉर माइक्रोचिप प्रोडक्शन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग
व्याख्या
सही उत्तर B, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग एंड पैकेजिंग है। चिप निर्माण के तीन बड़े चरण हैं: डिजाइन, जो फैबलेस कंपनियां तथा डिजाइन संस्थान करते हैं; फैब्रिकेशन, जिसमें फैब के भीतर सिलिकॉन वेफर पर परिपथ बनाए जाते हैं; और पश्च चरण, जिसमें वेफर को काटकर अलग चिप बनाई जाती हैं और उन्हें जोड़ा, परखा, अंकित तथा पैक किया जाता है, और ATMP का अर्थ यही है। जो कंपनियां केवल यह पश्च कार्य दूसरों के लिए करती हैं उन्हें OSAT इकाई कहा जाता है, यानी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट। विकल्प A गलत है क्योंकि यह गढ़ा हुआ विस्तार है। विकल्प C गलत है क्योंकि थर्मल मेटल प्लेटिंग भिन्न औद्योगिक प्रक्रिया है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह भी गढ़ा हुआ है। सेमीकॉन इंडिया के अंतर्गत भारत की पहली स्वीकृत परियोजनाएं बहुत कुछ इसी पश्च प्रकार की थीं।
इसरो तथा डीआरडीओ के लिए चिप बनाने वाली सरकारी सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला कहां स्थित है?
- A.मोहाली
- B.हैदराबाद
- C.बेंगलूरु
- D.पुणे
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. मोहाली
व्याख्या
सही उत्तर A, मोहाली है। पंजाब के मोहाली की सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है और भारत की अपनी फैब्रिकेशन इकाई है, जो उपभोक्ता बाजार के लिए नहीं बल्कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन तथा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन जैसे सामरिक उपयोगकर्ताओं के लिए पुराने प्रोसेस नोड पर चिप बनाती है। विकल्प B गलत है क्योंकि हैदराबाद चिप डिजाइन तथा औषधि निर्माण का बड़ा केंद्र है, इस प्रयोगशाला का स्थान नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि बेंगलूरु में भारत के सर्वाधिक अर्धचालक डिजाइन केंद्र हैं, पर यह सरकारी फैब वहां नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि पुणे अभियांत्रिकी तथा सॉफ्टवेयर का केंद्र है और वहां ऐसी सुविधा नहीं है। डिजाइन केंद्र और फैब्रिकेशन संयंत्र का अंतर स्वयं परीक्षा का पसंदीदा बिंदु है।
शुद्ध अर्धचालक का ताप बढ़ाने पर उसका विद्युत प्रतिरोध:
- A.बढ़ता है
- B.घटता है
- C.अपरिवर्तित रहता है
- D.पहले बढ़ता है और फिर शून्य हो जाता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. घटता है
व्याख्या
सही उत्तर B, घटता है है। अर्धचालक को गर्म करने पर अधिक इलेक्ट्रॉनों को वर्जित अंतराल पार कर चालन बैंड में जाने लायक ऊर्जा मिल जाती है, और पार जाने वाला प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पीछे एक कोटर छोड़ता है, इसलिए आवेश वाहकों की संख्या तेजी से बढ़ती है और प्रतिरोध गिरता है; इस कारण अर्धचालक का प्रतिरोध ताप गुणांक ऋणात्मक होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि धातुओं में प्रतिरोध ताप के साथ बढ़ता है, जहां वाहकों की संख्या पहले से नियत है और गर्म करने से केवल टकराव बढ़ते हैं, और परीक्षार्थी धातु का नियम अर्धचालक पर लगाकर अंक खोते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि परिवर्तन बड़ा और सरलता से मापने योग्य है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रतिरोध कभी शून्य नहीं होता; वह अतिचालकता है, जो क्रांतिक ताप से नीचे कुछ पदार्थों में दिखने वाली अलग परिघटना है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अर्धचालक को गर्म करने पर उसका प्रतिरोध क्यों घटता है?
क्योंकि गर्म करने पर इलेक्ट्रॉनों को वर्जित अंतराल पार कर चालन बैंड में जाने लायक ऊर्जा मिल जाती है, और पार जाने वाला प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पीछे एक कोटर छोड़ता है। आवेश वाहकों की संख्या तेजी से बढ़ती है, इसलिए प्रतिरोध घटता है। इसे ऋणात्मक प्रतिरोध ताप गुणांक कहा जाता है।
नैज और बाह्य अर्धचालक में क्या अंतर है?
नैज अर्धचालक रासायनिक रूप से शुद्ध होता है और उसमें इलेक्ट्रॉन तथा कोटर संख्या में बराबर रहते हैं। बाह्य अर्धचालक में किसी अन्य तत्व की सूक्ष्म मात्रा मिलाकर इलेक्ट्रॉन अथवा कोटर को बहुसंख्यक वाहक बनाया जाता है, जिससे n प्रकार या p प्रकार का क्रिस्टल बनता है।
ट्रांजिस्टर में अल्फा और बीटा में क्या अंतर है?
अल्फा संग्राहक धारा को उत्सर्जक धारा से भाग देने पर मिलता है और सदा एक से कुछ कम रहता है। बीटा संग्राहक धारा को आधार धारा से भाग देने पर मिलता है और धारा लाभ है, जो सामान्यतः लगभग बीस से कई सौ के बीच होता है। बीटा अल्फा बटा एक घटा अल्फा के बराबर है।
भारत सेमीकंडक्टर मिशन कौन सा मंत्रालय चलाता है?
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय। यह मिशन सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को लागू करने के लिए बनाया गया, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय से स्वीकृत किया था।
ATMP और OSAT का अर्थ क्या है?
ATMP का अर्थ असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग है, यानी चिप निर्माण का पश्च चरण जिसमें तैयार वेफर को काटकर चिप बनाई और पैक की जाती हैं। OSAT का अर्थ आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट है, यानी वह कंपनी जो यह चरण अन्य कंपनियों के लिए करती है।
क्या भारत में पहले से कोई चिप फैब्रिकेशन संयंत्र है?
हां, पंजाब के मोहाली की सेमी कंडक्टर प्रयोगशाला, जो इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करती है और उपभोक्ता बाजार के लिए नहीं, बल्कि इसरो तथा डीआरडीओ जैसे सामरिक उपयोगकर्ताओं के लिए पुराने प्रोसेस नोड पर चिप बनाती है।
स्रोत
- भौतिकी भाग 2 (कक्षा 12), अध्याय: अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी, पदार्थ, युक्तियां तथा सरल परिपथ — एनसीईआरटी
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम के बारे में — इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय





