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GK नोट्सविज्ञान और प्रौद्योगिकीहरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी

हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी: परीक्षा नोट्स

परीक्षाओं के लिए हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी पर पूरे नोट्स: विद्युत अपघटन, हाइड्रोजन के रंग, ईंधन सेल, राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन तथा लक्ष्य।

लेखक · प्रकाशित · 5 मिनट

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हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी: परीक्षा नोट्स — GK24 title card
हरित हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी: परीक्षा नोट्स — GK24 title card

हरित हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो पानी को उस बिजली से तोड़कर बनाई जाती है जो स्वयं किसी नवीकरणीय स्रोत से आई हो, जिससे यह ईंधन न उत्पादन के समय और न उपयोग के समय कोई कार्बन छोड़ता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के खंड में यह स्थायी विषय बन गया है, क्योंकि भारत में इसके लिए एक राष्ट्रीय मिशन है, इसकी परिभाषा देने वाला अधिसूचित मानक है, और ऐसे लक्ष्य हैं जिन्हें परीक्षक एक अंक के प्रश्न में बदल सकते हैं। यह नोट इसकी रसायन विद्या, रंग संकेत, मिशन तथा उस व्यापक स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम को समेटता है जिसमें यह बैठता है।

हाइड्रोजन क्यों, और यह कैसे बनती है

हाइड्रोजन सबसे हल्का तत्व है और प्रति किलोग्राम किसी भी साधारण ईंधन से अधिक ऊर्जा रखती है, निम्न ऊष्मीय मान के आधार पर लगभग एक सौ बीस मेगाजूल प्रति किलोग्राम, जो पेट्रोल का लगभग तीन गुना है। इसे जलाने या ईंधन सेल में प्रयोग करने पर उत्पाद केवल जल होता है, इसलिए इससे कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड या कण पदार्थ नहीं निकलता। इसकी कमी आयतन है: अत्यंत हल्की गैस होने के कारण उपयोगी मात्रा में ढोने से पहले इसे सैकड़ों वायुमंडल दबाव पर संपीडित करना पड़ता है या लगभग शून्य से 253 डिग्री सेल्सियस नीचे द्रवित करना पड़ता है, और इसे धातु हाइड्राइडों में रासायनिक रूप से भी भंडारित किया जा सकता है। पृथ्वी पर हाइड्रोजन मुक्त रूप में किसी मात्रा में नहीं मिलती, इसलिए यह प्राथमिक ऊर्जा स्रोत नहीं बल्कि ऊर्जा वाहक है, और हाइड्रोजन का कार्बन पदचिह्न पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि वह कैसे बनाई गई। विद्युत अपघटक में पानी से दिष्ट धारा प्रवाहित की जाती है, कैथोड पर हाइड्रोजन और एनोड पर ऑक्सीजन मुक्त होती है। पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड वाले क्षारीय विद्युत अपघटक सबसे पुराने और सस्ते प्रकार हैं, प्रोटॉन विनिमय झिल्ली वाले अपघटक छोटे होते हैं और बदलती नवीकरणीय आपूर्ति पर जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं, तथा ठोस ऑक्साइड अपघटक उच्च ताप पर चलते हैं और सिद्धांत रूप में सबसे अधिक दक्ष हैं। व्यवहार में एक अपघटक प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन के लिए लगभग पचास किलोवाट घंटा बिजली और लगभग नौ किलोग्राम पानी खर्च करता है।

हाइड्रोजन के रंग

उद्योग हाइड्रोजन को उसके बनाने के मार्ग के अनुसार नाम देता है, और ये नाम सीधे पूछे जाते हैं।

नामकैसे बनती हैकार्बन परिणाम
ग्रेप्राकृतिक गैस का भाप सुधारकार्बन डाइऑक्साइड वायु में छोड़ी जाती है
भूरी या कालीलिग्नाइट या कोयले का गैसीकरणसभी मार्गों में सबसे अधिक उत्सर्जन
नीलीजीवाश्म मार्ग के साथ कार्बन अधिग्रहण और भंडारणअधिकांश कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ ली जाती है
फिरोजीमेथेन का तापीय अपघटनकार्बन गैस के रूप में नहीं, ठोस रूप में निकलता है
गुलाबी या बैंगनीनाभिकीय बिजली से विद्युत अपघटनउत्पादन पर कार्बन डाइऑक्साइड नहीं
हरितनवीकरणीय बिजली से विद्युत अपघटनउत्पादन पर कार्बन डाइऑक्साइड नहीं

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को उन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी, और मिशन दस्तावेज उसी माह बाद में अधिसूचित हुआ। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसका नोडल मंत्रालय है। लक्ष्य 2030 तक कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता है, जिसके साथ लगभग एक सौ पच्चीस गीगावाट नवीकरणीय क्षमता जुड़ेगी, आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश होगा, छह लाख से अधिक रोजगार बनेंगे, और प्रतिवर्ष लगभग पाँच करोड़ मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचा जाएगा। सबसे बड़ा घटक साइट कार्यक्रम है, जिसका पूरा नाम हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए सामरिक हस्तक्षेप है और जिसका परिव्यय सत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये है; यह भारत में विद्युत अपघटक निर्माण तथा प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से हरित हाइड्रोजन उत्पादन को सहारा देता है। मिशन हरित हाइड्रोजन केंद्रों, इस्पात, परिवहन तथा जहाजरानी में प्रायोगिक परियोजनाओं, शोध एवं विकास और कौशल विकास को भी निधि देता है। अगस्त 2023 में मंत्रालय ने भारत के लिए हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया, जिसके अनुसार हाइड्रोजन हरित तभी गिनी जाएगी जब उसका कुआँ-से-द्वार उत्सर्जन, जिसमें जल उपचार, विद्युत अपघटन, शुद्धीकरण, सुखाना और संपीडन सम्मिलित हैं, प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक न हो, और यह बारह माह के औसत के रूप में मापा जाएगा। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को उन अभिकरणों की मान्यता देने वाला नोडल प्राधिकरण बनाया गया जो हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं की निगरानी, सत्यापन और प्रमाणन करते हैं।

ईंधन सेल और हाइड्रोजन का उपयोग कहाँ होगा

ईंधन सेल किसी ईंधन की रासायनिक ऊर्जा को जलाए बिना सीधे बिजली में बदलता है, इसलिए वह ताप इंजन की दक्षता सीमा से बँधा नहीं होता। प्रोटॉन विनिमय झिल्ली ईंधन सेल में एनोड पर हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होता है, प्रोटॉन झिल्ली पार करते हैं, इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से धारा के रूप में बहते हैं, और कैथोड पर वे वायु की ऑक्सीजन से मिलकर जल बनाते हैं। इसका सिद्धांत विलियम ग्रोव ने 1839 में दिखाया और बड़े पैमाने पर इसका पहला उपयोग अंतरिक्ष यानों में हुआ। भारत में हरित हाइड्रोजन के पहले ग्राहक कारें नहीं बल्कि वे उद्योग होंगे जो केवल बिजली पर नहीं चल सकते: अमोनिया और उर्वरक संयंत्र, तेल शोधक कारखाने, लोहे के सीधे अपचयन से इस्पात बनाना, सीमेंट, लंबी दूरी की माल ढुलाई तथा जहाजरानी, जहाँ हाइड्रोजन से बनी हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल जहाजी ईंधन का स्थान ले सकती हैं। सबसे बड़ी बाधा लागत है, क्योंकि हरित हाइड्रोजन आज भी उस ग्रे हाइड्रोजन से कई गुना महँगी है जो शोधक कारखाने और उर्वरक संयंत्र आज खरीदते हैं, और इस अंतर को पाटना ही मिशन के प्रोत्साहनों का उद्देश्य है।

व्यापक स्वच्छ ऊर्जा चित्र

  • भारत ने 2021 के ग्लासगो जलवायु सम्मेलन में पंचामृत संकल्प घोषित किए: 2030 तक पाँच सौ गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता, 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का आधा नवीकरणीय स्रोतों से, अनुमानित उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौती, 2005 के स्तर से अर्थव्यवस्था की उत्सर्जन तीव्रता में पैंतालीस प्रतिशत कमी, तथा 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन।
  • अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस ने 30 नवंबर 2015 को पेरिस जलवायु सम्मेलन में की और इसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में है, जो भारत में किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन का पहला मुख्यालय है।
  • हाइड्रोजन ऊर्जा वाहक है, स्रोत नहीं, इसलिए ऊर्जा का स्रोत पूछने वाले प्रश्न का उत्तर सूर्य, पवन, जल या नाभिक होना चाहिए, हाइड्रोजन नहीं।
  • भारतीय मानक के अंतर्गत जैव भार आधारित मार्ग भी हरित माने जा सकते हैं, और यह बिंदु प्रायः छूट जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रश्न चार रूपों में आते हैं। पहला रंग संकेत है, जिसमें प्रश्नपत्र कोई उत्पादन मार्ग बताकर नाम पूछता है, इसलिए ग्रे, नीली, भूरी, फिरोजी, गुलाबी और हरित को उत्सर्जन से नहीं, मार्ग से अलग रखें। दूसरा मिशन के आँकड़े हैं, जहाँ भ्रम यह डाला जाता है कि उन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये के कुल परिव्यय और सत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये के साइट परिव्यय की अदला-बदली कर दी जाए, या पचास लाख टन के हाइड्रोजन लक्ष्य और बचाए गए कार्बन डाइऑक्साइड के पाँच करोड़ टन के आँकड़े को मिला दिया जाए। तीसरा रसायन है: विद्युत अपघटन में हाइड्रोजन कैथोड पर निकलती है, ईंधन सेल के उत्पाद बिजली और जल हैं, और हाइड्रोजन में प्रति इकाई द्रव्यमान किसी भी सामान्य ईंधन से अधिक ऊर्जा होती है। चौथा संस्थाएँ हैं, जहाँ नोडल मंत्रालय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है जबकि प्रमाणन अभिकरणों को मान्यता ऊर्जा दक्षता ब्यूरो देता है। कथन आधारित प्रश्नपत्र यह भी जाँचते हैं कि हाइड्रोजन ऊर्जा का वाहक है, स्रोत नहीं।

महत्वपूर्ण तथ्य

हरित हाइड्रोजननवीकरणीय बिजली से पानी का विद्युत अपघटन
ग्रे हाइड्रोजनप्राकृतिक गैस का भाप सुधार, कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ी जाती है
नीली हाइड्रोजनजीवाश्म मार्ग के साथ कार्बन अधिग्रहण और भंडारण
फिरोजी हाइड्रोजनमेथेन का तापीय अपघटन, कार्बन ठोस रूप में प्राप्त
हाइड्रोजन की ऊर्जानिम्न ऊष्मीय मान पर लगभग 120 मेगाजूल प्रति किलोग्राम
द्रवीकरण तापलगभग शून्य से 253 डिग्री सेल्सियस नीचे
आवश्यक जलप्रति किलोग्राम हाइड्रोजन लगभग नौ किलोग्राम जल
मिशन की मंजूरीकेंद्रीय मंत्रिमंडल, 4 जनवरी 2023
मिशन परिव्ययउन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये
साइट परिव्ययसत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये
उत्पादन लक्ष्य2030 तक कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक
नवीकरणीय क्षमता वृद्धिमिशन के साथ लगभग एक सौ पच्चीस गीगावाट
बचा उत्सर्जनप्रतिवर्ष लगभग पाँच करोड़ मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड
हरित हाइड्रोजन मानकप्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक नहीं
प्रमाणन प्राधिकरणऊर्जा दक्षता ब्यूरो, विद्युत मंत्रालय
नोडल मंत्रालयनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
ईंधन सेल सिद्धांतविलियम ग्रोव ने 1839 में दिखाया
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन30 नवंबर 2015 को स्थापित; मुख्यालय गुरुग्राम, हरियाणा

इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीपूछा गया: उत्तर प्रदेश · UPPSC Civil Service 2019 Official Paperमध्यम

भारत का पहला केंद्रशासित प्रदेश जो शत प्रतिशत सौर ऊर्जा पर चलता है, वह है:

  1. A.अंडमान-निकोबार
  2. B.चंडीगढ़
  3. C.दीव
  4. D.पुडुचेरी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. दीव

व्याख्या

सही उत्तर C, दीव है। गुजरात के तट पर स्थित दीव को भारत का पहला ऐसा केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया जो पूरी तरह सौर ऊर्जा पर चलता है। उसने तट के पास पथरीली बंजर भूमि पर सौर पार्क बनाया और सरकारी भवनों पर छत के संयंत्र जोड़े, और ये मिलकर उसकी पूरी दिन की माँग पूरी करते हैं, इसलिए यह प्रदेश दिन में बाहर से बिजली नहीं लेता। विकल्प A गलत है क्योंकि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह लंबे समय तक डीजल उत्पादन पर निर्भर रहा है और अब द्वीप दर द्वीप सौर तथा डीजल की मिश्रित प्रणालियाँ जोड़ रहा है। विकल्प B गलत है क्योंकि चंडीगढ़ को आदर्श सौर नगर के रूप में बढ़ाया जाता है, जहाँ बड़े भवनों पर छत संयंत्र अनिवार्य हैं, किंतु वह अपनी अधिकांश बिजली उत्तरी ग्रिड से लेता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पुडुचेरी में छत संयंत्र और सौर पंप कार्यक्रम हैं, किंतु उसे कभी पूर्ण सौर संचालित घोषित नहीं किया गया।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

हरित हाइड्रोजन किस प्रक्रिया से बनाई जाती है?

  1. A.प्राकृतिक गैस का भाप सुधार
  2. B.कोयले का गैसीकरण
  3. C.नवीकरणीय बिजली से पानी का विद्युत अपघटन
  4. D.पेट्रोलियम का प्रभाजी आसवन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. नवीकरणीय बिजली से पानी का विद्युत अपघटन

व्याख्या

सही उत्तर C, नवीकरणीय बिजली से पानी का विद्युत अपघटन है। हाइड्रोजन को हरित तभी कहा जाता है जब पानी को तोड़ने वाली बिजली सौर या पवन जैसे नवीकरणीय स्रोत से आई हो, जिससे उसे बनाने में कोई कार्बन डाइऑक्साइड न निकले। विकल्प A गलत है क्योंकि प्राकृतिक गैस का भाप सुधार ग्रे हाइड्रोजन का मार्ग है, जो आज सबसे सस्ता और सबसे अधिक प्रयुक्त मार्ग है तथा वायु में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है; कार्बन अधिग्रहण के साथ यही मार्ग नीली हाइड्रोजन देता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कोयले या लिग्नाइट का गैसीकरण भूरी या काली हाइड्रोजन देता है, जो सभी मार्गों में सबसे अधिक उत्सर्जन वाला है। विकल्प D गलत है क्योंकि प्रभाजी आसवन पेट्रोलियम को पेट्रोल, केरोसिन और डीजल जैसे प्रभाजों में अलग करता है और वह हाइड्रोजन बनाने की विधि ही नहीं है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

कार्बन अधिग्रहण और भंडारण के साथ जीवाश्म ईंधन से बनाई गई हाइड्रोजन को क्या कहा जाता है?

  1. A.ग्रे हाइड्रोजन
  2. B.नीली हाइड्रोजन
  3. C.गुलाबी हाइड्रोजन
  4. D.फिरोजी हाइड्रोजन
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नीली हाइड्रोजन

व्याख्या

सही उत्तर B, नीली हाइड्रोजन है। नीली हाइड्रोजन उसी जीवाश्म मार्ग से बनती है जिससे ग्रे हाइड्रोजन, सामान्यतः प्राकृतिक गैस के भाप सुधार से, किंतु बनी कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ने के बजाय पकड़कर भूमि के नीचे भंडारित किया जाता है, इसलिए उसका उत्सर्जन बहुत कम होता है, यद्यपि शून्य नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि ग्रे हाइड्रोजन ठीक यही प्रक्रिया है, बस अधिग्रहण के बिना, और इसी कारण प्रश्न में कार्बन अधिग्रहण शब्द पढ़ना उत्तर तय करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि गुलाबी हाइड्रोजन, जिसे बैंगनी भी कहा जाता है, नाभिकीय संयंत्र की बिजली से विद्युत अपघटन द्वारा बनती है, जो गैर-जीवाश्म मार्ग है। विकल्प D गलत है क्योंकि फिरोजी हाइड्रोजन मेथेन के तापीय अपघटन से बनती है, जिसमें कार्बन गैस के रूप में नहीं, ठोस रूप में निकलता है, जिसे भंडारित या बेचा जा सकता है।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

भारत के हरित हाइड्रोजन मानक के अनुसार हाइड्रोजन हरित मानी जाएगी यदि उसका कुआँ-से-द्वार उत्सर्जन इससे अधिक न हो:

  1. A.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन एक किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  2. B.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  3. C.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पाँच किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  4. D.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दस किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य

व्याख्या

सही उत्तर B, प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में भारत के लिए हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया और सीमा प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य तय की, जो बारह माह के औसत के रूप में मापी जाती है और जल उपचार से लेकर विद्युत अपघटन, शुद्धीकरण, सुखाना तथा संपीडन होते हुए संयंत्र के द्वार तक की पूरी श्रृंखला समेटती है। विद्युत अपघटन तथा जैव भार दोनों मार्ग इसमें आ सकते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि एक किलोग्राम अधिसूचित भारतीय सीमा से अधिक कठोर है। विकल्प C गलत है क्योंकि पाँच किलोग्राम लगभग उतना है जितना एक दक्ष ग्रे हाइड्रोजन संयंत्र छोड़ता है, और मानक का उद्देश्य ठीक उसी को बाहर रखना है। विकल्प D गलत है क्योंकि दस किलोग्राम कोयला आधारित हाइड्रोजन के परिसर में आता है और किसी भी हरित सीमा से बहुत ऊपर है।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए स्वीकृत कुल परिव्यय कितना है?

  1. A.आठ हजार करोड़ रुपये
  2. B.सत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये
  3. C.उन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये
  4. D.एक लाख करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. उन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर C, उन्नीस हजार सात सौ चौवालीस करोड़ रुपये है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 जनवरी 2023 को इसी परिव्यय के साथ राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को मंजूरी दी, जो वित्त वर्ष 2029-30 तक प्रोत्साहनों, केंद्रों, प्रायोगिक परियोजनाओं, शोध तथा कौशल पर खर्च होगा। विकल्प A गलत है क्योंकि आठ हजार करोड़ रुपये मिशन के किसी घटक से मेल नहीं खाता; मिशन दस्तावेजों में आने वाला आठ लाख करोड़ रुपये का आँकड़ा वह कुल निवेश है जिसकी मिशन आशा करता है, सरकारी व्यय नहीं। विकल्प B गलत है क्योंकि सत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये केवल साइट कार्यक्रम का परिव्यय है, जो सबसे बड़ा एकल घटक है और विद्युत अपघटक निर्माण तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन को सहारा देता है। विकल्प D गलत है क्योंकि एक लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन आयात में अनुमानित बचत है, मिशन का परिव्यय नहीं।

Q6.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन 2030 तक कितनी हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखता है?

  1. A.कम से कम दस लाख मीट्रिक टन वार्षिक
  2. B.कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक
  3. C.कम से कम पाँच करोड़ मीट्रिक टन वार्षिक
  4. D.कम से कम साढ़े बारह करोड़ मीट्रिक टन वार्षिक
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक

व्याख्या

सही उत्तर B, कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक है। मिशन का उद्देश्य 2030 तक कम से कम पचास लाख मीट्रिक टन वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता खड़ी करना है, और निर्यात बाजार बनने पर यह और बढ़ सकती है; मिशन से सबसे अधिक यही आँकड़ा पूछा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि दस लाख मीट्रिक टन घोषित लक्ष्य से बहुत कम है। विकल्प C गलत है क्योंकि पाँच करोड़ मीट्रिक टन वह कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन है जिससे मिशन प्रतिवर्ष बचने की आशा करता है, वह हाइड्रोजन नहीं जो वह बनाना चाहता है, और इन दोनों की अदला-बदली आम भ्रम है। विकल्प D गलत है क्योंकि एक सौ पच्चीस का आँकड़ा उस नवीकरणीय बिजली क्षमता का है जो गीगावाट में साथ जुड़ने की आशा है, हाइड्रोजन की मात्रा का नहीं।

Q7.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का नोडल मंत्रालय कौन सा है?

  1. A.विद्युत मंत्रालय
  2. B.नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
  3. C.पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय
  4. D.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर B, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय है। यह मंत्रालय मिशन का नोडल मंत्रालय है, उसके प्रत्येक घटक के दिशानिर्देश बनाता है और उसी ने अगस्त 2023 में भारत के लिए हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया। विकल्प A गलत है क्योंकि विद्युत मंत्रालय बिजली के उत्पादन, पारेषण तथा वितरण का काम देखता है; किंतु उसके अधीन ऊर्जा दक्षता ब्यूरो को हरित हाइड्रोजन प्रमाणित करने वाले अभिकरणों की मान्यता देने का नोडल प्राधिकरण बनाया गया, और इसीलिए यह विकल्प भ्रमक लगता है। विकल्प C गलत है क्योंकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय कच्चे तेल, शोधन तथा गैस से जुड़ा है, और शोधक कारखाने हरित हाइड्रोजन के ग्राहक होंगे, उसके प्रशासक नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पर्यावरण मंत्रालय जलवायु वार्ताओं तथा वन और प्रदूषण कानून को देखता है, इस मिशन को नहीं।

Q8.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन में साइट का पूरा नाम क्या है?

  1. A.भारतीय हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी योजना
  2. B.हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए सामरिक हस्तक्षेप
  3. C.हरित हाइड्रोजन व्यापार के लिए सब्सिडी प्रोत्साहन
  4. D.औद्योगिक हरित हाइड्रोजन लक्ष्यों के लिए सहायता
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए सामरिक हस्तक्षेप

व्याख्या

सही उत्तर B, हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए सामरिक हस्तक्षेप है। साइट मिशन का सबसे बड़ा घटक है, जिसका परिव्यय सत्रह हजार चार सौ नब्बे करोड़ रुपये है, और उसके दो भाग हैं: भारत में विद्युत अपघटक निर्माण के लिए प्रोत्साहन तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रोत्साहन, दोनों प्रतिस्पर्धी बोली से दिए जाते हैं। विकल्प A, C और D गलत हैं क्योंकि ये उसी संक्षिप्त नाम के गढ़े हुए विस्तार हैं, जो ऊर्जा योजना में सुनने में ठीक लगने वाले शब्दों से बनाए गए हैं। मिशनों के संक्षिप्त नामों के पूरे रूप ठीक उसी रूप में पूछे जाते हैं जिस रूप में वे अधिसूचित हैं, इसलिए सुरक्षित उपाय है इसके चार मुख्य शब्द याद रखना, अर्थात सामरिक, हस्तक्षेप, हरित हाइड्रोजन और संक्रमण, तथा उस विस्तार को अस्वीकार करना जो हस्तक्षेप के स्थान पर प्रोत्साहन, सब्सिडी या सहायता रखता है।

Q9.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

हाइड्रोजन ईंधन सेल में हाइड्रोजन ऑक्सीजन से मिलकर क्या उत्पन्न करती है?

  1. A.बिजली और जल
  2. B.बिजली और कार्बन डाइऑक्साइड
  3. C.ऊष्मा और नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  4. D.केवल हाइड्रोजन परऑक्साइड
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. बिजली और जल

व्याख्या

सही उत्तर A, बिजली और जल है। ईंधन सेल हाइड्रोजन की रासायनिक ऊर्जा को दहन के बिना सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलता है, इसलिए वह ताप इंजन की दक्षता सीमा से बँधा नहीं होता। एनोड पर हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण होता है, इलेक्ट्रॉन बाहरी परिपथ से धारा के रूप में जाते हैं, और कैथोड पर वे वायु की ऑक्सीजन से मिलकर जल बनाते हैं, साथ ही कुछ ऊष्मा भी निकलती है। विकल्प B गलत है क्योंकि इस अभिक्रिया में कहीं कार्बन नहीं है, और ठीक इसी कारण हाइड्रोजन ईंधन के रूप में आकर्षक है। विकल्प C गलत है क्योंकि नाइट्रोजन के ऑक्साइड तब बनते हैं जब किसी इंजन में वायु उच्च ताप पर जलती है, और ईंधन सेल में न ज्वाला होती है न ऐसा उच्च ताप। विकल्प D गलत है क्योंकि इस सेल का उत्पाद हाइड्रोजन परऑक्साइड नहीं, जल है, और जल भर जाने पर सेल काम करना बंद कर देता है।

Q10.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

हाइड्रोजन को निम्नलिखित में से किस रूप में सबसे ठीक बताया जा सकता है?

  1. A.ऊर्जा का प्राथमिक स्रोत
  2. B.ऊर्जा वाहक
  3. C.जीवाश्म ईंधन
  4. D.नवीकरणीय खनिज
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. ऊर्जा वाहक

व्याख्या

सही उत्तर B, ऊर्जा वाहक है। मुक्त हाइड्रोजन पृथ्वी पर किसी उपयोगी मात्रा में नहीं मिलती, इसलिए उसे ऊर्जा खर्च करके पानी या किसी हाइड्रोकार्बन से बनाना पड़ता है, और फिर वह उस ऊर्जा को भंडारित करके अन्यत्र पहुँचाती है। यही वाहक की परिभाषा है, जैसे बिजली। विकल्प A गलत है क्योंकि प्राथमिक स्रोत वह है जो प्रकृति में मिलता है और जैसा है वैसा प्रयोग होता है, जैसे सूर्य का प्रकाश, पवन, बहता जल, कोयला या यूरेनियम; हाइड्रोजन को पहले बनाना पड़ता है। विकल्प C गलत है क्योंकि जीवाश्म ईंधन भूगर्भीय काल में दबे कार्बनिक पदार्थ से बनता है, और यद्यपि ग्रे हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस से बनती है, हाइड्रोजन स्वयं जीवाश्म ईंधन नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि हाइड्रोजन गैस है, खनिज नहीं, और इस अर्थ में कोई खनिज नवीकरणीय नहीं होता।

Q11.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का मुख्यालय किस देश में है?

  1. A.फ्रांस
  2. B.भारत
  3. C.संयुक्त अरब अमीरात
  4. D.जर्मनी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारत

व्याख्या

सही उत्तर B, भारत है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन भारत और फ्रांस ने 30 नवंबर 2015 को पेरिस जलवायु सम्मेलन में मिलकर आरंभ किया, जिसका उद्देश्य मुख्यतः कर्क और मकर रेखाओं के बीच बसे देशों को एक मंच पर लाना था, और उसका मुख्यालय हरियाणा के गुरुग्राम में ग्वाल पहाड़ी में है। यह भारत में स्थित किसी अंतरराष्ट्रीय अंतर-सरकारी संगठन का पहला मुख्यालय है। विकल्प A गलत है क्योंकि फ्रांस इस गठबंधन का सह-संस्थापक है, उसका मुख्यालय नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि संयुक्त अरब अमीरात अबू धाबी के मसदर नगर में अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा अभिकरण रखता है, जो भिन्न संस्था है और भ्रम का आम कारण है। विकल्प D गलत है क्योंकि जर्मनी बॉन में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना संधि का सचिवालय रखता है, जो फिर एक भिन्न संगठन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरित, नीली और ग्रे हाइड्रोजन में क्या अंतर है?

ग्रे हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस के भाप सुधार से बनती है और उसकी कार्बन डाइऑक्साइड वायु में छोड़ दी जाती है। नीली हाइड्रोजन उसी जीवाश्म मार्ग का प्रयोग करती है किंतु उस कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश पकड़कर भंडारित कर लेती है। हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से पानी के विद्युत अपघटन द्वारा बनती है, इसलिए उसे बनाने में कार्बन डाइऑक्साइड बनती ही नहीं।

विद्युत अपघटक हाइड्रोजन कैसे बनाता है?

पानी से दिष्ट धारा प्रवाहित की जाती है, जिससे वह अपने तत्वों में टूट जाता है; हाइड्रोजन कैथोड पर और ऑक्सीजन एनोड पर मुक्त होती है। क्षारीय, प्रोटॉन विनिमय झिल्ली तथा ठोस ऑक्साइड अपघटक इसके तीन मुख्य प्रकार हैं, और व्यवहार में प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन के लिए लगभग पचास किलोवाट घंटा बिजली और नौ किलोग्राम पानी चाहिए।

भारत का हरित हाइड्रोजन मानक क्या कहता है?

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में इसे अधिसूचित किया, और इसके अनुसार हाइड्रोजन हरित तभी कही जा सकती है जब उसका कुआँ-से-द्वार उत्सर्जन, जिसमें जल उपचार, विद्युत अपघटन, शुद्धीकरण, सुखाना तथा संपीडन गिने जाते हैं, प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन दो किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक न हो, और यह बारह माह के औसत के रूप में लिया जाता है।

हाइड्रोजन को ऊर्जा वाहक क्यों कहा जाता है, स्रोत क्यों नहीं?

क्योंकि मुक्त हाइड्रोजन पृथ्वी पर उपयोगी मात्रा में उपलब्ध नहीं है। उसे ऊर्जा खर्च करके पानी या किसी हाइड्रोकार्बन से बनाना पड़ता है, और फिर वह उस ऊर्जा को अन्यत्र उपयोग के लिए ढोती और भंडारित करती है, जैसा बिजली करती है।

भारत में हरित हाइड्रोजन का पहला उपयोग कहाँ होगा?

उन उद्योगों में जो केवल बिजली पर नहीं चल सकते: उर्वरक और अमोनिया संयंत्र, तेल शोधक कारखाने, लोहे के सीधे अपचयन से इस्पात बनाना, तथा लंबी दूरी का परिवहन और जहाजरानी, जहाँ हाइड्रोजन से बनी हरित अमोनिया और हरित मेथनॉल परंपरागत ईंधन का स्थान ले सकती हैं।

स्रोत

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