भारत का परमाणु कार्यक्रम: तीन चरण, रिएक्टर और परीक्षण
भारत के परमाणु कार्यक्रम के परीक्षोपयोगी नोट्स: त्रिचरणीय योजना, परमाणु संस्थाएं, अनुसंधान रिएक्टर, बिजलीघर, पोखरण परीक्षण और संधियों पर रुख।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 4 मिनट

भारत ने परमाणु ऊर्जा पर काम तब शुरू कर दिया था जब देश में एक भी बिजली देने वाला रिएक्टर नहीं था, और 1950 के दशक में बनी वह योजना आज भी देश की दिशा तय करती है। इसका कारण सीधा भूगर्भीय है: भारत के पास यूरेनियम के भंडार सीमित हैं पर थोरियम के भंडार दुनिया में सबसे बड़े भंडारों में हैं, जो केरल और ओडिशा के तटों की मोनाजाइट बालू में मिलते हैं। इसलिए कार्यक्रम इस तरह बनाया गया कि शुरुआत यूरेनियम से हो और अंत थोरियम पर, तीन जुड़े हुए चरणों में।
कार्यक्रम का ढांचा
परमाणु ऊर्जा आयोग 1948 में बना, जिसके अध्यक्ष होमी जहांगीर भाभा थे, और 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग बना, जिसे सीधे प्रधानमंत्री के अधीन रखा गया ताकि वह किसी एक मंत्रालय से बंधा न रहे। परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 ने परमाणु खनिजों और परमाणु ऊर्जा के उत्पादन पर संघ सरकार को नियंत्रण दिया। भाभा, जो 1945 में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान स्थापित कर चुके थे, भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक कहलाते हैं; 1966 में उनके निधन के बाद ट्रॉम्बे में बनी संस्था का नाम उनकी स्मृति में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रखा गया।
| संस्था | स्थापना | कार्य |
|---|---|---|
| परमाणु ऊर्जा आयोग | 1948 | परमाणु ऊर्जा की नीति |
| परमाणु ऊर्जा विभाग | 1954 | प्रधानमंत्री के अधीन |
| भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ट्रॉम्बे | 1957, नाम 1967 में बदला | अनुसंधान रिएक्टर, ईंधन, समस्थानिक |
| इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम | 1971 | तीव्र प्रजनक रिएक्टर अनुसंधान |
| परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड | 1983 | सुरक्षा का नियमन |
| न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया | 1987 | बिजलीघर बनाना और चलाना |
| यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया | 1967 | यूरेनियम खनन, झारखंड का जादूगोड़ा |
तीन चरणों का कार्यक्रम
- पहला चरण दाबित भारी जल रिएक्टरों का है, जो प्राकृतिक यूरेनियम जलाते हैं और जिनमें भारी जल मंदक तथा शीतलक दोनों का काम करता है। बिजली के साथ इनके खर्च हुए ईंधन में प्लूटोनियम 239 बनता है।
- दूसरा चरण तीव्र प्रजनक रिएक्टरों का है, जिनका ईंधन वही प्लूटोनियम है और जिनके क्रोड के चारों ओर थोरियम का आवरण रहता है। प्रजनक रिएक्टर जितना विखंडनीय पदार्थ खर्च करता है उससे अधिक बनाता है, और थोरियम का आवरण यूरेनियम 233 में बदल जाता है।
- तीसरा चरण उसी यूरेनियम 233 को तापीय प्रजनक रिएक्टरों में जलाता है, और उन्नत भारी जल रिएक्टर इसी चरण के लिए बनाया गया है। इसी बिंदु पर देश अपने थोरियम के बल पर चलने लगेगा।
कलपक्कम के तीव्र प्रजनक परीक्षण रिएक्टर ने दूसरे चरण की तकनीक सिद्ध की, और उसी स्थान पर भाविनी द्वारा बनाया गया 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इसी चरण की बड़ी मशीन है।
अनुसंधान रिएक्टर और बिजलीघर
अप्सरा, जो 4 अगस्त 1956 को ट्रॉम्बे में क्रांतिक हुआ, एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर था। इसके बाद 1960 में सायरस और 1985 में ध्रुव आए, दोनों ट्रॉम्बे में। बिजली की ओर देखें तो महाराष्ट्र का तारापुर परमाणु बिजलीघर, जो 1969 में अमेरिकी सहयोग से शुरू हुआ, देश का पहला परमाणु बिजलीघर था और उसमें क्वथन जल रिएक्टर लगे हैं। रावतभाटा में कनाडा के सहयोग से बने राजस्थान बिजलीघर ने दाबित भारी जल रिएक्टर की शुरुआत की, और इसी डिजाइन को भारत ने अपना बनाकर तमिलनाडु के कलपक्कम, उत्तर प्रदेश के नरोरा, गुजरात के काकरापार और कर्नाटक के कैगा में दोहराया। तमिलनाडु का कुडनकुलम इनसे अलग है, क्योंकि वहां रूसी वीवीईआर प्रकार के दाबित जल रिएक्टर लगे हैं।
परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्थिति
भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण में स्माइलिंग बुद्धा नाम से किया और उसे शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट बताया। दूसरे दौर में 11 और 13 मई 1998 को पांच उपकरणों का परीक्षण हुआ, जिसे ऑपरेशन शक्ति कहा गया, और इसी की स्मृति में 11 मई को हर वर्ष राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और दोनों को भेदभावपूर्ण मानता है। अमेरिका के साथ हुए असैन्य परमाणु समझौते और 2008 में परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह से मिली छूट के बाद भारत परमाणु ईंधन और तकनीक का व्यापार कर सका, जबकि उसके असैन्य रिएक्टर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी में आए और सामरिक रिएक्टर उससे बाहर रहे।
रिएक्टर कैसे काम करता है
विखंडन रिएक्टर में यूरेनियम 235 जैसा भारी नाभिक न्यूट्रॉन सोखकर टूटता है, जिससे ऊर्जा और और न्यूट्रॉन निकलते हैं, और मंदक उन न्यूट्रॉनों की गति घटाकर शृंखला अभिक्रिया चलाए रखता है। भारी जल, ग्रेफाइट और साधारण जल सामान्य मंदक हैं; कैडमियम या बोरॉन की नियंत्रक छड़ें न्यूट्रॉन सोखकर अभिक्रिया को स्थिर रखती हैं; और शीतलक, जो भारी जल, हल्का जल या तीव्र रिएक्टर में द्रव सोडियम हो सकता है, ऊष्मा बाहर लाकर भाप बनाता है। तीव्र प्रजनक रिएक्टर में मंदक होता ही नहीं, क्योंकि थोरियम 232 को यूरेनियम 233 में और यूरेनियम 238 को प्लूटोनियम 239 में बदलने के लिए तेज न्यूट्रॉन चाहिए।
परीक्षा की दृष्टि से
प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला, तिथियां और संस्थाएं: आयोग के लिए 1948, विभाग के लिए 1954, नियामक बोर्ड के लिए 1983 और पावर कॉरपोरेशन के लिए 1987, तथा विभाग का प्रधानमंत्री के अधीन होना सबसे अधिक पूछा जाने वाला तथ्य है। दूसरा, स्थान और रिएक्टर की जोड़ियां: अप्सरा, सायरस और ध्रुव के लिए ट्रॉम्बे, तीव्र प्रजनक रिएक्टरों के लिए कलपक्कम, क्वथन जल रिएक्टर के लिए तारापुर, पहले भारी जल रिएक्टर के लिए रावतभाटा और रूसी डिजाइन के लिए कुडनकुलम। तीसरा, तीनों चरण क्रम में, जिसमें जाल यह है कि दूसरा और तीसरा चरण आपस में बदल दिए जाएं या यह भूल जाया जाए कि थोरियम दूसरे चरण में आवरण के रूप में और तीसरे चरण में ईंधन के रूप में आता है। चौथा, परीक्षण, जिनमें 1974 का स्माइलिंग बुद्धा और 1998 का ऑपरेशन शक्ति तथा 11 मई का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस आपस में गड्डमड्ड नहीं होने चाहिए। रिएक्टर से जुड़े प्रश्न मंदक, शीतलक और नियंत्रक छड़ के पदार्थ पर आते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| परमाणु ऊर्जा आयोग | 1948, पहले अध्यक्ष होमी जे भाभा |
|---|---|
| परमाणु ऊर्जा विभाग | 1954, प्रधानमंत्री के अधीन |
| पहला अनुसंधान रिएक्टर | अप्सरा, ट्रॉम्बे, 4 अगस्त 1956 को क्रांतिक |
| पहला परमाणु बिजलीघर | तारापुर, महाराष्ट्र, 1969, क्वथन जल रिएक्टर |
| पहला दाबित भारी जल रिएक्टर | रावतभाटा, राजस्थान, कनाडा के सहयोग से |
| रूसी सहयोग से बना बिजलीघर | कुडनकुलम, तमिलनाडु, वीवीईआर रिएक्टर |
| तीव्र प्रजनक केंद्र | इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र, कलपक्कम |
| पोखरण एक | 18 मई 1974, कूट नाम स्माइलिंग बुद्धा |
| पोखरण दो | 11 और 13 मई 1998, ऑपरेशन शक्ति |
| राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस | 11 मई, 1998 के परीक्षणों के लिए |
| सबसे पुरानी यूरेनियम खदान | जादूगोड़ा, झारखंड |
| थोरियम का स्रोत | केरल और ओडिशा के तटों की मोनाजाइट बालू |
| नियामक | परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड, 1983 |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
भारत का पहला परमाणु बिजलीघर कहां स्थापित किया गया था?
- A.तारापुर
- B.कुडनकुलम
- C.कैगा
- D.रावतभाटा
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. तारापुर
व्याख्या
सही उत्तर A, तारापुर है। महाराष्ट्र का तारापुर परमाणु बिजलीघर 1969 में अमेरिकी सहयोग से शुरू हुआ और वह भारत ही नहीं, एशिया का भी पहला परमाणु बिजलीघर था; उसकी पहली दो इकाइयों में क्वथन जल रिएक्टर लगे हैं, जो देश में और कहीं नहीं हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि तमिलनाडु का कुडनकुलम बड़े बिजलीघरों में सबसे नया है और उसमें रूसी वीवीईआर प्रकार के दाबित जल रिएक्टर लगे हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि कर्नाटक का कैगा बहुत बाद में आया और उसमें स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर लगे हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि कनाडा के सहयोग से बना राजस्थान का रावतभाटा दूसरा बिजलीघर था और वह दूसरे कारण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहीं पहली बार दाबित भारी जल रिएक्टर लगा जिसे भारत ने बाद में स्वयं बनाया। पहला बिजलीघर तारापुर और पहला भारी जल रिएक्टर रावतभाटा याद रखें।
प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले कनाडा ड्यूटीरियम यूरेनियम अर्थात कैंडू रिएक्टर में मंदक और शीतलक का काम कौन करता है?
- A.भारी जल
- B.हल्का जल
- C.कार्बन डाइऑक्साइड
- D.सोडियम
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. भारी जल
व्याख्या
सही उत्तर A, भारी जल है। कैंडू डिजाइन, जिससे भारत के दाबित भारी जल रिएक्टर निकले हैं, प्राकृतिक यूरेनियम जलाता है, और प्राकृतिक यूरेनियम में विखंडनीय समस्थानिक यूरेनियम 235 केवल हजार में लगभग सात भाग होता है। इतना कमजोर ईंधन तभी शृंखला अभिक्रिया चला सकता है जब बहुत कम न्यूट्रॉन व्यर्थ जाएं, और भारी जल साधारण जल की तुलना में बहुत कम न्यूट्रॉन सोखता है पर उन्हें धीमा कर देता है, इसलिए वह मंदक और शीतलक दोनों का काम करता है। विकल्प B गलत है क्योंकि हल्का जल बहुत अधिक न्यूट्रॉन सोख लेता है, इसीलिए उसे प्रयोग करने वाले रिएक्टरों में समृद्ध यूरेनियम डालना पड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस शीतित रिएक्टरों में शीतलक होती है, जहां मंदक ग्रेफाइट होता है। विकल्प D गलत है क्योंकि द्रव सोडियम तीव्र प्रजनक रिएक्टर का शीतलक है, जिसमें जानबूझकर कोई मंदक रखा ही नहीं जाता।
क्वथन जल रिएक्टर में शीतलक के रूप में क्या प्रयोग होता है?
- A.कार्बन डाइऑक्साइड
- B.दाबित जल
- C.जल और भाप का मिश्रण
- D.द्रव धातु
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. जल और भाप का मिश्रण
व्याख्या
सही उत्तर C, जल और भाप का मिश्रण है। क्वथन जल रिएक्टर में, जो डिजाइन तारापुर में लगा है, साधारण जल को रिएक्टर पात्र के भीतर ही उबलने दिया जाता है, इसलिए क्रोड से निकलने वाला शीतलक जल और भाप का मिश्रण होता है; ऊपर भाप अलग करके सीधे टरबाइन तक भेज दी जाती है और अलग भाप जनित्र की आवश्यकता नहीं पड़ती। विकल्प A गलत है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड गैस शीतित रिएक्टरों को ठंडा करती है, जल रिएक्टरों को नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि दाबित जल, दाबित जल रिएक्टर का शीतलक है, जहां दाब इसीलिए ऊंचा रखा जाता है कि जल उबले नहीं, और यही दोनों डिजाइनों का अंतर है। विकल्प D गलत है क्योंकि द्रव धातु, प्रायः सोडियम, तीव्र प्रजनक रिएक्टर को ठंडा करती है। परीक्षा के लिए यही एक बात याद रखें कि क्वथन जल रिएक्टर में जल क्रोड में ही उबलता है और दाबित रिएक्टर में नहीं।
भारतीय परमाणु कार्यक्रम का जनक किसे माना जाता है?
- A.विक्रम साराभाई
- B.होमी जहांगीर भाभा
- C.राजा रामन्ना
- D.ए पी जे अब्दुल कलाम
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. होमी जहांगीर भाभा
व्याख्या
सही उत्तर B, होमी जहांगीर भाभा है। भाभा ने 1945 में टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान की स्थापना की, 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग के पहले अध्यक्ष बने, भारत के थोरियम पर आधारित तीन चरणों की योजना बनाई और ट्रॉम्बे की उस संस्था का नेतृत्व किया जिसका नाम 1966 में उनके निधन के बाद भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र रखा गया। विकल्प A गलत है क्योंकि विक्रम साराभाई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक हैं, यद्यपि भाभा के बाद वे परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष भी रहे। विकल्प C गलत है क्योंकि राजा रामन्ना ने 1974 के पोखरण परीक्षण करने वाले दल का नेतृत्व किया, जो महत्वपूर्ण पर बाद की भूमिका है। विकल्प D गलत है क्योंकि ए पी जे अब्दुल कलाम मिसाइल विकास और 1998 के पोखरण परीक्षणों से जुड़े हैं। परमाणु ऊर्जा के लिए भाभा और अंतरिक्ष के लिए साराभाई, यही जोड़ी याद रखें।
एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर अप्सरा 1956 में किस स्थान पर क्रांतिक हुआ था?
- A.कलपक्कम
- B.ट्रॉम्बे
- C.रावतभाटा
- D.तारापुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ट्रॉम्बे
व्याख्या
सही उत्तर B, ट्रॉम्बे है। अप्सरा 4 अगस्त 1956 को मुंबई के पास ट्रॉम्बे में क्रांतिक हुआ और वह न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया का पहला परमाणु अनुसंधान रिएक्टर था; 1960 का सायरस और 1985 का ध्रुव रिएक्टर भी इसी स्थल पर बने, जो आज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र है। विकल्प A गलत है क्योंकि तमिलनाडु का कलपक्कम इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र और तीव्र प्रजनक रिएक्टरों का स्थान है, जहां काम बहुत बाद में शुरू हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि राजस्थान का रावतभाटा बिजलीघर का स्थल है, अनुसंधान रिएक्टर का नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि तारापुर भी बिजलीघर है, जो अप्सरा के तेरह वर्ष बाद शुरू हुआ। अनुसंधान रिएक्टर ट्रॉम्बे में और तीव्र प्रजनक रिएक्टर कलपक्कम में, यह अंतर स्पष्ट रखें।
भारत के त्रिचरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण किस प्रकार के रिएक्टर पर आधारित है?
- A.दाबित भारी जल रिएक्टर
- B.तीव्र प्रजनक रिएक्टर
- C.क्वथन जल रिएक्टर
- D.गैस शीतित रिएक्टर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. तीव्र प्रजनक रिएक्टर
व्याख्या
सही उत्तर B, तीव्र प्रजनक रिएक्टर है। दूसरे चरण में पहले चरण के खर्च हुए ईंधन से निकाले गए प्लूटोनियम 239 को तीव्र प्रजनक रिएक्टर का ईंधन बनाया जाता है, और क्रोड के चारों ओर थोरियम का आवरण रखा जाता है जो यूरेनियम 233 में बदल जाता है; प्रजनक रिएक्टर जितना विखंडनीय पदार्थ जलाता है उससे अधिक बनाता है, और इसी तरह तीसरे चरण के लिए ईंधन का भंडार तैयार होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि प्राकृतिक यूरेनियम जलाने वाले दाबित भारी जल रिएक्टर पहला चरण हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि क्वथन जल रिएक्टर तारापुर के लिए आयात किए गए थे और वे इस चरणबद्ध योजना का हिस्सा कभी नहीं रहे। विकल्प D गलत है क्योंकि गैस शीतित रिएक्टरों का भारतीय कार्यक्रम में कोई स्थान नहीं है। शृंखला क्रम से याद रखें: प्राकृतिक यूरेनियम, फिर थोरियम आवरण के साथ प्लूटोनियम, फिर थोरियम से बना यूरेनियम 233।
पोखरण में 1974 में किए गए भारत के पहले परमाणु परीक्षण को कौन-सा कूट नाम दिया गया था?
- A.ऑपरेशन शक्ति
- B.स्माइलिंग बुद्धा
- C.ऑपरेशन विजय
- D.प्रोजेक्ट ध्रुव
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. स्माइलिंग बुद्धा
व्याख्या
सही उत्तर B, स्माइलिंग बुद्धा है। यह परीक्षण 18 मई 1974 को राजस्थान के पोखरण के रेगिस्तान में किया गया और भारत ने उसे शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट बताया; दल का नेतृत्व राजा रामन्ना ने किया था। विकल्प A गलत है क्योंकि ऑपरेशन शक्ति दूसरे दौर के परीक्षणों का नाम है, जिसमें 11 और 13 मई 1998 को उसी परीक्षण स्थल पर पांच उपकरण परखे गए और उसके बाद भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया। विकल्प C गलत है क्योंकि ऑपरेशन विजय 1999 के कारगिल सैन्य अभियान का नाम है, जिसका परमाणु परीक्षणों से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि ध्रुव ट्रॉम्बे का अनुसंधान रिएक्टर है, जो 1985 में चालू हुआ, कोई परीक्षण नहीं। यह भी ध्यान रखें कि 11 मई का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 1998 के परीक्षणों की स्मृति में है, 1974 के नहीं।
प्रतिवर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस किस घटना की स्मृति में मनाया जाता है?
- A.आर्यभट्ट का प्रक्षेपण
- B.1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण
- C.अप्सरा का चालू होना
- D.परमाणु ऊर्जा आयोग का गठन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण
व्याख्या
सही उत्तर B, 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण है। 11 मई 1998 को भारत ने ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में तीन परमाणु उपकरणों का परीक्षण किया और 13 मई को दो और किए, तथा इसी उपलब्धि की स्मृति में, उसी दिन हुए त्रिशूल मिसाइल के परीक्षण और हंसा विमान की पहली उड़ान के साथ, इस दिन को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया गया। विकल्प A गलत है क्योंकि भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट 19 अप्रैल 1975 को छोड़ा गया था। विकल्प C गलत है क्योंकि अप्सरा अनुसंधान रिएक्टर 4 अगस्त 1956 को क्रांतिक हुआ और उसके नाम पर कोई दिवस नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि परमाणु ऊर्जा आयोग 1948 में बना और उसके नाम पर भी कोई दिवस नहीं है। यहां जाल 1974 है, जिसे अभ्यर्थी इसलिए चुन बैठते हैं क्योंकि वह परीक्षण अधिक याद रहता है।
भारत में यूरेनियम अयस्क का सबसे पुराना स्रोत जादूगोड़ा खदान किस राज्य में है?
- A.झारखंड
- B.आंध्र प्रदेश
- C.मेघालय
- D.राजस्थान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. झारखंड
व्याख्या
सही उत्तर A, झारखंड है। जादूगोड़ा खदान झारखंड की सिंहभूम पट्टी में है और 1967 में बनी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया इसे साठ के दशक के अंत से चला रही है; यह देश की पहली यूरेनियम खदान थी। विकल्प B गलत है क्योंकि आंध्र प्रदेश में यूरेनियम के बड़े भंडार अवश्य हैं, विशेषकर कडप्पा द्रोणी के तुम्मलपल्ले में, पर वह खदान बहुत बाद की है। विकल्प C गलत है क्योंकि मेघालय के डोमियासिएट क्षेत्र में भंडार ज्ञात हैं पर वहां खनन नहीं हुआ है। विकल्प D गलत है क्योंकि राजस्थान का संबंध रावतभाटा बिजलीघर और पोखरण परीक्षण स्थल से है, यूरेनियम खनन से नहीं। यह याद रखें कि भारत यूरेनियम में निर्धन पर थोरियम में धनी है, जो केरल और ओडिशा के तटों की मोनाजाइट बालू से मिलता है।
कुडनकुलम परमाणु बिजलीघर के रिएक्टर किस देश के सहयोग से बने हैं?
- A.संयुक्त राज्य अमेरिका
- B.फ्रांस
- C.रूस
- D.कनाडा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. रूस
व्याख्या
सही उत्तर C, रूस है। तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित कुडनकुलम में रूसी वीवीईआर प्रकार के दाबित जल रिएक्टर लगे हैं, जो 1988 में सोवियत संघ के साथ हुए समझौते के अंतर्गत मिले और जिसे रूस ने आगे बढ़ाया। विकल्प A गलत है क्योंकि अमेरिका ने साठ के दशक में पहले बिजलीघर तारापुर के क्वथन जल रिएक्टर दिए थे। विकल्प B गलत है क्योंकि फ्रांस के साथ महाराष्ट्र में एक बिजलीघर की चर्चा अवश्य रही है, पर कुडनकुलम उसने नहीं बनाया। विकल्प D गलत है क्योंकि कनाडा ने राजस्थान के रावतभाटा का रिएक्टर और सायरस अनुसंधान रिएक्टर दिया था, और वह सहयोग 1974 के परीक्षण के बाद समाप्त हो गया। याद रखने योग्य तीन विदेशी संबंध हैं: तारापुर के साथ अमेरिका, रावतभाटा के साथ कनाडा और कुडनकुलम के साथ रूस।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने तीन चरणों वाला परमाणु कार्यक्रम क्यों बनाया?
इसका कारण देश के भूगर्भीय भंडार हैं। भारत के यूरेनियम भंडार सीमित हैं पर थोरियम भंडार दुनिया के सबसे बड़े भंडारों में हैं। थोरियम को सीधे ईंधन नहीं बनाया जा सकता, इसलिए योजना भारी जल रिएक्टरों में प्राकृतिक यूरेनियम से शुरू होती है, उससे बने प्लूटोनियम को थोरियम आवरण सहित तीव्र प्रजनक रिएक्टरों में जलाती है और तीसरे चरण में ही उसी थोरियम से बने यूरेनियम 233 पर चलती है।
भारतीय रिएक्टरों में साधारण जल के बजाय भारी जल क्यों प्रयोग होता है?
भारी जल न्यूट्रॉनों को धीमा तो करता है पर सोखता बहुत कम है, इसलिए उससे मंदित रिएक्टर प्राकृतिक यूरेनियम पर चल सकता है, जिसमें विखंडनीय यूरेनियम 235 हजार में लगभग सात भाग ही होता है। साधारण हल्का जल कहीं अधिक न्यूट्रॉन सोख लेता है, इसलिए उसका प्रयोग करने वाले रिएक्टरों को समृद्ध यूरेनियम चाहिए, जिस पर भारत निर्भर नहीं रहना चाहता था।
पोखरण एक और पोखरण दो में क्या अंतर है?
पोखरण एक 18 मई 1974 का एक ही परीक्षण था, जिसका कूट नाम स्माइलिंग बुद्धा था और जिसे भारत ने शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट बताया। पोखरण दो 11 और 13 मई 1998 को हुए पांच परीक्षणों की शृंखला थी, जिसे ऑपरेशन शक्ति कहा गया और जिसके बाद भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया। 11 मई का राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस इन्हीं दूसरे परीक्षणों से जुड़ा है।
क्या भारत ने एनपीटी और सीटीबीटी पर हस्ताक्षर किए हैं?
नहीं। भारत ने न परमाणु अप्रसार संधि पर और न व्यापक परीक्षण प्रतिबंध संधि पर हस्ताक्षर किए हैं, क्योंकि उसका मानना है कि दोनों दुनिया को परमाणु संपन्न और विपन्न देशों में बांटती हैं। असैन्य परमाणु समझौते और 2008 की परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह छूट के बाद बनी पृथक्करण योजना के अंतर्गत भारत अपने असैन्य रिएक्टरों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की निगरानी स्वीकार करता है।
भारत के परमाणु बिजलीघर कौन बनाता और चलाता है?
परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन 1987 में बनी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड। तीव्र प्रजनक रिएक्टरों का दायित्व भाविनी के पास है, अनुसंधान भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र तथा इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र में होता है, और सुरक्षा का नियमन परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड करता है।
स्रोत
- परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 — विधि और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार
- त्रिचरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम तथा परमाणु ऊर्जा संस्थाएं — परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार
- भारत के परमाणु बिजलीघर: स्थल, रिएक्टर प्रकार और सहयोग — न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड





