कृषि और स्वास्थ्य में जैव प्रौद्योगिकी: नोट्स और प्रश्न
परीक्षा के लिए जैव प्रौद्योगिकी नोट्स: पुनर्योगज डीएनए उपकरण, ऊतक संवर्धन, बीटी कपास, स्वर्ण चावल, इंसुलिन, टीके, जीन चिकित्सा और भारतीय नियामक।
लेखक GK24 Editorial Team· प्रकाशित · 6 मिनट

जैव प्रौद्योगिकी जीवित जीवों अथवा उनके अंगों का उपयोग करके मनुष्य के लिए उपयोगी उत्पाद बनाने या प्रक्रिया चलाने की विद्या है। मदिरा बनाना और दही जमाना इसके पुराने रूप हैं; आधुनिक विषय वहाँ से आरंभ होता है जहाँ किसी जीन को एक जीव से काटकर दूसरे जीव में काम पर लगाया जा सकता है। परीक्षक इस विषय को दो सिरों से पूछते हैं, खेत से और अस्पताल से, और वही गिने चुने तथ्य पूछते हैं कि जीन किस जीव से आया, किस एंजाइम या तकनीक ने स्थानांतरण संभव बनाया और भारत में कौन सी संस्था परिणाम को छोड़ने की अनुमति देती है।
रंगों के अनुसार शाखाएँ
पढ़ाई में यह विषय प्रायः रंगों में बाँटा जाता है। हरी जैव प्रौद्योगिकी कृषि की है, लाल चिकित्सा और औषधि की, श्वेत या धूसर औद्योगिक और नीली समुद्री। उपकरण सभी में एक जैसे हैं।
काम के उपकरण
| उपकरण | कार्य | प्रायः पूछा जाने वाला तथ्य |
|---|---|---|
| प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज | डीएनए को विशिष्ट अनुक्रम पर काटकर चिपचिपे सिरे छोड़ता है | हिंड द्वितीय पहला पहचाना गया प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज था; ईकोआरआई सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है |
| प्लाज्मिड और संवाहक | बाहरी जीन को परपोषी कोशिका तक पहुँचाता है | एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिएंस का टीआई प्लाज्मिड पौधों में प्रयुक्त प्राकृतिक जीन वाहक है |
| लाइगेज | कटे डीएनए खंडों को जोड़ता है | पुनर्योगज डीएनए सबसे पहले स्टेनली कोहेन और हर्बर्ट बॉयर ने बनाया |
| पीसीआर | डीएनए के चुने हुए भाग की लाखों प्रतियाँ बनाता है | कैरी मुलिस का आविष्कार; ताप सहने वाले टैक पॉलिमरेज का उपयोग |
| जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस | विद्युत क्षेत्र में डीएनए खंडों को आकार के अनुसार अलग करता है | छोटे खंड जेल में अधिक दूर तक जाते हैं |
| एलाइजा | रंग अभिक्रिया से प्रतिजन या प्रतिरक्षी की पहचान | लक्षण प्रकट होने से पहले संक्रमण की जाँच में प्रयुक्त |
| डीएनए अंगुलिछापी | डीएनए के पुनरावृत्त अनुक्रमों से व्यक्ति की पहचान | एलेक जेफ्रीज ने विकसित किया; भारत में हैदराबाद का डीएनए अंगुलिछापी एवं निदान केंद्र इस पर कार्य करता है |
| क्रिस्पर और कैस9 | पूरा बाहरी जीन जोड़े बिना चुने स्थान पर जीन का संपादन | इसके लिए 2020 का रसायन नोबेल एमैनुएल शारपेंटिए और जेनिफर डूडना को मिला |
खेत में जैव प्रौद्योगिकी
पादप ऊतक संवर्धन सर्वशक्तिमत्ता पर आधारित है, अर्थात पौधे की एक कोशिका से पूरा पौधा बनने की क्षमता। ऊतक का छोटा टुकड़ा, जिसे कर्तोतक कहते हैं, रोगाणुरहित पोषक माध्यम पर उगाया जाता है, अव्यवस्थित पिंड कैलस बनाता है और फिर पूरे पौधे, इस प्रकार एक जनक से हजारों समान पौधे तैयार होते हैं। यही सूक्ष्म प्रवर्धन है और यह केला, गन्ना, ऑर्किड तथा आलू में प्रयुक्त होता है। विभज्योतक संवर्धन संक्रमित पौधे से भी विषाणुमुक्त रोपण सामग्री देता है, परागकोष संवर्धन प्रजनन के लिए अगुणित पौधे देता है और जीवद्रव्यक संलयन दो प्रजातियों की नग्न कोशिकाओं को जोड़कर कायिक संकर बनाता है, जिसका पाठ्यपुस्तक उदाहरण आलू और टमाटर से बना पोमैटो है।
आनुवंशिक अभियांत्रिकी एक कदम आगे जाकर जीन का स्थानांतरण करती है। बीटी कपास में मिट्टी के जीवाणु बैसिलस थुरिन्जिएंसिस से लिए क्राई जीन होते हैं; उनसे बना प्रोटीन खाने पर हानिरहित रहता है परंतु सुंडी की क्षारीय आँत में सक्रिय विष बन जाता है और उसे मार देता है, इसलिए फसल को कम कीटनाशक चाहिए। 2002 में स्वीकृत बीटी कपास आज भी भारत में व्यापारिक खेती के लिए अनुमत एकमात्र आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसल है; बीटी बैंगन पर 2010 में रोक लगी और आनुवंशिक रूप से रूपांतरित सरसों डीएमएच 11 के पर्यावरणीय निर्मुक्ति की संस्तुति नियामक ने 2022 में की, परंतु वह किसानों तक नहीं पहुँची। विदेश में फ्लेवर सेवर टमाटर बिक्री के लिए अनुमत पहला आनुवंशिक रूप से रूपांतरित खाद्य था और स्वर्ण चावल को दाने में बीटा कैरोटीन बनाने के लिए अभियंत्रित किया गया, जो विटामिन ए का पूर्वगामी है। आरएनए अंतःक्षेप से पौधों को सूत्रकृमि के प्रति प्रतिरोध दिया गया है।
कृषि की सारी जैव प्रौद्योगिकी पारजीनी नहीं होती। जैव उर्वरक जीवित जीवों से मिट्टी को समृद्ध करते हैं। राइजोबियम दलहन की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिरीकरण करता है, एजोटोबैक्टर और एजोस्पिरिलम मिट्टी में स्वतंत्र रहकर यही करते हैं, एजोला फर्न के भीतर रहने वाला नीलहरित शैवाल एनाबीना धान के खेत समृद्ध करता है और कवकमूल कवक जड़ को फॉस्फोरस सोखने में सहायता देते हैं। जैव कीटनाशकों में स्वयं बैसिलस थुरिन्जिएंसिस, मृदा जनित रोगों के विरुद्ध कवक ट्राइकोडर्मा और इल्लियों के विरुद्ध न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस विषाणु आते हैं।
स्वास्थ्य में जैव प्रौद्योगिकी
- ह्यूमुलिन नाम से बिकने वाला पुनर्योगज मानव इंसुलिन रोगियों तक पहुँचने वाला पहला पुनर्योगज चिकित्सीय प्रोटीन था; हार्मोन की दोनों शृंखलाएँ जीवाणुओं में बनाकर जोड़ी जाती हैं, इसलिए इंसुलिन पशु अग्न्याशय से लेने की आवश्यकता नहीं रही।
- हेपेटाइटिस बी का टीका पहला पुनर्योगज टीका था, जो यीस्ट में उगाए विषाणु के सतह प्रोटीन से बनता है, इसलिए उसमें जीवित विषाणु नहीं होता।
- जीन चिकित्सा का पहला प्रयास 1990 में एडिनोसिन डिएमिनेज की कमी वाली एक बालिका पर हुआ, जिसमें कार्यशील जीन की प्रति वाले लसीकाणु रोगी को वापस दिए गए।
- एकल क्लोन से बने मोनोक्लोनल प्रतिरक्षी निदान और उपचार दोनों में प्रयुक्त होते हैं और गर्भ तथा संक्रमण की अनेक जाँच किटों का आधार हैं।
- आण्विक निदान रोग को लक्षणों से पहले पकड़ लेता है, पीसीआर विषाणु या जीवाणु की आनुवंशिक सामग्री खोजता है और जिन विषाणुओं की सामग्री आरएनए है उनके लिए रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पीसीआर प्रयुक्त होती है।
- कायिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण से 1996 में डॉली भेड़ बनी, वयस्क कोशिका से क्लोन किया गया पहला स्तनधारी।
- भारत ने 2021 में कोविड के विरुद्ध मानव उपयोग के लिए अनुमत विश्व का पहला डीएनए प्लाज्मिड टीका विकसित किया और निष्क्रिय टीका कोवैक्सिन एक भारतीय कंपनी ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के साथ बनाया।
भारत में नियमन कौन करता है
जैव प्रौद्योगिकी विभाग 1986 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन बना और देश का अधिकांश अनुसंधान वही वित्तपोषित करता है; 2012 में बनी जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद उद्योग को सहारा देती है। आनुवंशिक रूप से अभियंत्रित जीवों से जुड़ा कार्य पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत 1989 में बने नियमों से शासित होता है। परीक्षा के लिए दो समितियाँ महत्वपूर्ण हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति अनुसंधान और छोटे परीक्षण देखती है, जबकि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति वह शीर्ष संस्था है जो किसी अभियंत्रित जीव को पर्यावरण में छोड़ने की अनुमति देती है। जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुँच जैव विविधता अधिनियम 2002 से शासित होती है, जिसका प्रशासन चेन्नई स्थित राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव सुरक्षा का कार्टाजेना प्रोटोकॉल 2000 और लाभ साझेदारी का नागोया प्रोटोकॉल 2010 जैव विविधता अभिसमय के अंतर्गत आते हैं।
जैव चोरी और पारंपरिक ज्ञान
भारत ने कई मामलों में अपने पारंपरिक ज्ञान पर विदेश में लिए गए पेटेंट का विरोध किया। हल्दी के घाव भरने वाले उपयोग पर अमेरिकी पेटेंट 1997 में निरस्त हुआ, नीम आधारित कवकनाशी पर यूरोपीय पेटेंट 2000 में निरस्त हुआ और बासमती की किस्मों पर दावे को चुनौती दी गई। ऐसे दावों को रोकने के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय बनाया, जो प्रलेखित भारतीय ज्ञान को पेटेंट कार्यालयों के सामने पूर्व ज्ञान के रूप में रखता है।
अलग रखने योग्य शब्द
- पारजीनी जीव, जिसमें किसी अन्य प्रजाति का जीन हो; आनुवंशिक रूप से रूपांतरित जीव इससे व्यापक शब्द है।
- जैव रिएक्टर और अनुप्रवाह संसाधन, वह पात्र जिसमें कोशिकाएँ बड़ी मात्रा में उगाई जाती हैं और उसके बाद की शुद्धिकरण तथा सूत्रण प्रक्रिया।
- जैव संवर्धन, फसल में पोषक तत्व बढ़ाने के लिए प्रजनन या अभियांत्रिकी, जैसे लौह अथवा विटामिन से भरपूर किस्में।
- पादप प्रजनन, जीन सीधे स्थानांतरित करने के बजाय चयन और संकरण से किस्मों का सुधार।
परीक्षा की दृष्टि से
इस विषय के प्रश्न चार खानों में आते हैं। जीन या जीव का स्रोत, बीटी फसलों के लिए बैसिलस थुरिन्जिएंसिस, टीआई प्लाज्मिड संवाहक के लिए एग्रोबैक्टीरियम, हेपेटाइटिस बी के टीके के लिए यीस्ट और टैक पॉलिमरेज के लिए थर्मस। तकनीक और उद्देश्य, पीसीआर से प्रवर्धन, इलेक्ट्रोफोरेसिस से पृथक्करण, एलाइजा से पहचान, ऊतक संवर्धन से बहुगुणन और क्रिस्पर से संपादन। नियामक और उसका कार्य, जिसमें जीईएसी बनाम आरसीजीएम सामान्य जाल है और जीईएसी बनाम राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण कठिन जाल। प्रथम और आविष्कारक, पीसीआर के लिए मुलिस, डीएनए अंगुलिछापी के लिए जेफ्रीज, 1996 में डॉली, 1990 में एडीए कमी के लिए जीन चिकित्सा और क्रिस्पर के लिए 2020 का नोबेल। कथन आधारित प्रश्नों में यह गलत बात डाल दी जाती है कि भारत में अनेक जीएम फसलें व्यापारिक रूप से उगाई जाती हैं, इसलिए बीटी कपास को एकमात्र स्वीकृत फसल के रूप में पकड़े रहें।
महत्वपूर्ण तथ्य
| ऊतक संवर्धन का आधार | पादप कोशिका की सर्वशक्तिमत्ता |
|---|---|
| बीटी जीन का स्रोत | बैसिलस थुरिन्जिएंसिस, एक मृदा जीवाणु |
| भारत में व्यापारिक खेती के लिए अनुमत एकमात्र जीएम फसल | बीटी कपास, 2002 में स्वीकृत |
| स्वर्ण चावल | विटामिन ए के पूर्वगामी बीटा कैरोटीन के लिए अभियंत्रित |
| बिक्री के लिए अनुमत पहला जीएम खाद्य | फ्लेवर सेवर टमाटर |
| पीसीआर | कैरी मुलिस का आविष्कार; टैक पॉलिमरेज का उपयोग |
| पहला पहचाना गया प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज | हिंड द्वितीय |
| पौधों में जीन स्थानांतरण का संवाहक | एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमिफेसिएंस का टीआई प्लाज्मिड |
| पहला पुनर्योगज चिकित्सीय प्रोटीन | मानव इंसुलिन, ह्यूमुलिन नाम से |
| पहला पुनर्योगज टीका | हेपेटाइटिस बी का टीका, यीस्ट में निर्मित |
| पहला क्लोन स्तनधारी | डॉली भेड़, 1996, कायिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण से |
| भारत में जीएमओ निर्मुक्ति का शीर्ष नियामक | आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति, पर्यावरण मंत्रालय के अधीन |
| जैव प्रौद्योगिकी विभाग | 1986 में स्थापित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन |
| राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण | चेन्नई, जैव विविधता अधिनियम 2002 के अंतर्गत |
इस टॉपिक पर अभ्यास MCQ
बीटी कपास में प्रयुक्त बीटी जीन किस जीव से प्राप्त होता है?
- A.एक विषाणु
- B.एक जीवाणु
- C.एक कवक
- D.एक शैवाल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. एक जीवाणु
व्याख्या
सही उत्तर B, एक जीवाणु है। बीटी कपास के क्राई जीन मृदा जीवाणु बैसिलस थुरिन्जिएंसिस से आते हैं, जो बीजाणु बनने के समय क्रिस्टल प्रोटीन बनाता है; यह प्रोटीन खाने पर निष्क्रिय रहता है परंतु सुंडी की क्षारीय आँत में विष बन जाता है, इसी कारण पौधा कीट का प्रतिरोध करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि विषाणु के जीन अन्य उद्देश्यों में प्रयुक्त होते हैं, जैसे विषाणु प्रतिरोध के लिए आवरण प्रोटीन विधि, बीटी के लिए नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि कवक स्वयं जैव कीटनाशक के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जैसे मृदा जनित रोगों के विरुद्ध ट्राइकोडर्मा, परंतु क्राई जीन कवकीय नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि एनाबीना जैसे शैवाल धान के खेतों में जैव उर्वरक का कार्य करते हैं, कीटनाशी जीन का स्रोत नहीं हैं। बीटी के पीछे पूरा नाम बैसिलस थुरिन्जिएंसिस याद रखें।
भारत में व्यापारिक खेती के लिए कौन सी आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसल स्वीकृत है?
- A.बीटी बैंगन
- B.स्वर्ण चावल
- C.बीटी कपास
- D.जीएम सोयाबीन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. बीटी कपास
व्याख्या
सही उत्तर C, बीटी कपास है। 2002 में स्वीकृत यह फसल भारतीय किसानों के लिए व्यापारिक खेती हेतु अनुमत एकमात्र आनुवंशिक रूप से रूपांतरित फसल है और इसे खाद्य के बजाय रेशे के लिए उगाया जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि बीटी बैंगन विकसित और क्षेत्र परीक्षित होने पर भी 2010 में रोक के अंतर्गत रखा गया और उसे छोड़ा नहीं गया। विकल्प B गलत है क्योंकि दाने में बीटा कैरोटीन बनाने के लिए अभियंत्रित स्वर्ण चावल को भारत में खेती की अनुमति कभी नहीं मिली। विकल्प D गलत है क्योंकि जीएम सोयाबीन की खेती यहाँ स्वीकृत नहीं है, हालाँकि आयातित सोयाबीन तेल की अनुमति समय समय पर रही है। कथन आधारित प्रश्न यह दावा करते हैं कि भारत अनेक जीएम खाद्य फसलें उगाता है, जो गलत है; बीटी कपास को एकमात्र स्वीकृत फसल मानें और बैंगन पर लगी रोक याद रखें।
डीएनए के चुने हुए भाग की प्रतियाँ बनाने वाली पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया का आविष्कार किसने किया?
- A.कैरी मुलिस
- B.एलेक जेफ्रीज
- C.हर्बर्ट बॉयर
- D.इयान विल्मट
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कैरी मुलिस
व्याख्या
सही उत्तर A, कैरी मुलिस है। उन्होंने पॉलिमरेज शृंखला अभिक्रिया बनाई, जो गरम और ठंडा करने के बार बार चलने वाले चक्रों तथा ताप सहने वाले टैक पॉलिमरेज की सहायता से डीएनए के चुने हुए भाग की लाखों प्रतियाँ बनाती है, और इसके लिए उन्हें रसायन का नोबेल पुरस्कार मिला। विकल्प B गलत है क्योंकि एलेक जेफ्रीज ने डीएनए अंगुलिछापी विकसित की, जो डीएनए के पुनरावृत्त अनुक्रमों से व्यक्तियों की पहचान करती है। विकल्प C गलत है क्योंकि हर्बर्ट बॉयर ने स्टेनली कोहेन के साथ पहला पुनर्योगज डीएनए अणु बनाया, जो अलग उपलब्धि है। विकल्प D गलत है क्योंकि इयान विल्मट ने रॉजलिन संस्थान के उस दल का नेतृत्व किया जिसने 1996 में कायिक कोशिका केंद्रक स्थानांतरण से डॉली भेड़ का क्लोन बनाया। परीक्षक ये चारों नाम एक साथ रखते हैं, इसलिए प्रत्येक को एक तकनीक से जोड़ें।
स्वर्ण चावल किस पोषक तत्व की कमी दूर करने के लिए विकसित किया गया था?
- A.लोहा
- B.विटामिन ए
- C.आयोडीन
- D.विटामिन डी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विटामिन ए
व्याख्या
सही उत्तर B, विटामिन ए है। स्वर्ण चावल को इस प्रकार अभियंत्रित किया गया कि दाने के खाने योग्य भाग में बीटा कैरोटीन बने, वही पूर्वगामी जिससे शरीर विटामिन ए बनाता है, और उसी वर्णक से चावल का रंग सुनहरा होता है; उद्देश्य मुख्यतः चावल पर निर्भर जनसंख्या में रतौंधी घटाना था। विकल्प A गलत है क्योंकि लोहे की कमी बाजरा और गेहूँ की जैव संवर्धित किस्मों तथा संवर्धित खाद्य से दूर की जाती है, स्वर्ण चावल से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि आयोडीन की कमी आयोडीन युक्त नमक से दूर की जाती है, जो जन स्वास्थ्य का उपाय है और उसमें फसल की अभियांत्रिकी की आवश्यकता नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि विटामिन डी मुख्यतः सूर्य के प्रकाश और संवर्धित दूध से मिलता है। आनुवंशिक अभियांत्रिकी से जैव संवर्धन का मानक उदाहरण स्वर्ण चावल ही है।
भारत में आनुवंशिक रूप से अभियंत्रित जीवों की पर्यावरणीय निर्मुक्ति की स्वीकृति देने वाली शीर्ष संस्था कौन है?
- A.आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति
- B.आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति
- C.राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण
- D.भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति
व्याख्या
सही उत्तर B, आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली यह समिति पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अंतर्गत बने 1989 के नियमों की शीर्ष संस्था है और उसकी अनुमति के बिना कोई अभियंत्रित जीव पर्यावरण में नहीं छोड़ा जा सकता या बड़े पैमाने पर प्रयुक्त नहीं हो सकता। विकल्प A गलत है क्योंकि जैव प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति व्यापारिक निर्मुक्ति के बजाय अनुसंधान और छोटे परीक्षणों पर निगरानी रखती है। विकल्प C गलत है क्योंकि चेन्नई का राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण 2002 के अधिनियम के अंतर्गत जैविक संसाधनों तक पहुँच और लाभ साझेदारी देखता है। विकल्प D गलत है क्योंकि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अनुसंधान करती और परीक्षण समन्वित करती है, जैव सुरक्षा की स्वीकृति नहीं देती। जोड़ी याद रखें, अनुसंधान के लिए आरसीजीएम और निर्मुक्ति के लिए जीईएसी।
वनस्पति विज्ञान की कौन सी शाखा पौधों की उन्नत किस्मों के विकास से संबंधित है?
- A.पादप भ्रूण विज्ञान
- B.पादप प्रजनन
- C.पादप जैव रसायन
- D.पादप शारीरिकी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पादप प्रजनन
व्याख्या
सही उत्तर B, पादप प्रजनन है। पादप प्रजनन वांछित गुणों वाले जनक चुनकर, उनका संकरण करके, संतति में से चयन करके और सर्वोत्तम वंशक्रम का बहुगुणन करके फसलों का सुधार करता है; हरित क्रांति की अधिक उपज वाली गेहूँ और धान की किस्में इसी से आईं और आज प्रजनन को ऊतक संवर्धन तथा मार्कर सहायित चयन के साथ जोड़ा जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि पादप भ्रूण विज्ञान भ्रूण और बीज के विकास का अध्ययन करता है, जो वर्णनात्मक है, सुधार कार्यक्रम नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि पादप जैव रसायन पौधे के भीतर की रासायनिक अभिक्रियाओं, जैसे प्रकाश संश्लेषण और द्वितीयक उपापचयजों का अध्ययन करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि पादप शारीरिकी सूक्ष्मदर्शी से आंतरिक संरचना और ऊतकों का अध्ययन करती है। प्रजनन संबंधित पौधों में पहले से मौजूद जीन से काम करता है, जबकि आनुवंशिक अभियांत्रिकी किसी भी जीव से जीन ला सकती है।
पादप ऊतक संवर्धन पादप कोशिकाओं के किस गुण के कारण संभव है?
- A.सर्वशक्तिमत्ता
- B.परासरण
- C.वाष्पोत्सर्जन
- D.दीप्तिकालिता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. सर्वशक्तिमत्ता
व्याख्या
सही उत्तर A, सर्वशक्तिमत्ता है। पौधे की एक कोशिका में विभाजित होकर प्रत्येक ऊतक में विभेदित होने और इस प्रकार पूरा पौधा बनाने की क्षमता बनी रहती है, इसी कारण रोगाणुरहित पोषक माध्यम पर उगाया गया कर्तोतक पहले कैलस और फिर पूरे पौधे बना सकता है। विकल्प B गलत है क्योंकि परासरण झिल्ली के आर पार जल की गति है और वह जल अवशोषण समझाता है, पुनर्जनन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि वाष्पोत्सर्जन रंध्रों से जलवाष्प की हानि है और उसका संवर्धन से कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि दीप्तिकालिता दिन की लंबाई के प्रति पुष्पन की प्रतिक्रिया है। सर्वशक्तिमत्ता पर आधारित ऊतक संवर्धन से केला, गन्ना और ऑर्किड का सूक्ष्म प्रवर्धन, विभज्योतक संवर्धन से विषाणुमुक्त पौधे और परागकोष संवर्धन से अगुणित पौधे मिलते हैं, जो उपयोग के रूप में पूछे जाते हैं।
दलहनी पौधों की जड़ ग्रंथिकाओं में पाया जाने वाला राइजोबियम किस रूप में प्रयुक्त होता है?
- A.जैव कीटनाशक
- B.जैव उर्वरक
- C.खरपतवारनाशी
- D.वृद्धि हार्मोन
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जैव उर्वरक
व्याख्या
सही उत्तर B, जैव उर्वरक है। राइजोबियम दलहन की जड़ ग्रंथिकाओं में सहजीवी रूप में रहता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधे के उपयोग योग्य रूप में स्थिर करता है, जिससे मिट्टी समृद्ध होती है और नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता घटती है। विकल्प A गलत है क्योंकि जैव कीटनाशक कीटों को मारते या नियंत्रित करते हैं और उनके उदाहरण इल्लियों के विरुद्ध बैसिलस थुरिन्जिएंसिस, मृदा जनित कवकों के विरुद्ध ट्राइकोडर्मा तथा कीट लार्वा के विरुद्ध न्यूक्लियर पॉलीहेड्रोसिस विषाणु हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि खरपतवारनाशी खरपतवार मारता है और राइजोबियम का ऐसा कोई प्रभाव नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि पौधों के वृद्धि हार्मोन ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन हैं, जो रासायनिक पदार्थ हैं, जीवाणु नहीं। अन्य जैव उर्वरक याद रखें, स्वतंत्र नाइट्रोजन स्थिरीकारक एजोटोबैक्टर और एजोस्पिरिलम, धान के लिए एजोला में एनाबीना और फॉस्फोरस के लिए कवकमूल कवक।
रोगियों द्वारा प्रयुक्त पहला पुनर्योगज चिकित्सीय प्रोटीन ह्यूमुलिन क्या है?
- A.हेपेटाइटिस बी का टीका
- B.जीवाणुओं में बना मानव इंसुलिन
- C.भेड़ से प्राप्त वृद्धि हार्मोन
- D.कवक से प्राप्त प्रतिजैविक
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जीवाणुओं में बना मानव इंसुलिन
व्याख्या
सही उत्तर B, जीवाणुओं में बना मानव इंसुलिन है। इस हार्मोन की दोनों पॉलिपेप्टाइड शृंखलाएँ आनुवंशिक रूप से अभियंत्रित जीवाणुओं में बनाई जाती हैं और फिर डाइसल्फाइड बंधों से जोड़ी जाती हैं, जिससे मानव हार्मोन के समान इंसुलिन मिलता है; इससे गाय और सूअर के अग्न्याशय से निकाले इंसुलिन पर निर्भरता तथा उससे होने वाली एलर्जी समाप्त हुई। विकल्प A गलत है क्योंकि हेपेटाइटिस बी का टीका भी पुनर्योगज उत्पाद है, जो यीस्ट में उगाए विषाणु के सतह प्रोटीन से बनता है, परंतु वह टीका है, ह्यूमुलिन नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि चिकित्सा में प्रयुक्त वृद्धि हार्मोन भी आज पुनर्योगज विधि से बनता है, भेड़ से नहीं लिया जाता। विकल्प D गलत है क्योंकि पेनिसिलिन जैसे प्रतिजैविक कवकीय किण्वन से मिलते हैं, जो जैव प्रौद्योगिकी का पुराना रूप है। इंसुलिन लाल जैव प्रौद्योगिकी का मानक उदाहरण है।
भारत में अधिकांश जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान का वित्तपोषण करने वाला जैव प्रौद्योगिकी विभाग किस वर्ष स्थापित हुआ?
- A.1974
- B.1986
- C.1999
- D.2012
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 1986
व्याख्या
सही उत्तर B, 1986 है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग 1986 में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन बनाया गया, जिससे इस विषय को अलग घर मिले, और वह संस्थानों, अध्येतावृत्तियों तथा राष्ट्रीय सुविधाओं को सहारा देता है; आनुवंशिक रूपांतरण समीक्षा समिति भी उसी के अधीन काम करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि 1974 पहले भारतीय परमाणु परीक्षण का वर्ष है और वह परमाणु ऊर्जा से जुड़ा है, जैव प्रौद्योगिकी से नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि 1999 भौगोलिक संकेतक अधिनियम का वर्ष है और इस विभाग से उसका कोई संबंध नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि 2012 में उद्योग तथा स्टार्टअप को सहारा देने के लिए जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद बनी, जिसे अभ्यर्थी मूल विभाग समझ लेते हैं। यह भी ध्यान रखें कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम भी 1986 का है और उसके अंतर्गत जैव सुरक्षा नियम 1989 में आए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पादप प्रजनन और पादप जैव प्रौद्योगिकी में क्या अंतर है?
पादप प्रजनन जनक पौधे चुनकर और उनका संकरण करके फसल सुधारता है, इसलिए उसमें केवल संबंधित पौधों में पहले से मौजूद जीन ही जुड़ते हैं। पादप जैव प्रौद्योगिकी किसी भी जीव का चुना हुआ जीन फसल में डाल सकती है या जीन का संपादन कर सकती है, जो प्रजनन से संभव नहीं।
बीटी कपास कीटों के प्रति प्रतिरोधी क्यों है?
उसमें बैसिलस थुरिन्जिएंसिस के क्राई जीन होते हैं। उनसे बना क्रिस्टल प्रोटीन खाने पर निष्क्रिय रहता है, परंतु सुंडी की क्षारीय आँत उसे सक्रिय विष में बदल देती है, जो आँत की दीवार को क्षति पहुँचाकर कीट को मार देता है, जबकि मनुष्य के लिए वह हानिरहित है।
भारत में कौन सी जीएम फसलें व्यापारिक रूप से उगाई जा सकती हैं?
केवल बीटी कपास, जो 2002 में स्वीकृत हुई। बीटी बैंगन पर 2010 में रोक लगा दी गई और जीएम सरसों डीएमएच 11 की पर्यावरणीय निर्मुक्ति की संस्तुति 2022 में हुई, परंतु उसे व्यापारिक खेती के लिए किसानों को नहीं दिया गया।
जीईएसी क्या करती है?
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन आनुवंशिक अभियांत्रिकी मूल्यांकन समिति वह शीर्ष समिति है जो आनुवंशिक रूप से अभियंत्रित जीवों तथा उत्पादों के बड़े पैमाने पर उपयोग और पर्यावरणीय निर्मुक्ति वाले कार्यों का मूल्यांकन कर अनुमति देती है।
जीन चिकित्सा क्या है?
किसी रोग का उपचार उसके कारण बने दोषपूर्ण जीन को सुधारकर करना, चाहे रोगी की कोशिकाओं में कार्यशील प्रति डालकर या जीन का संपादन करके। पहला प्रयास 1990 में उस बालिका पर हुआ जिसमें एडिनोसिन डिएमिनेज एंजाइम की कमी थी।
जैव उर्वरक क्या हैं, उदाहरण दें।
वे जीवित जीव जो मिट्टी के पोषक तत्व बढ़ाते हैं। राइजोबियम दलहन की जड़ ग्रंथिकाओं में नाइट्रोजन स्थिर करता है, एजोटोबैक्टर और एजोस्पिरिलम मिट्टी में स्वतंत्र रहकर यही करते हैं, एजोला में रहने वाला सायनोबैक्टीरिया एनाबीना धान के खेत समृद्ध करता है और कवकमूल कवक जड़ों को फॉस्फोरस लेने में सहायता देते हैं।
स्रोत
- जीव विज्ञान, कक्षा 12, जैव प्रौद्योगिकी सिद्धांत एवं प्रक्रम अध्याय — एनसीईआरटी
- जीव विज्ञान, कक्षा 12, जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग अध्याय — एनसीईआरटी
- संकटमय सूक्ष्म जीवों तथा आनुवंशिक रूप से अभियंत्रित जीवों या कोशिकाओं के निर्माण, उपयोग, आयात, निर्यात और भंडारण नियम, 1989 — पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय





